रायपुर। गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की झलक देखने को मिलेगी। रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह के लिए छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन किया है।
इस डिजिटल संग्रहालय का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती पर नवा रायपुर अटल नगर में किया था। झांकी के चयन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बधाई देते हुए कहा छत्तीसगढ़ की झांकी के माध्यम से आदिवासी समाज की देशभक्ति, अद्भुत वीरता और अपने सिद्धांतों के लिए प्राण न्योछावर करने की परंपरा पूरे देश को देखने को मिलेगी। यह हमारे राज्य के लिए गर्व और उत्साह का विषय है।
जनसंपर्क विभाग के सचिव रोहित यादव ने बताया कि सभी राज्यों द्वारा झांकी का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा गया था। चार महीने के लंबे चयन प्रक्रिया के बाद 17 राज्यों की झांकियों को अंतिम चयन में जगह मिली है, जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है। विशेषज्ञ समिति ने झांकी की विषयवस्तु और डिजाइन को बेहद सराहा और इसे अंतिम स्वीकृति दी।
जनसम्पर्क आयुक्त डॉक्टर रवि मित्तल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की झांकी भारत सरकार की थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ पर आधारित है। छत्तीसगढ़ की झांकी में आदिवासी समाज के उन वीर नायकों के बलिदान को दिखाया गया है, जिनके सम्मान में देश का पहला डिजिटल संग्रहालय बनाया गया है। उन्होंने बताया डिजिटल संग्रहालय जनजातीय विद्रोहों की वीरता, एकजुटता और स्वतंत्रता के प्रति समर्पण को नई पीढ़ी तक रोचक और प्रेरणादायक रूप में पहुंचाता है।
जनसंपर्क अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की झांकी की थीम और डिजाइन जनसंपर्क आयुक्त के मार्गदर्शन में तैयार की गई। इस थीम पर आधारित झांकी को पांच चरणों की कठिन प्रक्रिया से गुजरने के बाद अंतिम स्वीकृति प्राप्त हुई। रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के समक्ष थीम और डिजाइन चयनित करने के बाद झांकी का थ्रीडी मॉडल प्रस्तुत किया गया। अंततः, म्यूजिक के चयन के साथ झांकी को अंतिम मंजूरी दी गई।
रायपुर। राजधानी रायपुर के दुर्गा नगर क्षेत्र के करीब 120 परिवारों को शहर से बाहर पिरदा में विस्थापित किए जाने के प्रस्ताव का EWS परिवार संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ ने दुर्गा नगर में ही पुनर्वास की मांग को लेकर महापौर के नाम जोन कमिश्नर अरुण ध्रुव को ज्ञापन सौंपा। इस मुद्दे को लेकर झुग्गी बस्तीवासियों ने नगर निगम कार्यालय के सामने प्रदर्शन भी किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपने पुश्तैनी आवास से विस्थापन के किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि दुर्गा नगर में रहने वाले लगभग 120 परिवार पिछले 60–70 वर्षों से यहां निवासरत हैं और उन्हें करीब 15 किलोमीटर दूर पिरदा इलाके में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पूरी तरह अस्वीकार्य है। प्रस्तावित स्थान पर बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनकी आजीविका, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
बस्तीवासियों ने मांग की कि जिस तरह रायपुर के जलविहार कॉलोनी के निवासियों को तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) के पास ही बीएसयूपी कॉलोनी बनाकर पुनर्वासित किया गया, उसी तर्ज पर दुर्गा नगर में ही उन्हें पक्के आवास उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने बताया कि पिरदा में आवास की चाबी स्वीकार करने वाले कुछ परिवार भी अब इस फैसले के विरोध में उनके साथ खड़े हैं और सभी ने चाबियां वापस करने का निर्णय लिया है।
प्रदर्शनकारियों ने इस निर्णय को गरीब और दलित विरोधी बताते हुए कहा कि यह न केवल असंवैधानिक है, बल्कि पूरी तरह अव्यावहारिक भी है। उन्होंने सरकार से ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने की मांग की। बस्तीवासियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और व्यापक करने के लिए मजबूर होंगे और इस मामले के मानवीय समाधान की उम्मीद जताई।
रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी जितेंद्र शुक्ला केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जायेंगे। केंद्र सरकार ने IPS शुक्ला को अहम जिम्मेदारी सौंपी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) में ग्रुप कमांडर के पद पर नियुक्त किया है। ग्रुप कमांडर का पद पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर के समकक्ष माना जाता है। इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ सरकार को आधिकारिक पत्र भेजा गया है।
NSG में ग्रुप कमांडर की जिम्मेदारी संभालेंगे
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आईपीएस जितेंद्र शुक्ला (CH:2013) को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के सामान्य नियमों और शर्तों के तहत NSG में ग्रुप कमांडर (SP स्तर) के पद पर नियुक्त करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। पत्र में राज्य सरकार से अनुरोध किया गया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाए, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें। यह पत्र भारत सरकार के अवर सचिव संजीव कुमार की ओर से छत्तीसगढ़ शासन को भेजा गया है।
IPS जितेंद्र शुक्ला 2013 बैच के अफसर
जितेंद्र शुक्ला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद, जिसे अब प्रयागराज के नाम से जाना जाता है, के निवासी हैं। प्रशासनिक और पुलिस महकमे में उनकी पहचान एक सख्त, ईमानदार और रीढ़ की हड्डी वाले अधिकारी के रूप में रही है। उनके बारे में प्रचलित है कि वे न तो अड़ियल हैं और न ही अनावश्यक टकराव में विश्वास रखते हैं, लेकिन गैर-वाजिब दबाव या गलत आदेशों के आगे झुकना भी उनके स्वभाव में नहीं है।
