अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने कांग्रेस जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए 5 से 7 लाख रुपए की डिमांड करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में बृहस्पति का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने इस मामले में कांग्रेस की सहप्रभारी जरिता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
पूर्व कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह ने कहा है कि सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों से सूचना मिल रही है कि एक नंबर से कांग्रेस जिला अध्यक्ष के उम्मीदवारों के पास फोन आ रहा है और जिलाध्यक्ष बनने के लिए पैसों की डिमांड की जा रही है। संबंधित व्यक्ति स्वयं को कांग्रेस की छत्तीसगढ़ सह प्रभारी जरिता मैडम का सेक्रेटरी बता रहा है। वह एक महिला से बात करता है। महिला की आवाज को कुछ लोग पहचानते हैं और कुछ लोग नहीं पहचानते। उनसे 5 से 7 लाख रुपए की मांग की जा रही है और कहा जा रहा है कि पैसा देने के बाद उन्हें जिला अध्यक्ष बना दिया जाएगा।
कांग्रेस की सह प्रभारी जरिता के खिलाफ कार्रवाई की मांग
बृहस्पति सिंह ने कहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बहुत अच्छी सोच के साथ अन्य प्रदेशों से पर्यवेक्षक भेजकर ब्लॉक और जिला स्तर पर कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति की व्यवस्था दी है। इस पर अमल किए जाने पर निश्चित रूप से पार्टी को लाभ प्राप्त होगा और कांग्रेस की सत्ता में दोबारा वापसी हो सकती है। उन्होंने कांग्रेस की सह प्रभारी जरिता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी शैलजा पर भी पैसे लेकर टिकट बांटने का आरोप
वायरल वीडियो में पूर्व कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी शैलजा कुमारी ने भी पैसे लेकर टिकट वितरण किया था। इसके कारण कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने कहा है किसी वजह से शैलजा कुमारी को दरकिनार कर दिया गया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की सुकमा-दंतेवाड़ा में 12 ठिकानों पर की गई छापेमारी का स्वागत किया है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि अरनपुर आईईडी ब्लास्ट (Aranpur IED Blast) मामले में शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई को लेकर सब कुछ स्पष्ट है, कार्रवाई होनी ही चाहिए.
डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि एनआईए की यह कार्रवाई माओवादी संगठन सीपीआई के सशस्त्र कैडरों (Armed Cadres) के खिलाफ निर्णायक कदम है, जहां नकदी, लेवी रसीदें और डिजिटल उपकरण जब्त हुए. उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापित होगी.
SIR पर बोले- कांग्रेस पहले अपने विवाद सुलझाए
वोटर लिस्ट में संशोधन (SIR – Special Intensive Revision) और BLO (Booth Level Officer) न बनाए जाने को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस इस विषय पर तब चर्चा करेगी जब उनका आपसी विवाद खत्म होगा. पर तब तक समय निकल चुका होगा. डिप्टी सीएम शर्मा ने घुसपैठियों पर चेतावनी देते हुए कहा कि जो घुसपैठ है, उनका पूरा नाम कटवाएंगे.
हमने दिल चुराया है, वोट नहीं… – विजय शर्मा
BJP के वोट बैंक पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि BJP ने दिल चुराया है, जनता BJP को दिल से पसंद करती है. दिल चुराने के लिए परिश्रम लगता है, 24 घंटे काम करना पड़ता है. हम रोज कमाते-खाते हैं, हर दिन जनता के लिए परिश्रम करते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा का कोई फिक्स वोट बैंक नहीं है. BJP गंभीरता से काम कर रही है, जबकि कांग्रेस पहले विवाद से उबर जाए फिर SIR पर ध्यान देगी.
धान खरीदी पर बयान
धान खरीदी को लेकर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तैयारी में जुटी हैं. पिछली बार प्रदेश में रिकॉर्ड धान खरीदी की गई थी. यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बाहर से धान न आए. ऐसा कोई पकड़ में आता है तो उसे राजसात किया जाएगा. पिछली बार की मात्रा के आसपास ही खरीदी होगी. डिप्टी सीएम शर्मा ने किसानों को भरोसा दिलाया कि BJP सरकार धान खरीदी में पारदर्शिता बनाए रखेगी.
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार, 14 नवंबर 2025 को सुबह 11 बजे मंत्रालय (महानदी भवन) अटल नगर, नवा रायपुर में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक आयोजित होगी. साय कैबिनेट की इस बैठक में धान खरीदी को लेकर अंतिम समीक्षा हो सकती है.
बता दें कि शनिवार को बुलाई गई कैबिनेट बैठक में विधानसभा के शीतकालीन सत्र की तिथि पर चर्चा संभव है. इसके अलावा जनजाति गौरव दिवस पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के आगमन को लेकर चर्चा होने के आसार हैं.
रायपुर। महापुरुषों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी मामले में छत्तीसढ़िया क्रांति सेना और जोहार पार्टी के नेता अमित बघेल के खिलाफ एफआईआर के बाद गिरफ़्तारी की मांग तेज हो गई है. अग्रवाल समाज और सिंधी समाज के वक्ताओं ने महाधरना आंदोलन के दौरान अमित बघेल के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग को लेकर 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है. वहीं पुलिस ने भी अमित बघेल की गिरफ्तारी की कवायद तेज कर दी है. खबर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की भी है.
