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तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह : मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत
रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद संतोष पांडेय, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर मीनल चौबे, विधायक मोतीलाल साहू, राजेश मूणत, मुख्य सचिव विकास शील, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव (गृह) मनोज पिंगुआ तथा रायपुर पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला उपस्थित थे।
अमित शाह के दौरे पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, तो सांसद बृजमोहन ने दिया करारा जवाब, कहा- छत्तीसगढ़ भाजपा का गढ़…
रायपुर। नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियानों की समीक्षा करने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवार को छत्तीसगढ़ आ रहे हैं. शाह के दौरे को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए, जिसे लेकर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पलटवार किया है. सासंद बृजमोहन ने कहा कि ये बीजेपी का गढ़ है तो बीजेपी के नेता आएंगे ही. छत्तीसगढ़ विकसित राज्य बनेगा. आज देश में आतंकवाद और नक्सलवाद की दो सबसे बड़ी समस्या है, उन्होंने देश से नक्सलवाद को समाप्त करने का ठाना है. केंद्रीय गृहमंत्री शाह नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए यहां आते हैं. कांग्रेस को धन्यवाद करना चाहिए. छत्तीसगढ़ के विकास में कोई बाधा थी तो वह नक्सलवाद थी.
राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे से बढ़ता है गौरव : सासंद बृजमोहन अग्रवाल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज बस्तर पंडुम में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ पहुंची. उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ किया. रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रपति के आने से हमारा गौरव बढ़ता है. हम सब का सौभाग्य है देश की राष्ट्रपति बस्तर पण्डूम के उद्घाटन में पहुचीं. हम सब उनका अभिनंदन स्वागत करते हैं.
भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता छत्तीसगढ़ के लिए नए आर्थिक अवसरों का द्वार खोलेगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता (India–US Interim Trade Agreement) भारत की वैश्विक आर्थिक साख और सामर्थ्य को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस समझौते से छत्तीसगढ़ के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अमेरिकी बाजार तक नई पहुँच मिलेगी। विशेष रूप से राज्य के वन-आधारित उत्पाद, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, वस्त्र तथा कृषि आधारित उत्पादों के लिए निर्यात, निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को व्यापक लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस व्यापारिक ढांचे में किसानों के हितों और ग्रामीण आजीविका की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही यह पहल महिला सशक्तिकरण को गति देने, स्थानीय उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूती प्रदान करने और मेक इन इंडिया की भावना को और सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता छत्तीसगढ़ के लिए नए आर्थिक अवसरों का द्वार खोलेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में छत्तीसगढ़ एक सशक्त और सक्रिय भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह समझौता राज्य के समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास को नई गति देगा।
बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।

जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा । सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बस्तर पंडुम जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव - राज्यपाल रमेन डेका
राज्यपाल रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है।
बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।
अब नया बस्तर - डर की जगह भरोसा, हिंसा की जगह विकास
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक समय था जब बस्तर को नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाना जाता था, लेकिन आज डर की जगह भरोसे ने और हिंसा की जगह विकास ने ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूँजती थी, आज वहाँ स्कूलों की घंटी बजती है। जहाँ कभी तिरंगा नहीं लहरा पाता था, आज वहाँ राष्ट्रगान की गूंज सुनाई देती है। गणतंत्र दिवस पर बस्तर संभाग के अति-संवेदनशील गाँवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया, जो लोकतंत्र और संविधान की जीत है।
नियद नेल्ला नार, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा अभियान विकास के मील के पत्थर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान आदिवासी क्षेत्रों में विकास के मील के पत्थर हैं। इन योजनाओं से दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएँ पहुँची हैं। नई पुनर्वास नीति के से जो लोग कभी बंदूक के रास्ते पर थे, वे अब सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। चिल्कापल्ली, तेमेनार और हांदावाड़ा जैसे गाँवों में वर्षों बाद बिजली पहुँची है, यह केवल रोशनी नहीं, बल्कि आशा और भविष्य का उजाला है।
जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर और वैश्विक पहचान दिलाना हमारी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर की पहचान वनोपज से भी है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर बढ़ाई गई है, चरण-पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है तथा वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज को उचित मूल्य और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर के धुड़मारास गाँव को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँवों में शामिल किया गया है। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और कोटमसर गुफाएँ केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान हैं।
युवा अब हथियार नहीं, खेल और कला से बना रहे पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि बस्तर के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। लाखों युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इस बदलाव का सबसे सशक्त प्रमाण है।
बस्तर की नई पहचान को मजबूत करने का आह्वान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बस्तर आगमन ऐतिहासिक है। इससे कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बेटियों के सपनों को उड़ान मिलेगी और बस्तर को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर बस्तर को शांति, समृद्धि और संस्कृति का केंद्र बनाएँगे, जिस पर पूरे देश को गर्व हो। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया।
कोंडागांव बस्तर पंडुम पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया तथा कोण्डागांव और बास्तानार के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरणदेव सिंह, सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित जनप्रतिनिधिगण, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
फर्जी आदेश के दम पर वर्षों तक सरकारी नौकरी कर रहे चार कर्मचारी हुए बर्खास्त, गंभीर धाराओं में एफआईआर भी दर्ज…
खैरागढ़। राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी आदेश के सहारे वर्षों तक सरकारी सेवा करने वाले चार कर्मचारियों को जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है. इसके साथ अब उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज कराया है. इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.
