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छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘मोंथा’ का असर: कई जिलों में आज भारी बारिश की संभावना
रायपुर। बंगाल की खाड़ी से शुरू हुआ चक्रवात ‘मोंथा’ (Cyclone Montha) अब कमजोर पड़ते हुए उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। यह चक्रवात जगदलपुर से करीब 220 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में केंद्रित था। मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर के अनुसार, अगले कुछ घंटों में यह गहरे दबाव में बदल सकता है। इसके आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर से गुजरने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 30 अक्टूबर को प्रदेश के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी वर्षा और वज्रपात की भी संभावना है। इस दौरान तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने के आसार बने रहेंगे।
सरगुजा संभाग में तेज बारिश के आसार
मौसम विभाग ने विशेष रूप से सरगुजा संभाग के अंबिकापुर, कोरिया, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इन इलाकों में बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर दिनभर वर्षा हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे चक्रवात आगे बढ़ेगा और अवदाब में तब्दील होगा, दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कुछ इलाकों में तेज झोंके भी महसूस किए जा सकते हैं।
31 अक्टूबर से मौसम में बदलाव
चक्रवात ‘मोंथा’ के कमजोर पड़ने और पश्चिम की ओर खिसकने के बाद 31 अक्टूबर से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। इसके साथ ही मौसम शुष्क होने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि नवंबर के पहले सप्ताह में तापमान में गिरावट शुरू हो सकती है, जिससे हल्की ठंड का अहसास बढ़ेगा।
रायपुर का मौसम: बूंदाबांदी और उमस जारी
राजधानी रायपुर में सोमवार को अधिकतम तापमान 30.0 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह तापमान सामान्य से क्रमशः 0.9 डिग्री कम और 3.3 डिग्री अधिक रहा। दिनभर हल्की बूंदाबांदी होती रही, जबकि सुबह और शाम के समय आर्द्रता 88% और 76% दर्ज की गई।मौसम केंद्र ने बताया कि मंगलवार को रायपुर में अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री रहने का अनुमान है। आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की वर्षा की संभावना बनी हुई है।
राजधानी में गौरवपथ-2 समेत कई प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी, पचपेड़ी नाका से बूढ़ापारा चौक तक मिलेगी कनेक्टिविटी
रायपुर। राजधानी रायपुर में विकास की रफ्तार को और गति देने के लिए नगर निगम की सामान्य सभा में कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. इसमें पचपेड़ी नाका से टिकरापारा सिद्धार्थ चौक होते हुए बिजली ऑफिस चौक तक गौरवपथ-2 के निर्माण की स्वीकृति शामिल है. यह गौरवपथ शंकर नगर से कलेक्टोरेट चौक तक बने गौरवपथ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा.
इसी के साथ तेलीबांधा चौक के पास एक आधुनिक टेक्निकल टॉवर बनाया जाएगा, जहां युवाओं को एक ही जगह पर बैठकर काम करने की सुविधा मिलेगी. वहीं, महादेवघाट को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे यह क्षेत्र न सिर्फ धार्मिक बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन जाएगा.
निगम की सामान्य सभा में इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, और जानकारी के अनुसार अगले महीने से इन पर कार्य शुरू हो जाएगा. आगामी एक से दो वर्षों में इन योजनाओं के पूरा होने पर रायपुर शहर के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
सभा के दौरान महापौर मीनल चौबे, सभापति सूर्यकांत राठौर, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी सहित सभी एमआईसी सदस्य और पार्षद मौजूद रहे.
बैठक में तीखी नोकझोंक
पूर्व नेता प्रतिपक्ष संदीप साहू करीब 20 मिनट देरी से बैठक में पहुंचे. तब तक प्रश्नकाल शुरू हो चुका था और उनका नाम पहले ही पुकारा जा चुका था. जब वे पहुंचे तो अपनी बात रखने का मौका देने की मांग पर अड़ गए, जिस पर सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा कि प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है.
महापौर मीनल चौबे ने कहा कि सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए हैं. जल्द ही शहरवासियों को नई सुविधाएं मिलेंगी.
सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा कि उनके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद समान हैं. नेता प्रतिपक्ष का चयन विपक्षी पार्टी द्वारा किया जाता है, न कि निगम द्वारा.
