प्रदेश
MMS वायरल केस : विधायक देवेंद्र यादव ने थाने में दिया फोटो और वीडियो का सैंपल
दुर्ग। विधानसभा चुनाव के दौरान भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव के एक बहुचर्चित एमएमएस वायरल मामले में एक बार फिर जांच तेज हो चुकी है। पुलिस की नोटिस के बाद आज विधायक देवेन्द्र यादव अपने फोटो और वीडियो का सैंपल देने भिलाई नगर कोतवाली थाना पहुंचे। ढाई साल पुराने इस मामले को लेकर यादव काफी आक्रामक नजर आए।
विधायक यादव ने कहा कि इस मामले में वे स्वयं प्रार्थी हैं, लेकिन पुलिस शासन और प्रशासन के दबाव में नोटिस नोटिस खेल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें 6 अप्रैल को नोटिस भेजकर उसी दिन 11 बजे थाने में उपस्थित होने को कहा, लेकिन वह नोटिस ही डाक के जरिए दोपहर 1 बजे पहुंचा।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान वायरल किए गए इस एमएमएस से उनकी सामाजिक छवि को धुमिल करने की कोशिश की गई। आज ढाई साल बीतने के बाद भी पुलिस इसमें जांच नहीं कर पाई है। उन्होंने विधानसभा में भी मुद्दा उठाया था, क्योंकि जब भाजपा के एक मंत्री के कथित वीडियो की जांच सीबीआई से हो सकती है तो उनके मामले में सीबीआई से जांच क्यों नहीं कराई जा सकती। उनके साथ भी न्याय होना चाहिए।
पांडुलिपियाँ: हमारी पहचान, हमारा गर्व - संरक्षण के लिए आगे आएँ नागरिक : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारी पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में एक बड़ा योगदान सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को सहेजते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएँ।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा "ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान" एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित एवं डिजिटल माध्यम से भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य की भी नियमित सहभागिता हो रही है।
छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन और नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो गई है, शेष 07 जिलों में गठन / नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। जिलों में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर पाण्डुलिपि संग्रह कर्त्ता व्यक्तियों / संस्थाओं को चिन्हित किया जा रहा है, तथा ग्राम/क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। प्रशिक्षकों को नोडल विभाग (संस्कृति विभाग) द्वारा ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ज्ञानभारतम भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 06 जिलों में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य आरम्भ हो गया है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ज्ञानभारतम एप के माध्यम से किया जा चुका है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर रायपुर में 15 अप्रैल को भाजपा का भव्य आयोजन
रायपुर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल को रेखांकित करते हुए भाजपा नेत्री सरोज पांडेय ने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर अब तक राजनीति हुई है. महिलाओं को वोटर के तौर पर देखा जाता था. अधिनियम पारित होने के साथ 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ महिलाएं नए युग में प्रवेश करेंगी.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भाजपा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सक्रिय नजर आ रही है. अधिनियम को लेकर भाजपा आगामी 15 अप्रैल को राजधानी रायपुर में भव्य आयोजन करने जा रही है. इस संबंध में भाजपा नेत्रियों ने प्रेस कांफ्रेंस के जरिए मीडिया को जानकारी दी.
महिला एवं महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर राजधानी रायपुर के दीनदयाल ऑडिटोरियम में 15 अप्रैल को भव्य आयोजन होगा. आयोजन में सामाजिक संगठन के सदस्य, स्थानीय महिलाएं शामिल होंगी. महिला इसका नेतृत्व करेगी.
उन्होंने बताया कि लोकसभा स्तर पर नारी शक्ति पदयात्रा का आयोजन होगा. बाइक-स्कूटी रैली का कार्यक्रम किया जाएगा. सामाजिक एवं महिला सेलिब्रिटी की भागीदारी होगी. युवा एवं महिला मोर्चा के सदस्य शामिल होंगे. इसके अलावा अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. 2023 नारी शक्ति के तहत इन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा.
भाजपा नेत्री सरोज पांडेय ने कहा कि जिस क्षेत्र में महिलाओं ने काम किया, वहां बेहतर काम किया है. अधिनियम के अस्तित्व में आने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं संसद में बैठेंगी. जो परिणाम है वो भारत के राजनीति को परिवर्तित करेगा. उस कार्यक्रम को संपादित करने जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के काफिले में बदलाव, फॉर्च्यूनर की जगह शामिल हुईं नई स्कॉर्पियो
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का काफिला आज जब प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे तो बहुत से पदाधिकारी और कार्यकर्ता आश्चर्य में पड़ गए. दरअसल, सीएम साय के काफिले में टोयोटा फार्च्यूनर की जगह नई नवेली स्कार्पियों नजर आ रही थी. करीबन ढाई साल के कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री को नई गाड़ी में देख लोग उत्सुकतावश गाड़ी के संबंध में पूछताछ भी करने लगे.
