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छत्तीसगढ़ में पारदर्शी, वैज्ञानिक और जनहितैषी खनिज नीति के तहत रेत खनन व्यवस्था को मिल रहा नया स्वरूप
रायपुर। राज्य में रेत खनन नीति को अधिक पारदर्शी, संगठित, पर्यावरण-संवेदनशील और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से व्यापक कदम उठाए गए हैं। पूर्ववर्ती सरकार के शासन काल के दौरान राज्य में संचालित रेत खदानों की संख्या 300 से घटकर लगभग 100-150 रह गई थी, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुए और अवैध खनन को बढ़ावा मिला। वर्तमान सरकार द्वारा खनिज नीति में सुधार कर रेत खनन की व्यवस्था को संगठित, नियंत्रित और जनहितकारी बनाया गया है।
पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया में तीव्रता
राज्य में पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया को गति देने के लिए भारत सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर तीन राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण समितियों का गठन किया गया है। पूर्व में केवल एक समिति कार्यरत थी। इस निर्णय से लंबित प्रकरणों के शीघ्र निपटारे की प्रक्रिया सुगम हुई है।
वैध खदानों की संख्या में वृद्धि
वर्तमान में 119 रेत खदानें पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ विधिवत संचालित हैं, जबकि 94 अन्य खदानों की मंजूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। साथ ही, आगामी 1 से 1.5 वर्षों में 300 से अधिक नई खदानों को स्वीकृति दिए जाने की योजना है, जिससे रेत की आपूर्ति सुलभ बनी रहेगी और निर्माण कार्यों को गति मिलेगी।
IIT रुड़की की रिपोर्ट: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खनन
प्रमुख नदियों पर खनन के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर IIT रुड़की से कराए गए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है कि विधिवत और नियंत्रित रेत खनन से नदियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। यह रिपोर्ट राज्य की वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित खनिज नीति को समर्थन प्रदान करती है।
अवैध खनन पर सख्त कार्यवाही
वर्ष 2024-25 से जून 2025 तक 6,331 अवैध खनन प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से ₹18.02 करोड़ की वसूली, 184 मशीनों की जब्ती, 56 एफआईआर तथा 57 न्यायालयीन परिवाद दायर किए गए। जिला एवं राज्य स्तरीय टास्क फोर्सों द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है, जिसमें खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन और पर्यावरण विभाग के अधिकारी सम्मिलित हैं।
विवादों पर त्वरित कार्यवाही
राजनांदगांव और बलरामपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों में रेत से संबंधित विवादों एवं घटनाओं पर त्वरित कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही की गई है। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रॉयल्टी में राहत
15 मार्च 2024 को लिए गए निर्णय के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को रेत पर रॉयल्टी से छूट प्रदान की गई है। इस निर्णय से गरीबों और जरूरतमंदों को प्रत्यक्ष राहत मिली है।
भविष्य की नीति: पारदर्शिता और संतुलन
छत्तीसगढ़ शासन की नीति स्पष्ट है — खनिज संसाधनों के दोहन को जनहित, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के सिद्धांतों पर आधारित करना। संगठित, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से तैयार की गई यह नई रेत खनन नीति राज्य के समग्र विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए सशक्त आधार बनेगी।
छत्तीसगढ़ से 30 बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी, रायपुर पुलिस ने किया डिपोर्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियो को रायपुर पुलिस आज उनके देश में डिपोर्ट करने वाली है. प्रदेशभर से करीब 30 बांग्लादेशियों को रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़, मोहला-मानपुर और चिरमिरी जैसे जिलों से पकड़ा गया था. इन सभी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हिरासत में लेकर उनके देश भेजने की व्यवस्था की गई है.
रायपुर पुलिस इन सभी घुसपैठियों को लेकर अब भारत-बांग्लादेश सीमा की ओर रवाना हो गई है, जहां उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हवाले किया जाएगा. सभी आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी करने के बाद BSF इन लोगों को बांग्लादेश भेजेगी.
शून्य काल में विपक्ष ने उठाया अवैध रेत खनन का मुद्दा
रायपुर। विधानसभा में आज विपक्ष ने शून्य काल में रेत के अवैध उत्खनन का मुद्दा लाया. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा, लगातार प्रदेश में अवैध रेत खनन पुलिस ओर माइनिंग वालों की देखरेख में चल रहा है. खदानों में गोली चल रही है. जिंदा आदमियों पर ट्रक चढ़ा दिए जा रहे हैं, इसे स्वीकृत कर चर्चा कराई जाए. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की ग्राह्यता को अस्वीकार किया. इसके बाद विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया.
