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त्योहारों के दौरान दपूम रेलवे ने चलाई फेस्टिवल स्पेशल एक्सप्रेस
बिलासपुर। त्योहारों के दौरान यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से 170 ट्रिप फेस्टिवल स्पेशल एक्सप्रेस एवं मेमू/पैसेंजर ट्रेनें चलाई गई हैं. इसके अतिरिक्त अन्य रेलवे जोनों द्वारा संचालित 223 ट्रिप विशेष ट्रेनें भी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के क्षेत्र से होकर गुजरते हुए यहाँ के यात्रियों को सुविधा दी जा रही है.
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ट्रेनों के परिचालन में बढ़ोतरी के साथ मुख्यालय एवं मंडलों में स्थापित वार रूम से स्टेशनों की व्यवस्थाओं पर 24×7 रियल-टाइम निगरानी कर रही है. इसके लिए अधिकारियों की विशेष ड्यूटी निर्धारित की गई है. साथ ही, सुरक्षा नियंत्रण कक्ष से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सभी प्रमुख स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था पर निरंतर नजर रखी जा रही है.
त्योहारों के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़-भाड़ को नियंत्रित करने एवं उन्हें सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख स्टेशनों जैसे बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, गोंदिया, इतवारी, रायगढ़ एवं शहडोल सहित अन्य भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर विशेष होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं.

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने बताया कि बिलासपुर स्टेशन पर यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए दो विशेष होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं, जहाँ भीड़ नियंत्रण एवं यात्री सहायता के लिए कर्मचारियों की निरंतर ड्यूटी लगाई गई है. इन होल्डिंग एरिया में यात्रियों के लिए खानपान, पेयजल, बैठने की व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं.
क्लीनिक और लैब सील, स्वास्थ्य विभाग ने लगाया 70 हजार जुर्माना
जगदलपुर। जगदलपुर में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो निजी क्लीनिक को सील किया। यह कार्रवाई निजी संस्थानों में अनियमितताएं पाए जाने के बाद की गई।

कुम्हारपारा में संचालित डॉ. मोहनराव क्लीनिक में अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर क्लीनिक को तुरंत सील कर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। साथ ही बालाजी डायग्नोस्टिक लैब को पूर्व में लगाए गए 20 हजार रुपये के जुर्माने का भुगतान न करने के कारण सील किया गया।
लालबाग में संचालित शिव शक्ति मेडिकल स्टोर के साथ संचालित क्लीनिक में छत्तीसगढ़ चिकित्सा अधिनियम 2013 का पालन न करने पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
पंखाजूर में 50 नक्सलियों के किया आत्मसमर्पण
पखांजूर। उत्तर बस्तर में सक्रिय सीसी मेंबर रामधेर के अपने 50 नक्सली साथियों के साथ महला कैंप में आत्मसमर्पण की खबर है. सभी नक्सलियों पर कुल मिलाकर 50 लाख रुपए का ईनाम बताया जा रहा है.
पखांजूर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर महला कैम्प में सुबह से हचलच मची हुई है. बड़े नक्सली नेता सोनू उर्फ भूपति के बाद रूपेश के आत्मसमर्पण के बाद अब तीसरी कड़ी में सीसी मेंबर रामधेर का नाम शामिल हो गया है. उसकी संगठन पर पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अकेले नहीं बल्कि अपने 50 साथियों के साथ नक्सली विचारधारा को त्याग कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने के लिए आत्मसमर्पण कर रहा है.
पहले 210 नक्सलियों ने किया था सामूहिक आत्मसमर्पण
इसके पहले 17 अक्टूबर को बस्तर पुलिस लाइन ग्राउंड में 210 नक्सलियों ने सामूहिक आत्मसमर्पण किया था. इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों का फूलों और संविधान की पुस्तक के साथ स्वागत किया गया. मुख्यमंत्री सीएम साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा और डिप्टी सीएम अरुण साव ने भी इसका हिस्सा बनकर नक्सलियों का स्वागत किया था.
इस मौके पर वरिष्ठ माओवादी नेताओं सहित केंद्रीय समिति सदस्य रुपेश उर्फ सतीश, भास्कर उर्फ राजमन मंडावी, रनिता, राजू सलाम, धन्नू वेट्टी उर्फ संतू और क्षेत्रीय समिति सदस्य रतन एलम ने भी आत्मसमर्पण किया था. उन्होंने 153 हथियार भी सुरक्षा बलों को सौंपे थे, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 INSAS, 1 INSAS LMG, 36 .303 राइफलें, 4 कार्बाइन और 11 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर शामिल थे.
