रायपुर। छत्तीसगढ़ के मे़डिकल कॉलेजों में PG कोटा को लेकर जारी ताजा आदेश से विवाद खड़ा हो गया है. नए आदेश से नाराज जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंंत से मुलाकात कर समस्याएं बताई. डॉ. महंत ने समस्याओं को समझते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर छात्रहित में आदेश वापस लेने का आग्रह किया है.
दरअसल, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक दिसंबर से पीजी सीटों की संरचना में बदलाव किया है. संशोधित नीति के तहत, राज्य के लिए आरक्षित 50 प्रतिशत सीटों में से 25 प्रतिशत सीटों को ओपन मेरिट कोटे में रखा गया है. एसोसिएशन से जुड़े छात्रों का कहना है कि नया नियम बाहरी राज्यों से पढ़े उम्मीदवारों को भी ओपन मेरिट के माध्यम से समान रूप से प्रतिस्पर्धा का अवसर देता है. इससे राज्य के मेडिकल ग्रेजुएट्स को नुकसान होगा.
छात्रों से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत मुख्यमंत्री साय को लिखे पत्र में कहा कि छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेज में छत्तीसगढ़ के छात्रों को महज 25 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया है. जो पिछले वर्षों की तुलना में बहुत कम है. इसके साथ मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छात्रहित में निर्णय की अपेक्षा व विश्वास करते हुए आग्रह किया है कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए 50% सीट आरक्षित करें.
रायपुर। देशभर में इंडिगो एयरलाइंस की बड़ी संख्या में उड़ाने कैंसिल और लेट होने से यात्री हलाकान हो रहे हैं. चार दिनों में लगभग 3450 से अधिक उड़ाने अचनाक रद्द की गईं. इस बीच छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए एयरलाइन प्रबंधन को लीगल नोटिस जारी किया है. उन्होंने केंद्र सरकार से इंडिगो कंपनी पर 9 हजार करोड़ रुपए के जुर्माने की मांग की है.
सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने यह नोटिस इंडिगो एयरलाइंस के प्रबंध निदेशक / मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नोटिस में कहा कि यह कदम न केवल यात्रियों के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय कानूनों और नागरिक उड्डयन नियमों की भी खुली अवहेलना है.
नोटिस में कहा गया है कि इंडिगो एयरलाइंस ने बिना किसी पूर्व सूचना और बिना पारदर्शी कारण बताए अत्यंत मनमाने ढंग से हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाओं को बाधित किया. यात्रियों को भारी आर्थिक नुकसान, मानसिक कष्ट और समय की हानि का सामना करना पड़ा है. प्रभावित लोगों में वरिष्ठ नागरिक, बच्चे, महिलाएं, रोगी तथा व्यवसायी बड़ी संख्या में शामिल हैं, जिनके लिए अचानक रद्दीकरण किसी आपदा से कम नहीं साबित हुआ.
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने अपने नोटिस में स्पष्ट कहा है कि इंडिगो का यह कृत्य भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, विमानन नियम तथा DGCA द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन है. सोसायटी ने इसे ‘घोर अनुबंधभंग’ (Breach of Contract) और ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) का स्पष्ट मामला बताया है.
उड़ाने रद्द करने का वास्तविक कारण सार्वजनिक करने कहा
नोटिस में इंडिगो एयरलाइंस को आदेशित किया गया है कि वह प्रत्येक प्रभावित यात्री को उसके टिकट मूल्य का कम से कम दस गुना मुआवजा और होटल, वैकल्पिक यात्रा, चिकित्सा खर्च जैसे सभी प्रत्यक्ष नुकसान की पूर्ण प्रतिपूर्ति पांच कार्य दिवसों के भीतर सुनिश्चित करें. साथ ही कंपनी को इस बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करने के वास्तविक और पारदर्शी कारणों का सार्वजनिक विवरण जारी करने को भी कहा गया है.
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने आगे बताया है कि पीड़ित यात्रियों की ओर से इस मामले में माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को विस्तृत शिकायत भेजी जा चुकी है. इस शिकायत में DGCA द्वारा विशेष जांच, इंडिगो एयरलाइन पर 9000 करोड़ रुपए (1 बिलियन डॉलर) का जुर्माना लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नए कानून बनाने की मांग की गई है.
नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि एयरलाइन ने निर्धारित समय सीमा में मुआवजा और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की, तो सोसायटी प्रभावित यात्रियों के साथ मिलकर निम्न कानूनी कार्रवाइयां शुरू करेगी—
• राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में सामूहिक मुकदमा.
