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हिमालय में गूँजी जशपुर की गूंज: आदिवासी युवाओं ने जगतसुख पीक पर खोला नया मार्ग, मुख्यमंत्री की पहल के सम्मान में दिया गया विष्णु देव रूट नाम
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के आदिवासी युवाओं के एक दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। इस दल ने हिमाचल प्रदेश की दूहंगन घाटी (मनाली) में स्थित 5,340 मीटर ऊँची जगतसुख पीक पर एक नया आल्पाइन रूट खोला, जिसे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल के सम्मान में “विष्णु देव रूट” नाम दिया गया है। टीम ने यह चढ़ाई बेस कैंप से केवल 12 घंटे में पूरी की — वह भी आल्पाइन शैली में, जो तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन मानी जाती है।

यह ऐतिहासिक अभियान सितंबर 2025 में आयोजित हुआ, जिसका आयोजन जशपुर प्रशासन ने पहाड़ी बकरा एडवेंचर के सहयोग से किया। इस अभियान को हीरा ग्रुप सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का सहयोग प्राप्त हुआ।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस दल के पाँचों पर्वतारोही पहली बार हिमालय की ऊँचाइयों तक पहुँचे थे। सभी ने “देशदेखा क्लाइम्बिंग एरिया” में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो जशपुर प्रशासन द्वारा विकसित भारत का पहला प्राकृतिक एडवेंचर खेलों के लिए समर्पित प्रशिक्षण क्षेत्र है। विश्वस्तरीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को जोड़ा, जिनमें बिलासपुर के पर्वतारोही एवं मार्गदर्शक स्वप्निल राचेलवार, न्यूयॉर्क (USA) के रॉक क्लाइम्बिंग कोच डेव गेट्स, और रनर्स XP के निदेशक सागर दुबे शामिल रहे। इन तीनों ने मिलकर तकनीकी, शारीरिक और मानसिक दृष्टि से युवाओं को तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाया। दो महीनों की कठोर तैयारी और बारह दिनों के अभ्यास पर्वतारोहण के बाद टीम ने यह चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पूरी की।

अभियान प्रमुख स्वप्निल राचेलवार ने बताया कि जगतसुख पीक का यह मार्ग नए पर्वतारोहियों के लिए अत्यंत कठिन और तकनीकी था। मौसम चुनौतीपूर्ण था, दृश्यता सीमित थी और ग्लेशियरों में छिपी दरारें बार-बार बाधा बन रही थीं। इसके बावजूद टीम ने बिना फिक्स रोप या सपोर्ट स्टाफ के यह चढ़ाई पूरी की — यही असली आल्पाइन शैली है। यह अभियान व्यावसायिक पर्वतारोहण से अलग था, जहाँ पहले से तय मार्ग और सहायक दल पर निर्भरता होती है; इस दल ने पूरी तरह आत्मनिर्भर रहते हुए नई मिसाल कायम की।
अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। स्पेन के प्रसिद्ध पर्वतारोही टोती वेल्स, जो इस अभियान की तकनीकी कोर टीम का हिस्सा थे और स्पेन के पूर्व वर्ल्ड कप कोच रह चुके हैं, ने कहा कि “इन युवाओं ने, जिन्होंने जीवन में कभी बर्फ नहीं देखी थी, हिमालय में नया मार्ग खोला है। यह साबित करता है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर ये पर्वतारोही विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”
“विष्णु देव रूट” के अलावा दल ने दूहंगन घाटी में सात नई क्लाइम्बिंग रूट्स भी खोले। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही एक अनक्लाइम्ब्ड (पहले कभी न चढ़ी गई) 5,350 मीटर ऊँची चोटी की सफल चढ़ाई, जिसे टीम ने ‘छुपा रुस्तम पीक’ नाम दिया। इस पर चढ़ाई के मार्ग को ‘कुर्कुमा (Curcuma)’ नाम दिया गया — जो हल्दी का वैज्ञानिक नाम है और भारतीय परंपरा में सहनशक्ति और उपचार का प्रतीक माना जाता है।
यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि सही दिशा, अवसर और संसाधन मिलें तो भारत के सुदूर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से भी विश्वस्तरीय पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। बिना किसी हिमालयी अनुभव के इन युवाओं ने आल्पाइन शैली में जो उपलब्धि हासिल की है, उसने भारतीय साहसिक खेलों को नई दिशा दी है। इस पहल ने तीन बातों को सिद्ध किया — आदिवासी युवाओं में प्राकृतिक शक्ति, सहनशीलता और पर्यावरण से जुड़ी सहज समझ उन्हें एडवेंचर खेलों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है; “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” जैसे स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र पेशेवर पर्वतारोही तैयार करने की क्षमता रखते हैं; और हिमालय की अनदेखी चोटियाँ भारत में सतत एडवेंचर पर्यटन की नई संभावनाएँ खोल सकती हैं।
अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचेलवार ने किया, उनके साथ राहुल ओगरा और हर्ष ठाकुर सह-नेता रहे। जशपुर के पर्वतारोही दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रुसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल थे। अभियान को प्रशासनिक सहयोग डॉ. रवि मित्तल (IAS), रोहित व्यास (IAS), शशि कुमार (IFS) और अभिषेक कुमार (IAS) से मिला। तकनीकी सहायता डेव गेट्स, अर्नेस्ट वेंटुरिनी, मार्टा पेड्रो (स्पेन), केल्सी (USA) और ओयविंड वाई. बो (नॉर्वे) ने दी। पूरे अभियान का डॉक्यूमेंटेशन और फोटोग्राफी ईशान गुप्ता की कॉफी मीडिया टीम ने किया।
प्रमुख सहयोगी और प्रायोजक संस्थानों में पेट्ज़ल, एलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट, रेड पांडा आउटडोर्स, रेक्की आउटडोर्स, अडवेनम एडवेंचर्स, जय जंगल प्राइवेट लिमिटेड, आदि कैलाश होलिस्टिक सेंटर, गोल्डन बोल्डर, क्रैग डेवलपमेंट इनिशिएटिव और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल शामिल रहे।
यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है कि भारत के गाँवों और आदिवासी क्षेत्रों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि “भारत का भविष्य गाँवों से निकलकर दुनिया की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है।”
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ अब जशपुर को एक सतत एडवेंचर एवं इको-टूरिज़्म केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
दलाल के चंगुल से छूटे 18 मजदूर, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से सकुशल घर लौटे ग्रामीण
रायपुर। बीजापुर जिले के 18 ग्रामीणों को अधिक मजदूरी और अच्छे काम का झांसा देकर दलाल सीनू श्रीनिवास तेलंगाना राज्य ले गया था। इनमें ग्राम कड़ेनार के 11 और ग्राम घुमरा के 7 मजदूर शामिल थे। यह घटना अगस्त माह की है। दलाल के चंगुल से इन 18 मजदूरों को छुड़ाया गया है.
मजदूरों को मेहनताना नहीं दिया और दलाल मौके से फरार
मिली जानकारी के अनुसार, श्रमिक मनोज ताती ने बताया कि पहले इन मजदूरों से तेलंगाना के करीमनगर में काम कराया गया, फिर दलाल ने उन्हें महाराष्ट्र के नांदेड़ भेज दिया। इसके बाद वही दलाल सभी मजदूरों को कर्नाटक राज्य के बागलकोट जिले के बिगड़ी गांव (जानमट्टी) में एक साहूकार के पास काम पर लगा गया। बताया गया कि दलाल ने मजदूरों को 5 लाख रुपये में साहूकार को सौंप दिया था। मजदूरों को मेहनताना नहीं दिया गया और दलाल मौके से फरार हो गया। मजदूर वापस छत्तीसगढ़ लौटना चाहते थे, लेकिन साहूकार उन्हें छोड़ नहीं रहा था।
संयुक्त टीम ने किया रेस्क्यू टीम
घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक बीजापुर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक संयुक्त रेस्क्यू टीम बनाई। इस टीम में श्रम निरीक्षक लोकेन्द्र वैष्णव, राजस्व निरीक्षक यशवंत राव और सहायक उप पुलिस निरीक्षक बलदेव कुड़ियाम शामिल थे। टीम को तत्काल कर्नाटक के बागलकोट रवाना किया गया।
सभी 18 मजदूरों को सुरक्षित छुड़ाया गया
स्थानीय प्रशासन की सहायता से टीम ने सभी 18 मजदूरों को सुरक्षित छुड़ाया और 1 लाख 36 हज़ार 100 रुपये की बकाया मजदूरी राशि भी दिलवाई। रेस्क्यू टीम ने 28 अक्टूबर 2025 को सभी मजदूरों को बीजापुर वापस लाया। अगले दिन 29 अक्टूबर को उन्हें उनके गृहग्राम कड़ेनार और घुमरा में सुरक्षित पहुंचा दिया गया। बीजापुर प्रशासन की यह त्वरित कार्रवाई मजदूरों के लिए राहत और भरोसे की बड़ी मिसाल बनी है।
सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, माओवादियों के 15 फीट ऊंचे स्मारक को बुलडोजर से किया ध्वस्त…
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के कोर नक्सल क्षेत्र बीजापुर के जंगलों में सुरक्षा बलों ने माओवादियों द्वारा बनाए गए स्मारक को ध्वस्त कर बड़ी सफलता हासिल की है. थाना तर्रेम क्षेत्र के ग्राम गोटुमपल्ली में डीआरजी, थाना तर्रेम पुलिस, सीआरपीएफ-153वीं और सीआरपीएफ-168वीं बटालियन की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की है.