वहीं, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि विपक्ष ने विकास से जुड़े अच्छे प्रस्तावों को समर्थन दिया और गलत प्रस्तावों का विरोध किया है.
रायपुर में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार होगी फिल्म सिटी, स्थानीय कलाकारों और युवाओं को मिलेगा अवसरों का मंच
रायपुर। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की नवनियुक्त अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त) मोना सेन ने छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड कार्यालय का दौरा किया। इस अवसर पर पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य द्वारा फिल्म सिटी परियोजना और फिल्म नीति से संबंधित विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
श्री आचार्य ने नया रायपुर में प्रस्तावित फिल्म सिटी के निर्माण का विस्तृत खाका साझा करते हुए उसका प्रेजेंटेशन भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना है, जिससे पर्यटन, रोजगार और संस्कृति तीनों को नई मजबूती मिलेगी।
प्रेजेन्टेशन देखने के बाद मोना सेन ने कहा कि रायपुर में अत्याधुनिक तकनीक और सृजनात्मक सुविधाओं से युक्त फिल्म सिटी का निर्माण राज्य की ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना से स्थानीय युवाओं को रोजगार के साथ-साथ प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता के अवसर मिलेंगे। सुश्री सेन ने छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह समय है जब प्रदेश के कलाकारों और तकनीशियनों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिले। फिल्म सिटी इस दिशा में एक ठोस कदम साबित होगी।
बैठक में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के महाप्रबंधक वेदव्रत सिरमौर, उपमहाप्रबंधक पूनम शर्मा अन्य अधिकारी और कंसलटेंट उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने नवीन विधानसभा भवन के लोकार्पण समारोह में शामिल होने का दिया आमंत्रण
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर विधान सभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को आगामी 1 नवम्बर को आयोजित होने वाले नवीन विधानसभा भवन के लोकार्पण समारोह में आमंत्रित करते हुए औपचारिक आमंत्रण पत्र भेंट किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत हर्ष और गर्व का अवसर है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की रजत जयंती वर्ष के शुभ अवसर पर प्रदेश की जनता को नवीन विधानसभा भवन समर्पित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर-कमलों से इस भव्य एवं सुसज्जित विधानसभा भवन का लोकार्पण प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण होगा। उन्होंने कह कि यह भवन छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक परंपराओं, विकास यात्रा और जनभावनाओं का प्रतीक बनेगा, जिसके हम सभी साक्षी बनेंगे।
अग्रवाल समाज के बाद भड़का सिंधी समाज, क्रांति सेना अध्यक्ष अमित बघेल की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पुलिस को सौंपा पत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के अध्यक्ष अमित बघेल के आपत्तिजनक बयान को लेकर विरोध तेज हो गया है। बुधवार को सिंधी समाज के लोग बड़ी संख्या सिविल लाइन थाना पहुंचे और जल्द गिरफ्तारी की मांग की। समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि बघेल द्वारा की गई टिप्पणी से न केवल धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि समाज की आस्था और श्रद्धा को भी ठेस पहुंची है।
इस दौरान महेश दरयानी, ललित जेसिंघ, बलराम आहूजा, श्याम चावला, सुनील कुकरेजा, सागर दुलानी, तेजकुमार बजाज, धनेश मटलानी, रितेश वाधवानी, जतिन नचरानी, नितिन कृष्णानी, मोनू आहूजा, राजा जेठानी और बड़ी संख्या में सिंधी समाज के लोग उपस्थित थे।
बता दें कि इससे पहले मंगलवार को अमित बघेल द्वारा महाराजा अग्रसेन, भगवान झूलेलाल और राष्ट्रनायकों के प्रति की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर प्रदेशभर में अग्रवाल समाज में भी भारी आक्रोश देखा गया। समाज की आस्था को ठेस पहुंचाने वाले इस बयान के विरोध में रायपुर में अग्रवाल समाज के सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे और कोतवाली थाना का घेराव कर पुलिस अधिकारियों से कठोर कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर अमित बघेल के खिलाफ धारा 299 बीएनएस 2023 के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
12 नवंबर तक जेल में रहेंगे चैतन्य बघेल, कोर्ट ने बढ़ाई न्यायिक रिमांड
रायपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की न्यायिक रिमांड को कोर्ट ने 12 नवंबर तक बढ़ा दिया है। आज रिमांड अवधि समाप्त होने पर चैतन्य को विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
ED ने चैतन्य बघेल को जन्मदिन के दिन किया था गिरफ्तार
ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई।
चैतन्य को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नगद मिले
ईडी की जांच में पता चला है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले के 16.70 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपनी रियल एस्टेट फर्मों में किया है। इस पैसे का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया, जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपये प्राप्त किए। बैंकिंग ट्रेल है जो इंगित करता है कि लेन-देन की प्रासंगिक अवधि के दौरान त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया।
पहले से गिरफ्त में हैं कई बड़े चेहरे
ईडी ने शराब घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक कवासी लखमा को गिरफ्तार किया है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।
बाबा कार्तिक उरांव ने जनजातीय समाज के उत्थान हेतु अपना जीवन किया समर्पित - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। जनजातीय समाज के महान शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं राष्ट्रनायक बाबा कार्तिक उरांव की जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर आज अंबिकापुर में भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बाबा कार्तिक उरांव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबा कार्तिक उरांव समाज के गौरव हैं। उन्होंने विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद अपनी धर्म, संस्कृति और सभ्यता को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने पुरखों के बताए हुए मार्ग पर चलते हुए उच्चतम शिक्षा अर्जित की और समाज को दिशा दी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का यह कथन-“जितना ज्यादा पढ़ेंगे, उतना ही समाज को गढ़ेंगे”- आज भी हमें प्रेरित करता है। उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार और सामाजिक एकता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया। हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेना चाहिए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नगर निगम कार्यालय के समीप बनने वाले बाबा कार्तिक उरांव चौक का भूमि पूजन किया तथा मूर्ति एवं चौक निर्माण के लिए ₹40.79 लाख की राशि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह चौक बाबा कार्तिक उरांव के आदर्शों, विचारों और योगदान की स्मृति को सहेजने का प्रतीक बनेगा।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने समाज के उत्थान और विकास के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। हमें उनके बताए हुए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने समाज की संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और रीति-रिवाजों को सम्मान देते हुए समाज को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने सदैव समाज में एकता, शिक्षा और जागरूकता का संदेश दिया। आज यह आवश्यक है कि हम उनके आदर्शों और बताए मार्ग पर चलकर समाज को संगठित करें और एकता के सूत्र में बांधें, जिससे जनजातीय समाज सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनकर देश के विकास में अपनी भागीदारी निभा सके।
इस अवसर पर सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
कोरबा में फ्लाई ऐश और सड़कों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, NTPC–SECL–BALCO को फटकार — दो हफ्ते में स्थायी समाधान की रिपोर्ट मांगी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कोरबा जिले में फ्लाई ऐश के प्रदूषण और सड़कों की दयनीय स्थिति पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने NTPC, SECL और BALCO जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की ओर से किए जा रहे अस्थायी उपायों पर नाराजगी जताते हुए पीडब्ल्यूडी सचिव से दो सप्ताह में स्थायी सड़क निर्माण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही BALCO और NTPC के सीएमडी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है। नगर निगम कोरबा को भी इस मामले में पक्षकार बनाया गया है। अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।
मामले की पृष्ठभूमि
