दुर्ग। जिले में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा हैं। करीब 15 साल बाद होने वाली इस जनगणना को इस बार पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है, जिससे प्रक्रिया को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए दो चरणों में संपन्न किया जाएगा।
जिला जनगणना अधिकारी एवं कलेक्टर अभिजीत सिंह ने प्रशिक्षण के दो चरणों में होने वाली प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण का होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में परिवार और व्यक्तियों की गणना के लिए आयोजित किया जाएगा। इस बड़े अभियान के लिए जिले में 3,850 प्रगणक और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं, जिनके मार्गदर्शन के लिए 79 फील्ड ट्रेनर तैनात हैं।
प्रत्येक प्रगणक को लगभग 700 से 800 लोगों या 250 से 300 परिवारों की गणना का जिम्मा सौंपा गया है। 11 अप्रैल से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुका है, जिसमें 1109 प्रशिक्षकों को अलग-अलग बैच में तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण नगर निगम दुर्ग, रिसाली, भिलाई जोन-4, जामुल और दुर्ग, धमधा, पाटन व अहिवारा तहसीलों में आयोजित किया जा रहा है।
इस अभियान में शिक्षा, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, ट्राइबल और महिला-बाल विकास विभाग के कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम है। इस बार डेटा संग्रह मोबाइल एप के माध्यम से होगा, जिसमें प्रगणकों को डेटा एंट्री, मैप सत्यापन और सिंकिंग की प्रक्रिया सिखाई जा रही है। नागरिकों को 16 से 30 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी मिलेगी। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
रायपुर। क्रीड़ा से चरित्र निर्माण और चरित्र से राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ क्रीड़ा भारती आगे बढ़ रही है। खेलों के माध्यम से समाज में अनुशासन, उत्तम स्वास्थ्य और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने के उद्देश्य से समर्पित अग्रणी संस्था क्रीड़ा भारती द्वारा संस्था के पदाधिकारियों ने क्रीड़ा भारती के गौरवशाली इतिहास और इसके दूरदर्शी उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। साथ ही संस्था ने “खेल को मौलिक अधिकार” बनाए जाने की मांग उठाई।
क्रीड़ा भारती के प्रांतीय पदाधिकारियों ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में संस्था के उद्देश्य, कार्य और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। प्रांतीय अध्यक्ष संजय शर्मा, मंत्री सुमित उपाध्याय और उपाध्यक्ष नीता डुमरे ने बताया कि क्रीड़ा भारती की स्थापना वर्ष 1992 में महाराष्ट्र के पुणे में हुई थी। तब से लेकर आज तक यह संस्था अपने मूल मंत्र “क्रीड़ा से चरित्र निर्माण, चरित्र से राष्ट्र निर्माण” को चरितार्थ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संस्था का मानना है कि एक स्वस्थ और अनुशासित खिलाड़ी ही एक सशक्त राष्ट्र का आधार बन सकता है।
पत्रकार वार्ता के दौरान संस्था के लक्ष्यों को साझा करते हुए पदाधिकारियों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर बल दिया—
खेल संस्कृति का पुनरुद्धार: समाज में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाना और खेल संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना।
स्वदेशी खेलों को प्रोत्साहन: दिसंबर माह में अहमदाबाद में क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के सभी राज्यों से आए दो हजार से अधिक प्रतिनिधियों, जिनमें ओलंपियन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, अर्जुन पुरस्कार विजेता, पद्मश्री और खेल विशेषज्ञ शामिल थे। उन्होंने एकमत से “खेल को मौलिक अधिकार में शामिल किया जाए” प्रस्ताव पारित कर सरकार को प्रतिवेदन दिया। उक्त कार्यक्रम में केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया उपस्थित थे।
साथ ही कबड्डी जैसे पारंपरिक खेल को 2036 ओलंपिक खेलों में शामिल करने के लिए देश में माहौल बनाने के लिए वर्षभर योजनाबद्ध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आधुनिक व पारंपरिक खेलों को बढ़ावा: आधुनिक खेलों के साथ-साथ भारत के पारंपरिक और ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देना ताकि हमारी विरासत सुरक्षित रहे।
सर्वांगीण स्वास्थ्य और योग: देश के प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ रखने हेतु योग का व्यापक प्रचार-प्रसार करना।
चरित्र एवं राष्ट्र निर्माण: युवाओं में खेलों के माध्यम से अनुशासन, धैर्य और अटूट राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना।
प्रतिभा खोज: स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें उचित मंच प्रदान करना।
उन्होंने बताया कि क्रीड़ा भारती का लक्ष्य केवल खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो शारीरिक और मानसिक रूप से सुदृढ़ हों और राष्ट्र सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें। “खेल हमारा मौलिक अधिकार हो” इसके संबंध में प्रांताध्यक्ष संजय शर्मा और प्रांत मंत्री सुमीत उपाध्याय ने विस्तृत जानकारी दी।
रायपुर। भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वावधान में, ‘MY Bharat छत्तीसगढ़’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय-स्तरीय ‘MY Bharat Budget Quest’ का भव्य समापन समारोह संपन्न हुआ। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया अपने संबोधन में, उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के स्वप्न को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया, और प्रतिभागियों को समावेशी विकास तथा सतत विकास की दिशा में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