बस्तर ओलिंपिक 2025 : संभाग के 7 जिलों से 3 लाख 91 हजार 289 खिलाड़ियों ने कराया पंजीयन
रायपुर। छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग में युवाओं की ऊर्जा, उत्साह और प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से ‘बस्तर ओलंपिक 2025’ का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में गृह (पुलिस) विभाग और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में होने वाला यह आयोजन प्रदेश के रजत जयंती वर्ष में बस्तर की नई पहचान बनेगा।
बस्तर ओलंपिक 2025 के प्रति लोगों में उत्साह का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक बस्तर संभाग के 7 जिलों से 3 लाख 91 हजार 289 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें 1 लाख 63 हजार 668 पुरुष और 2 लाख 27 हजार 621 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। यह संख्या न केवल बस्तर के युवाओं का खेलों के प्रति बढ़ते उत्साह को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि बस्तर की धरती पर अब खेल एक नई सामाजिक चेतना और समान भागीदारी का प्रतीक बन चुके हैं।
बस्तर की खेल प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर लाने की पहल
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना और उनके भीतर निहित नैसर्गिक खेल प्रतिभा को पहचानना है। यह पहल केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास व संवाद का सेतु बनेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा था – “बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं है, यह ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है, जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं।"यह मॉडल पूरे देश में ‘खेल के माध्यम से शांति और विश्वास’ की अनूठी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, कराते, वेटलिफ्टिंग और हॉकी जैसे खेल शामिल हैं। इसमें न केवल आधुनिक खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा, बल्कि स्थानीय परंपरा से जुड़े खिलाड़ियों को भी मंच मिलेगा।
बस्तर ओलंपिक में जूनियर (14-17 वर्ष) और सीनियर वर्ग के अलावा विशेष श्रेणी के प्रतिभागियों—नक्सल हिंसा से दिव्यांग हुए व्यक्ति और आत्मसमर्पित नक्सलियों—को भी सम्मिलित किया जा रहा है। यह पहल खेल के माध्यम से पुनर्वास, पुनर्जीवन और सामाजिक एकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
प्रतियोगिताएं तीन स्तरों—विकासखण्ड, जिला और संभाग स्तर—पर आयोजित हो रही हैं। विकासखण्ड स्तर पर प्रतियोगिता 25 अक्टूबर से, जिला स्तर पर 5 नवम्बर से और संभाग स्तर पर 24 नवम्बर से आयोजित की जाएगी। विजेताओं को जिला और संभाग स्तर पर नगद पुरस्कार, मेडल, ट्रॉफी और शील्ड प्रदान की जाएगी। नगद राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से खिलाड़ियों के बैंक खाते में जमा की जाएगी। संभागीय स्तर के विजेता खिलाड़ियों को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया जाएगा। यह ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बस्तर में नई सामाजिक चेतना का प्रतीक बनेगा।
‘बस्तर ओलंपिक 2025’ के लिए वन भैंसा और पहाड़ी मैना को शुभंकर (Mascot) बनाया गया है, जो बस्तर की जीवंतता और सामुदायिक शक्ति का प्रतीक हैं। यह आयोजन न केवल खेलों का, बल्कि बस्तर की संस्कृति, सौहार्द और विकास के नए युग का उत्सव बनेगा।
जाने कैसा रहेगा प्रदेश में आज मौसम
रायपुर। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में प्रदेश के मौसम का मिजाज बदलने वाला है. बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम (निम्न दाब का क्षेत्र) के बनने का असर छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिनों तक दिख सकता है. दक्षिणी छत्तीसगढ़ में अगले चार दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है. मौसम विभाग के अनुसार, तीन दिनों के बाद अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है. हालांकि न्यूनतम तापमान में अगले पांच दिनों तक कोई खास बदलाव की संभावना नहीं है.
मौसम विभाग ने जानकारी दी कि प्रदेश में सबसे अधिक तापमान दुर्ग में 33.2 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज किया गया.
दर्भा में 1 सेमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है. इस बीच बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम में तमिलनाडु तट के पास एक निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय है, जो अगले 24 घंटों में उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए तमिलनाडु, पांडिचेरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों को प्रभावित कर सकता है. सिस्टम के असर से छत्तीसगढ़ में भी हल्की वर्षा की गतिविधियाँ बनी रहेंगी.
रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम?
रायपुर शहर में आज आकाश आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे. अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है.