दरअसल, मुख्यमंत्री साय के अब तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में खरीदी गई फार्च्यूनर का ही इस्तेमाल कर रहे थे. इसके स्थान पर अब स्कार्पियो का इस्तेमाल करेंगे. ऐसी एक नहीं बल्कि सीएम के काफिले में छह नई स्कार्पियो को शामिल किया गया है. सीएम साय बुलेटप्रूफ स्कार्पियों में सवारी करेंगे.
इस बदलाव पर भाजपा नेताओं और मीडिया की उत्सुकता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि गाड़ियां पुरानी हो गई थी. उसे चेंज करने का प्रयास कर रहे थे. कभी-कभी भी बंद हो जाती थी, इसलिए आज बदलाव किए हैं.
NHM कर्मचारियों की फिर हड़ताल की चेतावनी, 12 अप्रैल को रायपुर में अहम बैठक
रायपुर। मांगें पूरी नहीं होने से आक्रोशित एनएचएम कर्मचारी एक बार फिर हड़ताल पर जा सकते हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी संघ की प्रदेश स्तरीय बैठक 12 अप्रैल को आमापारा रायपुर में आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं संघ के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में कर्मचारियों की लंबित मांगों की वर्तमान स्थिति, भविष्य की दिशा, गति एवं आगामी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
एनएचएम कर्मचारियों ने नियमितीकरण, ग्रेड पे, अनुकम्पा नियुक्ति, स्थानांतरण नीति, मेडिकल अवकाश सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर एक माह से अधिक समय तक हड़ताल की थी। सरकार से आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन स्थगित किया गया था। इस दौरान मांगों के निराकरण के लिए विभाग स्तर पर समिति का भी गठन किया गया था, नतीजा आज भी शून्य है, जिससे कर्मचारियों में आक्रोश है।
ज्ञात हो कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी स्वास्थ्य संस्थानों जैसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर, उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों सहित पैरामेडिकल स्टाफ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश स्तरीय इस बैठक में सभी जिलों से जिलाध्यक्ष एवं कर्मचारी प्रतिनिधि शामिल होंगे और लंबित मांगों को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
संघ के लिए यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही कर्मचारियों ने यह भी उल्लेख किया है कि भाजपा के घोषणा पत्र में मोदी की गारंटी के अंतर्गत संविदा कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का उल्लेख किया गया है, जिस पर भी बैठक में चर्चा की जाएगी।
वार्ड अध्यक्ष सूची रद्द पर अरुण साव का हमला, बोले—आपसी लड़ाई में खत्म हो रही कांग्रेस
रायपुर। रायपुर कांग्रेस वार्ड अध्यक्षों की सूची को निरस्त किए जाने पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस कांग्रेस-कांग्रेस खेल रही है. आपस में ही लड़कर कांग्रेस समाप्त हो रही है. जनता भी चाहती है, कांग्रेस न रहे तो ही अच्छा है.
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मीडिया से चर्चा में महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस के बयान पर कहा कि हर एक मामले में कांग्रेस का घिसापिटा मामला है. देश में कहीं न कहीं चुनाव है. 75 साल महिलाओं को उनके वाजिब अधिकार से वंचित रखा. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनका अधिकार मिलने जा रहा है. देश की जनता सशक्त हो, ये कांग्रेस कभी अच्छा चाहती नहीं है. देश में चुनाव होते रहता हैं. जनता को जवाब देना पड़ेगा.
वहीं पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर अरुण साव ने कहा कि पश्चिम बंगाल की आम जनता परेशान है. वहां कानून का राज नहीं है. भाजपा ने घोषणा पत्र जारी किया है. आम जनता के बेहतरी और खुशहाली के लिए घोषणा पत्र जारी किया है. पश्चिम बंगाल में परिवर्तन होने जा रहा है. बीजेपी का कमल खिलने जा रहा है.
