प्रदेश
फरार तोमर बंदुओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, कुर्क की जा सकती है संपत्ति
रायपुर। ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली के मामलों में फरार चल रहे हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर के खिलाफ पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है. न्यायलय ने दोनों आरोपियों की गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया गया है. न्यायालय ने दोनों आरोपियों को पुलिस जांच और पूछताछ के लिए उपस्थित होने के निर्देश भी दिए हैं. इस आदेश के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों की तलाश तेज कर दी है और अब उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है.
जानकारी के अनुसार, वीरेन्द्र और रोहित तोमर, उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, धमकी और अवैध वसूली से जुड़े पांच अलग-अलग मामले दर्ज हैं. साथ ही आरोपी रोहित तोमर पर मारपीट का भी केस चल रहा है.
संपत्ति कुर्क करने की तैयारी
जांच में बरामद किए गए ज्वेलरी और नकदी को आयकर विभाग को सौंपा गया है. वहीं प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की भी जांच जारी है. भाठागांव स्थित करीब 5000 वर्गफीट में बना ‘साई विला’ आरोपी वीरेन्द्र सिंह तोमर की पत्नी के नाम पर दर्ज है. वहीं, अभनपुर, भनपुरी समेत अन्य स्थानों पर वीरेन्द्र और रोहित के नाम पर जमीनों के दस्तावेज भी सामने आए हैं. दावा किया जा रहा है कि अगर दोनों आरोपी जल्द गिरफ्त में नहीं आते हैं, तो इनकी संपत्ति को कुर्क करने की कार्रवाई की जा सकती है. वहीं फरार आरोपियों के मददगारों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी.
तकनीकी जांच से तलाश तेज, नए पीड़ित सामने आए
पुलिस की कई टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगी हैं और उनकी लोकेशन ट्रैक करने के लिए तकनीकी जांच जारी है. जांच के दौरान आरोपियों की संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड पुलिस को हाथ लगे हैं. इस मामले में पुलिस के बाद कई नए शिकायतकर्ता भी पहुंचे हैं. इनका आरोप है कि आरोपियों ने उनसे कई गुना ब्याज वसूलने के बाद भी गिरवी रखी जमीनों के दस्तावेज, चेक और अन्य कागजात वापस नहीं किए. इतना ही नहीं, उन्हें गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां भी दी गई.
स्वामी आत्मानंद स्कूल में अवैध वसूली का मामला: जांच में दोषी पाए जाने के बाद प्राचार्या को किया गया सस्पेंड
जांजगीर-चांपा। पामगढ़ स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की प्राचार्या एन.जे. एक्का को शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त करते हुए उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में अटैच किया गया है। यह कार्रवाई शिक्षा विभाग के अवर सचिव द्वारा जारी आदेश के तहत की गई है।
जानकारी के अनुसार, प्राचार्या एन.जे. एक्का पर अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया था कि स्कूल में बच्चों के प्रवेश के नाम पर 15,000 से 20,000 रुपये वसूले गए और टाई-बेल्ट के नाम पर प्रत्येक छात्र से 300 रुपये लिए गए। इस पर शिक्षा विभाग ने एक सदस्यीय जांच समिति गठित कर मामले की जांच करवाई।
जांच रिपोर्ट में आरोप सत्य पाए गए। रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि स्वामी आत्मानंद स्कूल एक सरकारी योजना के तहत संचालित होता है, जहां प्रवेश पूरी तरह निशुल्क होता है। इसके बावजूद प्राचार्य ने शासन के निर्देशों की अवहेलना करते हुए छात्रों व उनके अभिभावकों से पैसे वसूले, जो कि एक गंभीर अनियमितता है।
प्रकरण को गंभीर मानते हुए शिक्षा विभाग ने प्राचार्या एक्का के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया और तत्काल प्रभाव से DEO कार्यालय में अटैच कर दिया है।
देखें आदेश

कांग्रेस की बैठक में फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा, पूर्व मंत्री के सामने जमकर निकाली भड़ास…
वरिष्ठ नेताओं के सामने खुलकर रखी बात
देवी सिंह ठाकुर ने अपनी बात केवल नाराजगी तक सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने सीधे प्रदेश नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा – हम सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए नहीं हैं। हमसे कार्यक्रम में जिम्मेदारी लेने को कहा जाता है, लेकिन सम्मान नहीं दिया जाता। ऐसे में हम कब तक खड़े रहेंगे? उनकी यह बात सुनकर कुछ कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन में सिर हिलाया और ‘सही कहा’ की आवाजें सुनाई दीं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि संगठन के अंदर नाराजगी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि नीचे तक फैल चुकी है।
नेताओं ने किया शांत करने का प्रयास

बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने देवी सिंह ठाकुर को समझाने की कोशिश की और आश्वासन दिया कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर ध्यान दिया जाएगा। पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने भी कहा कि हर कार्यकर्ता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। आपकी बातों को गंभीरता से लिया जाएगा और संगठन में समावेशिता को प्राथमिकता दी जाएगी।
भीतरखाने गुटबाजी की चर्चा तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बैठक समाप्त होते ही जिला कांग्रेस में भीतरखाने गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई। पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि कई बार संगठन में मेहनतकश कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती है और फैसले केवल ऊपर से थोपे जाते हैं। यह असंतोष आने वाले समय में संगठन के लिए चुनौती बन सकता है।
छत्तीसगढ़ में मानसून का कहर जारी, अगले तीन दिन तेज बारिश और अंधड़ का अलर्ट, कई जिलों में बाढ़ की चेतावनी!
