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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रोफेसरों की सीधी भर्ती पर रोक, पदोन्नति से ही होंगे चयन
रायपुर। मेडिकल कॉलेजों में अब प्रोफेसरों के पद केवल प्रमोशन के जरिए ही भरे जाएंगे। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को इस मामले में अहम फैसला सुनाया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 10 दिसंबर 2021 को जारी अधिसूचना को खारिज कर दिया। इस अधिसूचना में प्रोफेसरों के खाली पदों को एक बार की विशेष छूट देकर सीधी भर्ती से भरने का प्रावधान किया गया था।
जानिये क्या था मामला
विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर कार्यरत डॉ. शशिकला कोसम, डॉ. नरेंद्र प्रसाद नरसिंग, डॉ. ओंकार कश्यप समेत कई अन्य शिक्षकों ने वर्ष 2021 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2013 के नियम 6 के अनुसार प्रोफेसर का पद 100 प्रतिशत पदोन्नति से ही भरा जाना चाहिए। जब तक नियमों में कोई औपचारिक संशोधन न किया जाए, तब तक अधिसूचना के माध्यम से सीधी भर्ती की अनुमति देना असंवैधानिक है।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राज्य सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के पदोन्नति के अधिकार का हनन करता है और मनमाना है। उन्होंने कोर्ट से इस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खुलने से प्रोफेसरों की भारी कमी हो गई थी। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की मान्यता बनाए रखने के लिए आवश्यक फैकल्टी उपलब्ध कराना जरूरी था। इस स्थिति में नियमों के तहत राज्यपाल को छूट देने का अधिकार है और अधिसूचना उसी शक्ति का प्रयोग करते हुए जारी की गई थी।
कोर्ट का निर्णय
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि 2013 के भर्ती नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि प्रोफेसरों के पद 100 प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाएंगे। नियमों में कोई संशोधन किए बिना अधिसूचना के जरिए सीधी भर्ती की अनुमति देना उचित नहीं है। अदालत ने इस अधिसूचना को रद्द करते हुए कहा कि राज्य सरकार नियमों में आवश्यक संशोधन कर सकती है, लेकिन जब तक ऐसा न हो, चयन केवल प्रमोशन के आधार पर ही होगा।
इस फैसले से राज्य के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसरों को बड़ा राहत मिली है। अब उन्हें उम्मीद है कि रिक्त पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। हालांकि, इससे सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि प्रोफेसरों की कमी को किस तरह पूरा किया जाए ताकि मेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर कोई संकट न आए।
गर्ल्स स्कूल को किया गया ब्वाइज स्कूल में मर्ज, आक्रोशित छात्राओं ने 2 घंटे तक कर दिया सड़क जाम
रायपुर। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया जब से हुई है, तब से शिक्षा विभाग में शिकायतों की लंबी फेहरिस्त बन गयी है। कई जगहों पर अफसरों की मनमर्जी पर कार्रवाई हुई है, तो कई जगहों पर छात्र-छात्राओं का आक्रोश भी भड़क रहा है। ऐसा ही मामला राजिम में सामने आया है। युक्तियुक्तकरण के तहत राजिम के फिंगेश्वर कन्या शाला को बॉयज स्कूल में मर्ज कर दिया गया।
अब इस आदेश के खिलाफ छात्राओं ने शनिवार को सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं ने राजिम–महासमुंद मार्ग को दो घंटे तक जाम रखा और मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।फिंगेश्वर कन्या शाला को बॉयज शाला में मर्ज किए जाने के आदेश ने क्षेत्र की छात्राओं और अभिभावकों में नाराजगी पैदा कर दी है।
शनिवार को छात्राओं ने विरोध स्वरूप सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया और राजिम–महासमुंद मुख्य मार्ग को करीब दो घंटे तक जाम कर दिया। इस दौरान छात्राओं ने जमकर नारेबाजी की और जिला प्रशासन से आदेश वापस लेने की मांग की।
पूर्व में भी सौंपा था ज्ञापन
प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि वे पहले ही कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को ज्ञापन सौंप चुकी हैं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि कई बार निवेदन करने के बावजूद प्रशासन ने अब तक मर्ज आदेश रद्द करने पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
छात्रा संध्या बंजारे ने कहा, “हमारे स्कूल को बॉयज स्कूल में मर्ज कर दिया गया है। इससे हमारी पढ़ाई पर असर पड़ेगा। हम चाहते हैं कि हमारा स्कूल जैसा पहले था, वैसा ही रहे।”
पालकों और शिक्षकों का भी समर्थन
इस आंदोलन में केवल छात्राएं ही नहीं, बल्कि उनके पालक और कन्या शाला के शिक्षक भी शामिल हुए। पालकों का कहना है कि कन्या शाला बंद होने से बेटियों की शिक्षा प्रभावित होगी। कई छात्राओं को दूर-दराज के स्कूल में पढ़ने के लिए जाना पड़ेगा, जिससे उनकी पढ़ाई छूटने का खतरा है।
अधिकारियों ने दिया आश्वासन
प्रदर्शन की सूचना मिलने पर एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और छात्राओं को समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने छात्राओं को आश्वासन दिया कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कलेक्टर को ज्ञापन सौंप दिया जाएगा और एक सप्ताह में निर्णय लेने की कोशिश की जाएगी।