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को चक्काजाम आंदोलन के बाद पुलिस ने सुंदरनगर में सर्व छत्तीसढ़िया समाज की बैठक पर नजर रखी लेकिन वहां अमित बघेल नजर नहीं आए. शुक्रवार को भी एक बैठक के आयोजन की खबर पुलिस को लगी लेकिन वहां भी कोई जानकारी नहीं मिली. अमित बघेल की गिरफ्तारी को लेकर एसीएसीयू क्राइम ब्रांच की टीम भी छापेमारी की खबर है.
इधर गुरुवार को बैठक में अमित बघेल के खिलाफ एफआईआर के विरोध, केस वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात और सामाजिक सौहार्द्र के लिए कृतसंकल्प होने से संबंधित तीन सूत्रीय प्रस्ताव पारित करने वाले सर्व छत्तीसढ़िया समाज के बैनर तले शुक्रवार को भी बैठक हुई. प्रदेश स्तरीय महारैली का आयोजन करने पर विचार की चर्चा है. फिलहाल इसे लेकर तारीख तय नहीं हो सकी है.
रायपुर। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया के दौरान लगातार तकनीकी समस्याएँ उत्पन्न होने के कारण छात्र-छात्राओं में भारी असंतोष देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट बार-बार डाउन होने के चलते विद्यार्थियों को अपने फॉर्म समय पर भरने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, साथ ही शुल्क भुगतान की प्रक्रिया भी बाधित हो रही है।
बता दें कि इस समस्या को ध्यान में रखते हुए NSUI के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से दो प्रमुख माँगें रखी गई हैं—
परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तीथी सारणी को बढ़ाया जाए, ताकि सभी विद्यार्थी आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर सकें।
विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उत्पन्न सर्वर समस्या का तात्कालिक निराकरण किया जाए, जिससे भविष्य में ऐसी कठिनाइयाँ दोबारा न उत्पन्न हों।
इस अवसर पर NSUI विश्वविद्यालय इकाई के नेता रजत ठाकुर ने कहा, “लगातार सर्वर समस्या के कारण सैकड़ों विद्यार्थी परेशान हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि वह विद्यार्थियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल तकनीकी खामियों को दूर करे और फॉर्म भरने की समय सीमा बढ़ाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो NSUI छात्र हित में आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।”
NSUI पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय इकाई ने स्पष्ट किया कि संगठन सदैव विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और हर परिस्थिति में छात्र हितों की आवाज़ बुलंद करता रहेगा।
ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला महासचिव रजत ठाकुर, हर्ष शर्मा, अंश तिवारी, मोहित बंजारे, वेणु सहित कई अन्य छात्र नेता उपस्थित थे। विद्यार्थी वर्ग ने उम्मीद जताई है कि विश्वविद्यालय प्रशासन शीघ्र ही सर्वर समस्या का समाधान करेगा और फॉर्म भरने की समय सीमा बढ़ाकर सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान करेगा।
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक बार फिर सरकारी विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली और लालफीताशाही पर सख्त टिप्पणी की है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से सेवानिवृत्त महिला कर्मचारी के खिलाफ की गई अपील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि सरकारी विभागों में ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करने की जरूरत है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि विभागों में फाइलें महीनों और वर्षों तक लंबित रहती है, जो प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है।
दरअसल विभाग ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश के 107 दिन बाद अपील दायर की थी। इस देरी को लेकर विभाग ने फाइल प्रक्रिया, आदेश जारी होने में विलंब और अन्य औपचारिकताओं का हवाला दिया। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि सरकार एक विशाल संगठन है, जहां विभिन्न विभागीय औपचारिकताओं के चलते देरी होना स्वाभाविक है। इस पर नाराज बेंच ने स्पष्ट किया कि देरी के लिए साधारण स्पष्टीकरण अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि सभी सरकारी निकायों और संस्थाओं को यह समझना होगा कि उनके कर्तव्यों का पालन पूरी लगन और प्रतिबद्धता से किया जाना चाहिए। देरी की माफी कोई अधिकार नहीं, बल्कि अपवाद है और इसका उपयोग सरकारी विभागों को ढाल के रूप में नहीं किया जा सकता। कानून सभी के लिए समान है और इसे कुछ लोगों के लाभ के लिए नहीं तोड़ा-मरोड़ा जा सकता। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद एक बार फिर सरकारी विभागों की कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रदेश में मेडिकल, नर्सिंग और फिजियोथैरेपी शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कुल 1009 नए पदों के सृजन और स्वीकृति को मंजूरी दी है। यह निर्णय उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने, स्नातक और स्नातकोत्तर प्रशिक्षण को सशक्त करने और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है।
