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सूचना आयोग को हल्के में लेना डीएफओ को पड़ा भारी, सरकार ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जारी किया नोटिस, जानिए पूरा मामला…
रायपुर। सूचना आयोग को हल्के में लेना एक डीएफओ को भारी पड़ गया। कई आईएफएस अधिकारियों को पेनल्टी अधिरोपित होने के बावजूद अमूमन वन विभाग के जन सूचना अधिकारी सूचना आयोग को हल्के में ही लेते हैं। पेनल्टी लगने के बाद कई अधिकारियों ने कोर्ट से स्टे ले रखा है, परंतु भूल जाते हैं कि सूचना आयोग के पास दूसरी तलवार भी है। ऐसे ही एक प्रकरण में पंकज राजपूत तत्कालीन वनमंडल अधिकारी महासमुंद वर्तमान पदस्थापना खैरागढ़ वनमंडल के विरुद्ध सूचना आयोग के आदेश उपरांत वन विभाग छग शासन ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एव अपील) नियम 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ करने नोटिस जारी कर 15 दिना में जवाब मांगा है।
जानिए क्या है पूरा मामला
दरअसल जनवरी 2020 में रायपुर के आवेदक नितिन सिंघवी ने महासमुंद वनमंडल से हाथी द्वारा जनहानि और धनहानि की जानकारी के दस्तावेज मांगे थे। तत्कालीन जन सूचना अधिकारी सह डीएफओ मयंक पाण्डेय ने जवाब दिया कि दस्तावेज विशालकाय है, आकर अवलोकन कर लें। अवलोकन के पश्चात चिन्हित दस्तावेज निशुल्क प्रदाय कर दिए जाएंगे। मामला सूचना आयोग पंहुचा (प्रकरण क्र.ए/3066/2020)। सुनवाई के दौरान 15 फरवरी 2021 को आयोग को जन सूचना अधिकारी ने बताया कि जानकारी 94928 पेज में हो सकती है। आयोग ने आदेशित किया कि आवेदक को दस्तावेज मांगे जाने पर अवलोकन के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी निशुल्क प्रेषित करें। प्रधान मुख्य वन संरक्षक को शासन पर निशुल्क सूचना देने वाले दस्तावेजों की लागत दोषी अधिकारी से वसूल कर शासन के कोष में जमा करने के आदेश भी दिए थे।
अगली सुनवाई में क्या हुआ
अगली सुनवाई तक 2020 में महासमुंद वन मण्डल में पदस्थ रहे डीएफओ मयंक पांडे का तबादला बालोद हो गया और नए डीएफओ पंकज राजपूत आए, जो अब खैरागढ़ वन मण्डल में पदस्थ हैं। उन्होंने आयोग को 28 अगस्त 2021 को निशुल्क सूचना प्रदाय करने के आयोग के आदेश के संबंध में बताया कि मत मांगे जाने उपरान्त महाधिवक्ता द्वारा आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय बिलासपुर में अपील करने की अनुशंसा की है और कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उन्होंने आयोग से 15 दिन का समय मांगा, जिस पर आयोग ने बिलासपुर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रस्तुत करने के आदेश दिए परंतु जन सूचना अधिकारी ने बाद की दो सुनवाई 17 सितंबर 2021 और 18 अप्रैल 2022 में भी स्थागन आदेश प्रस्तुत नहीं किया, जिस पर आयोग ने माना कि स्थगन आदेश प्रस्तुत न कर पाने के कारण प्रकरण अनावश्यक रूप से लंबित रहा और शासन से पंकज राजपूत के विरुद्ध 3 अगस्त 2022 को अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा की।
2022 के आदेश पर 2025 में कार्यवाही
आयोग के आदेश के बावजूद पंकज राजपूत के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जाने की जानकारी सूचना आयोग के समक्ष 2025 में लाने के बाद अवर सचिव सूचना आयोग ने शासन से सूचना आयोग के आदेश के पालन प्रतिवेदन की मांग की। इसके बाद वन एवं जलवायु विभाग ने 11 जुलाई 2025 को पंकज राजपूत वर्तमान पदस्थापना खैरागढ़ वनमंडल कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के कारण शो-कॉज नोटिस जारी कर 15 दिवस में जवाब मांगा है। नोटिस में लिखा गया है कि आपके द्वारा अपने कर्तव्यों के निष्पादन में लापरवाही बरती गई, जो अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के नियम 3 का उल्लंघन है। अतः कारण बताएं कि क्यों ना उक्त कृत के लिए आपके विरुद्ध अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाए।
अंगदान और प्रत्यारोपण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने जागरूकता बढ़ाने की जरूरत: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
नई दिल्ली। देश में अंगदान करने वालों की संख्या में बीते पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2020 में जहां लगभग 6812 लोगों ने अंगदान किया था, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर लगभग 17,000 तक पहुँच चुकी है। इसी अवधि में अंग प्रत्यारोपण की संख्या भी लगभग 7443 से बढ़कर 18,910 हो गई है। यह जानकारी शुक्रवार को लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल के सवाल के उत्तर में दी।
रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में अंग और ऊतक बैंकों के संचालन का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अंगदान को लेकर देश में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस दिशा में और ठोस प्रयासों की आवश्यकता है। अंगदान से जुड़ी सूचनाओं की सुगमता, पारदर्शिता और अंगों के त्वरित व वैज्ञानिक ढंग से उपयोग के लिए व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाना चाहिए।
सांसद श्री अग्रवाल ने सरकार से मांग की कि अंगदान के महत्व को लेकर देशभर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पुण्य कार्य से जुड़ सकें।
इसके जवाब में मंत्री श्री जाधव ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO), क्षेत्रीय (ROTTO) और राज्य स्तरीय संगठन (SOTTO) के माध्यम से लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दान किए गए अंगों को रिट्रीवल के बाद तत्काल प्रत्यारोपित किया जाना चाहिए, जबकि केवल ऊतक ही बैंक में संरक्षित किए जाते हैं। देशभर में राज्य सरकारों द्वारा आवश्यकता अनुसार ऊतक बैंक स्थापित किए गए हैं, और सभी बैंक मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत पंजीकृत हैं।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, अंगदान महादान है। यह न केवल एक व्यक्ति के जीवन को बचाता है, बल्कि समाज में मानवता और करुणा का संदेश भी देता है। सरकार के प्रयास सराहनीय हैं, परंतु इन्हें ज़मीनी स्तर पर पहुँचाने के लिए सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, और मीडिया को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
सांसद श्री अग्रवाल ने सभी नागरिकों से अंगदान के संकल्प में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि इससे हम कई ज़िंदगियाँ बचा सकते हैं और अपने जीवन को भी सार्थक बना सकते हैं।
छत्तीसगढ़ की तरक्की में युवाओं की सुनिश्चित हो रही सक्रिय भागीदारी: “CM आईटी फेलोशिप कार्यक्रम” से खुलेगा अवसरों का द्वार
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार को सशक्त मंच देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए “CM आईटी फेलोशिप कार्यक्रम” की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह कार्यक्रम राज्य के तकनीकी रूप से दक्ष और होनहार युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के युवाओं को नवा रायपुर स्थित अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT-NR) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डाटा साइंस जैसे भविष्यगामी विषयों में M.Tech करने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम डिजिटल इंडिया मिशन और नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ नवाचार, अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया है। इस योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों की पूरी ट्यूशन फीस राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी, साथ ही उन्हें ₹50,000 प्रतिमाह की फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। पाठ्यक्रम के दौरान युवा विद्यार्थियों को AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, हेल्थटेक, एजुटेक, राजस्व प्रणाली और ई-गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकारी प्रोजेक्ट्स पर कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा। प्रदेश सरकार ने युवाओं से आग्रह किया है कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने हेतु iiitnr.ac.in पोर्टल पर जाकर आवेदन करें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल राज्य के तकनीकी परिदृश्य को नई ऊंचाइयाँ देगा, बल्कि छत्तीसगढ़ को डिजिटल युग में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित होगा।
कोरबा में दोस्तों के साथ घूमने गया युवक नदी में बहा, पिछले 24 घंटे से हो रही बारिश से नदी-नाले उफान पर, कई गांवों का संपर्क टूटा
कोरबा। कोरबा में पिछले 24 घंटे से हो रहे लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर है। करतला ब्लाॅक में दोस्तों के साथ घुमने गया एक युवक सोन नदी के तेज बहाव में बह गया। घटना की जानकारी के बाद पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लापता युवक की पतासाजी की जा रही है। लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण रेस्क्यू आपरेशन चलाने में काफी दिक्कते आ रही है। वहीं नदी-नाले का जल स्तर बढ़ने से कई क्षेत्रों में सड़क बह जिससे कई गांवों का संपूर्ण पूरी तरह से कट गया है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के कोरबा सहित कई जिलों में पिछले 24 घंटे से लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने इसके लिए पहले ही अलर्ट जारी किया था। लगातार हो रही बारिश से कोरबा में नदी-नाले उफान पर है। करतला क्षेत्र में सोन नदी पूरे उफान पर है। बताया जा रहा है कि उरगा थाना क्षेत्र के ग्राम सुखरीखुर्द निवासी 32 वर्षीय राजेश मनेवार अपने दोस्तों के साथ घुमने निकला था। सोन नदी के उफान पर होने का नजारा देखने राजेश नदी के किनारे खड़ा था।
