प्रदेश
अंजय शुक्ला बनाए गए औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष, आदेश जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर अंजय शुक्ला की नियुक्ति की है। यह नियुक्ति आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगी। इसका आदेश आज वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष सचिव जेपी पाठक ने जारी किया है।
आदेश में उल्लेख किया गया है कि इस नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। राज्य शासन के इस निर्णय को आदिवासी परंपरागत स्वास्थ्य प्रणाली के संरक्षण, स्थानीय ज्ञान के संवर्धन और औषधीय पादपों के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे राज्य में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण एवं अनुसंधान को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली दस ट्रेनें रद्द, 18 ट्रेनें चलेंगी परिवर्तित मार्ग से…
बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर रेल मंडल के गोंदिया स्टेशन में वॉशेबल एप्रन कार्य का हवाला दे रेलवे प्रबंधन ने दस यात्री ट्रेनों को निरस्त किया है, वहीं 18 ट्रेनें इस दौरान परिवर्तित मार्ग से चलेंगी.
रद्द होने वाली गाड़ियां
03 से 22 मई तक टाटानगर से छूटने वाली 18109 टाटानगर-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) एक्सप्रेस नहीं चलेगी.
05 से 24 मई तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) से छूटने वाली 18109 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-टाटानगर एक्सप्रेस नहीं चलेगी.
03 से 22 मई तक डोंगरगढ़ से छूटने वाली 68711 डोंगरगढ़-गोंदिया पैसेंजर नहीं चलेगी.
03 से 22 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 68712 गोंदिया-डोंगरगढ़ पैसेंजर नहीं चलेगी.
03 से 22 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 68713 गोंदिया-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) पैसेंजर नहीं चलेगी.
03 से 22 मई तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) से छूटने वाली 68716 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-गोंदिया पैसेंजर नहीं चलेगी.
03 से 22 मई तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) से छूटने वाली 68714 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-बालाघाट पैसेंजर नहीं चलेगी.
03 से 22 मई तक बालाघाट से छूटने वाली 68715 बालाघाट-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)- पैसेंजर नहीं चलेगी.
03 से 22 मई तक रायपुर से छूटने वाली 58205 रायपुर-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) पैसेंजर नहीं चलेगी.
04 से 23 मई तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) से छूटने वाली 58206 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-रायपुर पैसेंजर नहीं चलेगी.
परिवर्तित मार्ग से चलने वाली गाड़ी
02, 04, 06, 09, 11, 13, 16 एवं 18 मई को रीवा से छूटने वाली 11754 रीवा-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग जबलपुर-नैनपुर-बालाघाट-नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) होकर चलेगी.
03, 05, 07, 10, 12, 14, 17 एवं 19 मई को नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) से छूटने वाली 11753 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-रीवा एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग जबलपुर-नैनपुर-बालाघाट- नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) होकर चलेगी.
बीच में समाप्त होने वाली गाड़ियां
02 से 22 मई तक बरौनी से छूटने वाली 15231 बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस दुर्ग एवं गोंदिया के बीच रद्द रहेगी.
03 से 23 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 15232 गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस गोंदिया एवं दुर्ग के बीच रद्द रहेगी.
02 से 22 मई तक मुंबई से छूटने वाली 12105 मुंबई-गोंदिया एक्सप्रेस अंजनी एवं गोंदिया के बीच रद्द रहेगी.
03 से 23 मई तक बरौनी से छूटने वाली 12106 गोंदिया-मुंबई एक्सप्रेस गोंदिया एवं अंजनी के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक जबलपुर से छूटने वाली 51707 जबलपुर-गोंदिया एक्सप्रेस बिरसोला एवं गोंदिया के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 51708 गोंदिया-जबलपुर एक्सप्रेस गोंदिया एवं बिरसोला के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 68813 गोंदिया-तिरोड़ी मेमू गोंदिया एवं बिरसोला के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक तिरोड़ी से छूटने वाली 68814 तिरोड़ी-गोंदिया मेमू बिरसोला एवं गोंदिया के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 68809 गोंदिया-तिरोड़ी मेमू गोंदिया एवं बिरसोला के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक तिरोड़ी से छूटने वाली 68810 तिरोड़ी-गोंदिया मेमू बिरसोला एवं गोंदिया के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 68811 गोंदिया-कटंगी मेमू गोंदिया एवं बिरसोला के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक कटंगी से छूटने वाली 68812 कटंगी-गोंदिया मेमू बिरसोला एवं गोंदिया के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 78803 गोंदिया-कटंगी डेमू गोंदिया एवं बिरसोला के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक कटंगी से छूटने वाली 78804 कटंगी-गोंदिया डेमू बिरसोला एवं गोंदिया के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 78805 गोंदिया-कटंगी डेमू गोंदिया एवं बिरसोला के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक कटंगी से छूटने वाली 78806 कटंगी-गोंदिया डेमू बिरसोला एवं गोंदिया के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक गोंदिया से छूटने वाली 78809 गोंदिया-कटंगी डेमू गोंदिया एवं बिरसोला के बीच रद्द रहेगी.