कोरबा, जिसे छत्तीसगढ़ का ऊर्जा राजधानी कहा जाता है, पिछले कई वर्षों से फ्लाई ऐश प्रदूषण और सड़कों की खस्ताहाल स्थिति की समस्या से जूझ रहा है। thermal power plants और कोयला खदानों से निकलने वाली राख (fly ash) के उचित निपटान में लापरवाही के कारण स्थानीय लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। कोरबा की सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, जिनसे आवागमन और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।इस विषय पर जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर बुधवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ (Division Bench) ने सुनवाई की।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि “सिर्फ अस्थायी मरम्मत से जनता को राहत नहीं मिल सकती।” न्यायालय ने कोरबा में सड़कों की दुर्दशा और फ्लाई ऐश के खुले परिवहन पर गंभीर चिंता जताई।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक हित में यह आवश्यक है कि सड़क निर्माण और फ्लाई ऐश प्रबंधन के लिए स्थायी और वैज्ञानिक समाधान तैयार किया जाए।अदालत ने NTPC, SECL और BALCO से जवाब मांगा कि उन्होंने अब तक कितनी कार्रवाई की है और क्यों अस्थायी उपायों तक ही सीमित रहे हैं।
BALCO और NTPC के खिलाफ सख्त निर्देश
कोर्ट ने BALCO और NTPC के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) को व्यक्तिगत हलफनामा (affidavit) दाखिल करने का आदेश दिया है।
इस हलफनामे में उन्हें बताना होगा कि—
फ्लाई ऐश प्रबंधन के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए,
सड़कों की मरम्मत और स्थायी निर्माण में अब तक क्या प्रगति हुई,
और आने वाले दिनों में क्या योजना बनाई गई है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं हुई तो कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
PWD सचिव को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
पीडब्ल्यूडी सचिव को दो सप्ताह के भीतर स्थायी सड़क निर्माण की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है। रिपोर्ट में सड़कों की वर्तमान स्थिति, प्रस्तावित मरम्मत, निर्माण की लागत और समयसीमा का स्पष्ट विवरण देने को कहा गया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “जनता को हर बार अस्थायी मरम्मत का झांसा नहीं दिया जा सकता।”
नगर निगम को भी बनाया गया पक्षकार
अदालत ने इस मामले में नगर निगम कोरबा को भी पक्षकार (respondent) बनाया है। निर्देश दिया गया है कि नगर निगम क्षेत्र के भीतर सड़क और जल निकासी की जिम्मेदारी वहन करेगा और अगली सुनवाई में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेगा।
अगली सुनवाई 14 नवंबर को
कोर्ट ने सभी पक्षों को 14 नवंबर 2025 तक अपनी रिपोर्ट और हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि समयसीमा का पालन नहीं किया गया तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बस्तर में पुनर्वास की रोशनी से मिट रहा भय का अंधकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ और ‘नियद नेल्ला नार योजना’ ने बस्तर अंचल में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। इन नीतियों के परिणामस्वरूप माओवाद की हिंसक विचारधारा में लिप्त युवाओं में विश्वास जागा है और वे मुख्यधारा में लौटकर विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीजापुर जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्ज़ीवन” अभियान के तहत आज सुरक्षा बलों के निरंतर प्रयासों से कुल ₹66 लाख के इनामी 51 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम इस बात का प्रमाण है कि बस्तर भय और हिंसा के अंधकार से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और प्रगति के नए युग में प्रवेश कर रहा है। शासन की संवेदनशील नीतियाँ और मानवीय दृष्टिकोण इस परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि संवाद ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश अब नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस परिवर्तन की यात्रा में सहभागी बनें, ताकि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक गाँव शांति, प्रगति और समरसता का प्रतीक बन सके।
छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा खंडित करने के विरोध में जोहार पार्टी ने 31 अक्टूबर को रायपुर बंद का किया ऐलान
रायपुर। राजधानी के तेलीबांधा वीआईपी चौक में स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने की घटना के विरोध में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने राज्योत्सव से एक दिन पहले 31 अक्टूबर को रायपुर महाबंद का ऐलान किया है. जोहार पार्टी ने आज प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि विगत दिनों सोची समझी साजिश के तहत एयरपोर्ट मार्ग के पहले वीआईपी चौक में स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की विशालकाय मूर्ति को आपराधिक तत्वों ने शत-विक्षत कर दिया था.
जोहार पार्टी ने कहा, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह घटना 23 अक्टूबर के आसपास दिनदहाड़े हुई. प्रशासन द्वारा इस घटना को छुपाकर रखना अनेक संदेहों को जन्म देता है. मूर्तियों के खंडन के जरिए कुछ छत्तीसगढ़िया विरोधी लोगों द्वारा लगातार हमारी आस्था को खंडित करने और स्वाभिमान को ललकारने का काम किया जा रहा है. ऐसा करके वह छत्तीसगढ़ियों की मूल अस्मिता को डरा-धमका कर खत्म कर देने की योजना को अंजाम देना चाहते हैं.