जानकारी के अनुसार, गुरुवार को चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस बल को गोटुमपल्ली के सघन जंगलों में माओवादियों द्वारा निर्मित करीब 15 फीट ऊंचा स्मारक मिला. सुरक्षा बलों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे जमींदोज कर दिया.

पुलिस के अनुसार, यह स्मारक माओवादियों ने अपने मारे गए सदस्यों की याद में ग्रामीणों पर दबाव डालकर बनवाया था. इसका उपयोग ग्रामीणों में भय का वातावरण बनाने और अपने संगठन के प्रचार के लिए किया जा रहा था.
सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई से क्षेत्र में माओवादियों के मनोबल पर प्रभाव पड़ा है और स्थानीय लोगों में विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है.
3 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का किया फैसला
कोण्डागांव। छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक और सफलता मिली है. जिले में सक्रिय 3 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में एक महिला नक्सली भी शामिल है.
जानकारी के अनुसार, महिला नक्सली सिरबत्ती उर्फ बत्ती कोर्राम पूर्वी बस्तर डिवीजन की सप्लाई टीम में सक्रिय थी, जिस पर राज्य सरकार ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. वहीं, दो अन्य पुरुष नक्सली—जगत राम (डीएकेएमएस सदस्य, मातला क्षेत्र) और लच्छन (डीएकेएमएस सदस्य, किसकोड़ो क्षेत्र)—लंबे समय से नक्सली संगठन से जुड़े हुए थे.
पुलिस अधीक्षक कार्यालय कोण्डागांव में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान तीनों नक्सलियों ने बताया कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्यवाही, संगठन के भीतर बढ़ते मतभेद, वरिष्ठ नक्सलियों के आत्मसमर्पण और सुरक्षित पारिवारिक जीवन की इच्छा ने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया.
आत्मसमर्पण करने वाले तीनों नक्सलियों को छत्तीसगढ़ शासन की “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025” के तहत 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है. साथ ही, पुनर्वास से जुड़ी अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं.
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) रूपेश कुमार डाण्डे, डीएसपी (ऑप्स) सतीष भार्गव तथा सीआरपीएफ 188वीं और 12वीं बटालियन के अधिकारी उपस्थित रहे.
यह आत्मसमर्पण अभियान पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी., डीआईजी उत्तर बस्तर अमित तुकाराम काम्बले और सीआरपीएफ डीआईजी एस. अरूल कुमार के निर्देशन में चलाया गया.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार चल रहे अभियान, सिविक एक्शन कार्यक्रम और विकास योजनाओं के कारण ग्रामीणों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ा है, जिसके चलते अब कई नक्सली हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं.
33 साल पुराने अलखनंदा टॉकीज केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
अंबिकापुर। सरगुजा राजपरिवार के स्वामित्व वाले अलखनंदा टॉकीज का लाइसेंस दुर्भावनापूर्ण तरीके से निरस्त करने के 33 साल पुराने बहुचर्चित मामले में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी माना है. न्यायालय ने आदेश दिया है कि छतवाल राजपरिवार को ब्याज सहित 34,795 की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करें. यह मामला वर्ष 1992 का है, जब टीएस सिंहदेव द्वारा संचालित अलखनंदा टाकीज का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था.
सरगुजा राजपरिवार के अरुणेश्वर शरण सिंहदेव के भाई की स्वामित्व वाली अलखनंदा टाकीज को नियमानुसार मार्च को सिनेमा संचालन का लाइसेंस जारी किया गया था. टॉकीज का संचालन उनके बड़े भाई टीएस सिंहदेव कर रहे थे. इसी दौरान आदिवासी परिवार की भूख से मौत की घटना ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी थी. इस मुद्दे को टीएस सिंहदेव की मां पूर्व मंत्री वरिष्ठ कांग्रेस नेता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव ने उठाते हुए तत्कालीन कलेक्टर के निलंबन की मांग की थी.
इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को अप्रैल 1992 में स्वयं वाड्रफनगर आकर स्थिति का जायजा लेना पड़ा था. उस समय प्रदेश में भाजपा के सुंदरलाल पटवा की सरकार थी. बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच 19 अप्रैल 1992 को तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल ने अलखनंदा टॉकीज का लाइसेंस निरस्त करने के लिए नोटिस जारी किया.
नोटिस का जवाब देने की अंतिम तिथि 23 अप्रैल थी, लेकिन 24 अप्रैल को जबलपुर हाईकोर्ट ने सिंहदेव परिवार के पक्ष में स्थगन आदेश जारी कर दिया. सिंहदेव के अधिवक्ता ने उसी दिन शपथपत्र सहित यह आदेश कलेक्टर को देने की कोशिश की, परंतु कलेक्टर ने मिलने से इन्कार कर 24 अप्रैल की दोपहर अलखनंदा टाकीज का लाइसेंस निरस्त कर टाकीज का संचालन रोक दिया, जिससे 24 एवं 25 अप्रैल के चार शो नहीं चल सके.
