रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला प्रशासन रायपुर द्वारा संचालित अभिनव पहल “प्रोजेक्ट जिंदगी मुस्कुराएगी” के माध्यम से जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद और आत्मविश्वास लौट रहा है। यह परियोजना विशेष रूप से सामाजिक और चिकित्सकीय सहायता के क्षेत्र में एक मिसाल पेश कर रही है।
आज कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कालड़ा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंचकर गुढ़ियारी निवासी फेमिन बाई से मिलकर उनका हाल-चाल जाना। 13 वर्षीय फेमिन बाई का हाल ही में बर्न स्पेशलिस्ट डॉ. सुनील कालड़ा द्वारा ब्लाइंडर सिंड्रोम का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया है। इस सफल उपचार ने न केवल फेमिन बाई के जीवन में नई उम्मीद जगाई है, बल्कि उनके परिवार में भी उत्साह और आत्मविश्वास भर दिया है।
कलेक्टर डॉ. सिंह ने बच्ची फेमिन बाई से पूछा कैसी हो बेटा अब ऑपरेशन के बाद कैसा लग रहा है, बच्ची ने बताया कि मुझे अब बहुत अच्छा लग रहा है।
कलेक्टर ने इस मौके पर कहा कि "प्रोजेक्ट जिंदगी मुस्कुराएगी" के तहत हमारा उद्देश्य है कि ऐसे जरूरतमंद लोगों तक यह सहायता बिना किसी बाधा के पहुंचे और उनके जीवन में मुस्कान लौटे।
बच्ची के परिजनों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से हमारी बच्ची को एक नया जीवन मिला है।
इस अवसर पर निगम आयुक्त विश्वदीप, अपर कलेक्टर नम्रता जैन (आईएएस), जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के आरकेएम पावर प्लांट में मंगलवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। बाॅयलर मेंटेनेंस के दौरान मजदूरों को ले जा रही एक लिफ्ट ऊंचाई से नीचे गिर गई। इस दुर्घटना में जहां 3 मजदूरों की मौत हो गई, वहीं 7 अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद प्लांट में मौजूद मजदरों ने प्रबंधन पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।
जानकारी के मुताबिक ये मामला डभरा थाना क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि डभरा स्थित आरकेएम पाॅवर प्लांट में मंगलवार की रात बाॅयलर मेंटनेंस का काम चल रहा था। मेंटनेंस कार्य के दौरान प्लांट में मौजूद मजदूरों को लिफ्ट के जरिये उपर भेजा जा रहा था। लिफ्ट को करीब 80 मीटर की ऊंचाई तक जाना था, लेकिन ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गया। इस दुर्घटना में लिफ्ट में सवार मजदूरों में 2 की जहां मौके पर ही मौत हो गयी, वहीं एक अन्य ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
वहीं 7 अन्य लोगों की हालत गंभीर बतायी जा रही है। उधर इस हादसे के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद बड़ी संख्या में मजदूर और उनके परिजन प्लांट गेट के बाहर जमा हो गए और जमकर हंगामा करने लगे। सूचना मिलते ही डभरा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों की पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार लिफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण यह दुर्घटना हुआ।
वहीं दूसरी तरफ प्लांट प्रबंधन और सुरक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही की बात सामने आ रही है। स्थानीय मजदूरों ने आरोप लगाया है कि पॉवर प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है। बताया जा रहा है कि लिफ्ट की नियमित तकनीकी जांच लंबे समय से नहीं की गई थी। घटना के बाद प्लांट प्रबंधन के खिलाफ मजदूर में आक्रोश है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सहायता राशि देने और घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। वहीं पुलिस ने इस हादसे पर अपराध दर्ज कर घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
जगदलपुर। बस्तर में माओवादी संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। तेलंगाना पुलिस के समक्ष बस्तर में सक्रिय इनामी माओवादी मंदा रूबेन उर्फ कन्नन्ना उर्फ मंगन्ना (67 वर्ष) ने आत्मसमर्पण किया है। रूबेन के ऊपर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
बताया जा रहा है कि बिगड़ती सेहत और अन्य कई कारणों के चलते मंदा रूबेन ने मंगलवार को वारंगल के पुलिस आयुक्त सनप्रीत सिंह के समक्ष आत्मसमर्पण किया। रूबेन दक्षिण बस्तर के वरिष्ठ डिवीजन कमेटी सचिव होने के साथ-साथ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य भी था। आत्मसमर्पण के बाद स्थानीय पुलिस ने उन्हें पुनर्वास नीति के तहत राहत राशि का चेक प्रदान किया।
इस साल अब तक 410 माओवादियों ने किया है सरेंडर
01 जनवरी 2025 से अब तक माओवादी घटनाओं में शामिल 421 माओवादी गिरफ्तार हुए, 410 माओवादी ने आत्मसमर्पण किया एवं जिले में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 137 माओवादी मारे गए हैं। इस प्रकार 01 जनवरी 2024 से अब तक माओवादी घटनाओं में शामिल 924 माओवादी गिरफ्तार हुए, 599 माओवादी ने आत्मसमर्पण किया एवं जिले में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 195 माओवादी मारे गए हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नि:शुल्क कोचिंग और स्मार्ट क्लास रूम की सुविधा मिलने जा रही है, जहां विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की नि शुल्क कोचिंग कराई जाएगी. इसका आदेश लोक शिक्षण संचालनालय ने जारी किया है.
सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर कक्षावार 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की संख्या, कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों की संकायवार संख्या की जानकारी मांगी गई है. साथ ही कितने विद्यालयों में स्मार्ट क्लास रूम है एवं कितने विद्यालयों में नेट कनेक्टिविटी है, क्या जिले में पूर्व से निःशुल्क कोचिंग चल रही है एवं इसका संचालक किसके द्वारा किया जा रहा है, गतवर्ष विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल विद्यार्थियों की संख्या की जानकारी भी मांगी गई है.
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपोलो हॉस्पिटल के चार डॉक्टरों को सात साल पुराने मामले में बड़ी राहत दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने याचिका मंजूर करते हुए उनके खिलाफ दर्ज FIR और निचली अदालत में पेश की गई चार्जशीट को निरस्त कर दिया। यह मामला वर्ष 2016 का है, जब अपोलो हॉस्पिटल में एक मरीज की मृत्यु के मामले में डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया था। 25 दिसंबर 2016 को दयालबंद निवासी एक युवक को गंभीर स्थिति में अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मरीज मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर के कारण अगले ही दिन 26 दिसंबर को निधन हो गया। इस घटना के बाद परिजनों ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में डॉक्टरों डॉ. सुनील कुमार केडिया, डॉ. देवेंद्र सिंह, डॉ. राजीव लोचन भांजा और मनोज कुमार राय के खिलाफ IPC की धारा 304A (गैर इरादतन हत्या) और धारा 201 (सबूत मिटाने) के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामले में डॉक्टरों ने वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह बताया गया कि मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था और उसकी मृत्यु मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर के कारण हुई। पोस्टमॉर्टम के बाद मृतक के विसरा को रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा गया, जिसमें किसी प्रकार के सल्फास या अन्य संदिग्ध रसायन के अवशेष नहीं पाए गए। इसके अलावा यह भी बताया गया कि मामले में पहले सिम्स और बाद में राज्य मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया। इस बोर्ड में कार्डियोलॉजिस्ट समेत पांच मेडिकल विशेषज्ञ शामिल थे। वर्ष 2023 में मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि डॉक्टरों की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई। बोर्ड ने यह भी कहा कि मरीज की मौत का कारण गंभीर स्वास्थ्य स्थिति और मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर था, न कि चिकित्सकीय चूक।
हालांकि, बोर्ड की रिपोर्ट के बावजूद पुलिस विभाग के एक मेडिको लीगल विशेषज्ञ ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके आधार पर डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। इस रिपोर्ट में मृत्युपूर्व बयान रिकॉर्ड न करने और राइस ट्यूब को संरक्षित न करने जैसी कमियों का उल्लेख किया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन कमियों का मरीज की मृत्यु से कोई सीधा संबंध है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में FIR और चार्जशीट न्यायसंगत नहीं हैं। कोर्ट ने डॉक्टरों को यह राहत दी कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक आरोप नहीं ठहरता। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने स्पष्ट किया कि मेडिकल बोर्ड और विशेषज्ञ रिपोर्टों के आधार पर डॉक्टरों की कार्यवाही में लापरवाही साबित नहीं होती।
इस फैसले के बाद डॉक्टरों ने बड़ी राहत महसूस की और कहा कि न्यायपालिका ने उनके पेशेवर सम्मान और मेडिकल निर्णय की उचित सराहना की है। वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील ओटवानी ने कहा कि यह निर्णय चिकित्सकीय पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल है और भविष्य में ऐसे मामलों में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को प्राथमिकता देने की दिशा में मार्गदर्शन करेगा। फैसले के अनुसार, अस्पताल और डॉक्टरों की जिम्मेदारी मरीज की गंभीर स्थिति में उचित चिकित्सकीय उपचार प्रदान करना थी, और उन्होंने पूरी तत्परता के साथ मरीज का इलाज किया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी चिकित्सकीय प्रक्रिया में छोटे-मोटे तकनीकी कमियों का मरीज की मृत्यु के सीधे कारण के रूप में उल्लेख करना न्यायसंगत नहीं है।
