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UMEED पोर्टल पर संपत्तियों की अपलोडिंग के लिए वक्फ ट्रिब्यूनल ने दिया 2 माह का अतिरिक्त समय
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड को UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का विवरण अपलोड करने के लिए दो माह का अतिरिक्त समय मिला है। वक्फ अधिकरण (Waqf Tribunal) रायपुर के आदेश के तहत अब बोर्ड 8 फरवरी 2026 तक सभी मौजूदा संपत्तियों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकेगा। मुतवल्लियों को भी समय पर अपलोडिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
बता दें कि एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास के उद्देश्य से तैयार किए गए UMEED केंद्रीय पोर्टल 2025 में मौजूदा वक्फ संपत्तियों का विवरण अपलोड करने की अंतिम तिथि 6 दिसंबर 2025 थी। समय सीमा समाप्त होने पर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने अधिनियम की धारा 3(ख) के तहत अतिरिक्त समय की मांग करते हुए 8 दिसंबर को वक्फ अधिकरण, रायपुर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया।
आवेदन पर सुनवाई करते हुए वक्फ अधिकरण रायपुर के पीठासीन अधिकारी कमलेश कुमार जुर्री एवं न्यायिक सदस्य हामिद हुसैन ने आदेश जारी करते हुए बोर्ड को 2 माह का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। अब राज्य वक्फ बोर्ड 8 फरवरी 2026 तक अपनी सभी मौजूदा वक्फ संपत्तियों का विवरण UMEED पोर्टल पर अपलोड कर सकेगा।
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज के मार्गदर्शन में और बोर्ड के सदस्यों तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी की निगरानी में, अधिकांश वक्फ संपत्तियों की अपलोडिंग का कार्य अंतिम तिथि तक पूरा कर लिया गया था। हालांकि, कुछ वक्फ संस्थाओं की संपत्ति संबंधी जानकारी अभी भी पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सकी थी।
सभी मुतवल्लियों को दिए गए विशेष निर्देश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
वक्फ अधिकरण के आदेश के पालन में बोर्ड ने प्रदेशभर के उन सभी मुतवल्लियों को विशेष रूप से निर्देशित किया है जिन्होंने अब तक अपनी वक्फ संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड नहीं कराया है। सभी संबंधित मुतवल्लियों को कहा गया है कि वे 8 फरवरी 2026 से पहले हर हाल में अपनी सम्पत्ति का विवरण अपलोड कर दें। आवश्यकता पड़ने पर वे छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के कार्यालय से जानकारी एवं सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयावधि में जानकारी उपलब्ध न कराने पर संबंधित मुतवल्लियों के विरुद्ध वक्फ अधिनियम और नियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
UMEED पोर्टल का उद्देश्य देशभर की वक्फ संपत्तियों का डिजिटल और पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार करना है, जिससे प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित की जा सके। छत्तीसगढ़ में यह प्रक्रिया अब निर्धारित नई समयसीमा के साथ तेज गति से आगे बढ़ने की उम्मीद है।
बूढ़ातालाब का म्यूजिकल फाउंटेन बंद, मेयर की नाराजगी के बाद संचालन एजेंसी को नोटिस जारी, अनुबंध निरस्त और परफॉर्मेंस गारंटी राजसात करने की चेतावनी
रायपुर। रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने कार्यादेश के माध्यम से मेसर्स एमएमआर इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड, जुबली हिल्स हैदराबाद (तेलंगाना) को बूढ़ातालाब (स्वामी विवेकानंद सरोवर) में म्यूजिकल फाउंटेन की प्रदाय और स्थापना (संचालन एवं संधारण सहित) का कार्य सौंपा था। लेकिन हाल ही में किए गए स्थल निरीक्षण में यह पाया गया कि म्यूजिकल फाउंटेन बंद है और संचालित नहीं हो रहा है।
बीते 5 दिसंबर 2025 को रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने बूढ़ातालाब का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान फाउंटेन बंद मिलने पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड की नोटिस में कहा गया है कि अनुबंध की शर्त Employers Requirement (B) Scope of Work के अनुसार म्यूजिकल फाउंटेन का नियमित संचालन एवं संधारण करना एजेंसी की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद फाउंटेन का बंद पाया जाना एजेंसी द्वारा अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को दर्शाता है।