चर्चाओं में रहे हैं IPS शुक्ला
अपने सेवा काल के दौरान आईपीएस जितेंद्र शुक्ला कई संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं। भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में कवासी लखमा से जुड़े मामलों और बाद में राजनांदगांव में उनका कार्यकाल भी काफी चर्चाओं में रहा। इन घटनाओं के चलते उनका नाम अक्सर सुर्खियों में रहा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने कार्यशैली से समझौता नहीं किया। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें कोरबा भेजा गया।
साय सरकार के कार्यकाल में जब वे दुर्ग जिले के पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ थे, उस दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर उनकी सख्त कार्यवाहियों ने भी खासा ध्यान खींचा। उत्पात मचाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के चलते मौजूदा सरकार के कुछ हलकों में नाराजगी की खबरें भी सामने आई थीं। बावजूद इसके, जितेंद्र शुक्ला ने हमेशा कानून के दायरे में रहते हुए निष्पक्ष कार्रवाई को प्राथमिकता दी।
आईपीएस जितेंद्र शुक्ला को छत्तीसगढ़ में सबसे लंबे समय तक बटालियन कमांडेंट रहने वाले अधिकारियों में भी गिना जाता है। अर्धसैनिक और पुलिस बल के संचालन में उनका अनुभव, अनुशासन और रणनीतिक समझ अब NSG जैसी विशिष्ट और संवेदनशील इकाई में देश की सुरक्षा के लिए काम आएगी।
रायपुर। शिक्षक एलबी के अंतरजिला स्थानांतरण और वरिष्ठता को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण के आधार पर किसी शिक्षक की वरिष्ठता घटाई नहीं जा सकती और ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन है।मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी कर्मचारी या शिक्षक का अंतरजिला स्थानांतरण होने पर उसकी वरिष्ठता में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
शिक्षक एलबी के अंतरजिला स्थानांतरण पर हाई कोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ में शिक्षक एलबी के अंतरजिला स्थानांतरण और वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी शिक्षक के स्थानांतरण के बाद उसकी वरिष्ठता में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट के इस फैसले को शिक्षक हित में एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी कर्मचारी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है और वह वहां जाकर ज्वाइन करता है, तो उसकी सेवा सभी प्रयोजनों के लिए निरंतर मानी जाएगी। केवल नई जगह पर पदस्थापना के आधार पर यह घोषित नहीं किया जा सकता कि वह कर्मचारी या शिक्षक जूनियर हो गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि इस आशय का कोई परिपत्र या आदेश जारी किया गया है, तो वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सीधा उल्लंघन होगा।
स्थानांतरण से वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि यदि किसी कर्मचारी या शिक्षक को एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित किया जाता है और वह वहां जाकर ज्वाइन करता है, तो उसकी सेवा सभी प्रयोजनों के लिए एकसमान मानी जाएगी। केवल नई जगह पर पदस्थापना के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि वह शिक्षक जूनियर हो गया है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस प्रकार का कोई परिपत्र या आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत स्थानांतरण के बाद वरिष्ठता घटाई जाती है, तो वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन होगा।
याचिकाकर्ता शिक्षकों को पदोन्नति का आदेश
हाई कोर्ट ने शिक्षक एलबी की याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य शासन को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता शिक्षकों को ग्रेडेशन लिस्ट में उचित वरिष्ठता प्रदान की जाए और उन्हें प्रधान पाठक के पद पर पदोन्नत किया जाए।यह मामला स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 मार्च 2021 को जारी की गई ग्रेडेशन सूची से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता शिक्षकों को उनके जूनियर्स के नीचे हेड मास्टर (प्राइमरी स्कूल) कैडर में दर्शाया गया था। इसी कारण उन्हें हेड मास्टर, प्री-मिडिल स्कूल के पद पर पदोन्नति से बाहर कर दिया गया था।
ओंकार प्रसाद वर्मा मामला बना प्रमुख याचिका
इन सभी मामलों में ओंकार प्रसाद वर्मा एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य को प्रमुख याचिका के रूप में लिया गया। याचिकाकर्ताओं की मांग लगभग एक जैसी थी। उन्होंने शिक्षक ई कैडर और प्रधान पाठक, प्राथमिक विद्यालय की वरिष्ठता सूची को पुनः तैयार करने तथा उसके आधार पर प्रधान पाठक, मिडिल स्कूल के पद पर पदोन्नति की मांग की थी।दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 मार्च 2021 को जारी की गई ग्रेडेशन सूची में याचिकाकर्ता शिक्षकों को उनके जूनियर्स के नीचे हेड मास्टर (प्राइमरी स्कूल) के कैडर में रखा गया था। इसके कारण उन्हें हेड मास्टर, प्री-मिडिल स्कूल के पद पर पदोन्नति से वंचित कर दिया गया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए शिक्षकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
2010 की नियुक्ति से वरिष्ठता देने की मांग
याचिकाकर्ता शिक्षकों ने अदालत को बताया कि उन्हें 10 दिसंबर 2010 को प्रधान पाठक, प्राथमिक विद्यालय के पद पर नियुक्त किया गया था। डीपीआई द्वारा उन्हें उसी समय हेड मास्टर प्राइमरी स्कूल के पद पर पदस्थ किया गया था। इसलिए उनकी वरिष्ठता भी नियुक्ति की मूल तिथि यानी 10 दिसंबर 2010 से मानी जानी चाहिए।
स्वेच्छा से कराया था अंतरजिला स्थानांतरण