• संबंधित दीवानी न्यायालयों में अनुबंधभंग और हानि की कार्रवाई.
• DGCA व अन्य प्राधिकरणों के समक्ष आपराधिक शिकायत दर्ज कराना.
सोसायटी ने यह भी कहा है कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं में आने वाले खर्च, हर्जाने और शुल्क का दायित्व पूरी तरह इंडिगो एयरलाइन पर रहेगा, क्योंकि यह संकट उसकी मनमानी और गैर-जिम्मेदाराना नीतियों का परिणाम है. इंडिगो प्रबंधन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने की अपील की है. अन्यथा संस्था सक्षम न्यायालयों और प्राधिकरणों में सिविल, आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के लिए बाध्य होगी.
जगदलपुर। रायपुर सेंट्रल जेल में कांकेर जिले के कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत को लेकर बस्तर में बवाल मचा हुआ है। दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने आज बस्तर बंद का ऐलान किया था, जिसका असर सुबह से ही पूरे संभाग में देखने को मिला। शहरों में सभी दुकानें बंद रही। जगदलपुर, सुकमा, कांकेर, भानुप्रतापपुर में सर्व आदिवासी समाज के आह्वान का बड़ा असर दिखा। नगर की सभी दुकानें बंद है। जगदलपुर में सर्व आदिवासी समाज ने नगर बंद कराने के लिए बाइक रैली निकाली।
बस्तर बंद का कांग्रेस ने समर्थन किया है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, कांकेर में जीवन ठाकुर की प्रताड़ना से बेवजह मौत हुई। समय पर उनका इलाज नहीं हुआ। जानबूझ कर जेल प्रशासन और प्रशासन ने उनकी हत्या की। राजनीतिक हत्या की गई है। आदिवासी समाज ने बस्तर के सातों जिलों में बंद का आव्हान किया था। हमने बस्तर बंद का समर्थन किया। बैज ने कहा, पीड़ित परिवार से मैंने मुलाकात की। फर्जी FIR कर ठाकुर को जेल भेजा गया था। इसके चलते परिवार और आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। दोषी तहसीलदार और पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
जानिए क्या है मामला
बता दें कि जमीन विवाद के मामले में 12 अक्टूबर 2025 को कांग्रेस नेता और चारामा के पूर्व जनपद अध्यक्ष जीवन ठाकुर को गिरफ्तार कर कांकेर जेल में रखा गया था। उन्हें 2 दिसंबर को बिना सूचना के रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था। जेल प्रशासन के अनुसार, इसी बीच उनकी तबीयत खराब होने से तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 4 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। वहीं अब मामले में परिजनों ने जेल प्रशासन पर लापरवाही करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्हें कोई बीमारी नहीं थी। सही समय पर इलाज होता तो उनकी जान बच जाती।
मामले की होगी न्यायिक जांच
परिजनों का कहना है कि बिना सूचना के कांकेर से रायपुर जेल भेजा गया, जिसके कारण उनकी मौत हुई है। वहीं जेल प्रशासन का कहना है कि तबीयत बिगड़ने से कैदी की मौत हुई है। बता दें कि कांग्रेस नेता और चारामा के पूर्व जनपद अध्यक्ष जीवन ठाकुर वन अधिकार पट्टा घोटाले में जेल में थे। वहीं अब इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रायपुर ने जांच का आदेश जारी किया था।
रायपुर। कस्टम मिलिंग स्कैम मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने आज बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी दीपेन चावड़ा के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है। चावड़ा पर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक अवैध धनराशि के प्रबंधन में प्रमुख भूमिका निभाने के आरोप हैं। वह स्कैम के मुख्य आरोपी अनवर ढेबर का सहयोगी माना जाता है।
जानकारी के अनुसार, दीपेन चावड़ा को ईओडब्ल्यू ने नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान चावड़ा की भूमिका कई बड़े आर्थिक अपराधों में सामने आई, जिसके आधार पर उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटाए गए। इन सबूतों के आधार पर आज, 9 दिसंबर 2025 को रायपुर स्थित न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में उसके विरुद्ध चालान पेश किया गया। जिसमें बताया गया है कि दीपेन चावड़ा EOW में दर्ज अन्य प्रकरणों में लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक अवैध धन के प्रबंधन में शामिल था। कस्टम मिलिंग स्कैम में भी उसके द्वारा लगभग 20 करोड़ रुपये लोकसेवकों की ओर से एकत्र किए जाने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
इस मामले में इससे पहले फरवरी 2025 में तत्कालीन प्रबंध संचालक मनोज सोनी और रोशन चंद्राकर के विरुद्ध तथा अक्टूबर 2025 में अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा के विरुद्ध माननीय विशेष न्यायालय (भ्र.नि.अ) में चालान पेश किया जा चुका है।
रायपुर। पूर्व खाद्य मंत्री और कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने धान खरीदी को लेकर आरोप लगाया है. भगत ने कहा कि किसानों का रकबा काटा दिया गया है. कई जगहों पर शून्य कर दिया गया है. किसानों पर सारी ताकत, दादागिरी और हेकड़ी दिखाई जा रही है. उन्होंने कहा कि आज प्रदेशभर के किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ में खेती करना किसानों के लिए कठिन हो गया है. उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत किसानों के काटे गए रकबे को जोड़ने का काम करें.
