प्रदेश
चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल पर पर्यटकों की आवाजाही प्रतिबंधित, हादसे के बाद प्रशासन ने लगाई रोक
गरियाबंद। दोस्तों के साथ घुमने आई रायपुर की युवती सोमवार शाम को गजपल्ला वाटरफॉल की गहराई में गिर गई थी. 24 घंटे बाद उनका शव 20 फीट गहराई में पत्थरों के सुरंग के बीच से निकाला गया. इस रेस्क्यू में वन विभाग, नगर सेना, पुलिस और स्थानीय गोताखोर के 60 से ज्यादा जवान जुटे थे. वहीं इस हादसे के बाद चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल में पर्यटकों के आने पर प्रशासन ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है.
सोमवार को लगभग 4 बजे गजपल्ला वाटर फॉल के गहराई में रायपुर की 19 वर्षीय मेहवीस खान गिरी थी. एसडीआरएफ की टीम ने वाटर प्रूफ कैमरे लेकर गहरे पानी के नीचे तलाश की तो पता चला 20 फीट गहराई में मौजूद चट्टान में बने सुरंग नुमा स्थल पर मृतका का शव फंसा है. एसडीआरएफ के लांस नायक उमेश सिन्हा ने बताया कि 20 फीट नीचे पत्थरों के सुरंग में युवती का शव फंसा था, जिसे निकाल लिया गया है. रेस्क्यू में रायपुर के एसडीआरएफ की टीम समेत गरियाबंद प्रशासन के 60 से ज्यादा जवान जुटे थे.
मधुमक्खियों ने रेस्क्यू टीम पर किया हमला
गजपल्ला में मौजूद वृक्ष में दर्जनभर से ज्यादा मधुमक्खियों के छत्ते मौजूद हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन के दरम्यान मधुमक्खियों ने रेस्क्यू टीम पर हमला भी कर दिया. स्थानीय तीन मददगारों पर मधुमक्खी ने हमला कर दिया था, जिससे एक घंटे तक आपरेशन बाधित हुआ. मौके पर पाण्डुका थाना प्रभारी, गरियाबंद रेंजर भी मौजूद हैं.

परिजनों ने किया रतजगा, रो-रो कर बुरा हाल
हादसे की सूचना के बाद रायपुर राजापारा में रहने वाले परिजन और सगे संबंधी बड़ी संख्या में घटना स्थल पर पहुंच गए हैं. मृत्तिका के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है.
चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल पर पूरी तरह प्रतिबंध : डीएफओ
इस घटना के बाद जिला प्रशासन ने चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल पर पर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. डीएफओ लक्ष्मण सिंह ने प्रतिबंध का बोर्ड लगाकर आवाजाही रोक दिया है. प्रवेश स्थानों पर वन विभाग ने जवान तैनात कर दिया है.
मेकाहारा की बंद पड़ी जांच मशीनों पर विपक्ष के सवालों पर घिरे स्वास्थ्य मंत्री
रायपुर। सदन की कार्यवाही के तीसरे दिन डॉ. भीम राव अम्बेडकर मेमोरियल अस्पताल (मेकाहारा) की बंद पड़ी जांच मशीनों और मशीनों की खरीदी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को घेरा. स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस विधायक के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में पांच साल आपकी भी सरकार थी.
कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश ने प्रश्नकाल में मेकाहारा में बंद पड़ी जांच की मशीनों की मरम्मत का मामला उठाया हुए कहा कि मशीनों में से कई मशीन एक संख्या में थे जो वर्षों से ऐसी ही पड़ी है. मशीनों की खरीदी क्यों नहीं हो रही और खरीदी की प्रक्रिया क्या है? स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल ने बताया कि 161 मशीन स्थापित है 50 मशीन बंद है. अभी 70 करोड़ की खरीदी कर रहे हैं. 11 मशीनों का सुधार कार्य चल रहा है.
इस पर कांग्रेस विधायक ने सवाल किया कि कैंसर की जांच करने वाले मशीन क्यों नहीं है? स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वो जांच मशीन की श्रेणी में नहीं इलाज की श्रेणी में आता है, और यह मशीन विदेश से आता है. लेकिन हम उस मशीन को चालू भी करेंगे.
विधायक शेषराज ने सवाल जारी रखते हुए कहा कि यह मशीन पिछले 9 साल पहले आपके ही कार्यकाल में खरीदी गई थी. 9 साल पहले खरीदी गई मशीन अभी तक चालू क्यों नहीं कर पाए है? इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के नेतृत्व में एक अच्छे सोच के साथ मशीन की खरीदी की गई थी, लेकिन कुछ कारणवश अगर चालू नहीं कर पाए, तो अभी करवा रहे है. लेकिन 5 साल आपकी भी सरकार थी.
इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि मैने पिछले 5 साल में भी यह कहा है बार-बार की वह मशीन अगर चालू होगी तो उससे कई लोगों का इलाज किया जा सकता है कोई अनियमितता होगी तो उसकी भी जांच करा सकते हैं.