जोहार पार्टी ने कहा, वर्तमान तेलीबांधा की हृदय विदारक घटना से संपूर्ण छत्तीसगढ़ आक्रोशित है. राज्योत्सव से ठीक पहले किया गया यह दुष्कृत्य अक्षम्य है. छत्तीसगढ़ की जनता की आवाज को राज्य शासन एवं केंद्र शासन तक लोकतांत्रिक ढंग से पहुंचाने के लिए जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने 31 अक्टूबर 2025 दिन शुक्रवार को राजधानी रायपुर महाबंद का आह्वान किया है। राज्य अस्मिता से हो रहे खिलवाड़ों पर भविष्य में विराम लगाने एवं छत्तीसगढ़िया धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक एक दिवसीय रायपुर बंद करना हमारी विवशता है.
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने अपील की है कि कृप्या राजधानी के सभी व्यापारी, आम नागरिक, राजनैतिक दल, सामाजिक संगठन, कर्मचारी एवं श्रमिक संगठन, उद्योगपति अपने प्रतिष्ठान एवं कार्य एक दिन के लिए बंद रखकर छत्तीसगढ़ राज्य के प्रति अपनी निष्ठा का प्रदर्शन करें एवं वास्तविक अपराधियों को जेल के भीतर पहुंचाने में हमारी सहायता करें.
भारतमाला मुआवजा राशि घोटाला: एक महिला सहित तीन पटवारियों को एसीबी ने किया गिरफ्तार
रायपुर। भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण से जुड़ा करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई हुई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में तीन पूर्व पटवारियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने शासन की पहले से अर्जित भूमि को दोबारा शासन को ही बेचने की साजिश रची और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा राशि हासिल की। हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर लगी रोक हटने के बाद EOW ने यह बड़ी कार्रवाई की है।
घोटाले का खुलासा और गिरफ्तार अधिकारी
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने तीन पूर्व लोकसेवकों —
दिनेश पटेल (पूर्व पटवारी, नायकबांधा),
लेखराम देवांगन (पूर्व पटवारी, टोकरो), और
बसंती घृतलहरे (पूर्व पटवारी, भेलवाडीह) —
को गिरफ्तार किया है।
इन पर आरोप है कि भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे में भू-अर्जन प्रक्रिया के दौरान शासन की पहले से अधिग्रहीत भूमि को दोबारा शासन को बेचने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, और बैक डेट में खाता विभाजन व नामांतरण कराने जैसी गंभीर अनियमितताएँ की गईं।
कैसे हुआ करोड़ों का घोटाला
EOW की जांच में सामने आया कि वर्ष 2020 से 2024 के बीच इन अधिकारियों ने भूमाफियाओं और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र रचा।
शासन द्वारा पहले से अधिग्रहीत भूमि को नए स्वामियों के नाम पर दाखिल-खारिज कराया गया।
कूटरचित खाता बंटवारे और नामांतरण के जरिए मुआवजा राशि ऐसे लोगों को दिलाई गई, जो वास्तव में भूमि स्वामी नहीं थे।
कुछ मामलों में निजी भूमि को सरकारी घोषित कर गलत मुआवजा दिलाने की कोशिश की गई।
एक ही भूमि को विभिन्न हिस्सों में बाँटकर कई बार मुआवजा लिया गया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
कानूनी कार्रवाई और अदालत में पेशी
इन आरोपियों के खिलाफ EOW ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 12 सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 468, 471, 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया है। मामला ब्यूरो अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत दर्ज है।हाईकोर्ट से पूर्व में गिरफ्तारी पर लगी रोक 28 अक्टूबर 2025 को हटने के बाद,EOW ने 29 अक्टूबर 2025 को तीनों को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया।अदालत में पेशी के बाद आगे की न्यायिक कार्यवाही जारी है।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
इस घोटाले में पहले भी 13 अक्टूबर 2025 को 10 आरोपियों, जिनमें 2 लोकसेवक शामिल थे, के खिलाफ पहला अभियोग पत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल किया जा चुका है। अब तीन और सरकारी अधिकारी गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि कई अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश और संभावित कुर्की की कार्रवाई की जा रही है।
EOW की सख्त निगरानी में आगे की जांच
EOW अधिकारियों के अनुसार, यह प्रकरण राज्य की सबसे बड़ी भूमि मुआवजा धोखाधड़ी में से एक है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा और कागजातों में हेराफेरी के कई नए पहलू जांच में सामने आ रहे हैं। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि अन्य विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