पूर्व मंत्री भगत ने कहा- राजस्व वसूली में कमी, ये सरकार का घाटा…
नई जमीन गाइडलाइन के लिए लोगों से मांगे गए सुझाव मामले में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि उनकी बात पर हंसी आती है. प्रदेश का मुखिया किससे मांग कर रहे हैं. सारा पावर अधिकार उनके पास है. किसके पहल से परिवर्तन लाया गया ? किसके कहने पर समस्या पैदा किया गया? रजिस्ट्री के कारण राजस्व वसूली में कमी आ गया, ये सरकार का घाटा है.
भगवान के कई रूप, जरूरी नहीं BJP जो चाहे वैसा देखें : पूर्व मंत्री भगत
नवा रायपुर के चंदखुरी में कांग्रेस सरकार में स्थापित की गई राम मूर्ति को हटाकर नए जगह स्थपित कए जाने पर पूर्व मंत्री अमरजीत ने भाजपा पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग राम के नाम पर ढोंग और दिखावा करते हैं. खुद कुछ नहीं कर सके, अब हमने जो भगवान राम की मूर्ति स्थापित की है, उसमें कमी ढूंढ रहे हैं. भगवान के कई रूप हैं, जरूरी नहीं भाजपी जो चाहे बैसा देखें. यहां की मूर्ति कहीं और जा रही है, इससे दुर्भाग्यपूर्ण क्या ही होगा.
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने प्रदेशभर के बदहाल मुक्तिधामों पर सभी जिलों के कलेक्टर से फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट मांगा था। यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी गई है। अब कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को अपने आदेश का कंप्लायंस रिपोर्ट की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिलासपुर निगम कमिश्नर को शपथ पत्र में जवाब पेश करने कहा गया है। अगली सुनवाई जनवरी में रखी गई है।
इधर शासन की ओर से कहा गया है कि मुक्तिधामों के रखरखाव के लिए विस्तृत दिशा- निर्देश जारी कर दिए हैं। इनमें साफ-सफाई, ग्रीन फेंसिंग या कंटीले तार से बाउंड्री, शेड की मरम्मत, बिजली, पानी और पुरुष-महिला के लिए अलग शौचालय जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आज सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार संविधान के तहत जीने के अधिकार का हिस्सा है, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि हर मुक्तिधाम में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।
दरअसल, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा 29 सितंबर को बिल्हा के मुक्तिधाम पहुंचे थे, जहां उन्होंने चारों तरफ अव्यवस्था और गंदगी देखी। वे किसी न्यायिक अधिकारी के पिता के निधन पर पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने इस बदहाली पर संज्ञान लिया। पिछली सुनवाई में मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और कलेक्टर बिलासपुर ने इस मामले में अपने-अपने शपथपत्र (हलफनामा) प्रस्तुत किए थे। साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और शहरी प्रशासन विभाग ने 6 अक्टूबर और 8 अक्टूबर 2025 को इस संबंध में राज्यव्यापी निर्देश जारी किए थे। इस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल निर्देश जारी करने से काम नहीं चलेगा। ध्यान रहे कि चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा 29 सितंबर को रहंगी में एक अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने मुक्तिधाम की अव्यवस्था देखकर हैरानी जताई थी।
हाईकोर्ट के निर्देश पर रहंगी मुक्तिधाम में तुरंत हुआ सुधार कार्य