इसी दौरान एकाएक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और वह पानी के तेज बहाव में बह गया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसकी तलाश में जुटे हैं। घटना की जानकारी के बाद उरगा पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण बचाव कार्य में गोताखोरों को काफी परेशानी आ रही है। बताया जा रहा है कि लगातार हो रही बारिश के कारण घिनारा नाला का जलस्तर काफी बढ़ गया है।
जिसस आधा दर्जन से अधिक गांवों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में यह नाला हमेशा भर जाता है। इससे आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। उधर लगातार हो रही तेज बारिश से हरदीबाजार क्षेत्र में लीलागर नदी उफान पर है। पानी के तेज बहाव और पुल-पुलिया के उपर से बह रहे नदी-नालो के कारण इस क्षेत्र के सुवाभोंडी-रेंकी और हरदीबाजार से नेवसा, उतरदा मार्ग पूरी तरह बंद है। ऐसे में लोग सराई-सिंगार, डिंडोलभांठा मार्ग से होकर 5 किलो मीटर लंबा रास्ता तय कर अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
सरकारी कर्मचारियों की चल संपत्ति में गिने जाएंगे शेयर, प्रतिभूतियाँ, डिबेंचर्स और म्युचुअल फण्ड्स, लेन-देन की देनी होगी जानकारी
रायपुर। शेयर की खरीद बिक्री करने वाले कर्मचारियों पर भी राज्य सरकार ने शिकंजा कस दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसे लेकर एक कड़ा आदेश भी जारी किया है। जिसके तहत बार-बार शेयर ट्रेडिंग और खरीद बिक्री को सिविल सेवा आचरण का उल्लंघन माना गया है। यही नहीं शेयर ट्रेडिंग की जानकारी भी सरकार को देना अब अनिवार्य कर दिया गया है। दरअसल जीएडी सेकरेट्री ने सभी विभागों, राजस्व मंडल अध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ को पत्र लिखा है।
सरकार द्वारा 30 जून 2025 को जारी अधिसूचना के तहत अब शेयर, प्रतिभूतियाँ, डिबेंचर्स और म्युचुअल फंड्स को भी “जंगम संपत्ति” की श्रेणी में शामिल किया गया है। यह संशोधन छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 19 में किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत कोई भी शासकीय सेवक यदि स्वयं या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से ऐसे निवेश करता है, जिसकी राशि दो माह के मूल वेतन से अधिक है, तो उसे संबंधित प्राधिकृत अधिकारी को रिपोर्ट करना होगा।
इसके अलावा, यदि किसी भी कैलेंडर वर्ष में कुल निवेश (शेयर, सिक्योरिटीज, डिबेंचर्स और म्युचुअल फंड्स) छह माह के मूल वेतन से अधिक हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को एक निर्धारित प्रोफार्मा में इसकी सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है।
वित्तीय अनुशासन को लेकर सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि शेयरों या अन्य वित्तीय साधनों में बार-बार खरीद-बिक्री (जैसे इंट्रा डे, बीटीएसटी, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) को आचरण नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सभी विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे इन नए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और शासकीय सेवकों को इस संबंध में जागरूक भी करें।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से एयर एनसीसी के छात्रों ने की मुलाकात
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के युुवाओं को अब एनसीसी में एयर स्क्वाड्रन के जरिए अपना कैरियर बनाने के लिए मदद मिल पाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से जिले के पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय में एनसीसी की एयर स्क्वाड्रन शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। यह छत्तीसगढ़ की 3 सीजी एनसीसी एयर स्क्वाड्रन होगी। श्री साय के प्रयासों से यह जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो स्थानीय युवाओं के भविष्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने विद्यालय में एयर एनसीसी के लिए चयनित 25 मेधावी विद्यार्थियों को एनसीसी कैडेट्स का बैच लगाकर पंजीयन की शुरुआत की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इनमें 13 बालिकाएं और 12 बालक शामिल हैं। इस अवसर पर विंग कमांडर विवेक कुमार साहू ने मुख्यमंत्री को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान विधायक गोमती साय और रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।




