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सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने की महाविद्यालयों में सांसद प्रतिनिधि किये नियुक्त
रायपुर। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक, सामाजिक एवं विकासात्मक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने एवं निराकरण हेतु सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किए हैं।
इन प्रतिनिधियों की नियुक्ति का उद्देश्य महाविद्यालयों में शिक्षा, संसाधन, छात्रहित तथा प्रशासनिक समन्वय से जुड़ी समस्याओं की जानकारी नियमित रूप से प्राप्त करना और उनका निराकरण प्राथमिकता से कराना है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा मनोनीत किए गए प्रतिनिधि...
1. शासकीय जीएनए स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भाटापारा (बलौदाबाजार) से अभिषेक मिश्रा
2. स्व. गोविंद सारंग शासकीय विधि महाविद्यालय, भाटापारा (बलौदाबाजार) से सुरेश यदु
3. शासकीय महाविद्यालय, सिमगा से नीरज शर्मा
4. नवीन महाविद्यालय, माना कैंप (रायपुर) से डॉ. निमई विश्वास
5. रामप्रसाद देवांगन शासकीय महाविद्यालय, खरोरा से विकास ठाकुर
6. स्व. नंदकुमार पटेल शासकीय महाविद्यालय, बिरगांव (रायपुर) से संजय पतिवारी
7. संत गोविंदराम सदानी शासकीय कला एवं महिला महाविद्यालय, देवेंद्रनगर से सुरेंद्र छाबड़ा
8. श्री कुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय, गोबरा नयापारा से अशोक गंगवाल
9. श्री सत्यनारायण शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, कोहका नेवरा (तिल्दा) से राम पंजवानी
10. पं. श्यामा चरण शुक्ल महाविद्यालय, धरसींवा से दिलेंद्र बंछोर
11. शासकीय महाविद्यालय, अभनपुर से कचरू भट्टर
12. शासकीय नवीन महाविद्यालय, अमलीडीह से रविंद्र ठाकुर
13. शासकीय नवीन महाविद्यालय, गुढ़ियारी (रायपुर) से पुरुषोत्तम देवांगन
14. शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय, गोबरा नयापारा (रायपुर) से मधु बाफना
15. शासकीय बद्री प्रसाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, आरंग से सूरज लोधी
16. भक्तिमाता कर्मा शासकीय महाविद्यालय, समोदा (आरंग) से डॉ. नेतराम वर्मा
17. शासकीय नवीन महाविद्यालय, तामासिवनी से मिथलेश सिन्हा
18. शासकीय दाऊ कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलौदाबाजार से आलोक अग्रवाल
19. शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय, बलौदाबाजार से नीलम सोनी
20. छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर से नितेश शुक्ला
21. शहीद राजीव पांडे महाविद्यालय, भाटागांव (रायपुर) से राकेश सिंह
22. डॉ. राधाबाई नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मठपारा (रायपुर) से उपेंद्र कश्यप
23. शासकीय दुर्गा बाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रायपुर से संध्या वर्मा
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि ये प्रतिनिधि महाविद्यालयों से छात्रों की समस्याएं, योजनाओं की प्रगति तथा प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां समय-समय पर उपलब्ध कराएंगे, जिससे शिक्षा क्षेत्र में और अधिक सशक्त हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जा सकेगा।
छत्तीसगढ़ सरकार ने डीएपी की कमी पूरा करने पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था की, मुख्यमंत्री ने कहा किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं
रायपुर। देश में डीएपी खाद के आयात में कमी के चलते चालू खरीफ सीजन में राज्य में डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने का वैकल्पिक मार्ग छत्तीसगढ़ सरकार ने निकाल लिया है। किसानों को डीएपी खाद की किल्लत के चलते परेशान होने की जरूरत नहीं है। डीएपी के बदले किसानों को भरपूर मात्रा में इसके विकल्प के रूप में एनपीके और एसएसपी खाद की उपलब्धता सोसायटियों के माध्यम सुनिश्चित की जा रही है। डीएपी की कमी को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एनपीके (20ः20ः013) और एनपीके (12ः32ः13) के वितरण लक्ष्य में 3.10 लाख मीट्रिक टन तथा एसएसपी के वितरण लक्ष्य में 1.80 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि करने के साथ ही इसके भण्डारण एवं वितरण की भी पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की है। एनपीके और एसएसपी के लक्ष्य में वृद्धि होने के कारण चालू खरीफ सीजन में विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का वितरण लक्ष्य 14.62 लाख मीट्रिक टन से 17.18 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे-एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित हो, इस पर कड़ी निगाह रखी जा रही है। किसानों की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यहां यह उल्लेखनीय है कि चालू खरीफ सीजन में 14.62 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य