24 अक्टूबर को माओवादियों का देशव्यापी बंद: सरकार की नीतियों और ‘ऑपरेशन कगार’ के विरोध में बंद का किया आह्वान
बस्तर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है या यूं कहें कि वो आखिरी सांसें गिन रहा है। सुरक्षा बलों के नक्सल ऑपरेशन से नक्सली भयभीत और घबराये हुए हैं और लगातार सरेंडर कर रहे हैं। इस बीच भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ देशव्यापी बंद का आह्वान किया है। पार्टी के केंद्रीय समिति प्रवक्ता अभय द्वारा बीते 15 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में 18 से 23 अक्टूबर तक विरोध सप्ताह मनाने और 24 अक्टूबर को देशभर में बंद पालन करने की घोषणा की गई थी।
बता दें कि प्रवक्ता अभय ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें कॉर्पोरेट कंपनियों के हित में देश के आदिवासी इलाकों में “कगार युद्ध” (Counter Guerrilla Operation) चला रही हैं, जिसमें उनके शीर्ष नेता और कार्यकर्ताओं को योजनाबद्ध तरीके से मारा जा रहा है। विज्ञप्ति में कई शीर्ष माओवादी नेताओं की हालिया मौतों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पिछले 22 महीनों में लगभग 700 माओवादी और समर्थक मारे गए हैं।
माओवादियों ने दावा किया कि सितंबर महीने में छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में हुई कई मुठभेड़ों में उनके केंद्रीय समिति और राज्य समिति के वरिष्ठ सदस्यों की हत्या की गई। पत्र में कहा गया कि सरकार “केंद्रित सैन्य अभियान” के तहत आने वाले पांच महीनों में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, झारखंड के पश्चिम सिंहभूम और ओडिशा के कई नक्सल प्रभावित जिलों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाने की तैयारी में है।
पत्र में केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह “विकसित भारत 2047” के नाम पर देश को “कॉर्पोरेट हिन्दू राष्ट्र” में बदलने की कोशिश कर रही है, और इसके विरोध में उठने वाली हर आवाज को दबाने के लिए ‘अर्बन नक्सल’ का ठप्पा लगाया जा रहा है। पार्टी ने इसे फासीवादी नीति बताते हुए व्यापक जन प्रतिरोध आंदोलन खड़ा करने की अपील की है।
माओवादी संगठन ने देश की जनता, मजदूर, किसान, आदिवासी और बुद्धिजीवियों से ग्रामों, कस्बों और शहरों में रैलियों, सभाओं और धरनों के माध्यम से सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।
देखें माओवादियों का पत्र


इस बीच, सुरक्षा एजेंसियों ने छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा समेत माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है। केंद्रीय सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में विशेष गश्त जारी है। पुलिस का कहना है कि किसी भी हिंसक गतिविधि को सख्ती से निपटाया जाएगा।
राजभवन में दीपावली मिलन समारोह का हुआ आयोजन, मुख्यमंत्री साय सहित जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
रायपुर। राजभवन में आज दीपावली पर्व के अवसर राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में दीपावली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। श्री डेका ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । उन्होंने सभी अतिथियों को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी। साथ ही सभी के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित आमंत्रित अतिथियों ने भी राज्यपाल को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी एवं राज्यपाल के परिजन उपस्थित थे।
कार्यक्रम में विभिन्न रंगारंग प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संस्कृति को दर्शाया गया। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक नृत्य राउत नाच की प्रस्तुति केशव राम यादव एवं दल के द्वारा और सूफी गायक पद्मश्री मदन चौहान के मधुर गायन और विधायक अनुज शर्मा ने भजन की प्रस्तृति से समारोह के उत्साह को दोगुना कर दिया ।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, मुख्य सचिव विकासशील पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, सांसद रूप कुमारी चौधरी, विधायकगण, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना सहित अन्य अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।




छत्तीसगढ़ में 1,390 करोड़ रुपए से अधिक के चार नए मेडिकल कॉलेजों समेत छह निर्माण कार्यों को मंजूरी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा देते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य में चार नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों सहित कुल छह महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं के लिए निविदा दरों को अनुमोदित किया गया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) की नया रायपुर स्थित मुख्यालय में आयोजित 51वीं संचालक मंडल बैठक में इन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। इन परियोजनाओं की कुल लागत 1,390 करोड़ रुपए से अधिक है। इस निर्णय के बाद राज्य में स्वास्थ्य शिक्षा और उपचार सेवाओं के विस्तार को नई गति मिलेगी।
बैठक में चार नए मेडिकल कॉलेजों की भवन निर्माण परियोजनाओं के लिए मनेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए ₹323.03 करोड़, कबीरधाम मेडिकल कॉलेज के लिए ₹318.27 करोड़, जांजगीर-चांपा मेडिकल कॉलेज के लिए ₹318.27 करोड़ और गीदम मेडिकल कॉलेज के लिए ₹326.53 करोड़ की निविदा दर की स्वीकृति दी गई है।
इसके अतिरिक्त मनेंद्रगढ़ में 220 बिस्तर वाले अस्पताल भवन के निर्माण हेतु ₹28.48 करोड़ तथा बिलासपुर के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय और अस्पताल भवन के निर्माण हेतु ₹79.52 करोड़ की निविदा दर को भी मंजूरी दी गई है।
इन छह परियोजनाओं की निविदा दरों को स्वीकृति मिलने के बाद अब इनके निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होंगे। निर्माण कार्यों के पूर्ण होने पर प्रदेश की जनता को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से न केवल चिकित्सा शिक्षा का दायरा बढ़ेगा बल्कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता भी सुदृढ़ होगी। स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील सोच और दूरदर्शी नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा मिल रही है। प्रदेश के हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है।