03 से 22 मई तक कटंगी से छूटने वाली 78810 कटंगी-गोंदिया डेमू बिरसोला एवं गोंदिया के बीच रद्द रहेगी.
जल संरक्षण को दिनचर्या का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं की रक्षा और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का मुख्यमंत्री ने किया आह्वान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की संयुक्त अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल इस बैठक में वर्चुअली शामिल हुए और बैठक को संबोधित किया। इस दौरान बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिले के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में अभियान के अंतर्गत संचालित कार्यों और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संकट 21वीं सदी की केवल गंभीर पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकासात्मक चुनौती भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है।उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें पानी के उपयोग को प्रसाद के समान मानते हुए जल के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा विभिन्न जिलों को भी अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार मिले। पहले चरण में सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर कार्य करते हुए बड़े पैमाने पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का निर्माण किया गया। श्री साय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में इनमें से 5 ब्लॉकों में भू-जल निकासी में कमी और भू-जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है, जो जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणामों का संकेत है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अभियान के दूसरे चरण “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” के अंतर्गत तकनीक आधारित और अधिक परिणाममूलक रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य सरकार ने 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने इसे जल सुरक्षा की दिशा में प्रदेश का ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर एक विशेष पहल के तहत 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को अपने खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कार्य में जिला प्रशासन के साथ-साथ औद्योगिक समूहों का सहयोग भी लिया जा रहा है। इन डबरियों से भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ किसानों को सिंचाई एवं मछली पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएँ मिलेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे चरण में सभी जल संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायतों के वॉटर बजट तथा जल सुरक्षा योजनाओं के निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही गांवों के युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि अभियान को गति मिल सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों पर विशेष फोकस रखते हुए सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत तथा क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने, जल संरचनाओं की रक्षा करने और जल के प्रति जिम्मेदार सोच अपनाने का आह्वान भी किया।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों और नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गत वर्ष जल संरक्षण के प्रयासों में छत्तीसगढ़ देशभर में दूसरे स्थान पर रहा, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2024 को सूरत से ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की शुरुआत की थी और ‘कर्मभूमि से मातृभूमि के लिए जल संचयन में सहयोग’ का आह्वान किया था। इस अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना है।
केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल ने प्रदेश के समस्त कलेक्टरों से मनरेगा के तहत जल संचय कार्यों के लिए प्राप्त राशि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने राजनांदगांव प्रवास के दौरान एक महिला सरपंच द्वारा स्वयं के प्रयासों से जल संचयन के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने जल संचय में व्यापक जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो तथा जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव कांताराव और छत्तीसगढ़ के समस्त कलेक्टर वर्चुअली उपस्थित थे।
लिमाही में ट्रांसपोर्ट नगर के विरोध में ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, कलेक्टर कार्यालय घेराव
बलौदाबाजार। जिले से लगे ग्राम पंचायत लिमाही में प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को चक्काजाम कर विरोध जताने के बाद शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक दिया। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
ग्राम लिमाही के ग्रामीणों ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर निर्माण को लेकर उन्हें पहले कोई सूचना नहीं दी गई और न ही ग्राम पंचायत से कोई प्रस्ताव पारित कराया गया है। जिस स्थान पर ट्रांसपोर्ट नगर बनाया जा रहा है, वहां तालाब और श्मशान भूमि स्थित है। ग्रामीणों के मुताबिक तालाब का उपयोग महिलाएं नहाने और घरेलू कार्यों के लिए करती हैं, जबकि पास ही श्मशान भूमि है, जहां अंतिम संस्कार किया जाता है।
ट्रांसपोर्ट नगर बनने से क्षेत्र में बढ़ेगी शराब बिक्री
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इन स्थलों को पाटकर ट्रांसपोर्ट नगर बनाया जा रहा है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रांसपोर्ट नगर बनने से क्षेत्र में शराब बिक्री बढ़ेगी और बाहरी वाहन चालकों की आवाजाही से महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कलेक्टर कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों को पुलिस ने गेट पर रोक दिया। केवल पांच प्रतिनिधियों को अंदर जाने की अनुमति दी गई।
जरूरत पड़ने पर न्यायालय की शरण लेंगे ग्रामीण
प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर ट्रांसपोर्ट नगर निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी लेंगे, लेकिन बिना अनुमति ट्रांसपोर्ट नगर बनने नहीं देंगे।
दीपक बैज का दावा: मनरेगा बचाओ रैली में शामिल हो सकते हैं खड़गे और राहुल
रायपुर। कांग्रेस शासनकाल में हुए फरवरी 2023 को हुए कांग्रेस महाधिवेशन में एक साथ छत्तीसगढ़ में मंच साझा करने के बाद अब फिर से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ-साथ आने के आसार बन रहे हैं. छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बताया कि मार्च के दूसरे सप्ताह में छत्तीसगढ़ में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत आयोजित रैली में दोनों नेता शामिल हो सकते हैं.
छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मीडिया से चर्चा में विद्युत नियामक आयोग की सुनवाई पर सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पिछले दो साल में भाजपा सरकार ने बिजली बिल हाफ योजना को बंद कर दिया है. चार बार बिजली की दर बढ़ाई गई. अब विद्युत नियामक आयोग में जनसुनवाई चल रही है, इसका मतलब साफ है कि सरकार बिजली बिल बढ़ाना चाहती है. साथ ही केंद्र ने सेस भी कम कर दिया.
वहीं राज्यसभा की छत्तीसगढ़ सीट को लेकर दीपक बैज ने कहा कि राज्यसभा में कौन जाएगा यह पार्टी तय करेगी. बस्तर से सरगुजा तक कांग्रेस लड़ाई लड़ रही है. पार्टी का अधिकार है किसे नॉमिनेट करना है, अगर हमसे सलाह मांगेंगे तो जरूर देंगे. वहीं सुप्रीम कोर्ट की फ्रीबीज को लेकर की गई टिप्पणी पर बैज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत है. बिहार में चुनाव के समय 10 हजार बांटे गए, असम में भी 10 हजार बांटे जा रहे हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए.
विष्णु सरकार के द्वारा आगामी 24 फ़रवरी को पेश किए जाने वाले बजट को लेकर कहा कि बजट सत्र में कांग्रेस विधायक दल द्वारा सरकार को घेरने की कोशिश होगी. विधानसभा के अंदर भी और बाहर भी लड़ाई जारी रहेगी. वहीं SIR की फाइनल लिस्ट जारी होने के मामले में दीपक बैज ने कहा कि बहुत गड़बड़ी हुई है, चुनाव आयोग का दुरुपयोग किया जा रहा है. बीजेपी के कार्यकर्ता नियमों को ताक पर रख रहे हैं. अब आगे देखना है कि चुनाव आयोग कितना निष्पक्ष है.
छत्तीसगढ़ में हो सकता है कांग्रेस जिलाध्यक्षों का प्रशिक्षण
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने बताया कि छत्तीसगढ़ समेत ओडिशा और झारखंड के 100 से अधिक जिलाध्यक्षों का प्रशिक्षण छत्तीसगढ़ में हो सकता है. प्रशिक्षण के लिए जगह की तलाश की जा रही है. 10 दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में तीनों राज्यों के वरिष्ठ नेता, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल होंगे.
हवाई सेवा से जुड़ेगा अंबिकापुर, मार्च से दिल्ली के लिए नियमित फ्लाइट
अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के लोगों के लिए एक बड़ी और राहतभरी खबर सामने आई है। लंबे समय से हवाई सेवा की प्रतीक्षा कर रहे अंबिकापुर वासियों की मांग अब पूरी होने जा रही है। एलाइंस एयर मार्च महीने से अंबिकापुर से दिल्ली के बीच नियमित फ्लाइट सेवा शुरू करने जा रही है। कंपनी ने इस संबंध में अपना शेड्यूल भी जारी कर दिया है, जिसके अनुसार सप्ताह में दो दिन यह हवाई सेवा संचालित की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, एलाइंस एयर की यह फ्लाइट अंबिकापुर से उड़ान भरकर बिलासपुर होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। इस नई सेवा के शुरू होने से सरगुजा, कोरिया, बलरामपुर, जशपुर समेत पूरे संभाग के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। अब तक लोगों को दिल्ली जाने के लिए सड़क या रेल मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें समय और असुविधा दोनों अधिक थीं।
फ्लाइट सेवा का संचालन मां महामाया दरिमा एयरपोर्ट से किया जाएगा। यह एयरपोर्ट लंबे समय से हवाई सेवा बंद होने के कारण लगभग निष्क्रिय पड़ा हुआ था। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों द्वारा लगातार यहां से नियमित उड़ानें शुरू करने की मांग की जा रही थी। खासतौर पर दिल्ली जैसे प्रमुख महानगर के लिए सीधी हवाई सेवा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
एलाइंस एयर द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, सप्ताह में दो दिन फ्लाइट सेवा उपलब्ध रहेगी। हालांकि अभी उड़ान के सटीक दिन और समय को लेकर विस्तृत जानकारी कंपनी की ओर से जल्द साझा किए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि यात्रियों की प्रतिक्रिया और मांग के आधार पर भविष्य में उड़ानों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।
इस निर्णय को क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हवाई सेवा शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन और निवेश के अवसरों में भी वृद्धि होगी। सरगुजा क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है, ऐसे में बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक समुदाय में इस खबर को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि हवाई सेवा शुरू होने से क्षेत्र की पहचान और पहुंच राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। छात्रों, व्यवसायियों और सरकारी कार्यों के लिए यात्रा करने वालों को विशेष लाभ मिलेगा।
बस्तर में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, 9 दिन में 16 वाहन जब्त
जगदलपुर। बस्तर जिले में अवैध उत्खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए खनिज विभाग के द्वारा अभियान चलाया गया. खनिज विभाग के जांच दल ने पिछले 9 दिनों के भीतर छापेमारी कर अवैध गतिविधियों में संलिप्त 16 वाहनों को जब्त किया है.