इससे पहले उमेश पटेल ने कहा, माइनिंग के अधिकारियों को जब पूछा जाता है तो वो कहते हैं कि हमें ऊपर से आदेश है कि इन्हें नहीं पकड़ना है. पत्रचार के बाद भी कार्यवाही नहीं की जा रही है. रेत माफियों ने रायगढ़ जिले के मांड नदी का कोई किनारा नहीं छोड़ा है. यहां धड़ल्ले से अवैध उत्खनन चल रहा है इसलिए इस पर चर्चा करना बहुत जरूरी है.
देवेंद्र यादव ने कहा, आज के समय में पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं. पूरी मिलीभगत के साथ अवैध रेत खनन का काम किया जा रहा है. इस पर चर्चा कराना बेहद जरूरी है. दिलीप लहरिया ने कहा, महानदी में कई जगहों पर रेत की सप्लाई बारिश में भी नहीं हो पा रही है. रेत माफिया चाकूबाजी करते हैं, समस्या गंभीर है, इसलिए हम चाहते हैं कि इस पर चर्चा हो. रामकुमार ने कहा, ऐसे विषय में चर्चा कराना बेहद आवश्यक है.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, यह निर्माण से संबंधित है. रेत खनन में माफिया सरकार को अपने जेब में रखकर दादागिरी के साथ नदियों को खाली कर रहे हैं. आपके जिले में गोलियां चला रही है, यह विषय बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है इसलिए इसमें चर्चा कराना जरूरी है. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा, स्थगन की सूचना आज प्राप्त हुई. उन्होंने इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की ग्राह्यता को अस्वीकार किया. इसके बाद विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया.
मुख्यमंत्री से केन्द्रीय भूमि संसाधन सचिव ने की मुलाकात, भू-अभिलेख सुधार, डिजिटल सर्वे और राजस्व न्यायालयों में मामलों के त्वरित निराकरण को लेकर हुई विस्तृत चर्चा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर स्थित कार्यालय में भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर भू-अभिलेख प्रणाली को सुदृढ़ करने, भूमि सर्वेक्षण में तकनीकी नवाचारों के उपयोग, तथा राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राजस्व मंत्री टंकाराम वर्मा भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार भू-राजस्व दस्तावेजों को अद्यतन करने और आवश्यक सुधार के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड जितने व्यवस्थित होंगे, राजस्व न्यायालयों में मामलों का निपटारा उतना ही शीघ्र और प्रभावी रूप से हो सकेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि अभिलेखों में सुधार संबंधी केंद्र सरकार की सभी पहल के साथ राज्य सरकार कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेगी, ताकि यह प्रणाली और अधिक प्रभावशाली व जनहितकारी बन सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तकनीक आधारित नवाचारी पहलों के माध्यम से भू-राजस्व रिकॉर्ड में पारदर्शिता, गति और सटीकता लाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है, जिससे किसानों और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तत्परता से सुनिश्चित करें।
केंद्रीय भूमि संसाधन सचिव मनोज जोशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और राज्य सरकार के सक्रिय सहयोग से इसमें और अधिक सुधार लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व में पारंपरिक पद्धति से किए जाने वाले भूमि सर्वेक्षण में समय अधिक लगता था, किंतु अब आधुनिक तकनीकों के उपयोग से यह प्रक्रिया तेज़, अधिक सटीक और भरोसेमंद हो गई है।
श्री जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार भू-अभिलेख संधारण प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है, जिसके अंतर्गत राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान नक्शों के अद्यतन में कई बार तकनीकी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिन्हें डिजिटल सर्वेक्षण के माध्यम से प्रभावी रूप से दूर किया जा सकेगा। इससे प्रत्येक नागरिक को अद्यतन और प्रमाणिक नक्शा प्राप्त होगा, जिससे गड़बड़ियों में कमी आएगी और शहरी क्षेत्रों के विस्तार को बेहतर ढंग से नियोजित किया जा सकेगा।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, भारत सरकार के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी, राजस्व सचिव अविनाश चंपावत, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
विधानसभा में उठा बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला
रायपुर। विधानसभा में आज ध्यानाकर्षण सूचना में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, धरमजीत सिंह और भावना बाेहरा ने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला उठाया. अजय चंद्राकर ने कहा, करीब 5 हजार घुसपैठिए छत्तीसगढ़ में मौजूद हैं. आधार, राशन, पासपोर्ट बनाकर सरकारी योजना का लाभ ले रहे हैं. सरकारी सिस्टम में इनके मदद करने वाले मौजूद हैं. उन्होंने डिटेंशन सेंटर बनाने की मांग की.