महापौर मीनल चौबे और रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध संचालक सह रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड की मुख्य परिचालन अधिकारी ऋचा चंद्राकर ने अनुबंधित एजेंसी मेसर्स एमएमआर इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड, जुबली हिल्स, हैदराबाद, तेलंगाना को नोटिस जारी कर निर्देशित किया है कि बूढ़ातालाब (स्वामी विवेकानंद सरोवर) में बंद म्यूजिकल फाउंटेन को तत्काल चालू कर सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित करें एवं भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो, इसका विशेष ध्यान रखें। अन्यथा की स्थिति में संबंधित एजेंसी के विरुद्ध अनुबंध की शर्तों के अनुसार अनुबंध निरस्त करने एवं परफॉर्मेंस गारंटी राजसात करने हेतु कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित अनुबंधित एजेंसी की होगी।
मुख्य सचिव ने प्रशासनिक सुस्ती पर कसा शिकंजा, पूंजीगत व्यय में ढिलाई पर बरती सख्ती
रायपुर। राज्य में पूंजीगत व्यय की धीमी रफ्तार और लंबित प्रशासनिक स्वीकृतियों पर मंगलवार को मुख्य सचिव विकासशील ने सभी विभागों की गहन समीक्षा की। बैठक में सामने आया कि कई विभाग बजट जारी होने के बावजूद एक से दो वर्ष तक स्वीकृति प्रक्रियाओं में अटके रहे, जिससे योजनाएं समय पर जमीन पर नहीं उतर सकीं। मुख्य सचिव ने इसे गंभीर प्रशासनिक कमी बताते हुए विभागों से जवाब तलब किया और कहा कि योजनाएं उतनी ही बनें, जिन्हें निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जा सके।
समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकांश प्रश्न सचिवों की बजाय विभागीय डायरेक्टरों और एमडी से पूछे। एसएनए–स्पर्श प्रणाली में ऑनबोर्डिंग और भुगतान की स्थिति कई विभागों में अधूरी पाई गई, जिस पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई। बैठक में कुछ अधिकारियों ने आंकड़ों का हवाला देकर देरी को उचित ठहराने की कोशिश की, लेकिन मुख्य सचिव पूरी तैयारी के साथ बैठक ले रहे थे। ऐसे अफसरों को उन्होंने फटकार लगा दी।
मुख्य सचिव ने समीक्षा के दौरान सीजीएमएससी के निर्माण कार्यों में शामिल होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह संस्था मूल रूप से दवाइयों और स्वास्थ्य उपकरणों की आपूर्ति के लिए गठित की गई थी, इसलिए इंजीनियरिंग विशेषज्ञता की मांग वाले निर्माण कार्यों को संबंधित विभागों को ही दिया जाना चाहिए। इस विषय पर विभागों से विस्तृत मत मांगा गया है।
मुख्य सचिव ने विधानसभा में घोषित योजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई और कहा कि बजट घोषणाओं पर प्राथमिकता के साथ कार्य किया जाए। ई-ऑफिस और ऑनलाइन एसीआर की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देश दिया कि आगामी वर्ष तक सभी जिला कार्यालयों को ई-ऑफिस से जोड़ा जाए और आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली सभी विभागों में सख्ती से लागू की जाए। e-HRMS पोर्टल पर सभी कर्मचारियों के ऑनबोर्डिंग की जिम्मेदारी विभागीय स्थापना शाखाओं को दी गई।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को अपने-अपने विभागों के लिए तीन वर्षों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि योजनाएं व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ सकें। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि 31 दिसंबर तक सभी विभागों को लंबित प्रशासनिक स्वीकृतियां, भुगतान और निर्धारित कार्य प्रगति को हर हाल में पूरा करना होगा। उन्होंने विभागवार टारगेट खुद नोट किए और कहा कि अगले महीने दोबारा समीक्षा होगी, जिसमें केवल वास्तविक प्रगति ही स्वीकार की जाएगी।
राज्य पुलिस सेवा के ट्रेनी डीएसपी को मिली पोस्टिंग, आदेश जारी…
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य पुलिस सेवा के परिवीक्षाधीन उप पुलिस अधीक्षकों (DSP Probationers) को जिला व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए नई पदस्थापना दी है। इस संबंध में गृह विभाग ने आदेश जारी किया है।
जारी आदेश में सुमन जायसवाल, आकाश चौधरी, दानेश्वर प्रसाद साहू, निशांत कुर्रे, अजय कुमार नागवंशी, अमित कोसमा, सुमित चन्द्रा और आस्था शर्मा के नाम शामिल हैं। इन आठों अधिकारियों को 12 माह के प्रशिक्षण के लिए विभिन्न जिलों में भेजा गया है।
देखिये आदेश की कॉपी –

श्री सीमेंट परियोजना की जनसुनवाई स्थगित, भारी विरोध के बाद प्रशासन ने जारी किया आदेश
खैरागढ़। जिले के सण्डी, पण्डरिया, बुंदेली, विचारपुर और छुईंखदान क्षेत्र में प्रस्तावित श्री सीमेंट लिमिटेड की सण्डी लाइमस्टोन ब्लॉक खनन परियोजना को लेकर होने वाली जनसुनवाई को जिला प्रशासन ने आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह सुनवाई 11 दिसंबर को बुंदेली स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के पीछे मैदान में दोपहर 12 बजे से आयोजित की जानी थी। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने जारी आदेश में कहा है कि अपरिहार्य कारणों के चलते सुनवाई फिलहाल नहीं होगी। नई तिथि बाद में घोषित की जाएगी। बता दें कि 40 गांव के किसान लगातार इस प्रस्तावित परियोजना का विरोध कर रहे, जिसके चलते प्रशासन ने यह फैसला लिया है।