रंग लाई मुख्यमंत्री की पहल, जशपुर मेेें शुरू हुई एयर स्कवाड्रन
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री साय ने पिछले एनसीसी दिवस समारोह के दौरान रायपुर के समान राज्य के अन्य हवाई पट्टी वाले शहरों में भी एनसीसी की एयर स्कवाड्रन शुरू करने की इच्छा व्यक्त की थी। अभी तक छत्तीसगढ़ में केवल रायपुर में ही एयर एनसीसी और उड़ान का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि जगदलपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जशपुर जैसे स्थानों पर भी हवाई पट्टियों की सुविधा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री की इस पहल पर मार्च माह में जशपुर की आगडीह हवाई पट्टी को 3 सीजी एयर एनसीसी स्क्वाड्रन के लिए स्वीकृति प्रदान की गई और एक माइक्रोलाइट विमान को प्रशिक्षण हेतु जशपुर भेजा गया। इस दौरान लगभग 100 कैडेट्स को उड़ान का वास्तविक अनुभव प्रदान किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं हवाई पट्टी पहुंचकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण किया और कैडेट्स से संवाद किया। कैडेट्स ने उन्हें विमान से संबंधित तकनीकी जानकारियाँ भी साझा कीं।
प्रशिक्षण प्राप्त कैडेट को रोजगार के बेहतर अवसर
वर्तमान में 3 सीजी एयर एनसीसी एयर स्क्वाड्रन, पूरे देश में एकमात्र एयर स्क्वाड्रन है जिसमें एम्स, एमबीबीएस और नर्सिंग के छात्र कैडेट के रूप में जुड़े हुए हैं। कैडेटों को यूपीएससी और एसएसबी साक्षात्कार के माध्यम से सेना में 25 वैकेन्सी /पाठ्यक्रम के अवसर मिलते हैं, एसएससी के माध्यम से ऑफिसर्स ट्रेनिग अकादमी के लिए 50 वैकेंसी/पाठ्यक्रम के अवसर मिलते हैं जिसमें यूपीएससी परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है और केवल एसएसबी साक्षात्कार के माध्यम से चयन के अवसर मिलते है। 20 सीटें लडकियों के लिए आरक्षित होती हैं। वायु सेना के उड़ान प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों सहित सभी पाठ्यक्रमों में 10 प्रतिशत वेकेंसी होती है। जिसके लिए एएफसीएटी, यूपीएससी परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है। इसी तरह से पैरामिलिट्री फोर्स भर्ती में 2 से 10 बोनस अंक दिया जाता है।कई उद्योगों में भी एनसीसी सी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरियों में प्राथमिकता दी जाती है।
बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास पर हाईकोर्ट सख्त, रक्षा मंत्रालय और उड्डयन मंत्रालय को भेजा नोटिस
बिलासपुर। बिलासपुर एयरपोर्ट के अधूरे विकास कार्य को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर नाराजगी जाहिर की है। एयरपोर्ट से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “क्या आप नहीं चाहते कि बिलासपुर में एयरपोर्ट बने?”कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब यह पाया गया कि अब तक विकास कार्यों को लेकर कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश
हाईकोर्ट ने विकास कार्यों की धीमी गति पर कोर्ट ने नाराजगी जतायी। हाईकोर्ट ने रक्षा मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी करते हुए 8 सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही नागर विमानन मंत्रालय (Aviation Ministry) से भी जवाब तलब किया गया है। एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग से संबंधित प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये हैं।
जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई
यह मामला बिलासपुर एयरपोर्ट के समुचित विकास, उड़ानों की सुविधा और नाइट लैंडिंग जैसी आधुनिक सेवाओं की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। वर्षों से लंबित इस मामले में अब हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों से उम्मीद की जा रही है कि विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2025 को होगी। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगली सुनवाई तक संबंधित विभागों को ठोस जवाब और दस्तावेजों के साथ उपस्थित होना होगा।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बस्तर में गूंज रही है विकास की आवाज – 'नियद नेल्ला नार' से शासन पहुँचा विश्वास के द्वार तक