इस मामले ने मेडिकल पेशेवरों और अस्पताल प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि गंभीर और जटिल स्वास्थ्य मामलों में पेशेवर निर्णयों की मान्यता न्यायालय द्वारा दी जाती है, बशर्ते कि चिकित्सकीय मानक का पालन किया गया हो। हाई कोर्ट का यह निर्णय डॉक्टरों के पेशेवर सम्मान और विश्वास को मजबूती प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का यह फैसला अपोलो हॉस्पिटल और चिकित्सकीय समुदाय के लिए राहत देने वाला है। यह निर्णय मेडिकल पेशेवरों के लिए यह स्पष्ट करता है कि न्यायपालिका चिकित्सा विज्ञान और विशेषज्ञ रिपोर्टों के महत्व को प्राथमिकता देती है और केवल तकनीकी कमियों या संदिग्ध रिपोर्टों के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकालती।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पुण्यभूमि माता कौशल्या की जन्मस्थली होने के साथ-साथ प्रभु श्रीराम का ननिहाल भी है — यह हमारे लिए परम सौभाग्य और गर्व का विषय है। प्रभु श्रीराम ने अपने चौदह वर्षों के वनवास काल का अधिकांश समय इसी पावन छत्तीसगढ़ की धरती पर व्यतीत किया, जिससे यह भूमि भक्ति, त्याग और मर्यादा की दिव्यता से आलोकित हुई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बालोद जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम बड़े जुंगेरा स्थित माँ कौशल्या धाम, जामड़ी पाटेश्वर आश्रम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संत रामकृष्णदास महात्यागी एवं संत रामजानकीदास महात्यागी के समाधि स्थल पहुँचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दोनों संत महापुरुषों के राष्ट्र, समाज और अध्यात्म के प्रति योगदान को नमन करते हुए कहा कि उनके त्याग, तप और सेवा से छत्तीसगढ़ की यह भूमि आज भी आलोकित है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबाजी तेजस्वी साधक और त्याग, सेवा व अध्यात्म के प्रतीक रहे हैं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लोककल्याण और मानवता की सेवा को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे संतों की प्रेरणा ही हमारे समाज की आत्मा और राज्य के सांस्कृतिक गौरव की आधारशिला है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भगवान श्रीराम के ननिहाल में आकार ले रहा यह दिव्य धाम छत्तीसगढ़ की आस्था, संस्कृति और गौरव का प्रतीक बनेगा। उन्होंने संत बालक दास महात्यागी जी से भेंट कर निर्माण कार्य की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली।
इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद भोजराज नाग, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
रायपुर। राज्य कर (जीएसटी) विभाग की समीक्षा बैठक आज नवा रायपुर में वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री ओ.पी. चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में वित्त सचिव मुकेश बंसल, आयुक्त राज्य कर पुष्पेन्द्र मीणा सहित विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभागीय कार्यों की प्रगति, राजस्व संग्रह, कर चोरी की रोकथाम और प्रशासनिक सुधारों की विस्तृत समीक्षा की गई।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद वर्ष 2022 तक राज्य को 14 प्रतिशत संरक्षित राजस्व में कमी की स्थिति में केंद्र से मुआवजा प्राप्त होता था। वर्तमान में राज्य की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अब सभी अधिकारियों को अपने कार्य प्रदर्शन के माध्यम से राजस्व वृद्धि की पूर्ण जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 के तहत टैक्स दरों में की गई कमी का लाभ आम जनता तक पहुँचना चाहिए। साथ ही, राज्य के बाहर से बेस ऑयल मंगाकर बिना कर अदा किए बेचने वाले व्यापारियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वित्त मंत्री ने कहा कि कर चोरी रोकने के लिए संगठित और ठोस प्रयास आवश्यक हैं।
श्री चौधरी ने अधिकारियों को कार्य में पूर्ण पेशेवर दृष्टिकोण अपनाने, अनुशासन बनाए रखने तथा कार्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति और सीसीटीवी निगरानी प्रणाली का उपयोग अनिवार्य किया जाए। मंत्री श्री चौधरी ने अन्य राज्यों विशेषकर महाराष्ट्र और गुजरात में लागू सफल कर प्रबंधन प्रणालियों का अध्ययन कर उन्हें छत्तीसगढ़ में लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