मामला वर्ष 2021 का बताया जा रहा है, जब टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद को जिले के अलग-अलग स्कूलों में सहायक ग्रेड-3 तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति दी गई थी. इसके साथ ही डोलामणी मटारी, सादाब उस्मान, आशुतोष कछवाहा और अमीन शेख भी मोहला-मानपुर जिले के विद्यालयों में पदस्थ थे. नियुक्ति के दस्तावेजों की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.
जांच में पता चला कि सितंबर 2021 में राज्य शिक्षा आयोग के तत्कालीन सचिव डॉ. ओपी मिश्रा के नाम से जारी जिस आदेश के आधार पर नियुक्तियां की गई थीं, उक्त क्रमांक का पत्र वास्तव में बैंक ऑफ बड़ौदा की विवेकानंद नगर शाखा को जारी किया गया था. इतना ही नहीं, दस्तावेजों पर मौजूद सचिव के हस्ताक्षर भी आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे.
शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन लेने और आयोग के आदेश को फर्जी पाए जाने के बाद डीईओ लालजी द्विवेदी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 10(9) के तहत चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया. इसके बाद उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला पंजीबद्ध किया है.

हाई और हायर सेकेंडरी में मिली थी तैनाती
फर्जी आदेश के आधार पर शिक्षा विभाग ने मई 2022 में टीकमचंद साहू को हाईस्कूल मोहगांव, फगेंद्र सिंहा को उच्चतर माध्यमिक शाला बकरकट्टा, रजिया अहमद को उमा शाला पैलीमेटा में सहायक ग्रेड-3 और अजहर अहमद को छुईखदान बीईओ कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में पदस्थ किया था. इनके अलावा सीएच एंथोनी को ठाकुरटोला उमा शाला में सहायक ग्रेड-3 नियुक्त किया गया था, लेकिन उन्होंने कभी कार्यभार नहीं संभाला.
कलेक्टोरेट में भी कर चुके थे काम
जिले के गठन के बाद रजिया अहमद को कलेक्टोरेट की डीएमएफ शाखा और अजहर अहमद को अभियोजन शाखा में अटैच किया गया था. वहीं फगेंद्र सिंहा और टीकमचंद साहू से डीईओ कार्यालय में काम लिया जा रहा था. अगस्त 2025 में मामला उजागर होने के बाद चारों ने अलग-अलग कारण बताते हुए अवकाश ले लिया था, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और बचाव संतोषजनक नहीं पाए गए. लंबी जांच प्रक्रिया के बाद विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. पुलिस अब इस पूरे रैकेट की तह तक जाने की तैयारी कर रही है.
फर्जी था नियुक्ति पत्र – डीईओ
खैरागढ़ जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर ही नियुक्ति पत्रों की सत्यता को लेकर गंभीर संदेह था, जिसके बाद राज्य शिक्षा आयोग से औपचारिक सत्यापन कराया गया. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिस आदेश के आधार पर इन कर्मचारियों को नियुक्ति और पदस्थापना दी गई थी, वह फर्जी था, और सचिव के हस्ताक्षर भी वास्तविक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते थे.
विभाग सुनिश्चित करेगा निष्पक्ष जांच
उन्होंने कहा कि शासकीय सेवा में किसी भी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती, इसलिए नियमानुसार चारों कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, और कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है. विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा और यदि इसमें कोई और व्यक्ति संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी.