याचिकाकर्ता शिक्षकों ने परिवार और स्वास्थ्य कारणों से अपने स्वयं के अनुरोध पर प्रारंभिक जिला बलौदाबाजार-भाटापारा से रायपुर जिले में स्थानांतरण कराया था। दोनों जिले रायपुर संभाग के अंतर्गत आते हैं और एक ही डीपीआई डिवीजन द्वारा नियंत्रित होते हैं, जो पदोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े मामलों को देखता है।
गलत तरीके से तैयार की गई ग्रेडेशन सूची
12 मार्च 2021 को शिक्षकों ने अपने संघ के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद 16 मार्च 2021 को संशोधित वरिष्ठता सूची जारी की गई, लेकिन इसमें भी याचिकाकर्ताओं की वरिष्ठता उनकी नियुक्ति की मूल तिथि के बजाय स्थानांतरण की तिथि से गिनी गई। इसी आदेश को शिक्षकों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि तैयार की गई ग्रेडेशन सूची कानून के विरुद्ध है और इससे कुछ शिक्षकों को अनुचित लाभ तथा याचिकाकर्ताओं को नुकसान पहुंचाया गया है। कोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि जिला परिवर्तन के आधार पर किसी शिक्षक को जूनियर घोषित करना असंवैधानिक है।हाई कोर्ट का यह फैसला न केवल याचिकाकर्ता शिक्षकों को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षक एलबी के लिए एक मजबूत कानूनी मिसाल भी साबित होगा। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अंतरजिला स्थानांतरण के नाम पर वरिष्ठता और पदोन्नति से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
रायपुर। राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 29,800 पेज की फाइनल चार्जशीट न्यायालय में पेश कर दी है। इस कंप्लेन के साथ ही घोटाले की परतें और गहराई से खुल गई हैं। ईडी ने इस बार प्रभारी आबकारी आयुक्त आशीष श्रीवास्तव का नाम भी आरोपी के तौर पर जोड़ा है, जो इससे पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की चार्जशीट में शामिल नहीं थे। घोटाले के समय आशीष श्रीवास्तव डिप्टी कमिश्नर के पद पर पदस्थ थे।
ईडी की फाइनल कंप्लेन के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि आशीष श्रीवास्तव को निलंबित किया जाएगा। वर्तमान में सचिव कम आयुक्त आर. संगीता अवकाश पर हैं और उनके 3 जनवरी को लौटते ही इस संबंध में औपचारिक कार्रवाई होने की संभावना है।
ईडी की जांच में सामने आया है कि घोटाले में कुल 31 अफसरों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने इन सभी अफसरों की चल-अचल संपत्तियों की विस्तृत जांच की, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कुछ अफसरों के पास उनकी वैध आय और वेतन से 100 गुना तक अधिक संपत्ति पाई गई है। ईडी ने इन अफसरों की कुल 38.21 करोड़ रुपये की संपत्ति को सीज कर दिया है। इसके साथ ही उनके सैलरी अकाउंट भी फ्रीज किए गए हैं। इतना ही नहीं, जिन अफसरों की पत्नियों के बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं, उन खातों को भी सीज कर दिया गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में 29 अफसरों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से 22 अफसरों को 7 जुलाई 2025 को निलंबित कर दिया गया था, जबकि शेष 7 अफसर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हाल ही में इस मामले में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास की गिरफ्तारी ने भी इस घोटाले को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि शराब घोटाले में करीब 90 करोड़ रुपये की बंदरबांट की गई। जांच के अनुसार, पूर्व आयुक्त निरंजन दास को 18 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई। इसके अलावा इकबाल खान को 12 करोड़, नोहर सिंह ठाकुर को 11 करोड़, नवीन प्रताप सिंह तोमर को 6.7 करोड़, राजेश जायसवाल को 5.79 करोड़ और अनिमेष नेताम को 5.28 करोड़ रुपये मिले। वहीं, दिनकर वासनिक, गंभीर सिंह, अरविंद पटले, आशीष कोसम, अनंत सिंह, सौरभ बक्शी, प्रकाश पाल, गरीबपाल सिंह और मोहित जायसवाल को 2 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत दिए जाने के सबूत भी ईडी को मिले हैं।
आशीष श्रीवास्तव को 54 लाख रुपये दिए जाने के प्रमाण भी जांच में सामने आए हैं।सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जो भी अफसर दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह भाजपा की सरकार है और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब पूरा मामला न्यायालय के समक्ष है और अदालत के निर्णय के अनुसार आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
रायपुर। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में नए साल की शुरुआत के साथ ही ठंड से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि दिसंबर के अंत तक तापमान में किसी खास बदलाव के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 48 घंटों तक न्यूनतम तापमान लगभग स्थिर बना रहेगा। इस दौरान प्रदेश के कुछ जिलों में एक-दो स्थानों पर शीत लहर चलने की संभावना जताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी दो दिनों के बाद न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, प्रदेश के कुछ चुनिंदा इलाकों में ठंड का असर अधिक रहने और शीतलहर की स्थिति बनने की आशंका बनी हुई है।
राजधानी रायपुर में देर शाम से लेकर सुबह तक बिना गर्म कपड़ों के रहना कठिन हो गया है, जबकि बाहरी इलाकों में ठंड ज्यादा होने के कारण दिन के समय भी लोगों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है।
रायपुर। भारत माला प्रोजेक्ट मुआवजा घोटाला में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार सुबह प्रदेश की राजधानी रायपुर और महासमुंद में छापा मारा है. यह कार्रवाई हरमीत खनूजा समेत उनके सहयोगियों और संबंधित अधिकारियों के ठिकानों पर की गई है. ईडी अधिकारियों की टीम मौके पर दस्तावेजों की जांच कर रही है.