खनिज विभाग की कार्रवाई के दौरान रेत, चूना पत्थर और लाल ईंट का अवैध रूप से परिवहन कर रहे ट्रैक्टर, हाइवा और टिप्परों को जब्त किया गया. वाहन ग्राम कंगोली, परपा, बालेंगा, लालबाग और पल्लीनाका जैसे क्षेत्रों से गुजर रहे थे. इसके अलावा मूतनपाल क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन करते हुए एक चेन माउंटेड पोकलेन मशीन को भी जब्त कर पुलिस अभिरक्षा में सौंपा गया है.
अवैध उत्खनन और परिवहन के सभी 16 प्रकरणों में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 के नियम 71 और खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की गई है.
कृषि क्षेत्र के लिए सस्ती बिजली की मांग, राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखे गए कई अहम सुझाव
रायपुर। कृषि क्षेत्र में बिजली दरों को लेकर किसानों की चिंताओं और सुझावों को लेकर आज छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष एक महत्वपूर्ण याचिका प्रस्तुत की गई। यह याचिका भूपेन्द्र शर्मा के साथ पेश की गई, जिसमें कृषि क्षेत्र के लिए विद्युत दरों और संबंधित विषयों पर विस्तृत पक्ष रखा गया।
सेवानिवृत्त IAS अनुराग पांडेय ने बताया, याचिका में कहा गया कि आयोग द्वारा जनसुनवाई के लिए प्रस्तुत सभी प्रस्ताव हिंदी भाषा में भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि आम उपभोक्ता और किसान उन्हें समझकर अपना सुझाव दे सकें। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्र की भागीदारी मजबूत होगी।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले 50 वर्षों में सरकारों द्वारा ग्रामीण और कृषि विद्युत आधारभूत संरचना के विकास के लिए करोड़ों रुपये का अनुदान दिया गया है। इसे केवल कृषि मद में ही शामिल किया जाना चाहिए। इससे इस क्षेत्र की फिक्स्ड कॉस्ट लगभग शून्य हो सकती है और केवल संचालन एवं रखरखाव (O&M) की लागत ही गणना में आएगी, जिससे कृषि बिजली दरों में कमी संभव है। यह भी मांग की गई कि इस अनुदान को उद्योग और वाणिज्य क्षेत्र में विभाजित नहीं किया जाए।
किसानों के लिए Time of the Day Tariff और Solar Hours की सुविधा लागू करने का सुझाव भी दिया गया। याचिका में कहा गया कि दिन के समय जब बिजली एक्सचेंज से बहुत कम दरों पर उपलब्ध होती है तो इसका लाभ किसानों को भी दिया जाना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में यह बताया गया कि पिछले वर्षों में कृषि क्षेत्र की बिजली दरों में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि उद्योग और वाणिज्य क्षेत्र में केवल 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यानी कृषि क्षेत्र में बढ़ोतरी लगभग तीन गुना रही है, जिसे कम करना आवश्यक है। इसके समर्थन में विस्तृत तालिका भी प्रस्तुत की गई।
इसके अलावा किसानों के लिए लागू योजनाओं के तहत 5 हॉर्सपावर तक के पंपों को मिलने वाली छूट को सभी पंपों पर लागू करने की मांग की गई, ताकि किसानों को भी उद्योगों की तरह समान लाभ मिल सके। साथ ही अस्थायी विद्युत कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल बनाने, ट्रांसफॉर्मरों की उपलब्धता और क्षमता बढ़ाने तथा बिजली बकाया वसूली के लिए बैंकिंग प्रणाली की तर्ज पर वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना लागू करने का सुझाव भी दिया गया। आयोग ने सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है
छत्तीसगढ में 5000 पदों पर होगी शिक्षक भर्ती, स्कूल शिक्षा विभाग जल्द जारी करेगा विज्ञापन
रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता एवं सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के कुल 5000 पदों पर भर्ती का विज्ञापन शीघ्र ही जारी किया जा रहा है। शासन ने परीक्षा आयोजन के लिये छत्तीसगढ़ व्यापम को अधिकृत किया है एवं विभाग द्वारा विज्ञापन जारी करने संबंधी सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण कर आवश्यक प्रपत्र व्यापम को उपलब्ध करा दिया गया है। इसके साथ ही सीधी भर्ती 2023 की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ सरकार स्कूल शिक्षा विभाग में 5,000 से अधिक पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया फरवरी 2026 में शुरू करने जा रही है। इन पदों के लिए चयन व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, यह भर्ती राज्य के विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए की जा रही है। शिक्षा विभाग के इस फैसले से राज्य भर के सरकारी स्कूलों में टीचरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। भर्ती प्रक्रिया के बारे में डिटेल्ड गाइडलाइंस आने वाले दिनों में जारी की जाएगी।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के माध्यम से न केवल हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी। खास बात यह है कि इसमें व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक और प्रयोगशाला सहायक जैसे कई पद शामिल किए जा रहे हैं, जिससे अलग-अलग योग्यता वाले उम्मीदवारों को अवसर मिलेगा।