कृषि विभाग द्वारा निर्धारित किया गया था, जिसमें यूरिया 7.12 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 3.10 लाख मीट्रिक टन, एनपीके 1.80 लाख मीट्रिक टन, एमओपी 60 हजार मीट्रिक टन, एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल था। डीएपी के कमी को देखते हुए कृषि विभाग ने इस लक्ष्य को संशोधित किया है। डीएपी की आपूर्ति की कमी चलते इसके लक्ष्य को 3.10 लाख मीट्रिक टन से कमकर 1.03 लाख मीट्रिक टन किया गया है, जबकि एनपीके के 1.80 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को बढ़ाकर 4.90 लाख मीट्रिक टन और एसएसपी के 2 लाख मीट्रिक टन को बढ़ाकर 3.53 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यूरिया और एमओपी के पूर्व निर्धारित लक्ष्य को यथावत् रखा गया है। इस संशोधित लक्ष्य के चलते रासायनिक उर्वरकों के वितरण की मात्रा 14.62 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर अब 17.18 लाख मीट्रिक टन हो गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डीएपी की कमी को अन्य उर्वरकों के निर्धारित मात्रा का उपयोग कर पूरी की जा सकती है और फसल उत्पादन बेहतर किया जा सकता है। फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश सहित मात्रा में मिले तो उपज में कोई कमी नहीं आती है। डीएपी की कमी को देखते हुए किसानों को अन्य फॉस्फेट खादों के उपयोग की सलाह दी है। डीएपी के प्रत्येक बोरी में 23 किलोग्राम फॉस्फोरस और 9 किलोग्राम नाइट्रोजन होता है। इसके विकल्प के रूप में तीन बोरी एसएसपी और एक बोरी यूरिया का उपयोग करने से पौधों को पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस, कैल्सियम, नाइट्रोजन और सल्फर मिल जाता है। एसएसपी उर्वरक पौधों की वृद्धि के साथ-साथ जड़ों के विकास में भी सहायक है, इसके उपयोग से फसल की क्वालिटी और पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है। डीएपी की कमी को दूर करने के लिए किसान जैव उर्वरकों का भी उपयोग कर सकते हैं।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ-2025 में किसानों को विभिन्न प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 12.13 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण कराया गया है, जिसमें से 7.29 लाख मीट्रिक टन का वितरण किसानों को किया जा चुका है। राज्य में वर्तमान में सहकारी और निजी क्षेत्र में 4.84 लाख मीट्रिक टन खाद वितरण हेतु उपलब्ध है।
जमीन की मालकिन को 30 साल बाद मिला न्याय, हाईकोर्ट ने SECL को दिया नौकरी देने का आदेश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के कोरबा में सालों पहले SECL खदान के लिए सालों पहले कई लोगों की जमीनें अधिग्रहित की गई थी. इसके एवज में जमीन के मालिकों को SECL में नौकरी और मुआवजा देने का वादा किया गया था. इसी क्रम में दीपका गांव में भी एक महिला की जमीन अधिग्रहित की गई. उसे मुआवजा तो दिया गया, लेकिन नौकरी किसी फर्जी व्यक्ति को दे दी गई, जिसने महिला का बेटा होने का दावा किया था. इस मामले में महिला ने 30 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उसे आज इंसाफ मिल गया.
दरअसल, कोरबा के दीपका गांव की निर्मला तिवारी की 0.21 एकड़ जमीन 1981 में कोयला खदान के लिए अधिग्रहित की गई थी. जिसके बदले में एसईसीएल को पुनर्वास नीति के तहत उन्हें मुआवजा और उनके परिवार के सदस्य को नौकरी देनी थी. मुआवजा तो 1985 में दे दिया गया, लेकिन नौकरी एक फर्जी व्यक्ति नंद किशोर जायसवाल को दे दी गई, जिसने खुद को याचिकाकर्ता का बेटा बताकर नौकरी हासिल की थी.
याचिकाकर्ता ने एसईसीएल प्रबंधन को इस धोखाधड़ी की जानकारी दी. महिला द्वारा लंबी लड़ाई के बाद एसईसीएल ने वर्ष 2016 में नंद किशोर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया. इसके बाद महिला ने अपने बेटे उमेश तिवारी को नियुक्ति देने की मांग की. लेकिन एसईसीएल प्रबंधन ने यह कहते हुए नौकरी देने से इनकार कर दिया कि अधिग्रहण की तारीख पर जमीन याचिकाकर्ता के नाम पर म्यूटेट नहीं थी और उसके बेटे का उस वक्त जन्म नहीं हुआ था.
हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि म्यूटेशन का रिकॉर्ड सिर्फ कब्जे का सबूत है, स्वामित्व का नहीं. जब एसईसीएल ने जमीन के बदले मुआवजा दिया था, तो यह मान लिया गया था कि याचिकाकर्ता ही जमीन की मालिक है. अगर शुरू में गलत व्यक्ति को नियुक्ति दे दी गई, तो उस गलती को सुधारते समय असली हकदार को उसका हक देना चाहिए था. महज इस आधार पर कि बेटा अधिग्रहण के समय पैदा नहीं हुआ था, उसका दावा खारिज नहीं किया जा सकता. एसईसीएल ने न केवल अपने वादे का उल्लंघन किया बल्कि एक गलत व्यक्ति को नौकरी देकर याचिकाकर्ता के साथ अन्याय किया. मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के बेटे को 6 जुलाई 2017 से नियुक्ति देने और इसके अलावा सभी लाभ भी उस तारीख से देने कहा है.