बैठक में नए नियुक्त अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने तथा फर्जी या गैर-पंजीकृत (NGTP) फर्मों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वित्त मंत्री ने कहा कि अधिकारी अपने कार्यों में दक्षता, विशेषज्ञता और पारदर्शिता लाएँ तथा दैनिक कार्यों का सुव्यवस्थित रिकॉर्ड रखें।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने सभी अधिकारियों से राज्य के राजस्व हित में निष्ठा, समर्पण और टीम भावना के साथ कार्य करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित राजस्व लक्ष्यों की पूर्ण प्राप्ति सुनिश्चित करने निर्देशित किया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की माटी ने एक बार फिर पूरे देश में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। कोरबा जिले की लखनी साहू, ई. विश्वेश्वरैया इंजीनियरिंग कॉलेज की एनएसएस स्वयंसेविका ने अपने समर्पण, सेवा और कर्मनिष्ठा से प्रदेश का नाम रोशन किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें “MY Bharat NSS राष्ट्रीय पुरस्कार (2022-23)” से सम्मानित किया है। यह उपलब्धि न केवल लखनी साहू के अथक प्रयासों की पहचान है, बल्कि हर छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सम्मान पर लखनी साहू को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने समाजसेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के माध्यम से समाजहित में किए गए उनके योगदान ने यह सिद्ध किया है कि जब युवा संकल्प लेकर आगे बढ़ते हैं, तो परिवर्तन निश्चित होता है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं को देश सेवा और जनकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देकर उन्हें समाज निर्माण और राज्य के नवोदय में सहभागी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
रायपुर। बीजापुर जिले भोपालपटनम ब्लॉक के वरदली गांव की 11 वर्षीय शांभवी गुरला की मासूम आंखों में एक सवाल था— “पापा, मैं ठीक हो जाऊंगी ना?”खेती-किसानी कर परिवार का गुजारा करने वाले उसके पिता इस सवाल पर अक्सर चुप हो जाते थे। चार महीने पहले जिला अस्पताल बीजापुर में जब डॉक्टरों ने बताया कि शांभवी को रियूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) है, तो पिता के पांव तले जमीन खिसक गई।
डॉक्टरों ने रायपुर में एडवांस इलाज कराने की बात कही, लेकिन खर्च सुनते ही पूरे परिवार की उम्मीदें टूटने लगीं। घर में हर रोज यही चर्चा होती—“अब क्या होगा? हम अपनी बेटी का इलाज कैसे कराएंगे?” मां रोती और शांभवी को सीने से लगाकर कहती—“बेटा, सब ठीक होगा।” लेकिन उसके पिता की आंखों में चिंता साफ झलकती थी।
आखिरकार उन्होंने हिम्मत जुटाई और बेटी को लेकर सीधे स्वास्थ्य मंत्री के पास पहुंचे। आदेश हुआ— “इलाज तुरंत शुरू किया जाए। खर्च की चिंता मत करें, सरकार पूरी जिम्मेदारी लेगी।”यह सुनते ही पिता की आंखों से आंसू बह निकले थे।
आज एक बार फिर मासूम शांभवी के पिता की आंखों में आंसू हैं, लेकिन इस बार ये आंसू बेटी के दिल की बीमारी से ठीक होकर घर लौटने की खुशी के हैं । राजधानी रायपुर के एक निजी अस्पताल में मासूम शांभवी के दिल के वाल्व का रिप्लेसमेंट हुआ इलाज हुआ और इसका पूरा खर्च शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत राज्य शासन ने किया।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार का यह कदम सिर्फ एक बच्ची के लिए नहीं, बल्कि राज्य के हर गरीब परिवार के लिए भरोसे का संदेश है। ताकि हर एक पिता की उसकी अपनी शांभवी हमेशा मुस्कुराती रहे और हर परिवार की आंखों में उम्मीद की चमक हमेशा बनी रहे।
रायपुर। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हेतु किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन आवश्यक है।
खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने जानकारी दी कि एग्रीस्टैक पोर्टल भारत सरकार द्वारा विकसित एक यूनिफाइड एग्रीकल्चर डेटाबेस है, जिसमें किसानों का भूमि एवं आधार लिंक्ड पंजीयन किया जाता है। पंजीकरण उपरांत किसानों को एक यूनिक फार्मर आईडी (Unique Farmer ID) प्राप्त होती है। यह आधार लिंक्ड डेटाबेस शासन की विभिन्न योजनाओं के लाभ केवल वास्तविक पात्र किसानों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के तहत किसानों को सीधे भुगतान किया जाता है। अतः शासन की मंशा है कि सभी पात्र किसान सुशासन एवं पारदर्शिता के साथ इस योजना का वास्तविक लाभ प्राप्त करें। गत वर्ष राज्य के 25.49 लाख किसानों ने धान विक्रय किया था। एग्रीस्टैक में आधार-आधारित पंजीयन और ई-केवाईसी की व्यवस्था से संपूर्ण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, सटीकता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित होगा। एग्रीस्टैक पोर्टल डिजिटल क्रांति की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी, सटीक और किसान हितैषी बनाएगा। एग्रीस्टैक पोर्टल से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-1030 पर संपर्क किया जा सकता है।