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा, छत्तीसगढ़ ने अपनी 25 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य गठन के समय जहां केवल एक चिकित्सा महाविद्यालय और कुछ चुनिंदा नर्सिंग कॉलेज थे, वहीं मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के दृढ़ संकल्प, योजनाबद्ध नीतियों और राज्य शासन के निरंतर प्रयासों से आज चिकित्सा, नर्सिंग और फिजियोथैरेपी शिक्षा के विस्तार और विद्यार्थियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था भी मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश एवं मार्गदर्शन में सुनिश्चित की जा रही है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता और सेवा विस्तार दोनों को मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा, हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा को नई ऊंचाई पर पहुंचाने का संकल्प लिया है। हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 1009 नए पदों की स्वीकृति दी है। राज्य गठन के समय केवल एक मेडिकल कॉलेज था, आज पूरे प्रदेश में मेडिकल, नर्सिंग और फिजियोथैरेपी संस्थानों का जाल बिछ चुका है। यह निर्णय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा और प्रत्येक जिले में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।
नए स्वीकृत पदों का वितरण
मेडिकल कॉलेज रायगढ़ — 39 पद
डीकेएस रायपुर — 1 पद
मेडिकल कॉलेज बिलासपुर — 20 पद
गवर्नमेंट फिजियोथेरेपी कॉलेज, जगदलपुर, जशपुर, मनेंद्रगढ़ — प्रत्येक में 36 पद (कुल 108 पद)
गवर्नमेंट फिजियोथेरेपी कॉलेज, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़ — प्रत्येक में 36 पद (कुल 108 पद)
(कुल 6 नवीन फिजियोथेरेपी कॉलेजों हेतु कुल 216 पद)
नवीन मेडिकल कॉलेज — दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, कुनकुरी-जशपुर — प्रत्येक में 60 पद (कुल 180 पद)
नवीन मेडिकल कॉलेज — जांजगीर-चांपा और कबीरधाम — प्रत्येक में 60 पद (कुल 120 पद)
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, बिलासपुर — 55 पद
मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर (रेडियोथेरपी विभाग हेतु) — 7 पद
नवीन नर्सिंग महाविद्यालय — दंतेवाड़ा, बैकुंठपुर, बीजापुर, बलरामपुर और जशपुर — कुल 210 पद
नवीन नर्सिंग महाविद्यालय — नवा रायपुर, पुसौर-रायगढ़, जांजगीर-चांपा और कुरूद-धमतरी — कुल 168 पद
(नर्सिंग महाविद्यालयों के लिए कुल 378 पद)
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती : मंत्री श्यामबिहारी
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा है कि इन पदों की स्वीकृति से चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे का उल्लेखनीय विस्तार होगा और विभिन्न विशेषज्ञताओं में राज्य की क्षमता बढ़ेगी। शासकीय नर्सिंग और फिजियोथैरेपी प्रशिक्षण संस्थानों के विस्तार से क्षेत्रीय स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता बेहतर होगी, जिससे प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
चिकित्सा शिक्षा विभाग की आयुक्त शिखा राजपूत तिवारी ने कहा कि जब पूरा राज्य अपने गठन के 25 वर्षों की रजत जयंती महोत्सव के कई श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रम देश के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में मना रहा है, उसी समय स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में यह अभूतपूर्व प्रगति छत्तीसगढ़ के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नीति-निर्देशन का परिणाम है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रगीत वन्देमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वाल्मीकि रामायण में मातृभूमि को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ बताया गया है — “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”। उन्होंने कहा कि जिस भूमि ने हमें जन्म दिया, पालन-पोषण किया और पहचान दी, उसकी सेवा ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। भारत माता की आराधना केवल शब्दों में नहीं, अपने कर्तव्यों के सम्यक निर्वहन के माध्यम से होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब हम भारत माता की पूजा करते हैं, तो पूजा में दक्षिणा देना भी आवश्यक होता है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए छत्तीसगढ़ के प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि को अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। यही हमारी मातृभूमि के प्रति सच्ची देशभक्ति और सबसे महत्वपूर्ण दक्षिणा होगी।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने प्रदेश में संचालित सभी निर्माणाधीन एवं प्रगतिरत सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की और निर्देश दिए कि सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न हों तथा निर्माण कार्यों की गति में तेजी लाई जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश देते हुए कहा कि जल संसाधन परियोजनाएँ प्रदेश के सर्वांगीण विकास की धुरी हैं। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सिंचाई परियोजनाओं का निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी निर्माणाधीन एवं प्रगतिरत सिंचाई परियोजनाओं के कार्यों में गति लाने के स्पष्ट निर्देश दिए।
बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने मुख्यमंत्री को पावर पॉइंट प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से प्रदेश की निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
आरंग। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील के शासकीय आवास में शनिवार को अधिकारियों की टीम पहुंची और उनसे आवश्यक दस्तावेज संकलित किए. विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 52 आरंग की निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अभिलाषा पैकरा, सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी विनोद साहू तथा बूथ लेवल अधिकारी (BLO) ने मुख्य सचिव को प्रारूप-08 और घोषणा प्रपत्र (Annexure-4) प्रदान किया.
अधिकारियों ने मुख्य सचिव को मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने गणना प्रपत्र में आवश्यक विवरण भरकर टीम को सौंपा.
