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सीएसईबी दर्री प्लांट में बड़ा हादसा, स्टाप डैम का तटबंध टूटने से प्लांट में घुसा पानी, प्रोडक्शन हुआ ठप…
कोरबा। सीएसईबी के दर्री प्लांट में आज सुबह बड़ा हादसा हो गया. स्टॉप डैम का तटबंध टूटने से पॉवर प्लांट के अंदर पानी घुस गया, जिससे प्रोडक्शन ठप पड़ गया. प्लांट में पानी भरता देख कार्यरत कर्मचारी जान बचाकर भागे.
घटना सुबह करीबन 11 बजे की है. जब स्टाप डैम का तटबंध टूटने से बड़ी मात्रा पर पानी पॉवर प्लांट के अंदर जा घुसा. इस दौरान प्लांट के अंदर मैजूद कर्मचारियों में भगदड़ मच गया. कर्मचारियों ने भागकर अपनी जान बचाई. वहीं प्लॉट के मशीनों में पानी घुस जाने से प्रोडक्शन ठप पड़ गया है.
पूरे घटनाक्रम को प्लांट प्रबंधन की लापरवाही बताया जा रहा है. डैम में पहले से दरार थी, जिसके संबंध में कर्मचारियों ने अधिकारियों को अवगत था, लेकिन अधिकारियों ने समय रहते खामी को दुरुस्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया, जिसकी वजह से आज का हादसा हुआ है.
घटना के बाद प्लांट में घुसे पानी को निकालने का काम किया जा रहा है. वहीं तटबंध को बनाने के लिए अधिकारी-कर्मचारी जुटे हुए हैं. इस हादसे से हुए प्लांट को नुकसान का आंकलन समय आने पर किया जाएगा, लेकिन प्लांट का ठप हुआ विद्युत उत्पादन कब से शुरू हो पाएगा, इसका भी जवाब दे पाने में अधिकारी नाकाम नजर आ रहे हैं.
अवैध धान भंडारण पर जिला प्रशासन का बड़ा अभियान, 06 प्रकरणों में 218 क्विंटल धान जप्त
रायपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत समर्थन मूल्य पर संचालित धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा अवैध धान भंडारण और परिवहन के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कृषि उपज मंडी बालोद की उड़न दस्ता टीम ने आज विभिन्न गांवों में सघन जांच कर बड़ी मात्रा में अवैध धान जब्त किया।


तहसीलदार आशुतोष शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि उड़न दस्ता दल द्वारा मंडी अधिनियम के तहत अब तक कुल 06 प्रकरण दर्ज कर 218 क्विंटल धान जप्त किया गया है। आज की कार्रवाई में बालोद तहसील अंतर्गत ग्राम लिमोरा से 22 क्विंटल, लोण्डी से 40 क्विंटल, पोण्डी से 99 क्विंटल, भेड़िया नवागांव से 32 क्विंटल तथा बेलमांड़ से 24 क्विंटल धान अवैध भंडारण की स्थिति में पकड़ा गया।
जिला प्रशासन की यह सख्त और निरंतर निगरानी दर्शाती है कि अवैध धान के परिवहन एवं संग्रहण पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।
जमीन गाइडलाइन दर में बढ़ोतरी पर बिफरे कांग्रेसी, पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू ने कहा-
रायपुर। जमीन की नई गाइडलाइन दर जारी होते ही सियासी बयान सामने आने लगे हैं. पूर्व छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने इसे आम उपभोक्ताओं और किसानों को लूटने जैसा कृत्य करार दिया है. वहीं पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने इसे भू-माफिया के अनुसार बनाया कानून बताया है.
पूर्व छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने कहा कि यह आम उपभोक्ताओं और किसानों को लूटने जैसा कृत्य है. हमारी सरकार ने सरकारी कीमतों में 30% की कमी की थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने वह छूट समाप्त कर दी है. इससे जमीन और मकान दोनों महंगे हो गए हैं.
उन्होंने अव्यावहारिक तरीके से गाइडलाइन दर बढ़ाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे जमीन के दाम कई गुना बढ़ जाएंगे. इससे किसान के साथ आम लोग नुकसान में रहेंगे. यह फैसला सिर्फ सरकार के राजस्व बढ़ाने के लिए है, इसमें आम उपभोक्ता और किसान लाभान्वित नहीं होंगे, इससे भूमाफिया को फायदा मिलेगा.
वहीं जमीन की नई दरों को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि बीजेपी लोगों को बेरोजगार करना चाहती है. कभी छोटे-छोटे जमीन लेने वाले लोगों की रजिस्ट्री को रोकने का प्रयास करती है, तो कभी खरीदी-बिक्री में अलग-अलग प्रयोग से शुल्क बढ़ाकर नुकसान पहुंचाने का काम करती है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार में भूपेश बघेल ने रियायत देने का काम किया था. इस सरकार में तो जमीन का व्यापार करने वाले लोग जुड़े हुए है. अब भू-माफियाओं के अनुसार नियम-कानून को बनाया जा रहा है, आम लोगों को आने वाले समय में बहुत परेशानी होने वाली है, यह गाइडलाइन लोगों का काम छीनने वाला है.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया छत्तीसकला ब्राण्ड एवं डिजिटल फाइनेंस बुकलेट का किया विमोचन
रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में बुधवार का दिन ग्रामीण आजीविका, महिला उद्यमिता और वित्तीय समावेशन को नई ऊर्जा देने वाला दिन रहा। जहां प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त के राज्य स्तरीय वितरण कार्यक्रम के अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और हजारों ग्रामीण महिलाओं की उपस्थिति में बहुप्रतीक्षित एकीकृत राज्य ब्राण्ड छत्तीसकला तथा डिजिटल फाइनेंस बुकलेट का विमोचन किया।


ग्रामीण महिला उत्पादों को मिला राज्य का पहला एकीकृत ब्राण्ड ‘छत्तीसकला’
राज्य की ग्रामीण गरीब महिलाओं द्वारा निर्मित गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को एक ही पहचान और एकीकृत बाजार मंच प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) ने 'छत्तीसकला' ब्राण्ड की शुरुआत की है। इस ब्रांड के अंतर्गत वर्तमान में मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पाद, चाय, अचार, स्नैक्स, हैंडलूम एवं हस्तशिल्प निर्मित ढोकरा आर्ट, बांस शिल्प, मिट्टी एवं लकड़ी उत्पाद, अगरबत्ती एवं पूजा सामग्री जैसे विविध उत्पादों पर मानकीकरण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की योजना है। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि छत्तीसकला ब्रांड ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनेगा। यह ब्राण्ड उनके उत्पादों को राज्य से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक ले जाएगा।
48 बीसी सखियों की सफलता की गाथा का डिजिटल फाइनान्स बुकलेट का हुआ विमोचन