वर्तमान वर्ष में अब तक 21.47 लाख किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण कर लिया है। शेष किसान अपने निकटतम सहकारी समिति या निर्धारित केंद्र में जाकर 31 अक्टूबर 2025 तक अपना पंजीयन करा सकते हैं। इस संबंध में सभी समितियों और जिला कलेक्टरों को पूर्व में आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष राज्य के 20 हजार ग्रामों में से 13 हजार 879 ग्रामों में डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया है। इस डिजिटल क्रॉप सर्वे और मैनुअल गिरदावरी की रिपोर्टों का 2 से 14 अक्टूबर 2025 तक ग्राम सभाओं में पठन किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में मुनादी कर सूचना दी गई है और सर्वे सूची का पंचायत भवनों में प्रदर्शन (चस्पा) भी किया गया है। इसकी सतत निगरानी जिला कलेक्टर, खाद्य अधिकारियों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है। यह पहल “डिजिटल एग्रीकल्चर और गुड गवर्नेंस” की दिशा में राज्य का एक सशक्त और दूरदर्शी कदम है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025 के अवसर पर नवा रायपुर के सेंध लेक क्षेत्र में 5 नवंबर को भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एयरोबेटिक डिस्प्ले टीम द्वारा प्रस्तावित भव्य एयरशो का आयोजन किया जाएगा। इससे एक दिन पहले 4 नवंबर को टीम द्वारा रिहर्सल किया जाएगा।
आज कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। यह आयोजन प्रदेशवासियों के लिए रोमांच और गर्व से भर देने वाला अनुभव होगा।
इस अवसर पर निगम आयुक्त विश्वदीप, अपर कलेक्टर नम्रता जैन (आईएएस), जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन, एडीएम उमाशंकर बंदे तथा एएसपी विवेक शुक्ला सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर रेल मंडल में आज दिनांक 7 अक्टूबर 2025 को गाड़ी संख्या 12834 हावड़ा अहमदाबाद ट्रेन के माध्यम से जंगल सफारी रायपुर में अस्वस्थ बिजली नमक बाघिन को पार्सल वैन (एस एल आर डी) के माध्यम से वनतारा जामनगर वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड केयर सेंटर भेजा गया। जंगल सफारी के अधिकारियों ने बताया कि 22 अगस्त से बिजली बाघिन को खाना खाने में समस्या आ रही थी जिसका इलाज चल रहा था उच्च स्तरीय देखभाल हेतु इस बाघिन को वनतारा जामनगर वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड केयर सेंटर भेजा गया।
इस हेतु जंगल सफारी के अधिकारियों ने वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अवधेश कुमार त्रिवेदी से संपर्क किया। मंडल रेल प्रबंधक दयानंद ने मामले की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत कार्यवाही करते हुए हावड़ा मुख्यालय के अधिकारियों से चर्चा कर हावड़ा अहमदाबाद गाड़ी में रायपुर स्टेशन से बिजली बाघिन को गुजरात भेजने की सहमति दी।
साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए कि यात्रियों को असुविधा न हो एवं सुरक्षा संरक्षा के साथ बिजली बाघिन को भेजा जाए । रेलवे के प्रयासों से बिजली बाघिन को ट्रेन में चढ़ाया गया और रायपुर से गुजरात के लिए रवाना किया गया।
दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में आज जिला पंचायत सभाकक्ष में ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा पंचायतों में संचालित निर्माण कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। मनरेगा योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमोदित लेबर बजट और मानव दिवस सृजन व युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्य योजना शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिये गये। जिले की कुल 300 ग्राम पंचायतों में से 92 जल संकट ग्रसित, 166 अर्द्ध जल संकट ग्रसित तथा 42 ग्रीन ज़ोन क्षेत्र के रूप में केंद्रीय भू-जल बोर्ड द्वारा चिन्हांकित किये गये हैं। अधिक से अधिक ग्राम पंचायतों की कार्य योजना में इन क्षेत्रों को सम्मिलित करने के निर्देश दिये गये। युक्तधारा पोर्टल पर दो श्रेणियों में कार्य प्रस्तावित हैं। पहली श्रेणी में वृक्षारोपण, तालाबों में मछली पालन, रिचार्ज पिट और नाली निर्माण जैसे कार्य शामिल होंगे।
वहीं दूसरी श्रेणी में पशु शेड, आंगनबाड़ी भवन, मुक्तिधाम शेड जैसे निर्माण कार्य रखे जायेंगे। जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को इन कार्यों की योजना तैयार करने को कहा गया है। बैठक में सीईओ बजरंग दुबे ने बताया कि जिले में अब तक 130 अमृत सरोवर निर्माण किए जा चुके हैं, जिनमें से 69 में आजीविका गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। शेष सरोवरों में शीघ्र आजीविका गतिविधियाँ जैसे मत्स्य पालन, बत्तख पालन और सिंघाड़ा उत्पादन शुरू करने के निर्देश दिए गए। स्व-सहायता समूहों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए कहा गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिले में जनपद पंचायत धमधा के 889, दुर्ग के 283 और पाटन के 431 कुल मिलाकर 1603 आवास अपूर्ण हैं। जनपद धमधा द्वारा 20 अक्टूबर 2025 तक 300, दुर्ग द्वारा 150 तथा पाटन द्वारा 300 आवास पूर्ण करने की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने सभी आवासों को तय समय में पूर्ण करने के निर्देश दिये। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना के 649 अप्रारंभ आवासों को अक्टूबर 2025 के अंत तक प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत कुल 212 छत स्तर आवासों को अक्टूबर माह के अंत तक, 279 छत स्तर आवासों को नवंबर के अंत तक तथा 207 लिंटल स्तर आवासों को दिसंबर के अंत तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गये हैं।