परियोजना प्रस्ताव के अनुसार, कुल 404 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिवर्ष 3.64 मिलियन टन चूना पत्थर, 5.128 मिलियन टन अपशिष्ट, 0.0409 मिलियन टन टॉप सॉइल और 0.182 मिलियन टन आरओएम रिजेक्ट्स के उत्खनन की योजना है। साथ ही 1200 TPH की प्राइमरी क्रशर और 400 TPH की सेकेंडरी क्रशर लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है। जनसुनवाई की अध्यक्षता अपर कलेक्टर सुरेन्द्र कुमार ठाकुर द्वारा की जानी थी।

40 से ज्यादा गांव के किसान कर रहे विरोध
जनसुनवाई स्थगित होने का यह निर्णय उस समय लिया गया है, जब पिछले कुछ दिनों से छुईखदान–सण्डी क्षेत्र में परियोजना को लेकर माहौल लगातार गर्म है। 40 से ज्यादा गांवों के किसान इस खनन परियोजना के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि खेती योग्य जमीन, पेयजल स्रोत और पर्यावरण पर इस प्रोजेक्ट का भारी असर पड़ेगा। पिछले सप्ताह शांतिपूर्ण रैली के दौरान छुईखदान एसडीएम कार्यालय के बाहर अचानक तनाव बढ़ गया था। भीड़ में घुसे कुछ उपद्रवियों ने बैरिकेड तोड़ दिया था, जिससे स्थिति बिगड़ी और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। इस घटना के बाद से क्षेत्र में आंदोलन और प्रशासन की सतर्कता दोनों बढ़ गई है।
किसानों ने स्थगित जनसुनवाई को बताया आंशिक जीत
किसान नेताओं का आरोप है कि उनकी उपजाऊ जमीन और गांवों के भविष्य पर खतरे के बावजूद कंपनी गुमराह करने वाली जानकारी फैला रही है। वहीं श्री सीमेंट कंपनी का कहना है कि कुछ लोग विरोध भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और परियोजना से होने वाले विकास, रोजगार और सुविधाओं की बात ग्रामीणों तक सही तरीके से नहीं पहुंच रही। कलेक्टर ने भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि संवाद और जनसुनवाई ही समाधान का मंच है, जहां ग्रामीण खुले तौर पर अपनी आपत्तियां रख सकते हैं, लेकिन अब जब जनसुनवाई स्थगित कर दी गई है, किसानों ने इसे अपनी “आंशिक जीत” बताया है। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि स्थगन सिर्फ पहला कदम है। परियोजना पूरी तरह वापस लिए जाने तक विरोध जारी रहेगा। दूसरी ओर कंपनी और प्रशासन नई तिथि घोषित होने तक स्थिति शांत रखने की कोशिश में है।
जनसुनवाई स्थगित होने से कम हुआ तनाव
परियोजना को लेकर खनन, पर्यावरण, खेती और विकास की इस बहस में अब अगला कदम प्रशासन की ओर से घोषित होने वाली नई तिथि तय करेगी। फिलहाल जनसुनवाई स्थगित होने के बाद क्षेत्र में तनाव थोड़ा कम जरूर हुआ है, लेकिन विवाद अभी भी जस का तस खड़ा है।
छत्तीसगढ़ की गौरवशाली धातुकला को राष्ट्रीय पहचान: ढोकरा–बेलमेटल शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल को मिला राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार, मुख्यमंत्री ने दी बधाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धातुकला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की प्रसिद्ध ढोकरा–बेलमेटल शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल को आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सम्मान केवल हीराबाई झरेका बघेल का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के हर शिल्पकार का सम्मान है। हमारा राज्य अपनी कला, संस्कृति और हस्तशिल्प पर गर्व करता है। राज्य सरकार कला-संरक्षण, प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और बाजार विस्तार के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है, ताकि ग्रामीण व वनवासी क्षेत्रों की प्रतिभाएं लाभान्वित हों और विश्व मंच पर अपनी पहचान बना सकें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायत बैगीनडीह जैसे वनांचल क्षेत्र से निकलकर अपनी विशिष्ट शिल्पकला के माध्यम से देशभर में छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊँचाइयाँ देने वाली श्रीमती बघेल की उपलब्धि हमारे प्रदेश की समृद्ध लोककला, परंपरा और ग्रामीण प्रतिभा की अद्भुत चमक को राष्ट्रीय मंच पर पुनर्स्थापित करती है। ढोकरा कला सदियों पुरानी धरोहर है, और श्रीमती बघेल जैसी शिल्प कलाकार इन परंपराओं को आधुनिक समय के अनुरूप जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही हैं।
सोनिया गांधी वोटर आईडी विवाद पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का तीखा प्रहार ‘दूध का दूध, पानी का पानी होना चाहिए’
नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर लोकसभा सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने आज एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा कि मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था के स्वास्थ्य और पारदर्शिता के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से न केवल मतदाता लाभान्वित होते हैं, बल्कि राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को भी इससे निष्पक्ष एवं विश्वसनीय वातावरण प्राप्त होता है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि, मतदाता सूची का शुद्धीकरण लोकतंत्र का पवित्रीकरण है। जब मतदाता सूची सही होती है तभी जनादेश की पवित्रता सुरक्षित रहती है। हम सबको, चाहे मतदाता हों, राजनीतिक दल हों अथवा उम्मीदवार—इस प्रक्रिया को सकारात्मक रूप से सहयोग देना चाहिए।