4 नवंबर से 4 दिसंबर तक घर-घर जाकर प्रपत्र वितरित कर रहे BLO
SIR अभियान 4 नवंबर से शुरू हो चुका है, जिसके अंतर्गत BLO प्रत्येक घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करने और जानकारी संकलित करने का काम 4 दिसंबर 2025 तक करेंगे.
मुख्य सचिव विकासशील ने सभी पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग करें, ताकि मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाया जा सके.
निर्वाचन आयोग की प्रमुख समय-सारणी
गणना प्रपत्र भरने की अवधि: 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025
ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन: 9 दिसंबर 2025
दावा-आपत्ति अवधि: 9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026
सत्यापन एवं सुनवाई: 9 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026
अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन: 7 फरवरी 2026
अधिकारियों ने बताया कि मृत, पलायन कर चुके या डुप्लीकेट नामों को हटाने और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शिता के साथ की जाएगी. यह पहल राज्य में मतदाता सूची को अधिक सटीक, विश्वसनीय और अद्यतन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ के चिन्हित व्यक्तियों को प्रति वर्ष 5,000 रुपए की सम्मान सह-प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस योजना को ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना (अनुसूचित जनजाति) वर्ष 2025’ के नाम से जाना जाएगा। योजना के संबंध में 6 नवम्बर को आदिम जाति विकास विभाग द्वारा विस्तृत अधिसूचना जारी की गई है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत रूप से वनौषधीय चिकित्सा संबंधी कार्यों में संलग्न बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ लोगों की परंपरागत वनौषधीय चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित करने और उनके सेवा एवं योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से, जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर 2024 के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रति चिन्हित व्यक्ति को प्रतिवर्ष 5,000 रुपए की सम्मान सह-प्रोत्साहन निधि प्रदान करने की घोषणा की गई थी।
आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में उल्लेखित है कि ‘मुख्यमंत्री बैगा, गुनिया-हड़जोड़ सम्मान योजना’ का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के अंतर्गत परंपरागत रूप से वनौषधियों के ज्ञान में दक्ष बैगा, गुनिया और हड़जोड़ व्यक्तियों के पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना, उसे आगामी पीढ़ियों तक हस्तांतरित करना और उनके वनौषधीय चिकित्सकीय अनुभवों का अभिलेखीकरण कर उनकी आजीविका एवं सेवा को सुदृढ़ बनाना है।
अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनजाति समाजों में वनौषधीय चिकित्सा संबंधी अनुभव परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते हैं। अनुसूचित क्षेत्रों के ग्रामों में ऐसे बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ व्यक्ति जो विगत तीन वर्षों से वनौषधीय चिकित्सा सेवा कार्य में संलग्न हैं, उन्हें संरक्षित करने और सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिवर्ष 5,000 रुपए की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।
छत्तीसगढ़ राज्य के अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्त्री, पुरुष एवं तृतीय लिंग (ट्रांसजेंडर) व्यक्ति, जो बैगा, गुनिया या हड़जोड़ के रूप में कम से कम 30 वर्षों से अपने स्थानीय क्षेत्र में सेवाएँ दे रहे हैं तथा जिनके परिवार में कम से कम दो पीढ़ियों से वनौषधीय चिकित्सा का ज्ञान स्थानांतरित हुआ है, पात्र माने जाएंगे। साथ ही, जो व्यक्ति पादप औषधि बोर्ड, आयुष विभाग, वन विभाग या लघु वनोपज संघ जैसी पंजीकृत संस्थाओं से जुड़े हुए हैं, उनका चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ग्राम स्तर पर किया जाएगा।
ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत द्वारा प्रेषित नामों की अनुशंसा ग्राम स्तर पर ग्राम सचिव, सरपंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन तथा प्राथमिक अथवा माध्यमिक शाला के प्रधानपाठक द्वारा अनुमोदित की जाएगी। इस अनुशंसा के आधार पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास स्तर पर गठित समिति — जिसमें संबंधित जनपद अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति वर्ग के एक जनपद सदस्य, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत) एवं मंडल संयोजक शामिल होंगे — द्वारा अनुशंसित नामों का परीक्षण और सत्यापन किया जाएगा। सत्यापित सूची आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास कार्यालय को प्रेषित की जाएगी। समिति द्वारा किसी मान्यता प्राप्त संस्था से प्रशिक्षण प्राप्त सदस्यों का विशेष रूप से उल्लेख किया जाएगा।