नवा रायपुर स्थित IIIT में आयोजित कार्यक्रम में रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने अपने ओजस्वी संबोधन से युवाओं में नई ऊर्जा का संचार किया।
देश भर के 12 लाख और छत्तीसगढ़ के 30 हजार युवाओं में से चयनित होकर आए 471 प्रतिभागियों को श्री अग्रवाल ने भविष्य का 'आर्थिक दूत' बताते हुए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि आप जैसे शिक्षित बच्चे ही आम आदमी को सरकार की योजनाओं और टैक्स के सदुपयोग के बारे में समझा सकते हैं।
"बजट को समझना हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी"
बृजमोहन अग्रवाल ने अपने संबोधन में सवाल किया कि, इसके पहले कभी आप लोगों ने बजट को समझने की कोशिश की थी? सही बताइएगा। बजट क्या होता है, बजट कैसे बनता है, बजट खर्च कैसे होता है, बजट में पैसे कहाँ से आते हैं—यह कभी इस देश का नागरिक और पढ़ा-लिखा नौजवान भी कभी समझने की कोशिश नहीं करता है।
हमें तो लगता है कि हमारे जेब में ₹100 हैं, उस ₹100 में से क्या चीज़ आएगी, हम उसको खरीद लेते हैं। इतना पैसा बचेगा, उसका क्या उपयोग करेंगे, इसके बारे में हम सोचते हैं। परन्तु जब कोई भारत की सरकार या राज्य की सरकार बजट बनाती है, तो उसके सामने बहुत सारे पहलू (aspects) होते हैं।
आर्थिक समझ और युवाओं की भूमिका
नौजवान जो है, वह सिर्फ अपनी परीक्षा को पास करने में या प्रतियोगी परीक्षाओं (competitive exams) को पास करने में, या फिर अपनी मौज-मस्ती के लिए पैसों की व्यवस्था करने को समझता है। और जब उसे कहीं पर ऐसी समस्या आती है—सड़क खराब मिलती है, बिजली नहीं मिलती है, कहीं सरकार काम नहीं कर रही होती है—तो वह सरकार को गाली देने लगता है।
परन्तु सरकार ऐसा क्यों कर रही है, किस कारण से हो रहा है? युवाओं को देश की समस्याओं, उपलब्धियों और बजट के बारे में जानना चाहिए। आज भारत की जनसंख्या 140 करोड़ है। इतने बड़े देश को चलाने के लिए बजट को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती है।
आज भारत विश्व के समृद्ध देशों से भी ज़्यादा सुखी देश है। हमारी अर्थव्यवस्था स्थिर (stable) है। इसका एक बड़ा कारण हमारे बुजुर्गों की बचत करने की आदत है। जहाँ आज का नौजवान ₹100 आने पर ₹120 खर्च कर देता है, वहीं हमारी माताएं, बहनें और दादियाँ उस पैसे में से कुछ बचाकर रखती थीं, जो मुश्किल समय में काम आता था।
विकास और अधोसंरचना
आज देश में तेज़ी से विकास हो रहा है:
फ्लाईओवर और एक्सप्रेस-वे का निर्माण।
वंदे भारत ट्रेनों का संचालन।
बुलेट ट्रेन का सपना, जो अगले एक साल में हकीकत बनने वाला है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज़ी से विकास।
यह सब पैसा कहाँ से आता है? सरकार हमसे टैक्स लेती है ताकि हमें अच्छी सड़कें, एयरपोर्ट, और रेल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएँ दे सके। यह बात आम आदमी को कौन समझाएगा? आप जैसे पढ़े-लिखे बच्चे ही समझाएंगे।
छत्तीसगढ़ में प्रगति
छत्तीसगढ़ में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है:
IIM, IIT, HNLU और AIIMS जैसे संस्थानों की स्थापना।
राज्य गठन के समय केवल 1 मेडिकल कॉलेज था, आज 15 मेडिकल कॉलेज हैं।
अगले एक-दो वर्षों में 5 और मेडिकल कॉलेज खुलने वाले हैं।
प्रधानमंत्री का लक्ष्य है कि हर जिले और संसदीय क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज हो।
अंत में, मैं यही कहूँगा कि नई पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि सरकार कैसे काम करती है और बजट कैसे बनता है.
कार्यक्रम में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब IIIT निदेशक डॉ. ओपी व्यास , जिला पंचायत सीईओ विश्रंजन, नितिन शर्मा, अर्पित तिवारी समेत प्रदेशभर से आए विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।
सरगुजा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए साड़ी खरीदी में हुए कथित घोटाले के विरोध में आज अंबिकापुर के घड़ी चौक पर महिला कांग्रेस ने महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का पुतला दहन किया। महिला कांग्रेस का आरोप है कि 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए खरीदी गई साड़ियों में 9.7 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है।
कांग्रेसियों ने कहा, खादी ग्रामोद्योग विभाग से खरीदी गई साड़ियां न केवल गुणवत्ताहीन थीं बल्कि 5.5 से 6.3 मीटर की जगह केवल 5 मीटर साड़ी की आपूर्ति की गई। बाजार में 200-250 रुपये की कीमत वाली साड़ियाें की कीमत को 500 रुपये बताकर बांटी गई है।
महिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष सीमा सोनी ने मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सप्लाई की गई साड़ियां इतनी छोटी है कि पल्लू तक पूरा नहीं पड़ता। मंत्री लगातार घोटालों के आरोपों से घिरी हुई हैं। मुख्यमंत्री का उन्हें पद पर बनाए रखना दुर्भाग्यपूर्ण है।
रायपुर। राष्ट्रीय-स्तरीय 'MY Bharat Budget Quest' के आयोजन में युवा मामले और खेल मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया का वर्चुअल संबोधन में विकसित भारत 2047 के स्वप्न को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को समावेशी विकास तथा सतत विकास की दिशा में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
राज्य निदेशक(प्रभारी) MY Bharat छत्तीसगढ़, युवा मामले और खेल मंत्रालय भारत सरकार अर्पित तिवारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वावधान में, MY Bharat छत्तीसगढ़ द्वारा 13 अप्रैल 2026 को IIIT रायपुर में राष्ट्रीय-स्तरीय 'MY Bharat Budget Quest' का सफलतापूर्वक समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पूरे राज्य से 500 से अधिक युवा प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो नीतिगत संवाद और राष्ट्र-निर्माण की पहलों में युवाओं की गहरी भागीदारी को दर्शाता है।