इस मौके पर सांसद अग्रवाल ने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी कई बार जनता के जनादेश को स्वीकार करने में हिचक दिखाती रही है। “कांग्रेस अपनी लगातार हो रही पराजयों को समझने के बजाय अनावश्यक आपत्तियाँ और भ्रम फैलाने में लगी रहती है। लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है, और उसके निर्णय का सम्मान प्रत्येक दल को करना चाहिए।
सोनिया गांधी को समन जारी होने पर प्रतिक्रिया
दिल्ली की अदालत द्वारा सोनिया गांधी को उनके वोटर आईडी कार्ड मामले में समन जारी किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद अग्रवाल ने कहा कि यह मामला लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा में रहा है और अब न्यायालय के हस्तक्षेप से सत्य सामने आने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि, देश में यह शंका वर्षों से उठाई जाती रही है कि क्या सोनिया गांधी का वोटर आईडी कार्ड विधिसम्मत रूप से बना था। अब जबकि अदालत ने समन जारी किया है, पूरी जांच से सब साफ हो जाएगा—दूध का दूध और पानी का पानी। हम न्यायपालिका की प्रक्रिया पर पूर्ण विश्वास रखते हैं।”
सांसद अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार चुनावी सुधारों पर गंभीरता से काम कर रही है और सभी दलों से सकारात्मक सुझावों का स्वागत करती है। “हम किसी भी प्रकार के सार्थक चुनाव सुधार के पक्ष में हैं। यदि विपक्ष कोई अच्छा सुझाव देता है, तो सरकार उस पर भी विचार करने के लिए तैयार है।
सांसद अग्रवाल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती सत्य, पारदर्शिता और नागरिकों के विश्वास पर टिकी है, और प्रत्येक कदम जो व्यवस्था को अधिक स्वच्छ और निष्पक्ष बनाता है, उसे सभी वर्गों को समर्थन देना चाहिए।
जेल में आदिवासी नेता की संदिग्ध मौत का मामला : कांकेर पहुंची कांग्रेस की जांच टीम, भूपेश बघेल ने भाजपा नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप
कांकेर। आदिवासी समाज के पूर्व जिलाध्यक्ष और कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की जेल में संदिग्ध मौत को लेकर बवाल बढ़ता जा रहा है। 6 दिसंबर को 5 घंटे चक्काजाम के बाद आज आदिवासी समाज और कांग्रेस पार्टी ने संयुक्त रूप से बस्तर बंद का ऐलान किया था, कई जिलों में बंद सफल रहा। दूसरी ओर कांग्रेस की जांच टीम भी आज जीवन ठाकुर के गांव मयाना पहुंची और परिजनों से बातचीत की। वहीं पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी मयाना पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान बघेल ने प्रदेश सरकार और भाजपा नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए।
भूपेश बघेल ने कहा कि यह तबियत बिगड़ने से मौत नहीं बल्कि हत्या है। जीवन ठाकुर को पहले षड्यंत्र के तहत झूठे मामले में फंसाया गया और फिर जेल में ठीक तरह से खाने पीने तक नहीं दिया गया। साथ ही उनकी तबियत बिगड़ने के बाद इलाज में भी लापरवाही जानबूझ कर की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के इशारे पर जेल में जीवन ठाकुर को प्रताड़ित किया गया। भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने भी जेल प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जेल में ले जाने के पहले मेडिकल जांच की जाती है। उस दौरान क्या जीवन ठाकुर की बीमारी के बारे में जेल प्रशासन को पता नहीं चला। अगर पता था तो उनके इलाज में लापरवाही आखिर क्यों की गई, इसका जवाब देना होगा।

दोषियों पर कार्रवाई की मांग
बता दें कि जीवन ठाकुर की 4 दिसंबर को जेल में तबियत बिगड़ने से मौत हुई थी। परिजनों के अनुसार जेल प्रशासन ने उन्हें बिना अवगत करवाए जीवन ठाकुर को कांकेर जेल से रायपुर शिफ्ट कर दिया था और उनकी मौत के कई घंटे बाद तक परिजनों को सूचना नहीं दी गई थी और न ही तबियत बिगड़ने के दौरान किसी तरह की सूचना दी गई थी। मामले को तूल पकड़ता देख शासन ने भी 6 दिसंबर को ही कांकेर जेल की जेलर को हटा दिया था, लेकिन आदिवासी समाज, कांग्रेस पार्टी और जीवन ठाकुर के परिजन दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी क्रम में आज बस्तर बंद का ऐलान किया गया था। बस्तर के कई जिलों में बंद सफल रहा, जबकि कांकेर में इसका मिला-जुला असर रहा।
जानिए क्या है मामला
