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साइबर सुरक्षा और जागरूकता पर प्रशिक्षण कार्यक्रम : CSPDCL के अध्यक्ष डॉ रोहित यादव ने कहा-
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) के अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव ने कहा है कि पॉवर कंपनी की सायबर सुरक्षा प्रणाली सायबर खतरों से निपटने में सक्षम है और नवीन प्रौद्योगिकी से लैस है। विद्युत सेवा भवन में एक सादे समारोह में सीएसपीडीसीएल द्वारा सायबर सुरक्षा पर तैयार सायबर सुरक्षा संक्षेपिका और कंप्यूटर डेस्क मैट का अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव ने विमोचन किया। कंप्यूटर डेस्क मैट पर साइबर सुरक्षा सम्बंधित “क्या करें” और “क्या न करें” उपयोगकर्ता जागरूकता के लिए लिखा गया है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के सूचना सुरक्षा प्रकोष्ठ (आईएससी) ने कंपनी के नेटवर्क, सर्वर, एप्लीकेशन, डाटा एवं वेबसाइट समेत सभी ऑफिस के कंप्यूटर को अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली से सुरक्षा कवच प्रदान किया है। उन्होंने कंपनी के कार्मिकों के लिए प्रतिवर्ष साइबर सुरक्षा जागरूकता संबंधी प्रशिक्षण आयोजित करने को सार्थक पहल बताया।
इस मौके पर मौजूद पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने बताया कि पॉवर कंपनी मुख्यालय में केन्द्रीयकृत सायबर सुरक्षा संचालन केंद्र (सी–एसओसी) संचालित है जहां से प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं संबंधी डाटा की गोपनीयता एवं सुरक्षा की निगरानी की जाती है। उन्होंने कहा कि यह देश में सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर का पहला सायबर सुरक्षा केन्द्र है। इस केंद्र में 24 X 7 सभी सायबर इंसीडेंट की निगरानी की जाती है। इस दौरान प्रतिदिन हजारों साइबर अटैक को मॉनिटर एवं विफल किए जाते हैं। श्री कंवर ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा माह के अंतर्गत 1- 31 अक्टूबर तक पॉवर कंपनियों में विभिन्न स्तरों पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
सायबर सुरक्षा संक्षेपिका और कंप्यूटर डेस्क मैट के विमोचन अवसर पर कार्यपालक निदेशक (ईआईटीसी) विनोद कुमार साय, अधीक्षण अभियंता (आईएससी) विकास शर्मा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि सायबर सुरक्षा के मापदंडों का कड़ाई से पालन सुनिश्चत करने के कारण सीएसपीडीसीएल को विगत दस वर्षों से आईएसओ 27001 प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है जो कि “सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली” लागू होने का द्योतक है। यहां हर वर्ष केंद्रीय स्तर की जांच एजेंसी सायबर सुरक्षा संबंधी समीक्षा भी करती है।
नक्सलियों की बड़ी साजिश नाकाम: जंगल में तीन स्थानों से भारी मात्रा में IED बनाने का सामान बरामद
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए जंगल से भारी मात्रा में आईईडी बनाने के लिए डम्प की गई सामग्री बरामद की है। नक्सली गरियाबंद जिले में सक्रिय उदंती एरिया कमेटी क्षेत्र में पुलिस पार्टी और ग्रामीणों को निशाना बनाने की फिराक में थे। इस बीच पुलिस के स्थानीय तंत्रों से मिली खुफिया सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में बड़ी सफलता हाथ लगी है।
जानकारी के अनुसार, थाना शोभा और थाना पायलीखण्ड (जुगाड़) क्षेत्रांतर्गत ग्राम साईबीनकछार, कोदोमाली और भूतबेड़ा के जंगल क्षेत्रों में जमीन के नीचे बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री को छुपाकर रखा गया था। यह इलाका जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर है। बरामद सामग्री का उपयोग पुलिस पार्टी पर IED ब्लास्ट कर नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से किए जाने की आशंका जताई गई है।
स्थानीय सूचना तंत्रों के माध्यम से मिली जानकारी के बाद 2 नवंबर 2025 को जिला पुलिस बल गरियाबंद के ऑपरेशन ग्रुप E-30 की संयुक्त टीम, थाना शोभा और पायलीखण्ड (जुगाड़) पुलिस के साथ सर्चिंग अभियान पर रवाना हुई। कठिन पहाड़ी और जंगल क्षेत्र में सर्च अभियान के दौरान संदिग्ध स्थानों पर बीडीएस टीम की मदद से सघन जांच की गई।
सर्च के दौरान तीन अलग-अलग स्थानों पर जमीन के भीतर डम्प की गई सामग्री बरामद हुई। खुदाई करने पर नक्सलियों द्वारा सुरक्षित तरीके से छुपाई गई भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, कुल 14 नग प्रेशर कुकर, इलेक्ट्रिक वायर, पटाखे, आईईडी बनाने का अन्य सामान और राशन सामग्री मिली। पुलिस के अनुसार, नक्सली इस सामग्री का उपयोग बड़े हमले की तैयारी के लिए कर रहे थे। पुलिस टीम ने मौके से बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत नष्ट करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह बरामदगी नक्सलियों की एक गंभीर और घातक योजना को विफल करने में महत्वपूर्ण सफलता है। यदि समय रहते कार्रवाई न होती, तो यह सामग्री किसी बड़ी वारदात का कारण बन सकती थी। पुलिस ने इसे क्षेत्र में नक्सल प्रभाव को कमजोर करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि नक्सली स्थानीय ग्रामीण इलाकों में दहशत फैलाने और पुलिस की मूवमेंट पर हमला करने के मकसद से लगातार IED प्लांट कर रहे हैं। पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने और संदिग्ध वस्तुओं के मिलने पर तत्काल सूचना देने की अपील की है।
IIT भिलाई ने विकसित की स्मार्ट पॉलीमर जैल तकनीक, खिड़कियों को बनाएगी ‘एनर्जी सेविंग स्मार्ट विंडो’
रायपुर/भिलाई। बिजली खपत कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की दिशा में IIT भिलाई ने एक महत्वपूर्ण तकनीक विकसित की है, जो आने वाले वर्षों में भवन निर्माण और ऊर्जा बचत के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। संस्थान के शोधार्थियों ने एक स्मार्ट पॉलीमर जैल आधारित कोटिंग तैयार की है, जिसे इमारतों की खिड़कियों पर लगाने से सामान्य कांच की खिड़कियां तुरंत ‘स्मार्ट विंडो’ में बदल जाएंगी।
यह तकनीक विशेष रूप से गर्म और उमस वाले क्षेत्रों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, जहाँ एयर कंडीशनर (AC) पर भारी निर्भरता होती है और बिजली बिल का बड़ा हिस्सा कूलिंग पर खर्च होता है।
कैसे काम करती है यह स्मार्ट कोटिंग?
शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह पॉलीमर कोटिंग तापमान के अनुसार अपनी पारदर्शिता और प्रकाश अवशोषण क्षमता स्वतः बदलती है। गर्मी बढ़ने पर यह कोटिंग धूप और अवांछित सौर विकिरण को कमरे में प्रवेश करने से रोकती है, जिससे कमरे का तापमान स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है। इससे AC की जरूरत घटती है और बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज की जा सकती है।
ठंड के मौसम या कम तापमान में यह कोटिंग फिर से पारदर्शी हो जाती है और प्राकृतिक रोशनी को अंदर आने देती है। यानी यह तकनीक मौसम और पर्यावरण के अनुसार स्वतः सक्रिय होकर ऊर्जा बचत में सहायक बनती है।
ऊर्जा बचत के साथ ऊर्जा उत्पादन भी संभव
इस पॉलीमर कोटिंग की खासियत केवल कूलिंग नहीं है, बल्कि इसे छोटे पावर जनरेटिंग उपकरणों में इलेक्ट्रोलाइट के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में “एनर्जी सेविंग + एनर्जी जनरेटिंग” के हाइब्रिड मॉडल को समर्थन देगी।
अर्थात एक ही तकनीक ऊर्जा बचाने और ऊर्जा उत्पन्न करने दोनों में उपयोगी साबित हो सकती है, जो स्मार्ट सिटी और ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट के लिए बड़ा कदम है।
प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित शोध
IIT भिलाई की यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त कर चुकी है। यह शोध एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जो ऊर्जा और स्मार्ट तकनीक के क्षेत्र में संस्थान के योगदान को रेखांकित करता है।
इस शोध का नेतृत्व IIT भिलाई के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजीब बनर्जी ने किया। टीम में निशिकांत सिंह, दुर्गेश कुमार सिन्हा, कौशिक महता, दिलीप भोई, तेजराम देवांगन और कचाला नानाजी शामिल थे। शोधकर्ता इसे टिकाऊ ऊर्जा समाधान के क्षेत्र में लागत प्रभावी, पर्यावरण हितैषी और बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य तकनीक मानते हैं।
भविष्य की उपयोगिता
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कोटिंग—
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आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों
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स्कूल, अस्पताल एवं कॉर्पोरेट कार्यालयों
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ग्रीन बिल्डिंग एवं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स
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सोलर और ऊर्जा प्रबंधन सिस्टम
में बड़े पैमाने पर उपयोग की जा सकती है।
आस्था ने छुआ हृदय: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रामनामी समाज के प्रतिनिधियों की आत्मीय भेंट
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रामनामी समाज के बीच आत्मीय संवाद का एक वीडियो देश में तेजी से वायरल हुआ है । इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे भावनात्मक और प्रेरणादायी पल बताया है ।
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित रजत महोत्सव के दौरान एक हृदयस्पर्शी दृश्य उस समय देखने को मिला, जब रामनाम में लीन जीवन जीने वाले रामनामी समाज के प्रतिनिधियों ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आत्मीय भेंट की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि प्रधानमंत्री के रायपुर प्रवास से कुछ ही घंटे पहले मंत्रालय में रामनामी समुदाय के प्रतिनिधियों से उनकी भेंट हुई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने की अपनी प्रबल इच्छा व्यक्त की थी, जिसके अनुरूप इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब रजत महोत्सव के दौरान रामनामी समुदाय के ये श्रद्धालु प्रधानमंत्री श्री मोदी से मिले, तब उन्होंने बड़े आदर और प्रेम से प्रधानमंत्री को अपने पारंपरिक मोर मुकुट से मुख्य मंच पर अलंकृत करने की अभिलाषा प्रकट की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जिस सहजता, स्नेह और आत्मीय भाव से उनके इस अनुरोध को स्वीकार किया, वह क्षण वहां उपस्थित सभी लोगों के लिए अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायी बन गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाम ही जिनका धर्म, रामभक्ति ही जिनका कर्म - ऐसे अद्भुत और राममय रामनामी समाज के सदस्यों के तन पर अंकित ‘राम’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि समर्पण, तपस्या और अटूट आस्था का प्रतीक है। यह समुदाय अपने तन, मन और जीवन को प्रभु श्रीराम के चरणों में अर्पित कर देता है — यही उनकी जीवन साधना है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस आत्मीयता में भक्ति और कर्म का अद्वितीय संगम झलकता है। यह दृश्य इस सत्य को पुष्ट करता है कि रामभक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पवित्र साधना है, जिसे प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने आचरण और जीवन मूल्यों से सार्थक किया है।
मनेन्द्रगढ़ में प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग, लाखों का सामान जलकर खाक
मनेन्द्रगढ़। शहर के चैनपुर इलाके में स्थित एक प्लास्टिक फैक्ट्री में शनिवार देर रात भीषण आग लग गई. आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया. आग की लपटों में प्लास्टिक सामग्री सहित एक वाहन भी जलकर खाक हो गया.
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर दमकल की तीन गाड़ियां पहुंचीं और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया. आग बुझाने के कार्य में एसईसीएल कर्मियों, पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोगों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस हादसे में लाखों रुपए का सामान जलकर नष्ट हो गया है. फिलहाल, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है.