आंदोलन फिलहाल खत्म, चेतावनी बरकरार
अधिकारियों के आश्वासन के बाद छात्राओं ने फिलहाल अपना आंदोलन खत्म कर दिया और एसडीएम को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। हालांकि छात्राओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों में आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे आगे और बड़ा आंदोलन करेंगी।स्थानीय लोगों का कहना है कि कन्या शाला को बॉयज स्कूल में मर्ज करने से लड़कियों की पढ़ाई में बाधा आ सकती है।
NHM की हड़ताल को लेकर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा बयान
रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारी लगातार 25वें दिन भी हड़ताल पर डटे रहे। कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से आंदोलन शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांगों में सेवा का नियमितीकरण, वेतनवृद्धि, भत्तों में बढ़ोतरी और कार्य परिस्थितियों में सुधार शामिल हैं। लंबे समय से चली आ रही इन मांगों के समाधान की दिशा में राज्य सरकार ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन कर्मचारी हड़ताल खत्म करने को तैयार नहीं हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने की कर्मचारियों से अपील
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने रविवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। “मैं सभी NHM कर्मचारियों से अपील करता हूं कि वे हड़ताल समाप्त कर सोमवार से काम पर लौटें। ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं, शेष बिंदुओं पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। सरकार के साथ मिलकर हम पत्राचार करेंगे और समाधान निकालेंगे,” मंत्री ने कहा।
सरकार ने उठाए कदम
भाजपा सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए पहले ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। बताया गया कि समिति ने कर्मचारियों की 10 में से 5 प्रमुख मांगों पर सहमति दे दी है और इन्हें लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसमें वेतन संरचना में सुधार, मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश और कार्यस्थल सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
कर्मचारियों का रुख
NHM कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होते, वे हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। एक कर्मचारी नेता ने कहा, “हमने कई बार सरकार से बातचीत की है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला है। इस बार हम तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक हमें लिखित आदेश नहीं मिल जाते।”
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
लगातार हड़ताल के कारण राज्य के ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। टीकाकरण कार्यक्रम, मातृ-शिशु स्वास्थ्य योजनाएं और नियमित जांच-पड़ताल में देरी हो रही है। मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सरकार का संदेश
सरकार का कहना है कि लंबा आंदोलन जनहित में नहीं है और इससे सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “हम कर्मचारियों की जायज मांगों को स्वीकार कर रहे हैं, इसलिए अब उन्हें जनता की सेवा में लौटना चाहिए। आंदोलन से केवल स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा रही है।”
वित्त विभाग में अधिकारियों के हुए तबादले, देखिये पूरी लिस्ट
रायपुर। राज्य सरकार ने वित्त सेवा के कई अफसरों का तबादला किया है। तीन संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारियों का भी तबादला हुआ है, वहीं उप संचालक और वरिष्ठ लेखा अधिकारी स्तर के अधिकारी भी इधर से उधर किये गये हैं।


राजधानी में धरना-प्रदर्शन अब नहीं होगा आसान, चार विभागों से लेनी होगी अनुमति
रायपुर। राजधानी रायपुर में अब सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने के नियम सख्त कर दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने नया आदेश जारी कर नगर निगम को कार्यक्रमों की अनुमति देने का अधिकार सौंप दिया है। अब शहर में किसी भी प्रकार का पंडाल लगाना, अस्थायी निर्माण करना, रैली या जुलूस निकालना हो, तो आयोजनकर्ता को पहले निगम से अनुमति लेनी होगी।
7 दिन पहले देना होगा आवेदन
आदेश के अनुसार, आयोजन से कम से कम सात दिन पहले नगर निगम के जोन कार्यालय में आवेदन देना होगा। आवेदन में आयोजन स्थल, समय, अपेक्षित भीड़, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य विवरण का उल्लेख करना अनिवार्य होगा।
चार विभागों से लेना होगा NOC
नगर निगम की अनुमति के साथ-साथ चार विभागों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) भी लेना जरूरी होगा:
राजस्व विभाग: आयोजन स्थल और भूमि उपयोग की अनुमति के लिए।
पुलिस विभाग: कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए।
होमगार्ड/अग्निशमन विभाग: अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन इंतजामों के लिए।
विद्युत विभाग: बिजली कनेक्शन और सुरक्षा की जांच के लिए।
निगम का कहना है कि इन NOC के बिना अनुमति पत्र जारी नहीं किया जाएगा।
उद्देश्य – सुरक्षा और अनुशासन