कार्यक्रम के शुभारम्भ में पर्यटन मंत्री छत्तीसगढ़ शासन राजेश अग्रवाल ने युवाओं को संबोधित किया । कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के मुख्य अतिथि के रूप में सामपन सत्र में इस कार्यक्रम में शिरकत की और युवाओं को बजट क्वेस्ट कार्यक्रम में विकसित भारत मे संकल्प को पूरा करने का आव्हान किया। सांसद बृजमोहन अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होकर युवाओं से चर्चा कर बजट के विषय पर प्रकाश डाला।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम में मानव पूंजी विकास और विकसित कृषि (विकसित खेती) जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर सारगर्भित चर्चाएँ आयोजित की गईं। इन सत्रों ने प्रतिभागियों के बीच सार्थक संवाद, नवीन विचारों के आदान-प्रदान और नीति-उन्मुख सोच को बढ़ावा दिया। 'MY Bharat Budget Quest' ने युवाओं के लिए एक गतिशील मंच के रूप में कार्य किया, जिसके माध्यम से वे बजटीय और विकासात्मक ढाँचों को समझने, उन पर चर्चा करने और उनमें योगदान देने में सक्षम हुए। यह पहल भारत की प्रगति में युवा नागरिकों को एक हितधारक(stakeholder) के रूप में सशक्त बनाने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
इस आयोजन का समापन युवा-नेतृत्व वाले परिवर्तन के एक सशक्त संदेश के साथ हुआ, जिसने एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ किया। ओपी व्यास डायरेक्टर IIIT रायपुर ने भी सभी का स्वागत किया।
रायपुर। “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः…” की भारतीय जीवनदृष्टि को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सुकमा जिला चिकित्सालय में ‘अटल आरोग्य लैब’ का राज्यस्तरीय शुभारंभ किया। यह पहल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई क्रांति का आधार बनेगी, जो विशेष रूप से दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों को आधुनिक एवं सुलभ जांच सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य शासन का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के हर नागरिक तक उत्कृष्ट, किफायती और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जाएं। उन्होंने कहा कि अटल आरोग्य लैब के माध्यम से अब प्रदेश के 1046 स्वास्थ्य संस्थानों - जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक -मुफ्त जांच की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे लाखों नागरिकों को सीधे लाभ मिलेगा। इस अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली के माध्यम से मरीजों को 133 प्रकार की जांचें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। जांच रिपोर्ट एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से सीधे मरीजों तक पहुंचेगी, जिससे उन्हें बार-बार अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं होगी और उपचार प्रक्रिया में तेजी आएगी। यह व्यवस्था न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ भी बनाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश की डायग्नोस्टिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। इससे रक्त जांच सहित विभिन्न रोगों की पहचान शीघ्र और सटीक रूप से संभव होगी, जिससे समय पर उपचार शुरू कर मरीजों के स्वास्थ्य लाभ की दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से बस्तर जैसे दूरस्थ अंचलों में ऐसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता है, ताकि यहां के नागरिकों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। अटल आरोग्य लैब इस दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।
उल्लेखनीय है कि जिला चिकित्सालय सुकमा में पहले से ही ब्लड बैंक, सोनोग्राफी, एक्स-रे, ईसीजी, आपातकालीन सेवाएं, सीजेरियन प्रसव, एनआरसी एवं डायलिसिस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब अटल आरोग्य लैब के जुड़ने से यहां की स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक हो जाएंगी।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, बस्तर सांसद महेश कश्यप, महिला आयोग सदस्य दीपिका सोरी, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी. सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर। नक्सलवाद के प्रभाव से उबरकर नए विश्वास और विकास की राह पर अग्रसर बस्तर क्षेत्र में आज एक महत्वपूर्ण पड़ाव जुड़ गया, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा जिले को 308 करोड़ रुपए से अधिक के 228 विकास कार्यों की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने 159 कार्यों का शिलान्यास और 69 कार्यों का लोकार्पण करते हुए क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति प्रदान की।
मिनी स्टेडियम सुकमा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों से नक्सलवाद के कारण पिछड़े रहे क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में बस्तर में शांति स्थापित हुई है और अब यहां विकास की गंगा बह रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिन गांवों में कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां आज स्कूलों की घंटियां गूंज रही हैं और लोग लोकतंत्र पर भरोसा जताते हुए मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 3 हजार से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं और उन्हें पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से नई जिंदगी की शुरुआत के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
स्वस्थ बस्तर की दिशा में बड़ा कदम