धरमजीत सिंह ने रोहिंग्या मुसलमान को भी चिन्हांकित करने की मांग रखी. भावना बोहरा ने शिकायत के आधार पर जांच करने का मामला उठाया. उन्होंने कहा, दस्तावेजी आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र की जांच हो. विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि कई जिलों में एफआईआर कर कार्रवाई की गई है. टोल फ्री नंबर जारी कर जनभगिता शामिल कर रहे.
रायपुर में बनाया जाएगा 100 सीटर बोर्डिंग सेंटर
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, शिकायतों के आधार पर जांच की जा रही है. डिटेंशन सेंटर की जरूरत नहीं है. बोर्डिंग सेंटर बनाया जाएगा. रायपुर में 100 सीटर बोर्डिंग सेंटर बनाया जाएगा. जो लोग चिन्हित होंगे उनको जेल नहीं बल्कि बोर्डिंग सेंटर में रखा जाएगा. ऐसे लोगों को चिन्हित करने के बाद बीएसएफ को सौंपा जाएगा. बीएसएफ उनको डिपोर्ट करने की कार्रवाई करेगा.
पाकिस्तानी नागरिकों पर भी होगी कार्रवाई : विजय शर्मा
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, शिकायतों की जांच के लिए टास्क फोर्स बनाया गया है. इस दौरान कांग्रेस की ओर से उमेश पटेल ने कार्रवाई का समर्थन किया. साथ ही पाकिस्तान के घुसपैठियों पर कार्रवाई की मांग की. गृह मंत्री शर्मा ने पाकिस्तानी नागरिक के रहने पर भी कार्रवाई की बात कही. उन्होंने कहा, पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को नागरिकता हासिल करने की छूट रहेगी.
अजय चंद्राकर ने कहा, टीएस सिंहदेव ने पत्र लिखा था कि महामाया पहाड़ी पर कब्जा हो गया है. पश्चिम बंगाल तो बांग्लादेश बन ही गया है. समुचित कार्रवाई हो रही तो ये आ कैसे गए. 4 राज्य पार कर रोहिंग्य, बांग्लादेशी आ कैसे गए. इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, पहली बार एसटीएफ का गठन किया गया है. एम आधार ऐप से संदिग्ध का वेरिफिकेशन किया जा रहा है. 19 प्रकरण दर्ज किया गया है.
जो लोग घुसपैठियों का साथ दे रहे उन पर होगी कार्रवाई : गृह मंत्री
धर्मजीत सिंह के सवाल पर मंत्री विजय शर्मा ने कहा, अब तक सारे घुसपैठिए बांग्लादेशी निकले हैं, रोहिंग्या नहीं है. रायपुर में कांग्रेसी पार्षद से बांग्लादेशी के डॉक्यूमेंट बनाए गए. जो भी ऐसा कर रहे हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है. हर जिले में स्कैनिंग होगी. जो वोट बैंक बनाना चाहते हैं उसे खत्म किया जाएगा. बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का विरोध हो रहा है. ये किस तरह की सोच है.
बांग्लाभाषी लोग आदिवासी जमीन पर कर रहे कब्जा : सुशांत शुक्ला
भाजपा विधायक भावना बोहरा ने कहा, होटल, चौक चौराहों, जोमेटो में संदिग्ध लोग दिख रहे हैं. उमेश पटेल ने कहा, सिर्फ बांग्लादेशी नहीं, पाकिस्तानी भी रह रहे हैं, उनको भी प्रदेश से बाहर किया जाना चाहिए. सुशांत शुक्ला ने कहा, बेलतरा के तीन क्षेत्रों में धर्म विशेष के लोग अनैतिक काम में लिप्त हैं. बांग्लाभाषी लोग आदिवासी जमीन पर कब्जा कर रहे. इनके दस्तावेज आज भी वेरिफिकेशन के लिए पेंडिंग है. गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, तीनों जगह पर कठोरता से जांच होगी. जय छत्तीसगढ़ अभियान में सभी विधायक शामिल हों.
रायपुर के बीएसयूपी मकानों में रह रहे बाहरी लोग : राजेश मूणत
विधायक राजेश मूणत ने कहा, संजय नगर, टिकरापारा में जितने बीएसयूपी के मकान बने हैं उनमें बड़ी संख्या में बाहरी लोग आकर बसे हैं. यहां अभियान चलाया जाए. इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, पुलिस के साथ जरूर अभियान चलाया जाएगा.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों ने की मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विधानसभा स्थित कार्यालय में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों ने सौजन्य भेंट कर मंत्रिपरिषद की बैठक में वर्ष 2005 से 2009 बैच तक के अर्हकारी सेवा अवधि पूर्ण कर चुके अधिकारियों को वरिष्ठ प्रवर श्रेणी वेतनमान प्रदान किए जाने के निर्णय हेतु आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि 11 जुलाई 2025 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य पुलिस सेवा संवर्ग के समुचित प्रबंधन हेतु 30 सांख्येतर पदों का सृजन करते हुए वरिष्ठ प्रवर श्रेणी वेतनमान प्रदान करने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय उन अधिकारियों के लिए लिया गया है जिन्होंने सेवा में निर्धारित अर्हता अवधि पूर्ण कर ली है।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले, कीर्तन राठौर, अनंत साहू, डॉ. संगीता माहेलकर एवं प्रज्ञा मेश्राम उपस्थित थीं।
सदन में गूंजा रेडी टू ईट का मामला : नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
रायपुर। सदन में रेडी टू ईट के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर तकरार हुई. ध्यानाकर्षण में नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मामले को उठाते हुए गलत तरीके से स्व-सहायता समूहों के चयन का आरोप लगाया.