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार पर जोर : स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को दिए अहम निर्देश
रायपुर। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति, गुणवत्ता और प्रभावशीलता का समग्र आकलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में शुक्रवार को सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों की एक दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक स्वास्थ्य मंत्री के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं सेवा प्रदायगी की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए जोखिम की समय पर पहचान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चिन्हित मामलों को आवश्यकता अनुसार उच्च स्तरीय शासकीय अथवा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में समय रहते रेफर किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि रेफरल प्रक्रिया के दौरान संबंधित चिकित्सक एवं अस्पताल प्रबंधन प्रसूता एवं शिशु के डिस्चार्ज तक सतत संपर्क में रहें तथा सभी आवश्यक उपचार एवं सुविधाएं सुनिश्चित करें। साथ ही, मौसमी बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए अग्रिम तैयारियों को सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए।

समीक्षा के दौरान सभी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया। चिकित्सकों को प्रभावी औषधियां लिखने तथा आवश्यक जांच सुविधाएं संस्थागत स्तर पर ही उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े।
बैठक का संचालन करते हुए सचिव अमित कटारिया ने मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रत्येक प्रकरण की अनिवार्य रिपोर्टिंग एवं पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डेटा विश्लेषण के माध्यम से मृत्यु के कारणों की पहचान कर भविष्य में प्रभावी सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी विशेष बल दिया गया, ताकि हितग्राहियों तक समयबद्ध एवं सरल जानकारी पहुंच सके और योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित हो।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के संचालक संजीव कुमार झा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक रणबीर शर्मा, महामारी नियंत्रण के संचालक डॉ. एस.के. पामभोई सहित सभी संभागों के संयुक्त संचालक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, कुष्ठ एवं टीबी उन्मूलन सहित प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की गई।
समापन संबोधन में सचिव कटारिया ने कहा कि प्रदेश को टीबी एवं मलेरिया मुक्त बनाना, मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार लाना तथा प्रत्येक नागरिक को सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से सेवा भावना, प्रतिबद्धता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।
मंत्री ओपी चौधरी ने असम चुनाव में भाजपा की जीता का किया बड़ा दावा, कहा- NDA की लहर नहीं, सुनामी है…
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने असम चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि असम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली NDA की लहर नहीं, सुनामी है, जिसका असर 4 तारीख को साफ तौर पर देखने को मिलेगा।
मंत्री चौधरी ने बताया कि 126 सीटों वाले असम में भाजपा और NDA 103 सीटों पर फोकस करके चुनाव लड़ रही है और उन्हें उम्मीद है कि गठबंधन 90 से अधिक सीटें जीतेगा। उन्होंने बताया कि मैं प्रचार के अलावा 10 सीटों में प्लानिंग और मैनेजमेंट के प्रभार में था। 10 सीटों पर उनकी प्रवासी प्रभारी की भूमिका थी।
ओपी चौधरी ने 10 सीटों में 9 सीटों के नाम बताते हुए जीत का दावा किया है। उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 वर्षों में नॉर्थ-ईस्ट के लिए अभूतपूर्व कार्य किये है। इसी तरह असम में पहले सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में और अब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों के कारण असम की जनता प्रचंड बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बनाएगी।
कांग्रेस में वार्ड अध्यक्षों की सूची को लेकर विवाद, श्रीकुमार मेनन ने कहा-
रायपुर। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सभी जिला अध्यक्षों को बूथ स्तर से लेकर जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी 15 अप्रैल तक गठित करने की समय सीमा दी है. इसके बाद रायपुर शहर कांग्रेस ने वार्ड अध्यक्षों की सूची घोषित की, लेकिन इसे महज कुछ घंटों में ही पीसीसी द्वारा निरस्त कर दिया गया. पीसीसी ने इस सूची को अवैधानिक माना है. इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस में सूची को लेकर विवाद की स्थिति नजर आ रही है. हालांकि जिला अध्यक्ष श्री कुमार मेनन का कहना किया टकराव जैसा कुछ नहीं है, वह दीपक बैज और पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे.
दरअसल, दो दिन पहले ही समीक्षा के दौरान अब तक कार्यकारिणी समेत वार्ड अध्यक्ष नहीं बनाए जाने को लेकर नाराजगी सामने आई थी. शुक्रवार को शहर कांग्रेस ने रायपुर के 66 वार्डो में वार्ड अध्यक्षों की सूची जारी की थी, लेकिन पीसीसी ने इसे निरस्त कर दिया. पीसीसी ने दो टूक कह दिया कि वार्ड अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्ष की सूची जारी करने से पहले अनुमोदन नहीं लिया गया.
कोई टकराव नहीं है : श्रीकुमार मेनन
मामले में रायपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने कहा कि इस विषय पर प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा की जाएगी. उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर किसी प्रकार का कोई टकराव नहीं है और सभी मुद्दों को आपसी बातचीत से सुलझा लिया जाएगा.