SIR में एक ही समुदाय के मतदाताओं के नाम पर आपत्ति से भड़के वोटर, थाने में की शिकायत
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। गौरेला नगर पालिका क्षेत्र में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। SIR प्रक्रिया के दौरान एक ही समुदाय के सैकड़ों मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज किए जाने से क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है। इससे नाराज मतदाताओं ने आपत्तिकर्ता के खिलाफ गौरेला थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में जानबूझकर राजनीतिक षड्यंत्र के तहत एक विशेष समुदाय के लोगों के नाम कटवाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि वे पीढ़ियों से—आजादी से पहले के समय से—इस क्षेत्र में निवासरत हैं और अब तक देश में हुए सभी चुनावों में मतदान करते आ रहे हैं।
मतदाताओं ने बताया कि SIR से संबंधित सभी अनिवार्य दस्तावेज उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समय पर उपलब्ध करा दिए हैं, इसके बावजूद उनके नामों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई जा रही है। इसे वे दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई मान रहे हैं।
पीड़ित मतदाताओं ने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक व्यक्ति द्वारा उनकी नागरिकता और मताधिकार पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। इसी के विरोध में उन्होंने गौरेला थाने पहुंचकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
गरियाबंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, जंगल में डंप माओवादियों के हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
गरियाबंद। थाना मैनपुर अंतर्गत ओडिशा सीमा से लगे ग्राम भालूडिग्गी और मेटाल की पहाड़ी श्रृंखलाओं में माओवादियों द्वारा डम्प कर रखे गए हथियारों का बड़ा जखीरा पुलिस ने बरामद किया है। यह कार्रवाई जिला पुलिस बल गरियाबंद की ई-30 ऑप्स टीम ने की, जिसे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
पुलिस को यह अहम जानकारी जनवरी 2026 में गरियाबंद में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे माओवादियों से गहन पूछताछ के दौरान मिली थी। पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) की ओडिशा राज्य कमेटी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा ओडिशा सीमा से लगे पहाड़ी क्षेत्रों में ऑटोमेटिक हथियार, गोला-बारूद और टेक्निकल टीम के वेपन वर्कशॉप से जुड़े उपकरण विभिन्न स्थानों पर डम्प कर रखे गए हैं।

प्राप्त सूचना के आधार पर 06 फरवरी 2026 को जिला मुख्यालय गरियाबंद से ई-30 ऑप्स टीम को रवाना किया गया। लगभग 36 घंटे तक चले सघन सर्च ऑपरेशन के बाद टीम ने 06 अलग-अलग स्थानों से माओवादियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की।

बरामद सामग्री में 02 नग इंसास राइफल, 01 नग .303 राइफल, 02 नग 12 बोर हथियार, 01 नग देशी कट्टा, 01 नग सुरका (देशी बीजीएल लॉन्चर), 02 सिंगल शॉट हथियार, 127 जिंदा राउंड, 08 मैगजीन, 22 बीजीएल सेल, इलेक्ट्रिक वायर का बंडल तथा हथियार बनाने और मरम्मत में उपयोग होने वाले टेक्निकल वर्कशॉप के विभिन्न उपकरण शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, यह हथियारों की टेक्निकल टीम ओडिशा राज्य कमेटी के मारे गए तीन केंद्रीय कमेटी सदस्यों—चलपति, मनोज और गणेश उईके—की सीधी निगरानी में काम करती थी। यह टीम आईईडी, देशी हथियारों के निर्माण और ऑटोमेटिक हथियारों की मरम्मत का कार्य करती थी।
उल्लेखनीय है कि जिला गरियाबंद पुलिस द्वारा विगत डेढ़ वर्षों से संचालित नक्सल उन्मूलन अभियान “ऑपरेशन विराट” के तहत 26 जनवरी 2026 से पूर्व धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन के सभी सूचीबद्ध सक्रिय माओवादियों को आत्मसमर्पण अथवा निष्क्रिय करने में सफलता प्राप्त की जा चुकी है। इस ताजा बरामदगी के साथ ही गरियाबंद क्षेत्र में नक्सली हिंसा की संभावनाओं को लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
वर्ष 2025-26 में नक्सलियों से जब्त सामग्री
- कुल हथियार: 57
- ग्रेडेड ऑटोमेटिक हथियार: 28
- अन्य हथियार: 29
- कुल कारतूस: 300
- कुल मैगजीन: 21
जब्त विस्फोटक सामग्री:
- इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 240
- नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 17
- आईईडी बम: 07
- कार्डेक्स वायर: लगभग 100 मीटर
इस कार्रवाई को गरियाबंद पुलिस और संयुक्त सुरक्षा बलों की एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को मजबूती मिली है।
जनजातीय परंपराओं और संस्कृति पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया अवलोकन
रायपुर। बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और कारीगरों से प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की विस्तृत जानकारी ली।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर पंडुम को आदिवासी विरासत को संजोने और उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने एक-एक कर ढोकरा हस्तशिल्प कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, बस्तर की जनजातीय चित्रकला, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की।

बस्तर पंडुम आयोजन स्थल पर जनजातीय हस्तशिल्प आधारित प्रदर्शनी में ढोकरा कला से निर्मित सामग्रियों का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस हस्तशिल्प में लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह भारत की प्राचीन जनजातीय धातु कला है, जिसमें प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ढोकरा की प्रत्येक कृति पूर्णतः हस्तनिर्मित होती है। इसके निर्माण में समाड़ी मिट्टी, मोम वैक्स, तार, पीतल, गरम भट्टी एवं सफाई मशीन का उपयोग किया जाता है। स्थानीय टेराकोटा कला को दर्शाती मिट्टी से बनी आकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया, जो लोक आस्था, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक विश्वासों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं।
प्रदर्शनी में लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) कला के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिली। लकड़ी की मूर्तियां बनाने के लिए सागौन, बीजा, सिवनर एवं साल लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसमें कारीगर पारंपरिक औजारों से बारीक आकृतियां उकेरते हैं। इसी तरह सीसल कला से बने जूट के कपड़े एवं अन्य हस्तशिल्पों का भी राष्ट्रपति ने अवलोकन किया।
एक अन्य स्टॉल में बांस से बनी पारंपरिक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। वहीं गढ़ा हुआ लोहे की कला (Wrought Iron Art) से निर्मित कलाकृतियों ने भी राष्ट्रपति को विशेष रूप से आकर्षित किया।
जनजातीय आभूषणों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल ने राष्ट्रपति का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से हाथ से बनाए गए जनजातीय आभूषण (Tribal Jewellery) प्रदर्शित किए गए। ये आभूषण आदिवासी समुदायों की पहचान, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।
तुम्बा कला (Tumba Art) के अंतर्गत सूखी लौकी जैसी फली से बनाए गए पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी में रखी गई थीं। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण स्टॉल में बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियां — दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा — की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण संबंधित जनजातियों के युवक-युवतियों द्वारा प्रदर्शित किए गए।
बस्तर पंडुम स्थल पर जनजातीय चित्रकला से जुड़ी जीवंत प्रदर्शनी का भी राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में बस्तर की चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। बस्तर की कला में जंगल, लोक देवता, पर्व-त्योहार और दैनिक जीवन को सहज रंगों और प्रतीकों के माध्यम से उकेरा जाता है। यह चित्रकला पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।
स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जनजातीय दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जोंधरी लाई के लड्डू, जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ पेय पदार्थ लांदा और सल्फी को प्रदर्शित किया गया।
लोक जीवन से संबंधित लोकचित्रों की प्रदर्शनी में बस्तर की संस्कृति और इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन एवं लोक परंपराओं से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ बस्तर के जनजातीय समाज और लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया।
उरकुरा रेल्वे स्टेशन के समीप स्थित आइल फैक्ट्री में लगी भीषण आग, इलाके में मची अफरा-तफरी…
रायपुर। राजधानी रायपुर में थाना खमतराई स्थित आयल फैक्ट्री में दोपहर को आग लग गई. आग की भीषणता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आग का धुंआ कई किलोमीटर दूर से नजर आ रहा है.