सीजीएमएससी की 51वीं संचालक मंडल बैठक में अध्यक्ष दीपक म्हस्के, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रितेश अग्रवाल, वित्त विभाग, जीएसटी विभाग और कॉर्पोरेशन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा, गुणवत्ता मानकों और पारदर्शिता पर विशेष बल दिया गया। निर्णय लिया गया कि निर्माण कार्य समयबद्ध रूप से और उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ पूर्ण किए जाएंगे।
इन मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के शुरू होने से प्रदेश के युवाओं के लिए चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन भी बढ़ेगा। साथ ही ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ होंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ में ऐसा स्वास्थ्य ढाँचा विकसित हो, जहाँ हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण और सुलभ चिकित्सा सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
अनुसूचित जाति के मेधावी विद्यार्थियों के लिए ‘श्रेष्ठ योजना’ हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर
रायपुर। अनुसूचित जाति के मेधावी विद्यार्थियों को देश के सर्वश्रेष्ठ निजी आवासीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार की “श्रेष्ठ योजना” (Scheme for Residential Education for Students in High Schools in Targeted Areas – SHRESHTA) के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2025, शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। इस योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से कक्षा 9 और 11 में प्रवेश के लिए 3000 नए विद्यार्थियों का चयन किया जाता है, जो कक्षा 12वीं तक की शिक्षा पूरी करते हैं। स्कूलों का आबंटन योग्यता और विद्यार्थियों की प्राथमिकता के आधार पर आनलाइन काउंसिलिंग के माध्यम से किया जाता है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2022-23 से संचालित यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों के माध्यम से अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं एवं 11वीं में प्रवेश का अवसर प्रदान करती है। इसके लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा “राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा (श्रेष्ठ)” (NETS) का आयोजन किया जाता है। आगामी परीक्षा दिसंबर 2025 में संभावित है।
श्रेष्ठ योजना के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष सर्वोत्तम निजी आवासीय विद्यालयों का चयन का मापदंड ऐसे विद्यालय हैं जो न्यूनतम पाँच वर्षों से सतत रूप से संचालित हों, पिछले तीन वर्षों में कक्षा 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं में कम से कम 75 प्रतिशत या उससे अधिक उत्तीर्णता दर प्राप्त कर चुके हों, तथा जिनके पास कक्षा 9वीं और 11वीं में अतिरिक्त रूप से कम से कम 10 अनुसूचित जाति विद्यार्थियों को समायोजित करने हेतु आवश्यक एवं उपयुक्त बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हों।
इस योजना के अंतर्गत चुने गए विद्यार्थियों को शिक्षण एवं छात्रावास शुल्क का पूरा व्यय भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। विद्यार्थियों को किसी प्रकार का शुल्क या अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होता। साथ ही, शैक्षणिक समायोजन में सहायता हेतु ‘ब्रिज कोर्स’ के लिए वार्षिक शुल्क का 10% तक का प्रावधान है।
योजना अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन NTA की वेबसाइट पर किया जा सकता है। आवेदन सुधार हेतु विंडो 1 से 2 नवंबर 2025 तक खुली रहेगी। विस्तृत दिशा-निर्देश एवं सार्वजनिक सूचना https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s388a839f2f6f1427879fc33ee4acf4f66/uploads/2025/10/202510101384621454.pdf पर उपलब्ध हैं।
राज्य शासन ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे अपने जिलों में स्कूलों, वेबसाइटों और सोशल मीडिया के माध्यम से इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें, ताकि पात्र विद्यार्थी समय पर आवेदन कर सकें और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के इस अवसर का लाभ उठा सकें।
महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुधार की दिशा में उल्लेखनीय कदम : नियद नेल्ला नार योजना के ग्रामों के बीपीएल परिवारों को मिलेगी उज्ज्वला गैस कनेक्शन में प्राथमिकता
रायपुर। भारत सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण और परिवारों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी गैस कनेक्शन जारी किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस निर्णय से देशभर में करोड़ों महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत नियद नेल्ला नार योजना में चिन्हांकित ग्रामों के बीपीएल परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर नए गैस कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे। “सुशासन तिहार” और “नियद नेल्लानार योजना” के अंतर्गत 1.59 लाख पात्र माताओं और बहनों को उज्ज्वला योजना के तहत बीपीएल परिवारों की महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ में उज्ज्वला योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आज खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने 16 अक्टूबर को तेल कंपनियों के अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के नए चरण में राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ स्वास्थ्य संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है।