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसूनी बादल पूरी रफ्तार से मेहरबान हैं, लेकिन राहत के साथ अब आफत की भी आशंका बढ़ गई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश और अंधड़ का यलो अलर्ट जारी किया है। खासकर उत्तर छत्तीसगढ़ और बस्तर संभाग के जिलों में तेज बारिश के चलते बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
पिछले 24 घंटों में अम्बिकापुर में सबसे ज्यादा 29.2 डिग्री तापमान दर्ज हुआ, जबकि दुर्ग में सबसे ठंडा 21.2 डिग्री रहा। मौसम विभाग का कहना है कि अगले एक सप्ताह तक सक्रिय मानसून का असर प्रदेश भर में बना रहेगा।
रायपुर समेत बिलासपुर, सरगुजा संभाग के जिलों में 6 और 7 जुलाई को भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। राजधानी में फिलहाल आसमान में बादल छाए हुए हैं और गरज-चमक के साथ बौछारें कभी भी शुरू हो सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस दौरान तापमान 24 से 27 डिग्री के बीच रहेगा।
कुलपति की नियुक्ति पर हाईकोर्ट की नजर : डॉ. आर.आर. सक्सेना की नियुक्ति को दी गई चुनौती, योग्यता और प्रक्रिया पर उठे सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ की महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में डॉ. आर.आर. सक्सेना की कुलपति पद पर नियुक्ति अब विवादों में घिर गई है, और यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता को लेकर उठे सवालों पर कोर्ट ने राज्य शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
इस मामले में डॉ. अवनिन्द्र कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि कुलपति की नियुक्ति में न तो योग्यता का मूल्यांकन सही ढंग से किया गया और न ही निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ। याचिका में कहा गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल 38 आवेदकों में से 8 नामों का पैनल तैयार कर राज्यपाल सचिवालय भेजा गया था, लेकिन तुलनात्मक मूल्यांकन नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता के अनुसार, चयन समिति द्वारा सभी आवेदकों को मेरिट के आधार पर अंक नहीं दिए गए, और न ही शैक्षणिक योग्यता व अनुभव का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया। याचिका में दावा किया गया है कि यदि निष्पक्ष रूप से मूल्यांकन होता, तो याचिकाकर्ता की योग्यता और अनुभव अधिक साबित होते।
राज्य शासन ने अधिनियम के तहत इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। यह दुर्ग जिले के पाटन में स्थित है और इसका उद्देश्य उद्यानिकी और वानिकी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। शुरुआत में इस संस्थान में IAS महादेव कावरे को कार्यकारी कुलपति नियुक्त किया गया था। इसके बाद नियमित कुलपति के लिए प्रक्रिया शुरू की गई।
ससुराल में बहु पर टिप्पणी करना आत्महत्या के लिए उकसाने का पर्याप्त आधार नहीं, हाईकोर्ट ने पति और ससुर को किया दोषमुक्त, जानिए पूरा मामला
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि वैवाहिक जीवन में यदि ससुराल पक्ष द्वारा की गई तिरस्कारपूर्ण टिप्पणियां या सामान्य घरेलू झगड़े आत्महत्या के लिए तत्काल और प्रत्यक्ष उकसावे का कारण न हों, तो इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) के अंतर्गत अपराध नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने इस निर्णय के तहत आरोपी पति और ससुर को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 7 साल के सश्रम कारावास और ₹1,000 के जुर्माने की सजा से दोषमुक्त कर दिया है।
क्या था मामला ?