सूर्यकिरण एयरोबेटिक शो को लेकर नवा रायपुर में तैयारियां जोरो पर, संभागायुक्त, आईजी, कलेक्टर एवं एसएसपी ने किया स्थल का निरीक्षण
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष में राजधानी नवा रायपुर का आकाश 5 नवम्बर को देशभक्ति और रोमांच से भर उठेगा। भारतीय वायुसेना की विश्वप्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (Suryakiran Aerobatic Team – SKAT) प्रातः 10 से 12 बजे तक अपने अद्भुत हवाई करतबों से दर्शकों को रोमांच, गर्व, उत्साह और देशभक्ति से भर देगी।
इस भव्य आयोजन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए संभागायुक्त महादेव कावरे, आईजी अमरेश मिश्रा, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने नवा रायपुर में स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने पार्किंग, सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था, प्रसाधन और अन्य सुविधाओं की समीक्षा करते हुए सभी कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। भारतीय वायुसेना द्वारा 4 नवम्बर को शो का पूर्वाभ्यास किया जाएगा।
राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित यह एरोबैटिक शो छत्तीसगढ़ की प्रगति, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनेगा। जब सूर्यकिरण टीम के विमान नवा रायपुर के आसमान में उड़ान भरेंगे, तब ‘बॉम्ब बर्स्ट’, ‘हार्ट-इन-द-स्काई’ और ‘एरोहेड’ जैसी शानदार फॉर्मेशन्स पूरे वातावरण को रोमांच और देशभक्ति से भर देंगी।
यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा, जो यह संदेश देगा कि अनुशासन, तकनीक और टीमवर्क से हर कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
रायपुर और आसपास के जिलों से हजारों नागरिक, विद्यार्थी और परिवार इस एरोबैटिक शो को देखने नवा रायपुर पहुंचेंगे। यह आयोजन जनसहभागिता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनेगा। ‘सूर्यकिरण एरोबैटिक शो’ केवल एक हवाई प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के शौर्य, सटीकता और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
5 नवम्बर को नवा रायपुर का आसमान गर्व, रोमांच और देशभक्ति के रंगों से सराबोर होगा। सूर्यकिरण टीम का यह ऐतिहासिक शो छत्तीसगढ़ की रजत जयंती को यादगार क्षणों में दर्ज कर देगा।
इस अवसर एनआरडीए सीईओ चंदन कुमार, निगम आयुक्त विश्वदीप तथा जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन सहित संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ में बारिश का कहर थमा, बादल छंटने से तापमान गिरने की संभावना
रायपुर। चक्रवाती तूफान मोंथा के कमजोर होने के बाद बादल छंटने से शहर में लोगों ने राहत महसूस की, मगर रात होने के बाद नवा रायपुर में बारिश हुई. बादल छंटने के बाद न्यूनतम तापमान में गिरावट आने से ठंड की वापसी होने की उम्मीद है. शनिवार को काफी दिनों बाद निकली चमकीली धूप से लोगों ने राहत महसूस की.
राज्य में अक्टूबर का अंतिम सप्ताह बादलों के साथ बीता. सामान्यतः इस दौरान रात का तापमान 20 डिग्री से नीचे होने की वजह से शहरी इलाकों में ठंड महसूस होने लगती है और आउटर में इसका खासा प्रभाव होने लगता है. इस बार बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान के प्रभाव से मौसम बदला रहा. दिन में धूप तो तेज नहीं हुई, मगर रात का तापमान भी सामान्य से नीचे नहीं जा पाया. अंतिम दिनों में तो शहर में खंड वर्षा भी हो गई. लगातार तीन से चार दिन तक पर्याप्त धूप नहीं निकलने की वजह से लोग मौसम से उकताने लगे थे. शनिवार को सिस्टम के कमजोर होने के बाद राहत मिली. चमकीली धूप निकलने की वजह से अधिकतम तापमान बढ़कर 30 डिग्री सेल्सियस के पार हो गया. इधर शाम होने के बाद नवा रायपुर के मौसम में थोड़ा बदलाव हुआ और कुछ देर तक बारिश हुई.
रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ?
राजधानी रायपुर में आज आसमान में बादल छाए रह सकते हैं. अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना जताई गई है.
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में रात के तापमान में गिरावट आने से ठंड की वापसी होगी. शनिवार को राज्य में सबसे अधिक तापमान 32.5 डिग्री राजनांदगांव का रिकार्ड का किया गया. वहीं पिछले चौबीस घंटे में पेंड्रा का तापमान 17.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड दर्ज किया गया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'कॉफ़ी टेबल बुक’ का किया विमोचन: छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा और ‘मोदी की गारंटी’ का दस्तावेज़
नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘कोसा कॉफ़ी टेबल बुक’ का विमोचन किया। जनसंपर्क विभाग का यह विशेष प्रकाशन प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में हुए जन-कल्याणकारी कार्यों और विकास यात्रा का विस्तृत दस्तावेज़ प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह कॉफी टेबल बुक प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी के अंतर्गत पूरे हुए विकास कार्यों का प्रमाण है। इसमें उन योजनाओं और पहल का समावेश है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की धरती पर विश्वास, विकास और पारदर्शिता का नया अध्याय लिखा है।
‘मोदी की गारंटी’ — विकास के सशक्त उदाहरण
'कॉफी टेबल बुक' में प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों को मिले आवास, किसानों को दी गई धान बोनस राशि, कृषक उन्नति योजना के तहत हुए कृषि सुधार, तथा लोक सेवा आयोग (PSC) परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली में लायी गई पारदर्शिता जैसे अनेक जनहितकारी सुधारों का विस्तारपूर्वक विवरण शामिल है।
जन-कल्याण से सुशासन तक की यात्रा
‘कॉफ़ी टेबल बुक’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं - जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, हर घर जल मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, और डिजिटल प्रशासनिक सुधार - के माध्यम से छत्तीसगढ़ में आए सकारात्मक परिवर्तनों को चित्रों और आँकड़ों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
राज्य की प्रगति का जीवंत चित्रण
यह पुस्तक न केवल योजनाओं की जानकारी देती है, बल्कि यह बताती है कि किस प्रकार केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से आम नागरिकों का जीवन बदला है। ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के अवसर, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और प्रशासनिक पारदर्शिता के क्षेत्र में हुए कार्यों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह 'कॉफी टेबल बुक' छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि यह राज्य की 25 वर्ष की उपलब्धियों और प्रधानमंत्री श्री मोदी की विकासोन्मुख दृष्टि का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘विकसित छत्तीसगढ़ 2047’ के सपने की प्रेरणा बनेगी।