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के वे सुदूरवर्ती गाँव, जो वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से कटे रहे, आज नई उम्मीदों और उजालों की ओर अग्रसर हैं। जहाँ कभी बिजली, सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएँ और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, वहीं अब वही गाँव प्रगति के रास्ते पर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इस बदलाव की नींव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और जन सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप 15 फरवरी 2024 को ‘नियद नेल्लानार – आपका आदर्श ग्राम योजना’ के रूप में रखी गई। यह योजना उन क्षेत्रों तक शासन की संवेदनशील और सक्रिय पहुँच सुनिश्चित करने का क्रांतिकारी प्रयास है, जहाँ अब तक केवल उपेक्षा और प्रतीक्षा का सन्नाटा था।



मुख्यमंत्री श्री साय का स्पष्ट मानना रहा है कि केवल सुरक्षा शिविर स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं, जब तक वहाँ शासन की संवेदनशील उपस्थिति और समग्र विकास की किरण नहीं पहुँचे। इसी सोच के साथ बस्तर के पाँच नक्सल प्रभावित जिलों—सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और कांकेर—में 54 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए। इन शिविरों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 327 गाँवों को चिन्हित कर यह निर्णय लिया गया कि इन सभी को शत-प्रतिशत योजनाओं से जोड़ते हुए एक नया विकास मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा।
इस पहल के साथ ही गाँवों में बदलाव की हवा बहने लगी है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने 31 नए प्राथमिक विद्यालयों की स्वीकृति दी, जिनमें से 13 स्कूलों में कक्षाएँ शुरू हो चुकी हैं। 185 आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 107 पहले ही प्रारंभ हो चुके हैं, जिससे बच्चों को पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा मिलने लगी है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में 20 उप-स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत किए गए, जिनमें से 16 स्वास्थ्य केंद्र प्रारम्भ हो चुके हैं। ये वही गाँव हैं जहाँ पहले एक सामान्य दवा के लिए भी लोगों को मीलों जंगल पार करना पड़ता था।
मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में संचार और संपर्क साधनों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। पहले जहाँ मोबाइल सिग्नल का नामोनिशान नहीं था, वहाँ अब 119 मोबाइल टावरों की योजना बनी और 43 टावर कार्यशील हो चुके हैं। 144 हाई मास्ट लाइट्स की मंजूरी दी गई, जिनमें से 92 गाँवों में अब रात के अंधेरे में उजियारा फैलने लगा है। सड़क और पुल निर्माण के लिए 173 योजनाएँ बनाई गईं, जिनमें से 116 को स्वीकृति मिल चुकी है और 26 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। यह विकास केवल अधोसंरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक जुड़ाव और पहचान का सशक्त माध्यम बन चुका है। आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अब तक 70,954 लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं, 46,172 वृद्धजनों को आयु प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं और 11,133 नागरिकों का मतदाता पंजीकरण हुआ है, जिससे वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदार बन पाए हैं। 46,172 लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी कर मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 12,232 मकानों का लक्ष्य तय किया गया है, जिनमें से 5,984 परिवारों को स्वीकृति मिल चुकी है। किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4,677 किसानों को सहायता राशि प्रदान की गई है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 6,460 घरों में व्यक्तिगत शौचालय बनाए गए हैं। रसोई को धुएँ से मुक्त करने के उद्देश्य से 18,983 महिलाओं को उज्ज्वला और गौ-गैस योजना के तहत गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। 30 गाँवों में डीटीएच कनेक्शन भी दिए गए हैं, जिससे ये गाँव अब सूचना और मनोरंजन के मुख्य प्रवाह से जुड़ चुके हैं।
यह परिवर्तन मात्र योजनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि शासन और जनता के बीच एक नए भरोसे का रिश्ता है, जिसकी बुनियाद सहभागिता और पारदर्शिता पर टिकी है। वर्षों तक शासन से कटे रहे लोग अब स्वयं विकास की निगरानी में सहभागी बन रहे हैं। अब ग्रामीण स्वयं आंगनबाड़ी की उपस्थिति पंजी, राशन दुकान की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे हैं। यह वही बस्तर है, जो भय से विश्वास और उपेक्षा से भागीदारी की ओर बढ़ चला है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस दूरदर्शिता ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि सुशासन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी क्रियान्वयन से आता है। 'नियद नेल्लानार' केवल एक योजना नहीं, बल्कि यह बस्तर के पुनर्जागरण की यात्रा है—एक ऐसी यात्रा जिसमें बंदूक की जगह अब किताबें हैं, अंधेरे की जगह उजियारा है और असहमति की जगह अब सहभागी लोकतंत्र की भावना है।