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने डिजिटल फायनान्स बुकलेट का भी विमोचन किया गया, जिसमें राज्यभर की 48 बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट सखियों (बीसी सखियों) की प्रेरणादायक सफलताओं को दर्ज किया गया है।
3775 बीसी सखियाँ सक्रिय रूप बैंकिंग सेवाएँ दे रही
वर्तमान छत्तीसगढ़ में कुल 3775 बीसी सखियाँ सक्रिय रूप से घर-घर बैंकिंग सेवाएँ दे रही हैं और पिछले चार वर्षों में 3033.48 करोड़ से अधिक का वित्तीय लेन-देन कर चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो महिलाएँ कभी घरों से बाहर निकलने में संकोच करती थीं, आज वही महिलाएँ गाँव-गाँव वित्तीय सेवाएँ पहुँचाकर सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन की राह बना रही हैं।
हजारों स्व-सहायता समूह को मिला वित्तीय सशक्तिकरण
इस भव्य कार्यक्रम से ग्रामीण महिला समूहों को बड़ी वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। जिसके अंतर्गत 1080 स्व-सहायता समूहों को 1.62 करोड़ रुपए की रिवॉल्विंग निधि एवं 8340 स्व-सहायता समूहों को 50.04 करोड़ रूपए की सामुदायिक निवेश निधि, बैंक लिंकेज के रूप में 229.74 करोड़ रूपये प्रदान किये गए। इसके साथ ही 1533 महिला उद्यमियों को 6.23 करोड़ रुपए का उद्यमिता ऋण भी प्रदान किया गया है। इन वित्तीय प्रावधानों से ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि एवं नए उद्यमों की स्थापना और आर्थिक स्वावलंबन को मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण समृद्धि, महिला नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की नई दिशा
धमतरी में हुआ यह आयोजन न केवल आर्थिक सहायता का वितरण था, बल्कि ‘आत्मनिर्भर ग्रामीण छत्तीसगढ़’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। 'छत्तीसकला' ब्राण्ड, बीसी सखी मॉडल और व्यापक वित्तीय समर्थन तीनों मिलकर ग्रामीण आजीविका की दशा और दिशा बदलने वाले साबित होंगे।
अवैध खनन, जल प्रदूषण और फ्लाई ऐश डंपिंग पर प्रशासन ने लिया संज्ञान
जांजगीर-चांपा। जिले के बिरगहनी ग्राम पंचायत में चूना पत्थर खदान संचालकों द्वारा किए जा रहे अवैध खनन से भूजल प्रदूषण और भूजल स्तर में भारी गिरावट के साथ उत्पन्न गंभीर पर्यावरणीय और जन स्वास्थ्य संकट पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है. खनिज अधिकारी ने कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग और क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण संरक्षण मंडल को शीघ्र जांच कर की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है.
जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई आरटीआई कार्यकर्ता विकास शर्मा द्वारा राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के सलाहकार को भेजे गए ई-मेल के संदर्भ में की है. इस ई-मेल में चूना पत्थर खदान संचालकों द्वारा अवैध खनन के साथ ही फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग से हो रहे गंभीर पर्यावरणीय खतरों का उल्लेख किया गया था.
प्रमुख कार्रवाई और निर्देश
कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग, जांजगीर-चांपा को चूना पत्थर खदान संचालकों द्वारा अवैध खनन, भूजल प्रदूषण और भूजल स्तर में गिरावट से संबंधित बिंदुओं की शीघ्र जांच कर की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है.
वहीं क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण संरक्षण मंडल, बिलासपुर को अवैध खनन और फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट के बिंदुओं पर शीघ्र जांच करने और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी खनिज शाखा को प्रेषित करने का निर्देश दिया है.
खनिज अधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे जल्द से जल्द अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि मामले में वैधानिक और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोका जा सके.
रायपुर के 70 वार्डों के जमीनों की नई सरकारी गाइडलाइन दर…
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे राज्य के लिए गाइडलाइन दरों का व्यापक, वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है. यह निर्णय जनता के हित, पारदर्शिता, उचित बाजार मूल्यांकन और नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. गाइडलाइन नियम 2000 के अनुसार दरों का प्रतिवर्ष पुनरीक्षण आवश्यक है, परंतु वर्ष 2017-18 के बाद से दरों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ था. इस कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में भारी अंतर पैदा हो गया था—जिसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों, भूमिस्वामियों, संपत्ति धारकों और आम नागरिकों पर पड़ रहा था.
राज्य में गाइडलाइन दरों के पिछले ढांचे नगरीय क्षेत्रों में दरों में भारी विसंगतियाँ थीं. एक ही सड़क, वार्ड या आसपास के क्षेत्रों में अनुपातहीन अंतर दिखाई देता था. एक ही सड़क पर स्थित संपत्तियों की दरें अलग-अलग थीं, जिससे नागरिकों को वास्तविक मूल्यांकन में कठिनाई होती थी. ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक ही मार्ग पर स्थित गाँवों की दरों में अतार्किक भिन्नता थी, जिससे किसानों को मुआवज़ा और बैंक लोन में नुकसान होता था. पिछले सात वर्षों में बने नए हाईवे, कॉलोनी, औद्योगिक क्षेत्र आदि की दरें निर्धारित नहीं थीं, जिससे नागरिकों को संपत्ति मूल्य जानने में कठिनाई हो रही थी।
वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ पी चौधरी के दिशानिर्देश पर गाइडलाइन दरों को पुर्ननिर्धारित करते हुए पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनसुलभ बनाया गया है. नगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन को रोड-वाइज तैयार किया गया है, ताकि एक सड़क और समान परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की दरें समान हों. अत्यधिक कंडिकाओं को समायोजित कर संख्या कम की गई, ताकि नागरिकों को मूल्य समझने में सरलता हो. ग्रामीण क्षेत्रों में सभी गाँवों की दरों को नक्शे में प्रविष्ट कर, समान मार्ग और समान परिस्थितियों वाले गाँवों की दरें यथासंभव समान और तर्कसंगत की गईं.वर्तमान दरों की वैज्ञानिक मैपिंग कर रैशनलाइज़्ड बेस रेट तैयार किए गए और इन्हीं के आधार पर नई दरें प्रस्तावित की गईं है.