जानकारी के मुताबिक, रायपुर और महासमुंद के करीबन 9 ठिकानों पर छापा पड़ा है. ईडी की कुल 7 अलग-अलग टीमों ने तड़के सुबह एक साथ छापेमार कार्रवाई को अंजाम दिया है. फिलाहाल ईडी अधिकारी मौके पर कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल अपकरणों की जांच कर रहे हैं.
महासमुंद में दो गाड़ियों में पहुंची टीम
बताया जा रहा है कि महासमुंद में कारोबारी जशबीर सिंह बग्गा के बसंत कॉलोनी स्थित घर में छापेमारी की गई है. वह होंडा शोरूम के मालिक हैं. ईडी की टीम कारोबारी के घर दस्तावेजों की जांच कर रही है. दो गाड़ियों में ईडी अधिकारियों की टीम पहुंची है.
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के रचना-कर्म और साहित्यिक अवदान को याद किया गया। इस अवसर पर साहित्य उत्सवों की प्रासंगिकता पर भी गहन संवाद स्थापित किया गया।
रायपुर में 23- 25 जनवरी को आयोजित होने वाले साहित्य उत्सव 2026 के परिप्रेक्ष्य में राजधानी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रायपुर साहित्य उत्सव की वैचारिक दिशा को विस्तार देने के साथ साथ साहित्य से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों पर सार्थक चर्चा की।
कार्यक्रम में डॉ सच्चिदानंद जोशी ने विनोद कुमार शुक्ल से अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा कि इतने बड़े साहित्यिक व्यक्तित्व से मिलने की अपेक्षा कुछ और थी, लेकिन जब वे उनसे मिले तो अत्यंत आश्चर्य हुआ कि वे कितने सरल और सहज हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी बातचीत आत्मीयता से भरी होती थी, जिसमें कहीं भी कोई अतिरेक नहीं होता। बिना लाग-लपेट के वे सीधे और स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कहते यही उनकी व्यक्तित्व और लेखन की सबसे बड़ी विशेषता थी।
छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए कहा कि युवा उनसे गहराई से आकर्षित रहते थे और उनके यहाँ हमेशा युवाओं की भीड़ लगी रहती थी।
श्री शर्मा ने कहा कि अपनी एक मुलाकात के दौरान उन्होंने उनसे पूछा कि आपने युवावस्था में अत्यंत गंभीर लेखन किया और अब बाल साहित्य की ओर क्यों आए। इस पर विनोद कुमार शुक्ल ने उत्तर दिया कि उन्हें लगता है वे बहुत गंभीर लेखन कर चुके हैं, लेकिन नई पीढ़ी के साथ शायद न्याय नहीं कर पाए। अब उन्हें लगता है कि नई पीढ़ी के साथ न्याय करने का अवसर उन्हें बाल साहित्य के माध्यम से मिला है।
साहित्यकार अलका जोशी ने विनोद कुमार शुक्ल के रचना-कर्म पर बात करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि वे मामूली और साधारण स्थितियों में भी सौंदर्य खोज लेते थे।
उन्होंने कहा कि नौकर की कमीज में विनोद कुमार शुक्ल ने अत्यंत सहजता के साथ सत्ता के प्रति रोष को व्यक्त किया है, बिना किसी आडंबर के। उनकी रचनाओं में वह अदृश्य व्यक्ति दिखाई देता है, जो अपने गुम हो जाने से बचने की कोशिश करता है।
अलका जोशी ने कहा कि चाहे नौकर की कमीज हो या एक दीवार में खिड़की रहती है, उनकी रचनाओं में ऐसे दृश्य आते हैं जहाँ पात्र अपनी सीमित परिस्थितियों के भीतर भी हाथी पर सवारी करने जैसा सपना देखता है। उनकी लेखन-खूबसूरती यह थी कि रचनाओं में दृश्य और परिस्थितियाँ इतनी जीवंत होती थीं कि पाठक धीरे-धीरे उनसे जुड़ता चला जाता था। पाठक की यह इन्वॉल्वमेंट ही उनकी रचनात्मक सफलता का मूल आधार रही।
इसके पहले के सत्र में साहित्य उत्सवों में कितना साहित्य विषय पर अपनी बात रखते हुए लेखक अनंत विजय ने कहा कि साहित्य में गहराई अनिवार्य है। गहराई होगी तभी साहित्य को उसके पाठक मिलेंगे और वही साहित्य समय के साथ अपनी स्थायी छाप छोड़ पाएगा।