ज्ञातव्य है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक सीधी भर्ती 2023 अंतर्गत सहायक शिक्षक पद के पांचवें चरण की भर्ती प्रक्रिया में माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार सेवा समाप्त किये गये 2621 बी.एड. अर्हताधारियों के स्थापन पर डी.एड. अर्हताधारियों अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर प्रदान किया गया है।
6 माह बाद ग्वालियर से रायपुर रवाना हुई भगवान श्री राम की 51 फीट ऊंची वनवासी स्वरूप प्रतिमा
ग्वालियर। भगवान श्री राम के ननिहाल पक्ष रायपुर स्थित चंद्रखुरी मे लगने भगवान श्री राम की वनवासी स्वरूप वाली 51 फीट ऊंची मूर्ति आखिरकार रवाना हो गई है। मूर्तिकार और ठेकेदार के बीच भुगतान विवाद में उलझी यह मूर्ति बीते 06 महीने से ग्वालियर में तैयार रखी हुई थी।
दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्री रामपथ गमन तैयार कराया जा रहा है,जहाँ भगवान श्री राम के वनवासी स्वरूप की मूर्ति को स्थापित किया जाना है। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देश पर ठेकेदार द्वारा राष्ट्रपति सम्मानित ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा को भगवान श्री राम की 51 फीट ऊंची मूर्ति निर्माण करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद ग्वालियर सेंड स्टोन आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर पर मूर्ति का निर्माण कार्य शुरू हुआ जो पूरा भी हो गया।
श्री रामपथ गमन के लिए चन्द्रखुरी स्थित कौशल्या मंदिर में भगवान श्री राम की वनवासी स्वरुप वाली 51 फीट ऊंची यह प्रतिमा स्थापित की जानी थी। लेकिन बीते 06 महीने से यह प्रतिमा ठेकेदार के भुगतान न करने से यही रखी रही। ऐसे में मूर्ति के रखरखाव और मूर्तिकार की टीम द्वारा मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा से भुगतान की लगातार दबाव बनाया जा रहा था। ऐसे अब ठेकेदार द्वारा लंबित 70 लाख का बचा हुआ भुगतान मूर्तिकार को कर दिया। लिहाजा पूरी सुरक्षा के साथ तैयार मूर्ति को अलग अलग पार्ट में लोड कर रायपुर के लिए रवाना किया गया। ऐसे में अब छत्तीसगढ़ सरकार के श्री रामपथ गमन प्रोजेक्ट में हो रही देरी की सम्भवनाओ को आज पूरी तरह खत्म होने में राहत मिली।
आपको बता दे कि इस प्रतिमा को चंदखुरी में वर्तमान में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा की जगह पर ही स्थापित किया जाना है,वर्तमान में वहाँ स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा का स्ट्रक्चर पूरी तरह से गलत है। उसके निर्माण कार्य में बहुत सारी खामियां सामने आ चुकी है। प्रतिमा के चेहरे से लेकर शरीर के आकार पर गौर किया जाए तो उसमें भगवान श्री राम के वनवासी स्वरूप की छवि ही नहीं आती है। छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा पहले भी दो मूर्तियों के ऑर्डर ग्वालियर को दिए जा चुके हैं जो की श्री राम पथ गमन के लिए शिवरीनारायण और सीता रसोई में स्थापित की जा चुकी है। उन मूर्ति के स्वरूप को देखकर ही ग्वालियर को 51 फीट ऊंची प्रतिमा का आर्डर मिला था,प्रतिमा को ग्वालियर के सेंड मिंट स्टोन से तैयार किया गया है,जो अपने आप में देश के अंदर मजबूत पत्थर के रूप में ख्याति प्राप्त है और इसकी तराशी गई प्रतिमा बहुत मजबूत और सुंदर होती है।
महानाट्य ‘जाणता राजा’ के माध्यम से जीवंत हुई शिवाजी महाराज की गौरवगाथा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन साहस, धैर्य, रणनीति और आदर्श नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है, इसलिए हम सभी को अपने जीवन में शिवाजी जैसा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी अद्भुत साहस और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया। अफजल खाँ के साथ हुई घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी ने संकट को भांपकर धैर्य और रणनीति से निर्णय लिया और विजय प्राप्त की। इसी प्रकार शाइस्ता खान के विरुद्ध उनकी युक्तिपूर्ण रणनीति यह सिखाती है कि बड़े से बड़े शत्रु को भी सूझबूझ और साहस से पराजित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साइंस कॉलेज मैदान पहुंचकर ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ के मंचन के दौरान संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिवाजी महाराज केवल महान योद्धा ही नहीं, बल्कि उच्च आदर्शों वाले शासक भी थे। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों की आस्था का सम्मान किया और महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। माता जीजाबाई के संस्कारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का चरित्र हमें मर्यादा, नैतिकता और सम्मानजनक आचरण का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए महाकवि भूषण की पंक्तियों का उल्लेख किया, जिनमें शिवाजी महाराज के पराक्रम और वीरता का अद्भुत वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी का जीवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।