टैरिफ में न्यूनतम वृद्धि, आपूर्ति में गुणवत्ता — छत्तीसगढ़ में ऊर्जा सुधारों को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2025-26 हेतु घोषित बिजली टैरिफ में मात्र 1.89 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो कि विगत वर्षों में न्यूनतम वृद्धि में से एक है। यह निर्णय जनसुनवाई की प्रक्रिया के बाद पारदर्शी ढंग से लिया गया है और इसे घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर स्टील और रोलिंग मिल उद्योगों तक ने सराहा है।
आम उपभोक्ताओं को राहत, किसानों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि घरेलू विद्युत दरों में केवल 10 से 20 पैसे तक की मामूली वृद्धि की गई है, जबकि कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है — जिसका सीधा असर किसानों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह राशि शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में पहले से अग्रिम भुगतान की जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के कृषक वर्ग पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े। सरकार किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा कर रही है।
उद्योगों को बढ़ावा — स्टील इंडस्ट्री की दरों में कटौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने हेतु मिनी स्टील, रोलिंग मिल और फेरो एलॉय जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों की दरों में कटौती की है। यह निर्णय उद्योगों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बेहतर आपूर्ति और घटती हानियाँ: गुणवत्तापूर्ण वितरण प्रणाली की दिशा में अग्रसर छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में औसतन 23.85 घंटे/दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 23.45 घंटे/दिन बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। विशेष रूप से कृषि फीडरों में 18 घंटे प्रतिदिन की आपूर्ति दी जा रही है, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक आंकड़ों में शामिल है। तकनीकी और वाणिज्यिक हानि (AT&C Loss) को 2020-21 में 23.14% से घटाकर 2024-25 में 13.79% किया गया है। यह उपलब्धि दक्ष संचालन, पारदर्शी व्यवस्था और तकनीकी सुधारों का प्रमाण है।
अधोसंरचना विकास के लिए बड़ा निवेश, कोरबा में 1320 मेगावॉट का नया प्लांट
वर्तमान टैरिफ में केपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान का भी समावेश है जिसके अंतर्गत ट्रांसमिशन कंपनी के लिए ₹2433 करोड़, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के लिए ₹3977 करोड़ और जनरेशन कंपनी के लिए ₹2992 करोड़ का प्रावधान है। कोरबा में 1320 मेगावॉट के प्लांट की स्थापना का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है, जिसकी लागत ₹15,800 करोड़ है। इससे छत्तीसगढ़ भविष्य में ऊर्जा-सरप्लस राज्य बनेगा और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
सौर ऊर्जा की ओर एक कदम: घरेलू उपभोक्ताओं के लिए डबल अनुदान योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 3 किलोवाट तक के संयंत्रों पर ₹78,000 तक केंद्र सरकार से अतिरिक्त 2 किलोवाट तक के संयंत्रों पर ₹30,000 तक राज्य शासन से अनुदान दिया जाएगा। यह योजना छत्तीसगढ़ के घरेलू उपभोक्ताओं को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रांतिकारी पहल है।
ऊर्जा के क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये के करार, आएगी रोजगार क्रांति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि पॉवर कंपनी/शासन द्वारा 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के करार किए गए हैं, जिससे आने वाले समय में ऊर्जा उत्पादन और रोजगार दोनों के क्षेत्र में क्रांति आएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारी प्राथमिकता है कि बिजली उपभोक्ताओं को न केवल निर्बाध आपूर्ति मिले, बल्कि वह गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और टिकाऊ हो। वर्तमान और भावी योजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक स्थापित करेगा।
विधानसभा मानसून सत्र : नेता प्रतिपक्ष ने पीएम आवास पर सरकार को घेरा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र के तीसरे दिन नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने पीएम आवास योजना का मुद्दा उठाया. इस पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के जवाब से कांग्रेस विधायक आक्रोशित हो गए. इसके साथ समन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया.
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने पीएम आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत प्रगति की स्थिति पर सवाल करते हुए सवाल किया कि भुगतान करने के बाद आवास पूर्ण माना जाता है, या बिना शौचालय बनाए ही आवास पूरा मान लिया जाता है? इस पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि 3 किस्त के बाद लेंटल लेवल का किस्त जाता है, जो 90 दिन बाद भुगतान भी कर दिया जाता है, और कार्य अंतिम में माना जाता है. किसको कितना देना है. यह पुरानी सरकार की बात थी. वर्तमान में विष्णु देव साय की सरकार है, उसमें पूरा दिया जा चुका है.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पुलिस विभाग वाले कभी कभी पूरी बात सुनते ही नहीं. इसमें दिव्यागों का जो प्रतिशत है, वो आपकी सरकार ने लिखा है उसे कितना पूरा किया गया? इस पर विजय शर्मा ने कहा कि 5 प्रतिशत दिव्यांग को ओर 14 प्रतिशत अल्पसंख्यक को देना है.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिन-जिन जिलों में प्रधानमंत्री आवास के मकान में पैसे के लेन देन की शिकायत हुई है, उन जिलों के कलेक्टरों को निलंबित किया जाएगा? इस पर विजय शर्मा ने कहा मुख्यमंत्री विष्णुदेव की सरकार में सुशासन भी है, और सुदर्शन भी है. आपके पास कोई जानकारी है तो दें जांच होगी.