बता दें कि जमीन विवाद के मामले में 12 अक्टूबर 2025 को कांग्रेस नेता और चारामा के पूर्व जनपद अध्यक्ष जीवन ठाकुर को गिरफ्तार कर कांकेर जेल में रखा गया था। उन्हें 2 दिसंबर को बिना सूचना के रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था। जेल प्रशासन के अनुसार, इसी बीच उनकी तबीयत खराब होने से तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 4 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। वहीं अब मामले में परिजनों ने जेल प्रशासन पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें कोई बीमारी नहीं थी। सही समय पर इलाज होता तो उनकी जान बच जाती।
रायपुर रेंज के आरक्षक भर्ती का परिणाम घोषित
रायपुर। जिला पुलिस बल आरक्षक संवर्ग भर्ती वर्ष 2023-24 के तहत रायपुर रेंज में हुई भर्ती प्रक्रिया पूरी हो गई है। पुलिस विभाग ने दस्तावेज सत्यापन, शारीरिक माप, शारीरिक दक्षता परीक्षा और लिखित परीक्षा के अंकों के आधार पर अंतिम चयन और प्रतीक्षा सूची जारी कर दी है। इसमें जीडी, चालक और ट्रेड टेलर सहित कुल 560 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन किया गया है।
चार चरणों में हुई भर्ती प्रक्रिया
- 16 नवंबर 2024 से 17 जनवरी 2025 तक दस्तावेज़ परीक्षण, शारीरिक मापतौल और पीईटी का आयोजन।
- 14 सितंबर 2025 को व्यापम द्वारा लिखित परीक्षा।
- लिखित परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद।
- अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत बोनस प्रमाण पत्र के आधार पर बोनस अंक जोड़कर अंतिम प्रवीण्यता सूची तैयार की गई।
कुल 560 चयनित पदों का विवरण
- आरक्षक (जी.डी.)
विज्ञापित पद: 554
चयनित: 554
जनरल – 361
ओबीसी – 77
अनुसूचित जाति – 94
अनुसूचित जनजाति – 22
- आरक्षक (चालक)
विज्ञापित पद: 4
चयनित: 3
ओबीसी – 3
एसटी – 0
नोट: अनुसूचित जनजाति वर्ग से योग्य उम्मीदवार न मिलने के कारण 1 पद रिक्त रहा।
- आरक्षक (ट्रेड टेलर)
विज्ञापित पद: 3
चयनित: 3
जनरल – 1
ओबीसी – 1
अनुसूचित जाति – 1
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ला के स्वास्थ्य लाभ की कामना की
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज शाम राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पहुँचे और वहां उपचाररत भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ला से मुलाकात कर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी सृजनशीलता, संवेदना और सरल भाषा में गहन अनुभूतियों की अभिव्यक्ति देश और प्रदेश—दोनों को गौरवान्वित करती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा एवं छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा उपस्थित थे।
“लोकसभा में गूंजा सहकारिता का मुद्दा, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रखा देशभर की सहकारी व्यवस्था के सुधार का व्यापक खाका”
नई दिल्ली/रायपुर। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने मंगलवार को लोकसभा में एक बार फिर अपनी दूरदृष्टि, जमीनी समझ और रचनात्मक नेतृत्व का परिचय देते हुए छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश की सहकारिता व्यवस्था से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को बेबाकी से सदन के समक्ष रखा।
सांसद बृजमोहन के सवाल पर केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। जिसमें बताया गया कि, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के साथ-साथ कोऑपरेटिव सेक्टर में 'अंडर डेवलप्ड' राज्य के तौर पर कैटेगरी में होने के बावजूद, छत्तीसगढ़ पर काफी ध्यान दिया गया है। अकेले फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में, NCDC ने राज्य को लगभग ₹28,082 करोड़ दिए, जिसका मकसद क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना था।
छत्तीसगढ़ में 11,800 कोऑपरेटिव सोसाइटी है, जिनमें से 10.236 चालू हालत में हैं। यह हाई फंक्शनैलिटी रेट एक मजबूत जमीनी नेटवर्क का संकेत देता है जो केंद्र सरकार की फंडिंग को इस्तेमाल करने के लिए तैयार है।
अग्रवाल ने खास तौर पर मंत्रालय से क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने और ट्रेनिंग के जरिए आदिवासी इलाकों को जोड़ने के उपायों पर जोर दिया था। जवाब में, अमित शाह ने बताया कि CSISAC योजना के तहत, राज्यों को सख्ती से कैटेगरी में बांटा गया है ताकि फंडिंग वहीं दी जाए जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इसके अलावा, सामाजिक समावेश सुनिश्चित करने के लिए, मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2023 अब मल्टी-स्टेट सोसाइटीज के बोर्ड में SC/ST के लिए एक सीट और महिलाओं के लिए दो सीटों का रिजर्वेशन अनिवार्य करता है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आदिवासी इलाकों में टारगेटेड एग्जीक्यूशन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि, "सहकारी क्षेत्र सिर्फ अर्थव्यवस्था के बारे में नहीं है, यह बस्तर और सरगुजा में हमारे आदिवासी भाइयों की जीवनरेखा है। मैं छत्तीसगढ़ के लिए केंद्र द्वारा ₹28,000 करोड़ से ज्यादा के बड़े आवंटन का स्वागत करता हूं। लेकिन मेरा ध्यान इस बात पर है कि यह पूंजी हमारे वनवासियों के लिए ट्रेनिंग और सांस्कृतिक बदलाव में बदले, ताकि वे सिर्फ़ लाभार्थी नहीं, बल्कि इस आंदोलन में नेता बनें।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NCDC) ने अहम भूमिका निभाई है, और मार्च 2025 तक सबसे कम विकसित (LD) और अधिकसित (UD) राज्यों को कुल मिलाकर ₹2.85,815 करोड़ रुपये बांटे हैं।