बैठक में सचिव श्रीमती कंगाले ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत नवीन गैस कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया में गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में “नियद नेल्लानार योजना” के तहत चिन्हांकित ग्रामों में निवासरत पात्र बीपीएल परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन में विशेष प्राथमिकता दी जाए। इन ग्रामों की महिलाओं को सबसे पहले इस योजना का लाभ मिले, ताकि विकास और सशक्तिकरण की प्रक्रिया जमीनी स्तर पर महसूस की जा सके।
सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा कि चिन्हांकित ग्रामों में विशेष शिविरों का आयोजन करें, जहां उज्ज्वला योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों के आवेदन प्राप्त किए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि शिविरों के माध्यम से लाभार्थियों को योजना के लाभ, सुरक्षा उपायों और उपयोग के तौर-तरीकों की जानकारी दी जाए।
बैठक में डॉ. फरिहा आलम, संचालक (खाद्य नागरिक आपूर्ति), राज्य स्तरीय समन्वयक (तेल उद्योग), हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रबंधक सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि उज्ज्वला योजना के माध्यम से न केवल महिलाओं को स्वच्छ ईंधन का लाभ मिलेगा, बल्कि उनके श्रम, समय और स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी। यह पहल ग्रामीण जीवन में सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का नया अध्याय लिखेगी तथा नियद नेल्ला नार योजना के उद्देश्यों को गति प्रदान करेगी।
गोवर्धन पूजा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने किया गौपूजन, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास रायपुर में स्थित गौशाला में गोवर्धन पूजा के अवसर पर गौमाता की पूजा-अर्चना की और गौ माता को खिचड़ी खिलाकर गोसेवा की परंपरा निभाई। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की मंगलकामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गोवर्धन पूजा प्रकृति, गौवंश और पर्यावरण के प्रति आभार व्यक्त करने का पावन पर्व है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं दी।
पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने गौशाला में सेवा कर रहे गौसेवकों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। उन्होंने गौसेवा के लिए उनकी सराहना करते हुए सभी से गौवंश की रक्षा एवं संरक्षण के कार्यों में आगे आने का आग्रह किया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने गौशाला की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। गौसेवकों ने मुख्यमंत्री को बताया कि गौशाला में गौवंश की देखरेख की सभी व्यवस्था मौजूद है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गोवर्धन पूजा हमारे जीवन में प्रकृति, अन्न और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। गाय भारतीय संस्कृति की आधारशिला है, जो न केवल हमारे ग्रामीण जीवन से जुड़ी है, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था और आस्था दोनों का केंद्र भी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी में गोसेवा और प्रकृति पूजन की भावना गहराई से रची-बसी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय, अन्न और धरती का सम्मान करना उस मातृशक्ति को प्रणाम करना है, जिससे हमारा जीवन जुड़ा है। जब हम इन्हें नमन करते हैं, तब हम अपनी संस्कृति की जड़ों, अपनी आत्मा की गहराइयों और समृद्धि के स्रोतों को स्पर्श करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति में गाय गौमाता के रूप में पूजनीय है, और इसी भावना के साथ राज्य सरकार गोसेवा को ग्रामीण विकास की धुरी बनाने के लिए कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की गोवर्धन पूजा, प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय, बगिया (जशपुर) में सपरिवार गोवर्धन पूजा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की माता जसमनी देवी साय, धर्मपत्नी कौशल्या साय एवं परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण की उस प्रेरणादायी लीला की स्मृति है, जिसमें उन्होंने गोकुलवासियों को प्रलयकारी वर्षा और संकट से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर सभी को शरण दी थी। यह पर्व हमें बताता है कि जब समाज एकजुट होकर विश्वास और सहयोग के साथ कार्य करता है, तब कोई भी संकट अजेय नहीं रहता। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कृतज्ञता, सह-अस्तित्व और प्रकृति-पूजन का प्रतीक है। इस दिन गोवंश की पूजा की जाती है, जो भारतीय संस्कृति की आत्मा — गौ-संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण — को जीवंत रखती है।
तूता धरना स्थल पर आगामी आदेश तक धरना-प्रदर्शन पर अस्थायी रोक
रायपुर। नवा रायपुर अटल नगर में राज्योत्सव मैदान के सामने स्थित धरना स्थल का रखरखाव (संधारण) कार्य किया जाएगा, इस लिए धरना स्थल पर आगामी आदेश तक धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाई है।
नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पत्र के अनुसार यह काम लगभग दो महीने तक चलेगा। इस दौरान संधारण कार्य पूर्ण होने तक धरना स्थल को नगर विकास प्राधिकरण को सौंपा गया है। रखरखाव कार्य पूरा होने तक तूता धरना स्थल पर किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन या सभा का आयोजन नहीं किया जा सकेगा। यह प्रतिबंध अगले आदेश तक लागू रहेगा। इस संबंध में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आदेश जारी किया है।
मुख्यमंत्री निवास में नहीं मनाया गया गोवर्धन पूजा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा-
रायपुर। ना वह विश्व आदिवासी दिवस मनाते हैं, ना छत्तीसगढ़ के त्योहार को मनाया जाता है. आज गोवर्धन पूजा पर भी कोई आयोजन नहीं है. छत्तीसगढ़ के लोगों को पीछे धकेलना का षड्यंत्र हो रहा है. छत्तीसगढ़िया प्राइड को खत्म करने का काम सरकार कर रही है. यह बात पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीएम आवास में गोवर्धन पूजा पर कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं होने पर कही.