उरकुरा रेलवे स्टेशन के पहले स्थित फैक्ट्री में लगी आगजनी से फैक्ट्री के चारों तरफ अफरा-तफरी की स्थिति नजर आ रही है. मौके पर मौजूद दमकल की टीम आग को बुझाने में जुटी हुई है. फिलहाल, आग लगने का कारण पता नहीं चल पाया है.
देश की सबसे बड़ी गेवरा कोल माइंस में सुरक्षा पर सवाल ! बढ़ते हादसों पर DGMS ने उठाये गंभीर सवाल, 15 दिनों में प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट
कोरबा। कोयला उत्पादन में कीर्तिमान हासिल करने वाली SECL की खदानें सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है। ताजा मामला देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में सुमार एसईसीएल के गेवरा कोल परियोजना की है। यहां सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है। खदान में बढ़ते हादसों और जोखिम भरे हालात के बीच DGMS की ताज़ा निरीक्षण रिपोर्ट ने प्रबंधन की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। खान एवं सुरक्षा महानिदेशालय ने गेवरा प्रबंधन को नोटिस जारी कर 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी है।
गौरतलब है कि कोरबा जिले में एसईसीएल की मेगा प्रोजक्ट गेवरा, कुसमुुंडा और दीपका परियोजना संचालित है। इन परियोजनाओं में रिकार्ड कोयला उत्पादन के साथ ही सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर अक्सर मानव जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ के भी मामले सामने आते रहे है। जिसे लेकर खान एवं सुरक्षा महानिदेशालय(DGMS) ने कड़ा रूख अपनाया है। DGMS ने एसईसीएल गेवरा माइंस में लगातार बढ़ती दुर्घटनाओं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर प्रबंधन की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाये है।
एसईसीएल गेवरा प्रबंधन को डीजीएमएस से जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि 13 और 14 जनवरी को DGMS बिलासपुर के सुरक्षा उपनिदेशक द्वारा माइंस का निरीक्षण किया गया था। जिसमें कोयला खदान विनियम 2017 के कई प्रावधानों का खुला उल्लंघन पाया गया। DGMS ने सवाल उठाते हुए कहा है कि…..यह स्थिति तब है, जब गेवरा खदान को उत्पादन के लिहाज से देश की अग्रणी परियोजनाओं में गिना जाता है। सवाल यह है कि जब उत्पादन लक्ष्य पूरे करने की होड़ है, तो क्या श्रमिकों की सुरक्षा को दरकिनार किया जा रहा है ?