इस पर चरण दास महंत ने इसके बाद मनरेगा का मुद्दा उठाते हुए सरकार से कहा कि जिन जिन स्थानों में राशि नहीं दी है, वह सूची है, उसमें जशपुर जिला भी शामिल है. बीजापुर में तो केवल 38 प्रतिशत की राशि दी है. भुगतान क्या बाद में करेंगे या नहीं करेंगे?
इस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार और परीक्षण की आवश्यकता होगी, लेकिन 30 जून तक लेबर पेमेंट कर दिया गया है, अगर आपको पास कुछ जानकारी होगी उसकी जानकारी मुझे दे सकते है. इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कई ऐसी सूची है, जिसकी मेरे पास फोटो भी है. आप इजाजत देंगे तो मैं विधासभा अध्यक्ष के पटल पर भी रख दूंगा.
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पर कहा कि मुझे बड़ा कष्ट हुआ है कि मुझे नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मैं किसी को घूमा रहा हूं, जबकि इनके शासन काल में इन्होंने इस कार्य में लेटलतीफी की है. सारे पत्र मेरे पास हैं, जिसमें इन्होंने आवास को लेने से इनकार किया. मंत्री विजय शर्मा के जवाब से सदन में कांग्रेस विधायक आक्रोशित हो गए, और पक्ष-विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा हुआ.
सदन में गूंजा सायबर अपराध का मामला, सत्ता पक्ष के विधायकों ने गृहमंत्री को घेरा…
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र के तीसरे दिन की कार्रवाई के दौरान एक बार फिर भाजपा के ही विधायक सरकार को घेरा. भाजपा विधायक सुनील सोनी के बाद राजेश मूणत और अजय चंद्राकर ने प्रश्नकाल में प्रदेश में साइबर क्राइम को लेकर सवाल किया.
रायपुर दक्षिण विधायक सुनील सोनी ने कहा कि प्रदेश में साइबर ठगों के चंगुल में लगातार लोग फंस रहे हैं. साइबर विशेषज्ञ नियुक्त नहीं किया गया है. आईपीएस की नियुक्ति इसके लिए नहीं है. साइबर थाना है, लेकिन कहां है, कई लोग जान नहीं पाते. अपराध दर्ज होने के आंकड़े 16 हजार से ज्यादा है, ऐसा एनसीआरबी भी बता रहा है, एआई भी बता रहा है.
डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि साइबर थाना ही नहीं बल्कि रायपुर में कम्पोजिट साइबर भवन है, हम सदस्य को वहां ले जाएंगे. विशेषज्ञ की नियुक्ति भी जल्द होगी. उन्होंने कहा कि छह महीने की ट्रेनिंग लेकर साइबर के एक्सपर्ट आ चुके हैं, वो विशेषज्ञ से कम नहीं है.
गृह मंत्री ने बताया कि साइबर अपराध के 1301 आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए हैं. एआई पर ज्यादा विश्वास नहीं करें. हम सही आंकड़े दे रहे हैं. साइबर थाने की बात नहीं, बल्कि साइबर सेल की बात हर जिले में हुई थी. एनसीआरबी का डाटा 2022 के बाद आया ही नहीं, फिर नई जानकारी कैसी आएगी?
इस पर सुनील सोनी ने सवाल किया कि जनवरी 2024 से जून 2025 तक कितने लोगों को जेल भेजा गया? इस पर विजय शर्मा ने बताया कि बैंक वालों पर 3 प्रकरण दर्ज किया गया है. 7 आरोपियों को जेल में डाला गया है.
भाजपा विधायक राजेश मूणत ने कहा कि अधिकारी लगातार ट्रेनिंग लेकर आ रहे हैं, फिर भी साइबर क्राइम के मामले लगातार आ रहे हैं. 107 करोड़ राशि ठगे गए हैं, लगभग 3 करोड़ राशि ही वापस हो पाए. इसके लिए एक आईजी स्तर का अधिकारी नियुक्त होना चाहिए. विजय शर्मा ने कहा कि पैसे वापसी की प्रक्रिया कोर्ट से होकर गुजरती है. आईजी स्तर के अधिकारी की नियुक्ति इसमें होती है, जो हो चुकी है.
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल किया कि साइबर क्राइम रोकने कितने कमांडो तैयार किए गए हैं? नियुक्ति कितने की हुई? विशेषज्ञों की भर्ती कब होगी? विजय शर्मा- विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रियाधीन है.
SP ने 100 डीजे संचालकों के साथ की बैठक, नियमों का पालन नहीं करने पर होगी सख्त कार्रवाई
दुर्ग। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने आगामी त्योहारों से पहले डीजे संचालकों के साथ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की गाइडलाइन को लेकर अहम बैठक ली. संचालकों को हाइकोर्ट के नियमानुसार प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिये हैं. बैठक में जिले के लगभग 100 डीजे संचालक शामिल हुए थे, सभी को नियमो का पालन करने की जानकारी दी गई. वहीं पालन नहीं करने वालो पर सख्त कार्रवाई किए जाने की बात कही गई.