सिंहदेव ने आठ हजार रुपये की क्षति की जानकारी देते हुए क्षतिपूर्ति की मांग की. न्यायालय में आबकारी आयुक्त ने बताया कि उनके कार्यालय में अलकनंदा टॉकीज के लाइसेंस निरस्तीकरण से संबंधित कोई फाइल उपलब्ध नहीं है. उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी पाते हुए ब्याज सहित 34,795 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि राजपरिवार को देने का आदेश दिया. यह राशि न्यायालय में जमा करा दी गई है.
छत्तीसगढ़ में रोज हो रहा 18 हजार प्रधानमंत्री आवास निर्माण: गृहमंत्री विजय शर्मा
रायपुर। प्रधानमंत्री आवास को लेकर गृह मंत्री विजय शर्मा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, विगत सरकार ने 18 लाख आवास रोक कर रखा था, हमारी सरकार के आते ही कैबिनेट की पहली बैठक में इसे स्वीकृत किया। हम रोज 18 हजार आवास बना रहे हैं। पिछली बार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिलासपुर आए थे तब उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत तीन लाख लोगों को गृह प्रवेश कराया था, इस बार यह संख्या और बड़ी होगी.
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, कांग्रेस दिल्ली से नहीं इटली से चलने वाली पार्टी है, रिमोट से चलने वाले लोग हैं।
घुसपैठियों को लेकर कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा था कि घुसपैठिए भाजपा के प्रिय हैं, वो प्रदेश में आए तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ में इतने घुसपैठिए कहां से आए इसका जवाब सरकार को देना चाहिए। कांग्रेस के इस आरोप पर गृह मंत्री शर्मा ने कहा, जो घुसपैठिये इनके प्रिय होते हैं उन्हें वह लाते हैं, मैंने देखा है कि रायपुर में जिनका नाम था वे कवर्धा में अपना नाम जुड़वा लिए। घुसपैठियों के माध्यम से कांग्रेस वोट बैंक बनाने का प्रयास करती है।
जनजातीय गौरव दिवस पर बोले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। BJP प्रदेश कार्यालय में कार्यशाला का आयोजन हुआ. कार्यशाला को लेकर CM विष्णुदेव साय ने कहा, 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती है. इस अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस मनाएंगे. इस दिन भव्य कार्यक्रम का आयोजन होगा. हमने राष्ट्रपति को भी आमंत्रित किया है. मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कार्यक्रम में शामिल होंगी.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि मार्च 2026 में नक्सलवाद खत्म होगा. इस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, हमारी सरकार बनने के बाद लगातार सफलता मिली है. लगातार नक्सली न्यूट्रलाइज किए जा रहे हैं. बड़े पैमाने पर नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है. मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री का लक्ष्य जरूर पूरा होगा.
महाराजा अग्रसेन पर आपत्तिजनक टिप्पणी का विरोध, अग्रवाल समाज ने थाने में सौंपा ज्ञापन
खैरागढ़। छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने महाराजा अग्रसेन के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की है, जिसके बाद अग्रवाल समाज ने कड़ा रुख अपनाया है। समाज ने इस बयान को अपने आराध्य देव के प्रति सीधा अपमान बताते हुए खैरागढ़ पुलिस थाने में आवेदन देकर अमित बघेल के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, अमित बघेल ने हाल ही में समाज के पूज्य महाराजा अग्रसेन के प्रति आपत्तिजनक और अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही अग्रवाल समाज के लोगों में आक्रोश है। समाज के लोगों ने इसे धार्मिक और सामाजिक आस्था पर हमला बताया है।
खैरागढ़ में अग्रवाल समाज के प्रतिनिधिमंडल ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि महाराजा अग्रसेन न केवल अग्रवाल समाज बल्कि समूचे व्यापारी वर्ग के आराध्य देव हैं। उनके विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाज ने मांग की है कि अमित बघेल पर धार्मिक भावनाएं भड़काने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के गंभीर आरोपों के तहत सख्त धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया जाए और उनकी तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
अग्रवाल समाज ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो समाज चरणबद्ध आंदोलन करने पर विवश होगा। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि इस मामले में प्रशासन को निष्पक्ष और त्वरित कदम उठाना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी धर्म या समाज के पूज्य व्यक्तित्व के प्रति इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग करने का दुस्साहस न कर सके। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भी अमित बघेल के खिलाफ व्यापक विरोध देखा जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने इसे समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मनेंद्रगढ़ में भी अग्रवाल समाज में आक्रोश
मनेन्द्रगढ़ में भी महाराजा अग्रसेन पर अभद्र टिप्पणी से अग्रवाल समाज आक्रोशित है। समाज के लोगों ने सिटी कोतवाली मनेन्द्रगढ़ पहुंचकर आवेदन दिया और आरोपी छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
SDM कार्यालय के पटवारी और ऑपरेटर 1.80 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार
जांजगीर। एसीबी /ईओडब्ल्यू ने आज चांपा एसडीएम कार्यालय में छापा मारकर भू-अर्जन शाखा के अमीन पटवारी और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को किसान से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा. भू-अर्जन की राशि भुगतान के एवज में किसान से रिश्वत के तौर पर 1 लाख 80 हजार रुपए ले रहे थे.