राजधानी रायपुर में प्रारंभ हुआ ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ का यह विशेष मंचन 22 फरवरी तक प्रतिदिन शाम को साइंस कॉलेज मैदान में प्रस्तुत किया जाएगा। लगभग तीन घंटे की यह भव्य प्रस्तुति छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की गाथा पर आधारित है, जिसमें सजीव दृश्य, विशाल मंच सज्जा और तकनीकी उत्कृष्टता के माध्यम से दर्शकों को ऐतिहासिक काल का जीवंत अनुभव कराया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के तत्वाधान में आयोजित इस महानाट्य के लिए महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में ऑडिशन आयोजित किए गए थे, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के लगभग 40 स्थानीय कलाकारों का चयन किया गया। चयनित कलाकारों ने निर्देशक योगेश शिरोले के मार्गदर्शन में गहन अभ्यास किया। स्थानीय कलाकारों में प्रांजल बक्षी, वर्तिका क्षीरसागर, कृति लाड, आकांक्षा और आस्था काले सहित अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।
मंचन के दौरान घोड़ों के साथ सैनिकों की टुकड़ी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही, वहीं ऊंटों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया। पुणे से आए तकनीकी विशेषज्ञ कौशिक नाईक एवं वैभव जोशी मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पारंपरिक प्रस्तुतियों में कोली गीत सहित विभिन्न सांस्कृतिक आयामों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महानाट्य ‘जाणता राजा’ के अजीत राव आप्टे सहित महाराष्ट्र मंडल के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
वाणिज्य कर विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला, आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त समेत राज्य कर अधिकारी हुए इधर से उधर… देखें लिस्ट
रायपुर। राज्य सरकार ने वाणिज्यकर कर विभाग में बड़े पैमाने पर अधिकारियों, कर्मचारियों का तबादला किया है। जारी आदेश के मुताबिक, आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त समेत राज्य कर अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है।
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खनिज निरीक्षकों को मिली पोस्टिंग, देखिए किसे मिली कहां की जिम्मेदारी…
रायपुर। राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार के परिणाम के आधार पर खनिज साधन विभाग में खनि निरीक्षक पद पर नियुक्ति आदेश जारी कर दिया है। आयोग द्वारा दिनांक 15.10.2025 को जारी चयन सूची के अनुसार मुख्य सूची में अनुशंसित अभ्यर्थियों को वेतन मैट्रिक्स लेवल-7 के अंतर्गत नियुक्त किया गया है। जारी आदेश के मुताबिक सभी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर प्रभावी होगी।
नियुक्ति आदेश में विभिन्न जिलों में पदस्थापना का विवरण भी स्पष्ट किया गया है। चयनित अभ्यर्थियों को जिला कार्यालयों की खनिज शाखाओं तथा संचालनालय स्तर पर तैनात किया गया है। शासन के आदेश के अनुसार नियुक्तियां प्रशासनिक आवश्यकता और विभागीय कार्यों की सुचारू व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए की गई हैं। मुख्य सूची के क्रमांक के अनुसार दुर्गेश कुमार को जिला कार्यालय (खनिज शाखा), जिला-जांजगीर चांपा में पदस्थ किया गया है। आशुतोष मिश्रा को जिला-जशपुर, विकास सिंह राजपूत को जिला-बिलासपुर, तथा मदन साहू को जिला-कोरबा में जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी क्रम में प्रिया सिन्हा को जिला-रायपुर में पदस्थापना दी गई है। विवेक कुमार चंद्राकर को जिला-सारंगढ़ बिलाईगढ़ तथा करण प्रसाद सोनी को जिला-दुर्ग में तैनात किया गया है।
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कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कुलपति की हुई नियुक्ति, राज्यपाल ने जारी किया आदेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं कुलाधिपति रामेन डेका ने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर में कुलपति की नियुक्ति की है। प्रोफेसर मनोज दयाल को KTU के कुलपति बनाए गए हैं। वह वर्तमान में गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी हिसार हरियाणा में मास कम्युनिकेशन विभाग के प्रोफेसर हैं।