छत्तीसगढ़ रेरा की बड़ी कार्रवाई: बिलासपुर के लोविना कोर्ट्स प्रोजेक्ट की खरीदी-बिक्री पर लगाई अंतरिम रोक
रायपुर। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (सीजी रेरा) ने बिलासपुर स्थित लोविना कोर्ट्स परियोजना में भूखंडों और मकानों की खरीदी-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का अंतरिम आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 4(2)(1)(क) के उल्लंघन के पर की गई है।
उल्लेखनीय है कि इस धारा के तहत प्रमोटर को प्रोजेक्ट के अंतर्गत आवंटियों से प्राप्त कुल राशि का कम से कम 70 प्रतिशत भाग एक अलग बैंक खाते में रखना अनिवार्य है। इस राशि का उपयोग केवल निर्माण कार्य और भूमि की लागत जैसे निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है। यह व्यवस्था घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा और धन के अनुचित उपयोग को रोकने के लिए की गई है।
प्राधिकरण ने पाया कि लोविना कोर्ट्स प्रोजेक्ट के प्रमोटर द्वारा इस नियम का उल्लंघन किया गया है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। परिणामस्वरूप, सीजी रेरा ने परियोजना के अंतर्गत किसी भी प्रकार की नई खरीद-फरोख्त, पंजीयन या लेन-देन पर रोक लगा दी है।
सीजी रेरा के अनुसार यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक कि प्रमोटर द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर उल्लंघनों का समाधान नहीं किया जाता और प्राधिकरण द्वारा निर्धारित शर्तों की पूर्ति नहीं कर दी जाती।
यह त्वरित कार्रवाई रेरा की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके तहत वह घर खरीदारों की पूंजी की सुरक्षा, निर्माण प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रमोटरों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता से कार्य कर रहा है। इस सख्त कदम से अन्य डेवलपर्स को भी यह स्पष्ट संदेश मिलेगा कि रेरा के प्रावधानों का पालन अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आधुनिक एम्बुलेंस को दिखायी हरी झंडी: ग्रामीण इलाकों को मिलेगा आपातकालीन स्वास्थ्य लाभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया स्थित कैम्प कार्यालय परिसर से अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह एम्बुलेंस बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) निधि से प्रदत्त है, जिसमें बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम सहित अन्य उन्नत सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
यह एम्बुलेंस मुख्य रूप से मनोरा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु रखी जाएगी, जिसकी सेवाएँ आवश्यकता अनुसार पूरे जिले में ली जा सकेंगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा परिवहन सेवा सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में गंभीर रूप से बीमार एवं दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सहायता मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार हर व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और त्वरित स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के लिए कृतसंकल्पित है। उनकी पहल पर विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरवर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। उन्होंने बताया कि कुनकुरी में मेडिकल कॉलेज और 50 बिस्तर वाला मातृ एवं शिशु अस्पताल, जशपुर में प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना का कार्य प्रगति में है।
इस अवसर पर सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक अधिकारी, और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
फार्मासिस्ट ग्रेड-2 भर्ती पर उच्च न्यायालय का बड़ा निर्णय, बी.फार्मा डिग्रीधारियों को भी मिलेगा आवेदन का मौका