जानकारी के अनुसार, जिला सक्ती के ग्राम रायपुरा निवासी बुधराम धीवर ने बिलासपुर एसीबी इकाई में 16 अक्टूबर को शिकायत की थी. उसने बताया कि उसकी तथा उसके बहन के नाम की ग्राम कोसमंदा, जिला जांजगीर स्थित जमीन का नेशनल हाइवे निर्माण के लिए अधिगृहण किया गया था. उन्हें कुल 35 लाख 64 हजार 099 रुपए मुआवजा के रूप में चांपा एसडीएम कार्यालय से भू-अर्जन अधिकारी द्वारा उसके तथा उसके बहन के संयुक्त बैंक खाते में अगस्त 2025 में भुगतान किया गया था.
राशि भुगतान के बाद एसडीएम कार्यालय चांपा के भू-अर्जन शाखा के अमीन पटवारी बाबू बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजकुमार उससे मुआवजा राशि निकलवाने में मदद के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपए रिश्वत की मांग की जा रही है, जो वह उन लोगों को नहीं देना चाहता, बल्कि उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़वाना चाहता है.
शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ट्रैप की योजना तैयार की, जिसके बाद आज प्रार्थी को रिश्वती रकम 180000 रुपए आरोपीगण को देने भेजा गया. रिश्वत राशि हाथ में लेते ही बिलासपुर एसीबी डीएसपी अजितेश सिंह के नेतृत्व में आसपास तैनात एसीबी बिलासपुर की टीम द्वारा अमीन पटवारी बिहारी सिंह और ऑपरेटर राजकुमार देवांगन को पकड़ लिया गया.
अचानक हुई कार्यवाही से आसपास हड़कंप सा मच गया. पकड़े गए आरोपी से रिश्वत की रकम 1लाख 80 हजार रुपए जप्त कर एसीबी ने दोनों आरोपी के विरुद्ध धारा 7, 12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई की जा रही है. एसीबी इकाई बिलासपुर की पिछले 1.5 साल में यह लगातार 36 वीं ट्रैप की कार्रवाई है.
ACB ने PWD के सब इंजीनियर को रिश्वत लेते रंगे हाथों किया गिरफ्तार
मनेंद्रगढ़। ACB की टीम ने मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ में PWD के सब इंजीनियर सी.पी. बंजारे का रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि सब इंजीनियर ने ठेकेदार से बिल बनाने के लिए रिश्वत की मांग की थी। जिसकी शिकायत के बाद एसीबी की टीम ने सब इंजीनियर को 21 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
जानकारी के मुताबिक मनेंद्रगढ़ के ठेकेदार अंकित मिश्रा ने PWD के सब इंजीनियर सीपी मिश्रा के खिलाफ सरगुजा ACB में शिकायत की थी। उसने आरोप लगाया था कि सब इंजीनियर बिल पास करने के एवज 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे है। बाद में सौदा 21 हजार रुपए में तय हुआ था। इसकी शिकायत ठेकेदार अंकित मिश्रा ने ACB सरगुजा से की थी। साथ ही पर्याप्त साक्ष्य भी प्रस्तुत किये थे। जिसके बाद एसीबी की टीम ने ने रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि होने पर सब इंजीनियर को रंगे हाथों पकड़ने की योजना बनाई।
आज ACB की टीम सब रिश्वतखोर सब इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई के लिए मनेंद्रगढ़ पहुंची थी। टीम ने ठेकेदार को केमिकल लगे नोट देकर कार्यालय के अंदर भेजा। जैसे ही ठेकेदार ने रिश्वत की रकम सब इंजीनियर सीपी बंजारे को देकर इशारा किया, एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एसीबी की टीम सब इंजीनियर के घर भी पहुंची एवं जांच कर रही है। घर में एसीबी की टीम नगदी एवं अन्य दस्तावेज, बैंक में जमा रकम आदि की जांच कर रही है।
‘श्री राम केयर क्लीनिक’ सील, स्वास्थ्य विभाग के एक्शन से खलबली
महासमुंद। कलेक्टर के निर्देश पर महासमुंद जिले में अवैध रूप से चल रहे क्लीनिक और नर्सिंग होम्स पर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है. इसी क्रम में बुधवार को वार्ड नंबर 24 कुम्हारपारा स्थित ‘श्री राम केयर क्लीनिक’ पर राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की.