निवास में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गोवर्धन पूजा की सभी को बधाई देते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण पर्वत उठा कर समूह को साथ में लेकर चले, समूह में ताकत होती है, एक साथ समूह में हमें भी लड़ाई लड़नी है, व्यापारी ने हमें कहा, किसान भी कह रहे हैं कि अब वे पछता रहे हैं. आज लोगों को बिजली का झटका लग रहा है, राशन को लेकर भी साय-साय झटका दिया जाएगा. आगे स्थिति भयावह होने वाली है.
पूर्व सीएम ने कहा कि जीएसटी की मार भी आम जनता को पड़ रही है. जीएसटी को राहुल गांधी ने 2 दिन में ही समझ लिया, मोदी जी को 8 साल समझने में लगे. गोबर खरीदने वाला देश का पहला ऐसा राज्य था. हम छत्तीसगढ़ को तरक्की की राह में लेकर गए, लेकिन इस सरकार में ऐसा कुछ नहीं हुआ.
वहीं राज्योत्सव को लेकर भूपेश बघेल ने कहा कि दो साल सरकार ने क्या किया?, भाजपा सरकार के पास बताने के लिए कुछ भी नहीं है, जनता को बताने के लिए कोई योजना या कार्यक्रम नहीं है.

कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कल केसी वेणुगोपाल, सचिव पायलट के साथ दिल्ली में बैठक है, सभी पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट सौंपने का काम करेंगे, सीडब्ल्यूसी सदस्यों के साथ सभी नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री बैठक में मौजूद रहेंगे.
नक्सलवाद को लेकर पूर्व CM भूपेश बघेल ने कहा कि विकास, विश्वास, सुरक्षा योजना हमारी थी, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सबका विश्वास बस्तर में जीता था, अबूझमाड़ क्षेत्रों में पट्टा वितरण किया गया था, जब विश्वास जीता तो नक्सलवाद कम हो गया, इसलिए हमने 600 गांव खाली करा दिया था, यही नीति ने नक्सलवाद की कमर को तोड़ा है.

वहीं नक्सलवाद को खत्म करने के डेडलाइन पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि नक्सलियों की एक घटना से दहशत फैल जाती है. आतंक का प्रभाव पूरी दुनिया में पड़ता है, नक्सलियों को जो समझते है, उनपर अध्ययन कर चुके है वह जानते है, इसलिए इस डेडलाइन पर विश्वास नहीं.
वहीं भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारियों की सूची बनाने के मामले में उन्होंने कहा कि मेरे यहां के चपरासियों, सुरक्षाकर्मियों को दूर-दूर पदस्थ कर दिया गया. इस सरकार में किसकी चलती है पहले भाजपा बताए. सुना है गुजरात से तीन लोग आए हुए हैं, वह बंद कमरे में बैठकर निर्देश देते हैं, उसके अनुसार काम होता है.