आगामी मई -जून माह में संभावित स्थानीय निकायो के आम/उप चुनाव के दृष्टिगत मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई जून-2026 की तैयारियों को गति प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में आज निर्वाचक नामावली प्रेक्षकों की ब्रीफिंग आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने की।राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य त्रुटिरहित, पारदर्शी एवं समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटना नहीं चाहिए तथा सभी दावा-आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में उनका निराकरण किया जाए। उन्होंने पुनरीक्षण कार्य की सघन निगरानी और प्रभावी सुपरविजन पर विशेष बल दिया।
बैठक में आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए 01 अप्रैल 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की गई है। इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले तथा भारत निर्वाचन आयोग की विधानसभा मतदाता सूची में शामिल नागरिक ही स्थानीय चुनाव में मतदाता बनने के पात्र होंगे।
निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन 13 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। इसके पश्चात 20 अप्रैल 2026 तक दावा-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी तथा 27 अप्रैल 2026 तक उनका निराकरण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 05 मई 2026 को किया जाएगा। आयोग द्वारा बताया गया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन एवं विलोपन के लिए निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे।
बैठक में रिक्त पदों की जानकारी भी साझा की गई। नगरीय निकायों में अध्यक्ष के 4पद एवं 60 पार्षद के पदों पर आम निर्वाचन तथा अध्यक्ष के 4 पद एवं 17 पार्षद पदों पर उप निर्वाचन प्रस्तावित है। वहीं, त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के अंतर्गत जनपद पंचायत सदस्य के 10 पद, सरपंच के 82 पद एवं पंचों के 1110 पद रिक्त हैं, जिन पर निर्वाचन संपन्न कराया जाएगा।
इस अवसर पर आयोग की सचिव शिखा राजपूत तिवारी ने भी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ करें तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करना सुनिश्चित करें।
श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री, प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। उन्होंने व्यास पीठ पर विराजमान हिमांशु कृष्ण भारद्वाज द्वारा कही जा रही श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रीमद्भागवत का मूल संदेश यही है कि कर्म ही सच्ची पूजा है। उन्होंने कहा कि हमें सच्चाई और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहकर मानव जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीराम मंदिर में भगवान के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीमद्भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की बाललीला के अंतर्गत माखनचोरी के प्रसंग का भक्तिभाव के साथ श्रवण किया। उल्लेखनीय है कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन श्री राम मंदिर परिसर में 6 अप्रैल से 12 अप्रैल तक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कथा के समापन अवसर पर भगवान बांके बिहारीलाल की आरती-पूजन में भी शामिल हुए।
मानव जीवन दुर्लभ, सेवा से ही सार्थकता : मुख्यमंत्री
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि हमें दूसरों के लिए जीते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्री राम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। प्रभु श्री राम ने अपने वनवास का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में बिताया। उन्होंने कहा कि लगभग पांच हजार वर्ग किलोमीटर में फैला अबूझमाड़ का जंगल ही दंडकारण्य क्षेत्र है और शिवरीनारायण माता शबरी की पावन भूमि है। गुरु घासीदास जैसे महान संतों की जन्मभूमि होने के कारण छत्तीसगढ़ एक धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध प्रदेश है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ईश्वर के आशीर्वाद से आज छत्तीसगढ़ नक्सलमुक्त हो रहा है और निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
रामलला दर्शन योजना से हजारों श्रद्धालुओं को लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित प्रभु श्री रामलला दर्शन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम के दर्शन कराए जा रहे हैं। अब तक लगभग 42 हजार भक्त रामलला के दर्शन कर चुके हैं तथा 5 हजार से अधिक बुजुर्गजन देश के विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन कर चुके हैं।