निरीक्षण के दौरान क्लीनिक संचालक एस.एन. गुप्ता नर्सिंग होम एक्ट के तहत आवश्यक संचालन लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके. जांच में यह भी पाया गया कि क्लीनिक में एलोपैथिक दवाइयों का स्टॉक और खरीद से संबंधित रेकॉर्ड मौजूद नहीं था. नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन पर टीम ने बिना लाइसेंस के संचालित क्लीनिक को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया.
जांच दल में तहसीलदार जुगल किशोर पटेल, बीएमओ डॉ. विकास चंद्राकर, एनएचए के नोडल अधिकारी डॉ. छत्रपाल चंद्राकर और चिकित्सा अधिकारी डॉ. घनश्याम साहू शामिल थे.
दो पत्नियों की लड़ाई में नहीं मिल पायी अनुकंपा नियुक्ति, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
बिलासपुर। हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने एसईसीएल (SECL) के दिवंगत कर्मचारी स्व. इंजार साय की पत्नी और विवाहित बेटी द्वारा दायर याचिका को विलंब के आधार पर खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के 11 साल बाद किया गया आवेदन न केवल देरी से है बल्कि योजना की भावना के भी विपरीत है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल एसईसीएल के एसडीएल ऑपरेटर इंजार साय से जुड़ा है, जिनकी 14 अगस्त 2006 को ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद परिवार में उत्तराधिकार का विवाद खड़ा हो गया। इंजार साय की दो पत्नियां थीं — पहली पत्नी शांति देवी और दूसरी पत्नी इंद्रकुंवर।विवाद के चलते 2009 में एसईसीएल ने पहली पत्नी का आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि जब तक दोनों पत्नियों के बीच का विवाद अदालत से स्पष्ट नहीं होता, तब तक किसी को नियुक्त नहीं किया जा सकता। यह मामला सिविल कोर्ट में वर्षों तक लंबित रहा।
11 साल बाद किया गया आवेदन
इसी दौरान, दूसरी पत्नी इंद्रकुंवर ने 17 अप्रैल 2017 को अपनी विवाहित बेटी प्रवीण के नाम से अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। लेकिन एसईसीएल ने इसे यह कहते हुए ठुकरा दिया कि—
आवेदिका विवाहित है और अब अपने ससुराल में रह रही है,
आवेदन कर्मचारी की मृत्यु के 11 वर्ष बाद किया गया है,
आवेदन में देरी के लिए कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है।
साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि एनसीडब्ल्यूए (NCWA) के प्रावधानों के अनुसार, मृत कर्मचारी के आश्रित को मृत्यु के पांच वर्ष के भीतर ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करना होता है। इस नियम के तहत इतने लंबे समय बाद आवेदन अमान्य है।
सिंगल बेंच ने खारिज की याचिका
एसईसीएल के निर्णय को चुनौती देते हुए मां-बेटी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन सिंगल बेंच ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि—
“अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृतक कर्मचारी के परिवार को तुरंत आर्थिक राहत देना है। इतने वर्षों बाद आवेदन करने से इस योजना की भावना ही समाप्त हो जाती है।”
डिवीजन बेंच ने बरकरार रखा आदेश
बाद में याचिकाकर्ताओं ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की, परंतु अदालत ने सिंगल बेंच का फैसला बरकरार रखा। अदालत ने माना कि—
“परिवार ने इतने वर्षों तक बिना सहायता के जीवन-यापन कर लिया है, इसलिए अब अनुकंपा नियुक्ति का कोई औचित्य नहीं रह जाता।”
डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि सिंगल बेंच के आदेश में न तो कोई तथ्यात्मक भूल है और न ही विधिक त्रुटि, इसलिए इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले से हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति तत्काल आर्थिक सहायता की योजना है, जो केवल सीमित अवधि के भीतर ही लागू की जा सकती है। लंबे समय बाद किया गया आवेदन इस योजना की मूल भावना के विपरीत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
नक्सल संगठन का भड़कापन: आत्मसमर्पण कर चुके चंद्रन्ना पर फूटा ‘लाल गुस्सा’, बताया विश्वासघाती और झूठा प्रचारक
जगदलपुर। आत्मसमर्पण के बाद नक्सल संगठन में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। संगठन ने अपने पूर्व केंद्रीय कमेटी सदस्य कामरेड चंद्रन्ना पर “झूठा प्रचार” और “विश्वासघात” का आरोप लगाते हुए एक तीखी विज्ञप्ति जारी की है। यह विज्ञप्ति ओडिशा राज्य कमिटी के अधिकार प्रतिनिधि गणेश की ओर से जारी की गई है। गणेश ने कहा है कि हाल ही में फोर्स के एंटी नक्सल ऑपरेशन के कारण संगठन पर दबाव बढ़ गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि मौजूदा परिस्थितियों में केंद्रीय कमेटी की बैठक आयोजित करना संभव नहीं हो पा रहा है।
चंद्रन्ना के बयानों पर नाराज़ नक्सली