जिला पंचायत कार्यालय के बाहर कुर्सी लगाकर बैठे DM, देर से ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों की लगाई क्लास
कवर्धा। सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और समय की पाबंदी को लेकर कवर्धा कलेक्टर गोपाल वर्मा अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। गुरुवार सुबह उन्होंने अचानक निरीक्षण अभियान की शुरुआत की और सबसे पहले जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे। जहां कई कर्मचारी निर्धारित समय के बाद भी गैरहाज़िर थे। जिसके बाद कलेक्टर खुद कार्यालय के मुख्य द्वार पर कुर्सी लगाकर बैठ गए और जैसे ही देरी से आने वाले कर्मचारी अंदर घुसने लगे, उन्हें वहीं रोक लिया गया।
इस दौरान कलेक्टर वर्मा ने तय समय के बाद पहुंच रहे कर्मचारियों को कार्यालय के भीतर आने से रोकते हुए उनसे कारण पूछा। कुछ कर्मचारी शर्मिंदगी में मुंह छुपाते नजर आए, तो कुछ ने सार्वजनिक रूप से कान पकड़कर माफी मांगी और भविष्य में समय का पालन करने का वादा किया।
कलेक्टर गोपाल वर्मा का औचक निरीक्षण यहीं नहीं थमा। इसके बाद वे जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने मरीजों से सीधी बातचीत कर स्वास्थ्य सुविधाओं का फीडबैक लिया। इसके बाद कलेक्टर स्वामी करपात्री शासकीय विद्यालय पहुंचे और वहां भी स्टाफ की उपस्थिति जांची। साथ ही बच्चों से पढ़ाई-लिखाई को लेकर प्रश्न पूछे।
कलेक्टर की चेतावनी
कलेक्टर वर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि जिले के सभी शासकीय कार्यालयों में इस तरह के अकस्मात निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे। जो कर्मचारी समय की अनदेखी करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई तय है।
ATR से अमरकंटक तक नया टूरिस्ट सर्किट: जंगल, जल और संस्कृति का संगम, रोजगार के नए अवसर खुलेंगे…
बैठक में विधायक धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला, दिलीप लहरिया, अटल श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर संजय अग्रवाल और सीईओ संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे. मंत्री साहू ने कहा कि बिलासपुर छत्तीसगढ़ के मध्य में होने के कारण बड़ी संख्या में लोग यहां से गुजरते हैं. पर्यटक यहां रुककर घूमना चाहते हैं, लेकिन सुविधाओं और प्रचार की कमी के कारण इन स्थलों की जानकारी और पहुंच सीमित है.
उन्होंने एनटीपीसी, एसईसीएल और अडानी फाउंडेशन से पर्यटन विकास में सक्रिय सहयोग की अपील की. कंपनियों ने इस पहल में भागीदारी के लिए सहमति जताई है. परियोजना में केंद्र सरकार की प्रसाद योजना का भी लाभ लिया जाएगा.
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि डीपीआर बनने के बाद कंपनियों को जिम्मेदारी देकर तेजी से काम शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आने वाले पर्यटकों के लिए दो-तीन दिन ठहरने योग्य इंतजाम किए जाएंगे. अचानकमार टाइगर रिजर्व करीब 1 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला है, जहां खुड़िया, केंवची और शिवतराई से प्रवेश की व्यवस्था होगी.
मंत्री साहू ने कहा कि जिले में बैगा बहुल इलाकों में होम स्टे की भी योजना बनाई जा रही है. ट्राइबल संस्कृति और ट्री विलेज का कॉन्सेप्ट यहां के पर्यटन को खास पहचान देगा. इस टूरिस्ट सर्किट के विकास से सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगाने पर रायपुर में पहली बार हुई कार्रवाई, 111 वाहनों से वसूला गया जुर्माना…
रायपुर। छत्तीसगढ़ राजधानी रायपुर में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) नहीं लगाने वाले वाहन चालकों पर अब सख्ती शुरू हो गई है. यातायात और परिवहन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए अब तक 111 वाहनों से जुर्माना वसूला है. पुलिस ने दो और तीन पहिया वाहनों से 1,000 रुपए, चार पहिया वाहनों से 2,000 रुपए और मध्यम व भारी वाहनों से 3,000 रुपए तक जुर्माना वसूला है.
बता दें, 1 अप्रैल 2019 के पहले पंजीकृत सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए 30 अप्रैल 2025 तक का समय दिया गया था. लंबे समय से वाहन चालकों को नए हाईटेक नंबर प्लेट लगाने की समझाइश दी जा रही थी. इसके बावजूद नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा था. इसलिए अब रायपुर पुलिस ने चालानी कार्रवाई शुरू कर दी है.