धार्मिक संरक्षण और गौसेवा के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू किया गया है। इस कानून के अंतर्गत देश के अन्य राज्यों की तुलना में कठोर प्रावधान किए गए हैं, जिससे निश्चित रूप से अवैध धर्मांतरण पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुरभि गौधाम योजना लागू की गई है, जिसके तहत गौधामों में गौमाता के लिए चारा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक पुरंदर मिश्रा, हिमांशु द्विवेदी, सुनील रामदास अग्रवाल सहित श्रीमद्भागवत कथा के आयोजक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
प्रकृति में जनजातीयों की अटूट आस्था, देवी-देवताओं के वास से जल जंगल का हो रहा संरक्षण व संवर्धन : मंत्री रामविचार नेताम
रायपुर। आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि देश के लगभग सभी राज्यों में जनजातीय समुदाय के लोग निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 10 करोड़ से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीयों का जल, जंगल, जमीन, नदी-नालों और पहाड़ों में अटूट आस्था है। जनजातीय समुदाय पेड़ पौधों, नदी-नालों में देवी-देवताओं का वास मानते हैं और इन्ही संस्कृति और परंपराओं के कारण वनवासी समुदाय प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन में पहले पायदान पर है।

मंत्री श्री नेताम ने आज नवा रायपुर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राज्य-स्तरीय संवाद सम्मेलन ’छत्तीसगढ़ कॉमन्स क्विनिंग’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गहन मंथन हुआ है। इस मंथन में जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उसकी उपयोगिता नीति निर्माण और जनहित में कैसी होगी इसके लिए हमारी सरकार तत्परता के साथ काम करेगी।
मंत्री श्री नेताम कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समुदायों के विभिन्न समस्याओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। इस टास्क फोर्स की संवेदनशीलता और महत्व को देखते हुए इसकी कमान स्वयं मुख्यमंत्री संभालेंगे, जो इसके अध्यक्ष होंगे। नीतिगत निर्णयों के धरातल पर प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष कार्यान्वयन समिति भी बनाई जाएगी, जो बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी ।
श्री नेताम ने कहा कि पेसा (पंचायत उपबंध अधिनियम) और एफआरए (वनाधिकार अधिनियम) के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, विशेष रूप से सीमाओं के निर्धारण (डिमार्केशन ऑफ बॉउंड्रिस) जैसी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की बात कही। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उत्तरदायित्व का भाव जागृत करते हुए कहा, “हम केवल इन साझा संसाधनों के उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि इनके संरक्षक भी हैं, और हमारा उपभोग केवल अपनी वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित होना चाहिए”। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में जनजातीय कल्याण से जुड़ी नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करना और समुदायों को उनके अधिकार दिलाना है ।
आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि यह टास्क फोर्स विशेष रूप से पेसा और वनाधिकार अधिनियम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी विरासत में जनजातीय बोली, भाषा, समुदायिक नेतृत्व समृद्ध है। जल, जंगल, जमीन के संरक्षण व संवर्धन में इन जनजातीयों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति उनके ज्ञान, उनका उद्देश्य, जल जंगल से जुड़े हुए हैं। उनका रिश्ता प्रकृति से है। वे प्रकृति को मां के रूप में, देवता के रूप में पूजते हैं। उनके दैनिक क्रियाकलापों से लेकर मृत्यु तक के उत्सव प्रकृति के संरक्षण में सहायक सिद्ध होती है।
प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि इन दो दिनों तक चले अधिवेशन में छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के 300 से अधिक प्रतिभागियों, नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और ग्राम प्रमुखों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र राज्य की 70 लाख एकड़ ’कॉमन्स’ भूमि (जंगल, चारागाह और जल निकाय) रही, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी की जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना, धरतीआबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, नियद नेल्ला नार जैसे विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों एवं जनजातीय समुदाय के सम्पूर्ण विकास के साथ ही प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में काम कर रहे हैं। आगे भी सामुदायिक सहयोग से बेहतर दिशा में काम किया जाएगा।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी. श्रीनिवास राव ने जोर दिया कि सामुदायिक सहयोग के बिना विशाल वनों और जैव विविधता की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की वन नीतियां प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि विनियामक हैं।
मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने कहा कि जल संरक्षण जनजातीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने मनरेगा के माध्यम से वंचित समुदायों को जल प्रबंधन में जोड़ने पर बल दिया। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने रेखांकित किया कि जल संरक्षण कोई ’रॉकेट साइंस’ नहीं है, बल्कि यह सदियों के अनुभव से उपजा सामुदायिक ज्ञान है।
संवाद सम्मेलन में यह बात उभर कर आई कि कॉमन्स केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आधार हैं। इस अवसर पर सोनमणि बोरा ने जनजातीय लोक गीतों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के दस्तावेजीकरण और कॉपीराइट संरक्षण के लिए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना साझा की। सम्मेलन में नेल्सन मंडेला पुरस्कार विजेता शेर सिंह आंचला, पद्मश्री पांडी राम मंडावी, पद्मश्री जगेेश्वर यादव और गौर मारिया कलाकार लक्ष्मी सोरी, इंदु नेताम ने भी अपने अनुभव साझा किए और संसाधनों के संरक्षण की अपील की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अपर संचालक संजय गौड़, टीआरटीआई की संयुक्त संचालक गायत्री नेताम की विशेष योगदान रही। यह कार्यक्रम आदिम जाति विकास विभाग, टीआरटीआई और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स पहल के तहत संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें यूएनडीपीए आईआईटी-भिलाई, बीआरएलएफ, एक्सिस बैंक फाउंडेशन और अन्य प्रमुख संस्थान सहयोगी रहे।
दक्षिण बस्तर की आखिरी मजबूत कड़ी टूटी, 42 नक्सलियों ने डाले हथियार
बस्तर। छत्तीसगढ़ से लगे राज्य तेलंगाना से आई एक बड़ी खबर ने दक्षिण बस्तर में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। नक्सलियों की बटालियन के अंतिम कमांडर सोड़ी केशा ने अपने 42 साथियों के साथ हैदराबाद में पुलिस के सामने समर्पण कर दिया है। इस दौरान उन्होंने पुलिस को भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी सौंपे हैं।
बताया जा रहा है कि सोड़ी केशा लंबे समय से दक्षिण बस्तर में सक्रिय नक्सलियों की आखिरी मजबूत कड़ी था, जिसने कर्रेगुट्टा की दुर्गम पहाड़ियों को अपना ठिकाना बना रखा था। हिड़मा के एनकाउंटर और बारसे देवा के सरेंडर के बाद संगठन की कमान पूरी तरह सोड़ी केशा के हाथों में आ गई थी, लेकिन लगातार दबाव और सुरक्षा बलों के ऑपरेशन के चलते अब उसने भी हथियार डाल दिए। इस बड़े समर्पण के साथ ही दक्षिण बस्तर में सक्रिय नक्सलियों की आखिरी संगठित टुकड़ी भी खत्म मानी जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक 42 माओवादियों के सरेंडर के बाद इलाके में नक्सल संगठन अब लगभग पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। लगातार ऑपरेशन, रणनीतिक दबाव और सरेंडर पॉलिसी के असर से अब बस्तर में नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है।

कैडर के हिसाब से सरेंडर करने वाले नक्सली
- DVCM (डिवीजनल कमेटी मेंबर)
- ACM (एरिया कमेटी मेंबर)
- PM (पार्टी मेंबर)
- अन्य निचले स्तर के कैडर

आत्मसमर्पण के साथ डाले हथियार और गोला-बारूद
सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी सौंपा, जिनमें शामिल हैं—
AK-47 राइफल – 5
SLR और INSAS राइफल – कई
303 राइफल, 8mm और 9mm पिस्टल
38 रिवॉल्वर
देशी हथियार और शॉटगन
कुल हथियार – 36
कुल गोलियां – 1007
ग्रेनेड – 2
इसके अलावा नक्सलियों ने करीब 800 ग्राम सोना भी सुरक्षा बलों को सौंपा है।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर घोषित इनाम की राशि
सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों पर सरकार ने अलग-अलग कैडर के हिसाब से इनाम घोषित कर रखा था।
राज्य समिति सदस्य – ₹20 लाख
डीवीसीएम – ₹8 लाख
एसीएम – ₹5 लाख
क्षेत्रीय समिति सदस्य – ₹4 लाख
पार्टी सदस्य – ₹1 लाख
इन सभी को मिलाकर कुल इनामी राशि करीब ₹1 करोड़ 93 लाख थी, जिसे छोड़कर ये सभी मुख्यधारा में लौटे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्मश्री जागेश्वर यादव के जीवन पर आधारित पुस्तक “बिरहोर जननायक” का किया विमोचन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पद्मश्री जागेश्वर यादव के जीवन पर आधारित पुस्तक “बिरहोर जननायक” का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक के लेखक डॉ. लोकेश पटेल को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पद्मश्री जागेश्वर यादव का जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन समाज के प्रति समर्पित रहा है और उनके कार्य विशेष रूप से जनसेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जशपुर जिले में ‘बिरहोर के भाई’ के रूप में विख्यात जागेश्वर यादव ने बिरहोर आदिवासी समाज के उत्थान के लिए जो कार्य किए हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि उनका सरल व्यक्तित्व और समाज के प्रति अटूट प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि सच्चा नेतृत्व सेवा और संवेदनशीलता से ही जन्म लेता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “बिरहोर जननायक” पुस्तक उनके संघर्ष, समर्पण और सेवा की उस प्रेरक यात्रा को सामने लाती है, जो नई पीढ़ी को समाज के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनने की दिशा देती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कृति पाठकों को न केवल प्रेरित करेगी, बल्कि समाज के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी सहायक होगी।
इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डॉ. लोकेश पटेल ने बताया कि इस पुस्तक की रचना आदिम जनजातियों, विशेषतः बिरहोर समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए जागेश्वर यादव द्वारा किए गए समर्पित प्रयासों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि इस कृति में उनके जीवन संघर्ष, सामाजिक योगदान और मानवीय दृष्टिकोण को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में 1700 डॉक्टरों की कमी: सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने हेल्थ वीसी मीट में उठाया गंभीर मुद्दा
रायपुर। सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी हॉस्पिटल्स में लगभग 1700 डॉक्टरों की कमी है, जो कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एवं आयुष विश्वविद्यालय, अटल नगर नवा रायपुर में आयोजित ऑल इंडिया हेल्थ साइंसेज वाइस चांसलर मीट 2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति में श्री अग्रवाल ने इस गंभीर विषय पर विस्तार से अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश भर के हर जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलना चाहते हैं। हर पार्लियामेंट्री कांस्टीट्यूएंसी में मेडिकल कॉलेज खोलना चाहते हैं। हमारे एम्स देश भर में खुल रहे हैं। परंतु उनमें पढ़ाने वाले डॉक्टरों की कमी है। छत्तीसगढ़ के सरकारी हॉस्पिटल्स में 1700 डॉक्टरों की कमी है। हमें इस बात पर गहन चिंतन करना होगा कि आखिर उनको पढ़ाने का, उनको रखने का पूरा पैसा सरकार खर्च करती है, परंतु उसके बाद भी सरकारी सेवाओं में डॉक्टर मिलते क्यों नहीं हैं? इस दिशा में हम क्या काम कर सकते हैं?
उन्होंने आगे कहा कि सरकार मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना पर लगातार निवेश कर रही है, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। "मेडिकल कॉलेज तो हमारे मुख्यमंत्री खोल देंगे, प्रधानमंत्री पैसा दे देंगे। पर उन मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर कहां से आएंगे?"
ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति को गंभीर बताते हुए उन्होंने कहा, "यह बहुत बड़ी चिंता का विषय है कि, ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टर नहीं है। हम बड़ी- बड़ी बात करते हैं, लेकिन ग्रामीणों को डॉक्टर नहीं मिलते। जब ग्रामीणों को डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं तो मेडिकल कॉलेज का औचित्य नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि डॉक्टरों को सरकारी सेवा में बनाए रखने के लिए एक नया वेतन ढांचा (सैलरी स्लैब) तैयार किया जाना चाहिए, जिससे वे सरकारी संस्थानों में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित हों।
श्री अग्रवाल ने उम्मीद जताई कि यह कॉन्फ्रेंस इस विषय पर ठोस सिफारिशें (रिकमेंडेशन) प्रस्तुत करेगी, जिससे केंद्र और राज्य सरकार दोनों को नीति निर्माण में मदद मिलेगी।
उन्होंने सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यदि इस दिशा में ठोस निर्णय लिए जाते हैं, तो यह देश और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
'5 बच्चे' बयान पर सियासत तेज, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
रायपुर। सर्व आदिवासी समाज की बैठक में वरिष्ठ आदिवासी नेता नंद कुमार साय के आदिवासी परिवारों से पांच बच्चे पैदा करने वाले बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. एक तरफ जहां कांग्रेस ने नंद कुमार साय के इस बयान के हवाले से भाजपा पर निशाना साधा है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे व्यक्तिगत बयान बताते हुए पल्ला झाड़ लिया है.
दरअसल, सर्व आदिवासी समाज की बैठक में आदिवासी समाज से जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए नंद कुमार साय ने प्रत्येक आदिवासी परिवार से कम से कम 5 बच्चे पैदा करने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि हम दो, हमारे दो के नारे का सबसे अधिक पालन आदिवासी समाज ने किया, लेकिन इसके कारण समाज की आबादी लगातार घटती गई. उन्होंने आदिवासियों की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए कहा खा कि इससे समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक ताकत प्रभावित हो सकती है.
नंद कुमार साय केवल परिवार के सदस्य ही बढ़ाने तक नहीं रुके, उन्होंने आगामी जनगणना को लेकर भी समाज को सजग रहने की सलाह दी. नंद कुमार साय ने आशंका जताई कि जनगणना के दौरान गड़बड़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए समाज के लोगों को सतर्क रहना होगा. उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि जनगणना में धर्म के कॉलम में “आदिवासी” ही दर्ज कराएं, ताकि समाज की अलग पहचान सुरक्षित रह सके.