मुक्तिधाम में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थी। यहां पहुंचने कोई रास्ता भी नहीं था। पानी, बैठने के कोई इंतजाम भी नहीं दिखे। इस पर हाईकोर्ट ने इस अव्यवस्था को जनहित याचिका मानकर राज्य सरकार, जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद रहंगी मुक्तिधाम की दशा पर बिलासपुर कलेक्टर ने शपथ पत्र दिय, जिसमें बताया गया कि रहंगी मुक्तिधाम में तुरंत सुधार कार्य किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने हॉल को खाली कर प्रतीक्षालय में बदला गया है। पीने के पानी की व्यवस्था की गई है और अंतिम संस्कार प्लेटफॉर्म की मरम्मत कराई गई है। इसके अलावा मुख्य सड़क से मुक्तिधाम तक सीसी रोड बनाने के लिए 10 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी गई है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की 1 दिसंबर 2025 को जारी नई गजट अधिसूचना ने प्रदेश की मेडिकल बिरादरी में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) ने इस अधिसूचना को “राज्य के चिकित्सा भविष्य पर सर्जिकल स्ट्राइक” बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। फेडरेशन का आरोप है कि सरकार ने पीजी (पोस्टग्रेजुएट) मेडिकल सीटों के बंटवारे का पैटर्न बदलकर स्थानीय छात्रों का गंभीर नुकसान किया है, जिससे कुल 75% सीटों पर बाहरी छात्रों का कब्जा हो जाएगा और राज्य के डॉक्टर सिर्फ 25% सीटों तक सिमट जाएंगे।
सीटों के बंटवारे पर विवाद — “यह 75-25 का अन्यायपूर्ण मॉडल”
सुप्रीम कोर्ट के सौरभ चौधरी मामले में यह स्पष्ट किया गया था कि 50% सीटें ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और 50% राज्य कोटा के रूप में रखी जाएँगी, जिससे राष्ट्रीय मेरिट और संस्थागत निरंतरता के बीच संतुलन बना रहे।
लेकिन छत्तीसगढ़ की नई अधिसूचना के तहत—
50% सीटें ऑल इंडिया कोटा में पहले ही बाहरी छात्रों के लिए खुली हैं।
अतिरिक्त 25% सीटें अब “स्टेट ओपन मेरिट” नाम से फिर बाहरी छात्रों के लिए खोल दी गई हैं।
इस तरह कुल 75% सीटें छत्तीसगढ़ से बाहर के छात्रों के लिए उपलब्ध हो जाती हैं, जबकि स्थानीय छात्रों के लिए केवल 25% सीटें बचती हैं। फेडरेशन ने इस मॉडल को “असंतुलित, अनुचित और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विरुद्ध” बताया है।
सीजीडीएफ अध्यक्ष ने कहा, “यह एक गंभीर नीतिगत भूल है। सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय मेरिट और संस्थागत निरंतरता (Institutional Continuity) के बीच 50-50 का संतुलन बनाने का आदेश देता है। राज्य सरकार ने इसे बदलकर 75-25 कर दिया है, जो छत्तीसगढ़ की सेवा करने वाले छात्रों के साथ घोर अन्याय है।”
1. “दोहरी नाकेबंदी”: अपने ही राज्य में शरणार्थी बने छात्र
यह नीति छत्तीसगढ़ के स्नातकों को दोहरी मुसीबत में डालती है:
बाहर रास्ता बंद: हम मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा के स्टेट कोटे में आवेदन नहीं कर सकते क्योंकि वहाँ की सीटें सिर्फ उनके छात्रों के लिए आरक्षित हैं। अंदर रास्ता बंद: अब हमारे अपने ‘स्टेट कोटे’ में भी हमें उन राज्यों के छात्रों द्वारा विस्थापित किया जा रहा है, जो हमें अपने यहाँ प्रवेश नहीं देते।
फेडरेशन के प्रवक्ता ने कहा, “जिन मेडिकल कॉलेजों को छत्तीसगढ़ की जनता के टैक्स, शासन के बजट और यहाँ के निवासी होनहार डॉक्टरों ने अपनी मेहनत से सींचा है, आज उन्हीं संस्थानों में हमें दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया है।”
डॉक्टर्स ने मेकाहारा अस्पताल के बाहर किया प्रदर्शन, देखें वीडियो
2. बॉन्ड का विरोधाभास: बस्तर में सेवा क्यों दें?