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया और “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को घर-घर तक सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की। इस अभियान के तहत 7 जिलों में 1100 टीमें घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच करेंगी।
कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री श्री साय ने मिनी स्टेडियम में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया और आम नागरिकों एवं हितग्राहियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने मौके पर ही विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता सामग्री और प्रमाण पत्र वितरित कर शासन की संवेदनशीलता का परिचय दिया। स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री ने 7 टीबी मुक्त पंचायतों को प्रमाण पत्र प्रदान किए और जानकारी ली कि जिले में अब तक 28 पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं। उन्होंने 3 टीबी मरीजों से संवाद कर उन्हें फूड बास्केट वितरित किया।
मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए मरीजों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से चश्मा पहनाकर उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना की। साथ ही दवा और आई ड्रॉप भी वितरित किए गए। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए मूर्तोंडा, पेंटा और कांकेरलंका उपस्वास्थ्य केंद्रों को एनक्वास सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। समाज कल्याण विभाग के स्टॉल में मुख्यमंत्री श्री साय ने आईईडी ब्लास्ट में पैर गंवा चुके 5 हितग्राहियों को कृत्रिम पैर प्रदान किए। इसके अलावा 4 व्हीलचेयर और 3 ट्राइसिकल भी वितरित किए गए तथा 6 दिव्यांगजनों को पहचान पत्र देकर उन्हें योजनाओं से जोड़ने की पहल की गई।एनआरएलएम स्टॉल में स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें “लखपति दीदी से करोड़पति दीदी” बनने के लिए प्रेरित किया और सरकार की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
आवास, अधिकार और आजीविका—हर क्षेत्र में सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के स्टॉल में हितग्राहियों से बातचीत कर निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से 15 वनाधिकार पत्र वितरित किए गए, जिससे आदिवासी परिवारों को उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। वन विभाग के स्टॉल में तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों को सहायता प्रदान की गई। सहकारी समिति तोंगपाल को 4.27 लाख रुपए का सांकेतिक चेक दिया गया तथा एक हितग्राही को संग्रहण कार्ड वितरित किया गया।
इसके साथ ही पुनर्वासित स्व-सहायता समूह की महिलाओं को 2 ई-रिक्शा प्रदान कर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया गया और एक हितग्राही को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया।
नियद नेल्लानार 2.0 और 8 बड़ी घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि नियद नेल्लानार योजना के तहत अब तक 500 से अधिक गांवों में 17 विभागों की 45 योजनाओं के माध्यम से विकास कार्य किए गए हैं। इस योजना के अगले चरण ‘नियद नेल्लानार 2.0’ में अब 10 जिलों को शामिल किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए 8 महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं, जिनमें सड़क निर्माण, पुलिया निर्माण, बस स्टैंड, सामुदायिक भवन और मंदिर जीर्णोद्धार जैसे कार्य शामिल हैं।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, सांसद महेश कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
बिलासपुर। नगर निगम बिलासपुर की सामान्य सभा में आज भारी हंगामे के बीच 1301 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक बजट पास किया गया। सभा में महापौर निधि को लेकर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस पार्षदों ने पूछा कि कहां-कहां विकास कार्यों के लिए पैसा जारी हुआ है। इस पर महापौर पूजा विधानी भड़क उठी। उन्होंने कहा कि पार्षदों को निधि के बारे में पूछने का अधिकार नहीं है। इसके बाद सदन में विवाद बढ़ गया।
बिलासपुर नगर निगम की सामान्य सभा में इस बार 1301 करोड़ रुपए से अधिक का बजट पास किया गया। मेयर पूजा विधानी ने बताया कि यह बजट केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्मार्ट सिटी सुविधाएं, महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। साथ ही सभा में 33% महिला आरक्षण से संबंधित प्रस्ताव पारित कर राज्य शासन को भेजने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही पार्षदों को सांसद और विधायक की तर्ज पर आजीवन पेंशन देने, मानदेय बढ़ाने और पार्षद निधि की राशि में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
क्रिकेट स्टेडियम के लिए 12 एकड़ जमीन देने पर सहमति
क्रिकेट स्टेडियम के लिए 12 एकड़ जमीन देने पर भी सहमति बनी है, जो ग्राम मंगला में बनेगा। बता दें कि क्रिकेट संघ बिलासपुर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के जरिए शहर में क्रिकेट स्टेडियम निर्माण के लिए निगम से ग्राम मंगला स्थित 12 एकड़ जमीन देने का आवेदन किया था।
शहर के समग्र विकार पर जोर, 2465 नए आवास का भी प्रावधान
बजट में शहर के समग्र विकास पर जोर देते हुए सड़क, पानी, आवास और सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही पिंक टॉयलेट, पिंक गार्डन और फ्री वाई-फाई जैसी सुविधाओं की भी घोषणा की गई है, जिससे नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। बाजारों को व्यवस्थित करने के लिए स्मार्ट वेंडिंग जोन और मॉडर्न मार्केट विकसित किए जाएंगे। वहीं 2465 नए आवासों के निर्माण का भी प्रावधान रखा गया है। शहर की प्रमुख सड़कों का निर्माण और चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण भी इस बजट का अहम हिस्सा है।
सभापति और नेता प्रतिपक्ष ने क्या कहा ?