मामला 31 दिसंबर 2013 का है, जब एक विवाहित महिला को रायपुर स्थित अस्पताल में गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान 5 जनवरी 2014 को उसकी मृत्यु हो गई।
महिला ने मृत्युपूर्व कथन (dying declaration) में बताया कि उसने खुद पर केरोसिन डालकर आग इसलिए लगाई क्योंकि उसके पति और ससुर उसे बार-बार अपमानित करते थे और चरित्र पर संदेह करते थे। महिला के माता-पिता और भाई ने भी अपने बयानों में बताया कि ससुराल में उसके साथ अक्सर झगड़े होते थे और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
हाईकोर्ट में क्या हुआ तर्क-वितर्क
अपीलकर्ताओं (पति व ससुर) की ओर से कोर्ट में कहा गया कि मृतका की आत्महत्या से ठीक पहले कोई तत्काल उकसाने वाला कृत्य या टिप्पणी नहीं की गई थी, जो धारा 306 के तहत कानूनी रूप से आवश्यक है।
राज्य पक्ष के वकील ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि मृतका को प्रताड़ित किया गया और उसे मानसिक रूप से इस हद तक परेशान किया गया कि उसने आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाया।
कोर्ट का विश्लेषण और निर्णय
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि “आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण सिद्ध करने हेतु यह आवश्यक है कि आरोपी द्वारा किया गया कृत्य स्पष्ट रूप से उकसावे, षड्यंत्र या मजबूरी को सिद्ध करे। केवल अपमानजनक शब्दों या सामान्य घरेलू कलह को आत्महत्या के लिए उत्प्रेरक नहीं माना जा सकता।”
उन्होंने IPC की धारा 113A (सात वर्ष के भीतर विवाहिता की आत्महत्या) की चर्चा करते हुए बताया कि इस मामले में विवाह को 12 वर्ष बीत चुके थे, इसलिए यह धारा लागू नहीं हो सकती।
न्यायालय ने यह भी कहा कि “क्रोध या आवेश में कहे गए शब्द, यदि उनकी मंशा आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की न हो, तो उन्हें गंभीर दुष्प्रेरणा नहीं माना जा सकता। ससुराल पक्ष की टिप्पणियां यदि अपमानजनक मानी भी जाएं, तो वे इतनी गंभीर नहीं थीं कि मृतका के पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प न होता।” इस आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को पलटते हुए पति और ससुर को दोषमुक्त कर दिया।
ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में BSNL सेवा विस्तार पर जोर: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर। शनिवार को रायपुर में बीएसएनएल द्वारा दूरसंचार सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता रायपुर लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने की।




बैठक के दौरान बीएसएनएल द्वारा उपभोक्ताओं को दी जा रही वर्तमान सेवाओं, भविष्य की योजनाओं और नेटवर्क विस्तार पर विस्तार से चर्चा की गई। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बीएसएनएल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने में कोई कसर न छोड़ें। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में भी नेटवर्क को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
माननीय सांसद ने सरकारी संस्थाओं और कार्यालयों में बीएसएनएल की सेवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही तथा 5G सेवाओं के त्वरित विस्तार पर बल दिया। उन्होंने बीएसएनएल को अपने उत्पादों व सेवाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार और प्रभावी मार्केटिंग करने की भी सलाह दी, जिससे अधिकाधिक लोग जुड़ सकें।
बैठक में बीएसएनएल के प्रधान महाप्रबंधक (व्यावसायिक क्षेत्र रायपुर) टी. के. मरकाम ने सांसद महोदय को बीएसएनएल की 4G सेवाओं, नेटवर्क विस्तार और नई पहलों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित ऐसे गाँव जहाँ अन्य कोई सेवा प्रदाता नहीं पहुँच पाया है, वहाँ बीएसएनएल ने 4G सेवाएँ प्रारंभ की हैं। साथ ही समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत 700 से अधिक स्कूलों को फाइबर कनेक्टिविटी प्रदान की गई है।
श्री मरकाम ने यह भी जानकारी दी कि भारत सरकार की एक्सटेंडेड भारतनेट योजना के अंतर्गत देशभर में 1.5 करोड़ भारत फाइबर कनेक्शन स्थापित किए जाएंगे। इस दिशा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा दिए जा रहे सहयोग हेतु उन्होंने आभार व्यक्त किया। बैठक में दूरसंचार सलाहकार समिति के अन्य सदस्यगण एवं बीएसएनएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
विद्यार्थी की प्रतिभा पहचान कर सही दिशा में प्रयास करना ही सफलता की कुंजी : सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर। शनिवार को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चंगोराभाठा में शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
इस अवसर पर नन्हें बच्चों का विद्यालय में प्रवेश कर उन्हें शिक्षा रूपी नए जीवन की ओर बढ़ने की शुभकामनाएं दी। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा वह साधन है जो जीवन को सही दिशा देता है और समाज के निर्माण में प्रत्येक विद्यार्थी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।









उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और मूल्य आधारित शिक्षा को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज ही समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की नींव है।
श्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ साथ खेल कूद, डांस, गायन तथा अन्य गतिविधियों में भी शामिल होने को कहा जिससे दिमाग के साथ शरीर भी स्वस्थ रहे। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि आत्मविकास का माध्यम मानें।
उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि "आप अपनी रुचि के अनुरूप क्षेत्र को अपनाएँ, तभी आप अपने जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकेंगे।" हर विद्यार्थी की प्रतिभा अलग होती है, और उसे पहचान कर सही दिशा में प्रयास करना सफलता की कुंजी है। इसके लिए शिक्षकों की अहम जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंतर्गत "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण भी किया गया। इस भावपूर्ण पहल के माध्यम से सांसद श्री अग्रवाल ने मातृत्व और पर्यावरण के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा अपनी माँ के नाम पर लगाकर भावनात्मक और सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से स्कूल परिसर के साथ ही घर के आस पास और खाली जगहों पर पौधे लगाने का आह्वाहन किया।