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा, इस योजना में भारी भ्रष्टाचार हुआ है. उन्होंने गड़बड़ी करने वाले विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की. सवाल-जवाब के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर तकरार हुई.
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और कांग्रेस विधायक उमेश पटेल के बीच नियम-प्रकिया के सवाल पर तीखी बहस हुई. इस दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के जवाब से असन्तुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया.
हाईटेक नकल के बाद व्यापमं ने नियम में किया बदलाव
रायपुर। छत्तीसगढ़ व्यापमं की पीडब्ल्यूडी सब इंजीनियर भर्ती परीक्षा के लिए बिलासपुर के एक केंद्र में रविवार को हाईटेक तरीके से नकल का मामला सामने आया. जिसके बाद व्यापमं ने नियमों में बदलाव किया है. अब जूते, ज्वेलरी और फुल बांह के कपड़ो को बैन कर दिया है. जूते की जगह फुटवियर के रूप में चप्पल मान्य होगा. कान में पहनने वाली ज्वेलरी पर भी प्रतिबंध होगा. इसी नियम के तहत 20 जुलाई को सब इंजीनियर भर्ती परीक्षा होगी. व्यापमं की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया है.
नियमों में बदलाव के बाद अब परीक्षा शुरू होने से 15 मिनट पहले गेट बंद कर दिए जाएंगे. इससे पहले व्यापमं परीक्षा में निर्धारित समय तक एंट्री दी जाती थी. साथ ही अभ्यर्थी हल्के रंग के कपड़े पहन सकेंगे. अभ्यर्थी को परीक्षा होने के पहले आधे घंटे में और अंतिम आधे घंटे तक कक्ष से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी. परीक्षा केंद्र के भौगोलिक स्थान से पूर्व परिचित होना परीक्षार्थी की जिम्मेदारी होगी, ताकि परीक्षा वाले दिन किसी प्रकार की देरी न हो.
इन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर बैन
मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ, इयरफोन, कैलकुलेटर, या अन्य कोई संचार उपकरण लाना पूरी तरह से बैन कर दिया गया है.
एग्जाम हॉल में ये करना पड़ेगा भारी
नए नियमों के मुताबिक, अगर अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में फुसफुसाना, चिल्लाना, बातें करना या हाव-भाव से इशारे करता पाया गया तो उसपर एक्शन लिया जाएगा. अधिकारी के निर्देशों का पालन न करना, दुर्व्यवहार करना या विवाद करने पर भी कार्रवाई होगी.

जल जीवन मिशन पर बड़ा सवाल: फर्जी दस्तावेज़, गलत भुगतान और टकराव, धरमलाल कौशिक के सवाल पर अरुण साव ने कहा…
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को जल जीवन मिशन को लेकर प्रश्नकाल में बड़ा हंगामा देखने को मिला। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने योजना में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और विभागीय मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कौशिक ने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेज़ के माध्यम से कुछ फर्मों ने अनुबंध लेकर कार्य किया है, लेकिन आज तक उन पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने पूछा,
“जब आरोप स्पष्ट हैं तो संबंधित फर्मों और दोषियों पर एफआईआर क्यों नहीं की गई?”
जवाब में डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि
“एक फर्म पर एफआईआर दर्ज की गई है, वहीं कुछ फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। ज्वाइंट वेंचर के मामले लंबित हैं। अफसरों की भूमिका की रिपोर्ट अभी आई नहीं है, रिपोर्ट आते ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”
धरमलाल कौशिक ने यह भी सवाल उठाया कि विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि जब तक काम पूरा न हो, 70 प्रतिशत से ज्यादा भुगतान नहीं किया जाएगा, लेकिन अब जानकारी सामने आई है कि कुछ ठेकेदारों को 80 प्रतिशत से ज्यादा भुगतान कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या नियमविरुद्ध भुगतान करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी?