साथ ही 1952 (2024-25), 1097 (2025-26) तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के 648 अपात्र हितग्राहियों की सूची को अपीलीय समिति की स्वीकृति के पश्चात राज्य कार्यालय को भेजने हेतु निर्देश दिये गये। सभी जनपदों को आर-सेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) के माध्यम से रूरल मेसन ट्रेनिंग के लक्ष्यों को शीघ्र प्रारंभ कर पूर्ण करने को कहा गया है। जिन हितग्राहियों का एनपीसीआई मैपिंग नहीं हो पाया है, उनके बैंक खातों का मैपिंग कार्य तीन दिवस के भीतर पूर्ण करने हेतु संबंधित सचिव, नोडल अधिकारी एवं रोजगार सहायकों की ड्यूटी लगाने को कहा गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बिहान मॉडल सीएलएफ को वितरण केन्द्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिये गये। साथ ही सीएमटीसी (कम्युनिटी मैनेज ट्रेनिंग सेंटर) के लिए 15 दिवस में भवन चयन कर उसे स्थापित करने तथा जीआरसी (जेंडर रिसोर्स सेंटर) की स्थापना हेतु दुर्ग एवं पाटन जनपद में भवन चयन कर खाता खोलने व स्क्रीनिंग कमेटी से स्वीकृति प्राप्त करने को कहा गया।
लखपति महिला पहल योजना अंतर्गत वर्ष 2025-26 में प्राप्त 42664 लक्ष्यों की त्रैमासिक आय प्रविष्टि आजीविका सीआरपी के माध्यम से समय पर कराये जाने हेतु निर्देशित किया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिये कि जिले और जनपद स्तर के अधिकारी एवं कर्मचारी 10 प्रतिशत लखपति दीदी की गणना का भौतिक सत्यापन भी करें। समीक्षा बैठक में सामुदायिक शौचालयों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। कुल 433 स्वीकृत शौचालयों में से 419 पूर्ण हो चुके हैं जबकि 09 कार्य प्रगति पर हैं। दुर्ग जनपद के ग्राम झोला एवं धमधा जनपद के ग्राम ढौर (खे) में शौचालय निर्माण कार्य अधूरा है, जिसकी राशि पूर्व सरपंच एवं सचिव द्वारा खर्च कर ली गई है। कलेक्टर ने इस संबंध में वसूली की कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही 404 पूर्ण हो चुके सामुदायिक शौचालयों को क्रियाशील रखने व समूहों को संचालन हेतु सौंपे जाने के निर्देश भी दिए गये। हॉट बाजार एवं मुख्य राज्य मार्गों के समीप आवश्यकतानुसार भौतिक सत्यापन कर नये शौचालय निर्माण के प्रस्ताव भेजने तथा उन्हें आजीविका से जोड़ते हुए संचालन की कार्य योजना बनाकर एमओयू प्रस्तुत करने पर प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान करने की बात कही गई।
स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत घर-घर कचरा संग्रहण और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन यूनिट की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले के 381 ग्रामों में यह कार्य किया जा रहा है। इनमें से 165 ग्रामों में यूज़र चार्ज वसूला जा रहा है जिससे 42.42 लाख रुपये की आय हुई है। प्लास्टिक विक्रय से 0.66 लाख की अतिरिक्त आय हुई है। 369 ग्रामों में स्वच्छाग्राही समूहों को सेवा शुल्क प्रदान किया जा रहा है। विभिन्न ग्राम पंचायतों में सप्ताह में 1 से 7 दिन तक घर-घर कचरा संग्रहण हो रहा है। कलेक्टर ने मिशन संचालक कार्यालय के निर्देश अनुसार प्रत्येक स्वच्छाग्राही समूह को 15वें वित्त आयोग से न्यूनतम 3000 रुपये प्रतिमाह मानदेय प्रदान करने के निर्देश दिये। साथ ही सभी ग्रामों से प्रतिमाह प्रतिवेदन प्रस्तुत करने, सप्ताह में कम से कम 3 से 4 दिन कचरा संग्रहण कराने तथा प्रति घर न्यूनतम 50 से 100 रुपये प्रतिमाह यूज़र चार्ज वसूलने की कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बजरंग कुमार दुबे, संचालक पंचायत आकाश सोनी, समस्त जनपद पंचायतों के सीईओ, सहायक परियोजना अधिकारी, विभागीय अधिकारी एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
रायपुर। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना आज आम जनजीवन के लिए न सिर्फ आर्थिक राहत का माध्यम बन रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के प्रचार-प्रसार में भी अहम भूमिका निभा रही है। रायपुर जिले के सारागांव, धरसींवा के निवासी अनिल देवांगन की कहानी प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना की सफलता को बयां करती है।