जमीनों की नई सरकारी गाइड लाइन आज से लागू हो गई है। नीचे देखें राजधानी रायपुर के 70 वार्डों की नई सरकारी गाइडलाइन






















































































रायपुर एयरपोर्ट पर लैंड होने वाली इंडिगो फ्लाइट अचानक हुई भुवनेश्वर डायवर्ट, विमान में तकनीकी खराबी से मचा हड़कंप, दिल्ली जाने वाले यात्री परेशान
रायपुर। रायपुर एयरपोर्ट में दिल्ली से रायपुर लैंड होने वाली फ्लाइट में तकनीकी समस्या आने के कारण भुवनेश्वर डायवर्ट कर दिया गया है। बताया जा रहा है आज सुबह विमान के लैंडिंग से ठीक पहले तकनीकी समस्या हुई। जिसके चलते फ्लाइट को डायवर्ट किया गया। वहीं दूसरी तरफ विमान के डायवर्ट करने से रायपुर से दिल्ली जाने वाली यात्रियों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक आज सुबह 9:15 बजे रवाना होने वाली इंडिगो की फ्लाइट नंबर 6E6476 को तकनीकी दिक्कतों के चलते रायपुर में लैंडिंग की अनुमति नहीं मिल सकी। जिसके बाद फ्लाइट को भुवनेश्वर के लिए डायवर्ट कर दिया गया। विमान के समय पर न पहुंचने से रायपुर से दिल्ली जाने वाले यात्री काफी परेशान हो रहे हैं। कई यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स और काम के शेड्यूल पर इसका असर पड़ा है।
बताया जा रहा है कि जिस फ्लाइट को रायपुर की जगह भुवनेश्वर डायवर्ट किया गया, वहीं विमान रायपुर से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाला था, जिससे आगे की शेड्यूल पूरी तरह प्रभावित हो गया। उधर एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच पूरी होने के बाद फ्लाइट को रायपुर लाने और आगे दिल्ली के लिए रवाना करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि अभी उड़ान के नए समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बार-बार हो रही ऐसी तकनीकी दिक्कतों से फ्लाइट में सफर करने वाले यात्रियों में काफी नाराजगी देखी जा रही है।
छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में दो ऐतिहासिक उपलब्धि मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिला अस्पताल पंडरी रायपुर और जिला अस्पताल बलौदाबाजार की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस कार्यक्रम (NQAS) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इनमें पंडरी रायपुर की IPHL देश की प्रथम, जबकि बलौदाबाजार की IPHL देश एवं राज्य की द्वितीय प्रमाणित लैब बनी है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित लैब सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को प्रमाणित करती है।
राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों का यह सीधा परिणाम है कि जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच राज्य की कुल 832 स्वास्थ्य संस्थाओं का राष्ट्रीय मानकों के आधार पर मूल्यांकन और प्रमाणीकरण किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा के दूरस्थ क्षेत्र चिंतागुफा जैसे दुर्गम इलाकों के स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि देश में पहली बार किसी राज्य में लैब्स की इतनी बड़ी और व्यवस्थित श्रृंखला का मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण हुआ है, जिसने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट स्थान दिलाया है।



दोनो लैब्स का मूल्यांकन भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा नामित विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं की टीमों ने किया। पंडरी रायपुर की IPHL का मूल्यांकन 10 सितंबर 2025, जबकि बलौदाबाजार की IPHL का मूल्यांकन 11 सितंबर 2025 को किया गया। दोनों टीमों ने लैब की कार्यप्रणाली, मरीज केंद्रित सेवाएँ, गुणवत्ता नियंत्रण, समयबद्ध रिपोर्टिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की। मूल्यांकन उपरांत, पंडरी रायपुर IPHL को 90% और बलौदाबाजार IPHL को 88% स्कोर के साथ प्रमाणन प्राप्त हुआ। यह स्कोर स्वास्थ्य गुणवत्ता के राष्ट्रीय मानकों में उत्कृष्ट श्रेणी में आता है।
इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की अवधारणा का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे न केवल जांच की गति और विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि लोगों को महंगी निजी जांच लैब्स पर अनावश्यक निर्भरता से भी राहत मिलती है। एकीकृत मॉडल होने के कारण, मरीजों को एक ही स्थान पर किफायती और सटीक जांच रिपोर्ट उपलब्ध हो पाती है।
पंडरी रायपुर की IPHL पूरे राज्य का मॉडल लैब बन चुकी है। यहां प्रतिदिन 3,000 से अधिक जांचें की जाती हैं और 120 से अधिक प्रकार की जांच सेवाएं उपलब्ध हैं। यह लैब ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर कार्य करते हुए रायपुर जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से प्राप्त सैंपल की भी जांच करती है। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में यह लैब मेडिकल कॉलेज और अन्य जिलों से आए नमूनों की जांच भी करती रही है, जिससे इसकी क्षमता और उपयोगिता दोनों प्रमाणित होती हैं।
बलौदाबाजार की IPHL भी सेवा गुणवत्ता के मामले में तेजी से उभरती हुई लैब है। यहां प्रतिदिन 1,000 से 1,200 जांचें की जाती हैं और 100 से अधिक प्रकार की लैब टेस्टिंग उपलब्ध है। लैब में अत्याधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित तकनीशियनों और समयबद्ध रिपोर्टिंग की वजह से जिले के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है। ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को अब जांच के लिए शहर या निजी लैब्स में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पूर्व में भी पंडरी रायपुर IPHL के मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की जा चुकी है। देश के 13 से अधिक राज्यों की टीमें उक्त लैब का निरीक्षण कर इसकी कार्यप्रणाली का अवलोकन कर चुकी हैं। इतना ही नहीं, भारत सरकार द्वारा इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स हेतु जारी की गई विस्तृत गाइडलाइन के मुख्य पृष्ठ पर रायपुर IPHL की फोटो प्रकाशित की गई है। इस मॉडल को PM–ABHIM के अंतर्गत पूरे देश में स्थापित किए जा रहे IPHL नेटवर्क के मार्गदर्शक स्वरूप में अपनाया गया है।
छत्तीसगढ़ में गुणवत्ता आधारित मूल्यांकन की यह प्रक्रिया केवल प्रमाणीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य प्रणाली में स्थायी सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है। NQAS के मानकों में साफ-सफाई, सुरक्षा, रोगी संतुष्टि, रिकॉर्ड प्रबंधन, तकनीकी गुणवत्ता, उपकरण कैलिब्रेशन, बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और स्टाफ क्षमता निर्माण जैसे बिंदुओं का कड़ाई से पालन अनिवार्य है। दोनों लैब्स ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि अर्जित की है।
आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि NQAS कार्यक्रम भारत सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसके जरिए सरकारी अस्पतालों में गुणवत्ता सुधार को संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम में निर्धारित चेकलिस्ट बेहद व्यापक है और प्रमाणन तभी मिलता है जब कोई संस्थान सभी मानकों पर सतत् उत्कृष्टता प्रदर्शित करे।छत्तीसगढ़ की दोनों IPHL लैब्स ने जिस दक्षता और अनुशासन के साथ सभी मापदंडों को पूरा किया है, वह राज्य के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ गुणवत्ता सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस प्रक्रिया में लैब तकनीशियनों, चिकित्सकों और प्रबंधन टीमों ने बड़े समर्पण और परिश्रम के साथ कार्य किया है। पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार IPHL की उपलब्धि पूरे राज्य के लिए प्रेरक है और आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी इसी मॉडल को सुदृढ़ता से लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा दोनों जिला अस्पतालों की IPHL टीमों—चिकित्सकों, तकनीशियनों और स्टाफ—को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं, और IPHLs के राष्ट्रीय प्रमाणन से राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को नई विश्वसनीयता और मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित मानव संसाधन से लैस कर रही है। IPHL जैसी उच्च गुणवत्ता वाली लैब्स ग्रामीण, आदिवासी और पिछड़े इलाकों में समय पर स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आने वाले वर्षों में राज्य भर के जिला अस्पतालों और प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों को इसी मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा।
यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए केवल प्रमाणन नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि राज्य अब राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता केंद्रित स्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में अग्रसर है। IPHL मॉडल के विस्तार से रोगियों की जाँच सेवाएँ और अधिक सुलभ, तीव्र और विश्वसनीय होंगी। इसका सीधा लाभ लाखों नागरिकों को मिलेगा और राज्य के स्वास्थ्य सूचकांकों में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। दोनों IPHL लैब्स की सफलता यह प्रमाणित करती है कि जब वैज्ञानिक मानकों, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक और शासन की दृढ़ इच्छाशक्ति का संगम होता है, तब स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव संभव है। यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल है और आने वाले समय में स्वास्थ्य गुणवत्ता सुधार की दिशा में नए मानक स्थापित करेगी।
"पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार जिलों की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स को देश की प्रथम और द्वितीय क्वालिटी सर्टिफाइड IPHL बनने पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र में आ रहे व्यापक, वैज्ञानिक और संरचनात्मक सुधारों का प्रमाण है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं, और राष्ट्रीय स्तर के इस प्रमाणन ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को नई विश्वसनीयता और मजबूती प्रदान की है। IPHL मॉडल ने ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों तक विश्वसनीय जांच सेवाएँ पहुँचाने का मार्ग मजबूत किया है, और आने वाले समय में राज्य के सभी जिला अस्पतालों को आधुनिक, दक्ष और मानकीकृत मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा।"
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय*
"पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार IPHL के देश की प्रथम और द्वितीय क्वालिटी सर्टिफाइड इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब बनने पर प्रदेशवासियों और पूरी स्वास्थ्य टीम को बधाई। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली में आए ऐतिहासिक बदलाव का परिणाम है। राज्य सरकार प्राथमिक से लेकर जिला स्तर तक सभी स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सशक्त गुणवत्ता तंत्र से लैस कर रही है। IPHL मॉडल ने जांच सेवाओं को तेज, सटीक और किफायती बनाकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच को मजबूत किया है। आने वाले समय में इसी उच्च गुणवत्ता मॉडल का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवा गुणवत्ता का अग्रणी राज्य बनेगा।"
- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल
प्रदेश में 5 दिनों में 14,54,451 क्विंटल धान की खरीदी, टोकन तुंहर एप से किसानों को हो रही है आसानी
रायपुर। राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सिलसिला जोर पकड़ने लगा है। धान खरीदी के 5वें दिन 19 नवंबर को किसानों से 7 लाख 11 हजार 335 क्विंटल धान की खरीदी की गई। धान उपार्जन का यह आंकड़ा बीते 4 दिनों में खरीदे गए धान की मात्रा के लगभग बराबर है। राज्य में 15 नवंबर से लेकर 19 नवंबर तक कुल 14 लाख 54 हजार 451 क्विंटल धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार धान खरीदी के साथ-साथ किसानों को समर्थन मूल्य का भुगतान भी शुरू कर दिया गया है। इसके लिए मार्कफेड द्वारा अपेक्स बैंक को 214.18 करोड़ रूपए जारी कर दिए गए हैैं। यहां यह बता दें कि राज्य के किसानों से क्रय किए गए धान के मूल्य भुगतान के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने मार्कफेड को 26,200 करोड़ रूपए की बैंक गांरटी पहले से दे रखी है। किसानों को धान बेचने में किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए सभी केन्द्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई है। धान खरीदी की व्यवस्था पर निगरानी के लिए सभी केन्द्रों में अधिकारी तैनात किए गए हैं। राज्य स्तर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और जिला स्तर के अधिकारी लगातार दौरा कर धान खरीदी एवं केन्द्रों की व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।
राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने पाए इसको लेकर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। बाहर से धान की आवक की रोकथाम के लिए चेकपोस्ट पर अधिकारी तैनात किए गए हैं। जगह-जगह मॉलवाहकों की औचक जांच भी की जा रही है। गौरतलब है कि धान खरीदी में गड़बड़ी की रोकथाम के लिए राज्य में संचालित सघन अभियान के अंतर्गत अब तक धान के अवैध संग्रहण एवं परिवहन के कुल 373 मामले दर्ज किए गए हैं और 25 हजार 567 क्विंटल धान पकड़ा गया है।
खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के तहत आज सभी जिलों के उपार्जन केन्द्रों में कुल 7,11,353 क्विंटल धान की खरीदी हुई। राज्य के मैदानी हिस्से के जिलों जैसे बालोद, बेमेतरा, दुर्ग, कवर्धा, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर जिले के उपार्जन केन्द्रों में धान की आवक काफी तेज हो गई है। बालोद जिले में अब तक 1,44,468 क्विंटल धान, बेमेतरा में 1,86,972 क्विंटल, दुर्ग में 1,33,514, कवर्धा में 58,958, राजनांदगांव में 1,60,247, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 90,416, बलौदाबाजार-भाटापारा में 1,18,565, धमतरी में 1,55,275, गरियाबंद में 64,090, महासमुंद में 60,883 तथा रायपुर जिले में 1,52,850 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है।