खदान में उड़ते धूल पर जतायी चिंता, कहा…ये पर्यावण के साथ खिलवाड़
DGMS के निरीक्षण में पाया गया कि गेवरा खदान के कोयला स्टॉक यार्ड A और B के आसपास धूल नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा था और अधिकांश फॉग कैनन खराब हालत में पड़े थे। यह सीधे तौर पर श्रमिकों के स्वास्थ्य और आसपास के पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है। धूल के बढ़ते स्तर से न केवल फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है, बल्कि दृश्यता कम होने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है।
बगैर तिरपाल ढके खदानों में निकल रहे ट्रकों पर उठाये सवाल
DGMS ने गेवरा खदान के निरीक्षण के दौरान खदान में व्याप्त प्रदूषण के साथ ही सड़क मार्ग से होने वाले कोयला परिवहन में भी प्रबंधन की उदासीनता देखी। जांच में पाया गया कि खदान से ट्रकों और टिपरों में लोड कोयला को तिरपाल से पूरी तरह से ढंके बगैर ही रवाना किया जा रहा था। एसईसीएल गेवरा परियोजना की इस गंभीर लापरवाही पर DGMS ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि… क्या प्रबंधन को यह अहसास नहीं कि यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता और राहगीरों की जान को भी जोखिम में डालने जैसा है ? वहीं DGMS ने निरीक्षण के दौरान लोडिंग क्षेत्र और वेब्रिज के आसपास अनाधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए इससे खदान क्षेत्र में कभी भी बड़ा हादसा होने की चिंता व्यक्त की है।
पार्किंग यार्ड और स्टॉक क्षेत्र में ट्रकों की बेतहाशा भीड़ पर उठाये सवाल
DGMS ने पार्किंग यार्ड और स्टॉक क्षेत्र में ट्रकों की बेतहाशा भीड़ पर सवाल उठये है। डीजीएमएस ने पत्र में कहा है कि इस अव्यवस्था ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। बिना सुव्यवस्थित प्रणाली के भारी वाहनों का संचालन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। DGMS ने प्रति शिफ्ट ट्रकों की सीमा तय करने, कम्प्यूटरीकृत टोकन सिस्टम और सीसीटीवी निगरानी लागू करने के निर्देश दिए हैं।
क्या 15 दिन में सुधर जायेंगे हालात, या फिर कागजी कार्रवाई कर की जायेगी खानापूर्ति
DGMS के इस एक्शन के बाद गेवरा प्रबंधन के जवाबदार अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। लेकिन इस खुलासे और DGMS के संज्ञान के बाद सवाल अब भी वही….कि क्या 15 दिनों में खदान में व्याप्त अव्यवस्था और सुरक्षा मानकों में कमी पूरी तरह से सुधर जायेंगी ? स्थानीय स्तर पर बढ़ते हादसों को लेकर पहले भी आवाज़ें उठती रही हैं। अब DGMS की सख्ती के बाद साफ हो गया है कि खदान में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर प्रबंधन की गंभीर खामियां मौजूद हैं।
खान सुरक्षा निदेशक ने भले ही 15 दिनों के भीतर सभी उल्लंघनों का निराकरण कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इन 15 दिनों में केवल कागज़ी सुधार होंगे ? या जमीनी स्तर पर भी बदलाव दिखेगा ? यदि कोयला खदानों में अब भी सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो उत्पादन की चमक के पीछे मानव जीवन और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ होते रहेंगे। ऐस में अब ये देखने वाली बात होगी कि DGMS के कड़े तेवर का गेवरा परियोजना के साथ ही दूसरी खदानों पर कितना असर पड़ता है, ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।


नाले में अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर, राजस्व विभाग और नगर निगम की टीम ने की संयुक्त कार्रवाई
रायपुर। ग्राम अमलीडीह में नाले एवं शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण के विरुद्ध आज कार्रवाई की गई। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर राजस्व विभाग एवं नगर निगम की संयुक्त टीम ने नाले में हुए अतिक्रमण को चिन्हांकित कर उसे हटाया।
एसडीएम नंदकुमार चौबे के नेतृत्व में कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार ज्योति सिंह, राजस्व निरीक्षक यश वराह, पटवारी राजाराम पोटाई व फुंडहर पटवारी धर्मेंद्र एवं जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे की उपस्थिति में नाले के परिवर्तित बहाव को मूल स्थिति में बहाल किया गया। साथ ही नाले एवं शासकीय भूमि में हुए अवैध अतिक्रमण को हटाकर क्षेत्र को सुरक्षित किया गया।
इसके अतिरिक्त शामिलात चरागाह एवं रास्ते की शासकीय भूमि को भी चिन्हांकित कर संरक्षण सुनिश्चित किया गया, जिससे भविष्य में पुनः अतिक्रमण की संभावना को रोका जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय भूमि एवं प्राकृतिक जलस्रोतों पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव पर रोक लगाने की याचिका खारिज
बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक लगाने की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, इसलिए अब हस्तक्षेप करना ठीक नहीं है। कोर्ट ने चुनाव से जुड़े विवादों का समाधान सही समय और मंच पर करने का निर्देश कहा है। याचिकाकर्ताओं ने महिला आरक्षण के साथ ही कार्यकारिणी का पद बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी की कोर्ट में हुई।