दुर्ग ग्रामीण के एएसपी अभिषेक झा और सीएसपी भिलाई नगर सत्यप्रकाश तिवारी ने पुलिस नियंत्रण कक्ष भिलाई में दुर्ग जिले को डी.जे. संचालकों की बैठक लेकर आगामी त्यौहारों और धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के लिए जारी निर्देशो की जानकारी संचालको को दी है. जिसके तहत शासकीय संपत्ति या अन्य प्रकार की किसी वस्तुओं/ सुविधाओं का उपयोग जाने के लिए उसकी पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है.
75dB से जायदा नहीं होनी चाहिए ध्वनि
बैठक में सपष्ट किया गया कि लाउड स्पीकर या ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग सार्वजनिक स्थलों पर उस क्षेत्र के परिवेश ध्वनि पैमाने से 10 डी. बी. (ए) से अधिक नहीं होना चाहिये या 75 डी. बी. (ए) से अधिक नही होना चाहिए है. इसके अलावा रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ध्वनि विस्तारक यंत्र, वाद्य यंत्रों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा.
ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग के दौरान एन.जी.टी. और शासन द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिये निर्धारित मानकों, कोलाहल अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा. संचालकों को जानकारी दी गई कि वाहनों पर साउंड सिस्टम का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा. मार्ग ब्लाक करने पर भी पुलिस कार्रवाई करेगी.
जोन्स आफ साइलेंस घोषित
इसके अलावा शासकीय, अशासकीय अस्पताल, समस्त शासकीय, अशासकीय शैक्षणिक संस्थान, जिला एवं सत्र न्यायालय, अन्य न्यायालय, शासकीय कार्यालय की 100 मीटर की सीमा को कोलाहल प्रतिबंधित क्षेत्र (जोन्स आफ साइलेंस ) घोषित किया गया है. इसका पालन किया जाना अनिवार्य होगा.
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को कलेक्टर ने जारी किया नोटिस, फेसबुक पोस्ट पर जताई आपत्ति, कहा….तत्काल पोस्ट डिलीट करें
कोरबा। कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को नोटिस जारी किया है। आपको बता दे जयसिंह अग्रवाल ने पिछले दिनों कोरबा प्रवास पर पहुंचे राज्यपाल, पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर और कलेक्टर का एक फोटो अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया। जिसमें उन्होने राज्यपाल और कलेक्टर के सामने खड़े प्रदेश के सीनियर आदिवासी नेता का अपमान बहुत की कष्टप्रद होने की बात लिखते हुए सवाल उठाया। जयसिंह अग्रवाल के इस पोस्ट के बाद एक तरफ जहां राजनीति गरमा गयी है। वहीं दूसरी तरफ कलेक्टर अजीत वसंत ने इस पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए जयसिंह अग्रवाल को नोटिस जारी कर तत्काल फेसबुक पोस्ट को डिलीट करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री रहे जयसिंह अग्रवाल अपने बयानों और IAS अफसरों के साथ ठनने को लेकर हमेशा से सुर्खियों में रहे है। ऐसे में एक बार फिर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत एक फेसबुक पोस्ट को लेकर आमने-सामने हो गये है। दरअसल ये पूरा मामला पिछले दिनों कोरबा प्रवास पर पहुंचे राज्यपाल रामेन डेका के साथ पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के एक फोटो से जुड़ा हुआ है। 12 जुलाई को कोरबा प्रवास पर पहुंचे राज्यपाल से ननकीराम कंवर मिलने पहुंचे थे। उस वक्त राज्यपाल के साथ कमरे में कलेक्टर अजीत वसंत भी मौजूद थे। राज्यपाल से मुलाकात और बातचीत के बाद ननकीराम कंवर ने एक राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया।
ननकीराम कंवर के ज्ञापन को राज्यपाल मौके पर ही पढ़ने लगे। इस दौरान राज्यपाल और कलेक्टर बैठे हुए है और ननकीराम कंवर मौके पर खड़े थे, तभी एक फोटो क्लिक किया गया। ननकीराम कंवर का राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने का फोटो बकायदा मीडिया में जारी किया गया। लेकिन इस फोटो पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सवाल उठाते हुए प्रदेश के सीनियर आदिवासी नेता का अपमान करने का मुद्दा बता दिया। जयसिंह अग्रवाल ने अपने फेसबुक पेज पर उक्त फोटो को पोस्ट करते हुए लिखा कि…..“छत्तीसगढ़ के वरिष्ठतम आदिवासी नेता का अपमान बहुत ही कष्टप्रद है। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठतम आदिवासी नेता,पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर खड़े है, जबकि महामहिम राज्यपाल रमेन डेका के साथ कलेक्टर अजीत वसंत बैठे हुए है। यह जान और सुनकर अत्यंत पीड़ा हुई।”