इस पर मंत्री अरुण साव ने जवाब दिया कि
“यदि जांच में पाया गया कि भुगतान नियमों के विरुद्ध किया गया है, तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।”
इस बीच कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी बहस छिड़ गई। देवेंद्र यादव द्वारा ऊंचे स्वर में बोलने और आक्रामक लहजे पर आपत्ति जताते हुए चंद्राकर ने टोक दिया, जिसके बाद सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को संभालते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा:”विधानसभा कोई सड़क नहीं है भाषण देने के लिए। सभी सदस्य अपनी बात रखें, लेकिन तरीका मर्यादित हो। आसंदी की ओर देखकर, शालीन भाषा में संवाद करें।” डॉ. रमन सिंह ने देवेंद्र यादव को व्यक्तिगत रूप से फटकार लगाते हुए सदन की गरिमा बनाए रखने की चेतावनी दी।
सदन में भिड़ गये देवेंद्र यादव और अजय चंद्राकर, असंसदीय भाषा पर विधानसभा अध्यक्ष ने लगायी फटकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को प्रश्नकाल के बीच सदन का माहौल अचानक गरमा गया। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो धीरे-धीरे तू-तू मैं-मैं और नारेबाजी तक पहुंच गई। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से सदन का अनुशासनिक वातावरण बिगड़ता देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा।
मामला उस समय शुरू हुआ जब भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने जल एवं स्वच्छता मिशन को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव से सवाल पूछा। जवाब के बीच में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव अपनी सीट से खड़े हो गए और एक दस्तावेज लहराते हुए जोरदार आवाज में बोले कि “यह विधानसभा का ही दस्तावेज है, जिसमें साफ लिखा है कि जब तक कार्य पूर्ण नहीं होता, तब तक 70 प्रतिशत से अधिक राशि का भुगतान नहीं किया जा सकता।”
यादव की तीखी भाषा और उच्च स्वर पर आपत्ति जताते हुए अजय चंद्राकर अपनी सीट से खड़े हो गए और सवाल किया कि “ये किस नियम के तहत इतनी ऊंची आवाज में बोल रहे हैं?” इसके बाद दोनों नेताओं के बीच शब्दों की तलवार चलने लगी और मामला असंसदीय भाषा तक पहुंच गया। देवेंद्र यादव अपनी सीट से आगे भी बढ़ने लगे, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
हालात को बिगड़ता देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने तत्काल हस्तक्षेप किया और दोनों नेताओं को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा,
“प्रश्नकाल जनता देखती है, देश देखता है। इस तरह की भाषा और आचरण छत्तीसगढ़ विधानसभा की गरिमा के खिलाफ है।”
उन्होंने विशेष रूप से देवेंद्र यादव को नसीहत देते हुए कहा कि वे दो बार के विधायक हैं और उन्हें संसदीय परंपराओं की समझ होनी चाहिए। बाद में दोनों पक्षों द्वारा प्रयोग किए गए असंसदीय शब्दों को सदन की कार्यवाही से विलोपित कर दिया गया। डॉ. रमन सिंह ने सदन को स्मरण दिलाया कि
“यह विधानसभा रजत जयंती मना रही है और पूरे देश में इसकी मर्यादा और परंपरा की मिसाल दी जाती है। हमें इसे कायम रखना है, नई मिसालें नहीं बनानी हैं।”
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस-भाजपा विधायकों के बीच तीखी बहस के बीच देवेंद्र यादव और अजय चंद्राकर के बीच असंसदीय भाषा का प्रयोग किया। विधानसभा अध्यक्ष का कड़ा हस्तक्षेप और फटकार, असंसदीय शब्द कार्यवाही से हटाए गए। सदन की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी गयी।
मानसून सत्र: CSR फंड का मुद्दा गरमाया, विपक्ष ने लगाए गोलमाल के आरोप, जांच की मांग तेज
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र दूसरे दिन खासा हंगामेदार रहा। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक किरण देव सिंह ने बस्तर संभाग में औद्योगिक संस्थानों द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) मद में खर्च की गई राशि का ब्यौरा मांगा। उन्होंने यह भी पूछा कि जगदलपुर में अब तक किन कार्यों को CSR मद के तहत स्वीकृति मिली है।