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में फार्मासिस्ट (ग्रेड-2) पदों पर भर्ती को लेकर जारी विवाद में आज हाईकोर्ट ने बड़ा निर्णय सुनाया है। भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान की है। यह मामला 30 जून 2025 को संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी उस विज्ञापन से जुड़ा है, जिसके तहत केवल डिप्लोमा इन फार्मेसी धारकों को ही पात्र माना गया था। रिट याचिका (सेवा) क्रमांक 8548/2025, राहुल वर्मा एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य में न्यायालय ने बी. फार्मा डिग्रीधारकों के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी करते हुए उन्हें भी आवेदन का अवसर देने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति इस बात को लेकर थी कि उक्त विज्ञापन में केवल डिप्लोमा इन फार्मेसी धारकों को ही पात्र माना गया था और बैचलर ऑफ फार्मेसी (बी. फार्मा) अथवा उससे उच्च डिग्री धारकों को, जो फार्मेसी काउंसिल में विधिवत पंजीकृत हैं, आवेदन करने से वंचित कर दिया गया था। इस तथ्य को ध्यान रखते हुए कि ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि दिनांक 25 जुलाई 2025 को शाम 5:00 बजे तक थी, उच्च न्यायालय ने राज्य शासन को निर्देशित किया है कि वह छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (सीजी व्यापम) को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी करे, जिससे बी. फार्मा डिग्रीधारी इच्छुक अभ्यर्थी भी पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत कर सकें। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश व्यक्तिगत न होकर सार्वत्रिक रूप से लागू होगा और ऐसे सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होगा, जिनके पास फार्मेसी में डिग्री है और जो विज्ञापन में वर्णित अन्य आवश्यक योग्यताएं पूर्ण करते हैं।
साथ ही न्यायालय ने राज्य शासन को निर्देश दिया है कि वह इस आदेश की जानकारी सीजी व्यापम सहित सभी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाए, और बी. फार्मा डिग्रीधारी अभ्यर्थियों के लिए आवेदन पोर्टल में किए गए परिवर्तनों का व्यापक प्रचार-प्रसार प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से सुनिश्चित करे। मामले में याचिकाकर्ताओं का पक्ष अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा द्वारा प्रस्तुत किया गया। वहीं राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत ने पक्ष रखा।
मुख्यमंत्री साय ने स्वच्छता दीदियों को किया सम्मानित, कहा – देश को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में निभा रही हैं अहम भूमिका
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में हमारी स्वच्छता दीदियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने निष्ठा, परिश्रम और सेवा-भावना के साथ समाज को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में आयोजित सम्मान समारोह में स्वच्छता दीदियों को साड़ी, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जशपुर एक प्राकृतिक रूप से समृद्ध और सुंदर जिला है, लेकिन पहले जब वे गांवों का दौरा करते थे, तो सड़कों के किनारे फैला कचरा गांवों और नगरों की सुंदरता को धूमिल कर देता था। इस स्थिति को बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत कर इसे राष्ट्रीय जनआंदोलन में परिवर्तित किया। उन्होंने स्वयं झाड़ू उठाकर लोगों को प्रेरित किया और गांव-गांव, शहर-शहर स्वच्छता की अलख जगाई। उन्होंने हर नागरिक को स्वच्छ और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिलाने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान में हमारी स्वच्छता दीदियों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उनके अथक परिश्रम और समर्पण का ही परिणाम है कि आज जशपुर जिले ने स्वच्छता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वे वास्तव में सम्मान की पात्र हैं, क्योंकि उन्होंने हमें स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान करने में अमूल्य योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने घर, मोहल्ले, चौराहे, मंदिर और सार्वजनिक स्थलों की सफाई को अपना कर्तव्य मानें और स्वच्छता को अपनी आदत में शामिल करें।