बस्तर रेंज में आरक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी, 1,592 पदों पर चयन सूची जारी; 464 महिला अभ्यर्थी सफल
जगदलपुर। बस्तर रेंज में आरक्षक भर्ती प्रक्रिया 2023-24 का परिणाम आज जारी कर दिया गया है। बस्तर रेंज आईजी द्वारा अनुमोदित चयन और प्रतीक्षा सूची के अनुसार कुल 1,592 आरक्षकों का चयन किया गया है। इसमें 464 महिला अभ्यर्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलतापूर्वक चयन प्राप्त किया है, जो बस्तर रेंज में महिला भागीदारी को सशक्त रूप से दर्शाता है।
दो केंद्रों में हुई संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया
छत्तीसगढ़ शासन की मंजूरी के बाद पुलिस मुख्यालय रायपुर द्वारा 04 अक्टूबर 2023 को भर्ती विज्ञापन जारी किया गया था। बस्तर रेंज में भर्ती के लिए दो समितियों का गठन किया गया था।
केंद्र-1, जगदलपुर: सुकमा, बीजापुर, बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों के लिए, अध्यक्ष – पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा
केंद्र-2, कोंडागांव: नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर जिलों के लिए, अध्यक्ष – पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा
ऐसे हुई परीक्षा और चयन प्रक्रिया
दस्तावेज़ सत्यापन, शारीरिक नाप-जोख और शारीरिक दक्षता परीक्षा 16 नवंबर 2024 से 18 जनवरी 2025 तक कंगोली (जगदलपुर) और पुलिस लाइन कोंडागांव में आयोजित हुई।
योग्य पाए गए उम्मीदवारों की लिखित परीक्षा 14 सितंबर 2025 को व्यावसायिक परीक्षा मंडल रायपुर द्वारा ली गई।
आरक्षक (चालक) और ट्रेड आरक्षक पदों के लिए ट्रेड टेस्ट 17 से 19 नवंबर 2025 तक आयोजित किया गया।
बस्तर रेंज में जिलेवार चयन
बस्तर रेंज के सभी सात जिलों में आरक्षक भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद स्वीकृत 1592 आरक्षक पदों के विरुद्ध परिणाम घोषित किए गए हैं। इनमें –
नारायणपुर – 470
बीजापुर – 337
बस्तर – 334
सुकमा – 128
कांकेर – 125
कोंडागांव – 103
दंतेवाड़ा – 55
इसके साथ ही मोटर वाहन चालक और अन्य ट्रेड आरक्षक के 91 पदों पर भी चयन किया गया है।
जनसेवा और पुलिसिंग को मिलेगी मजबूती – बस्तर IG
पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज (आईजी) सुंदरराज पट्टीलिंगम ने कहा कि यह भर्ती प्रक्रिया छत्तीसगढ़ शासन और पुलिस मुख्यालय की जन-केंद्रित बुनियादी पुलिसिंग की प्राथमिकताओं को और अधिक सशक्त बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नव-नियुक्त आरक्षकों की नियुक्ति से बस्तर रेंज के सभी सातों जिलों में जन-सेवा उन्मुख और पेशेवर पुलिसिंग को मजबूती मिलेगी, जिससे जनता की अपेक्षानुसार क्षेत्र में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति और अधिक प्रभावी होगी।
मुख्यमंत्री साय से क्रेडाई और रियल एस्टेट के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से उनके निवास कार्यालय में क्रेडाई,रियल एस्टेट और बस्तर चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज जगदलपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।
उल्लेखनीय है कि राज्य में 20 नवंबर 2025 से लागू नई गाइडलाइन दरों के संबंध में प्राप्त सुझावों, ज्ञापनों और आपत्तियों पर विचार करने हेतु मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक कल 07 दिसंबर 2025 को आयोजित की गई थी। बैठक में पंजीयन एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से कई व्यापक निर्णय लिए गए, जो 08 दिसंबर से तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। प्रतिनिधि मंडल ने सरकार द्वारा लिए गए उक्त महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुख्यमंत्री श्री साय का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी, वन मंत्री केदार कश्यप, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन और विधायक किरण देव उपस्थित थे।
मेडिकल PG कोटा: आरक्षण घटाए जाने से नाराज JDA ने की नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मे़डिकल कॉलेजों में PG कोटा को लेकर जारी ताजा आदेश से विवाद खड़ा हो गया है. नए आदेश से नाराज जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंंत से मुलाकात कर समस्याएं बताई. डॉ. महंत ने समस्याओं को समझते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर छात्रहित में आदेश वापस लेने का आग्रह किया है.