विपक्ष ने पूरे प्रदेश में CSR फंड के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा। विधायक किरण देव सिंह ने कहा, “मेरे क्षेत्र में अब तक कोई भी काम CSR फंड से स्वीकृत नहीं हुआ है।”
वहीं, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सवाल उठाया कि उद्योग CSR फंड का कितना प्रतिशत खर्च कर रहे हैं? जवाब में मंत्री ने बताया कि 2 प्रतिशत राशि खर्च की जा सकती है। चरणदास महंत ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय में उद्योगों के द्वारा कितनी राशि खर्च की जा रही थी और आज के वक्त में कितनी राशि खर्च की जा रहीहै, उसका भी आकलन करना जरूरी है।
इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि राशि खर्च हो रही है तो उसका सही लेखा-जोखा क्यों नहीं है? उन्होंने CSR मद में खर्च की जा रही राशि की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
विधानसभा में जल जीवन मिशन पर गरमाई सियासत: आंकड़ों की जंग में विपक्ष का वॉकआउट
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान जल जीवन मिशन को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे और खर्च की गई राशि व लक्ष्यों की उपलब्धि पर संदेह जताया।
भूपेश बघेल ने पूछा कि वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान जल जीवन मिशन के तहत कितनी राशि खर्च की गई और कितने घरों तक वास्तव में नल से जल पहुंचाया गया? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जिलों में योजना के तहत बहुत कम खर्च हुआ और अपेक्षाकृत कम घरों में पानी पहुंच पाया है।
इस पर जवाब देते हुए डिप्टी सीएम और जल संसाधन मंत्री अरुण साव ने कहा कि अब तक ₹15,045 करोड़, यानी कुल 57 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है। 31,16,398 घरों में नल कनेक्शन के माध्यम से जल आपूर्ति की जा रही है, जबकि 3,836 गांवों में पूर्ण रूप से नलजल सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि जिलों में राशि का वितरण कार्य प्रगति के अनुसार किया जाता है।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भूपेश बघेल ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “डबल इंजन की सरकार” ने अब तक केवल 10 लाख घरों में ही नल से जल पहुंचाया है, जबकि केवल आंकड़े दिखाकर उपलब्धियों का भ्रम पैदा किया जा रहा है।
बघेल ने कहा, “21 लाख घरों में हमारी सरकार ने जल पहुंचाया था, और आप दो साल में केवल 10 लाख जोड़ पाए, क्या यही गति है?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने बिना पानी के नल लगाकर कागजों में आंकड़े पूरे किए थे।
इस बहस के दौरान विपक्षी विधायकों ने सरकार पर “आंकड़ों की बाजीगरी” करने का आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 74 प्रतिशत कार्य पूरा किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने 20 महीनों में केवल 7 प्रतिशत कार्य किया है।
विपक्ष ने मंत्री अरुण साव के जवाब को भ्रामक बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीनी सच्चाई छुपाकर आंकड़ों के माध्यम से जनता को गुमराह कर रही है।
जल जीवन मिशन को लेकर विधानसभा में हुई इस बहस ने साफ कर दिया है कि पेयजल की योजना सिर्फ एक तकनीकी नहीं, बल्कि अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
चार बच्चों की डूबने से मौत पर उच्च न्यायालय सख्त, घटना पर स्वत: संज्ञान लिया, मुख्य सचिव से मांगा जवाब
रायपुर/जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में भाई-बहन समेत चार मासूम बच्चों की तालाब में डूबने से हुई मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। इस हृदयविदारक घटना को लेकर अदालत ने राज्य सरकार की जिम्मेदारी तय करते हुए मुख्य सचिव से व्यक्तिगत शपथ पत्र में जवाब तलब किया है।
गौरतलब है कि बीते शनिवार, जब बच्चे स्कूल से लौट रहे थे, वे पास के एक तालाब में नहाने चले गए और चारों की डूबने से मौत हो गई। यह मामला मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“यह कितनी शर्मनाक बात है कि स्कूल से लौटते समय चार बच्चे पानी में डूब जाते हैं… क्या यह सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं?”