नगरीय प्रशासन विभाग का कहना है कि शहर में बढ़ते आयोजनों के कारण ट्रैफिक, सुरक्षा और स्वच्छता की समस्या सामने आ रही थी। कई बार बिना अनुमति पंडाल बनाए जाते हैं, जिससे हादसे की आशंका रहती है। नया नियम व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।
जुलूस और रैली पर भी लागू होंगे नियम
अब राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक आयोजनों के लिए भी यह नियम लागू होंगे। कोई भी रैली, जुलूस या सार्वजनिक सभा आयोजित करने से पहले निगम से अनुमति लेनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जुर्माना और आयोजन रद्द करना भी शामिल है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भू-अर्जन और सड़क निर्माण में तेजी लाने के दिए निर्देश, धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने नवा रायपुर के विश्राम भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में सड़क निर्माण और अन्य परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई. उन्होंने भू-अर्जन, प्राक्कलन, निविदा, कार्य अनुबंध और कार्यादेश से संबंधित कार्यवाहियों को अगली बैठक से पहले पूरा करने के निर्देश दिए.
उप मुख्यमंत्री ने सड़क, सेतु और भवन निर्माण परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया. उन्होंने जिला कलेक्टरों के साथ मिलकर भू-अर्जन प्रक्रिया में तेजी लाने और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने को कहा. वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में सक्रियता और गंभीरता दिखाने के लिए निर्देशित किया.
श्री साव ने बारिश के तुरंत बाद प्रदेशभर में सड़कों की मरम्मत युद्धस्तर पर शुरू करने और दिसंबर तक इसे पूरा करने का आदेश दिया. उन्होंने डीपीआर तैयार करते समय परियोजनाओं का सटीक मूल्यांकन करने की सलाह दी ताकि बजट और समय-सीमा में बदलाव की जरूरत न पड़े. राष्ट्रीय राजमार्गों और एडीबी परियोजनाओं के अपूर्ण कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई.
बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, सेतु बंध और सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंता मौजूद थे. उप मुख्यमंत्री ने सभी को अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने और प्रस्तावित कार्यों के लिए त्वरित मंजूरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
GST सुधार से हर परिवार को लाभ, उद्योग-व्यापार को मिलेगी नई गति, मुख्यमंत्री बोले- कांग्रेस काल की कर-प्रणाली से मिली मुक्ति
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में जीएसटी में हुए सुधार देश के डेढ़ सौ करोड़ नागरिकों के जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आए हैं। आयकर में ऐतिहासिक छूट के बाद अब जीएसटी स्लैब का सरलीकरण और रेट में अभूतपूर्व सुधार न केवल आम आदमी के जीवन को खुशहाल बनाएंगे बल्कि व्यापार एवं उद्योग जगत को भी नई गति प्रदान करेंगे। इससे लोगों की बचत में ऐतिहासिक वृद्धि होगी और जीएसटी कानूनों के सरलीकरण से व्यापारी अपने कार्य और अधिक सुगमता से कर सकेंगे। मां शक्ति की आराधना के पावन पर्व ‘नवरात्रि’ से लागू होने वाले ये नए प्रावधान देश को आर्थिक रूप से और भी शक्तिशाली बनाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह बात कही।
कांग्रेस काल की कर-प्रणाली से मिली मुक्ति
मुख्यमंत्री श्री साय ने याद दिलाया कि कांग्रेस शासनकाल में 17 प्रकार के टैक्स और 13 प्रकार के सेस लागू थे। 101वें संविधान संशोधन द्वारा 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने से पहले तक यही व्यवस्था प्रचलित थी। प्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में आयकर दर एक समय अधिकतम 97.5 प्रतिशत तक पहुँच गई थी।
पिछले वर्ष 12 लाख वार्षिक आय को टैक्स-फ्री करने के बाद अब जीएसटी में चार स्लैब की जगह केवल दो स्लैब रखे गए हैं। सभी उपयोगी वस्तुओं को करमुक्त किया गया है और अनेक उत्पादों पर कर में 10 प्रतिशत तक की कटौती की गई है।
90 प्रतिशत सामान सस्ते – हर परिवार को 50 हजार की बचत
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन सुधारों से रोजमर्रा की वस्तुएं—तेल, शैम्पू, टूथपेस्ट, मक्खन, पनीर, सिलाई मशीन, ट्रैक्टर व उसके कलपुर्जे, अन्य कृषि उपकरण, व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, शैक्षणिक वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक एवं ऑटोमोबाइल उत्पाद—सस्ते हो गए हैं। वस्त्र उद्योग विशेष रूप से निर्यात के क्षेत्र में इससे लाभान्वित होगा। एक औसत परिवार, जो प्रतिवर्ष 3 से 3.5 लाख रुपये खर्च करता है, को कम से कम 50 हजार रुपये की बचत होगी।
किसानों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सुधार कृषि क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, रोटावेटर पर जीएसटी घटाकर मात्र 5 प्रतिशत कर दिया गया है। जैव-कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर कर कम किया गया है। केवल ट्रैक्टर की खरीदी पर ही किसानों को 25 हजार से 63 हजार रुपये तक की बचत होगी। उदाहरण स्वरूप, 9 लाख रुपये के ट्रैक्टर पर 65 हजार रुपये की बचत होगी, वहीं 35 HP का लगभग 5.8 लाख का ट्रैक्टर अब 41 हजार रुपये सस्ता मिलेगा। देशभर में प्रतिवर्ष बिकने वाले लगभग 9 लाख ट्रैक्टरों से किसानों को 6 हजार करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी। छत्तीसगढ़ में 30–35 हजार ट्रैक्टर प्रतिवर्ष बिकने का अनुमान है, जिससे राज्य के किसानों को लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। केवल ट्रैक्टर के टायर पर ही 7 हजार रुपये की बचत होगी। हार्वेस्टर, बागवानी मशीन, खाद निर्माण मशीन, जैव कीटनाशक, सिंचाई मशीन, ड्रिप इरीगेशन सिस्टम, स्प्रिंकलर आदि पर भी केवल 5 प्रतिशत कर लगने से उत्पादन लागत घटेगी और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा।