श्री देवांगन ने अप्रैल 2025 में अपने घर की छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया। इस पर उन्हें केंद्र सरकार से 78,000 और राज्य सरकार से 30,000 रुपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि योजना की जानकारी उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से मिली। इसके बाद उन्होंने स्वयं ऑनलाइन आवेदन किया तथा बिना किसी भागदौड़ और परेशानी के छत पर पैनल लग गया।
उन्होंने बताया कि पहले जहाँ हर महीने 3500-5000 रूपये तक का बिजली बिल आता था, वहीं अब पिछले तीन महीनों में उनका बिजली बिल क्रमशः शून्य, ऋणात्मक, और महज 1000 रुपए आया है। यह योजना सिर्फ पैसों की बचत नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। अब मैं अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहा हूँ।
श्री देवांगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना सचमुच "घर-घर उजाला" ला रही है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को वेबसाईट pmsuryaghar.gov.in या पीएम सूर्यघर मोबाईल एप पर पंजीयन कर लॉग इन आईडी प्राप्त करना होगा। इसके बाद वेब पोर्टल पर उपलब्ध वेंडर का चुनाव कर बिजली कर्मचारी की मदद से वेब पोर्टल पर पूर्ण आवेदन करना होगा।
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने आज रेल मंत्रालय की ₹24,634 करोड़ की चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृत परियोजनाओं में ₹2,223 करोड़ लागत की गोंदिया–डोंगरगढ़ चौथी रेल लाइन परियोजना भी शामिल है, जो प्रदेश के पश्चिमी अंचल के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दूरदर्शी नेतृत्व ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार कर रहा है। “डबल इंजन सरकार” के समर्पित प्रयासों से छत्तीसगढ़ विकास की पटरी पर तेज़ी से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, बल्कि इस परियोजना से सम्पूर्ण मध्य भारत की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का रेल नेटवर्क आधुनिकता, गति और जनसुविधा के नए युग में प्रवेश कर चुका है। छत्तीसगढ़ को इस दिशा में जो निरंतर सहयोग मिल रहा है, वह राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विस्तार का सशक्त आधार बनेगा।
उल्लेखनीय है कि 84 किलोमीटर लंबी परियोजना राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) और गोंदिया (महाराष्ट्र) जिलों से होकर गुजरेगी। इसे पांच वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के तहत 15 प्रमुख पुल, 123 लघु पुल, 1 सुरंग, 3 रोड ओवर ब्रिज (ROB) और 22 रोड अंडर ब्रिज (RUB) का निर्माण किया जाएगा।
आकांक्षी जिला राजनांदगांव में यह परियोजना न केवल यात्रियों के आवागमन को सुलभ बनाएगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और निवेश को भी नई दिशा देगी। यह रेल मार्ग क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकेगा और छत्तीसगढ़ के औद्योगिक परिदृश्य को मजबूती प्रदान करेगा।
परियोजना पूर्ण होने पर प्रतिवर्ष लगभग 30.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल यातायात संभव होगा। इससे रेलवे की आमदनी में वृद्धि होगी और राज्य की औद्योगिक इकाइयों को कच्चे माल व तैयार उत्पादों के परिवहन में बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही अनुमानतः 23 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी, 4.6 करोड़ लीटर डीज़ल की बचत और लगभग ₹514 करोड़ की लॉजिस्टिक लागत में कमी का लाभ मिलेगा, जो पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत सकारात्मक प्रभाव डालेगा। यह पहल हर वर्ष लगभग 1 करोड़ पेड़ों के बराबर कार्बन उत्सर्जन को कम करेगी, जो सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई रेल लाइन के माध्यम से रायगढ़ मांड, कोरबा और इब घाटी की खदानों से कोयला परिवहन की गति बढ़ेगी, जिससे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के थर्मल पावर प्लांट्स को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे प्रदेश की खनिज अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक तंत्र दोनों को स्थायित्व मिलेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गोंदिया–डोंगरगढ़ चौथी रेल लाइन परियोजना छत्तीसगढ़ के लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा, औद्योगिक प्रगति और पर्यावरणीय संतुलन का सशक्त आधार प्रदान करेगी।यह परियोजना छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास को गति प्रदान करने और “विज़न विकसित छत्तीसगढ़ 2047” के लक्ष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
रायपुर। आईएफएस अफसरों की जिम्मेदारी में बदलावा किया गया है। राज्य सरकार ने इसे लेकर आदेश जारी कर दिया है। 1994 बैच के IFS प्रेम कुमार को प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम बनाया गया है। वहीं 1997 बैच की संजीता गुप्ता को संचालक छत्तीसगढ़ लघु वनोपज संघ बनाया गया है.