अमित जोगी ने साय सरकार में PM आवास निर्माण में भ्रष्टाचार के लगाये गंभीर आरोप, प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर की सीबीआई जांच की मांग
रायपुर। गुमनामी में चल रहे जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के प्रमुख अमित जोगी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। जोगी ने सूबे की साय सरकार में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है। छत्तीसगढ़ स्थापना के रजत जयंती महोत्सव में प्रधानमंत्री मोदी के आने से ठीक पहले अमित जोगी के इस पत्र के वायरल होने से राजनीति गरमा गयी है।
गौरतलब है कि आगामी 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 साल पूरे हो रहे है। राज्य सरकार इसे रजत जयंती महोत्सव के रूप में मना रही है। इस विशेष अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर पहुंचेगे। जिसे लेकर सरकार व्यापक स्तर पर तैयारी में जुटी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास से ठीक पहले जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखकर राजनीति गरमा दी है।
अमित जोगी ने केंद्र सरकार से साल 2023-24 में केंद्र सरकार से मिले प्रधानमंत्री आवास के आबंटन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए सीबीआई से जांच की मांग कर दी है। जोगी ने कहा कि….केंद्र सरकार की तरफ से छत्तीसगढ़ को ग्रामीण आवासों का सबसे बड़ा आवंटन दिए जाने के बावजूद नकली खातों, रिश्वतखोरी और अवैध निर्माण के चलते योजना का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच पा रहा है। जोगी ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि….यह विरोध के लिए विरोध नहीं, बल्कि गरीब और वंचित लोगों की आवाज़ को देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचाने का प्रयास है।
इन बिंदुओं पर लगाये भ्रष्टाचार के आरोप
अमित जोगी ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि आवास मित्र और अधिकारी पुराने या दूसरों के घरों को नया पीएमएवाई घर दिखाने के लिए रिश्वत ले रहे हैं। कई स्थानों पर पुराने घरों की दूसरी मंजिल बनवाकर उसे नया आवास दिखाया जा रहा है। जो कि अवैध निर्माण हैं। गरीबों की जगह गैर-पात्र लोगों को फंड जारी किया जा रहा है। श्रम भुगतान के लिए बनाए गए फर्जी बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
पार्टी के प्रवक्ता भगवानू नायक ने आरोप लगाया है कि इस घोटाले का काफी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जिसे राज्य सरकार की एजेंसी से जांच कराकर सच्चाई सामने नही लाया जा सकता। गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में भ्रष्टाचार का उजागर तभी संभव है, जब इसकी जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से करायी जाये। इसलिए निष्पक्ष और पारदर्शी सीबीआई जांच ही एकमात्र समाधान है।


66 लाख के इनामी 51 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
बीजापुर। जिले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सरकार की महत्वपूर्ण ‘पूना नारगेम’ योजना और नक्सली पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर कंपनी नंबर 01 के पीपीसीएम और 8 लाख के इनामी सहित कुल 51 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 20 नक्सली ऐसे हैं जिन पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी विभिन्न फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट और आगजनी जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं। यह आत्मसमर्पण बीजापुर पुलिस लाइन में किया गया, जहां सीआरपीएफ डीआईजी बी.एस. नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल, उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
पुलिस अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की और उन्हें मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक कुल 461 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि 485 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 138 माओवादी विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए हैं।
सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा मामले हाईकोर्ट ने स्वतः लिया संज्ञान, कलेक्टर से मांगा जवाब