स्वास्थ्य और जीवन बीमा पूरी तरह टैक्स-फ्री
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस सुधार का एक सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा उत्पादों पर कर पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। यह कदम सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए ऐतिहासिक है। इससे हर नागरिक के लिए बीमा सुनिश्चित करना संभव होगा और गरीब से गरीब व्यक्ति को भी गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
छत्तीसगढ़ को विशेष लाभ
तेंदूपत्ता और लघु वनोपज प्रोसेसिंग मशीनों पर जीएसटी दर कम करने से बस्तर और सरगुजा अंचल के संग्राहकों को बड़ा लाभ होगा। इससे प्रदेश में तेंदूपत्ता जैसे लघु वन्य उत्पादों की मांग बढ़ेगी और राज्य की आमदनी भी बढ़ेगी।
इसी प्रकार, कोयले पर सेस हटाने का निर्णय भी छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आर्थिक सुधार और बेहतरीन प्रबंधन के लिए राज्य को केवल प्रोत्साहन राशि के रूप में 6,200 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।
संघीय सहयोग का उत्कृष्ट मॉडल
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज जीएसटी वास्तव में ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ बन गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में गठित जीएसटी काउंसिल लोकतांत्रिक संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है। छत्तीसगढ़ से पदेन सदस्य के रूप में वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने भी इस सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि, नया जीएसटी सुधार वास्तव में क्रांतिकारी आर्थिक युग का सूत्रपात है। इस सुधार से गरीब और मध्यवर्ग सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में यह सुधार एक नए सुनहरे युग की शुरुआत है। किसानों को अधिक सक्षम बनाकर और रोजगार के अवसर बढ़ाकर यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के सपनों को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगी।
सांसद खेल महोत्सव: निजी विश्वविद्यालयों को सौंपी गई खेल आयोजन की जिम्मेदारी
रायपुर। रायपुर लोकसभा क्षेत्र में 21 सितम्बर से 25 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले सांसद खेल महोत्सव के सफल एवं सुचारू संचालन हेतु आज नया रायपुर स्थित निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल ने की। इस अवसर पर अतुल शुक्ला सहित रायपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं रजिस्ट्रार उपस्थित रहे।
बैठक में सांसद खेल महोत्सव को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई तथा प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय को खेल आवंटित किए गए, जिनके आयोजन की जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय को सौंपी गई। इस पहल से महोत्सव में विश्वविद्यालय स्तर पर भी व्यापक सहभागिता सुनिश्चित होगी।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, सांसद खेल महोत्सव खेलों के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा मंच प्रदान करेगा। निजी विश्वविद्यालयों की सहभागिता से इस आयोजन को और मजबूती मिलेगी तथा महोत्सव का दायरा और विस्तृत होगा। हमारा प्रयास है कि रायपुर लोकसभा क्षेत्र का यह महोत्सव देश में खेल प्रतिभाओं को उभारने का एक आदर्श बने।

मेडिकल कॉलेज हॉस्टल व आवासीय भवन निर्माण में बड़ा गोलमाल, लेटलतीफी से सरकार को लगा करोड़ों का चूना, शासन ने मानी लापरवाही, कार्रवाई की शर्त पर अब राशि हुई जारी
रायपुर। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर परिसर में आवास गृह (2BHK एवं 3BHK) और छात्र-छात्रावास भवन निर्माण में हुई भारी देरी और लागत में हुई अप्रत्याशित वृद्धि को लेकर राज्य शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन ने इस परियोजना में हुई लापरवाही को स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, यह निर्माण कार्य वन विभाग से प्राप्त शासकीय भूमि पर होना था, लेकिन लंबे समय से परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पाई। निर्माण कार्य में हुई देरी से न केवल परियोजना अधूरी रही, बल्कि इसकी लागत भी काफी बढ़ गई। अब शासन ने पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति देते हुए ₹6139.31 लाख की राशि जारी करने की मंजूरी दी है।