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को सुबह 11:30 बजे मंत्रालय (महानदी भवन) अटल नगर, नवा रायपुर में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक आयोजित होगी। साय कैबिनेट की इस बैठक में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू करने पर फैसला लिया जा सकता है। इसके अलावा NHM कर्मचारियों और राज्योत्सव की तैयारियों पर चर्चा हो सकती है। इससे पहले पिछली बैठक 30 सितंबर को हुई थी।
पिछली बैठक में लिए गए फैसले
पिछली कैबिनेट बैठक में 100 स्पेशल एजुकेटर के पदों पर सीधी भर्ती का निर्णय लिया गया। मंत्रिपरिषद ने दिव्यांगजनों के हित में बड़ा फैसला करते हुए राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम (NDFDC) की बकाया ऋण राशि ₹24,50,05,457 (चौबीस करोड़ पचास लाख पांच हजार चार सौ सत्तावन रुपये) एकमुश्त वापस करने का निर्णय लिया गया था।
मंत्रिपरिषद ने स्पेशल एजुकेटर के पदों पर सीधी भर्ती के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती एवं पदोन्नति नियम-2019 के प्रावधानों में एक बार के लिए छूट देने का निर्णय लिया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि वित्त विभाग द्वारा शिक्षा विभाग को राज्य में 100 स्पेशल एजुकेटर की भर्ती की अनुमति दी गई। शिक्षा विभाग के भर्ती नियम-2019 को शिथिल करते हुए स्पेशल एजुकेटर के पदों पर सीधी भर्ती चयन परीक्षा के स्थान पर एक बार मेरिट के आधार पर करने का अनुमोदन मंत्रिपरिषद ने प्रदान किया था।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में जेल में बंद कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. उनकी मां के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए 4 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर कर दी गई है. पुलिस अभिरक्षा में 4 दिन मां के साथ रहने की इजाजत मिली है.
दरअसल, कारोबारी अनवर ढेबर की ओर से सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मां की खराब स्वास्थ्य में समय में मिलने के लिए अपील की थी. मामले में सुनवाई के दौरान ढेबर के वकीलों ने कोर्ट में बताया कि उनकी मां की हालत गंभीर है. इस वक्त वह हॉस्पिटल में एडमिट हैं. जिस पर सुप्रीम कोर्ट कहा कि ऐसे संवेदनशील समय पर परिवार के ऐसे समय में इंसान को अपने करीबियों के साथ रहने का मौका मिलना चाहिए.
चार दिन की मिली अंतरिम जमानत
कोर्ट ने चार दिन की अंतरिम जमानत दे दी है. जिसमें साफ किया कि यह राहत सिर्फ उनकी मां की तबीयत को ध्यान में रखते हुए दी गई है. 4 दिनों तक अनवर ढेबर अपने परिवार के साथ रह सकेंगे. जमानत की तिथि खत्म होते ही उन्हें दोबारा जेल जाना होगा.
3200 करोड़ का घोटाला, 60 लाख से अधिक पेटियों की बिक्री
EOW/ACB द्वारा अब तक की गई जांच और 200 से अधिक व्यक्तियों के बयान एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अनुमान है कि लगभग 60,50,950 पेटी बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत 2174 करोड़ रुपये से अधिक है. पहले इस घोटाले का अनुमान 2161 करोड़ रुपये था, लेकिन नवीनतम आंकड़ों के अनुसार घोटाले की कुल राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है.
लखमा, चैतन्य, टूटेजा, ढेबर समेत 15 जेल में
इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, सेवानिवृत्त IAS अनिल टूटेजा और होटल व्यवसायी अनवर ढेबर समेत 15 लोग पहले से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं. ईओडब्ल्यू की जांच में अब तक कुल 70 लोगों को आरोपित बनाया गया है, जिसमें आठ डिस्टलरी संचालक भी शामिल हैं. अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है.