किसानों का मानना है कि धान खरीदी के लिए राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई टोकन तुंहर एप्प की ऑनलाईन व्यवस्था से टोकन प्राप्त करने और धान बेचने में आसान हो रही है। यहां यह उल्लेखनीय है कि खरीफ विपणन सीजन 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए राज्य के 26.50 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीकृत धान का रकबा 29.27 लाख हेक्टेयर है।
शहरी हितग्राहियों को महीनों से नहीं मिल रही PM आवास योजना की किश्त, कांग्रेस ने गड़बड़ी का लगाया आरोप
रायपुर। नगर निगम रायपुर में आज नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश दुबे, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे, पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा, पंकज शर्मा सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में भारी गड़बड़ी का खुलासा किया। कांग्रेस ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ आरोप लगाया कि भाजपा की त्रि-इंजन सरकार गरीबों के घर का सपना चकनाचूर कर रही है।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लगभग 800 हितग्राहियों को महीनों से किश्त की राशि नहीं मिली है, जबकि 1200 से अधिक लोगों को भवन अनुज्ञा (नक्शा) मिल चुका है, लेकिन वे मकान बनाना शुरू नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा 1023 हितग्राहियों की सूची केंद्र सरकार से स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक अप्रूवल नहीं दिया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेताओं ने 800 प्रभावित हितग्राहियों की सूची में से चार लोगों को लाइव कॉल किया। कॉल पर जुड़े हितग्राहियों ने दुखी मन से बताया कि पिछले 5 से 8 महीनों से उन्हें किस्त की राशि नहीं मिली है, जिसके कारण वे उधार लेकर और महिलाओं के गहने गिरवी रखकर मकान बना रहे हैं। एक हितग्राही ने तो अधूरा मकान तोड़कर किराए के घर में रहना शुरू कर दिया है। कॉल में जुड़े हितग्राहियों में हीरापुर के क्रांति यादव, सड्डू बजरंग पारा के पलटन निषाद, नालापारा (कचना) के प्रेम कुमार और अयोध्या नगर, चांगोराभाठा की शीला ध्रुव शामिल थे।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर यही आरोप लगाया था कि गरीबों के मकान बनने नहीं दे रही है। आज हम तथ्यों और आंकड़ों के साथ साबित कर रहे हैं कि नियत में खोट किसकी है। ट्रिपल इंजन की सरकार गरीबों की योजनाओं को जानबूझकर दबा रही है। कांग्रेस पार्टी गरीबों का हक दिलाकर रहेगी। जरूरत पड़ी तो सड़क पर भी उतरेंगे।
इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पीएम आवास योजना में गड़बड़ी की जांच समेत ये प्रमुख मांगें की है-
- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में हुई गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जांच हो।
- दोषी अधिकारियों व जिम्मेदार लोगों पर तुरंत कार्रवाई हो।
- सभी लंबित किस्तें एवं अप्रूवल तत्काल जारी किए जाएं।
नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस बड़े पैमाने पर सड़क संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि जब शहरी क्षेत्र में योजनाका यह हाल है तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति की कल्पना करना भी मुश्किल है।
स्कूलों के समय में हो सकता है बदलाव, बच्चों को शीतलहर से बचाने सभी डीईओ को दिशा निर्देश जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस बीच स्कूली बच्चों को शीतलहर से बचाव के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी को दिशा निर्देश जारी किए हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग, नगरीय निकाय, मौसम विभाग, लोक निर्माण विभाग, श्रम विभाग, पर्यटन विभाग और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए अलग-अलग निर्देश दिए गए हैं। जारी पत्र में शिक्षा विभाग के लिए कहा गया है कि भारतीय मौसम विज्ञान द्वारा शीतलहर से संबंधित दी गई चेतावनी अनुसार विधिवत स्कूल एवं शैक्षणिक संस्थानों को खोलने के समय में परिवर्तन करने के लिए आवश्यक आदेश जारी किया जाए। शैक्षणिक संस्थाओं के क्लास रूम को गरम रखने की यथोचित व्यवस्था की जाए।
पत्र में कहा गया है कि शीत लहर से प्रभावित होने पर प्राथमिक उपचार के लिए प्राथमिक उपचार बॉक्स की पर्याप्त संख्या और विद्यालय में इसकी उचित स्थान पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। अस्पतालों / आपातकालीन सेवा प्रदान करने वाले संस्थाओं/विभागों का संपर्क नम्बर का विवरण विद्यालय में रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। गंभीर रूप से शीतलहर से प्रभावित होने वाले विद्यार्थियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन और विद्यालय के जिम्मेदार शिक्षक का नाम चिन्हांकित करना होगा।
विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक संस्थाओं में आवश्यकतानुसार शीतलहर से बचाव से संबंधित आवश्यक निर्देश / सुझाव के बैनर लगाया जाए। शीत लहर (शीतघात) से बचने के लिए शिक्षक विद्यार्थियों को कक्षाओं में आवश्यक निर्देश दें।
सड़क पर मवेशियों की मौत मामले में हाईकोर्ट का कड़ा रुख, नाराजगी जाहिर करते हुए कहा-
बिलासपुर। रतनपुर-केंदा सड़क पर 17 मवेशियों की तेज रफ्तार हाइवा से कुचलकर हुई मौतों के मामले पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि हाईकोर्ट इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है, इसके बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। पहले सुनवाई के दौरान नगर निगम से लेकर पंचायतों तक जवाबदेही तय की गई थी, लेकिन अब भी ऐसी घटनाएं होना दुखद है।
डिवीजन बेंच ने सख्त रवैय्या अपनाते हुए कहा कि अब जवाबदेही तय करते हुए संबंधित अधिकारियों की सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करने को कहना पड़ेगा ।शासन की ओर से कहा गया पुलिस ने आरोपी चालक के साथ-साथ मवेशी मालिकों के खिलाफ भी एफआईआर की है।
बता दें, कि सड़कों पर मवेशियों की मौतों को लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने एसओपी लागू करने की जानकारी दी थी। इस पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने कहा था कि यह एसओपी सिर्फ कागजों तक सीमित न रह जाए, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू किया जाए। आवारा पशु केवल ग्रामीणों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा है। इसके बाद भी लेकिन रतनपुर- केंदा मार्ग पर 17 मवेशियों की तेज रफ्तार हाइवा से कुचलकर मौत हो गई थी।
पिछली सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने बताया कि एसओपी लागू की गई है। अब राज्य सरकार नगरीय निकायों से लेकर पंचायतों तक इस तरह की घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करने जा रही है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अफसर- कर्मचारी के सर्विस रिकॉर्ड में इसे दर्ज किया जाए।
हाईकोर्ट में वर्ष 2019 में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं लगाई गई थीं। इसमें सड़कों की खराब दशा, सड़क पर बैठे हुए मवेशियों से होने वाली परेशानी, हादसों में मवेशियों की मौत समेत कई विषय उठाए गए थे। तब से अब तक हाईकोर्ट इस मामले पर कई बार सुनवाई कर चुका है, लेकिन हालात जस के तस हैं।