ग्राम सभा/ग्राम पंचायत से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर तथा जनपद स्तर पर गठित समिति की अनुशंसा के उपरांत सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास द्वारा कलेक्टर से अनुमोदन प्राप्त कर प्रस्ताव आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास को भेजा जाएगा। प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार जिलों को आवश्यक धनराशि का आबंटन किया जाएगा। तत्पश्चात सहायता राशि का वितरण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा तथा सम्मान निधि प्राप्त व्यक्तियों की सूची संबंधित ग्राम सभा में सार्वजनिक रूप से पढ़ी जाएगी।
"छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराएं हमारे सांस्कृतिक वैभव और प्राचीन ज्ञान का जीवंत प्रतीक हैं। बैगा, गुनिया और हड़जोड़ हमारे समाज के वे सम्मानित जन हैं, जिन्होंने सदियों से वनौषधीय चिकित्सा की लोकपरंपरा को जीवित रखा है। उनकी इस अनमोल सेवा और ज्ञान को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार ने “मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना” प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से हम न केवल उनके योगदान को मान्यता दे रहे हैं, बल्कि उनकी परंपरागत चिकित्सा प्रणाली को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी निभा रहे हैं।"
रायपुर। साय सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रमोशन के बाद नई पदस्थापना आदेश जारी किया है। सात सहायक संचालकों को उपसंचालक और जिला कार्यक्रम अधिकारी बनाए गए हैं। इसका आदेश आज महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जारी किया है। आदित्य शर्मा सहायक संचालक बलौदाबाजार को मनेंद्रगढ़ भरतपुर चिरमिरी भेजा गया है।
रायपुर।छत्तीसगढ़ में ठंड ने दस्तक दे दी है और आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग ने आगामी चार दिनों के लिए चेतावनी जारी करते हुए बताया कि राज्यभर में न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट संभव है। इसका असर सबसे पहले दक्षिणी छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग में दिखाई देगा और धीरे-धीरे इसका असर मध्य व उत्तरी हिस्सों तक पहुंचेगा।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत से ठंडी और शुष्क हवाएं छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने लगी हैं, जिसका सीधा प्रभाव राज्य के मौसम पर पड़ रहा है। तापमान में गिरावट के साथ सुबह और देर शाम ठंड बढ़ेगी, जबकि दिन के समय हल्की धूप देखने को मिलेगी। पिछले 24 घंटों में रायपुर का अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से कम है। वहीं, प्रदेश का सबसे कम न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रहा, जो ठंड के बढ़ते कदमों की ओर इशारा करता है।
मौसम विभाग का कहना है कि तापमान में गिरावट के इस दौर में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ भी बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, खांसी तथा मलेरिया का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 7 नवंबर से 11 नवंबर के बीच मौसम में हो रहे बदलाव के कारण मलेरिया और वायरल संक्रमण का प्रभाव अधिक देखा जा सकता है। इसलिए बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
क्षेत्रवार मौसम की स्थिति
उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़:
इन इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। सुबह और रात में ठंड बढ़ेगी, जबकि दिन के समय हल्की धूप निकलेगी। धुंध और हल्का कोहरा भी देखने को मिल सकता है।
दक्षिणी छत्तीसगढ़ (बस्तर संभाग):
आज से यहां रातें और ठंडी होने लगेंगी। कई इलाकों में तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री तक नीचे जा सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई. सिनोप्टिक सिस्टम भी फिलहाल शांत है, जिससे छत्तीसगढ़ में आगामी दिनों तक मौसम शुष्क बने रहने के आसार हैं. छत्तीसगढ़ में अब मौसम का मिजाज बदलने लगा है। उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी और उससे लगे मध्य-पूर्व बंगाल की खाड़ी व म्यांमार क्षेत्र के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। इससे प्रदेश के अधिकांश इलाकों में आकाश साफ और हवा शुष्क बनी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार बस्तर संभाग के एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ छींटे पड़ सकते हैं, लेकिन इसके बाद पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा।
इसी के साथ रात के तापमान में लगातार गिरावट का दौर शुरू होगा। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में और सात नवंबर से मध्य व दक्षिण भागों में न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे सुबह और रात में ठंड का असर स्पष्ट रूप से महसूस होने लगेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आयोजित जशपुर जम्बुरी ने पर्यटन को नया आयाम देते हुए स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और रोमांच को एक साथ जोड़ा है। जिला प्रशासन द्वारा 6 से 9 नवम्बर तक आयोजित इस चार दिवसीय आयोजन में देशभर से आए पर्यटकों को जशपुर की सुन्दर वादियों, लोक संस्कृति और आतिथ्य का सजीव अनुभव प्राप्त हो रहा है।