अवैध निर्माण पर भड़के सभापति विनोद सोनी ने सदन में अफसरों को चेतावनी देते हुए कहा कि मेरे वार्ड गोलबाजार में अवैध निर्माण चल रहा है। उन्होंने तत्काल तोड़ने के निर्देश दिए। इधर विपक्ष ने बजट को पुराना बजट को ही फिर से सजाकर नया बनाने की बात कही है। नेता प्रतिपक्ष भारत कश्यप ने कहा कि पिछली बार के बजट का काम ही नहीं हुआ है। सत्ता पक्ष की मंशा शहर विकास की नहीं, लूट का सूट की है।
2 करोड़ 30 लाख रुपए के खर्च पर कांग्रेस पार्षदों ने उठाए सवाल
वहीं नगर निगम सामान्य सभा में महापौर निधि को लेकर जमकर हंगामा हुआ। 2 करोड़ 30 लाख रुपए के खर्च पर सवाल उठाया गया। कांग्रेस पार्षदों ने पूछा, कहां-कहां विकास कार्यों के लिए पैसा जारी हुआ है। सदन में जवाबदेही की मांग की गई। सवाल उठते ही मेयर पूजा विधानी ने कहा, पार्षदों को सवाल पूछने का अधिकार नहीं है, जिसके बाद सदन में विवाद बढ़ गया। कांग्रेस पार्षदों ने जोरदार विरोध किया। निधि के खर्च को लेकर तीखी बहस हुई। नगर निगम का यह बजट शहर को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि विपक्ष का मानना है कि पिछली बार की बजट की तरह ही केवल लोक लुभावन बजट बनाया गया है।
रायपुर। प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी.चौधरी ने पुसौर में निर्माणाधीन लाइब्रेरी भवन, पुष्पवाटिका उद्यान, चंदन तालाब सहित अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहानिर्माण स्थल पर जाकर प्रत्यक्ष रूप से कार्यों की स्थिति देखना, बुनियादी ढांचे का विकास कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने नगर पंचायत पुसौर के सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया। उन्होंने अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों को धरातल पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि आमजन को योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
बैठक में उन्होंने अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि सभी के संयुक्त प्रयासों से ही क्षेत्र का समग्र एवं संतुलित विकास संभव है। साथ ही उन्होंने पार्षदों एवं जनप्रतिनिधियों से सकारात्मक सहयोग प्रदान करने तथा विकास कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि नगर पंचायत पुसौर में पुष्पवाटिका उद्यान निर्माण हेतु लगभग 2 करोड़ 92 लाख 40 हजार रुपये, बोरोडीपा चौक से कॉलेज तक बी.टी. रोड एवं नाली निर्माण के लिए 4 करोड़ 8 लाख रुपये, चंदन तालाब के सौंदर्यकरण के लिए 2 करोड़ 10 लाख 40 हजार रुपये तथा लाइब्रेरी भवन निर्माण के लिए लगभग 99.12 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त तेलीतार तालाब के गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य भी प्रगति पर है, जिससे क्षेत्र की सौंदर्य वृद्धि के साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस अवसर पर नगर पंचायत पुसौर के अध्यक्ष मानी मोहित सतपथी, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, अपर कलेक्टर अपूर्व प्रियेश टोप्पो, एसडीएम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं नगर पंचायत पुसौर के जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति थे।
रायपुर। नक्सल आतंक से लंबे समय तक प्रभावित रहे सुकमा में अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित लोगों से आत्मीय संवाद कर उनके अनुभव जाने और उन्हें मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए दृढ़संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा और नया जीवन प्राप्त कर सकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नक्सल पुनर्वास नीति के चलते सुकमा सहित बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है, जिनमें से 361 पुनर्वासितों ने नया जीवन प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी रोजगार और समाज में बराबरी का अवसर प्रदान करना है। पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, कपड़ा सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, जिससे वे डिजिटल और संचार माध्यमों से जुड़कर आधुनिक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सकें। विशेष रूप से 115 महिलाएं प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के आश्रितों को भी राहत प्रदान करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में 20 तथा जिला प्रशासन द्वारा 95 लोगों को शासकीय सेवा में रोजगार के अवसर दिए गए हैं।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम ढोंडरा कोंटा निवासी मौसम संजना, नागारास जगरगुंडा निवासी भरत कुमार हेमला सहित अन्य हितग्राहियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग के अंतर्गत 10 नव नियुक्त शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल, राजमिस्त्री किट, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबियां तथा पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए। इस अवसर पर 25 हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपकर उन्हें सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने नक्सल पुनर्वास की सफलता की प्रेरणादायक कहानियों को दर्शाती ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। साथ ही, पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी प्रतीक है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बस्तर महेश कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर। मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के अंतर्गत भारतीय प्रबंधन संस्थान IIM रायपुर में दो वर्षीय एमबीए इन पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस कार्यक्रम के लिए आवेदन शुरू हो गया है। इस पाठ्यक्रम को सार्वजनिक नीति और शासन के क्षेत्र में भविष्य के सक्षम एवं नैतिक नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
इस कार्यक्रम में चयनित अभ्यर्थियों को आईआईएम रायपुर परिसर में कक्षाएं लेने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ शासन के विभिन्न विभागों में गहन फील्ड एक्सपोजर और व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. गोपाल कुमार और प्रो. शबना पी कर रहे हैं, जो कार्यक्रम निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं
पूर्ण ट्यूशन फीस माफ- छत्तीसगढ़ सरकार सभी चयनित अभ्यर्थियों की पूरी ट्यूशन फीस वहन करेगी।
आकर्षक स्टाइपेंड – हर चयनित छात्र को पूरे दो वर्षों के दौरान प्रति माह 50,000 का मासिक स्टाइपेंड दिया जाएगा।व्यवहारिक फोकस- कक्षा अध्ययन के अलावा फील्डवर्क, सरकारी परियोजनाओं और वास्तविक नीति क्रियान्वयन का अनुभव मिलेगा।
समन्वित दृष्टिकोण- सैद्धांतिक ज्ञान के साथ जमीनी स्तर पर शासन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
आईआईएम रायपुर के निदेशक-प्रभार प्रो. संजीव प्रसार ने कहा कि यह कार्यक्रम पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़कर नीति निर्माण, क्रियान्वयन और सुधार पर केंद्रित है। इससे छात्रों में विश्लेषणात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और सामाजिक प्रभाव पैदा करने की योग्यता विकसित होगी। डीन एक्सटर्नल रिलेशन्स प्रो. सत्यसिबा दास ने बताया कि सरकारी संस्थानों, उद्योग और अन्य संगठनों के साथ मजबूत साझेदारी छात्रों को वास्तविक चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास देगी।
पात्रता मानदंड
अभ्यर्थी छत्तीसगढ़ राज्य का मूल निवासी होना चाहिए और वैध निवास प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। CAT स्कोरकार्ड 2023, 2024 या 2025 में से किसी एक वर्ष का वैध होना चाहिए। किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री के साथ न्यूनतम 60% अंक (आरक्षित वर्ग के लिए 55%) या समकक्ष सीजीपीए सीटों पर छत्तीसगढ़ राज्य की आरक्षण नीति लागू होगी।
आवेदन कैसे करें?