अतिरिक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा के प्रभार से हटाए गए डॉ. पुनीत गुप्ता, आदेश जारी
रायपुर। राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. पुनीत गुप्ता को अतिरिक्त संचालक, चिकित्सा शिक्षा के प्रभार से हटा दिया है। इसका आदेश आज चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जारी किया।
बता दें कि डॉ. पुनीत गुप्ता को अप्रैल 2025 में पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर में अपने मूल दायित्व विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी और प्राध्यापक नेफ्रोलॉजी के साथ-साथ संचालनालय, चिकित्सा शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। सात महीने बाद विभाग ने यह जिम्मेदारी वापस ले ली है।
जारी आदेश में कहा गया है कि डॉ. गुप्ता को अतिरिक्त संचालक, चिकित्सा शिक्षा के प्रभार से मुक्त किया जाता है। वे अब अपने मूल पद पर ही कार्य करेंगे। हालांकि आदेश में प्रभार छीने जाने का कारण नहीं बताया गया है, लेकिन विभागीय अधिकारियों के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा में हालिया पुनर्गठन और कार्यों के पुनर्वितरण के चलते यह निर्णय लिया गया है।

गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक पुनरीक्षण किसानों और जनता को देगा वास्तविक लाभ— मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे राज्य के लिए गाइडलाइन दरों का व्यापक, वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह निर्णय जनता के हित, पारदर्शिता, उचित बाजार मूल्यांकन और नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
गाइडलाइन नियम 2000 के अनुसार दरों का प्रतिवर्ष पुनरीक्षण आवश्यक है, परंतु वर्ष 2017-18 के बाद से दरों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ था। इस कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में भारी अंतर पैदा हो गया था—जिसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों, भूमिस्वामियों, संपत्ति धारकों और आम नागरिकों पर पड़ रहा था।
राज्य में गाइडलाइन दरों के पिछले ढांचे नगरीय क्षेत्रों में दरों में भारी विसंगतियाँ थीं। एक ही सड़क, वार्ड या आसपास के क्षेत्रों में अनुपातहीन अंतर दिखाई देता था। एक ही सड़क पर स्थित संपत्तियों की दरें अलग-अलग थीं, जिससे नागरिकों को वास्तविक मूल्यांकन में कठिनाई होती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक ही मार्ग पर स्थित गाँवों की दरों में अतार्किक भिन्नता थी, जिससे किसानों को मुआवज़ा और बैंक लोन में नुकसान होता था। पिछले सात वर्षों में बने नए हाईवे, कॉलोनी, औद्योगिक क्षेत्र आदि की दरें निर्धारित नहीं थीं, जिससे नागरिकों को संपत्ति मूल्य जानने में कठिनाई हो रही थी।
वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ पी चौधरी के दिशानिर्देश पर गाइडलाइन दरों को पुर्ननिर्धारित करते हुए पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनसुलभ बनाया गया है। नगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन को रोड-वाइज तैयार किया गया है, ताकि एक सड़क और समान परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की दरें समान हों। अत्यधिक कंडिकाओं को समायोजित कर संख्या कम की गई, ताकि नागरिकों को मूल्य समझने में सरलता हो। ग्रामीण क्षेत्रों में सभी गाँवों की दरों को नक्शे में प्रविष्ट कर, समान मार्ग और समान परिस्थितियों वाले गाँवों की दरें यथासंभव समान और तर्कसंगत की गईं।वर्तमान दरों की वैज्ञानिक मैपिंग कर रैशनलाइज़्ड बेस रेट तैयार किए गए और इन्हीं के आधार पर नई दरें प्रस्तावित की गईं है।
नवीन दरें – जनता को सीधा लाभ
नगरीय क्षेत्रों में लगभग 20% की तर्कसंगत वृद्धि की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के हित में दरों में 50% से 300% तक वृद्धि की गई है—जिससे किसानों को भूमि अधिग्रहण आदि में 3 गुना तक अधिक मुआवज़ा मिलेगा।
नवीन दरों से किसानों/भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का अधिक एवं न्यायसंगत मुआवज़ा प्राप्त होगा। संपत्ति के विरुद्ध बैंक से अधिक राशि का लोन स्वीकृत होगा। आम नागरिकों के लिए अपनी संपत्ति की गाइडलाइन दर स्पष्ट और समझने में आसान होगी।
वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और वैज्ञानिक पुनरीक्षण जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि 2017-18 के बाद दरों में संशोधन न होने से राज्य में वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में गंभीर असंतुलन पैदा हो गया था, जिससे किसान, भूमिस्वामी और सामान्य नागरिक प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे थे। नई गाइडलाइन दरें रोड-वाइज और वैज्ञानिक मैपिंग के आधार पर तैयार की गई हैं, ताकि हर क्षेत्र में दरें तर्कसंगत, समान और समझने में सरल हों। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 50% से 300% तक की वृद्धि किसानों को उचित मुआवज़ा और अधिक बैंक लोन प्राप्त करने में बड़ा लाभ देगी, जबकि नगरीय क्षेत्रों में 20% की तार्किक वृद्धि मूल्य-विसंगतियाँ दूर करेगी। श्री चौधरी ने कहा कि विभाग भविष्य में भी विकास, नई बसाहटों, बाजार प्रवृत्तियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर नियमित समीक्षा करता रहेगा, ताकि किसी भी नागरिक को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य से वंचित न होना पड़े।
उल्लेखनीय है कि लंबे अंतराल के बाद गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और महत्त्वपूर्ण संशोधन किया गया है। भविष्य में भी विभाग द्वारा जिले स्तर पर उस क्षेत्र में हो रहे विकास, नए निर्माण, क्षेत्रीय परिस्थितियों, बाजार प्रवृत्तियों तथा नई बसाहटों/कॉलोनियों के विस्तार का नियमित आकलन किया जाता रहेगा। इसी आधार पर गाइडलाइन दरों में समय-समय पर आवश्यक, तर्कसंगत और जनहितकारी संशोधन किए जाते रहेंगे, ताकि नागरिकों को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे और किसी भी प्रकार की मूल्य-विसंगतियाँ उत्पन्न न हों।
"गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण राज्य के किसानों, भूमिस्वामियों और आम नागरिकों के हित में उठाया गया अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम है। पिछले कई वर्षों से दरों में संशोधन न होने के कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। नई दरें न केवल न्यायसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करेंगी, बल्कि किसानों को भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवज़ा, नागरिकों को संपत्ति का सही मूल्य और बैंक से अधिक ऋण प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करेंगी। शासन की मंशा स्पष्ट है—हर नागरिक को उसकी संपत्ति का उचित मूल्य मिले और किसी भी प्रकार की विसंगतियाँ या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। यह निर्णय प्रदेश के आर्थिक परिवेश को अधिक पारदर्शी, संतुलित और जनहितकारी बनाएगा।" -