स्वीकृति में यह स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के व्यय मद संख्या 67 और निर्माण कार्य (#97) के अंतर्गत यह राशि स्वीकृत की गई है। इस निर्णय को वित्त विभाग से भी सहमति मिल चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि यह परियोजना छात्रों और चिकित्सा महाविद्यालय के स्टाफ के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन लंबे समय से इसकी गति बेहद धीमी रही। इससे न केवल छात्रों को आवासीय सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, बल्कि शासन को अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की परियोजनाओं में समयबद्धता और जवाबदेही तय न की जाए, तो लागत बढ़ने और सार्वजनिक धन की बर्बादी के मामले लगातार सामने आते रहेंगे।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर किस स्तर की कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था लागू की जाती है।
राज्य शासन ने पं. जे.एन. स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर परिसर में आवासीय गृह (2BHK एवं 3BHK) तथा छात्र-छात्रावास भवन निर्माण के लिए पुनरीक्षित राशि स्वीकृत की है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी का आभार प्रकट किया है।
इस आशय के संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए 61.39 करोड़ रुपए की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। विभागीय जानकारी के अनुसार यह स्वीकृति चिकित्सा शिक्षा विभाग से संबंधित व्यय मद से दी गई है और वित्त विभाग ने भी अपनी सहमति प्रदान कर दी है।

एग्रीस्टेक और एकीकृत किसान पोर्टल में होगा किसानों का पंजीकरण, पंजीकृत किसानों से होगी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी
रायपुर। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल की अध्यक्षता में धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग की नीति निर्धारण से संबंधित निर्णय लेने हेतु गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हुई। बैठक में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी तथा राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा उपस्थित थे।

बैठक में आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों से भारत सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किए जाने के लिए समुचित एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। खरीफ वर्ष 2025-26 में किसानों का पंजीकरण एग्रीस्टेक पोर्टल के साथ-साथ एकीकृत किसान पोर्टल में किया जाएगा। किसान पंजीकरण का कार्य निर्धारित समय-सीमा में संपन्न करने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि किसानों को उनके द्वारा समर्थन मूल्य पर बेचे गए धान का भुगतान समय पर प्राप्त हो, इसके लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएँ। धान उपार्जन के लिए आवश्यक नये एवं पुराने जूट बारदाने की व्यवस्था समयानुसार सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई। धान की रिसाइक्लिंग रोकने हेतु प्रभावी प्रबंध करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध धान की रोकथाम के लिए विशेष जाँच दल गठित करने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार, उपार्जित धान की मिलिंग हेतु आवश्यक तैयारियाँ करने पर भी बल दिया गया।
इस अवसर पर बैठक में सचिव खाद्य विभाग रीना बाबा साहेब कंगाले, सचिव वित्त विभाग मुकेश बंसल, सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग रजत कुमार, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ किरण कौशल, संयुक्त सचिव कृषि विभाग राहुल देव तथा प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के. एन. कांडे उपस्थित थे।
राजनांदगांव में वायरोलॉजी लैब खोलने का प्रस्ताव पारित, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा – NMC के मापदंड को पूरा करने आवश्यक निर्देशों का हो पालन
रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के डीन एवं मेडिकल सुप्रीटेंडेंट की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वशासी समिति एवं प्रबंधकारिणी की बैठकों में स्वीकृत कार्यों की समीक्षा की गई। इसके अलावा मानव संसाधन के तहत नर्सिंग स्टाफ और पैरा मेडिकल पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। साथ ही राजनांदगांव में वायरोलॉजी लैब की स्थापना का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सभी मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल के चिकित्सक सेवा भावना के साथ काम करें और जन अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करें। बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए डीन और मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को स्वशासी समिति के माध्यम से 10 लाख रुपए तक के अति आवश्यक उपकरणों और दवाइयों की खरीदी के अधिकार को बढ़ाते हुए 20 लाख रुपए तक किए जाने पर चर्चा हुई। बैठक में NMC मापदंडों का गैप एनालिसिस भी प्रस्तुत किया गया।
बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि उपकरणों एवं दवाओं के अत्यधिक लंबित क्रय को कॉलेज स्तर पर पूरा करने के लिए CGMSC द्वारा मेडिकल कॉलेजों को त्वरित रूप से एनओसी मिले। साथ ही अग्रिम राशि को शीघ्र प्रदाय किए जाने के लिए निर्देशित किया गया। साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत नवीन परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें नए मेडिकल कॉलेज, फिजियोथेरेपी कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं।