नियम और अंतिम तारीख
केंद्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 50 के तहत सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाना अनिवार्य है. वहीं केंद्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 39/192 के प्रावधान के तहत बिना HSRP के वाहन चलाने पर यह जुर्माना लगाया जाता है.
अधिकारियों ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवा लें, ताकि भविष्य में चालान से बचा जा सके.
पंथी नृत्य दल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके निवास कार्यालय में पंथी नृत्य दल ने सौजन्य मुलाकात की। पंथी नृत्य दल के सदस्यों ने बताया कि वे 13 से 24 फरवरी 2025 तक मिस्र (इजिप्ट) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके है। मुख्यमंत्री श्री साय ने पंथी नृत्य दल के सभी कलाकारों को अपने कला-प्रदर्शन के माध्यम से विदेश की धरती पर छत्तीसगढ़ की माटी की सुगंध बिखेरने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विधायक खुशवंत सिंह साहेब उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अगले 3 घंटों में होगी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज और येलो अलर्ट…
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है और लगातार कई जिलों में बारिश हो रही है. राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में आज सुबह से हल्की बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने अगले तीन घंटों के लिए प्रदेश के कई इलाकों में बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है.
इन जिलों में होगी बारिश
मौसम विभाग ने महासमुंद, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा, जशपुर, सरगुजा, में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में गरज-चमक और 30-40 KMPH की स्पीड से तेज हवा के साथ मध्यम बारिश की संभावना है.
वहीं बीजापर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागाव, काकर, धमतरी, बालोद, राजनांदगाव, गरियाबंद, रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, मुंगेली, सूरजपर, बलरामपुर, में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में हल्की बारिश की संभावना है.
मौसम विभाग ने बताया कि अगले सप्ताह तक पूरे प्रदेश में सक्रिय मानसून की स्थिति बनी रहने की संभावना है. उत्तरी छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक भारी वर्षा जारी रह सकती है.
बीते दिन प्रदेश में ऐसा रहा मौसम
पिछले 24 घंटों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय रहा. बिलासपुर और बस्तर संभाग के कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई. अंबिकापुर में 11 मिमी, रायगढ़ में 9 मिमी और नारायणपुर में 8 मिमी बारिश दर्ज की गई.
प्रदेश का तापमान:
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अधिकतम तापमान: सबसे ज्यादा 30.6 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज किया गया.
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न्यूनतम तापमान: सबसे कम 21.2 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में रहा.
मौसमी तंत्र सक्रिय
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून द्रोणिका बांग्लादेश, त्रिपुरा, मिजोरम होते हुए दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ रही है. पश्चिमी तट पर अपतटीय ट्रफ रेखा सक्रिय है. छत्तीसगढ़ के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. राजस्थान से उत्तर प्रदेश होते हुए बंगाल की खाड़ी तक ट्रफ लाइन मौजूद है.
आगामी पूर्वानुमान
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4 जुलाई तक: प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश. कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी वर्षा की संभावना.
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कल के लिए चेतावनी: उत्तरी छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है.
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अगले 2 दिनों के बाद: अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी.
रायपुर का मौसम पूर्वानुमान
3 जुलाई को रायपुर में आसमान सामान्यत: मेघमय रहेगा. गरज-चमक के साथ बारिश होने के आसार हैं.
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अधिकतम तापमान: 28 डिग्री सेल्सियस
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न्यूनतम तापमान: 24 डिग्री सेल्सियस
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि तेज हवा और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोग सुरक्षित स्थानों पर रहें और सतर्कता बरतें.
ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत : महाराणा प्रताप चौक पर बनेगा फ्लाईओवर, केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सांसद कश्यप को पत्र लिखकर दी जानकारी
जगदलपुर। बस्तर क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग को आखिरकार केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। जगदलपुर शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहे महाराणा प्रताप चौक पर अब फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस कार्य के लिए स्वीकृति दे दी है। उन्होंने यह जानकारी बस्तर सांसद महेश कश्यप को पत्र लिखकर दी।
बस्तर सांसद महेश कश्यप ने स्थानीय नागरिकों की मांग को प्रमुखता से उठाते हुए नितिन गडकरी से इस मुद्दे पर चर्चा की थी। उन्होंने जगदलपुर से सुकमा मार्ग को फोर लेन करने और शहर के सबसे व्यस्त चौराहे महाराणा प्रताप चौक पर फ्लाईओवर निर्माण की मांग रखी थी। अब केंद्रीय मंत्री गडकरी ने डीपीआर के आधार पर इस कार्य को शीघ्र स्वीकृत करने का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि सुकमा मार्ग के फोर लेन प्रोजेक्ट को पहले ही वार्षिक योजना 2024-25 में शामिल कर मंजूरी दी जा चुकी है। इस निर्णय से ना सिर्फ शहरवासियों को ट्रैफिक की समस्या से राहत मिलेगी, बल्कि बस्तर के विकास को भी नई गति मिलेगी।
सांसद महेश कश्यप ने जताया आभार
बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि आज हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी देने वाली सरकार को मैं बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापित करता हूं, क्योंकि उनकी सरकार के नेतृत्व में चलने वाली सरकार द्वारा बस्तर को चार-चार रेल लाइन का सौगात मिला है। आज केशकाल में बाईपास मिला है।
उन्होंने कहा कि मैंने 2014 में सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की थी और जगदलपुर से कोंटा तक फोर लेन की मांग की थी। साथ ही जगदलपुर शहर के प्रवेश द्वार महाराणा प्रताप चौक में ओवरब्रिज की भी मांग की थी, क्योंकि लगातार हो रहे एक्सीडेंट के कारण बहुत सारे लोगों को बेवजह मौत का सामना करना पड़ रहा था। महेश कश्यप ने कहा, मैं सबसे पहले हमारे नितिन गडकरी को बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापित करता हूं। उन्होंने मेरी जो मांग थी, उसे पूरा करते हुए मेरे नाम से जो लेटर भेजा है और अब डीपीआर और सर्वे के लिए स्वीकृति दे दी है।

यादव समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम उनके रायपुर स्थित निवास कार्यालय में यादव समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। यह प्रतिनिधिमंडल विधायक गजेंद्र यादव के नेतृत्व में पहुंचा था।
मुख्यमंत्री श्री साय से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधियों के साथ समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज की एकता, सहयोग और प्रगति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार समाज के विकास में हरसंभव मदद करेगी।
इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल में महापौर राजनांदगांव मधुसूदन यादव तथा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से यादव समाज के पदाधिकारी माधव लाल यादव, बोधन यादव, गुलेंद्र यादव, देवेंद्र यादव, परमानंद यादव, जगमोहन लाल यादव, खेमराज यादव आदि शामिल रहे।
पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त के निधन पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने व्यक्त किया गहरा शोक
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल एवं भारत सरकार के पूर्व रक्षा सचिव शेखर दत्त के निधन पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने गहरा शोक व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में श्री अग्रवाल ने कहा कि श्री दत्त एक अत्यंत कुशल प्रशासक, दूरदृष्टि संपन्न नीति-निर्माता और जनहित के लिए समर्पित व्यक्ति थे।
उन्होंने कहा कि शेखर दत्त ने छत्तीसगढ़ राज्य में राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, सुशासन और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका सादगीपूर्ण जीवन, प्रशासनिक अनुभव और राष्ट्र के प्रति समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उनका निधन देश और छत्तीसगढ़ की अपूरणीय क्षति है।
बृजमोहन अग्रवाल ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिजनों को यह असीम दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ कर रहे हैं आधुनिक आइसोलेशन वार्ड: महामारी के अभाव में इनका हो रहा है नवाचारपूर्ण वैकल्पिक उपयोग
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोविड-19 जैसी महामारियों से निपटने की तैयारी को मजबूत करने और आमजन तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से ठोस कदम उठाए हैं। इमरजेंसी कोविड रिस्पांस एंड हेल्थ सिस्टम प्रिपेयर्डनेस पैकेज (ईसीआरपी) के तहत प्रदेश के 571 स्वास्थ्य केंद्रों – जिसमें 62 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 385 उप-स्वास्थ्य केंद्र एवं 124 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं – में अतिरिक्त आइसोलेशन वार्ड स्वीकृत किए गए। इनमें से 422 भवनों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है और 141 वार्ड तेजी से निर्माणाधीन हैं। ये सभी आइसोलेशन वार्ड न केवल भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए तैयार रहेंगे, बल्कि वर्तमान में स्वास्थ्य व्यवस्था को व्यापक और सशक्त बनाने में योगदान कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि नाबार्ड पोषित योजना के अंतर्गत भी राज्य में व्यापक स्तर पर आइसोलेशन सुविधाओं का विकास हुआ है। इस योजना के तहत 25 जिला अस्पतालों में 20 बिस्तरों के और 170 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 10 बिस्तरों के आधुनिक आइसोलेशन वार्ड स्थापित किए गए हैं, जिनका निर्माण कोविड महामारी के दौरान मरीजों के पृथक उपचार के लिए किया गया था। वर्तमान में महामारी के अभाव में इन भवनों का नवाचारपूर्ण वैकल्पिक उपयोग किया जा रहा है। कहीं इन्हें चिकित्सा उपकरणों एवं दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए स्टोर रूम के रूप में प्रयोग किया जा रहा है, तो कहीं इन्हें प्रशिक्षण केंद्र एवं बैठक कक्ष के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है।आइसोलेशन भवनों ने स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। इनके बहुउद्देशीय उपयोग से स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य संचालन में सुविधा मिली है और आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित तैयारियों की क्षमता भी सशक्त हुई है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आइसोलेशन वार्ड का भवन तकनीकी कारणों से अभी तक हैंडओवर नहीं हो सका है। जल्द ही आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कर इसे भी स्वास्थ्य सेवाओं में सम्मिलित किया जाएगा।
इन सभी आइसोलेशन वार्डों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर अल्प सूचना में ही इन्हें सक्रिय किया जा सके। राज्य सरकार की यह पहल छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़, सक्षम और भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मान्यता के नाम पर श्री रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज से ली थी रिश्वत, स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों को 5 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा
रायपुर। श्री रावतपुरा सरकार आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (SRIMSR) को मान्यता दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने के मामले गिरफ्तार छह आरोपियों को सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने 5 दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया. आरोपियों में डॉ. मंजुप्पा सीएन, डॉ चैत्रा (एमएस), डॉ अशोक शैलके, रावतपुरा सरकार के निदेशक अतुल कुमार, सतीश और रविचंद्र शामिल हैं.