दरअसल, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक दिसंबर से पीजी सीटों की संरचना में बदलाव किया है. संशोधित नीति के तहत, राज्य के लिए आरक्षित 50 प्रतिशत सीटों में से 25 प्रतिशत सीटों को ओपन मेरिट कोटे में रखा गया है. एसोसिएशन से जुड़े छात्रों का कहना है कि नया नियम बाहरी राज्यों से पढ़े उम्मीदवारों को भी ओपन मेरिट के माध्यम से समान रूप से प्रतिस्पर्धा का अवसर देता है. इससे राज्य के मेडिकल ग्रेजुएट्स को नुकसान होगा.

छात्रों से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत मुख्यमंत्री साय को लिखे पत्र में कहा कि छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेज में छत्तीसगढ़ के छात्रों को महज 25 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया है. जो पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम है. इसके साथ मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छात्रहित में निर्णय की अपेक्षा व विश्वास करते हुए आग्रह किया है कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए 50% सीट आरक्षित करें.
इंडिगो एयरलाइंस को छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने भेजा लीगल नोटिस
रायपुर। देशभर में इंडिगो एयरलाइंस की बड़ी संख्या में उड़ाने कैंसिल और लेट होने से यात्री हलाकान हो रहे हैं. चार दिनों में लगभग 3450 से अधिक उड़ाने अचनाक रद्द की गईं. इस बीच छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए एयरलाइन प्रबंधन को लीगल नोटिस जारी किया है. उन्होंने केंद्र सरकार से इंडिगो कंपनी पर 9 हजार करोड़ रुपए के जुर्माने की मांग की है.
सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने यह नोटिस इंडिगो एयरलाइंस के प्रबंध निदेशक / मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नोटिस में कहा कि यह कदम न केवल यात्रियों के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय कानूनों और नागरिक उड्डयन नियमों की भी खुली अवहेलना है.
नोटिस में कहा गया है कि इंडिगो एयरलाइंस ने बिना किसी पूर्व सूचना और बिना पारदर्शी कारण बताए अत्यंत मनमाने ढंग से हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाओं को बाधित किया. यात्रियों को भारी आर्थिक नुकसान, मानसिक कष्ट और समय की हानि का सामना करना पड़ा है. प्रभावित लोगों में वरिष्ठ नागरिक, बच्चे, महिलाएं, रोगी तथा व्यवसायी बड़ी संख्या में शामिल हैं, जिनके लिए अचानक रद्दीकरण किसी आपदा से कम नहीं साबित हुआ.
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने अपने नोटिस में स्पष्ट कहा है कि इंडिगो का यह कृत्य भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, विमानन नियम तथा DGCA द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन है. सोसायटी ने इसे ‘घोर अनुबंधभंग’ (Breach of Contract) और ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) का स्पष्ट मामला बताया है.
उड़ाने रद्द करने का वास्तविक कारण सार्वजनिक करने कहा
नोटिस में इंडिगो एयरलाइंस को आदेशित किया गया है कि वह प्रत्येक प्रभावित यात्री को उसके टिकट मूल्य का कम से कम दस गुना मुआवजा और होटल, वैकल्पिक यात्रा, चिकित्सा खर्च जैसे सभी प्रत्यक्ष नुकसान की पूर्ण प्रतिपूर्ति पांच कार्य दिवसों के भीतर सुनिश्चित करें. साथ ही कंपनी को इस बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करने के वास्तविक और पारदर्शी कारणों का सार्वजनिक विवरण जारी करने को भी कहा गया है.
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने आगे बताया है कि पीड़ित यात्रियों की ओर से इस मामले में माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को विस्तृत शिकायत भेजी जा चुकी है. इस शिकायत में DGCA द्वारा विशेष जांच, इंडिगो एयरलाइन पर 9000 करोड़ रुपए (1 बिलियन डॉलर) का जुर्माना लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नए कानून बनाने की मांग की गई है.

नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि एयरलाइन ने निर्धारित समय सीमा में मुआवजा और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की, तो सोसायटी प्रभावित यात्रियों के साथ मिलकर निम्न कानूनी कार्रवाइयां शुरू करेगी—
• राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में सामूहिक मुकदमा.
• संबंधित दीवानी न्यायालयों में अनुबंधभंग और हानि की कार्रवाई.