ग्राम केरे में पर्यटकों के लिए आठ होम स्टे की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जहाँ मेहमानों को सभी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। प्रशासन की इस पहल ने ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा दी है और स्थानीय परिवारों को भी आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिला है।
होम स्टे में ठहरे पर्यटक केवल अतिथि नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों के सदस्य बनकर रह रहे हैं। वे जशपुर की जीवनशैली, खान-पान और परंपराओं को नजदीक से महसूस कर रहे हैं। पर्यटकों ने कहा कि “होम स्टे में रहना होटल से कहीं बेहतर अनुभव है। यहाँ की सादगी, आत्मीयता और घरेलू भोजन ने मन मोह लिया।”
होम स्टे की यह अवधारणा स्थानीय जीवन से सीधा जुड़ाव प्रदान करती है। यहाँ पर्यटक घरेलू वातावरण में रहकर न केवल स्थानीय संस्कृति और भाषा को समझते हैं, बल्कि परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद भी लेते हैं। यह मॉडल होटल की तुलना में अधिक किफायती होने के साथ-साथ व्यक्तिगत और पारिवारिक वातावरण भी प्रदान करता है।
भारत के कई राज्यों — हिमाचल, उत्तराखंड, केरल, सिक्किम और असम — की तरह अब छत्तीसगढ़ भी होम स्टे आधारित ग्रामीण पर्यटन के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जशपुर की पहाड़ियाँ और हरियाली इस अवधारणा को और अधिक आकर्षक बनाती हैं।
जशपुर जम्बुरी में रोमांच प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण रहा। देशदेखा क्षेत्र में लगभग 120 पर्यटकों ने रॉक क्लाइंबिंग का रोमांचक अनुभव लिया, जो पूरी सुरक्षा और विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न हुआ। पर्यटक हरी-भरी वादियों के बीच एडवेंचर और सुकून दोनों का आनंद ले रहे हैं।
पहले दिन पंजीकृत पर्यटकों को जशपुर की पारंपरिक शैली में दोना-पत्तल में भोजन परोसा गया। दिनभर की गतिविधियों के बाद संध्या बेला में पर्यटक लोक कलाकारों के साथ झूमते नजर आए। चांदनी रात और संगीत की स्वर-लहरियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
जशपुर जम्बुरी की विशेषता रही स्टार-गेजिंग सेशन, जिसमें पर्यटकों ने खुले आसमान के नीचे तारों को निहारते हुए प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुभव किया। लोक कलाकारों के गीत, नृत्य और चांदनी की उजास ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।
जिला प्रशासन द्वारा निवास, भोजन, सुरक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुदृढ़ व्यवस्था ने जशपुर जम्बुरी को एक आदर्श ग्रामीण-पर्यटन उत्सव बना दिया है। इस आयोजन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, बल्कि जशपुर को “प्रकृति, संस्कृति और एडवेंचर का संगम” के रूप में राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिली है।
बिलासपुर। हाल ही में बिलासपुर में हुए दर्दनाक रेल हादसे को लेकर चल रही कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की जांच से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। मामले की जांच में शामिल सूत्रों के अनुसार, CRS रिपोर्ट आने में अभी कम से कम 15 दिन का समय लग सकता है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट की विस्तार से समीक्षा और क्रॉस एग्जामिनेशन की प्रक्रिया भी होगी, जिसके चलते अंतिम रिपोर्ट में और देरी संभव है।
गौरतलब है कि हादसे को लेकर रेलवे एवं सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ देशभर की निगाहें इस रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर हादसे की वास्तविक वजह, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
CRS जांच का दूसरा दिन, 5 सदस्यीय टीम सक्रिय
हादसे की गंभीरता को देखते हुए CRS ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच शुरू की है। 5 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम वर्तमान में जांच कार्य में लगी हुई है। गुरुवार से प्रारंभ हुई यह जांच शनिवार तक चलने की संभावना है। टीम रेलवे अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों, स्टेशन स्टाफ और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर रही है।सूत्रों के मुताबिक, अब तक 19 कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है, जिसमें लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, सिग्नलिंग स्टाफ, ट्रैकमैन एवं अन्य विभागीय कर्मचारी शामिल हैं।
पूछताछ का उद्देश्य हादसे से पहले की परिस्थितियों, तकनीकी खामियों, सिग्नलिंग सिस्टम, संचार व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल की स्थिति को समझना है।CRS टीम ने स्पष्ट किया है कि जांच पूर्ण होने से पहले हादसे के कारणों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी नतीजे पर पहुँचने को टीम ने “असमय और अनुचित” बताया है।जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हादसे की असली वजह का खुलासा रिपोर्ट तैयार होने और उसके क्रॉस एग्जामिनेशन के बाद ही संभव होगा।
क्यों लग रहा है रिपोर्ट में समय?