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मनेंद्रगढ़ DFO मनीष कश्यप ‘Nexus of Good’ अवॉर्ड्स से हुए सम्मानित, गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ में विकसित एशिया के सबसे बड़े मरीन फॉसिल पार्क को संवारने और पहचान दिलाने के लिए आईएफएस मनीष कश्यप को नेक्सस ऑफ़ गुड फाउंडेशन अवॉर्ड्स 2025 से दिल्ली में सम्मानित किया गया है। पिछले वर्ष भी अपने नवाचार “महुआ बचाओ अभियान “के लिए भी डीएफओ कश्यप को सम्मानित किया गया था।
अवार्ड के लिए प्रतिभागियों का चयन UPSC के रिटायर्ड चेयरमैन आईएएस दीपक गुप्ता की कमेटी ने किया था। Nexus of good फाउंडेशन रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की संस्था है, जो देश के अधिकारियों और संस्थाओं के नवाचार कामों को विभिन्न स्तर पर सराहने और हाईलाइट करने का काम करती है। इस वर्ष के अवार्ड सेरेमनी के चीफ गेस्ट बीके चतुर्वेदी ( रिटायर्ड ias और भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी) रहे। इस साल कुल 150 नवाचार कामों के लिए आवेदन आए।
देश के कई अधिकारियों और संस्थाओं को हेल्थ, एजुकेशन, कृषि, प्रशासन, समाज सेवा, महिला उत्थान आदि के लिए कुल 26 नवाचार काम को अवार्ड के लिए चुना गया। मनीष कश्यप को पर्यावरण संरक्षण केटेगरी में स्थान मिला। पिछले वर्ष घटती महुआ संख्या के पुनरुत्पादन बढ़ाने के लिए “ महुआ बचाओ अभियान” के लिए भी डीएफओ मनीष कश्यप को अवार्ड से सम्मानित किया गया था।

अब तक यहां आ चुके हैं 13 हजार से ज्यादा टूरिस्ट
बता दें मनेंद्रगढ़ में स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क एशिया का सबसे बड़ा मरीन फॉसिल पार्क है और देश में ऐसे सिर्फ 5 स्थल है, जहां मरीन फॉसिल पाये जाते हैं। इसकी खोज 1954 में हुई थी पर इसको टूरिस्ट स्थल के रूप में पहचान नहीं मिल पाई थी। इस ऐतिहासिक धरोहर को वन विभाग ने संरक्षण के साथ संवारने का काम किया। वहां प्राकृतिक रूप से मौजूद ग्रेनाइट के पत्थरों में पुरातन काल के 35 जानवरों और डायनासोरों की मूर्ति उकेरी गई। कैक्टस गार्डन, इंटरप्रिटेशन सेंटर और हसदेव नदी में बोटिंग चालू किया गया। आज यह पार्क मनेंद्रगढ़ ज़िले को पहचान दिला रहा है। अप्रैल 2025 में उद्घाटन के बाद अब तक इसे देखने 13 हजार से ज्यादा टूरिस्ट आ चुके हैं। मध्यप्रदेश से भी पर्यटक इसके लिए आकर्षित हो रहे हैं। भविष्य में ये संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। सरगुजा संभाग में पर्यटक मैनपाट घूमने के लिए ही आते हैं, पर गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क भी अब टूरिस्ट का पसंद बनते जा रहा है।
PM किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी: छत्तीसगढ़ के 25 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 500 करोड़, केंद्रीय मंत्री चौहान ने दी 2,225 करोड़ की ग्रामीण सड़कों की सौगात
रायपुर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धमतरी में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में 2,225 करोड़ रुपये की ग्रामीण सड़क परियोजनाओं, मखाना बोर्ड का विस्तार, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान और अनेक विकासपरक घोषणाओं का औपचारिक शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोयंबटूर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का देशव्यापी वितरण और छत्तीसगढ़ के 25 लाख किसानों के खातों में 500 करोड़ रुपये का सीधा हस्तांतरण इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। हज़ारों किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सम्पन्न इस समारोह ने राज्य के विकास पथ को नई दिशा प्रदान की।






इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के धमतरी में राज्यस्तरीय समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, राज्य के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, मंत्री दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana) के अंतर्गत 2,225 करोड़ रुपये की स्वीकृत ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का दस्तावेज प्रस्तुत किया। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लगभग 780 गाँव पहली बार पक्की सड़क से जुड़ेंगे और 2,500 किलोमीटर से अधिक नई ग्रामीण सड़कें निर्मित की जाएँगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता ने देश में बुनियादी ढांचे के विस्तार को नई दिशा दी है और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण आर्थिक गतिविधियों को सशक्त बनाता है।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने घोषणा की कि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किए गए राष्ट्रीय मखाना विकास बोर्ड में अब छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के किसानों को मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और राष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ने का बड़ा अवसर प्राप्त होगा।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए प्रमुख राष्ट्रीय निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का शांतिपूर्ण निष्कासन, महिला आरक्षण कानून का पारित होना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाले निर्णय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम भारत की विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक मील के पत्थर हैं।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे समन्वित अभियान से राज्य में नक्सली हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है और अब नक्सलवाद “अंतिम चरण” में पहुँच चुका है। उन्होंने इसे प्रदेश के विकास, निवेश और ग्रामीण शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने छत्तीसगढ़ की वर्तमान राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य अब पुनः विकास की मुख्यधारा में तेजी से लौट रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण कई केंद्रीय योजनाएँ प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकीं, किन्तु अब लाभ सीधे पात्र किसानों, ग्रामीणों और महिलाओं तक पहुँच रहा है।
कार्यक्रम में हजारों किसानों एवं ग्रामीण नागरिकों की सहभागिता रही। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, कृषि किट, उपकरण और अन्य सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम स्थल पर कृषि तकनीक, ग्रामीण अवसंरचना, महिला स्व-सहायता समूहों, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और आत्मनिर्भर भारत से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक देखा।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित इस राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख किया और कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते समय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों की आय-वृद्धि, कृषि तकनीकी विस्तार, सिंचाई क्षमता, जैविक खेती और मिलेट मिशन जैसे विषयों पर केंद्रित महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अन्नदाताओं का सम्मान और समृद्धि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्त जारी होने से राज्य के 24 लाख 70 हजार 640 किसानों को सीधा लाभ प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि 494 करोड़ रुपये की राशि किसानों, वनपट्टाधारी हितग्राहियों एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के परिवारों के बैंक खातों में अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने इस योजना में 2 लाख 75 हजार नए किसानों को पंजीकृत कर लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई है।