इन कर्मचारियों को मिलेगा पदोन्नति में आरक्षण, राज्य सरकार ने तीन प्रतिशत आरक्षण का दिया आदेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बार फिर दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने राज्य के सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में 3 प्रतिशत आरक्षण का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
यह निर्देश परिपत्र क्रमांक एफ 4-1/2013/1-3 दिनांक 26 फरवरी 2014 के तहत जारी पुराने आदेशों की पुनः याद दिलाने के उद्देश्य से दिया गया है। शासन ने पाया है कि कई विभागों ने इस परिपत्र का पालन नहीं किया है, जिससे दिव्यांग कर्मियों को उनके हक का लाभ नहीं मिल रहा।
कानूनी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि:
यह आदेश निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 33 के प्रावधानों पर आधारित है। इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों ने दिव्यांगजनों को नियुक्ति और पदोन्नति में आरक्षण का अधिकार प्रदान किया है।इसी क्रम में छत्तीसगढ़ शासन ने वर्ष 2014 में परिपत्र जारी कर राज्य के समस्त विभागों को दिव्यांग कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में 3 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू करने का निर्णय लिया था।
विभागीय अनियमितताओं पर नाराज़गी:
राज्य शासन के ध्यान में यह बात आई है कि कुछ विभागों ने इस परिपत्र के बावजूद दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण नहीं दिया। इस पर नाराजगी जताते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों, संभागीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को पत्र जारी किया है।
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि—
“दिव्यांग शासकीय सेवकों को पूरे सेवाकाल में केवल एक बार पदोन्नति में क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाना है, और परिपत्र दिनांक 26.02.2014 के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।”
इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग कर्मचारियों को समान अवसर प्रदान करना और उन्हें सेवा में समान भागीदारी दिलाना है। राज्य सरकार चाहती है कि सभी विभाग न केवल नियुक्ति में बल्कि पदोन्नति में भी दिव्यांगजनों को संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप अवसर दें।

आत्मसमर्पित पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति का खुलासा, माओवादी संगठन में वैचारिक संकट गहराया
रायपुर। माओवादी संगठन के पूर्व शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति ने एक वीडियो संदेश जारी कर वर्तमान माओवादी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। भूपति ने कहा कि आज के माओवादी नेता “कठमुल्लावाद” सोच के साथ काम कर रहे हैं, जिसके कारण संगठन जनता से कटता जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि हिंसा और हथियार के बल पर संघर्ष ने संगठन को कमजोर किया है और जनता का भरोसा खो दिया है। हाल ही में भूपति ने 60 साथियों सहित महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय और माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति के महत्वपूर्ण सदस्य रहे मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने अपने आत्मसमर्पण के बाद एक बड़ा बयान जारी किया है। वीडियो संदेश में भूपति ने खुलकर स्वीकार किया कि माओवादी आंदोलन लगातार गलत वैचारिक दिशा की ओर बढ़ रहा है और संगठन की मौजूदा स्थिति चिंताजनक है।
संगठन के भीतर के हालात उजागर करते हुए भूपति ने कहा कि आज भी कुछ माओवादी नेता हथियारों के बूते संघर्ष को ही समाधान मान रहे हैं, जबकि यह सोच अब पुरानी और असफल साबित हो चुकी है। भूपति के अनुसार, “हिंसा की राह पर चलते-चलते माओवादी संगठन जनता से पूरी तरह दूर हो गया है। जनता का समर्थन ही संगठन की ताकत थी, लेकिन अब आंदोलन अपनी मूल वैचारिक रेखा से भटक चुका है।”
भूपति ने अपने संदेश में यह भी कहा कि वर्तमान समय में केंद्रीय समिति के कुछ सदस्य “कठमुल्लावादी और कट्टरवादी मानसिकता” से फैसले ले रहे हैं, जो न सिर्फ संगठन के मूल सिद्धांतों को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के जीवन को भी प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नेतृत्व अब जनता के मुद्दों के बजाय हिंसक क्रांति और दमनकारी विचारधारा पर जोर दे रहा है।भूपति ने कहा कि संगठन की गिरावट की सबसे बड़ी वजह है – बंदूक आधारित आंदोलन। उन्होंने स्वीकार किया कि संगठन ने स्वयं जनता को अपने से दूर धकेल दिया और यही माओवादी आंदोलन की विफलता का प्रमुख कारण बना।
गौरतलब है कि भूपति न केवल केंद्रीय समिति का सदस्य था, बल्कि केंद्रीय रीजनल ब्यूरो सचिव और कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का आधिकारिक प्रवक्ता भी रहा। संगठन में वह “भूपति”, “सोनू” और “अभय” नामों से जाना जाता था।माओवादी नेटवर्क को अंदर से समझने वाले भूपति का यह बयान सुरक्षा एजेंसियों और विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में भूपति ने महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले में करीब 60 साथियों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उसे सुरक्षा के दायरे में रखा गया है।
उनके आत्मसमर्पण को नक्सल मोर्चे पर सरकार की बड़ी सफलता और माओवादी संगठन के भीतर गहराते वैचारिक विभाजन का संकेत माना जा रहा है। भूपति का यह सार्वजनिक संदेश इस बात का संकेत देता है कि संगठन के शीर्ष स्तर पर भी मतभेद गहराते जा रहे हैं और बड़ी संख्या में माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौटने पर विचार कर रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां भूपति द्वारा किए गए खुलासों का विश्लेषण कर रही हैं और यह माना जा रहा है कि उनकी जानकारियों के आधार पर कई रणनीतिक सफलताएँ मिल सकती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्योत्सव स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का किया शुभारंभ
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। यह प्रदर्शनी राज्य की विकास यात्रा, सुशासन के नवाचारों और न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में हुए ऐतिहासिक प्रयासों का जीवंत प्रदर्शन है।
यह प्रदर्शनी 1 से 5 नवम्बर 2025 तक आम नागरिकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और जनप्रतिनिधियों के लिए खुली रहेगी, जिसमें शासन की योजनाओं, जनसेवाओं और नई कानूनी व्यवस्थाओं की जानकारी आम जनता तक रोचक तरीके से पहुंचाया जाएगा.