5 नवम्बर को नवा रायपुर में रजत जयंती महोत्सव के दौरान होगा ‘सूर्यकिरण एरोबैटिक शो’
रायपुर। छत्तीसगढ़ की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी नवा रायपुर का आसमान 5 नवम्बर को एक ऐतिहासिक दृश्य का साक्षी बनेगा। भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (Suryakiran Aerobatic Team – SKAT) अपने रोमांचकारी करतबों से छत्तीसगढ़ और देशवासियों को गर्व, उत्साह और देशभक्ति की भावना से भर देगी। यह शो रजत जयंती समारोह का सबसे विशेष आकर्षण होगा।


छत्तीसगढ़ के आकाश में गूंजेगा भारतीय शौर्य
राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित यह एरोबैटिक शो छत्तीसगढ़ की प्रगति, उपलब्धियों और आत्मविश्वास का प्रतीक बनेगा। नवा रायपुर के आसमान में जब सूर्यकिरण टीम उड़ान भरेगी, तब ‘बॉम्ब बर्स्ट’, ‘हार्ट-इन-द-स्काई’ और ‘एरोहेड’ जैसी प्रसिद्ध फॉर्मेशन्स पूरे दर्शक समुदाय को रोमांच और गर्व से भर देंगी।


सूर्यकिरण टीम का यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह दिखाएगा कि अनुशासन, तकनीक और टीमवर्क से कैसे असंभव को संभव बनाया जा सकता है। राज्य शासन और भारतीय वायुसेना के संयुक्त प्रयास से आयोजन की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
जनसहभागिता से सजेगा रजत जयंती का आकाश
रायपुर और आसपास के जिलों से हजारों नागरिक, विद्यार्थी और परिवार इस एरोबैटिक शो को देखने नवा रायपुर पहुँचेंगे। यह छत्तीसगढ़ की जनसहभागिता और राष्ट्रीय गर्व का जीवंत उदाहरण बनेगा। ‘सूर्यकिरण एरोबैटिक शो’ केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि यह भारतीय वायुसेना के शौर्य, सटीकता और समर्पण का प्रतीक है।
छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर गर्व की उड़ान
5 नवम्बर को नवा रायपुर का आसमान गर्व, रोमांच और देशभक्ति के रंगों से भर उठेगा। सूर्यकिरण टीम का यह ऐतिहासिक शो छत्तीसगढ़ की रजत जयंती को यादगार बना देगा और हर दर्शक के मन में भारत के वीर वायुसैनिकों के प्रति सम्मान और गर्व की भावना जगाएगा।
उल्लेखनीय है कि 1996 में गठित सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम भारतीय वायुसेना की सटीकता, साहस और तकनीकी दक्षता का प्रतीक है। अपने गठन के बाद से इस टीम ने भारत की हवाई क्षमता और अनुशासन का भव्य प्रदर्शन देश-विदेश के अनेक मंचों पर किया है। सूर्यकिरण टीम एशिया की एकमात्र नौ विमान की एरोबैटिक डिस्प्ले टीम है, जो भारतीय वायुसेना की तकनीकी क्षमता, अनुशासन और समन्वय की मिसाल मानी जाती है। इनके विमानों की उड़ानें इतनी सटीक होती हैं कि कभी-कभी पंखों के बीच की दूरी पाँच मीटर से भी कम रह जाती है — यही वह कौशल है जो भारत को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान देता है।
स्वदेशी तकनीक से आत्मनिर्भर भारत की उड़ान
टीम ने अपनी यात्रा की शुरुआत HJT-16 Kiran Mk-II से की थी। वर्ष 2015 में इसने स्वदेशी तकनीक पर आधारित HAL Hawk Mk-132 Advanced Jet Trainer के साथ नई उड़ान भरी। सूर्यकिरण टीम केवल हवाई करतबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा के लिए प्रेरित करती है।
देश और दुनिया में 700 से अधिक प्रदर्शन
अब तक सूर्यकिरण टीम ने भारत और विदेशों में 700 से अधिक प्रदर्शन किए हैं। श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, ब्रिटेन और थाईलैंड जैसे देशों में इस टीम ने भारत का गौरव बढ़ाया है। टीम ने सिंगापुर एयर शो, दुबई एयर शो और रॉयल थाई एयर फोर्स की 88वीं वर्षगांठ पर भी शानदार प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रदर्शनों ने भारत की तकनीकी क्षमता और रक्षा सहयोग की भावना को दुनिया के सामने रखा है।
खेल और संस्कृति से जुड़ा गौरवपूर्ण अध्याय
2023 में सूर्यकिरण टीम ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में क्रिकेट विश्वकप के दौरान अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया था। इस अवसर ने खेल और सैन्य गौरव को एक साथ जोड़ने का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
“यह छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव का अवसर है कि भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम हमारे रजत जयंती समारोह का हिस्सा बनेगी। छत्तीसगढ़ की रजत जयंती के इस ऐतिहासिक अवसर पर यह शो राज्य के विकास, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गौरव की उड़ान का प्रतीक बनेगा। यह प्रदर्शन न केवल हमारे युवाओं में देशभक्ति और गर्व की भावना को प्रबल करेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रसेवा की प्रेरणा भी देगा। मैं प्रदेशवासियों से आह्वान करता हूँ कि वे इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनें और हमारे वीर वायुसैनिकों के कौशल को सलाम करें।" -मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मंत्रालय में 1 दिसंबर से लागू होगी आधार आधारित बायोमैट्रिक अटेंडेंस प्रणाली, सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को 7 नवंबर तक करना होगा AEBAS पोर्टल पर पंजीकरण
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (अधीक्षण शाखा) ने मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (Aadhaar Enabled Biometric Attendance System – AEBAS) लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रणाली आगामी 1 दिसंबर 2025 से पूर्ण रूप से प्रभावशील होगी।
इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने मंत्रालय के सभी विभागों के भारसाधक सचिवों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी 7 नवंबर 2025 तक AEBAS पोर्टल पर स्व-पंजीकरण (Self Registration) की प्रक्रिया पूरी करें।

विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह प्रणाली मंत्रालय में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी। पंजीकरण के लिए विभागीय पोर्टल https://cggad.attendance.gov.in पर जाकर User/Employee Registration अनुभाग में आवश्यक विवरण भरना होगा।
पंजीकरण के लिए आवश्यक जानकारी
पंजीकरण के दौरान कर्मचारियों को ये जानकारियाँ देनी होंगी —
नाम
जन्म तिथि
लिंग
आधार संख्या या वर्चुअल आईडी
मोबाइल नंबर
ईमेल आईडी
संगठन/अनुभाग/इकाई का नाम
पदनाम
कार्यालय स्थान
कर्मचारी कोड (यदि उपलब्ध हो)
पासपोर्ट आकार का फोटो (.jpeg प्रारूप में, अधिकतम 150 KB)
यूनिट चयन की प्रक्रिया
स्व-पंजीकरण के समय कर्मचारियों को Division/Unit within Organization के रूप में निम्नानुसार चयन करना होगा —
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी: GAD-2 (IAS Establishment)
विधि विभाग के सेवक: Law Department (Mantralaya)
संसदीय कार्य विभाग के सेवक: Parliamentary Affairs Department (Mantralaya)
मंत्रालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी: GAD-10
मंत्रालयीन सेवा एवं अन्य शासकीय सेवक: GAD-8
मोबाइल ऐप से होगी उपस्थिति
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंजीकरण के बाद अधिकारी और कर्मचारी उपस्थिति दर्ज करने के लिए AadhaarFaceRD (UIDAI) और AadhaarBAS (NIC) मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग कर सकते हैं।
तकनीकी सहायता के लिए संपर्क
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को पंजीकरण में तकनीकी समस्या आती है, तो वे सामान्य प्रशासन विभाग के पीयूष दुबे (मो. 7987582401) से संपर्क कर सकते हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागीय सचिवों से आग्रह किया है कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण कराने के निर्देश दें, ताकि 1 दिसंबर 2025 से मंत्रालय में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का संचालन सुचारू रूप से प्रारंभ किया जा सके।
शिक्षा मंत्री का DEO को कड़ा निर्देश, अब स्कूलों में मिड डे मिल में टेस्टिंग होगी जरूरी
रायपुर। स्कूलों में बच्चों को परोसे जा रहे मध्यान्ह भोजन (Mid Day Meal) की गुणवत्ता को लेकर अब सरकार पूरी तरह गंभीर हो गई है। लगातार मिल रही शिकायतों और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने भोजन की वैज्ञानिक जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत यह पहल पूरे राज्य में लागू की जा रही है।
सरकार ने भोजन की जांच के लिए ब्लू अर्थ यूबिक्सा टेस्टिंग लैबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड को अधिकृत किया है। यह लैब प्रत्येक जिले के सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों को परोसे जा रहे पके हुए भोजन के सैंपल इकट्ठा करेगी। इन सैंपलों की जांच लैब में की जाएगी, जहां भोजन की कैलोरी वैल्यू, प्रोटीन स्तर और पोषण गुणवत्ता का विश्लेषण होगा।
सूत्रों के अनुसार, कई जिलों से भोजन की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। कहीं अधपका या बासी खाना परोसा जा रहा था तो कहीं बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में पोषण तत्वों की भारी कमी पाई गई थी। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि “बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां भी लापरवाही मिलेगी, संबंधित अधिकारियों और भोजन तैयार करने वाले समूहों पर कार्रवाई होगी।”
विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ब्लू अर्थ यूबिक्सा लैब की टीमें निर्धारित कार्यक्रम के तहत स्कूलों का दौरा करेंगी। टीम के सदस्य मौके पर जाकर भोजन के नमूने लेंगे और उन्हें सील कर लैब भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि परोसे गए भोजन में कितनी कैलोरी, प्रोटीन, आयरन, और अन्य पोषक तत्व मौजूद हैं।
राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे लैब प्रतिनिधियों को पूर्ण सहयोग प्रदान करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्कूल में जांच प्रक्रिया में बाधा न आए।
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस कदम से न केवल भोजन की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ेगी, बल्कि बच्चों को पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण सुधार होगा। विभाग भविष्य में इस जांच प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की भी तैयारी कर रहा है, ताकि परिणामों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सके।
इस नई पहल से उम्मीद की जा रही है कि राज्यभर के करीब 50 लाख स्कूली बच्चों को बेहतर और पौष्टिक मध्यान्ह भोजन मिल सकेगा, जिससे उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।