उल्लेखनीय है कि आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शहरी स्वच्छता सुधारों के मूल्यांकन और प्रोत्साहन हेतु स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U) के अंतर्गत 4,589 शहरों को शामिल किया गया था। इस राष्ट्रीय सर्वेक्षण में जशपुर जिले के नगरीय निकायों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन कर देश भर में अपना परचम लहराया है।इसमें जशपुरनगर ने 20,000 से 50,000 की जनसंख्या वर्ग में पूरे देश में 10वां स्थान प्राप्त किया है, जो कि 2023 की 505वीं रैंकिंग से एक लंबी छलांग है। इसी वर्ग में नगर पंचायत कुनकुरी ने 13वां रैंक, नगर पंचायत पत्थलगांव ने 30वां रैंक, नगर पंचायत बगीचा ने 51वां रैंक, और नगर पंचायत कोतबा ने 64वां रैंक हासिल किया है। यह असाधारण उपलब्धि स्वच्छता दीदियों के परिश्रम और प्रशासनिक टीम के समन्वित प्रयास का प्रतिफल है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में जिले को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नगरीय निकायों द्वारा योजनाबद्ध रूप से कई कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें बी.टी. रोड निर्माण, रोड मार्किंग, सामुदायिक शौचालयों का उन्नयन, चौक-चौराहों का सौंदर्यीकरण, वॉल पेंटिंग, वेस्ट मैटेरियल से पार्कों का निर्माण, कम्पोस्टिंग शेड और रिसाइक्लिंग सेंटर की स्थापना, फुटपाथों पर पेवर ब्लॉक लगाना, साइनेज आदि प्रमुख हैं। लेकिन इन प्रयासों की आत्मा बनी हैं वे स्वच्छता दीदियाँ, जो हर गली, मोहल्ले में जाकर डोर टू डोर कचरा संग्रहण जैसे श्रमसाध्य कार्यों को अंजाम देती हैं।
इस अवसर पर जशपुर विधायक रायमुनी भगत ने सभी स्वच्छता दीदियों, नगरीय निकायों के अधिकारियों और नागरिकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने कहा कि स्वच्छता दीदियाँ वह कार्य कर रही हैं जो पहले समाज में उपेक्षित था। उन्होंने कहा कि कभी स्वच्छता के प्रति लोगों में चेतना नहीं थी, लेकिन स्वच्छ भारत अभियान के तहत दीदियों ने लोगों को न केवल जागरूक किया, बल्कि व्यवहार परिवर्तन भी सुनिश्चित किया, जिससे जशपुर को यह गौरव प्राप्त हुआ है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
बिना सूचना सील किया था नर्सिंग होम, हाईकोर्ट ने दिया मातृ केयर हॉस्पिटल को अनसील करने का आदेश
बिलासपुर। महासमुंद जिले के सरायपाली स्थित मातृ केयर नर्सिंग होम को बिना पूर्व सूचना सील करने के मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने अस्पताल को तत्काल अनसील (Unseal) करने का आदेश देते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
पूरा मामला क्या है?
सरायपाली निवासी प्रशांत कुमार साहू ने डॉक्टर शिबाशीष बेहरा के खिलाफ थाना सरायपाली में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार, डॉक्टर द्वारा की गई लापरवाही से उनकी पत्नी विकलांग हो गई। बताया गया कि 10 अक्टूबर 2024 को हुए ऑपरेशन में गंभीर चूक हुई, जिससे उनकी पत्नी स्थायी रूप से प्रभावित हुई।
शिकायत के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी महासमुंद ने जांच टीम गठित की, लेकिन जांच पूर्ण होने से पहले ही अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) सरायपाली ने 28 जून 2024 को मातृ केयर नर्सिंग होम को बिना किसी पूर्व सूचना के सील कर दिया।
हाईकोर्ट की टिप्पणी और आदेश
डॉ. शिबाशीष बेहरा ने अधिवक्ताओं मतीन सिद्दीकी और अभ्युदय त्रिपाठी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि छत्तीसगढ़ राज्य नर्सिंग होम एवं क्लीनिकल स्थापना अधिनियम, 2010 के अनुसार, बिना पूर्व सूचना किसी नर्सिंग होम को सील करना कानूनन गलत है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
इन दलीलों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि
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नर्सिंग होम को तत्काल अनसील किया जाए
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव, कलेक्टर महासमुंद, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, SDM सरायपाली तथा शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाए।
मुख्यमंत्री साय ने किया “रक्त-मित्र” पुस्तिका का विमोचन, रेडक्रॉस के आजीवन सदस्यों को किया सम्मानित
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि रक्तदान एक पुनीत कार्य है, जो न केवल किसी जरूरतमंद को जीवनदान देता है, बल्कि मानवता के प्रति हमारी सेवा भावना का श्रेष्ठतम उदाहरण भी है। मुख्यमंत्री श्री साय आज जशपुर जिले के ग्राम बगिया में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “रक्त-मित्र” डायरेक्ट्री एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति समय पर रक्तदाताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर सकता है। यह पहल जीवनरक्षक सहायता को सहज, सुलभ और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि जशपुर जिले में हर वर्ग के नागरिक स्वैच्छिक रक्तदान और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं और समाज सेवा में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। आज रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ, क्योंकि जीवनदान देने वाला व्यक्ति वास्तव में ईश्वर के समकक्ष होता है।