बैठक में अवसंरचना विकास के तहत छात्रावास भवन, कॉलेज भवन, आंतरिक सड़क, पेयजल व्यवस्था और विद्युतीकरण की दिशा में कार्य करने का निर्णय लिया गया। सुविधाओं के अंतर्गत उपकरण उपलब्धता, CGMSC को समय पर मांग पत्र प्रेषण, वित्तीय राशि के निर्गमन तथा खरीद प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। दवाइयों एवं उपभोग्य सामग्रियों की आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, डीकेएस एवं अन्य सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की सेवाओं और आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाताओं की मॉनिटरिंग पर भी चर्चा की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा एवं सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और मेडिकल सुप्रीटेंडेंट उपस्थित थे।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा ने की बस्तर ओलंपिक की तैयारियों की समीक्षा
रायपुर। उप मुख्यमंत्री साव के नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आज आयोजित बैठक में पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी बस्तर ओलंपिक का वृहद आयोजन करने इसकी रुपरेखा और व्यवस्थागत तैयारियों पर गहन चर्चा की गई।
आगामी अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले बस्तर ओलंपिक में तीन स्तरों विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें बस्तर संभाग के सातों जिलों और 32 विकासखंडों के 40 हजार से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे। खेल और युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संयुक्त सचिव सुखनाथ अहिरवार और संचालक तनूजा सलाम भी बैठक में शामिल हुईं।
बस्तर के युवाओं को खेल से जोड़ना चाहती है सरकार : अरुण साव
उप मुख्यमंत्री, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बैठक में कहा कि बस्तर ओलंपिक केवल खेलों का आयोजन नहीं है, बल्कि विकास और खेल का संगम है। यह संगठित रूप से बस्तर के युवाओं के सशक्तीकरण और उनमें नेतृत्व के विकास की पहल है। राज्य सरकार इन रचनात्मक पहलों से बस्तर में भयमुक्त वातावरण बनाकर युवाओं को खेल और उत्सव से जोड़ना चाहती है। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के सफल आयोजन के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर पुख्ता कार्ययोजना तैयार करते हुए आयोजन के ध्येय वाक्य ‘करसाय ता बस्तर बरसाय ता बस्तर’ (खेलेगा बस्तर जीतेगा बस्तर) को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। साव ने यूथ आइकॉन घोषित किए गए पिछले वर्ष के विजेता खिलाड़ियों, बस्तर संभाग के सभी खेल अधिकारियों, पीटीआई, पंचायत सचिवों, ‘बिहान’ की महिलाओं और खेल संघों को सक्रियता से जोड़कर बस्तर ओलंपिक को जन-जन तक पहुंचाने को कहा।
गांवों के बच्चों की भागीदारी सुनिश्चत करें : विजय शर्मा
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों से कहा कि बस्तर ओलंपिक को यादगार बनाने सभी विभाग अपनी-अपनी भूमिका और कार्यों के अनुरूप जिम्मेदारियों का वहन करें। बस्तर के ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों की भागीदारी उनका आत्मविश्वास बढ़ाएगी और सकारात्मक वातावरण तैयार करेगी। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए इसमें बस्तर के सभी गांवों के सभी बच्चों की भागीदारी सुनिश्चत करने को कहा। शर्मा ने आयोजन की तैयारियों को मूर्त रूप देने जल्दी ही इससे जुड़े विभागों, अधिकारियों और संस्थाओं की बस्तर में भी बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए जिससे की तैयारियों को और गति दी जा सके।
नक्सल हिंसा के दिव्यांग और आत्मसमर्पित नक्सली भी दिखाएंगे दमखम
विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर करीब डेढ़ महीने तक चलने वाले बस्तर ओलंपिक में 11 खेलों को शामिल किया गया है। जूनियर वर्ग में बालक और बालिकाओं तथा सीनियर वर्ग में महिला और पुरूषों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी। नक्सल हिंसा के दिव्यांगों तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी संभाग स्तर पर पुरूषों और महिलाओं के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बस्तर ओलंपिक के दौरान एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में पूरे बस्तर के खिलाड़ी अपना खेल कौशल दिखाएंगे।
मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने की नक्सल प्रभावित जिलों में विकास कार्यों की समीक्षा
रायपुर। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक में बस्तर, सुकमा, दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा, उत्तर बस्तर कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और गरियाबंद जिलों में हितग्राही मूलक कार्यक्रमों और योजनाओं की समीक्षा की गई।
प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने नक्सल प्रभावित जिलों में मनरेगा, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, जनधन खाता, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आधार कार्ड सहित अन्य हितग्राही मूलक कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की।