कार्यक्रम में महापौर मीनल चौबे, विधायक सुनील सोनी , रमेश सिंह ठाकुर , MIC सदस्य मनोज वर्मा , पार्षद दुर्गा यादराम साहू, पार्षद ममता सोनू तिवारी विद्यालय परिवार, शिक्षकों, पालकों और छात्रों की उपस्थिति में कार्यक्रम अत्यंत उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ।
मुख्यमंत्री नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के 03 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ में हुए शामिल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के निमोरा स्थित ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान में आयोजित नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के लिए तीन दिवसीय आधारभूत/उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ में शामिल हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण विकास की रीढ़ की हड्डी हैं। नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के रूप में आप सभी के पास बहुत बड़ा अवसर और बड़ी जिम्मेदारी है। यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो एक व्यक्ति भी पूरे जिले की तस्वीर बदल सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लोक कल्याण की भावना से जनता की सेवा करने वालों को जनता स्वयं आगे बढ़ाती है। अपने राजनीतिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने भी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत पंच के रूप में की थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि राजनीति में आऊंगा। 10 वर्ष की आयु में पिताजी के स्वर्गवास के बाद मेरे कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई। मेरा पूरा जीवन संघर्ष में बीता। मैं सरपंच भी बनूंगा, यह मैंने कभी कल्पना नहीं की थी, लेकिन जनता का आशीर्वाद मिला, जिससे विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का अवसर प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कुछ कर गुजरने के लिए संसाधनों से अधिक महत्वपूर्ण इच्छाशक्ति होती है। जनहित में कार्य करने की सोच से अकेला व्यक्ति भी बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे जिन प्रेरणादायी लोगों के जनसेवा के कार्यों को निकट से देखने का अवसर मिला, उनमें ओडिशा के डॉ. अच्युत सामंत और नानाजी देशमुख का उल्लेख करना चाहूंगा। अभावों में पले-बढ़े डॉ. अच्युत सामंत ने आजीवन जनता की सेवा का संकल्प लिया और भुवनेश्वर में एक बड़ा शिक्षण संस्थान स्थापित किया। इस संस्थान में वे लगभग 25 हजार जनजातीय बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसी तरह, चित्रकूट में नानाजी देशमुख ने दीनदयाल उपाध्याय शोध संस्थान के माध्यम से 500 गांवों को गोद लेकर उनके सर्वांगीण विकास का कार्य किया। वर्ष 2006-07 में जब मैं वहां गया, तब मुझे पता चला कि अब तक 80 गांवों को उन्होंने आत्मनिर्भर बना दिया है। इन गांवों में हर परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कार्य किया गया। ये उदाहरण हमें यह बताते हैं कि एक व्यक्ति भी कितना बड़ा परिवर्तन ला सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ हर दृष्टि से एक समृद्ध राज्य है। यहां 44 प्रतिशत भूभाग पर वन हैं। यहां की मिट्टी उर्वरा है और किसान मेहनतकश हैं। छत्तीसगढ़ के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा था, जिसे हम समाप्त कर रहे हैं। जो नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं, उनके लिए हमने एक उत्कृष्ट पुनर्वास नीति बनाई है। जल्द ही राज्य नक्सलमुक्त होगा और बस्तर में सड़क, बिजली, पानी सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर संभाग के मुलेर ग्राम का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के आदिवासियों को राशन के लिए 25 किलोमीटर का पैदल सफर करना पड़ता था, जिसमें तीन दिन लगते थे। कल्पना की जा सकती है कि यह इलाका विकास में कितना पीछे था। हमने मुलेर को अलग पंचायत बनाने का निर्णय लिया और वहां राशन दुकान खोली। जब मैं वहां गया, तो लोगों की खुशी उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी।
मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों से कहा कि गांवों का विकास किए बिना हम विकसित छत्तीसगढ़ नहीं बना सकते। प्रशिक्षण के इस समय का पूरा लाभ उठाएं। यह सदैव ध्यान रखें कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। नियमित रूप से अपने क्षेत्रों का दौरा करें। प्रवास और निरीक्षण से प्रशासनिक कसावट आती है और विकास कार्यों को गति मिलती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में बेहतर कार्य करने के लिए स्वयं को पूरी तरह तैयार करें। पंचायती राज से जुड़े कानूनी प्रावधानों की गहन जानकारी रखें। गांव की उन्नति के लिए केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि अन्य संभावनाओं पर भी सतत विचार करें। दुग्ध उत्पादन जैसे कार्यों से गांव की आर्थिक उन्नति सुनिश्चित होती है। गांव में आर्थिक समृद्धि आने से युवाओं को नई दिशा मिलती है और वे व्यसनों से दूर रहते हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आप ग्राम पंचायत के कार्य स्वरूप पर भी चिंतन करें। पंचायती राज संस्था से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को भलीभांति समझें, ताकि आप जनता के हित में बेहतर कार्य कर सकें। पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े सभी स्तर के एक लाख सत्तर हजार लोगों को यहां प्रशिक्षित किया जाएगा। आज आप सभी से इसकी शुरुआत हो रही है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पेसा : पंचायत उपबंध एवं छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध मार्गदर्शिका, पंचमन पत्रिका तथा जनपद पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों हेतु पठन सामग्री का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान के प्रांगण में मौलश्री पौधे का रोपण भी किया।
इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारीक सिंह, सचिव भीम सिंह, संचालक प्रियंका ऋषि महोबिया तथा ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान के संचालक पी. सी. मिश्रा उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सलियों के शांति वार्ता प्रस्ताव पर दी प्रतिक्रिया: कहा- “हथियार छोड़ें, बातचीत के लिए तैयार है सरकार ”
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केंद्रीय समिति द्वारा जारी शांति वार्ता पत्र पर राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार नक्सलियों के साथ बातचीत के लिए तैयार है, बशर्ते वे हिंसा छोड़ें और आत्मसमर्पण करें।
बता दें कि बीते 1 जुलाई को माओवादी संगठन ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र व राज्य सरकारों से युद्धविराम और शांति वार्ता की पहल की मांग की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि सरकार आदिवासियों की ज़मीन, जंगल और अस्तित्व को नष्ट कर रही है। साथ ही बसवराजू समेत अन्य नक्सलियों की हत्या को ‘जनसंहार’ करार दिया गया।
मुख्यमंत्री साय की दो टूक – गोलीबारी की भाषा आएगी तो फिर सरकार उसके लिए भी तैयार है
मुख्यमंत्री साय ने नक्सलियों द्वारा भेजे गए शांति वार्ता पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार शुरू से ही नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने का आह्वान करती रही है। उन्होंने कहा, हमने हिंसा छोड़ने वालों को पुनर्वास का अवसर दिया है। बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं। यदि कोई शस्त्र त्यागकर बात करना चाहता है, तो सरकार तैयार है, लेकिन यदि गोलीबारी की भाषा आएगी तो फिर सरकार उसके लिए भी तैयार है।
अमित शाह का सख्त संदेश – “बारिश में भी चैन से नहीं सो पाएंगे”

गौरतलब है कि बीते जून महीने में छत्तीसगढ़ दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में स्पष्ट शब्दों में कहा था कि “नक्सलियों को हथियार डालने होंगे। अब समय आ गया है कि वे यह समझें कि न तो जंगलों में, और न ही बारिश में उन्हें चैन से रहने दिया जाएगा। चर्चा की कोई जरूरत नहीं, बस हथियार डालें।”
इसके बाद शाह ने नक्सल प्रभावित राज्यों – ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के DGP-ADGP रैंक के अधिकारियों के साथ इंटर-स्टेट नक्सल ऑपरेशन की समीक्षा बैठक भी की थी।
BJP सरकार बनते ही 427 नक्सली मारे गए

छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि बिना हथियार छोड़े कोई वार्ता संभव नहीं। सरकार का लक्ष्य 2026 तक राज्य को नक्सलमुक्त बनाना है और अब तक की कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि सुरक्षा बल इस दिशा में निर्णायक बढ़त हासिल कर चुके हैं। हाल के समय में नक्सल उन्मूलन अभियान को तीव्र गति मिली है। इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अब तक 31 कुख्यात नक्सलियों समेत 427 नक्सलियों को मार गिराया जा चुका है। वहीं बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि माओवादी संगठन सरकार की शर्तों के अनुरूप आगे कोई कदम उठाता है या नहीं।
छत्तीसगढ़ में वैकल्पिक उर्वरकों की कोई कमी नही, सहकारी समितियों में एक लाख बॉटल नैनो डीएपी का किया जा रहा भंडारण
रायपुर। राज्य में खरीफ सीजन 2025 के दौरान विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की मांग को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने समय रहते न सिर्फ इसकी ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की बल्कि रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति भंडारण एवं वितरण व्यवस्था पर भी लगातार निगरानी रख रही है, जिसके चलते राज्य में रासायनिक उर्वरकों के भण्डरण एवं उठाव की स्थिति बेहतर बनी हुई है। डी.ए.पी. की कमी को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एन.पी.के., सुपर फास्फेट और नेनो डी.ए.पी. जैसे वैकल्पिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर किसानों के हितों का ध्यान रखा है। छत्तीसगढ़ में अब तक विभिन्न प्रकार के 12.27 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण कर लिया गया है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हो सकें।
छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ 2025 में पूर्व में कुल 14.62 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित था। इसमें यूरिया 7.12 लाख, डी.ए.पी. 3.10 लाख, एन.पी.के. 1.80 लाख, पोटाश 60 हजार तथा सुपर फास्फेट 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में कुल 12.27 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है। डीएपी की आपूर्ति में कमी के चलते उर्वरक वितरण के लक्ष्य को संशोधित कर अन्य वैकल्पिक उर्वरकों जैसे- एनपीके, एसएसपी के लक्ष्य में 4.62 लाख मीट्रिक टन की उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसके चलते खरीफ सीजन 2025 में विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की वितरण का लक्ष्य 17.18 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
राज्य में अब तक 5.63 लाख मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण एवं 3.76 लाख मीट्रिक टन का वितरण किया गया है। किसानों को अभी 1.86 लाख मीट्रिक टन यूरिया वितरण हेतु उपलब्ध है। यहां यह उल्लेखनीय है कि यूरिया का उपयोग धान फसल में तीन बार किया जाता है। पहली बार बुवाई अथवा रोपाई के समय कुल अनुशंसित मात्रा का 30 प्रतिशत, दूसरी बार 3 से 4 सप्ताह बाद कन्से निकलने के समय एवं तीसरी बार 7 से 8 सप्ताह बाद गभौट अवस्था में किया जाता है। इस प्रकार यूरिया का उपयोग बुवाई से लेकर सितंबर तक विभिन्न अवस्थाओं में किया जाना है, जिसके अनुरूप राज्य में यूरिया की चरणबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
डी.ए.पी. के आयात में राष्ट्रीय स्तर पर कमी को देखते हुए राज्य शासन ने समय रहते वैकल्पिक उर्वरकों की दिशा में ठोस पहल की है, जिसके चलते एन.पी.के. को लक्ष्य बढ़ाकर 4.90 लाख तथा सुपर फास्फेट का 3.53 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया। वर्तमान में एन.पी.के. 11 हजार एवं सुपर फास्फेट 54 हजार मीट्रिक टन, लक्ष्य से अधिक भंडारित है, जिससे 23 हजार 600 मीट्रिक टन डी.ए.पी. में उपलब्ध फॉस्फेट तत्व की पूर्ति होगी।