जारी आदेश में उल्लेखित है कि छत्तीसगढ़ कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय अधिनियम, 2004 एवं संशोधन अधिनियम 2025 की धारा 11 की उपधारा (1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा Professor Manoj Dayal, Department of Mass Communication, Guru Jambheshwar University of Science and Technology, Hisar (Haryana) को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर का कुलपति नियुक्त किया गया है।
Professor Manoj Dayal का कार्यकाल, उपलब्धियां एवं सेवा शर्ते, उक्त अधिनियम एवं परिनियम में निहित प्रावधान अनुसार होगी।

DMF घोटाला : ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई, आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा गिरफ्तार, कोर्ट ने 6 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) घोटाले मामले में ACB-EOW ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार कर जांच एजेंसी ने कोर्ट में पेश किया। अदालत ने आरोपी को पूछताछ के लिए 6 दिन की (25 फरवरी तक) पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
DMF घोटाले की विवेचना में प्राप्त साक्ष्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर पाया गया कि DMF फंड से संचालित कृषि अनुदान के कार्यों में नियमों का उल्लंघन करते हुए वित्तीय अनियमितताएं की गईं, जिससे शासन को गंभीर आर्थिक क्षति हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सिंडिकेट के साथ मिलकर, जिसमें शासकीय अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारी थे आदि के साथ आपराधिक षड्यंत्र कर कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी की। गिरफ्तार आरोपी ने कई करोड़ की अवैध कमीशन को नगद एवं अपने नातेदारों के बैंक खातों में प्राप्त किया।
जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन, डिजिटल साक्ष्य एवं संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की गई, जिसमें आरोपी की संलिप्तता के पर्याप्त प्रमाण प्राप्त हुए। इसी आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर आज 19 फरवरी को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। ब्यूरो के इस प्रकरण में आरोपी सतपाल छाबड़ा को न्यायालय ने 25 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इस प्रकरण में शामिल अन्य व्यक्तियों एवं संबंधित पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: आबकारी विभाग के पूर्व सहायक आयुक्त नवीन कुमार तोमर गिरफ्तार, 28 फरवरी तक रहेंगे EOW की रिमांड पर
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जांच तेज हो गई है। आबकारी विभाग के पूर्व सहायक आयुक्त (AC) नवीन कुमार तोमर को 27 लाख रुपये के कथित लेन-देन से जुड़े प्रकरण में गिरफ्तार कर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 28 तारीख तक ईओडब्ल्यू रिमांड पर भेज दिया है। रिमांड अवधि में उनसे नेटवर्क, फंड फ्लो और भूमिका को लेकर गहन पूछताछ की जाएगी।
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तोमर के करीबी व्यक्ति को हिरासत में लिया था और प्रारंभिक जांच के बाद मामला आगे की कार्रवाई के लिए EOW को सौंप दिया था।
ईओडब्ल्यू ने जांच के दौरान आवश्यक साक्ष्य एकत्र करने के बाद नवीन कुमार तोमर को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के पश्चात उन्हें ईओडब्ल्यू की विशेष अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद विशेष न्यायालय ने तोमर को 28 तारीख तक ईओडब्ल्यू रिमांड पर भेज दिया है।
अब रिमांड अवधि के दौरान ईओडब्ल्यू की टीम उनसे कथित लेन-देन, नेटवर्क और अन्य संबंधित पहलुओं को लेकर गहन पूछताछ करेगी। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी पूरे मामले की वित्तीय परतें खंगालने में जुटी है और आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और भी खुलासे संभव हैं।
राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे जांच की दिशा और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
जानिए क्या है शराब घोटाला
ED ने ACB में दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का जिक्र किया है। एजेंसी का दावा है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में एक कथित सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया। जांच में जिन नामों का उल्लेख है, उनमें IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित घोटाले को A, B और C — तीन श्रेणियों में अंजाम दिया गया।