दरअसल, बिलासपुर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लिए 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में अध्यक्ष सहित 17 पदों के लिए 61 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। एडवोकेट निरूपमा वाजपेयी ने हाई कोर्ट में यााचिका दायर कर कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रशासक समिति द्वारा चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी।
याचिका में कहा गया कि बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी 15 की थी, जिसे गलत तरीके से बढ़ाकर महिला आरक्षण तय किया गया है। जबकि, प्रशासक को कार्यकारिणी के पदों में वृद्धि करने का अधिकार नहीं है। केवल सामान्य सभा के जरिए ही पद बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है, सामान्य सभा की अनुमति जरुरी है। हाई कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद, चुनावी प्रक्रिया जारी रखने पर उन्होंने आवेदन भी प्रस्तुत किया था, जिसमें चुनाव पर रोक लगाने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का कार्यकाल खत्म हो चुका है, जिसके चलते हाई कोर्ट और राज्य अधिवक्ता परिषद ने प्रशासक नियुक्त किया है। प्रशासक ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट और राज्य अधिवक्ता परिषद से मार्गदर्शन लेकर चुनाव की प्रक्रिया शुरू की है। मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा, चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई और मतदान की तारीख के साथ ही नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी हो चुकी है। ऐसे में चुनाव पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने PM मोदी, CS और PWD सचिव को लिखा पत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने एक बार फिर से सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य सचिव विकासशील और PWD के सचिव कमलप्रीत सिंह को पत्र लिखकर लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता विजय कुमार भतपहरी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
ननकी राम कंवर ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि PWD के मुख्य अभियंता विजय कुमार भतपहरी ने विभिन्न पदों पर रहते हुए अपने चहेते ठेकेदारों को नियमविरुद्ध लाभ पहुंचाया और कमिशनखोरी के माध्यम से विभाग एवं शासन की छवि को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने बताया कि भतपहरी के खिलाफ 2011 और 2015 में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटीकरप्शन ब्यूरो रायपुर में अपराध दर्ज किए गए थे, लेकिन राजनीतिक पहुंच और काली कमाई के बल पर सभी जांच और दर्ज आपराधिक मामलों पर कार्रवाई नहीं होने दी गई।

लंबित मामले और जांच
विजय कुमार भतपहरी के विरुद्ध वर्ष 2011 एवं 2015 में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटीकरप्शन ब्यूरो रायपुर में अपराध कमांक 56/2011 और 45/2015 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत मामला दर्ज किया गया था। परंतु राजनीतिक पहुंच के कारण उपरोक्त मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें लंबित रखा गया।

लोक निर्माण विभाग द्वारा वर्ष 2007 की स्थिति में अधीक्षण अभियंता सिविल की रिव्यू डीपीसी आयोग द्वारा कराई जाने के लिए 27 दिसंबर 2010 को तिथि प्राप्त हो चुकी थी। पूर्व वर्षों में सम्पन्न डी.पी.सी. बैठकों में कई भ्रष्ट अधिकारियों को पदोन्नति देने के लाभ से उनके विरुद्ध संस्थित महत्वपूर्ण प्रकरणों को छिपाया गया। इससे विभाग में पदस्थ अन्य अभियंताओं में आयोग के कार्यप्रणाली पर विश्वसनीयता खत्म हो रही है।

उदाहरण के लिए, वी.के. भतपहरी, जो वर्तमान में मुख्य अभियंता (सेतु) के पद पर हैं, उनकी नियुक्ति विशेष भर्ती अभियान के अंतर्गत 1992 में लोक निर्माण विभाग सहायक यंत्री के रूप में की गई थी। वर्ष 2003 में तदर्थ पदोन्नति देते हुए उन्हें कार्यपालन अभियंता के पद पर राजनांदगांव संभाग में नियुक्त किया गया। इस दौरान मानपुर-संबलपुर मार्ग 51 कि.मी. के निर्माण में प्रशासकीय स्वीकृत 6.95 करोड़ रुपये के विरुद्ध लगभग 10 करोड़ रुपये के भुगतान भतपहरी के द्वारा किए गए थे। मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) द्वारा 04 जुलाई 2006 को जांच प्रतिवेदन में पाया गया कि राजनांदगांव संभाग में 4.37 करोड़ रुपये स्वीकृत राशि से अधिक खर्च किए गए, और तीन माह की पुस्तिका का गुम होना गंभीर था।
पीएम, सीएस और सचिव से सीबीआई जांच की मांग
पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने पीएम मोदी, मुख्य सचिव विकास शील और पीडब्लू के सचिव कमलप्रीत सिंह को लिखे पत्र में विजय कुमार भतपहरी को उनके पद से हटाने के साथ ही लंबित मामलों की पूरी सीबीआई जांच और लोक निर्माण विभाग को हुए नुकसान की वसूली की मांग की है।
छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर में बड़ा एंटी नक्सल ऑपरेशन : C-60 कमांडो की कार्रवाई में 7 नक्सली ढेर, एक जवान शहीद
बीजापुर। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से लगे अबूझमाड़ इलाके में सुरक्षाबलों का बड़ा एंटी नक्सल ऑपरेशन जारी है। बीजापुर जिले की सीमा से सटे इस दुर्गम क्षेत्र में महाराष्ट्र पुलिस के विशेष दस्ता C-60 कमांडो द्वारा चलाए जा रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन के दौरान भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें अब तक 7 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है।