बता दें कि मेडिकल कॉलेजों में मान्यता दिलाने के एवज में मोटी वसूली करने के मामले में सीबीआई ने एक दिन पहले ही छत्तीसगढ़ समेत मध्यप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, दिल्ली में 40 से अधिक ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की थी. गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों में से 3 मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से संबद्ध डॉक्टर हैं.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कॉलेज की मान्यता के नाम पर पहले भी 1 करोड़ 62 लाख रुपए की राशि की डील हुई थी. जिसकी शिकायत 2024 में की गई थी. इसके बाद अब 55 लाख रुपए की लेन-देन का मामला सामनें आया है. बेंगलुरु के दो डॉक्टरों के पास हवाला के जरिए पैसा पहुंचा था. रविंद्र और सतीश ने केवल पैसा हासिल किया था.
सीबीआई द्वारा अदालत के समक्ष पेश दस्तावेजों में बताया गया कि अध्यक्ष रविशंकर जी महाराज के कहने पर श्री रावतपुरा सरकार आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (SRIMSR) आगामी आधिकारिक निरीक्षण के बारे में गोपनीय और अग्रिम जानकारी प्राप्त करने की साजिश में शामिल था. इसके लिए संस्थान के निदेशक अतुल कुमार तिवारी ने गीतांजलि विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजस्थान के रजिस्ट्रार मयूर रावल के साथ मिलीभगत करके गैरकानूनी तरीके से ऐसी विशेषाधिकार प्राप्त जानकारी हासिल करने की कोशिश की.
यह भी आरोप लगाया गया है कि मयूर रावल ने गोपनीय निरीक्षण से संबंधित विवरण का खुलासा करने के बदले में 25-30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी. 26 जून 2025 को रावल ने तिवारी को 30 जून 2025 को निर्धारित निरीक्षण की तैयारी करने के लिए सूचित किया था. इसके अलावा रावल ने तिवारी को नामित निरीक्षण दल के सदस्यों के नाम भी बता दिए, जिससे आधिकारिक गोपनीयता भंग हुई और इस तरह के निरीक्षणों को नियंत्रित करने वाले वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हुआ.
यह भी आरोप लगाया गया है कि मयूर रावल द्वारा सूचित एनएमसी द्वारा नामित 4 मूल्यांकनकर्ताओं वाली निरीक्षण टीम 30 जून 2025 को एसआरआईएमएसआर, रायपुर में निरीक्षण के लिए पहुंची. निरीक्षण दल के सभी 4 सदस्यों ने एसआरआईएमएसआर के निदेशक अतुल कुमार तिवारी के साथ साजिश रची और एक अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट जारी करने के लिए रिश्वत लेने पर सहमत हुए.
निरीक्षण दल के सदस्यों में शामिल कर्नाटक के मंड्या स्थित मंड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंड की हेड और प्रोफेसर डॉ. मंजुप्पा सीएन ने सतीश को बताया कि हवाला ऑपरेटर से उसे फोन आएगा कि रकम कैसे एकत्र की जानी है. इसके साथ डॉ. मंजुप्पा ने निरीक्षण दल की एक अन्य सदस्य डॉ. चैत्रा से भी बातकर बताया कि उसका हिस्सा सतीश द्वारा उसके निवास पर पहुंचाया जाएगा या कोई इसे सतीश से एकत्र कर सकता है. यह लेन-देन 30 जून को ही होने की संभावना थी.
मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई ने बैंगलोर में जाल बिछाया और 55 लाख रुपए की रिश्वत की रकम बरामद की गई. रिश्वत की कुल रकम में से 16.62 लाख रुपए आरोपी डॉ. चैत्रा के पति रविचंद्र से और 38.38 रुपए आरोपी डॉ. मंजुप्पा के सहयोगी सतीश से बरामद किए गए.