गणेश ने जारी विज्ञप्ति में चंद्रन्ना के उस बयान को सिरे से खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “कॉमरेड देवजी को संगठन का महासचिव चुना गया है।” नक्सल संगठन ने इस बयान को “पूरी तरह गलत और भ्रामक” बताते हुए कहा कि चंद्रन्ना अब संगठन का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए उन्हें इस तरह का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।विज्ञप्ति में कहा गया है कि “आत्मसमर्पण के बाद चंद्रन्ना ने संगठन को बदनाम करने की साजिश की है। उन्होंने कपटपूर्ण और झूठे बयान देकर जनांदोलन की विचारधारा को नुकसान पहुंचाया है।”
28 अक्टूबर को किया था आत्मसमर्पण
गौरतलब है कि 28 अक्टूबर को चंद्रन्ना ने हैदराबाद में आत्मसमर्पण किया था। वह नक्सल संगठन की केंद्रीय कमेटी के सदस्य और तेलंगाना राज्य कमिटी के सचिव थे। आत्मसमर्पण के दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों के सामने “लाल सलाम” का नारा लगाते हुए खुद को अब “मुख्यधारा में लौटने वाला क्रांतिकारी” बताया था।लेकिन अब संगठन ने उनके इस आत्मसमर्पण को “ढकोसला” और “नाटकीय प्रदर्शन” करार दिया है। नक्सलियों ने कहा कि जो व्यक्ति संगठन से मुंह मोड़ चुका है, उसे “क्रांतिकारी कहने का कोई अधिकार नहीं” है।
फोर्स की बढ़ती कार्रवाई से बौखलाहट
विज्ञप्ति में यह भी स्वीकार किया गया कि हाल के दिनों में फोर्स की एंटी नक्सल कार्रवाई ने संगठन की गतिविधियों को प्रभावित किया है। कई क्षेत्रों में केंद्रीय और राज्य कमेटी के बीच संपर्क टूट गया है, जिससे संगठन के भीतर असंतोष और तनाव की स्थिति बन गई है।गणेश ने अपने बयान में कहा कि “हमारे कई साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार या मार गिराया है, लेकिन हमारी विचारधारा को खत्म नहीं किया जा सकता।”चंद्रन्ना के आत्मसमर्पण के बाद संगठन के अंदर मतभेद और आंतरिक संकट गहराते दिख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह घटना नक्सल संगठन के भीतर नेतृत्व के संकट और कमजोर होती पकड़ की ओर इशारा करती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बड़ी सौगात, छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की बहाली 4,708 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू
रायपुर। छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए एक लंबे इंतजार के बाद बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार ने शिक्षकों की नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करते हुए 4,708 पदों पर नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। यह नियुक्तियां पहले चरण के अंतर्गत की जाएंगी।
जानकारी के अनुसार, वित्त विभाग से अनुमति मिलने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। विभाग के अवर सचिव ने इस संबंध में संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को औपचारिक पत्र जारी किया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुछ महीने पहले धमतरी में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया था। अब उनकी उसी घोषणा को धरातल पर उतारते हुए सरकार ने पहले चरण में 5,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है, जिनमें से 4,708 पदों का आदेश जारी किया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘मोंथा’ का असर: कई जिलों में आज भारी बारिश की संभावना
रायपुर। बंगाल की खाड़ी से शुरू हुआ चक्रवात ‘मोंथा’ (Cyclone Montha) अब कमजोर पड़ते हुए उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। यह चक्रवात जगदलपुर से करीब 220 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में केंद्रित था। मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर के अनुसार, अगले कुछ घंटों में यह गहरे दबाव में बदल सकता है। इसके आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर से गुजरने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 30 अक्टूबर को प्रदेश के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी वर्षा और वज्रपात की भी संभावना है। इस दौरान तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने के आसार बने रहेंगे।
सरगुजा संभाग में तेज बारिश के आसार
मौसम विभाग ने विशेष रूप से सरगुजा संभाग के अंबिकापुर, कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन इलाकों में बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर दिनभर वर्षा हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे चक्रवात आगे बढ़ेगा और अवदाब में तब्दील होगा, दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कुछ इलाकों में तेज झोंके भी महसूस किए जा सकते हैं।
31 अक्टूबर से मौसम में बदलाव
चक्रवात ‘मोंथा’ के कमजोर पड़ने और पश्चिम की ओर खिसकने के बाद 31 अक्टूबर से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। इसके साथ ही मौसम शुष्क होने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि नवंबर के पहले सप्ताह में तापमान में गिरावट शुरू हो सकती है, जिससे हल्की ठंड का अहसास बढ़ेगा।