रिपोर्ट में देरी के पीछे मुख्य कारण:
तकनीकी और संरचनात्मक परीक्षण
सिग्नलिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम की जांच
संबंधित विभागों की रिपोर्ट का विश्लेषण
दुर्घटना स्थल की पुनः समीक्षा
रिपोर्ट के अंतिम रूप से पहले क्रॉस एग्जामिनेशन और वैलिडेशन
यह पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि रिपोर्ट तथ्यों, तकनीकी विश्लेषण और सत्यापित बयानों पर आधारित हो, ताकि कोई भी निर्णय न्यायसंगत और सटीक हो।बिलासपुर रेल हादसा न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देशभर में चिंता का विषय बना हुआ है। इस रिपोर्ट से न केवल दोषियों की जिम्मेदारी तय होगी, बल्कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में संभावित सुधारों का मार्ग भी प्रशस्त होगा। फिलहाल सभी की निगाहें CRS जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के 10वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपना रजत जयंती वर्ष मना रहा है और आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ का भी ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों और ट्रिपल आईटी परिवार को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर स्थापित है, जिन्होंने शिक्षा, एकता और औद्योगिक विकास को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यह मिशन न केवल बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है, बल्कि युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार को प्रोत्साहन देने का भी कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सेमीकंडक्टर आज आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है— मोबाइल, सैटेलाइट, रक्षा प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सभी इससे जुड़े हैं। ऐसे में ‘मेक इन सिलिकॉन’ जैसी पहल भारत की चिप क्रांति को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कुशल मानव संसाधन, सुदृढ़ औद्योगिक ढांचा, निर्बाध बिजली आपूर्ति और तकनीकी विकास के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध है। नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना का भूमिपूजन हो चुका है, जिससे युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर को आईटी और इनोवेशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य का ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट’ सतत विकास पर केंद्रित है, जिसमें सेमीकंडक्टर को प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इज ऑफ डूइंग बिज़नेस के साथ अब स्पीड आफ डूइंग बिज़नेस पर भी बल दे रही है।
मुख्यमंत्री ने देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को लाभ मिलेगा। उन्होंने आह्वान किया कि “हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को मध्य भारत का ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का केंद्र बनाएं तथा भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में सक्रिय योगदान दें।”
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जब मैं पढ़ाई कर रहा था, तब छत्तीसगढ़ में एक भी राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं था। किंतु पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता के कारण आज प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, एचएनएलयू, एम्स, एनआईटी और ट्रिपल आईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित हुए हैं। इन संस्थानों ने राज्य को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई पहचान दी है।
श्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ में शिक्षा और तकनीकी विकास की अपार संभावनाएँ हैं। आज का युग टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इकोनॉमी का है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर डाउन होने से विश्वभर में जिस प्रकार कार्य प्रभावित हुए, उससे स्पष्ट है कि पावर टेक्नोलॉजी आज जीवन, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रणाली को किस हद तक प्रभावित करती है। इसलिए हमें इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अभी से तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा कि नवाचार, कौशल और काबिलियत ही भविष्य में आपकी वास्तविक उपयोगिता सिद्ध करेंगे। बड़ी उपलब्धियाँ वही व्यक्ति प्राप्त करता है, जो अपनी क्षमता को निरंतर तराशता है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवर्तन हमेशा दृष्टिकोण, संकल्प और निरंतर प्रयास से आता है। साउथ कोरिया के तकनीकी परिवर्तन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “हमें भी उसी प्रकार शिक्षा, तकनीक और शोध में निवेश बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा।”
वित्त मंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीकी दक्षता, शोध और रचनात्मक सोच को अपने जीवन का आधार बनाएं, क्योंकि आने वाला समय उन्हीं का होगा जो ज्ञान और नवाचार को अपनी शक्ति बनाएंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि सेमीकंडक्टर और औद्योगिक क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप शैक्षणिक संस्थान सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने युवाओं से कहा कि “आपका नवाचार और आपका संकल्प भारत की तकनीकी पहचान को नई ऊँचाई देगा।”
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के निदेशक प्रो. ओम प्रकाश व्यास ने अतिथियों को संस्थान की 10 वर्षों की उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान में विकसित भारत की अवधारणा के अनुरूप शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। छात्रों के कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण एवं उद्योग आधारित परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो. मुकुल सुतावणे, आईआईटी इंदौर के प्रो. संतोष विश्वकर्मा, मनोज कुमार मजूमदार सहित शिक्षाविद् एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहीं।
उल्लखेनीय है कि ‘मेक इन सिलिकॉन’ - स्वदेशी सेमीकंडक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी - ट्रिपल आईटी नया रायपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी (ECE) विभाग के माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और वीएलएसआई डिजाइन समूह द्वारा आयोजित की जा रही है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को सशक्त बनाना और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन शिक्षा जगत, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच नवाचार, ज्ञान-विनिमय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त मंच है, जिससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सके।
संगोष्ठी में वीएलएसआई डिजाइन और माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उन्नत तकनीक, जैसे नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स, एमईएमएस, क्वांटम डिवाइस, तथा उद्योग-शिक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इन क्षेत्रों में प्रगति न केवल तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करेगी बल्कि भारत के अनुसंधान और औद्योगिक विकास के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य भी करेगी।