जानकारी के अनुसार, C-60 कमांडो ने गुरुवार दोपहर बाद ऑपरेशन की शुरुआत की थी। दो दिनों से चल रही इस मुठभेड़ में जवानों ने अब तक 7 नक्सलियों के मार गिराया है। पहले दिन 3 और दूसरे दिन 4 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। मारे गए नक्सलियों में 25 लाख का इनामी नक्सली नेता प्रभाकर भी शामिल बताया जा रहा है।
सर्च ऑपरेशन के दौरान घटनास्थल से 3 एके-47, 1 एसएलआर राइफल सहित अन्य नक्सली सामग्री बरामद की गई है। फिलहाल पूरे इलाके में सघन सर्चिंग अभियान जारी है।
लोहा लेते हुए एक जवान शहीद
इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। C-60 कमांडो जवान दीपक मंडावी नक्सलियों से बहादुरी से लड़ते हुए शहीद हो गए। बताया जा रहा है कि शहीद जवान ने अंतिम समय तक मोर्चा संभाले रखा और दो नक्सलियों को ढेर करने के बाद वीरगति को प्राप्त हुए। शहीद जवान को नम आंखों से अंतिम सलामी दी गई।
फिलहाल सुरक्षाबल ऑपरेशन को आगे बढ़ाते हुए इलाके में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना को मिली रफ्तार, ₹7,470 करोड़ का बजट अनुदान मंजूर
रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण को निरंतर गति प्रदान करने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने वर्ष 2026-27 के लिए राज्य को ₹7,470 करोड़ का बजट अनुदान प्रदान किया है। इस अनुदान के माध्यम से राज्य में रेल संपर्क को मजबूत करने, यात्री सुविधाओं में सुधार, माल परिवहन क्षमता बढ़ाने और सुरक्षा मानकों को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न विकासात्मक कार्य किए जा रहे हैं।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में ₹51,080 करोड़ की लागत की रेल परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं के अंतर्गत नई रेल लाइनों का निर्माण, अतिरिक्त लाइनों का विकास, स्टेशनों का पुनर्विकास, रेल संरक्षा कार्य तथा आधुनिक तकनीक आधारित अवसंरचना का विकास किया जा रहा है, जिससे राज्य के औद्योगिक, सामाजिक एवं आर्थिक विकास को निरंतर बल मिल रहा है।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में संचालित प्रमुख रेल परियोजनाएं
(1) बिलासपुर–झारसुगुड़ा चौथी लाइन परियोजना शामिल है, जिसकी कुल लंबाई 206 किलोमीटर तथा लागत ₹2,135.34 करोड़ है। इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 175 किलोमीटर से अधिक चौथी रेल लाइन का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जिससे इस व्यस्त रेलखंड पर परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
(2) बिलासपुर–नागपुर रेल खंड पर बिलासपुर से गोंदिया के बीच विभिन्न खंडों (पैचों) में चौथी रेल लाइन का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।
(3) दल्लीराझरा–रावघाट नई रेल लाइन परियोजना, जिसकी कुल लंबाई 95 किलोमीटर एवं लागत ₹16,275.56 करोड़ है, के अंतर्गत 77.35 किलोमीटर नई रेल लाइन का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। यह परियोजना विशेष रूप से दुर्गम एवं आदिवासी क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
(4) छत्तीसगढ़ राज्य में खरसिया–नया रायपुर–परमालकसा नई रेल लाइन परियोजना भी प्रगति पर है, जिसकी कुल लंबाई 278 किलोमीटर तथा अनुमानित लागत ₹7,854 करोड़ है। यह परियोजना राज्य की राजधानी क्षेत्र सहित औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों को बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेगी।
(5) सरदेगा–भालूमाड़ा नई रेल लाइन परियोजना, जिसकी लंबाई 37.24 किलोमीटर एवं लागत ₹1,282 करोड़ है, क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ करने के साथ-साथ खनिज परिवहन को अधिक सुगम बनाएगी।
(6) रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन परियोजना, जिसकी कुल लंबाई 140 किलोमीटर तथा लागत ₹3,513 करोड़ है, बस्तर अंचल को रेल नेटवर्क से जोड़ते हुए क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।
(7) यात्री सुविधाओं के उन्नयन की दिशा में अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्विकास किया जा रहा है।
(8) राज्य में वर्तमान में वंदे भारत एक्सप्रेस की दो जोड़ी सेवाएँ ( बिलासपुर नागपुर बिलासपुर एवं दुर्ग विशाखापट्टनम दुर्ग ) तथा अमृत भारत एक्सप्रेस की एक जोड़ी सेवा ब्रह्मपुर (ओडिशा)-उधना (सूरत गुजरात) के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन संचालित की जा रही हैं, जिससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित एवं आधुनिक रेल यात्रा का लाभ मिल रहा है।
(9) इसके साथ ही राज्य में रेल नेटवर्क का निरंतर विस्तार करते हुए पिछले 10-11 वर्षों में नई रेल पटरियों का निर्माण, संपूर्ण रेल विद्युतीकरण तथा 170 फ्लाईओवर एवं अंडरपास का निर्माण किया गया है, जिससे रेल एवं सड़क यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम हुआ है।
(10) वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कुल 1,083 रेलवे कार्य स्वीकृत हैं, जिनमें से 845 कार्य विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। ये सभी प्रयास छत्तीसगढ़ को एक आधुनिक, सुरक्षित एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित रेल नेटवर्क प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
टेंडर विवाद : मुख्यमंत्री कन्या विवाह समारोह पर फंसा पेंच, महिला बाल विकास विभाग ने कार्य को लेकर लिखी चिट्ठी, PWD ने किया इंकार!