छत्तीसगढ़ राज्य को चालू माह जुलाई में आपूर्ति प्लान के अनुसार कुल 2.33 लाख मी. टन उर्वरक मिलेगी। जिसमें यूरिया 1.25 लाख, डी.ए.पी. 48,850, एन.पी.के. 34,380, पोटाश 10 हजार एवं सुपर फास्फेट 76 हजार मी. टन शामिल हैं। जुलाई के अंत तक डी.ए.पी. का कुल भंडारण 1.95 लाख मी. टन तक होने की उम्मीद है। राज्य में डी.ए.पी. की कमी से बचाव हेतु 25 हजार मी. टन सुपर फास्फेट एवं 40 हजार मी. टन एन.पी.के. के अतिरिक्त भंडारण का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही, नैनो डी.ए.पी. उर्वरक को बढ़ावा देने हेतु सहकारी क्षेत्र में एक लाख बाटल का भंडारण किया जा रहा है, जिससे 25 हजार मीट्रिक टन पारंपरिक डी.ए.पी. की आवश्यकता की पूर्ति होगी।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अप्रैल माह से ही वैकल्पिक उर्वरकों के प्रचार-प्रसार हेतु पोस्टर पैम्फलेट तैयार कर समस्त सहकारी समितियों एवं उपार्जन केन्द्रों में प्रदर्शित किए गए डीएपी, उर्वरक के स्थान पर अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के बारे में किसानों को जानकारी दी गई। इसी कड़ी में कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों को विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान एन.पी.के, सुपर फास्फेट एवं नेनो डी.ए.पी. के वैज्ञानिक उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुशल प्रबंधन कर खरीफ 2025 में उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति की जा रही है।
विधानसभा की कार्यवाही से आमजनों को अवगत कराने में संसदीय पत्रकार निभाते हैं बड़ी भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर के प्रेक्षागृह में संसदीय रिपोर्टिंग विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य और विधानसभा के रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश विधानसभा ने भी 25 वर्षों की गौरवमयी यात्रा पूरी की है और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि हाल ही में विधायकों के लिए भी कार्यशालाओं का आयोजन किया गया था, जिसका लाभ हमारे सदस्यों को मिला है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में अनेक नवनिर्वाचित विधायक भी हैं, जिनकी यह जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाएं। इसी तरह पत्रकारों की भी अहम भूमिका है, जो विधानसभा की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि आप सभी पत्रकार बंधु बड़ी मेहनत से विधानसभा की कार्यवाही को कवर करते हैं, जिससे आमजन यह जान पाते हैं कि विधायकों द्वारा उनके मुद्दों को गंभीरता से उठाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा उत्कृष्ट पत्रकारों को सम्मानित करने की परंपरा को भी सराहा और कहा कि इससे पत्रकारों का मनोबल बढ़ता है तथा संसदीय रिपोर्टिंग को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यशाला पत्रकारों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी और इसके माध्यम से विधानसभा की गतिविधियां और अधिक प्रभावी रूप से जनता तक पहुंचेंगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में संसदीय पत्रकारिता की महत्ता बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा में पत्रकारों का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने कहा कि संसदीय पत्रकारिता अत्यंत संवेदनशील दायित्व है, जो सदन की गोपनीयता, अनुशासन और गरिमा को बनाए रखते हुए जनता तक सटीक एवं निष्पक्ष जानकारी पहुंचाने का कार्य करती है। डॉ. सिंह ने कहा कि पत्रकार जब पक्ष–विपक्ष से परे रहकर निष्पक्ष रूप से विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन करते हैं और उसे प्रस्तुत करते हैं, तब लोकतंत्र मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रणाली की गहरी समझ से ही पत्रकार बेहतर ढंग से जनता को विधानसभा की गतिविधियों से अवगत करा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय पत्रकारिता में विशेष रूप से विधानसभा की प्रक्रिया से जुड़े समाचारों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना आवश्यक है, ताकि आमजन तक वे प्रभावी ढंग से पहुंच सकें। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ एवं दिवंगत पत्रकारों का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेश की पत्रकारिता परंपरा ने सदैव विधानसभा की गरिमा बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यशाला में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पत्रकारों की भूमिका को नारद मुनि की परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि पत्रकार समयबद्धता और सजगता के साथ लोकतंत्र के संवाहक होते हैं। डॉ. महंत ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से सभी को कुछ नया सीखने का अवसर मिलेगा और संसदीय पत्रकारिता को समझने का दायरा और व्यापक होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन उपयोगी सिद्ध होगा और पत्रकारों के कार्य को नई दिशा देगा। उन्होंने अपनी लंबी संसदीय यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि इस दौरान पत्रकारों के साथ बिताए गए समय और अनुभव अत्यंत मूल्यवान रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों की सजगता, सटीकता और संवेदनशीलता की सराहना की, जो वर्षों से संसदीय गतिविधियों को जनता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इस अवसर पर संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, विधानसभा के सचिव दिनेश शर्मा, आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक संजय द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे।
हाई कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया बंदी के परिजनों से वसूली का मामला, चीफ जस्टिस ने डीजी जेल से शपथ पत्र में मांगा जवाब…
बिलासपुर। जमानत आवेदन की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के समक्ष जेल में बंद विचाराधीन बन्दियों के परिवार वालों से जबरन वसूली कर विभिन्न खातों में ऑनलाइन रकम लिए जाने का मामला रखा गया. हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीजी जेल से शपथ पत्र में जवाब मांगा है.