बिलासपुर। दयालबंद क्षेत्र में लोगों के आने-जाने के रास्ते को बंद करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासन के जवाब पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत हलफनामे से यह स्पष्ट है कि प्रशासन ने कार्रवाई केवल शिकायत मिलने के बाद ही की, जबकि यह मामला समय रहते रोकथाम और सुपरविजन की कमी को दर्शाता है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी. डी. गुरू की खंडपीठ ने कहा कि सार्वजनिक रास्तों पर इस तरह के कब्ज़े बार-बार हो रहे हैं, जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। कोर्ट ने बिलासपुर कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वे एक नया शपथपत्र दाखिल करें, जिसमें पब्लिक रास्तों और पगडंडियों पर अवरोध रोकने के लिए स्थायी समाधान के कदमों का उल्लेख हो। इस शपथपत्र में इन रास्तों की पहचान, रखरखाव और सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों का भी ब्यौरा देना होगा। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 18 नवंबर तय की है।
मामला दयालबंद पुल के नीचे रहने वाले 15 परिवारों का है, जिनका आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया गया था। इस समस्या को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी थी। शासन की ओर से दिए गए शपथपत्र में बताया गया कि शिकायत सही पाई गई, और संजय छपारिया द्वारा बनाई गई दीवार हटा दी गई है। पटवारी और तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार, रास्ता साफ कराने के लिए मेमो जारी किया गया था, और दीवार निर्माण के लिए जिम्मेदार संजय छपारिया और उनके बेटे गोपाल राम छपारिया के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 और 135(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कोर्ट ने शासन के जवाब को अस्थायी समाधान माना और कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए नीतिगत और स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
CRPF के डॉग की मौत, जवानों को बचाया था IED की चपेट में आने से
सुकमा। सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के वीर K-9 डॉग “EGO” को आज दोरनपाल मुख्यालय में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। 28 अक्टूबर 2025 को अपने सेवा काल के दौरान देश की सुरक्षा में अद्वितीय योगदान देने और कई जवानों की जान बचाने वाले “EGO” का निधन हो गया। उसकी विदाई के समय जवानों और अधिकारियों की आँखें नम थीं, हर कोई अपने साथी को भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा था।
IED की खोज और ट्रैकिंग में दिखाया अदम्य साहस
“EGO” 74 बटालियन, सीआरपीएफ का एक अत्यंत दक्ष और साहसी के-9 था। अपने कार्यकाल में उसने कई महत्वपूर्ण अभियानों में हिस्सा लिया और विशेष रूप से नक्सल प्रभावित इलाकों में IED (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की खोज और ट्रैकिंग में असाधारण भूमिका निभाई। उसकी सूझबूझ और सतर्कता से कई बार बड़े हादसे टले और दर्जनों जवानों की जानें बचीं।
जवानों ने दी अंतिम सलामी
आज श्रद्धांजलि समारोह में कमांडेंट हिमांशु पांडे समेत बड़ी संख्या में अधिकारी और जवान उपस्थित रहे। सभी ने “EGO” के पार्थिव शरीर पर पुष्प चढ़ाकर उसे अंतिम सलामी दी। वातावरण में भावनात्मक मौन छा गया जब बटालियन के जवानों ने अपनी ड्यूटी के साथी को सैल्यूट किया।
कमांडेंट बोले – “EGO केवल ड्यूटी डॉग नहीं, परिवार का सदस्य था”
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कमांडेंट हिमांशु पांडे ने कहा, “EGO केवल एक ड्यूटी डॉग नहीं था, बल्कि हमारे बटालियन परिवार का हिस्सा था। उसने हमेशा अपनी सेवा, निष्ठा और बहादुरी से हम सबका सिर गर्व से ऊँचा किया। उसका योगदान और समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।”

सीआरपीएफ परिवार ने दी श्रद्धांजलि
सीआरपीएफ परिवार ने “EGO” की निष्ठा, वीरता और सेवाभाव को नमन करते हुए कहा कि ऐसे योद्धा सदैव स्मरणीय रहेंगे। उसकी स्मृति आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण का संदेश देती रहेगी।

“EGO” ने भले ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया हो, लेकिन उसकी बहादुरी और योगदान हमेशा सीआरपीएफ के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।
21 नक्सलियों ने AK-47 समेत अन्य हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण
कांकेर। जिले में सक्रिय रहे 21 नक्सलियों ने आज पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। जंगलवार कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सभी नक्सलियों का रेड कारपेट बिछाकर स्वागत किया गया। बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को संविधान की प्रति भेंट कर मुख्यधारा में उनका स्वागत किया।