बैठक में बताया गया कि एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों में लगभग 99 प्रतिशत से अधिक लोगों का आधार पंजीकरण पूरा कर लिया गया है। इसी प्रकार लगभग 28 लाख 18 हजार 616 किसानों का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत पंजीकरण कर उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 26 लाख 21 हजार 491 हितग्राहियों के बैंक खाते खोले गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 35 लाख 66 हजार 409 हितग्राहियों को गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ग्रामीण इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मोबाइल टावर स्थापित किए जा रहे हैं। क्षेत्र में लोगों को अधिक से अधिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु विभिन्न बैंकों और डाकघरों की शाखाएं खोली जा रही हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सभी पात्र हितग्राहियों को नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए राशन कार्ड बनाए गए हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि क्षेत्र के सभी पात्र मनरेगा हितग्राहियों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु उनका जॉब कार्ड अवश्य प्रदान किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी आवासों का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए तथा सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने निर्देश दिया कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत शेष हितग्राहियों का शीघ्र सर्वे कर उन्हें लाभान्वित किया जाए। आत्मसमर्पित नक्सलियों को कौशल विकास योजना के तहत क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाए। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की भवन-विहीन शालाओं के भवन शीघ्र निर्मित किए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय एक ही परिसर में हों।
वीडियो कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, वित्त विभाग के सचिव मुकेश बंसल, शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, उच्च शिक्षा, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव डॉ. रवि मित्तल, आयुक्त बस्तर संभाग तथा पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सहित बस्तर, सुकमा, दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा, उत्तर बस्तर कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और गरियाबंद जिलों के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शामिल थे।
हेमंत उपाध्याय को राज्य सरकार ने किया सस्पेंड, आदेश हुआ जारी
रायपुर। शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं और गंभीर कदाचार के आरोपों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। राज्य शासन ने दुर्ग संभाग के प्रभारी संयुक्त संचालक (शिक्षा) हेमन्त उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनका मुख्यालय अब लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर नियत किया गया है।
संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग सरगुजा, अंबिकापुर द्वारा जारी पत्र (कमांक/2549/स्था.2/वित्त/2025, दिनांक 06.09.2025) में स्पष्ट किया गया है कि हेमन्त उपाध्याय के कार्यकाल के दौरान कई अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही यह भी पाया गया कि उन्होंने अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता का परिचय दिया है।
राज्य शासन ने इस कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत गंभीर कदाचार माना है। शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 (1)(क) के तहत यह निलंबन आदेश जारी किया है।निलंबन के बाद शासन ने दुर्ग संभाग में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए तत्काल व्यवस्था की है। आर.एल. ठाकुर, उपसंचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को दुर्ग संभाग के संयुक्त संचालक (शिक्षा) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
निलंबन अवधि के दौरान हेमन्त उपाध्याय को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई एक लंबी जांच प्रक्रिया के बाद हुई है। जांच में कई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के सबूत सामने आए थे। माना जा रहा है कि शासन आगे इस प्रकरण की विभागीय जांच भी कर सकता है।
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग के भीतर हलचल मच गई है। कर्मचारियों और अधिकारियों में चर्चा है कि यह कदम शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है। शासन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।अब सबकी निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं कि क्या आगे और अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला यहीं पर समाप्त होगा।

कांकेर सांसद भोजराज नाग द्वारा चुनाव याचिका के खिलाफ दायर आपत्तियों को उच्च न्यायालय ने किया खारिज
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांकेर संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित सांसद भोजराज नाग की ओर से दायर उस अंतरिम आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका को प्रथम दृष्टया निरस्त करने की मांग की थी. न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने 11 सितंबर को आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने लोकसभा चुनाव 2024 की मतगणना में हुई कथित अनियमितताओं के पर्याप्त तथ्य पेश किए हैं, इसलिए मामला मेरिट पर सुनवाई योग्य है.