राज्योत्सव प्रदर्शनी में प्रमुख रूप से राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग, खाद्य विभाग, शिक्षा विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, खनिज विभाग, गृह विभाग, छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण, श्रम विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, लोक निर्माण विभाग, जनसंपर्क विभाग, आदिवासी विकास विभाग, अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, जल संसाधन विभाग, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा सामान्य प्रशासन विभाग ने भव्य प्रदर्शनी के माध्यम से अपने विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया है। ये सभी विभाग अपनी योजनाओं और नवाचारों के माध्यम से प्रदेश की 25 वर्ष की उपलब्धियों का चित्रण कर रहे हैं।
गृह विभाग की प्रदर्शनी में दिखी नवीन आपराधिक कानूनों की झलक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में न्याय प्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में किए गए सुधारों को गृह (पुलिस) विभाग की प्रदर्शनी में विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। इन नवीन आपराधिक कानूनों का उद्देश्य अपराधों की जांच और निपटान में वैज्ञानिक पद्धति, डिजिटल साक्ष्य और फोरेंसिक सहयोग को प्राथमिकता देना है, जिससे न्याय प्रणाली अधिक तेज़, प्रभावी और पारदर्शी बने।
गृह विभाग की प्रदर्शनी में पुलिस विभाग, डायल 112, सीन ऑफ क्राइम यूनिट, सिविल हॉस्पिटल, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, अभियोजन, जिला न्यायालय, कारागृह, उच्च न्यायालय सहित न्याय व्यवस्था के पाँच प्रमुख स्तंभ — पुलिस, जेल, अभियोजन, फोरेंसिक विशेषज्ञ और न्यायिक अधिकारी — की भूमिका को दर्शाया गया है।
गृह विभाग द्वारा प्रदर्शनी में जानकारी दी गई कि तकनीक, अनुसंधान और समन्वय के माध्यम से अब अपराध जांच और न्यायिक प्रक्रिया में गति और सटीकता लाई जा रही है। अभियोजन और न्यायिक कार्यवाहियों की ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली भी न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है।
इंटरएक्टिव लर्निंग – खेल-खेल में कानून की समझ
प्रदर्शनी के अवलोकन हेतु आने वाले नागरिकों और छात्र-छात्राओं के लिए क्विज़ एवं खेल-खेल में कानून को समझने जैसे रोचक इंटरएक्टिव कार्यक्रम रखे गए हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों को सरल और रोचक तरीके से समझाया जा रहा है। यह पहल न केवल जनजागरूकता बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि नागरिकों में कानून के प्रति सम्मान, विश्वास और सहभागिता की भावना भी विकसित कर रही है। उल्लेखनीय है कि नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन से अपराधियों को सजा देने की प्रक्रिया अधिक तेज़, सटीक और वैज्ञानिक होगी। इससे आमजन के मन में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास और सुरक्षा की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी। यह प्रदर्शनी न्यायिक सशक्तिकरण, सुशासन और नागरिक जागरूकता का एक सजीव उदाहरण प्रस्तुत करती है।
आमजन से सहभागिता की अपील
राज्य सरकार ने आम नागरिकों, महाविद्यालयों एवं विद्यालयों के विद्यार्थियों से अपील की है कि वे राज्योत्सव स्थल पर आयोजित इस प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में पहुँचें, नवीन आपराधिक कानूनों और शासन की जनसेवाओं से जुड़ें तथा “नवीन भारत – न्याय के नए अध्याय” की भावना में सहभागी बनें।यह प्रदर्शनी न केवल शासन की उपलब्धियों का दस्तावेज़ है, बल्कि छत्तीसगढ़ के राज्योत्सव को “सुशासन और न्याय-संवेदनशीलता” के नए आयाम से जोड़ने वाली एक अभिनव पहल भी है।
ट्रांसफर पर हाईकोर्ट की रोक: महिला प्रशिक्षण अधिकारी को राहत, पूर्व पदस्थापना स्थल पर लौटने का निर्देश
बिलासपुर। महिला आईटीआई कॉलेज, दुर्ग में प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर कार्यरत के. अरुन्धती को बड़ी राहत मिली है। तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग, नवा रायपुर द्वारा जारी किए गए स्थानांतरण आदेश को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्थगित कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को फिलहाल पूर्व पदस्थापना स्थल, दुर्ग में ही कार्य जारी रखने दिया जाए।
गौरतलब है कि सचिव, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा जारी आदेश में श्रीमती अरुन्धती का जिला दुर्ग से जिला बीजापुर स्थानांतरण किया गया था, जिसे उन्होंने अनुचित और नियमविरुद्ध बताते हुए चुनौती दी। इस संबंध में उन्होंने हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और वर्षा शर्मा के माध्यम से बिलासपुर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
याचिका में यह दिए गए मुख्य आधार
याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में निम्न प्रमुख तर्क प्रस्तुत किए गए—
बेटे की पढ़ाई का मुद्दा:
याचिकाकर्ता का पुत्र भव्य नायडु डीएवी पब्लिक स्कूल, दुर्ग में कक्षा 4 में अध्ययनरत है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा Director of School Education, Madras vs O. Karuppa Thevan मामले में यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी/अधिकारी के बच्चे का विद्यालय में मध्य सत्र (Mid-Session) चल रहा हो, तो उस अवधि में कर्मचारी का स्थानांतरण नहीं किया जाना चाहिए।
बीमार मां की देखभाल:
याचिकाकर्ता की 77 वर्षीय माता के. भगवती मानसिक बीमारी से ग्रसित हैं और उनका नियमित इलाज दुर्ग में ही चल रहा है। इस उम्र और स्वास्थ्य स्थिति में उनका स्थानांतरण दूरस्थ और अतिसंवेदनशील जिला बीजापुर करना अनुचित है।
महिला कर्मचारी को संवेदनशील क्षेत्र में स्थानांतरण:
अधिवक्ताओं ने यह भी दलील दी कि एक महिला कर्मचारी को बिना मानवीय और पारिवारिक परिस्थितियों पर विचार किए सीधे घोर नक्सल प्रभावित जिला भेजना सेवा नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के S.K. Nausad Rahman vs Union of India मामले में दिए गए निर्णय का हवाला भी पेश किया गया, जिसमें पारिवारिक परिस्थितियों के मद्देनजर स्थानांतरण में संवेदनशीलता और न्यायसंगत दृष्टिकोण रखने की बात कही गई है।
हाईकोर्ट का रुख
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की एकलपीठ में हुई। अधिवक्तागण की ओर से दिए गए तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने प्रथमदृष्टया पाया कि याचिकाकर्ता के पक्ष में पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इसलिए कोर्ट ने स्थानांतरण आदेश पर तत्काल रोक (स्टे) लगाते हुए निर्देश दिया कि—
याचिकाकर्ता के. अरुन्धती को उनके पूर्व पदस्थापना स्थल महिला आईटीआई, दुर्ग में तुरंत पदस्थ किया जाए।
PM मोदी ने की विधानसभा अध्यक्ष की तारीफ: कहा – लोकतंत्र को सशक्त बनाने का जीता-जागता उदाहरण हैं डॉ. रमन सिंह
रायपुर। छत्तीसगढ़ की नई विधानसभा भवन के भव्य उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि एक सच्चा कार्यकर्ता अपने परिश्रम और समर्पण से लोकतांत्रिक व्यवस्था को कितनी मजबूती दे सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “रमन सिंह इस बात का बहुत बड़ा उदाहरण हैं कि एक कार्यकर्ता अपने परिश्रम और समर्पण भाव से लोकतांत्रिक व्यवस्था को कितना सशक्त बना सकता है।”
मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा, “क्रिकेट में हम देखते हैं कि जो कभी कप्तान होते हैं, वे टीम में खिलाड़ी बनकर भी खेलते हैं, लेकिन राजनीति में ऐसा कम होता है। ये उदाहरण डॉ. रमन सिंह को दे सकते है कि जो कभी कैप्टन हुआ करते थे वो आज छत्तीसगढ़ की सेवा के लिए कार्यकर्ता की तरह समर्पित होकर कार्य कर रहे है। वो हर कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्योत्सव का किया शुभारंभ, देखें लाइव कार्यक्रम…
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आज नवा रायपुर में राज्योत्सव 2025 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक रजत जयंती समारोह का शुभारंभ किया। उनके साथ मंच पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, बीजेपी अध्यक्ष किरण सिंहदेव, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, समेत मंत्रिमंडल के सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद हैं।

राज्योत्सव मैदान में दूर-दूर से हजारों की संख्या में लोग जुटे हुए हैं। पूरे परिसर को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और विकास यात्रा को दर्शाने वाले आकर्षक झांकियों, प्रदर्शनी और सजावट से सजाया गया है। समारोह में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था। इस वर्ष राज्य अपनी स्थापना की रजत जयंती (25 वर्ष) मना रहा है। राज्योत्सव 1 से 5 नवंबर तक चलेगा, जिसमें स्थानीय और बॉलीवुड कलाकारों द्वारा भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
देखिये लाइव कार्यक्रम-
देखिये कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल
राज्योत्सव के शुभारंभ अवसर पर नवा रायपुर के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वाणिज्य एवं व्यापार परिसर में बनाए गए मुख्य मंच से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह 11 बजे ऐश्वर्या पंडित के गायन से होगी। इसके बाद पी.सी. लाल यादव, आरू साहू, दुष्यंत हरमुख, निर्मला ठाकुर और शाम 8 बजे राष्ट्रीय कलाकार हंसराज रघुवंशी की प्रस्तुति होगी।
इसी प्रकार 2 नवंबर को सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक आदित्य नारायण प्रमुख आकर्षण के केंद्र होंगे। उनके द्वारा गीतों की प्रस्तुति रात्रि 9 बजे से दी जाएगी। इस दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत शाम 6:30 बजे से होगी। सबसे पहले सुनील तिवारी, जय नायर चिन्हारी द गर्ल बैंड, पद्म डोमार सिंह कंवर नाचा दल का कार्यक्रम होगा।
इसी प्रकार 3 नवंबर को पार्श्व गायिका भूमि त्रिवेदी रात्रि 9 बजे से प्रस्तुति देंगी। इस दिन सांस्कृतिक संध्या में शाम 6 बजे से पद्म उषा बारले (पंडवानी), राकेश शर्मा (सूफी-भजन गायन), कुलेश्वर ताम्रकार (लोकमंच) की प्रस्तुति होगी। वहीं 4 नवम्बर को रात्रि 9 बजे पार्श्व गायक अंकित तिवारी प्रस्तुति देंगे। इस दिन शाम 6 बजे कला केंद्र रायपुर बैंड, मती रेखा देवांगन के लोकगीत, प्रकाश अवस्थी की प्रस्तुति होगी। इसी प्रकार 5 नवम्बर को रात्रि 9 बजे पार्श्व गायक कैलाश खेर अपनी प्रस्तुति देंगे। सांस्कृतिक संध्या में शाम 6 बजे से मती पूनम विराट तिवारी, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ का कार्यक्रम होगा।
शिल्पग्राम मंच की प्रस्तुतियां —
1 नवंबर को मोहम्मद अनस (पियानो वादन), मती बासंती वैष्णव (कत्थक), रमादत्त जोशी और मती सोनाली सेन का गायन, स्वीटी पगारिया (कत्थक), मंगलूराम यादव (बांसगीत), चारूलता देशमुख (भरतनाट्यम), दुष्यंत द्विवेदी (पंडवानी), लोकेश साहू (भजन), मती बॉबी मंडल (लोकसंगीत) तथा चंद्रभूषण वर्मा (लोकमंच) की प्रस्तुति होगी।
2 नवंबर को मती रेखा जलक्षत्रिय (भरथरी), इकबाल ओबेराय (म्यूजिक ग्रुप), बसंतवीर उपाध्याय (मानस बैंड), दीपाली पांडेय (कत्थक), लिलेश्वर सिंह (लोकसंगीत), अंविता विश्वकर्मा (भरतनाट्यम), आशिका सिंघल (कत्थक), प्रांजल राजपूत (भरथरी), प्रसिद्धि सिंह (कत्थक), जीवनदास मानिकपुरी (लोकमंच) एवं जितेंद्र कुमार साहू (सोनहा बादर) की प्रस्तुति होगी।
3 नवंबर को सुरेश ठाकुर (भजन), डॉ. आरती सिंह (कत्थक), मती राखी राय (भरतनाट्यम), पुसऊराम बंजारे (पंडवानी), इशिका गिरी (कत्थक), गिरवर सिंह ध्रुव (भंजिया नृत्य), राधिका शर्मा (कत्थक), मती शांतिबाई चेलक (पंडवानी), दुष्यंत कुमार दुबे (सुआ नृत्य), मती गंगाबाई मानिकपुरी (पंडवानी), संगीता कापसे (शास्त्रीय नृत्य), महेन्द्र चौहान एंड बैंड, और घनश्याम महानंद (फ्यूजन बैंड) की प्रस्तुति होगी।
4 नवंबर को भूमिसूता मिश्रा (ओडिसी), चैतूराम तारक (नाचा दल), आशना दिल्लीवार (कत्थक), पुष्पा साहू (लोकसंगीत), महेन्द्र चौहान (पंडवानी), प्रीति गोस्वामी (कत्थक), पृथा मिश्रा (शास्त्रीय गायन), महेश साहू (लोकमंच), विजय चंद्राकर (लोकसंगीत) तथा तिलक राजा साहू (लोकधारा) की प्रस्तुति होगी।