उन्होंने साहित्य उत्सवों की संरचना पर जोर देते हुए कहा कि सत्रों की संरचना में ठोस कंटेंट होना चाहिए, तभी श्रोता और पाठक उनसे जुड़ पाएंगे।
अनंत विजय ने यह भी स्पष्ट किया कि रायपुर साहित्य उत्सव पूरी तरह व्यावसायिकता से दूर रहेगा। यदि किसी सत्र में फिल्म जगत से कोई व्यक्ति आमंत्रित किया जाता है, तो उसके साथ मंच पर एक साहित्यकार की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि साहित्य केंद्र में बना रहे।
उन्होंने कहा कि सेल्फी संस्कृति साहित्य की दुश्मन है। कई बार साहित्य उत्सवों में फिल्मी हस्तियों को केवल इसलिए बुलाया जाता है ताकि लोग उनके साथ सेल्फी लेने आएं, जबकि इससे साहित्य का मूल उद्देश्य पीछे छूट जाता है।
वहीं, साहित्यकार अनिल जोशी ने भी इस विषय पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी एक बार फिर किताबों और साहित्य से जुड़ रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि साहित्य उत्सवों की उपयोगिता अत्यधिक हो सकती है, बशर्ते उनके उद्देश्य स्पष्ट हों।
अनिल जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी साहित्य सम्मेलन की शुरुआत से पहले उसकी प्रासंगिकता पर गंभीर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही आयोजन के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि साहित्य केंद्र में रहे और आवश्यक सावधानियों व मूल्यों का पालन हो, ताकि ऐसे उत्सव वास्तव में साहित्य-संवाद को समृद्ध कर सकें।
विनोद कुमार शुक्ल पर बोलते हुए अनिल जोशी ने कहा उनकी लेखनी एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग की तरह है, जिसे समझने के लिए पाठक को ठहरकर देखना और महसूस करना पड़ता है।
कार्यक्रम में नई शैली के लेखन पर टिप्पणी करते हुए पूर्व संपादक एवं लेखक प्रताप सोमवंशी ने कहा कि समय के साथ लेखन के स्वरूप में बदलाव आया है और आज नई शैली में साहित्य रचा जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही पारंपरिक शैली में लेखन भी निरंतर हो रहा है, जिसे पाठक आज भी पसंद कर रहे हैं और वह समान रूप से पढ़ा जा रहा है।
इस अवसर पर रायपुर साहित्य उत्सव समिति के सदस्य एवं मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, रायपुर साहित्य उत्सव समिति के सदस्य संजीव सिन्हा सहित देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार और विचारक शामिल हुए।
रायपुर। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के बाद रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कई तरह की गड़बड़ी सामने आई है. धरसीवां तहसील के बिरगांव क्षेत्र स्थित गाजी नगर की मतदाता सूची में अनियमितताओं की शिकायत प्राप्त हुई, जिसकी जांच के लिए टीम का गठन किया गया है. अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-48 रायपुर ग्रामीण ने इसके लिए तीन सदस्यीय जांच दाल का गठन किया है।
कौन करेगा जांच
जांच दल में तहसीलदार रायपुर राममूर्ति दीवान, नगर निगम बीरगांव के राजस्व उप निरीक्षक शैलेन्द्र निर्मलकर और ग्राम बीरगांव के महेश कुमार सोनवानी को शामिल किया गया है. टीम मौक पर जाएगी और पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच करेगी.
जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, जांच दल ने भाग संख्या 63 और 64 में मतदाता सूची में त्रुटि होने संबंध में मौके पर मतदाताओं का फील्ड वेरिफिशिएशन किया. इसा दौरान सामने आया कि संबंधित वोटर्स क्षेत्र में ही रहते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मतदाताओं के मकान नंबर और पते में गंभीर त्रुटियां मिली हैं. मकान संख्या में परिवर्तन के लिए सभी से फार्म 8 भरवा कर मकान संख्या ठीक किया जा रहा है.