कांकेर संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित सांसद भोजराज नाग के खिलाफ कांकेर निवासी बिरेश ठाकुर ने 18 जुलाई 2024 को चुनाव याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव परिणाम रद्द करने, कई बूथों की पुनः मतगणना और 15 मतदान केंद्रों पर पुनः मतदान की मांग की थी. याचिका में आरोप है कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी व छेड़छाड़, वोटिंग डेटा के प्रसारण में देरी और वोटों की गिनती में गंभीर अनियमितताएं हुईं.
कई मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान और गई. गिनती की मांग की याचिकाकर्ता ने गोंडरदेही, डोंडी लोहारा और कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों के बूथों पर वोटों के अंतर और डेटा ट्रांसमिशन में हेरफेर की आशंका जताई है. निर्वाचित सांसद भोजराज नाग ने दलील दी कि याचिका में भ्रष्ट आचरण का कोई ठोस आरोप नहीं है, इसलिए यह रिपजेंटेशन आफ पीपुल एक्ट, 1951 की धारा 81, 82 और 83 का उल्लंघन है और इसे खारिज किया जाना चाहिए. साथ ही चुनाव आयोग को पक्षकार नहीं बनाया गया, इसलिए याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. याचिका वकील के जरिए दाखिल की गई, जबकि कानून के मुताबिक उम्मीदवार को खुद याचिका दाखिल करनी चाहिए. हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन नवंबर 2025 को निर्धारित की है. अब अदालत याचिकाकर्ता के आरोपों और साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर यह तय करेगी कि कांकेर लोकसभा चुनाव 2024 का परिणाम बरकरार रहेगा या नहीं.
महिला सरपंचों के लिए स्वच्छ एवं हरित पंचायत कार्यशाला का हुआ आयोजन
रायपुर। कलेक्टर डॉ गौरव सिंह एवं जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन के मार्गदर्शन में शहीद स्मारक भवन में स्वच्छ एवं हरित पंचायत महिला सरपंच कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला यूनिसेफ, एसीई एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
कार्यशाला में महिला सरपंचों को ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, सामुदायिक शौचालय, सीवेज प्रबंधन (एफएसटीपी) और ग्राम पंचायत नीड्स एसेसमेंट जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही विशेषज्ञों ने स्वच्छ एवं हरित पंचायत की अवधारणा को ग्राम स्तर पर लागू करने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
इस अवसर पर रायपुर जिले की 12 महिला सरपंचों ने अपने पंचायतों में संचालित स्वच्छता और हरित गतिविधियों के अनुभव को बताया और कार्यशाला में लाइफ़ मिशन की अवधारणाओं पर भी चर्चा हुई।
इस कार्यक्रम में (एसबीएम-जी) से डॉ. रूपेश राठौड़ और अभिलाषा आनंद, (यूनिसेफ) से बिराजा सतपथी और आशीष कुमार ,(एसीई) से महेश अग्रवाल, सुशील कुमार और डॉ. सम्पदा साहू सहित जिला पंचायत रायपुर से सुजाता नरेन्द्र सिंह, भगवती शर्मा और आशकरन बंजारे उपस्थित रहे।
इस कार्यशाला का उद्देश्य महिला सरपंचों को तकनीकी ज्ञान और नेतृत्व क्षमता से सशक्त बनाना तथा ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता और हरित पहल को स्थायी स्वरूप देना था।
रायपुर से दुर्ग तक गूंजेगी कांग्रेस की पदयात्रा, सचिन पायलट संभालेंगे कमान
रायपुर। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बाद अब कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में अपना अभियान और तेज कर दिया है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट 16 से 18 सितंबर तक राज्य में पदयात्रा करेंगे और जनसभाओं को संबोधित करेंगे।
कांग्रेस ने इस अभियान को “वोट चोर गद्दी छोड़” के नारे के साथ और बड़ा रूप देने का ऐलान किया है। सचिन पायलट की तीन दिवसीय पदयात्रा रायगढ़ से शुरू होगी और दुर्ग तक पहुंचेगी।
कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है:
16 सितंबर: रायगढ़ से कोरबा तक पदयात्रा और सभाएं।
17 सितंबर: मुंगेली और कोरबा में जनसंपर्क और सभाएं।
18 सितंबर: राजनांदगांव से दुर्ग तक पदयात्रा और बड़ी सभा।
इस दौरान कांग्रेस हस्ताक्षर अभियान भी चलाएगी और कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेंगे। इस यात्रा में सभी प्रभारी सचिवों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सभी बड़े नेता शामिल होंगे।
पार्टी का दावा है कि यह अभियान राज्यभर में जनता का जोश बढ़ाएगा और आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मजबूत समर्थन दिलाएगा।