5 नवंबर को दुर्गा साहू (पंडवानी), डाली थरवानी (कत्थक), संजय नारंग (लोकसंगीत), सारिका शर्मा (कत्थक), महेश्वरी सिंह (लोकमंच), चंद्रशेखर चकोर (लोकनाट्य), नीतिन अग्रवाल (लोकसंगीत), द्वारिकाप्रसाद साहू (डंडा नृत्य), महुआ मजूमदार (लोकसंगीत) तथा नरेन्द्र जलक्षत्रिय (लोकसंगीत) की प्रस्तुति देंगे।
पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के पहले डिजिटल ट्राइबल संग्रहालय का किया लोकार्पण
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने देश के पहले डिजिटल ट्राइबल म्यूज़ियम शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण किया। यह भव्य संग्रहालय उन आदिवासी वीर नायकों को समर्पित है, जिन्होंने अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध अपने प्राणों की आहुति दी और छत्तीसगढ़ की अस्मिता की रक्षा की।
आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा जहां देशभर के आदिवासियों के प्रेरणापुंज हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में सोनाखान के ज़मींदार वीर नारायण सिंह ने फिरंगियों के विरुद्ध बिगुल फूंका था। उन्होंने अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद माना जाता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शहीद वीर नारायण सिंह और अंग्रेज़ों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले आदिवासी नायकों की स्मृतियों को सहेजने के उद्देश्य से नवा रायपुर में इस अद्वितीय संग्रहालय की स्थापना का निर्णय लिया।

50 करोड़ की लागत से बना अनूठा डिजिटल संग्रहालय

नवा रायपुर के सेक्टर-24 में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है। इसकी डिज़ाइन, अवधारणा और तकनीकी संरचना आधुनिकतम मानकों पर आधारित है। संग्रहालय में अत्याधुनिक वीएफएक्स टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्शन सिस्टम, डिजिटल स्क्रीन और मोबाइल पर क्यूआर कोड स्कैन करने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे आगंतुक हर कथा को डिजिटल माध्यम से अनुभव कर सकेंगे। (पीएम मोदी रायपुर दौरा)
आदिवासी विद्रोहों की जीवंत कहानी – 14 सेक्टरों में सजा इतिहास
संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी आंदोलनों हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान विद्रोह, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह की जीवंत झलक दिखाई जाएगी। इन ऐतिहासिक विद्रोहों को 14 सेक्टरों में विभाजित कर प्रस्तुत किया गया है, ताकि दर्शक हर संघर्ष और उसकी प्रेरक गाथा को समझ सकें।

संग्रहालय परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह का भव्य स्मारक भी बनाया गया है। यह स्मारक न केवल श्रद्धांजलि का स्थल होगा, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। प्रवेश द्वार पर सरगुजा के कलाकारों द्वारा तैयार की गई सुंदर नक्काशीदार पैनलें लगाई गई हैं। वहीं परिसर में 1400 वर्ष पुराने साल, महुआ और साजा वृक्ष की प्रतिकृतियां स्थापित की गई हैं, जिनकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों की डिजिटल कहानियां उकेरी गई हैं।
सुविधाओं से सुसज्जित आधुनिक परिसर
संग्रहालय में सेल्फी प्वाइंट, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएँ, ट्राइबल आर्ट से सजा फर्श, और भगवान बिरसा मुंडा, शहीद गैंदसिंह की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। ये सभी तत्व संग्रहालय को एक जीवंत सांस्कृतिक और भावनात्मक अनुभव का केंद्र बनाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत की थी। उन्होंने आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए देश का सबसे बड़ा अभियान पीएम जनमन और प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना प्रारंभ की। इन पहलों के अंतर्गत आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण छत्तीसगढ़ की रजत जयंती वर्ष के एक ऐसे क्षण के रूप में दर्ज होगा जो इतिहास, परंपरा और आधुनिकता को एक सूत्र में पिरो देगा।
प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा का किया उद्घाटन
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन का उद्घाटन किया. उन्होंने भवन के सामने स्थापित पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें नमन किया. 273.11 करोड़ की लागत से बनकर तैयार इस भवन के उद्घाटन के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उमुख्यमंत्री अरुण साव और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा समेत कई मंत्री, विधायक उपस्थित रहे.

बता दें, नवा रायपुर के सेक्टर-19 में बना यह भव्य इको-फ्रेंडली विधानसभा भवन लगभग 20.78 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 28 अगस्त 2020 को जिसकी नींव रखी गई थी, वह भवन अब 5 साल बाद पूरी तरह से तैयार है.

राष्ट्रपति भवन से मिलता-जुलता डिज़ाइन और आधुनिक सुविधाएं
इस भवन की वास्तुकला में पारंपरिक महलों की झलक मिलती है और इसका आकार देश के राष्ट्रपति भवन से मेल खाता है. भवन के बाहर पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है.


विष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार
वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा में 90 विधायक हैं, लेकिन नए भवन में 120 विधायकों के बैठने की व्यवस्था की गई है. यह कदम भविष्य में विधानसभा सीटों के विस्तार को ध्यान में रखकर उठाया गया है.

तीन ब्लॉकों में विभाजित भवन
नई विधानसभा का निर्माण तीन मुख्य ब्लॉकों में किया गया है-
ब्लॉक A विधानसभा सचिवालय के रूप में कार्य करेगा, जहां सचिवालय से जुड़ी सभी शाखाएं और अधिकारियों के कार्यालय होंगे.
ब्लॉक B भवन का मुख्य हिस्सा है, जहां सदन की कार्यवाही होगी. इसमें मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष के कक्ष, मीटिंग हॉल, सेंट्रल हॉल और मीडिया लाउंज जैसी सुविधाएं होंगी.