राज्य सरकार एमबीबीएस स्नातकों के लिए 2 साल का अनिवार्य ग्रामीण सेवा बॉन्ड लागू करती है। वर्तमान में सैकड़ों डॉक्टर पीजी सीटों की उम्मीद में नक्सल प्रभावित और दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में सेवा दे रहे हैं।
फेडरेशन ने सवाल उठाया, “सरकार हमसे गांवों में सेवा करने का बॉन्ड भरवाती है, लेकिन हमारे इनाम (पीजी सीटों के लिए बोनस अंक) से मिलने वाली सीटें उन ‘मेडिकल टूरिस्टों’ को सौंप रही है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ में एक भी मरीज का इलाज नहीं किया है। यह अधिसूचना ग्रामीण सेवा के प्रोत्साहन को खत्म करती है। अब कोई डॉक्टर दूरस्थ पीएचसी (PHC) में सेवा क्यों देगा? वे जुर्माना भरकर राज्य छोड़ना पसंद करेंगे।”
3. जनस्वास्थ्य संकट: सेवारत विशेषज्ञों (In-Service) का भविष्य खत्म
इसके सबसे बड़े पीड़ित सिर्फ छात्र नहीं, बल्कि मरीज होंगे। नई अधिसूचना ने सेवारत प्रत्याशियों (Medical Officers) के लिए सीटों का दायरा खत्म कर दिया है।
फेडरेशन ने चेतावनी दी, “अगर सीटों का पूल ही आधा कर दिया जाएगा, तो बोनस अंकों का कोई मतलब नहीं रह जाता। यदि इन-सर्विस डॉक्टर विशेषज्ञ (Specialist) नहीं बन पाएंगे, तो जिला अस्पतालों और सीएचसी को कौन चलाएगा? यह नीति आदिवासी स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ तोड़ देगी।”
CGDF का अल्टीमेटम — “लागू करें मध्य प्रदेश मॉडल ”
सीजीडीएफ ने सरकार से तत्काल नीति सुधार की मांग की है:
दिनांक 01.12.2025 की अधिसूचना को तत्काल वापस लिया जाए।
“मध्य प्रदेश मॉडल” (Exhaustion Clause) लागू किया जाए: राज्य कोटे (जोकि कुल सीटों का शेष 50% है) को विशेष रूप से संस्थागत/इन-सर्विस उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित रखा जाए। इसे बाहरी छात्रों के लिए तभी खोला जाए जब स्थानीय उम्मीदवारों की सूची समाप्त हो जाए।
फेडरेशन ने कहा, “हम यह मांग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कुल सीटों का 50% हिस्सा (AIQ) पहले ही ओपन मेरिट के लिए दिया जा चुका है, अतः शेष 50% पर स्थानीय छात्रों का पूरा हक बनता है।”
“हम सुरक्षा के ‘दिल्ली मॉडल’ की मांग करते हैं। यदि राष्ट्रीय राजधानी अपने छात्रों के लिए 100% राज्य कोटा सुरक्षित रख सकती है, तो छत्तीसगढ़ अपने डॉक्टरों के हितों को क्यों बेच रहा है?”
गौरतलब है कि प्रदेश के मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों में इस नीति को लेकर व्यापक असंतोष है। कई मेडिकल कॉलेजों में बैठकें शुरू हो गई हैं और फेडरेशन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध कार्यक्रम की घोषणा की जा सकती है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में 58 प्रतिशत आरक्षण जारी रखने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ कुछ प्रभावित अभ्यर्थियों ने फिर से हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने न्यायालय के समक्ष अवमानना याचिका प्रस्तुत कर राज्य सरकार से इस 58 प्रतिशत आरक्षण पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। इसमें तर्क दिया गया है कि प्रदेश में इस प्रकार से दो आरक्षण रोस्टर चलने से राज्य स्तर की भर्तियों में पदों की संख्या में उन्हें सीधे हानि का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे असमंजस की स्थिति में हैं।
बता दें कि हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2022 को 58 प्रतिशत आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। यह भी ज्ञात तथ्य है कि राज्य सरकार को 58 प्रतिशत आरक्षण जारी रखने के लिए उच्चतम न्यायालय से किसी भी प्रकार का स्टे नहीं मिला है। अब यह अवमानना याचिका अमीन पटवारी, एडीईओ और अन्य भर्तियों में 58 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के खिलाफ दायर की गई है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह माना कि राज्य में 58 प्रतिशत आरक्षण का नियम हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना है, किंतु मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इस मामले की सुनवाई करने की सहमति जताई है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में शासकीय आदर्श पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, पेंशनबाड़ा रायपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री खुशवंत साहेब उपस्थित थे।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास की 269वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित गुरु पर्व कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का आमंत्रण दिया।