जांच के दौरान आरोपी डॉ. मंजुप्पा सीएन, डॉ. चैत्रा एमएस, डॉ. अशोक शेलके और एसआरआईएमएसआर के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी को एक जुलाई को रायपुर से गिरफ्तार किया गया है. वहीं रविचंद्र और सतीश को बैंगलोर से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है. सीबीआई के वकील ने विशेष अदालत को बताया कि विभिन्न स्थानों पर तलाशी ली गई है, और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं.
राज्य की आर्थिक मजबूती और वित्तीय अनुशासन को लेकर सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में प्रदेश की आर्थिक स्थिति और वित्तीय प्रबंधन की गहन समीक्षा की। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बजट प्रबंधन, राजस्व संग्रहण, व्यय नियंत्रण, वित्तीय अनुशासन और ई-गवर्नेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से राज्य की जीएसडीपी, पूंजीगत व्यय और योजनाओं की वित्तीय प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि वित्तीय संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और दक्षता के साथ किया जाए, ताकि जनकल्याणकारी योजनाएं निर्बाध रूप से संचालित हो सकें।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य की प्रगति उसकी वित्तीय स्थिरता पर निर्भर करती है। जितनी सशक्त वित्तीय व्यवस्था होगी, उतनी ही तेजी से हम विकास की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया है, जिससे राज्य की जीएसडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
बैठक में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विभाग की वर्तमान वित्तीय स्थिति, राजस्व प्राप्तियों, व्यय नियंत्रण और आगामी रणनीतियों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाओं को समयबद्ध रूप से वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं और विभाग वित्तीय पारदर्शिता व सुशासन की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि बीते डेढ़ वर्षों में विभाग के द्वारा अपनाए गए नवाचारों से राज्य की आर्थिक आधारशिला और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और राज्य वित्तीय सुशासन के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को छुए।
बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश कुमार बंसल और राहुल भगत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
करोड़ों के बोगस बिलिंग मामले में EOW ने छत्तीसगढ़ में मारा छापा, कोयला कारोबारी को किया गिरफ्तार, पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
गौरेला पेण्ड्रा मरवाही। मध्यप्रदेश में फर्जी बिल से करोड़ों की जीएसटी चोरी के मामले में भोपाल की EOW टीम ने छत्तीसगढ़ के गौरेला पेण्ड्रा मरवाही में छापेमार कार्रवाई की है. EOW ने कोयला कारोबारी शेख जफर को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा कि भोपाल EOW में दर्ज जीएसटी फर्जीवाड़ा मामले में यह कार्रवाई हुई है. बता दें कि 25 जून को ईओडब्ल्यू ने फर्जी कंपनी बनाकर जीएसटी क्लेम के नाम पर 34 करोड़ से ज्यादा का घोटाला करने वाले मास्टरमाइंड जबलपुर निवासी विनोद कुमार सहाय को झारखंड के रांची से गिरफ्तार किया था. शेख जफर भी विनोद सहाय के लिए काम करता था.
ईओडब्ल्यू की पूछताछ में कारोबारी शेख जफर ने बड़ा खुलासा किया है. उसने बताया कि विनोद सहाय की फर्मों से वह सिर्फ कोयले का व्यवसाय करता था. शेख जफर के नाम पर अम्बर कोल डिपो एवं अनम ट्रेडर्स है, जो रानीताल जबलपुर के पते पर रजिस्टर्ड है. अनम ट्रेडर्स ने अभिजीत ट्रेडर्स से व्यवसाय किया. अम्बर कोल ने मेसर्स मां रेवा ट्रेडर्स एवं नमामि ट्रेडर्स से व्यवसाय किया है. इसके अतिरिक्त शेख जफर की कंपनियों ने विनोद सहाय की कंपनी जगदम्बा कोल केरियर और महामाया ट्रेडर्स से भी व्यवसाय किया है.
शेख जफर ने बताया कि विनोद सहाय की फर्म जेएमकेडी कोल से वह भटिया कोल, बिलासपुर, खालसा कोल, बिलासपुर, आर्यान कोल वॉश्री, जैन कोल, वॉशरी अनूपपुर, हरिजिका कोल, रायगढ, प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड चापा, नेशनल फर्म के प्रोपराइटर अक्कू जेठानी, एमएसपी पॉवर प्लांट रायगढ, बीएस सिंघल पॉवर प्लांट रायगढ़ को फर्जी बिल देता था. उक्त बिल देने के लिए राजा सरावगी बुढार, अशोक चतुर्वेदी बुढार, राजेश कोटवानी बिलासपुर से कोयला लेना दिखाता था. उक्त कोल का पूरा काम उनके माध्यम से होता था.
जानकारी के मुताबिक, शेख जफर का मरवाही के पास रूमगा मटियाढांड में कोयला डंपिंग यार्ड है. वह चोरी के कोयले को छत्तीसगढ़ से मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ में खपाने का काम करता था. साथ ही फर्जी बिलिंग कर जीएसटी की भारी हेराफेरी की.
मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में फैला है पूरा नेटवर्क
EOW की जांच में पता चला है कि इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए विनोद सहाय ने 23 फर्जी फर्मों और 150 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल किया है. यह पूरा नेटवर्क मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कई शहरों में फैला हुआ है. जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी विनोद सहाय जबलपुर जिले के ग्राम टिबरी का मूल निवासी है. उसने वर्ष 2009 से फर्जी आईडी और नामों जैसे नीलू सोनकर और एनके खरे का उपयोग करते हुए फर्जी फर्में खड़ी कीं. इन कंपनियों के नाम पर बोगस बिल बनाकर खरीदार कंपनियों को फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (फेक आईटीसी) दिलाया गया. 512 करोड़ रुपए की इनवॉयसिंग के नाम पर न कोई माल खरीदा गया न ही बेचा गया. न कोई स्टॉक मिला, न गोदाम, न ही परिवहन दस्तावेज मिले. ये लेन-देन केवल कागजों पर दर्शाए गए थे.
लोन दिलाने के नाम पर लोगों से लिए दस्तावेज
आरोपी विनोद कुमार सहाय ने 2019-20 में फर्जीवाड़ा शुरू किया. खुद को एनके खरे बताकर लोन दिलाने के बहाने लोगों से दस्तावेज लिए. जीएसटी रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैन, आधार, फोटो, बैंक और जमीन से जुड़े कागज लेकर फर्जी फर्में बनाई. लॉगिन आईडी, पासवर्ड और मोबाइल अपने पास रखे, ईमेल खुद का डाला. फर्म केवल कागजों पर थीं. फर्जी बिक्री दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट जनरेट किया और उसका लाभ अन्य व्यापारियों को दिलाया.
एक दर्जन से ज्यादा बना रखी थी फर्जी फर्म
विनोद सहाय ने मां नर्मदा ट्रेडर्स, नमामि ट्रेडर्स, मां रेवा ट्रेडर्स, अभिजीत ट्रेडर्स, केडी सेल्स कॉरपोरेशन, माइक एंटरप्राइजेज, दिलीप ट्रेडर्स, अंकिता स्टील एंड कोल , जगदंबा कोल कैरियर, कोराज टेक्निक्स, महामाया ट्रेडर्स, अंबर कोल डिपो, अनम ट्रेडर्स के नाम पर करीब एक दर्जन से ज्यादा फर्जी कंपनी बनाई थी. उनके द्वारा सामान सप्लाई के नाम पर जीएसटी भरना बताकर 34 करोड़ की जीएसटी क्लेम की गई.
कई फर्जी कंपनी का डायरेक्टर था विनोद सहाय
आरोपी विनोद कुमार सहाय ने आधा दर्जन ऐसी फर्जी फर्म भी बनाकर रखी थी, जिसमें वह खुद डायरेक्टर था. इनमें सिटरोन मिनिरल्स प्राइवेट लिमिटेड, गेरीसन कॉल प्राइवेट लिमिटेड, आर्या कोल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, वी के मिनिरल्स प्राइवेट लिमिटेड और जेएमएसडी प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं. इन्हीं फर्जी कंपनियों के जरिए वह जीएसटी भरने की बात कर सरकार को चूना लगा रहा था.
आदिवासी समाज ने वन अधिकार नियमों में बदलाव का किया कड़ा विरोध, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
गरियाबंद। गरियाबंद में आज आदिवासी समाज ने वन अधिकार नियमों में बदलाव का कड़ा विरोध किया। आदिवासी विकास परिषद, ग्राम सभा फेडरेशन, एकता परिषद के बैनर तले जिला पंचायत सदस्य सदस्य लोकेश्वरी नेताम और संजय नेताम के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में आदिवासियों ने गरियाबंद में रैली निकाली। मजरकट्टा स्थित परिषद भवन से कलेक्टोरेट तक 5 किमी आदिवासियों ने बरसते पानी में पैदल यात्रा किया। कलेक्टोरेट पहुंच मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप वन अधिकार से जुड़े नियमों में हुए परिवर्तन को हटाते हुए यथावत रखने की मांग किया है।

कानून से छेड़ छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा वनवासी
आदिवासी नेता लोकेश्वरी नेताम और संजय नेताम ने कहा कि नए प्रावधान कर केवल वन के हित को ध्यान में रखा गया। वन क्षेत्र में रहने वाले मूलनिवासी की चिंता वन विभाग के अफसर नहीं कर सकते। वन अधिकार कानून में आदिवासी और वनवासियों के जिस हित का ध्यान रखा गया था, उसे अब छेड़छाड़ किया गया है। हम सवाल पूछते हैं कि कानून में छेड़छाड़ का अधिकार किसने दिया? अधिकारियों के लिए न्यायालय के अलावा जंगी लड़ाई लड़ने हम तैयार हैं। सप्ताह भर के भीतर हमारी मांगे नहीं मानी गई, तो सड़क की लड़ाई लड़ेंगे, जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी।