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास का “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश संपूर्ण मानव समाज, देश और दुनिया के लिए आज भी प्रासंगिक है, जो सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखाता है। मुख्यमंत्री आज बेमेतरा जिले में आयोजित गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव एवं राज्य स्तरीय ओपन पंथी नृत्य प्रतियोगिता को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में नवागढ़ क्षेत्र के विकास के लिए 165 करोड़ 54 लाख रूपए की लागत वाले 44 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नवनिर्मित लगभग 950 पूर्ण आवासों का गृह प्रवेश के लिए हितग्राहियों को घर की चाबी भेंट की। उन्होंने बेमेतरा जिले में सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार के लिए 40 करोड़ रुपये, नवागढ़ की 10 ग्राम पंचायतों को सीसी रोड निर्माण के लिए 5-5 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में बनाएं गए नवनिर्मित अटल परिसर का लोकार्पण तथा उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने नवागढ़ के जैतखाम में विधिवत श्वेत ध्वज चढ़ाया और वहां 12 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले सतनाम मंदिर के निर्माण हेतु भूमिपूजन भी किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु घासीदास ने समाज में व्याप्त जाति-पाति, ऊँच-नीच, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने का कार्य किया। उन्होंने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाते हुए मानवता को एक सूत्र में बाँधने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनके संदेशों के अनुरूप जनता के हित में अनेक क्रांतिकारी और जनकल्याणकारी योजनाएँ संचालित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में धान खरीदी, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना तथा आवासहीन परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना प्रदेश के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माता पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनकल्याण को समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि अटल जी केवल एक महान नेता ही नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और समर्पण के प्रतीक थे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि गिरौदपुरी में निर्मित दुनिया का सबसे ऊँचा जैतखाम आज वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन चुका है, जहाँ देश-विदेश से पर्यटक बाबा के जीवन दर्शन के लिए आते हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव एवं राज्य स्तरीय ओपन पंथी नृत्य प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। विभिन्न विभागों द्वारा जन कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित लगाई गई प्रदर्शनी में उन्होंने लाभार्थी हितग्राहियों को सामग्री एवं राशि का वितरण किया। कार्यक्रम में विधायक दीपेश साहू, ईश्वर साहू, अनुज शर्मा, पुन्नूलाल मोहले सहित अनेक जन प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या ग्रामीणजन उपस्थित थे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पेंशनर्स समाज की धरोहर हैं, जिन्होंने अपने सेवाकाल में शासन-प्रशासन की नींव को सुदृढ़ किया और आज राज्य के विकास में अपना योगदान दे रहे है। प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन में पेंशनरों का अनुभव बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी कर्तव्यनिष्ठ सेवा के कारण ही प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से जारी है। मुख्यमंत्री आज पमशाला में आयोजित सरगुजा संभागीय पेंशनर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के वक्त जिन शासकीय सेवकों ने कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हुए राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वे आज भले ही सेवानिवृत हो चुके है लेकिन उनका अनुभव और मार्गदर्शन नए अधिकारियों के लिए हमेशा काम आएगा। सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री साय ने 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पेंशनरों को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने पूर्व सरगुजा कमिश्नर रिटायर्ड आईएएस महेश्वर साय पैंकरा द्वारा लिखित किताब करमडार एवं अन्य कथनी तथा महुवा के फूल का विमोचन किया। उन्होंने पेंशनर संघ की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राधा-कृष्ण मंदिर में दर्शन व पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर प्रांताध्यक्ष डॉ डीपी मनहर ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय पेंशनर संघ सम्मलेन में शामिल होने वाले पहले मुख्यमंत्री है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, पूर्व विधायक भरत साय, पेंशनर संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ डीपी मनहर, बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे।
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा रविवार को दुर्ग पहुंचे, जहां उन्होंने दिव्य हनुमंत कथा कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने मंच पर प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की और बालाजी की आरती में भी भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए उनके बयान राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से काफी अहम माने जा रहे हैं।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के चरणों में नमन है। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी के छत्तीसगढ़ आगमन को लेकर कुछ बातें और सवाल लगातार चर्चा में हैं, लेकिन इन सभी बातों पर स्पष्टता जरूरी है।विजय शर्मा ने कहा, “मैं स्वयं महाराज की यात्राओं में जा चुका हूं। छत्तीसगढ़ में हुए उनके पूर्व कार्यक्रमों में भी शामिल रहा हूं। मैंने बहुत करीब से उनके कार्यों को देखा है।”
समाज में समरसता के लिए कर रहे हैं कार्य
डिप्टी सीएम ने कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री समाज में व्याप्त ऊंच-नीच और भेदभाव को खत्म करने की दिशा में शिद्दत से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी लगातार सनातन धर्म और संस्कृति के लिए कार्य कर रहे हैं और उनकी यात्राएं इसका प्रमाण हैं।विजय शर्मा ने भावुक अंदाज में कहा कि उन्होंने स्वयं शास्त्री जी के पैरों में छाले देखे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी गति और संकल्प कभी नहीं रुका। “यह समर्पण ही उन्हें श्रद्धा का केंद्र बनाता है,” उन्होंने कहा।