आवेदक लुकेश्वरी जोश अब्राहम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जेल में निरुद्ध अपने पति की जमानत के लिए याचिका लगाई थी. चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की सिंगल बैंच में मामले की सुनवाई के दौरान परिजनों से जबरन वसूली करने की बात सामने आई.
चीफ जस्टिस ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जेल महानिदेशक को जारी निर्देश में कहा है कि कैसे हत्या के मामले में निरुद्ध शख्स की पत्नी (आवेदिका) के साथ जेल में बंद अन्य बंदियों के परिवार के सदस्यों से पैसे की जबरन वसूली करते हुए विभिन्न खातों में राशि जमा करने के लिए मजबूर किया है.
राज्य वकील ने कहा कि आवेदक के खाते में भी कुछ राशि जमा की गई है. वहीं समान अपराध में शामिल एक और सह आरोपी की जमानत याचिका को 15 जुलाई 2025 को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने राज्य अधिवक्ता को इस आदेश की एक प्रति महानिदेशक जेल, रायपुर को आवश्यक जानकारी और अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है.
DSP की नीली बत्ती कार पर पत्नी का बर्थडे स्टंट पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, कोर्ट ने CS से पूछा…..बताएं क्या कार्रवाई की !
बिलासपुर। बलरामपुर जिला में पदस्थ डीएसपी की नीली बत्ती लगी कार पर पत्नी का बर्थडे और स्टंट पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। सोशल मीडिया में वायरल हुए वीडियों और मीडिया रिपोर्टस को जनहित याचिका मानकर हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए चीफ सेक्रेटरी को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने मामले में चीफ सेक्रेटरी से पूछा है कि आपने क्या कार्रवाई की, शपथपत्र के साथ जवाब दें। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।
गौरतलब है कि बलरामपुर जिला में 12वीं बटालियन में तस्लीम आरिफ डीएसपी के पद पर पदस्थ है। तस्लीम आरिफ की पत्नी फरहीन का बर्थडे मनाते एक वीडियों सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इस वीडियों में फरहीन अपनी सहेलियों के साथ पति की नीली बत्ती लगी कार की बोनट पर बैठकर जन्मदिन का केक काटते और स्टंट करते दिखीं थी। सोशल मीडिया में यह वीडियो काफी वायरल हुआ था। मीडिया ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से सामने लाते हुए बताया था कि डीएसपी तस्लीम की पत्नी का ये वीडियों अंबिकापुर के सरगवां पैलेस होटल में शूट किया गया था।
जहां गाड़ी के बोनट पर केक रखकर बर्थडे सेलिब्रेशन किया गया। नीली बत्ती वाली एक्सयूवी 700 कार तस्लीम आरिफ की निजी गाड़ी है। जिसमें डीएसपी की पत्नी और उनकी सहेलियां सवार होकर खतरनाक ढंग से स्टंट करते हुए बर्थडे सेलिब्रेट करती देखी जा सकती है। मीडिया में खबर आने के बाद बकायदा इस पूरे मामले में पुलिस ने कार के चालक के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया था। लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई में किसे आरोपी बनाया गया, यह स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में अब इस पूरे प्रकरण पर अब हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सख्ती दिखाई है। डीएसपी की पत्नी के इस स्टंट और बर्थडे सेलिब्रेशन पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल वीडियो को जनहित याचिका मानकर चीफ जस्टिस ने सुनवाई शुरू की है। हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर पूछा है कि इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है, शपथपत्र के साथ जवाब दें। इस पूरे मामले में एक सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
48 घंटे बाद बहाल हुई कोरापुट-किरंदुल रेललाइन, 16 मशीनें और 300 से ज्यादा कर्मचारी काम पर जुटे रहे
जगदलपुर। भू-स्खलन से ठप हुई कोरापुट-किरंदुल रेललाइन को 48 घंटे बाद बहाल कर ली गई है. ट्रैक पर धीमी गति से ट्रेनें चलनी शुरू हो गई है. ओएचई और सिग्नलिंग का काम जारी है. अभी भी कुछ ट्रेनें रद्द हैं. कुछ आंशिक रूप से चलेंगी. रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले अपडेट जरूर लें.

बता दें कि 2 जुलाई को हुए भूस्खलन से कोरापुट-किरंदुल रेललाइन के ट्रैक पर पहाड़ का मलबा और भारी पत्थर आ जाने से रेल यातायात पूरी तरह ठप हो गया था. ईस्ट कोस्ट रेलवे ने दो दिन में जराटी और मल्लिगुड़ा स्टेशन के बीच ट्रैक को पूरी तरह बहाल कर दिया है. 25 हजार क्यूबिक मीटर मलबा ट्रैक पर आ गया था, जिसे 16 मशीनें और 300 से ज्यादा कर्मचारियों की मदद से हटाया गया. मौके पर DRM और सीनियर अधिकारी भी पहुंचे थे.