धान खरीदी में छत्तीसगढ़ अग्रणी
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को अधिक मजबूत और किसान-हितैषी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी कर रही है तथा किसानों को 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक बेचने की अनुमति दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हमारे किसानों के विश्वास और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रारंभिक वर्षों में धान खरीदी केवल 5 लाख मीट्रिक टन हुआ करती थी, जो अब कई गुना बढ़ गई है।
कृषक उन्नति योजना का विस्तार
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार ने कृषक उन्नति योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें दलहन, तिलहन और मक्का फसलों को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि धान फसल में लाभ ले चुके किसान यदि इन फसलों की खेती करेंगे तो उन्हें भी योजना का पूरा लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ रेगहा , बटाई, लीज तथा डूबान क्षेत्र के किसानों को भी दिया जा रहा है, जिससे कृषि आधारित आजीविका को सीधा बल मिल रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी बताया कि पिछले 22 महीनों में लगभग सवा लाख करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों के खातों में अंतरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के दो सप्ताह के भीतर 13 लाख किसानों को 3,716 करोड़ रुपये बोनस के रूप में दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मिलेट मिशन को दिए गए बढ़ाए गए महत्व से छत्तीसगढ़ के परंपरागत कोदो-कुटकी, रागी उत्पादकों को बड़ा लाभ मिला है। उन्होंने जशपुर जिले में स्वसहायता समूहों द्वारा बनाए जा रहे ‘‘जशप्योर’’ ब्रांड के उत्पादों का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘‘महुआ लड्डू, कोदो-कुटकी आधारित उत्पाद पूरे देश में लोकप्रिय हो रहे हैं।’’
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैविक खेती की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है, क्योंकि जनजातीय क्षेत्रों में रासायनिक खादों का न्यूनतम उपयोग हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2015 से लंबित 115 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,800 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे लाखों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी।उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कटौती से ट्रैक्टरों और कृषि मशीनरी की खरीदी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ‘‘कई व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल यह बताते हैं कि GST कटौती के बाद किसानों की खरीद क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।’’
कार्यक्रम का समापन किसानों के प्रति आभार और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण एवं कृषि विकास की निरंतरता बनाए रखने के संकल्प के साथ हुआ।
नशामुक्त भारत अभियान (NMBA) की 5वीं वर्षगाँठ पर छत्तीसगढ़ में 19,958 स्थलों पर 6.70 लाख से अधिक लोगों ने ली नशामुक्ति की शपथ
रायपुर। नशामुक्त भारत अभियान की 5वीं वर्षगाँठ छत्तीसगढ़ में जनभागीदारी और जागरूकता के अद्भुत संगम के रूप में मनाई गई। समाज कल्याण विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न विभागों के समन्वय से पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर शपथ कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें हर वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम रायपुर स्थित होटल मैरियट में आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया, समाज कल्याण विभाग के सचिव भुवनेश यादव तथा संचालक रोक्तिमा यादव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत की शपथ ली और समाज से नशे के उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त की।




प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों ने इस राष्ट्रीय अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की। 543 स्थलों पर 24,749 प्रतिभागियों, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 505 कार्यक्रमों में 69,356 प्रतिभागियों ने शपथ ली। इसी क्रम में राज्य के 7,452 विद्यालयों में 3,98,675 छात्रों और शिक्षकों ने नशामुक्त समाज निर्माण का संकल्प लिया।
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए आयोजित 9,355 कार्यक्रमों में 1,20,410 प्रतिभागियों ने नशा छोड़ने और दूसरों को प्रेरित करने का संकल्प लिया। साथ ही अन्य 2,103 आयोजनों में 57,570 लोगों ने शपथ लेकर अभियान को और मजबूत किया। इस प्रकार कुल 19,958 स्थलों पर 6,70,760 नागरिकों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण का प्रण लिया।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा नशामुक्त भारत अभियान की 5वीं वर्षगाँठ का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम 18 नवंबर को गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देशभर की तरह छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर देखा गया। राज्य के सभी जिलों, विभागों, शासकीय कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में सामूहिक रूप से प्रसारण का अवलोकन किया गया, जिससे अधिक से अधिक लोग राष्ट्रीय कार्यक्रम से जुड़े।
नशामुक्त भारत अभियान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य मादक द्रव्यों, तंबाकू और शराब की लत जैसी सामाजिक बुराइयों से लोगों को बचाना तथा युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखना है। अभियान के तहत जन-जागरूकता कार्यक्रमों, शिक्षा संस्थानों की गतिविधियों, समुदाय की सहभागिता, काउंसिलिंग, उपचार और पुनर्वास सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि प्रभावित व्यक्तियों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिले।
समाज कल्याण विभाग ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, शहरी प्रशासन, युवा सेवाएँ सहित अनेक विभागों को अभियान से जोड़कर बहु-विभागीय समन्वय के माध्यम से नशामुक्ति की दिशा में एक व्यापक और प्रभावशाली जन-अभियान आगे बढ़ाया है।
इतनी बड़ी जनसहभागिता के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत संदेश दिया है कि राज्य नशामुक्त, स्वस्थ और जागरूक समाज निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। नशामुक्त भारत अभियान के तहत राज्य में जनजागरूकता, काउंसिलिंग और समुदाय आधारित गतिविधियाँ निरंतर जारी रहेंगी, जिससे छत्तीसगढ़ नशामुक्त और प्रगतिशील प्रदेश की दिशा में निरंतर आगे बढ़े।