राष्ट्रीय मिशन के तहत यह पहल सेमीकंडक्टर उपकरण, पैकेजिंग और फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता एवं नवाचार को गति देने का प्रयास है। संगोष्ठी में नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स की सहभागिता से कौशल विकास, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया है। यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत मिशन की भावना के अनुरूप भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर नवाचार और निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रायपुर। भारत की आत्मा और एकता के प्रतीक राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर आज जिले में उत्सवपूर्ण वातावरण में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलास्तरीय मुख्य कार्यक्रम कलेक्ट्रेट के रेडक्रॉस सभाकक्ष में गरिमामय रूप से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खुशवंत साहेब, विधायक अनुज शर्मा, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह तथा अपर कलेक्टर नम्रता जैन सहित जिले के अधिकारी, कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में भावपूर्ण तरीके से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। पूरा सभाकक्ष देशभक्ति की भावना से गूंज उठा। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों को नमन करते हुए सभी ने उनके अदम्य साहस और योगदान को याद किया। जिले के शासकीय स्कूलों एवं कार्यालयों में राष्ट्रीय गान वंदे मातरम् का गायन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनों ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन का सीधा प्रसारण भी देखा और सुना।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का यह अवसर हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति की भावना को और प्रखर करने वाला तथा देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रतीक बन गया।
रायपुर। ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज देशभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक दिन को छत्तीसगढ़ में भी बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। इस अवसर पर सभी ने “वंदे मातरम्” के उद्घोष के साथ आज़ादी की राष्ट्रीय चेतना का पुण्य स्मरण किया और अमर बलिदानियों को नमन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित स्मरणोत्सव में वर्चुअली शामिल हुए और प्रधानमंत्री का उद्बोधन भी सुना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वंदे मातरम् मां भारती की साधना और आराधना की प्रेरक अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान का एक प्रवाह, एक लय और एक तारतम्य हृदय को स्पंदित कर देता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ का मूल भाव मां भारती है — यह भारत की शाश्वत संकल्पना, स्वतंत्र अस्तित्व-बोध और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की आज़ादी का उद्घोष था, जिसने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने और स्वाधीन भारत के स्वप्न को साकार करने की प्रेरणा दी। स्वतंत्रता आंदोलन में यह गीत क्रांतिकारियों की आवाज़ बना और यह केवल प्रतिरोध का स्वर नहीं, बल्कि आत्मबल जगाने वाला मंत्र बन गया। श्री मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ में भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और समृद्धि की कहानी समाहित है। विदेशी आक्रमणों और अंग्रेज़ों की शोषणकारी नीतियों के बीच ‘वंदे मातरम्’ ने समृद्ध भारत के स्वप्न का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत के नए स्वरूप का उदय देख रही है, जो अपनी परंपरा, आध्यात्मिकता और आधुनिकता के समन्वय से आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था, और यह गीत सदैव हमारे हृदयों में अमर रहेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह गीत मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम, कृतज्ञता और राष्ट्रधर्म की भावना का शाश्वत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन कर मातृभूमि की वंदना की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के वर्षभर चलने वाले स्मरणोत्सव का आज माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रव्यापी शुभारंभ इस कालातीत रचना के 150 वर्ष पूरे होने का गौरवपूर्ण अध्याय है। इस अवसर पर वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा स्मारक सिक्के का जारी होना एक ऐतिहासिक स्मृति है। बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम् गीत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा रहा है, जिसने सदैव राष्ट्रीय गौरव, एकता और आत्मसम्मान की ज्योति प्रज्वलित की है। यह मातृभूमि की शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक है, साथ ही भारत की एकता और आत्मगौरव की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि 7 नवम्बर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इस कालजयी रचना की सृष्टि की थी, जिसे बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में शामिल किया गया। मातृभूमि की स्तुति में रचा गया यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति की सबसे प्रबल प्रेरणा बना। अनेक क्रांतिकारियों ने “वंदे मातरम्” कहते हुए हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वंदे मातरम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 1905 में बंगाल विभाजन के समय ‘वंदे मातरम्’ ने स्वदेशी आंदोलन को नई ऊर्जा दी। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक यह गीत सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रभक्ति का मंत्र बन गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सुनते ही हृदय में ऊर्जा, गर्व और देशभक्ति का संचार होता है। यह गीत हमें स्मरण कराता है कि हमारी भूमि, जल, अन्न और संस्कृति ही हमारी जीवनदायिनी शक्ति हैं। उन्होंने कहा, “यूरोप में भूमि को ‘फादरलैंड’ कहा जाता है, लेकिन भारत में हम अपनी भूमि को ‘मातृभूमि’ कहते हैं।” यह भाव रामायण के श्लोक “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” में प्रकट होता है। ‘वंदे मातरम्’ भी इसी भाव से जन्मा हमारा ध्येय-वाक्य है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस पहल से भावी पीढ़ी को हमारे अतीत के संघर्षों और ‘वंदे मातरम्’ जैसी अमर रचनाओं की आज़ादी की लड़ाई में भूमिका के बारे में जानने का सुंदर अवसर मिलेगा। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लें और इसे भारत माता तथा छत्तीसगढ़ महतारी को समर्पित करें।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित स्मारक सिक्का तथा डाक टिकट का विमोचन किया। साथ ही, इस अवसर पर ‘वंदे भारत पोर्टल’ (vandematram150.in) का शुभारंभ भी किया। इस पोर्टल के माध्यम से देशवासी अपनी आवाज़ में ‘वंदे मातरम्’ रिकॉर्ड कर इस ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ सकते हैं। यह पहल लोगों को भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर छायाचित्र प्रदर्शनी का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदर्शनी का विस्तार से अवलोकन करते हुए ‘वंदे मातरम्’ के सृजन से लेकर इसके राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक बनने तक की ऐतिहासिक यात्रा का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह भारत के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के दौर की अनेक अनकही कहानियों को उजागर करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी नई पीढ़ी को देश की आज़ादी के मूल भाव और ‘वंदे मातरम्’ की प्रेरक भूमिका से परिचित कराती है।
इस अवसर पर सांसद चिंतामणि महाराज, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुकेश बंसल, पी. दयानंद, डॉ. बसवराजू एस. सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।