रायपुर। राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 10 फरवरी को होने वाले मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह समारोह विवादों में घिरता जा रहा है। कांग्रेस ने इस आयोजन में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है और सवाल उठाते हुए कहा है कि कार्यक्रम के लिए पंडाल आदि के लिए वर्कआर्डर जारी होने से पहले ही काम शुरू हो गया है। कांग्रेस के सवाल उठाने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने निर्णय पलटते हुए एम्पैनलड वेंडर की जगह अब पीडब्ल्यूडी को एजेंसी बनाकर प्रस्ताव भेजा है कि आगे का सारा कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग अपनी दर के आधार पर करें और महिला बाल विकास विभाग उन्हें पेमेंट करेगा।
इस मामले में PWD के संबंधित अधिकारियों से हमने संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीडब्ल्यूडी विभाग ने महिला बाल विकास विभाग को पत्राचार करते हुए सीधे तौर पर काम करने में असमर्थता जता दी है।

बता दें कि गुरुवार को कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस कर मामले का खुलासा किया था। सुबोध हरितवाल ने कहा था कि 10 फरवरी को साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भारी अनियमितताएं सामने आई है। इस आयोजन के लिए निविदा (टेंडर) प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जबकि नियमानुसार CSIDC के माध्यम से कंपनियों से निविदा आमंत्रित की जाती है। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी को सिर्फ 5 कंपनियों को आमंत्रित किया गया और उन्हें 24 घंटे के भीतर डिजाइन प्रेजेंटेशन के साथ प्रस्तुत होने को कहा गया। सुबोध हरितवाल ने सवाल उठाया कि ऐसा कौन-सा डिजाइन और लेआउट है, जो पहले से ही पास हो चुका है।
सुबोध ने कहा था – जंबूरी जैसा हो रहा भ्रष्टाचार
कांग्रेस नेता सुबोध ने आरोप लगाया था कि बिना टेंडर के साइंस कॉलेज मैदान में काम शुरू हो चुका है, जबकि इस आयोजन पर 5 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च बताया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि यदि किसी आयोजन में 4–5 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं और निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तो यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार है। सुबोध ने इसे “जंबूरी भ्रष्टाचार 2.0” करार देते हुए कहा कि जैसे जंबूरी मामले में अनियमितताएं सामने आई थी, वैसे ही इस मामले में भी गड़बड़ी हुई है।
पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखने पर कांग्रेस ने फिर उठाया सवाल
कांग्रेस के सवाल उठाने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपने निर्णय पलटते हुए एम्पैनलड वेंडर की जगह अब पीडब्ल्यूडी को एजेंसी बनाकर प्रस्ताव भेजा है कि आगे का सारा कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग अपनी दर के आधार पर करें और महिला बाल विकास विभाग पेमेंट उन्हें करेगा। इस पर सुबोध हरितवाल ने कहा है कि सवाल फिर खड़े होता है कि ये क्यों करना पड़ा, आखिर ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि प्रक्रिया को रद्द करते हुए आनन-फानन में पीडब्ल्यूडी को एजेंसी बनाने का निर्णय लिया गया, जबकि कार्यक्रम में सिर्फ 4 दिन बाकी है और इससे बड़ा सवाल ये है कि क्यों पीडब्ल्यूडी विभाग ने कार्य को सीधे तौर पर खारिज करते हुए असमर्थता जाहिर कर दी। सुबोध हरितवाल ने कहा कि इस पूरे प्रकरण से ये साफ तौर पर स्थापित होता है कि महिला बाल विकास विभाग कही न कही भ्रष्टाचार में लिप्त है और अब लीपापोती की तैयारी में लगा हुआ है परंतु दूसरे विभाग इनके कृत्य में शामिल होने से साफ बचते हुए नजर आ रहे हैं।
दुर्ग में मुख्यमंत्री की बड़ी बैठक: 40 IT कंपनियों के साथ MOU और चिटफंड निवेशकों को मिली डूबी रकम की वापसी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दुर्ग में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण की बैठक के दौरान विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (जीरामजी) को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आजीविका के लिए क्रांतिकारी योजना बताया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना एक नई ग्रामीण रोजगार योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को बढ़ावा देना है। यह योजना मनरेगा की जगह पर शुरू की गई है और इसमें कई नए प्रावधान किए गए हैं।

इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा, जो पूर्व में केवल 100 दिवस का था। काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता, एक सप्ताह में मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। अगर मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर नहीं किया जाता है, तो 0.05 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाएगा। इसके तहत ग्राम पंचायतों को योजना बनाने और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है।
भारत सरकार द्वारा इस योजना के लिए वर्ष 2026-27 में 95,692.31 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है। उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती बजट 88,000 करोड़ रुपये (मनरेगा के लिए) निर्धारित था। मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा है कि इससे व्यापक पैमाने पर जरूरतमंदों को उनके गांवों में रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय की मौजूदगी में आज 40 आईटी कंपनियों और आईटी के निदेशकों के बीच एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री श्री साय ने यस चिट फंड कंपनी के निवेशकों को उनके द्वारा निवेश किए गए राशि का चेक प्रदान किया। इसके अंतर्गत कुल 4601 निवेशकों को 7 करोड़ 38 लाख 24 हजार 100 की राशि का चेक प्रदाय किया गया।