चार्टर्ड प्लेन विवाद पर दिया सख्त जवाब
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लाने के लिए चार्टर्ड प्लेन भेजे जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर भी डिप्टी सीएम ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अनावश्यक और उटपटांग बातें कर रहे हैं।विजय शर्मा ने कहा, “इतनी बड़ी जनता जिनकी श्रद्धा का केंद्र धीरेंद्र शास्त्री हैं, जब वे छत्तीसगढ़ आना चाहेंगे, तो छत्तीसगढ़ की जनता और हम सरकार के लोग उन्हें अपने कंधों और पलकों पर बिठाकर लाएंगे।”
छत्तीसगढ़ की जनता के नाम स्पष्ट संदेश
डिप्टी सीएम ने मंच से छत्तीसगढ़ की करोड़ों जनता को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि महाराज जी का आगमन बार-बार छत्तीसगढ़ की इस पावन धरती पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संतों का मार्गदर्शन समाज को सकारात्मक दिशा देता है और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करता है।
नक्सलवाद के मुद्दे पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान नक्सलवाद के मुद्दे पर भी विजय शर्मा ने बात की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के समापन के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उनका दावा है कि आने वाले तीन महीनों में नक्सली समस्या का पूरी तरह समाधान हो जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान को लेकर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की चिंता और मार्गदर्शन लगातार बना रहता है। विजय शर्मा ने मंच से प्रार्थना करते हुए कहा कि जब नक्सलवाद के खिलाफ अभियान सफल हो जाए, तब महाराज जी का पुनः छत्तीसगढ़ आगमन हो।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में 58 प्रतिशत आरक्षण को लेकर विवाद अब संविधान, न्यायपालिका के आदेशों के पालन और राज्य प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा संवेदनशील विषय बन गया है। पूर्व विधायक और छत्तीसगढ़ वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे ने प्रदेश सरकार पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत पत्र भी भेजा है।
पूर्व विधायक वीरेंद्र पांडे और अभ्यर्थी विकास त्रिपाठी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रदेश में दो प्रकार का आरक्षण लागू है। हाईकोर्ट अपनी भर्तियों में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू कर रही है। वहीं, छत्तीसगढ़ राज्य 1994 अधिनियम के तहत 58 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा रहा है।
वीरेंद्र पांडे ने बताया कि इंदिरा सहानी केस में स्पष्ट निर्णय है कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता। वहीं, छत्तीसगढ़ में जनसंख्या के आधार पर अतिरिक्त आरक्षण लागू किया जा रहा है।
लंबे समय से कोर्ट में लंबित है मामला
मामला लंबे समय से कोर्ट में लंबित है। 2012 में राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण प्रतिशत को बदलकर कुल 58 प्रतिशत कर दिया था। गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण सिर्फ असाधारण परिस्थितियों और ठोस सांख्यिकीय आधार पर संभव है। न्यायालय ने पाया कि राज्य सरकार इस शर्त को पूरा करने में विफल रही और इसलिए 58 प्रतिशत आरक्षण को असंवैधानिक घोषित किया।
राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन आदेश नहीं दिया। इसका मतलब है कि हाईकोर्ट का निर्णय प्रभावी बना रहा।
2025 में नया विवाद
साल 2025 के लिए मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में जारी आरक्षण गणना के अनुसार कुल प्रभावी आरक्षण लगभग 68 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे अनारक्षित वर्ग के अवसर सीमित हो गए हैं। इससे विवाद और गहराया और मेरिट बनाम आरक्षण की बहस फिर से शुरू हो गई। पूर्व विधायक के अनुसार, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद 58 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर भर्ती और प्रवेश प्रक्रिया जारी रखी। इससे संवैधानिक संस्थाओं और राज्य शासन के बीच टकराव पैदा हुआ।
वीरेंद्र पांडे ने चेताया कि यदि सुप्रीम कोर्ट 50 प्रतिशत की सीमा के पक्ष में फैसला देती है, तो वर्तमान में 58 प्रतिशत आरक्षण पर आधारित सभी भर्तियां कानूनी संकट में पड़ सकती हैं। उन्होंने मांग की है कि 58 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर की गई भर्तियों की समीक्षा और इस प्रकरण को लेकर उच्च स्तरीय जांच की जाए। इसके अलावा, भर्ती और प्रवेश प्रक्रिया को 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा के अनुरूप किया जाए।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में आरक्षण विवाद अब सामाजिक नीति से आगे बढ़कर संविधान, न्यायपालिका और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रतीक बन चुका है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की फाइनल हियरिंग और राज्य सरकार का रुख तय करेगा कि यह विवाद समाधान की ओर बढ़ेगा या और गहराएगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फरसाबहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान फरसाबहार के साथ-साथ कुनकुरी एवं मनोरा में स्थापित किए गए पोषण पुनर्वास केंद्रों का शुभारंभ किया। इन तीनों पुनर्वास केंद्रों को 10-10 बिस्तरों की सुविधा के साथ प्रारंभ किया गया है। इनके शुभारंभ के साथ ही जशपुर जिले में पोषण पुनर्वास केंद्रों की संख्या 6 हो गई है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कुपोषित बच्चों की माताओं से बच्चों के स्वास्थ्य और उनके ईलाज के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री इस मौके पर बच्चों के लिए पोषण कीट के साथ खिलौने भी प्रदान किए।