प्रिंसिपल की मनमानी पर छात्रों के साथ पालकों ने स्कूल में जड़ा ताला, पास बच्चों को फेल करने का आरोप…
गरियाबंद। गरियाबंद में छुरा ब्लॉक के अकलवारा हाईस्कूल के छात्रों के साथ पालकों ने प्रिंसिपल पर मनमानी और छात्राओं से अभद्र व्यवहार का आरोप लगाकर स्कूल गेट में ताला जड़ दिया. पालकों ने कार्रवाई नहीं होने पर उग्र प्रदर्शन करते हुए आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है.
छात्रों ने बताया कि प्रिंसिपल जेपी वर्मा ने 11वीं के छात्रों के परीक्षा परिणाम में हेरा-फेरी कर पास बच्चों को फेल कर दिया है. इस बात ही शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर से करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.
बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ को देख नाराज पालकों ने सुबह से स्कूल के सामने जमकर नारबाजी व प्रदर्शन कर रहे हैं. समाचार लिखे जाने तक न प्रशासन से और न ही शिक्षा विभाग से कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा था.
जशप्योर बनेगा ग्लोबल ब्रांड – जशपुर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच का मार्ग प्रशस्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचल जशपुर की आदिवासी महिलाओं के समूह द्वारा प्राकृतिक वनोपज का प्रसंस्करण कर तैयार की गई विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियों का ब्रांड जशप्योर अब जशपुर और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कदमताल करने को तैयार है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल अभियान को आत्मसात करते हुए एक अहम निर्णय लिया गया है जिसके तहत जशपुर जिले की महत्वाकांक्षी महिला केंद्रित ब्रांड जशप्योर का ट्रेडमार्क अब उद्योग विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। यह ऐतिहासिक निर्णय जशप्योर को व्यापक उत्पादन, संस्थागत ब्रांडिंग और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच दिलाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है।
जशप्योर – परंपरा को उद्यमिता से जोड़कर खोली उन्नति की राह
जशप्योर ब्रांड महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला उपक्रम है, जिसे जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित किया जाता है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक, पोषणयुक्त और रसायनमुक्त खाद्य उत्पादों का निर्माण करते हुए स्थानीय समुदायों को रोजगार उपलब्ध कराना और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
इस ब्रांड का लक्ष्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि और वनोपज का प्रसंस्करण कर खाद्य उत्पादों के रूप में तैयार करना तथा रोजगार से जोड़ते हुए व्यावसायिक स्तर पर इन्हें व्यापक पहचान दिलाना है।
जशप्योर के उत्पादों की मुख्य विशेषता यह है कि ये पूरी तरह से प्राकृतिक हैं। इनमें किसी भी प्रकार के प्रिज़र्वेटिव, रंग या कृत्रिम स्वाद का उपयोग नहीं किया जाता और ये सस्टेनेबल पैकेजिंग में उपलब्ध हैं। जशप्योर केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी माटी की महक, आदिवासी बहनों की मेहनत और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का प्रतीक बन चुका है।
जशप्योर के उत्पाद बना रहे हैं अपनी अलग पहचान
जशप्योर द्वारा महुआ और अन्य वनोपज को शामिल करते हुए कई प्रकार के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें महुआ आधारित उत्पाद जैसे महुआ नेक्टर, महुआ वन्यप्राश, महुआ कुकीज़, रागी महुआ लड्डू, महुआ कैंडी और महुआ नेक्टर कोकोआ शामिल हैं। इसके अलावा, ढेकी कूटा जवा फूल चावल, मिलेट आधारित पास्ता और कोदो, कुटकी, रागी तथा टाऊ से बने विभिन्न उत्पाद भी पूरे भारत में अपनी पहचान बना रहे हैं।
महिला उद्यमिता को मिल रहा बढ़ावा
जशप्योर ब्रांड का उद्देश्य केवल व्यापार नहीं है, बल्कि यह आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने का एक सशक्त प्रयास भी है। इस ब्रांड के माध्यम से महिलाओं को रोजगार का अवसर मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं। जशप्योर द्वारा निर्मित हर उत्पाद आदिवासी महिलाओं की मेहनत और समर्पण का प्रतीक है। ये उत्पाद देशभर के विभिन्न स्टोर्स पर उपलब्ध हैं, जो ब्रांड की व्यापक पहुँच का प्रमाण हैं।
जशप्योर के सभी उत्पाद पूर्णतः प्राकृतिक हैं। इनमें किसी भी प्रकार के प्रिज़र्वेटिव, कृत्रिम रंग या स्वाद का उपयोग नहीं किया जाता। यह उत्पाद श्रृंखला न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि पोषण से भरपूर और पर्यावरण-संवेदनशील पैकेजिंग में उपलब्ध है।
जशप्योर के प्रमुख उत्पादों में महुआ नेक्टर, महुआ वन्यप्राश, रागी महुआ लड्डू, महुआ कुकीज़, महुआ कोकोआ ड्रिंक, कोदो, कुटकी, रागी आधारित पास्ता और ढेकी कूटा चावल शामिल हैं।