ब्लॉक C में विधायकों और मंत्रियों के चेंबर, अस्पताल, बैंक, पोस्ट ऑफिस और रेलवे आरक्षण केंद्र जैसी सार्वजनिक सुविधाएं होंगी.
आधुनिक सुविधाओं से लैस परिसर
भवन में महिला, पुरुष, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर के लिए अलग-अलग टॉयलेट की व्यवस्था है. इसके अलावा तीन प्रकार की चिकित्सा सेवाएं जैसे- एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक अस्पताल भी भवन परिसर में उपलब्ध हैं.
संसद की तर्ज पर यहां सेंट्रल हॉल तैयार किया गया है, जिसमें 200 लोगों के बैठने की क्षमता है. वहीं, एक भव्य ऑडिटोरियम भी बनाया गया है, जिसमें 500 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है.

सांस्कृतिक सौंदर्य और कला का संगम
विधानसभा परिसर के कॉरिडोर को बस्तर और सरगुजा की पारंपरिक कला से सजाया गया है. यहां एक म्यूजियम और आर्ट गैलरी भी बनाई जा रही है, जिसमें छत्तीसगढ़ की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा.

हरियाली और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान
पूरे परिसर में ग्रीन लैंडस्केप और सुंदर गार्डन विकसित किए गए हैं. वास्तुशास्त्र के अनुसार पौधों का चयन किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी बागवानी विभाग को सौंपी गई है. परिसर में जल और ऊर्जा संरक्षण की अत्याधुनिक व्यवस्था की गई है, जिससे यह इको-फ्रेंडली भवन के रूप में स्थापित हो रहा है..


आधुनिक तकनीक से लैस लाइब्रेरी
यहां की लाइब्रेरी को पूरी तरह हाईटेक बनाया जा रहा है. इसमें 55 हजार से अधिक पुस्तकों के साथ डिजिटल संसाधन, ई-बुक्स और ऑनलाइन डेटाबेस की सुविधा उपलब्ध होगी.
भवन निर्माण की लागत
शुरुआती डीपीआर के अनुसार भवन की अनुमानित लागत ₹394 करोड़ थी, लेकिन इसे घटाकर ₹273.11 करोड़ में परियोजना पूरी की गई है.
क्यों पड़ी नए भवन की जरूरत?
दूरी और समय की बचत: पुराना विधानसभा भवन नवा रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर था, जिससे आवागमन में अधिक समय लगता था.
यातायात समस्या: पुराने भवन के कारण शहर के बड़े हिस्से में ट्रैफिक की समस्या होती थी.
सीटिंग अरेंजमेंट: 90 विधायकों के लिए पुराना भवन अपर्याप्त था और सिटिंग अरेंजमेंट में दिक्कतें आती थीं.
विस्तार की गुंजाइश: भविष्य में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने पर पुराने भवन में दिक्कतें बढ़ सकती थीं.
राजनीतिक इतिहास से जुड़ा सफर
राज्य की स्थापना के बाद पहला विधानसभा सत्र 14 दिसंबर 2000 को राजकुमार कॉलेज, रायपुर में आयोजित किया गया था. वहां अस्थाई रूप से टेंट के नीचे कार्यवाही हुई थी. बाद में पुराना विधानसभा भवन बना, जो अब शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में स्थित है.
नया विधानसभा भवन मंत्रालय और संचालनालय के समीप बनाया गया है, जिससे अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों की कार्यप्रणाली और समन्वय में सुगमता होगी.
भूमिपूजन और लोकार्पण
29 अगस्त 2020 को कांग्रेस सरकार के समय इस भवन का भूमिपूजन हुआ था, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी वर्चुअली शामिल हुए थे. 2023 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इसके निर्माण की समीक्षा की. इस भव्य भवन का लोकार्पण जल्द ही होने की उम्मीद है.
ब्रह्माकुमारी संस्थान से मेरा अपनापन जुड़ा है : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
रायपुर। प्रधानमंत्री मोदी छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस में शामिल होने रायपुर पहुंचे हैं। PM मोदी ने ब्रह्माकुमारी संस्थान के ‘शांति शिखर’ ध्यान केंद्र का उद्घाटन किया। इस दौरान कहा कि हमारे यहां कहा जाता है आचरण ही सबसे बड़ा धर्म, तप और ज्ञान है। आचरण से क्या कुछ सिद्ध नहीं हो सकता। ब्रम्हकुमारी सेंटर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज हमारा छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है। आज विशेष दिन है। छत्तीसगढ़ के साथ ही झारखंड और उत्तराखंड के भी 25 साल पूरे हुए हैं।
मोदी ने कहा कि आज देश के कई और भी राज्य अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं। इन सभी राज्यों के निवासियों को स्थापना दिवस की बधाई देता हूं। राज्य के विकास में देश का विकास है। मोदी ने कहा कि इसी मंत्र पर चलते हुए भारत को हम विकसित बनाने के अभियान में जुटे हैं। इस अहम यात्रा में ब्रह्माकुमारी जैसी संस्थाओं की बहुत बड़ी भूमिका है। मेरा सौभाग्य रहा है कि बीते कई दशकों से मैं जुड़ा हुआ हूं। मोदी ने कहा कि मैंने इस आध्यात्मिक आंदोलन को वटवृक्ष की तरह विस्तार लेते देखा है। 2011 में अहमदावाद में फ्यूचर ऑफ पावर के कार्यक्रम , 2012 में संस्था के 75 वर्ष, आबू जाना हो या गुजरात के कार्यक्रम में जाना हो, ये रूटीन हो गया था।
मोदी ने कहा कि दिल्ली आने के बाद भी आजादी के अमृत महोत्सव से जुड़ा अभियान हो, स्वच्छता अभियान हो इन सबसे जुड़ने का मौका हो, मैं जब भी आपके बीच आया हूं, मैंने आपके प्रयासों को बहुत गंभीरता से देखा है। मैंने हमेशा अनुभव किया है, यहां शब्द कम, सेवा ज्यादा है। इस संस्थान से मेरा अपनापन, खासकर जानकी दीदी का स्नेह, राजयोगिनी दादी योगिनी जी का मार्गदर्शन, मेरे जीवन की विशेष स्मृतियों का हिस्सा है।