सोच-समझकर रखी होगी बात – सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह नंद कुमार साय का व्यक्तिगत विचार है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वे एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने सोच-समझकर ही अपनी बात रखी होगी.
कांग्रेस ने भाजपा की मंशा पर उठाए सवाल
वहीं इस बयान पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि नंद कुमार साय भले ही इसे निजी राय बता रहे हों, लेकिन वे भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं, ऐसे में पार्टी और सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान केवल राजनीतिक बचाव के लिए निजी राय बताकर पेश किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वे खुद आदिवासी समाज से आते हैं, लेकिन शिक्षित होने के नाते वे कभी इस तरह की सलाह नहीं देंगे कि पाँच बच्चे पैदा किए जाएं.
बहरहाल, नंद कुमार साय बयान के बाद अब प्रदेश में सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं, जहां एक ओर जनसंख्या और सामाजिक जिम्मेदारी का मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी अधिकारों और उनकी अलग पहचान की मांग भी फिर से केंद्र में आ गई है.
आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक औषधीय ज्ञान के संगम से सशक्त होगा छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य मॉडल: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित ऑल इंडिया हेल्थ साइंसेज वाइस चांसलर मीट-2026 को संबोधित करते हुए इसे प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर देशभर से आए कुलपतियों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पहली बार आयोजित इस एकदिवसीय सम्मेलन के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में नवाचारों का व्यापक आदान-प्रदान होगा, जो आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस मंच से निकले विचार न केवल नीति निर्माण को दिशा देंगे, बल्कि आमजन तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में भी सहायक होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेज, 14 नर्सिंग कॉलेज तथा एक होम्योपैथी कॉलेज का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला हैं और इसी दृष्टिकोण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार पर निरंतर कार्य किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक की सहायता मिलना उनके लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ग्रामीणों को कर्ज लेने या जमीन बेचने जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है और स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास बढ़ा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियां, जो पहले सीमित वर्ग तक मानी जाती थीं, अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रही हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा “आरोग्य मंदिर” जैसी पहल की जा रही है, जिसका उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देश में तीन आयुर्वेदिक एम्स स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है, जो औषधीय पौधों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। इसी संदर्भ में उन्होंने हेमचंद मांझी को आयुर्वेद के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान मिलने पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पास कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विदेशों से भी लोग आते हैं।
मुख्यमंत्री ने राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना के तेजी से विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि राजधानी क्षेत्र में मेडिसिटी हब विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5000 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा। इससे प्रदेशवासियों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके कार्यकाल में रायपुर में एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों का शुभारंभ किया गया है।
भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे महान शिक्षा केंद्रों का धनी रहा है और चिकित्सा व अध्यात्म दोनों क्षेत्रों में विश्व गुरु के रूप में स्थापित रहा है। आयुर्वेद को ऋग्वेद का उपवेद बताते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का भाव सदैव विद्यमान रहा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने तीन प्रकार के टीकों का विकास कर न केवल अपने 140 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि अन्य देशों की भी सहायता कर वैश्विक स्तर पर मानवता का परिचय दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने चिकित्सकों को समाज में भगवान के बाद सबसे महत्वपूर्ण स्थान बताते हुए उनसे सेवा भाव के साथ संवेदनशीलता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र में नए मार्ग प्रशस्त करेगा और इसके सकारात्मक परिणाम आम जनता तक पहुंचेंगे।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र की अनेक चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में नवाचार के तहत हिंदी माध्यम की सुविधा प्रारंभ की गई है तथा तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी होंगी। उन्होंने चिकित्सकों से सेवा भाव और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में 5 नए मेडिकल कॉलेज, 14 नर्सिंग कॉलेज और 2 मानसिक अस्पताल सहित स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है तथा 275 अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 13 अप्रैल से सुकमा में मुख्यमंत्री बस्तर स्वास्थ्य योजना के तहत 36 लाख लोगों की हेल्थ स्क्रीनिंग और आयुष्मान कार्ड निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि नक्सल समस्या के समाप्त होने के बाद छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की दिशा में अग्रसर होगा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से प्राप्त सुझाव आयुष मंत्रालय को भेजे जाएंगे और यह आयोजन स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में प्रेरक भूमिका निभाएगा। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
इस अवसर पर विधायक इंद्र कुमार साहू, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विशेष आमंत्रित अतिथि डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा, भारतीय स्वास्थ्य विद्यापीठ के अध्यक्ष डॉ. राजीव सूद तथा आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे।