रायपुर का मौसम: बूंदाबांदी और उमस जारी
राजधानी रायपुर में सोमवार को अधिकतम तापमान 30.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह तापमान सामान्य से क्रमशः 0.9 डिग्री कम और 3.3 डिग्री अधिक रहा। दिनभर हल्की बूंदाबांदी होती रही, जबकि सुबह और शाम के समय आर्द्रता 88% और 76% दर्ज की गई।मौसम केंद्र ने बताया कि मंगलवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री रहने का अनुमान है। आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की वर्षा की संभावना बनी हुई है।
राजधानी में गौरवपथ-2 समेत कई प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी, पचपेड़ी नाका से बूढ़ापारा चौक तक मिलेगी कनेक्टिविटी
रायपुर। राजधानी रायपुर में विकास की रफ्तार को और गति देने के लिए नगर निगम की सामान्य सभा में कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. इसमें पचपेड़ी नाका से टिकरापारा सिद्धार्थ चौक होते हुए बिजली ऑफिस चौक तक गौरवपथ-2 के निर्माण की स्वीकृति शामिल है. यह गौरवपथ शंकर नगर से कलेक्टोरेट चौक तक बने गौरवपथ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा.
इसी के साथ तेलीबांधा चौक के पास एक आधुनिक टेक्निकल टॉवर बनाया जाएगा, जहां युवाओं को एक ही जगह पर बैठकर काम करने की सुविधा मिलेगी. वहीं, महादेवघाट को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे यह क्षेत्र न सिर्फ धार्मिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन जाएगा.
निगम की सामान्य सभा में इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, और जानकारी के अनुसार अगले महीने से इन पर कार्य शुरू हो जाएगा. आगामी एक से दो वर्षों में इन योजनाओं के पूरा होने पर रायपुर शहर के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
सभा के दौरान महापौर मीनल चौबे, सभापति सूर्यकांत राठौर, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी सहित सभी एमआईसी सदस्य और पार्षद मौजूद रहे.
बैठक में तीखी नोकझोंक
पूर्व नेता प्रतिपक्ष संदीप साहू करीब 20 मिनट देरी से बैठक में पहुंचे. तब तक प्रश्नकाल शुरू हो चुका था और उनका नाम पहले ही पुकारा जा चुका था. जब वे पहुंचे तो अपनी बात रखने का मौका देने की मांग पर अड़ गए, जिस पर सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा कि प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है.
महापौर मीनल चौबे ने कहा कि सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए हैं. जल्द ही शहरवासियों को नई सुविधाएं मिलेंगी.
सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा कि उनके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद समान हैं. नेता प्रतिपक्ष का चयन विपक्षी पार्टी द्वारा किया जाता है, न कि निगम द्वारा.
वहीं, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि विपक्ष ने विकास से जुड़े अच्छे प्रस्तावों को समर्थन दिया और गलत प्रस्तावों का विरोध किया है.
रायपुर में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार होगी फिल्म सिटी, स्थानीय कलाकारों और युवाओं को मिलेगा अवसरों का मंच
रायपुर। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की नवनियुक्त अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त) मोना सेन ने छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड कार्यालय का दौरा किया। इस अवसर पर पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य द्वारा फिल्म सिटी परियोजना और फिल्म नीति से संबंधित विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
श्री आचार्य ने नया रायपुर में प्रस्तावित फिल्म सिटी के निर्माण का विस्तृत खाका साझा करते हुए उसका प्रेजेंटेशन भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना है, जिससे पर्यटन, रोजगार और संस्कृति तीनों को नई मजबूती मिलेगी।
प्रेजेन्टेशन देखने के बाद मोना सेन ने कहा कि रायपुर में अत्याधुनिक तकनीक और सृजनात्मक सुविधाओं से युक्त फिल्म सिटी का निर्माण राज्य की ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से स्थानीय युवाओं को रोजगार के साथ-साथ प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता के अवसर मिलेंगे। सुश्री सेन ने छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह समय है जब प्रदेश के कलाकारों और तकनीशियनों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिले। फिल्म सिटी इस दिशा में एक ठोस कदम साबित होगी।
बैठक में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के महाप्रबंधक वेदव्रत सिरमौर, उपमहाप्रबंधक पूनम शर्मा अन्य अधिकारी और कंसलटेंट उपस्थित थे।