14 जुलाई को पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के इस फेसबुक पोस्ट के आम होते ही राजनीति गरमा गयी। इस पूरे मामले में सीनियर आदिवासी नेता के अपमान को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सीधे तौर पर कलेक्टर अजीत वसंत पर निशाना साधा गया। लिहाजा कलेक्टर अजीत वसंत ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को नोटिस जारी कर उक्त पोस्ट पर आपत्ति जतायी है। कलेक्टर ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि जब ननकीराम कंवर राज्यपाल से मिलने कक्ष में पहुंचे, तब उन्होने उनका अभिवादन किया गया। इसके बाद ननकीराम कंवर अपने निर्धारित स्थान पर बैठे। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि उक्त तस्वीर तब की है, जब ननकीराम कंवर राज्यपाल को ज्ञापन सौंप रहे थे।
नोटिस जारी कर कलेक्टर ने पूर्व मंत्री को दी चेतावनी
कलेक्टर अजीत वसंत ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को नोटिस जारी कर कहा है कि…. आपके द्वारा उक्त तस्वीर को दुर्भावनापूर्ण तरीके से प्रचारित-प्रसारित किया गया है। आपका यह कृत्य सामाजिक वर्गो के बीच विद्वेष फैलाने की मंशा रखता है, साथ ही शासन और प्रशासन की छवि धूमिल कर आम नागरिकों के मन में असंतोष की भावना को जन्म देने हेतु लक्षित है। कलेक्टर ने इस पूरे प्रकरण में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को उक्त फेसबुक पोस्ट को तत्काल डिलीट करने का निर्देश दिया है। ऐसा नही करने पर शासन-प्रशासन के प्रति आम नागरिकों के मन में असंतोष की भावना उत्पन्न होने की संभावना जताते हुए भारतीय न्याय संहिता के तहत दंण्डनीय अपराध होेन की चेतावनी दी है।
ननकीराम कंवर ने किसी तरह के अपमान की बात से किया इंकार
इस पूरे मुद्दे पर पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर का बयान भी सामने आ गया है। उन्होने स्पष्ट किया कि जब वे राज्यपाल से मिलने गये, तब उन्हे सम्मान पूर्वक राज्यपाल के समक्ष ले जाया गया। कमरें में वह राज्यपाल के साथ चर्चा कर अपनी बाते रखी। इसके बाद उन्होने विधिवत राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर वापस लौट आये। इस दौरान उनके साथ किसी भी तरह का ऐसा कृत्य नही किया गया, जिससे उनके सम्मान को ठेस पहुंचा।
बस्तर क्षेत्र में बढ़ रहा मलेरिया का प्रकोप और CGMSC के वेयर हाऊसों में नहीं है मलेरिया किट।
cgmsc यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड के निर्माण का मकसद था कि प्रदेश भर के अस्पतालों में स्वस्थ्य सुविधाए बेहतर तरीके से उपलब्ध कराया जा सके. परतु आज यह संस्था भ्रस्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है. ऐसा कोई दिन नहीं होता जब इस संस्था की गड़बड़िया समाचार पत्रों और टीवी चैनलों की सुर्ख़ियों में स्थान नहीं आता. यह संस्था निश्चित रूप से स्वस्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के लिए लाभ का जरिया है परन्तु यह विष्णुदेव सरकार के लिए बड़ी परेशानी का कारण है. जो भविष्य में सरकार को बड़ी तकलीफ देने जा रहा है.
रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे चल रहा है इस बात का एक और प्रमाण आदिवासी बाहुल्य दंतेवाड़ा और सुकमा से आई खबर से हो रही है। जानकारी के मुताबिक दंतेवाड़ा के आश्रम और पोटा केबिन में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में से 350 विद्यार्थी मलेरिया पॉजीटिव पाए गए हैं। इसी प्रकार सुकमा जिले में भी 468 लोगों में मलेरिया के लक्षण देखे गए हैं। यहां पर सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्मित संस्था सीजीएमएससी के वेयरहाउस में मलेरिया और डेंगू जांच के किट उपलब्ध नहीं है। यह केवल हम नहीं कह रहे इस संस्था की आधिकारिक वेबसाइट में आधिकारिक रूप से यह जानकारी उपलब्ध कराई गई है। ऐसी स्थिति में स्थानीय डॉक्टर मरीजों की जांच इमरजेंसी फंड से किट खरीद कर जांच करा रहे हैं।
CGMSC यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों एवं ईलाज हेतु उपकरणों की व्यवस्था खरीदी कर प्रदान करता है। अपनी इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए इनका प्रदेश भर में 16 वेयरहाउस है। अस्पतालों को जिन भी दवाइयां की आवश्यकता होती है वह इन वेयरहाउसों से मंगा लेते हैं।
परंतु इन दिनों सीजीएमएससी की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही है। जिस अच्छी सोच के साथ इसका गठन हुआ था उस सोच पर अब पानी फिर चुका है। यह संस्था पूरी तरह से भ्रष्टाचार के गिरफ्त में आ गई है। बेईमान अधिकारी डंके की चोट पर सरकारी खजाने में यहां डाका डाल रहे हैं। और जो भी व्यक्ति स्वास्थ्य मंत्री बनकर आता है इस CGMSC कुछ नया कांड कर जाता है। जैसे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आज कर रहे हैं।
चलिए विलंब ना करते हुए छत्तीसगढ़ की आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहा हूं।
आप समझने की कोशिश करिएगा कि कमीशनखोरों की करतूत के चलते आपको स्वास्थ्यगत किन-किन दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। CGMSC की आधिकारिक वेबसाइट cgmsc.gov.in के अनुसार आज की तारीख में इनके वेयरहाउस में रैपिड डायग्नोस्टिक किट मलेरिया, डेंगू टेस्ट किट की उपलब्धता शून्य है। वेबसाइट में जाकर इस कोड के जरिए यह हर कोई देख सकता है????