नक्सलवाद के खात्मे को लेकर जारी अभियान के बीच पुलिस ने हाल ही में अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब मुठभेड़ की जगह आत्मसमर्पण को प्राथमिकता दी जा रही है। पुलिस ने नक्सलियों को साफ संदेश दिया था कि यदि वे आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटते हैं तो उनका स्वागत होगा अन्यथा फोर्स कार्रवाई के लिए तैयार है।

नक्सलियों से अपील – आत्मसमर्पण कर शांति का रास्ता अपनाएं
इस नई रणनीति का असर भी दिखने लगा है। इसी माह जगदलपुर में 208 नक्सलियों ने 109 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। अब कांकेर जिले के दो एरिया कमेटियों के 21 नक्सलियों ने 18 हथियार पुलिस को सौंपे हैं। आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि एक समय था जब नक्सल संगठन के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी में 45 सदस्य थे, जो अब घटकर केवल 6 से 7 रह गए हैं। उन्होंने दक्षिण बस्तर के जंगलों में छिपे नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि वे आत्मसमर्पण कर शांति का रास्ता अपनाएं अन्यथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
नगरपालिका में जमकर फर्जीवाड़े के विरोध में कांग्रेस ने खोला मोर्चा, विधायक के नेतृत्व में निकाली जनाक्रोश रैली
जांजगीर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-नैला नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप के नेतृत्व में निकाली गई जन आक्रोश रैली ने नगर में राजनीतिक माहौल गर्मा दिया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर पालिका अध्यक्ष रेखा गढ़वाल और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी ने पेवर ब्लॉक निर्माण, सोलर लाइट, वाहन खरीदी और भुगतान में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस की जन आक्रोश रैली में उमड़ा जनसैलाब
सुबह से ही जांजगीर नगर के मुख्य मार्गों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। विधायक ब्यास कश्यप के नेतृत्व में पार्टी ने नगर पालिका तक रैली निकाली। सैकड़ों कार्यकर्ता भ्रष्टाचार बंद करो, नगर पालिका मुर्दाबाद, जनता के पैसे की लूट बंद करो जैसे नारों के साथ सड़कों पर उतर आए।रैली में नगर परिषद के कई पार्षद, युवा कांग्रेस और महिला कांग्रेस की पदाधिकारी भी शामिल थीं। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नगर पालिका कार्यालय के बाहर घेराव किया और बैरिकेड तोड़कर अंदर प्रवेश कर गए। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारी अपने नारेबाजी और विरोध जारी रखे हुए थे।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप — आठ महीने से चल रही अनियमितताएं
कांग्रेस ने ज्ञापन सौंपते हुए नगर पालिका में चल रहे भ्रष्टाचार और फर्जी भुगतान के कई उदाहरण गिनाए। पार्टी का आरोप है कि पिछले आठ महीनों से विकास कार्यों में घोटाले हो रहे हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि पेवर ब्लॉक निर्माण, सोलर लाइट खरीदी, और वाहन क्रय प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां की गई हैं।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि 40 लाख रुपये की विकास योजना में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी हुई है, जबकि 15 से 20 लाख रुपये की वाहन खरीदी में फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान किया गया है।
जल आवर्धन योजना ठप, नागरिकों को परेशानी
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि नगर में जल आवर्धन योजना वर्षों से ठप पड़ी है, जिसके चलते शहरवासियों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, स्वच्छता व्यवस्था, नालियों की सफाई, सड़क मरम्मत और जल निकासी की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए।इसके अलावा पार्टी ने हाईस्कूल मैदान के विकास, फ्लाईओवर निर्माण, सब स्टेशन की स्थापना और नगर में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की मांग की है।
पार्षदों की भी नाराजगी, जांच की मांग पर एकजुटता
कई पार्षदों ने भी नगर पालिका में चल रही अनियमितताओं को लेकर असंतोष जताया और ज्ञापन पर सामूहिक हस्ताक्षर किए। पार्षदों ने कहा कि यदि जल्द जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन को और उग्र रूप देंगे। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में पूरे नगर में जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पुलिस रही नाकाम, प्रदर्शनकारियों ने तोड़ा बैरिकेड
नगर पालिका कार्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात था, लेकिन भारी भीड़ के आगे पुलिसकर्मी बेबस दिखे। प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर भीतर घुस गए और अंदर नारेबाजी करने लगे। हालांकि स्थिति पर बाद में नियंत्रण पा लिया गया।