यह फेलोशिप छत्तीसगढ़ शासन की सुशासन को मजबूत करने और युवाओं को लोकसेवा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इच्छुक छत्तीसगढ़ के उम्मीदवार विस्तृत जानकारी और ऑनलाइन आवेदन के लिए आईआईएम रायपुर की आधिकारिक वेबसाइट https://iimraipur.ac.in/mba-ppg/ पर 30 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं।
रायपुर। गर्मी बढ़ने के साथ ही राजधानी रायपुर में जल संकट गहराता जा रहा है। 70 वार्डों में से 35 में पानी की किल्ल्त हाेने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में महापौर मीनल चौबे ने कहा, जल स्रोत सूख रहे हैं। जल स्रोत उतने ही है और जनसंख्या बढ़ रही है। इसके चलते पानी की समस्या हो रही है। फिलहाल टैंकर से पानी की आपूर्ति ही विकल्प है।
महापौर चौबे ने कहा, शहर में जहां-जहां पानी की समस्या है वहां पानी टैंकर भेजा जा रहा है। एक करोड़ 50 लाख का टेंडर अभी टैंकर के लिए किया गया है। पिछले साल एक करोड़ का टेंडर हुआ था। जल आपूर्ति के लिए जल बोर्ड का भी गठन किया गया है।
बरसात का पानी बह जाता है। भूजल रिचार्ज के लिए निगम द्वारा क्या प्लान किया गया है? इस सवाल पर महापौर ने कहा, हमारे दसों जोन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए 8 करोड़ तो कहीं 10 करोड़ जमा था, लेकिन मकानों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लग पाया, जिसे राजसात किया गया। इस राशि से ठेका के माध्यम से घरों में हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाएंगे। बता दें कि पिछले दो सालों से महापौर यही राग अलाप रही है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में नई दिल्ली के विज्ञान भवन से प्रसारित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन को सुना। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह देश की मातृशक्ति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक समावेशी एवं सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक’ नारी की भागीदारी सुनिश्चित करने का यह प्रयास नए भारत की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की सीधी भागीदारी ही विकसित भारत की सशक्त नींव है
उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर होने वाली चर्चा इस ऐतिहासिक पहल को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है। वैदिक काल से लेकर वर्तमान समय तक महिलाओं की भूमिका समाज के निर्माण और विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। हमारी डबल इंजन सरकार की विभिन्न योजनाओं ने इस परंपरा को आधुनिक संदर्भ में सशक्त रूप दिया है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिला है, जिसका सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। साथ ही ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी पहल माताओं-बहनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ बना रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि जब देश में महिला आरक्षण पर ऐतिहासिक चर्चा हो रही है, उसी समय छत्तीसगढ़ ‘महतारी गौरव वर्ष’ मना रहा है। उन्होंने कहा कि ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का सम्मान और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी प्रदेश की पहचान बन चुकी है।
उन्होंने प्रदेश की मातृशक्ति और महिला संगठनों से आह्वान किया कि वे हर मंच पर अपनी आवाज़ बुलंद करें और इस परिवर्तन यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की बढ़ती सहभागिता से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा समाज में सकारात्मक बदलाव की नई दिशा स्थापित होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अंत में कहा कि जब नारी सशक्त होती है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। यह समय देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा में निर्णायक भूमिका देने का है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर। गर्मी की छुट्टियों के दौरान बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने छत्तीसगढ़ के यात्रियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग होते हुए कुल 23 समर स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इन ट्रेनों के माध्यम से यात्रियों को 86 फेरों (लगभग 172 दिनों) तक अतिरिक्त सुविधा मिलेगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को बड़ी सहूलियत होगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस बार 11 जोड़ी से अधिक समर स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की गई है, जो देश के विभिन्न प्रमुख शहरों को जोड़ेंगी। इन ट्रेनों का संचालन अलग-अलग तिथियों और फेरों के अनुसार किया जाएगा, ताकि यात्रियों को भीड़भाड़ से राहत मिल सके।
सबसे प्रमुख ट्रेनों में गाड़ी संख्या 08743/08744 दुर्ग-हरिद्वार-दुर्ग समर स्पेशल शामिल है, जो 19 अप्रैल से 29 जून 2026 तक 11 फेरों के लिए चलाई जाएगी। यह ट्रेन उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। वहीं, गाड़ी संख्या 08865/08866 इतवारी-शालीमार एक्सप्रेस 2 अप्रैल से 26 जून 2026 तक 13 फेरों के लिए चलेगी।
इसी तरह, गाड़ी संख्या 01001/01002 एलटीटी-संतरागाछी-एलटीटी समर स्पेशल 21 अप्रैल से 16 जुलाई 2026 तक 13 फेरों के लिए उपलब्ध रहेगी। हटिया-एलटीटी-हटिया (08609/08610) समर स्पेशल 20 अप्रैल से 17 जून तक 9 फेरों के लिए चलाई जाएगी। दक्षिण भारत की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए तिरुपति-रक्सौल-तिरुपति (07051/07052) समर स्पेशल 13 अप्रैल से 28 मई तक 7 फेरों के लिए संचालित की जा रही है।
पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए पटना-चर्लपल्ली-पटना (03253/03254/03255) समर स्पेशल 8 अप्रैल से 27 मई तक 15 फेरों के लिए चलेगी। इसके अलावा गोंदिया-रक्सौल-गोंदिया (08867/08868) ट्रेन 25 अप्रैल से 28 जून तक 10 फेरों के लिए उपलब्ध रहेगी।
कुछ ट्रेनों को सीमित फेरों के लिए भी चलाया जा रहा है, जैसे एलटीटी-हावड़ा-एलटीटी (01145/01146) 14 और 16 अप्रैल को एक-एक फेरे के लिए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी-मालदा टाउन (08871/08872) 19 से 27 अप्रैल तक 3 फेरों के लिए चलेगी। पुणे-संतरागाछी-पुणे (01429/01430) 15 से 24 अप्रैल तक 2 फेरों के लिए तथा एलटीटी-संतरागाछी (01127/01128) 24 अप्रैल से 3 मई तक 2 फेरों के लिए संचालित की जा रही है।
रेलवे का कहना है कि इन समर स्पेशल ट्रेनों का उद्देश्य यात्रियों को कंफर्म टिकट उपलब्ध कराना और नियमित ट्रेनों पर दबाव कम करना है। खासतौर पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख स्टेशनों—रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग—से यात्रा करने वाले यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य योग्य ग्रामीण और शहरी गरीबों को पक्का मकान प्रदान करना है। वित्तीय सहायता (सब्सिडी) सीधे बैंक खातों में दी जाती है। यह योजना सभी के लिए घर सुनिश्चित करती है। शासन इस जनकल्याणकारी योजना समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचकर उनके जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं तथा आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
राजकुमार यादव ने बताया कि पहले वे अपने परिवार के साथ एक छोटे से कच्चे मकान में अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करते थे। बारिश के दिनों में छप्पर से पानी टपकता था, जिससे रहने और सोने में काफी दिक्कत होती थी। कच्चे घर में चूहों का भी प्रकोप था। मजदूरी कर परिवार चलाने वाले राजकुमार अक्सर दूसरों के पक्के घरों की पुताई करते समय सोचते थे कि उनका खुद का घर कब बनेगा।
परिवार के भरण-पोषण के लिए वे पास की एक कंपनी में लगभग 5000 रुपये मासिक मजदूरी कर जीवनयापन करते थे। इसी बीच प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की सूची में नाम आने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। योजना के तहत पंजीयन के बाद स्वीकृत राशि प्राप्त हुई और तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने अपने कच्चे मकान को तोड़कर नए पक्के आवास का निर्माण शुरू किया।
करीब 6 माह में ही उनका पक्का घर बनकर तैयार हो गया। अब राजकुमार अपने परिवार के साथ नए घर में सुरक्षित और सुखद जीवन जी रहे हैं। वे बताते हैं कि अब उन्हें चैन की नींद आती है और बारिश का डर भी नहीं सताता।
योजना के अभिसरण से उन्हें मनरेगा के तहत 90 दिनों का रोजगार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस चूल्हा तथा राशन कार्ड के माध्यम से खाद्यान्न का लाभ भी मिल रहा है।
राजकुमार यादव एवं उनका परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि शासन की इस पहल ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। आज उनका परिवार खुशी-खुशी सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर रहा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी जनगणना को लेकर गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ और छत्तीसगढ़ जनगणना कार्य निदेशक कार्तिकेय गोयल ने पत्रकार वार्ता कर विस्तृत जानकारी दी। मनोज कुमार पिंगुआ ने बताया कि राज्य में जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का होगा, जो 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना के रूप में आयोजित किया जाएगा।
बता दें कि इस बार देश में पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जाएगी। नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन जानकारी भरने का विकल्प भी मिलेगा। इसके लिए 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिसके बाद प्रत्येक व्यक्ति को SE ID जनरेट की जाएगी। इसके बाद प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे।
जनगणना में सर्वे के दौरान पूछे जाएंगे ये 33 सवाल
गौरतलब है कि जनगणना के पहले चरण के दौरान घर-घर सर्वे कर लगभग 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें मकान की स्थिति, सुविधाएं और परिवार से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप में संपन्न की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि जनगणना कार्य जनगणना अधिनियम 1948 के तहत किया जाएगा और सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी। किसी भी कानूनी या जांच प्रक्रिया में इन आंकड़ों का उपयोग नहीं किया जाएगा।
मकान से जुड़े सवाल
भवन नंबर
जनगणना मकान नंबर
फर्श किस चीज का बना है
दीवार किस चीज की बनी है
छत किस चीज की बनी है
मकान का उपयोग (रहने, दुकान आदि)
मकान की हालत कैसी है
परिवार से जुड़े सवाल
घर का नंबर (परिवार के लिए)
कुल कितने लोग रहते हैं
परिवार के मुखिया का नाम
मुखिया का लिंग (पुरुष/महिला/थर्ड जेंडर)
मुखिया किस वर्ग से है (SC/ST/अन्य)
मकान अपना है या किराए का
परिवार के पास रहने के लिए कमरों की संख्या
कितने शादीशुदा जोड़े हैं
सुविधा से जुड़े सवाल
पीने का पानी कहां से आता है
पानी की सुविधा घर में है या बाहर
बिजली/रोशनी का मुख्य साधन
शौचालय है या नहीं
शौचालय का प्रकार
गंदे पानी की निकासी कैसे होती है
नहाने की जगह है या नहीं
रसोई है या नहीं, LPG/PNG है या नहीं
खाना पकाने का मुख्य ईंधन
डिजिटल और सामान से जुड़े सवाल
रेडियो/ट्रांजिस्टर है या नहीं
टीवी है या नहीं
इंटरनेट सुविधा है या नहीं