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अब आपको बता दें कि ऐसी स्थिति पैदा क्यों हुई और कब तक रहेगी। मेरी जानकारी के अनुसार श्याम बिहारी जयसवाल जी के मंत्री बनने के बाद यह आवश्यक दवाइयां सप्लाई करने वाली कंपनियों में से बहुतों को उनके बकाए का भुगतान नहीं किया गया। दवाई खरीदी या दवा कंपनियों के लिए उपलब्ध राशि घोटाले के आरोपी मोक्षित कॉरपोरेशन आदि की बकाया राशि के भुगतान में कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और सीजीएमएससी की एमडी पद्मिनी भोई ने मोक्षित पर इतनी मेहरबानी क्यों जताई यह जांच का विषय है।
आज की स्थिति में भी ज्यादातर दवा कंपनियों का साल भर से भुगतान बाकी है। इस वजह से कई कंपनियां दवाईया सप्लाई करने में कतरा रही है। पहले वे अपना पुराना बकाया भुगतान मांग रही है। अगर दवा कंपनी दवा सप्लाई करने का मन भी बना ले तो प्रक्रिया के अनुसार ऑर्डर के 40 से 50 दिन की भीतर ही माल आता है।
इन हालातो को आप समझ सकते है की किस तरह से स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के लोगों के जीवन को खतरे में डाला जा रहा है। ईश्वर ना करें कहीं कोई महामारी या अपनी स्थिति निर्मित हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी मानी जाएगी? वो अलग बात है कि जिला अधिकारियों के पास इमरजेंसी दवा खरीदी के लिए बजट दिया हुआ रहता है जिससे वो काम चला लेते है। परंतु यहां पर CGMSC संस्था के जिम्मेदारी की बात है। इन हालातों में यह क्यों न माना जाएगा कि सीजीएमएससी में बैठी एमडी पद्मिनी भोई सहित यहां के महाभ्रष्ट्र अधिकारी भी इस बिगड़ी व्यवस्था के गुनहगार है।
छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 का 17 जुलाई को होगा भव्य विमोचन
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार का बहुप्रतीक्षित विजन डॉक्यूमेंट “छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047” अब तैयार हो चुका है और इसका भव्य विमोचन 17 जुलाई 2025 को शाम 6 बजे नवा रायपुर के एक बड़े होटल में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक मौके पर राज्य और केंद्र के कई बड़े चेहरे मौजूद रहेंगे, जिसमें नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के बेरी और सीईओ बीवीआर सुब्रमणियम प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर अब तक का सबसे महत्वपूर्ण रोडमैप माना जा रहा है, जिसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त एवं योजना मंत्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में महीनों की कड़ी मेहनत, गहन मंथन और व्यापक विमर्श के बाद तैयार किया गया है।
क्या है “छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047”?
यह दस्तावेज़ भारत सरकार के “विकसित भारत@2047” मिशन के अनुरूप तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत सभी राज्यों से अपेक्षा की गई थी कि वे वर्ष 2047 तक के लिए अपना विकास रोडमैप बनाएं, जब देश अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा। छत्तीसगढ़ इस दिशा में सबसे तेजी से आगे बढ़ते हुए उन पहले राज्यों में शामिल हो गया है, जिनका विजन डॉक्यूमेंट तैयार हो चुका है।
इस दस्तावेज़ में राज्य को “विकासशील से विकसित छत्तीसगढ़” में रूपांतरित करने की विस्तृत योजना दी गई है। इसमें सभी प्रमुख क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, उद्योग, रोजगार, डिजिटल परिवर्तन, पर्यावरण और सुशासन पर व्यापक कार्यनीति तैयार की गई है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी कार्यक्रम की जानकारी
वित्त एवं योजना मंत्री ओपी चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विजन के साथ अमृतकाल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। उसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने पहले ही बजट में यह घोषणा की थी कि हम एक स्पष्ट विजन और रोडमैप तैयार करेंगे, जिससे 2047 तक छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जा सके। अब वह डॉक्यूमेंट ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047’ के रूप में तैयार हो चुका है, जिसे 17 जुलाई को लॉन्च किया जाएगा।”
वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि अमृतकाल अंजोर विजन डॉक्यूमेंट @ 2047 का लक्ष्य विकासशील छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ में बदलना है। जिसके लिए दूरदर्शी दृष्टिकोण, स्पष्ट प्राथमिकताएं और सुसंगठित रणनीति तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि हमारे लक्ष्यों में अगले 5 वर्षों में GSDP को 5 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये करना, और इसे 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाना का विजन है। इसके साथ 100% साक्षरता हासिल करना, 27% शहरीकरण दर के साथ संतुलित शहरी विकास और सशक्त बुनियादी ढांचा तैयार करना, 44% वन क्षेत्र को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित कर हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के माध्यम से लॉजिस्टिक हब स्थापित करना, स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना, तथा स्मार्ट शहरों और पर्यावरण-संवेदनशील योजनाओं के साथ टिकाऊ विकास को प्राथमिकता देना शामिल है।
वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि अमृतकाल अंजोर विजन डॉक्यूमेंट के लॉन्च कार्यक्रम में राज्य के सभी मंत्री, 50 से अधिक विधायक, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, सांसदगण, उद्योग जगत, पत्रकार, शिक्षाविद्, महिला सशक्तिकरण से जुड़े संगठनों, और चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।