मुख्यमंत्री ने सीएचसी फरसाबहार में निर्माणाधीन श्री सत्य साईं मातृत्व शिशु चिकित्सालय का मुआयना किया। यह हॉस्पिटल मुख्यमंत्री श्री साय के विशेष प्रयासों से बन रहा है, इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध हो सकेंगी। इसमें नवजात शिशुओं एवं बच्चों के उपचार के साथ-साथ गर्भवती माताओं के लिए भी ऑपरेशन सहित सभी आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएँ विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएँगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में जिले में मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज तथा शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज का निर्माण कार्य भी किया जा रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज फरसाबहार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर से बाल विवाह मुक्त जशपुर अभियान रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह जागरूकता रथ जिले के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में भ्रमण कर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसे रोकना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह की आशंका हो तो बिना झिझक 1098 पर सूचना दें और इस सामाजिक बुराई के रोकथाम में सहभागी बनें।
इस अभियान रथ के माध्यम से नागरिकों को बाल विवाह से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान, विवाह की वैधानिक न्यूनतम आयु तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम के अंतर्गत कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक सोच विकसित कर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।
रथ पर 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है, ताकि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिलने पर नागरिक तत्काल इस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दे सकें। सूचना प्राप्त होते ही बाल विवाह प्रतिषेध की संयुक्त टीम के द्वारा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। गौरतलब है कि 1098 हेल्पलाइन के माध्यम से बच्चों से जुड़ी अन्य समस्याओं का समाधान भी किया जाता है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में आज बगिया में जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन जशपुर, एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर रोहित व्यास, एसईसीएल की ओर से जनरल मैनेजर सी. एम. वर्मा तथा ईडीसीआईएल की ओर से प्रोजेक्ट डायरेक्टर विकास सहरावत ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा को रोचक एवं प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी शहरों के समान बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा सके। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में नवाचार, जिज्ञासा एवं तकनीकी दक्षता का विकास होगा, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनेगा।
एमओयू के तहत जशपुर जिले के चयनित शासकीय विद्यालयों में चरणबद्ध रूप से इंटरएक्टिव पैनल स्थापित किए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से शिक्षक डिजिटल कंटेंट, वीडियो, प्रेजेंटेशन एवं ई-लर्निंग संसाधनों का उपयोग कर कक्षाओं को अधिक रोचक, सरल एवं प्रभावी बना सकेंगे। साथ ही एमओयू में इंटरएक्टिव पैनल की स्थापना के साथ-साथ उनके प्रशिक्षण, संचालन एवं नियमित मेंटेनेंस के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, ताकि उपकरणों का सतत एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।
इस परियोजना के लिए एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से 5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत जिले के शासकीय विद्यालयों में 206 इंटरएक्टिव पैनल लगाए जाएंगे। इस पहल से जिले के सैकड़ों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा की सुविधा प्राप्त होगी। कलेक्टर रोहित व्यास ने एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि इस परियोजना से विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने निज निवास बगिया में गजरथ यात्रा-2025 पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक में जशपुर जिले में हाथी विचरण क्षेत्रों एवं संवेदनशील इलाकों के वर्गीकरण, विद्यालय स्तर पर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों, गज सूचना एवं नियंत्रण कक्ष की स्थापना, मानव-हाथी द्वंद प्रबंधन हेतु तकनीकी पहल एनीमल ट्रैकर ऐप प्रशिक्षण तथा जिलेभर में गजरथ यात्रा के विस्तार एवं उपलब्धियों का विस्तार से समावेश किया गया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हाथी-मानव द्वंद को कम करने और जनजागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले 6 वनकर्मियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें वनपाल उमेश पैंकरा, वनरक्षक दुर्गेश नंदन साय तथा आरआरटी से महत्तम राम सोनी, गणेश राम और रविशंकर पैंकरा, हाथी मित्र दल से फूल सिंह सिदार शामिल हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पुस्तक में समाहित जानकारियां आमजन को हाथियों के व्यवहार को समझने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने तथा आवश्यक सतर्कता उपायों को अपनाने में सहायक होंगी। उन्होंने विद्यालय स्तर पर चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना भविष्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने सम्मानित किए गए वनकर्मियों और आरआरटी सदस्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इनकी सतर्कता, साहस और सेवाभाव के कारण ही कई गांवों में बड़ी घटनाएं टल सकी हैं, जिससे जान-माल की रक्षा संभव हो पाई है। इस दौरान कमिश्नर नरेन्द्र कुमार दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह तथा वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार/रायपुर। लोकसभा की एस्टीमेट कमेटी की बैठक के उपरांत रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्री बृजमोहन अग्रवाल रविवार को पोर्ट ब्लेयर स्थित ऐतिहासिक सेलुलर जेल (काला पानी) पहुंचे। सेलुलर जेल में क्रूर अंग्रेज़ी शासन ने वीर सावरकर समेत सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों को अमानवीय यातनाएँ देकर बंदी बनाया था।
बृजमोहन अग्रवाल ने उस कोठरी का भी अवलोकन किया, जहाँ वीर सावरकर को कैद रखा गया था। उस कोठरी में कुछ क्षण बिताते हुए श्री अग्रवाल ने सावरकर सहित सभी स्वतंत्रता सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया।
इस अवसर पर बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मातृभूमि के सम्मान और स्वतंत्रता के लिए इन महान विभूतियों का त्याग, साहस और अटूट संकल्प आज भी हर भारतवासी को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की प्रेरणा देता है। सेलुलर जेल का प्रत्येक पत्थर हमें याद दिलाता है कि आज़ादी सहज नहीं मिली, बल्कि असंख्य बलिदानों की नींव पर खड़ी है।