अदालत ने इस घटना के साथ-साथ मीडिया में छपी एक अन्य रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर नाले को पार कर स्कूल जाते हुए दिखाया गया था। दोनों घटनाओं पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की गंभीर लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
मुख्य सचिव को आदेश दिया गया है कि वे व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल कर बताएं कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री की पहल से ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ हो रही साकार : कल रायपुर से अयोध्या धाम के लिए रवाना होगी विशेष ट्रेन, CM साय दिखाएंगे हरी झंडी
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के रजत जयंती वर्ष में प्रदेशवासियों को श्रीराम लला के दर्शन का सौभाग्य प्रदान करने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ जन जन के जीवन से जुड़ रही है।
इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली विशेष ट्रेन दिनांक 15 जुलाई 2025 को रायपुर रेलवे स्टेशन से अयोध्या धाम के लिए रवाना होगी। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं इस विशेष दर्शन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ करेंगे। रायपुर संभाग के श्रद्धालुओं को लेकर रवाना होने वाली इस ट्रेन के प्रस्थान अवसर पर मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य, वरिष्ठ अधिकारीगण एवं दक्षिण पूर्व-मध्य रेलवे रायपुर मंडल के डीआरएम दयानंद, सीनियर डीसीएम अवधेश त्रिवेदी तथा आईआरसीटीसी – साउथ सेंट्रल ज़ोन के ग्रुप महाप्रबंधक पी. राजकुमार भी उपस्थित रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रदेशवासियों को उनके जीवनकाल में एक बार प्रभु श्रीराम लला के अयोध्या धाम दर्शन का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से 23 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपादित किया गया था।
उक्त एमओयू के क्रियान्वयन की श्रृंखला में योजना की विधिवत शुरुआत रायपुर संभाग के श्रद्धालुओं के साथ 5 मार्च 2024 को हुई थी, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठ मंत्रीगणों एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में रायपुर रेलवे स्टेशन से पहली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
इसके पश्चात् 11 मार्च को बिलासपुर संभाग के श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रेन को उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसी क्रम में 19 जून को सरगुजा संभाग की विशेष ट्रेन को सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने विधायकगण एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शुभारंभ किया। 26 जून को दुर्ग एवं बस्तर (संयुक्त) संभाग की पहली विशेष ट्रेन, जिसमें 850 श्रद्धालु शामिल थे, दुर्ग रेलवे स्टेशन से अयोध्या के लिए रवाना हुई। इन सभी अवसरों पर श्रद्धालुओं में अत्यंत उत्साह और आस्था का भाव देखने को मिला। साथ ही मीडिया प्रतिनिधिगण, आम नागरिक, जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं आईआरसीटीसी के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि विगत वित्तीय वर्ष में ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के अंतर्गत लगभग 22,100 श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ। योजना के तहत विशेष साप्ताहिक ट्रेनें आगे भी रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग-बस्तर (संयुक्त) संभागों के श्रद्धालुओं को श्रीराम लला के दर्शन हेतु नियमित रूप से अयोध्या धाम ले जाती रहेंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की यह पहल न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती प्रदान कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को भी गौरवपूर्ण स्थान दिला रही है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मलेरिया पर करारा प्रहार, मिशन मोड में सरकार का अभियान, ‘शून्य मलेरिया’ की ओर बढ़ते निर्णायक कदम
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और जनस्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ ने मलेरिया के स्थायी उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक अभियान फिर से प्रारंभ किया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में, विभाग ने मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ एक अनुकरणीय रणनीतिक पहल करते हुए जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है। ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 12वें चरण ने न केवल अपने दायरे का विस्तार किया है, बल्कि अपने प्रभाव से यह स्पष्ट कर दिया है कि जब सरकार दृढ़ संकल्प और नीति आधारित कार्रवाई के साथ काम करती है, तो नतीजे ज़मीन पर दिखते हैं।
25 जून से जारी इस चरण के अंतर्गत राज्य के 10 जिलों में गहन जांच, उपचार और जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अब तक 19,402 घरों का दौरा किया गया है और 98,594 लोगों की रक्त जांच की गई है। इनमें से 1,265 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। सबसे अहम बात यह रही कि सभी संक्रमित व्यक्तियों को मौके पर ही दवा की पहली खुराक उपलब्ध कराई गई, वह भी पूरी सावधानी के साथ—पहले मरीजों को स्थानीय खाद्य पदार्थ खिलाया गया, ताकि दवा का प्रभाव सुरक्षित और प्रभावशाली रहे। प्रत्येक मरीज को उपचार कार्ड दिया गया है, ताकि फॉलोअप के जरिए पूरी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