लैपटॉप/कंप्यूटर है या नहीं
मोबाइल/फोन है या नहीं
वाहन और अन्य जानकारी
साइकिल/स्कूटर/बाइक है या नहीं
कार/जीप/वैन है या नहीं
परिवार कौन सा अनाज ज्यादा खाता है
मोबाइल नंबर (सिर्फ जनगणना के लिए)
गलत जानकारी देने पर हो सकती है कार्रवाई, 1,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
इन सभी सवालों की सही जानकारी देना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति गलत सूचना देता है या जनगणना कार्य में सहयोग नहीं करता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत ऐसे मामलों में 1,000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराए।
प्रदेशभर में 62,500 अधिकारी-कर्मचारियों की होगी तैनाती
प्रदेश में जनगणना के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की गई है। लगभग 62,500 अधिकारी-कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी, जिनमें 47 जिला जनगणना अधिकारी, 250 जिला स्तरीय अधिकारी, 472 चार्ज अधिकारी, 1,160 मास्टर ट्रेनर, 51,300 प्रगणक और 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं।
राज्य के 33 जिलों, 195 नगरीय निकायों और 252 तहसीलों के साथ-साथ लगभग 19,978 गांवों में सर्वे कार्य किया जाएगा। इसके लिए करीब 49,000 मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। जनगणना से जुड़े सवालों के लिए 16 अप्रैल 2026 से टोल फ्री नंबर 1855 भी जारी किया जाएगा।
प्रवासियों की गणना को लेकर स्थिति स्पष्ट, मूल निवास के आधार पर होगी जनगणना
यदि कोई व्यक्ति मध्य प्रदेश का निवासी है और वह वर्तमान में छत्तीसगढ़ में नौकरी कर रहा है, तो उसकी जनगणना उसके मूल निवास अर्थात मध्य प्रदेश में ही की जाएगी। इसके लिए उसे इधर-उधर भटकने या किसी अन्य स्थान पर गणना करवाने की आवश्यकता नहीं होगी। जनगणना के दौरान नियमों के अनुसार व्यक्ति की गणना उसके स्थायी/मूल निवास के आधार पर सुनिश्चित की जाएगी।
दूसरे चरण में की जाएगी जातिगत जनगणना
जनगणना कार्य निदेशक कार्तिकेय गोयल ने बताया कि यह आजादी के बाद की आठवीं जनगणना होगी। उन्होंने कहा कि यह पहली बार होगा जब आम नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि इस बार जातिगत जनगणना भी शामिल होगी, जो दूसरे चरण में की जाएगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में स्थित नगर पालिका परिषद भाटापारा में 13 वर्ष पूर्व हुई एक नियुक्ति को लेकर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने वर्ष 2013 में जारी राजस्व उप निरीक्षक (अनारक्षित) पद की नियुक्ति को निरस्त करते हुए पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया है कि इस पद के लिए पुनः निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाए।
मामले के अनुसार, नगर पालिका परिषद भाटापारा द्वारा 16 नवंबर 2012 को राजस्व उप निरीक्षक पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इस पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक के साथ पीजीडीसीए निर्धारित की गई थी। भाटापारा निवासी देवेंद्र कुमार साहू ने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन किया था।
हालांकि, जब पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई, तो आश्चर्यजनक रूप से देवेंद्र कुमार साहू का नाम किसी भी सूची में शामिल नहीं था। इसके बावजूद 23 मार्च 2013 को नगर पालिका परिषद ने सतीश सिंह चौहान को उक्त पद पर नियुक्ति दे दी। इस प्रक्रिया से असंतुष्ट होकर देवेंद्र कुमार साहू ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ईशान सलूजा ने पक्ष रखते हुए बताया कि सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि देवेंद्र साहू का आवेदन विधिवत रूप से प्राप्त किया गया था, फिर भी उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि चयनित अभ्यर्थी सतीश सिंह चौहान के पिता उस समय नगर पालिका परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के पद पर पदस्थ थे। इतना ही नहीं, चौहान के अनुभव प्रमाण पत्र को भी उनके पिता द्वारा ही जारी किया गया था, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक था।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि किसी पात्र अभ्यर्थी को बिना कारण सूची से बाहर करना न केवल गंभीर त्रुटि है, बल्कि यह पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को प्रभावित करता है। साथ ही अदालत ने यह भी माना कि चयनित अभ्यर्थी के पक्ष में पारिवारिक प्रभाव और हितों का टकराव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिससे प्रक्रिया संदिग्ध बनती है।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने 23 मार्च 2013 को जारी नियुक्ति आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही नगर पालिका परिषद भाटापारा को निर्देशित किया गया है कि वह नई चयन प्रक्रिया आयोजित करे और याचिकाकर्ता देवेंद्र कुमार साहू की उम्मीदवारी पर विधिवत विचार करते हुए नियमों के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करे।
गरियाबंद। छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर स्थित सोनाबेड़ा अभ्यारण्य के ढेकुनपानी जंगल में सीआरपीएफ जवानों को बड़ी सफलता मिली है। सर्चिंग अभियान के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है।
जानकारी के अनुसार, मौके से 70 नग जिलेटिन, 3 स्टील कंटेनर और 4 बंडल इलेक्ट्रॉनिक वायर जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई ओडिशा के कोमना पुलिस कैंप की सीआरपीएफ टीम द्वारा की गई है।
घटना के बाद ओडिशा पुलिस ने पूरे जंगल क्षेत्र में सर्चिंग अभियान और तेज कर दिया है, ताकि किसी भी संभावित नक्सली गतिविधि या छिपे हुए नेटवर्क का पता लगाया जा सके।