ऑपरेशन सिन्दूर पर छत्तीसगढ़ को गर्व: मुख्यमंत्री ने जताया प्रधानमंत्री का आभार, बोले, ऑपरेशन सिन्दूर भारत की ताकत, संकल्प और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का प्रमाण
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कुशल रणनीति और नेतृत्व क्षमता को पूरे देश ने देखा है। यह केवल एक मिशन नहीं था, बल्कि भारत की ताकत, संकल्प और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का जीवंत प्रमाण है। श्री साय आज विधानसभा में ऑपरेशन सिन्दूर के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को ऑपरेशन सिन्दूर के सफल संचालन के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता को इस ऑपरेशन की सफलता पर गर्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भारत अब ऐसा राष्ट्र बन चुका है जो अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी परिस्थिति में, किसी भी सीमा तक जाकर, त्वरित, निर्णायक और प्रभावी कार्यवाही करने में सक्षम है। ऐसे अभियान केवल सैन्य या कूटनीतिक सफलता का प्रतीक नहीं होते, बल्कि वे संपूर्ण राष्ट्र की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व का दृष्टिकोण स्पष्ट है — हर भारतीय का जीवन बहुमूल्य है, चाहे वह देश में हो या विदेश में। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन के केंद्र में समन्वय और निर्णय क्षमता की जो धुरी रही, वह हैं - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सक्रिय भागीदारी, व्यक्तिगत निगरानी और स्पष्ट निर्देशों के कारण ही यह मिशन समयबद्ध, सुरक्षित और सफलतापूर्वक सम्पन्न हो पाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना की बात करते हैं, तो ऐसे मिशन हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि भारत केवल अपने नागरिकों की ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिए भी कर्तव्यनिष्ठ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत की साख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रही है। ऑपरेशन गंगा, ऑपरेशन कावेरी, ऑपरेशन देवी शक्ति, और अब ऑपरेशन सिन्दूर — भारत ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वह वैश्विक संकटों में मूक दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय संकट-निवारक राष्ट्र है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहलगाम की वीभत्स घटना के पश्चात हमारे प्रदेश के सपूत स्वर्गीय दिनेश मिरानिया का पार्थिव शरीर भी लौटकर आया। मैंने स्वयं उनके परिवार की पीड़ा को देखा। हमारी बहन ने अपनी आँखों के सामने अपना सुहाग उजड़ते देखा — यह पीड़ा कितनी गहरी है, यह पूरा सदन समझ सकता है। आतंकियों ने उन्हें केवल इस कारण मार डाला कि वे नहीं चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर, जो भारत का अभिन्न अंग है, उसमें अन्य प्रांतों के नागरिकों की आवाजाही हो सके। उन्हें धर्म देखकर मारा गया। देश भर की माताओं-बहनों के बिलखने की तस्वीरें सामने आईं और इनके साथ पूरा देश रोया। यह एक ऐसी अमानवीय घटना थी, जिसमें सम्पूर्ण मानवता तार-तार हो गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां आतंकवादियों ने निर्दोष लोगों का रक्त बहाया, वहीं भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में इस बात का विशेष ध्यान रखा कि पाकिस्तान के आम नागरिकों को कोई क्षति न पहुँचे। हमारे नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत किसी को छेड़ता नहीं, परंतु छेड़ने वालों को छोड़ता भी नहीं। ऑपरेशन सिन्दूर के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हम प्रत्येक रक्त की बूँद का हिसाब लेते हैं। जिन आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया, वे संसद हमले, मुंबई हमले, अक्षरधाम हमला और पुलवामा जैसी भीषण घटनाओं में लिप्त थे। भारत ने आतंकवाद को शह देने वाले देशों को विश्व मंच पर बेनकाब किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने सदैव शांति को प्राथमिकता दी है, परंतु संप्रभुता पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उसका माकूल उत्तर दिया जाएगा। जो देश आतंकवादियों की भाषा बोलते हैं, वे आज वैश्विक मंचों पर अलग-थलग पड़ चुके हैं — इसका श्रेय भारतीय नेतृत्व की अडिग इच्छाशक्ति को जाता है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को बेनकाब करने हेतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस प्रकार सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में भेजा, वह भारतीय लोकतंत्र की सुंदरता और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना का आदर्श उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उन्हें यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। उनके व्यक्तित्व में संकल्प, समन्वय और संवेदनशीलता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। रक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु प्रधानमंत्री ने जो सतत परिश्रम किया, उसका प्रभाव हमें ऑपरेशन सिन्दूर में प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिला। यह ऑपरेशन 140 करोड़ देशवासियों की एकजुटता और अखंडता का प्रतीक बन चुका है और सदा स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर केवल आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई नहीं, बल्कि यह नारी सम्मान और शक्ति का भी प्रतीक है, मातृशक्ति को समर्पित एक ऐतिहासिक सैन्य-संकल्प है।