इस अभियान का सकारात्मक असर सबसे अधिक बस्तर संभाग में देखा जा रहा है। 2015 की तुलना में यहां मलेरिया मामलों में 71 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित, सतत और वैज्ञानिक रणनीति का परिणाम है। राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) भी 27.40 से घटकर 7.11 तक आ गया है, जो दर्शाता है कि मलेरिया पर राज्य ने प्रभावी नियंत्रण पाया है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अभियान की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मलेरिया से जंग अब केवल इलाज की नहीं, यह रणनीति और जनसहभागिता की लड़ाई बन गई है। उनका मानना है कि सरकार ने जो लक्ष्य तय किया है—2027 तक ‘शून्य मलेरिया’ और 2030 तक ‘पूर्ण मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़’—उसे केवल दस्तावेज़ी नहीं, बल्कि यथार्थ के रूप में साकार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभाव से बस्तर संभाग में मलेरिया के मामलों में गिरावट आयी है। “हर संक्रमित व्यक्ति तक पहुंचना, उसका समय पर इलाज करना और भविष्य में संक्रमण की कोई गुंजाइश न रहे — यही हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा कि हमारा फोकस लक्षणरहित मलेरिया मामलों पर है, ताकि बीमारी को जड़ से मिटाया जा सके।
इस अभियान की सफलता में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। यह केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि अब एक जनआंदोलन बन चुका है। जांच और इलाज के साथ-साथ लोगों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, जलजमाव की रोकथाम और साफ-सफाई जैसे व्यवहारिक उपायों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह ठोस और संवेदनशील प्रयास, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है, जो न केवल राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत और टिकाऊ कदम है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक प्रेरक मॉडल भी बन रहा है। आने वाले वर्षों में यह रणनीति अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय उदाहरण के रूप में स्थापित होगी।
शराब घोटाला मामला: 23 आरोपी आबकारी अधिकारियों ने EOW की विशेष कोर्ट में लगाई अग्रिम जमानत याचिका, मामले में 18 जुलाई को होगी सुनवाई
रायपुर। शराब घोटाला मामले में आबकारी विभाग ने बीते 10 जुलाई को बड़ा एक्शन लेते हुए आरोपी बनाए गए 29 आबकारी अधिकारियों में से 22 को निलंबित किया था। इस मामले में अब 23 आरोपी आबकारी अधिकारियों ने ACB/EOW की विशेष कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई है। इस मामले में अब 18 जुलाई को सुनवाई होगी।
नोटिस के बाद भी पेश नहीं हुए आरोपी
बता दें कि शराब घोटाले के इस मामले में 29 आरोपियों को EOW की ओर से समन जारी किया गया था, लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोई भी आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। अब अदालत ने इन सभी आरोपियों को 20 अगस्त तक पेश होने के लिए नोटिस भी जारी किया है।
ये 22 अधिकारी हुए निलंबित
- जनार्दन कौरव, पिता पंचम सिंह, उम्र 50 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी।
- अनिमेष नेताम, पिता आनंद नेताम, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- विजय सेन शर्मा, पिता पीसी सेन शर्मा, उम्र 48 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- अरविंद कुमार पाटले, पिता नेवल सिंह पाटले, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- प्रमोद कुमार नेताम, पिता स्व. श्याम लाल नेताम उम्र 60 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- रामकृष्ण मिश्रा, पिता शैलेन्द्र मिश्रा, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- विकास कुमार गोस्वामी, पिता विनोद गोस्वाम, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- इकबाल खान, पिता महूम मोहम्मद स्माईल खान, उम्र 56 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी।
- नितिन खंडुजा, पिता रवीन्द्र खंडुजा, उम्र 53 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी।
- नवीन प्रताप सिंग तोमर, पिता भगवान सिंह तोमर, उम्र 43 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- मंजुश्री कसेर, पति रामचन्द्र सारस, उम्र 47 वर्ष, सहायक आबकारी अधिकारी।
- सौरभ बख्शी, पिता राजीव बख्शी, उम्र 41 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- दिनकर वासनिक, पिता डॉ पीएल वासनिक, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- मोहित कुमार जायसवाल, पिता रामलाल जायसवाल, उम्र 46 वर्ष, अधिकारी जिला आबकारी।
- नीतू नोतानी ठाकुर, पति मोहन दास नोतानी, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- गरीबपाल सिंह दर्दी, पिता दिलबाग सिंह दर्दी, उम्र 59 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी।
- नोहर सिंह ठाकुर, पिता गौतम सिंह ठाकुर, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- सोनल नेताम, पिता एम. एस. नेताम, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त, आबकारी।
- प्रकाश पाल, पिता सपन कुमार पाल, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- अलेख राम सिदार, पिता मुरलीधर सिदार, उम्र 34 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- आशीष कोसम, पिता बृजलाल कोसम, उम्र 50 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी
- राजेश जायसवाल, पिता हरीप्रसाद जायसवाल, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
इन 7 रिटायर अधिकारियों को भी बनाया गया आरोपी
- ए.के. सिंग, पिता अखिलेश्वर सिंह उम्र 62 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी (सेवानिवृत्त)
- जे.आर. मंडावी, पिता नंदलाल मंडावी, उम्र 64 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी (सेवानिवृत्त)
- जी.एस. नुरूटी, पिता दयाराम नुरूटी, उम्र 63 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी (सेवानिवृत्त)
- देवलाल वैष, पिता स्व गोवर्धन सिंह वैध, उम्र 63 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी (सेवानिवृत्त)
- ए.के. अनंत, पिता आशाराम अंनत, उम्र 65 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी (सेवानिवृत्त)
- वेदराम लहरे, पिता जगत राम लहरे, उम्र 66 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी (सेवानिवृत्त)
- एल.एल. ध्रुव, पिता मोतीसिंह ध्रुव, उम्र 66 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी (सेवानिवृत्त)