A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन वसूली
बताया गया कि 2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपये और बाद के वर्षों में 100 रुपये तक कमीशन लिया जाता था। संचालकों को नुकसान न हो, इसके लिए नए टेंडर में शराब की कीमतें बढ़ाई गईं। साथ ही ओवर बिलिंग की कथित छूट देकर लागत समायोजन का रास्ता बनाया गया।
B: नकली होलोग्राम के जरिए सरकारी दुकानों से बिक्री
जांच में सामने आया कि डिस्टलरी मालिकों से अतिरिक्त शराब बनवाई गई और उस पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री कराई गई। आरोप है कि होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। खाली बोतलों की आपूर्ति और परिवहन की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई।
प्रदेश के 15 जिलों को शराब खपाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। दुकानदारों को कथित तौर पर निर्देश दिया गया कि बिक्री का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में दर्ज न किया जाए। शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपये की एमआरपी रखी गई, जिसे बाद में 3840 रुपये तक बढ़ाया गया।
डिस्टलरी मालिकों को सप्लाई पर शुरुआत में 560 रुपये और बाद में 600 रुपये प्रति पेटी दिए जाने की बात भी सामने आई है। ACB को जांच में 40 लाख पेटी से अधिक शराब की बिक्री के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
C: सप्लाई जोन में हेरफेर से अवैध उगाही
देशी शराब की बिक्री के लिए CSMCL की दुकानों को 8 जोन में विभाजित किया गया। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में सप्लाई जोन का निर्धारण कमीशन के आधार पर किया जाने लगा। एपी त्रिपाठी द्वारा जोन-वार विश्लेषण उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई, ताकि क्षेत्र कम-ज्यादा कर अवैध धन वसूली की जा सके।
EOW की जांच में तीन वित्तीय वर्षों में देशी शराब सप्लाई के नाम पर 52 करोड़ रुपये ‘पार्ट C’ के तौर पर सिंडिकेट को दिए जाने के साक्ष्य मिलने का दावा है।
आगे क्या?
नवीन कुमार तोमर की गिरफ्तारी को जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है। ईओडब्ल्यू रिमांड के दौरान उनसे वित्तीय लेन-देन, कथित सिंडिकेट की कार्यप्रणाली और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर पूछताछ की जाएगी। एजेंसियां मामले की वित्तीय परतों को खंगाल रही हैं। आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित प्रकरण में और भी खुलासे संभव हैं।
मुख्यमंत्री ने नव चयनित खनि निरीक्षकों को प्रदान किया नियुक्ति पत्र, ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करने का दिया संदेश
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित नव नियुक्त खनि निरीक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है और खनिज प्रशासन के प्रभावी संचालन में मैदानी अमले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने नव चयनित खनि निरीक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि युवाओं पर ही देश और प्रदेश का भविष्य निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि खनिज विभाग में नई नियुक्तियों से विभागीय कार्यबल मजबूत होगा तथा खनिज अन्वेषण और खनन गतिविधियों को और गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त खनि निरीक्षक अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन करते हुए खनिज प्रशासन से जुड़े कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, लाइमस्टोन, टिन, डायमंड, गोल्ड और लिथियम सहित विभिन्न खनिज संपदाओं से परिपूर्ण है। खनिज राज्य के राजस्व का प्रमुख स्रोत भी हैं और सरकार खनिज राजस्व में वृद्धि के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने नवनियुक्त अधिकारियों को खनिज राजस्व वृद्धि में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खनि निरीक्षक के रूप में आप सभी के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है। पारदर्शिता, ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करते हुए राज्य के संसाधनों के संरक्षण और सुव्यवस्थित उपयोग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को 33 खनि निरीक्षकों की चयन सूची जारी की गई थी। खनिज साधन विभाग द्वारा 19 फरवरी 2026 को कुल 32 खनि निरीक्षकों की नियुक्ति आदेश जारी किए गए, जिनमें से 30 नव चयनित खनि निरीक्षकों को आज मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, सचिव खनिज साधन विभाग पी. दयानंद, संचालक भौमिकी एवं खनिकर्म रजत बंसल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।