देश के लिए गौरव का क्षण: मुख्यमंत्री ने Axiom-4 मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को दी बधाई
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने Axiom-4 अंतरिक्ष मिशन की ऐतिहासिक सफलता और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी पर भारत के अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सहित पूरी टीम को हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि, गगनयान मिशन की ओर बढ़ते भारत के आत्मनिर्भर और वैज्ञानिक कदमों का प्रतीक है। शुभांशु की यह उपलब्धि देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है और उनके सपनों को एक नई उड़ान देने वाली है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह क्षण केवल भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के लिए ही नहीं, अपितु हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि भारत की युवा वैज्ञानिक प्रतिभा और वैश्विक स्तर पर बढ़ती वैज्ञानिक भागीदारी का प्रमाण है।
"स्कूटी दीदी" बनीं आत्मनिर्भर भारत की प्रतीक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सराहा एनु का जज़्बा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एक छोटे से गांव उमरदा की निवासी एनु आज पूरे देश में “स्कूटी दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एनु की जीवटता, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उनके योगदान की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि एनु जैसी बेटियाँ ही आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान हैं। उनके साहस, समर्पण और संकल्प से छत्तीसगढ़ के गांवों की तस्वीर बदल रही है।
एनु की प्रेरक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो संसाधनों की कमी, सामाजिक दबाव और परंपरागत सोच भी राह नहीं रोक सकती। एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मीं एनु ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया, एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, और समय पर ऋण को चुका कर आर्थिक अनुशासन की मिसाल पेश की।


एनु को समझ थी कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गतिशीलता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने 'प्रथम संस्था' से स्कूटी चलाना सीखा और शुरुआत में समाज के तानों और व्यंग्य के बावजूद अपना आत्मविश्वास बनाए रखा और हार नहीं मानी। जब वे गांव-गांव स्कूटी से महिलाओं से जुड़ने लगीं, तभी उन्हें “स्कूटी दीदी” के नाम से पहचाना जाने लगा।
वर्ष 2023 में एनु ने "महिला दोपहिया प्रशिक्षण केंद्र" की स्थापना की। शुरुआत में केवल 2-3 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया, लेकिन धीरे-धीरे यह पहल ग्रामीण समाज में एक क्रांति बन गई। अब तक वे 30 से अधिक महिलाओं को स्कूटी चलाना सिखा चुकी हैं, जो अब स्वयं आंगनबाड़ी, स्कूल, बैंक और स्वास्थ्य केंद्र जैसे स्थानों तक स्वतंत्र रूप से पहुँचना शुरू कर चुकी हैं।
एनु की इस पहल से न केवल महिलाओं की दैनिक गतिशीलता आसान हुई है, बल्कि पूरे सामाजिक दृष्टिकोण में भी परिवर्तन आया है। अब गांवों में माता-पिता स्वयं अपनी बेटियों और बहुओं को एनु के पास प्रशिक्षण हेतु भेज रहे हैं। उनका सपना है कि वे 1000 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएं और शीघ्र ही चारपहिया वाहन प्रशिक्षण केंद्र शुरू करें।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि एनु जैसे लोग छत्तीसगढ़ की नई पहचान हैं। राज्य सरकार ‘बिहान’ जैसी योजनाओं के माध्यम से ऐसे नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो जमीनी स्तर पर परिवर्तन ला रहे हैं।
एनु का योगदान केवल ड्राइविंग प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई, एलईडी असेंबली, मनरेगा कार्यों, और घरेलू प्रबंधन में भी महिलाओं को दक्ष बनाया है। उनके प्रयासों को देखते हुए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा और धमतरी के कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने स्वयं उमरदा गांव जाकर एनु से मुलाकात की और उनके कार्यों की सराहना की।
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने भी एनु की कहानी को फेसबुक पोस्ट के माध्यम से साझा करते हुए कहा कि जीवन में संसाधनों की कमी थी, लेकिन एनु के हौसले को कोई डिगा नहीं सका। उन्होंने एम.ए. की पढ़ाई पूरी कर 'बिहान' और 'प्रथम संस्था' से प्रशिक्षण प्राप्त कर न केवल आत्मनिर्भरता पाई, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की बेटियाँ केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवर्तन की वाहक बन रही हैं। राज्य सरकार हर ऐसी पहल का स्वागत करेगी जो महिला सशक्तिकरण को गति देगी।
श्री रामलला के दर्शन करने रायपुर से 850 श्रद्धालु हुए रवाना, CM विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेशवासियों की आस्था और श्रद्धा को मूर्त रूप देने हेतु प्रारंभ की गई ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के अंतर्गत आज रायपुर रेलवे स्टेशन से रायपुर संभाग के 850 श्रद्धालु विशेष ट्रेन से अयोध्या धाम के दर्शन के लिए रवाना हुए। इस पवित्र यात्रा के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनकी यात्रा के मंगलमयी होने की कामना की।