• DGCA व अन्य प्राधिकरणों के समक्ष आपराधिक शिकायत दर्ज कराना.
सोसायटी ने यह भी कहा है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं में आने वाले खर्च, हर्जाने और शुल्क का दायित्व पूरी तरह इंडिगो एयरलाइन पर रहेगा, क्योंकि यह संकट उसकी मनमानी और गैर-जिम्मेदाराना नीतियों का परिणाम है. इंडिगो प्रबंधन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने की अपील की है. अन्यथा संस्था सक्षम न्यायालयों और प्राधिकरणों में सिविल, आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के लिए बाध्य होगी.
जेल में कांग्रेस नेता की संदिग्ध मौत पर बंद रहा बस्तर संभाग, शहरों में नहीं खुली दुकानें, सड़कों पर सन्नाटा
जगदलपुर। रायपुर सेंट्रल जेल में कांकेर जिले के कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत को लेकर बस्तर में बवाल मचा हुआ है। दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने आज बस्तर बंद का ऐलान किया था, जिसका असर सुबह से ही पूरे संभाग में देखने को मिला। शहरों में सभी दुकानें बंद रही। जगदलपुर, सुकमा, कांकेर, भानुप्रतापपुर में सर्व आदिवासी समाज के आह्वान का बड़ा असर दिखा। नगर की सभी दुकानें बंद है। जगदलपुर में सर्व आदिवासी समाज ने नगर बंद कराने के लिए बाइक रैली निकाली।
बस्तर बंद का कांग्रेस ने समर्थन किया है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, कांकेर में जीवन ठाकुर की प्रताड़ना से बेवजह मौत हुई। समय पर उनका इलाज नहीं हुआ। जानबूझ कर जेल प्रशासन और प्रशासन ने उनकी हत्या की। राजनीतिक हत्या की गई है। आदिवासी समाज ने बस्तर के सातों जिलों में बंद का आव्हान किया था। हमने बस्तर बंद का समर्थन किया। बैज ने कहा, पीड़ित परिवार से मैंने मुलाकात की। फर्जी FIR कर ठाकुर को जेल भेजा गया था। इसके चलते परिवार और आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। दोषी तहसीलदार और पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
जानिए क्या है मामला
बता दें कि जमीन विवाद के मामले में 12 अक्टूबर 2025 को कांग्रेस नेता और चारामा के पूर्व जनपद अध्यक्ष जीवन ठाकुर को गिरफ्तार कर कांकेर जेल में रखा गया था। उन्हें 2 दिसंबर को बिना सूचना के रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था। जेल प्रशासन के अनुसार, इसी बीच उनकी तबीयत खराब होने से तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 4 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। वहीं अब मामले में परिजनों ने जेल प्रशासन पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें कोई बीमारी नहीं थी। सही समय पर इलाज होता तो उनकी जान बच जाती।
मामले की होगी न्यायिक जांच
परिजनों का कहना है कि बिना सूचना के कांकेर से रायपुर जेल भेजा गया, जिसके कारण उनकी मौत हुई है। वहीं जेल प्रशासन का कहना है कि तबीयत बिगड़ने से कैदी की मौत हुई है। बता दें कि कांग्रेस नेता और चारामा के पूर्व जनपद अध्यक्ष जीवन ठाकुर वन अधिकार पट्टा घोटाले में जेल में थे। वहीं अब इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रायपुर ने जांच का आदेश जारी किया था।
कस्टम मिलिंग स्कैम : दीपेन चावड़ा के खिलाफ EOW ने कोर्ट में चालान किया पेश
रायपुर। कस्टम मिलिंग स्कैम मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने आज बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी दीपेन चावड़ा के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है। चावड़ा पर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक अवैध धनराशि के प्रबंधन में प्रमुख भूमिका निभाने के आरोप हैं। वह स्कैम के मुख्य आरोपी अनवर ढेबर का सहयोगी माना जाता है।
जानकारी के अनुसार, दीपेन चावड़ा को ईओडब्ल्यू ने नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान चावड़ा की भूमिका कई बड़े आर्थिक अपराधों में सामने आई, जिसके आधार पर उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटाए गए। इन सबूतों के आधार पर आज, 9 दिसंबर 2025 को रायपुर स्थित न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में उसके विरुद्ध चालान पेश किया गया। जिसमें बताया गया है कि दीपेन चावड़ा EOW में दर्ज अन्य प्रकरणों में लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक अवैध धन के प्रबंधन में शामिल था। कस्टम मिलिंग स्कैम में भी उसके द्वारा लगभग 20 करोड़ रुपये लोकसेवकों की ओर से एकत्र किए जाने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
इस मामले में इससे पहले फरवरी 2025 में तत्कालीन प्रबंध संचालक मनोज सोनी और रोशन चंद्राकर के विरुद्ध तथा अक्टूबर 2025 में अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा के विरुद्ध माननीय विशेष न्यायालय (भ्र.नि.अ) में चालान पेश किया जा चुका है।