प्रतिनिधियों ने बताया कि इस अवसर पर राजधानी रायपुर के विभिन्न छात्रावासों—कालाबाड़ी कन्या छात्रावास, शंकर नगर कन्या छात्रावास, आमापारा छात्रावास, डी.डी.यू. छात्रावास, कबीर छात्रावास, प्रयास छात्रावास, देवपुरी छात्रावास सहित अनेक छात्रावासों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास के विचार सामाजिक सद्भाव, समरसता और मानव-सेवा की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास एवं मूल्य शिक्षा के लिए अत्यंत प्रेरणादायी बताया।
प्रतिनिधिमंडल में छात्रावास के पदाधिकारी, शिक्षकगण एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में सतनामी विकास परिषद, सारंगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब भी उपस्थित थे।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय जयंती गुरुपर्व–2025 में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का आमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि 18, 19 और 20 दिसंबर को आयोजित होने जा रहे इस तीन दिवसीय महोत्सव में सतनामी समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होंगे। यह आयोजन समाज की आस्था, एकता और सांस्कृतिक धरोहर का भव्य उत्सव होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रतिनिधिमंडल के आग्रह को सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा कि सतनामी समाज ने सदैव छत्तीसगढ़ की सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि गुरु बाबा घासीदास जी के आदर्श—सत्य, अहिंसा और समानता—समाज को नैतिक शक्ति और सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पावन उत्सव में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य और सम्मान की बात है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जयंती पर्व की सराहना करते हुए इसे समाज को एक सूत्र में जोड़ने वाला, प्रेरणादायी और मार्गदर्शक आयोजन बताया।
प्रतिनिधिमंडल में विधायक डोमनलाल कोर्सेवाडा, पूर्व विधायक केराबाई मनहर सहित सतनामी विकास परिषद के अध्यक्ष बी. डी. भारद्वाज, उपाध्यक्ष रमेश अनंत, भानुप्रभा जोल्हे, कृष्णा अजगले, तेजेश्वर सिंह रात्रे और रोहित महिलांग उपस्थित थे।
रायपुर। Meat in Syrup : राजधानी रायपुर के देवपुरी स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिला को दी गई कैल्सिड सिरप की एक बोतल के अंदर मांस जैसा पदार्थ मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) ने घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी है।
FDA ने जांच के लिए लैब में भेजा नमूना
6 दिसंबर को शिकायत मिलने के बाद, FDA की संयुक्त जांच टीम ने 7 दिसंबर 2025 को संबंधित कैल्सिड सस्पेंशन 200ml (बैच ALGE 4061) का विधिवत नमूना संग्रह किया। यह दवा हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित एक्टिनोवा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित है। सभी नमूने राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, रायपुर भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आते ही औषधि अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला ?
कमल विहार सेक्टर-5 निवासी गर्भवती देविका साहू 6 दिसंबर की दोपहर देवपुरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थीं। जांच के दौरान कर्मचारियों ने उन्हें कैल्शियम सिरप दिया। देविका ने जैसे ही सिरप का सेवन किया, उनके मुंह में मांस जैसा टुकड़ा महसूस हुआ। घबराकर उन्होंने सिरप उगला तो उसमें टुकड़ा दिखाई दिया। पीड़ित महिला ने दावे के साथ कहा, दवा में निकला टुकड़ा मांस का ही था। देविका साहू ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और DGP को भी लिखित शिकायत भेजी है।
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर दवाओं की जांच
Meat in Syrup : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने प्रदेश में उपलब्ध औषधियों की गुणवत्ता का विशेष निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है। FDA ने जनता से अपील की है यदि किसी भी संदिग्ध दवाई की जानकारी मिले तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 9340597097 पर सूचना दें।
नई दिल्ली। प्राकल्लन समिति की महत्वपूर्ण बैठक में वरिष्ठ सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के एविएशन सेक्टर की व्यापक और तेज़ विकास जरूरतों को बेहद प्रभावी तरीके से सामने रखा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की योजनाओं और कार्यों की समीक्षा के दौरान, उन्होंने राज्य में हवाई संपर्क, औद्योगिक विकास और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को गति देने हेतु कई निर्णायक सुझाव रखे।
सांसद अग्रवाल ने रायपुर–नवा रायपुर–भिलाई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के भीतर एक बड़े ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मंत्रालय से स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ अब एक नेशनल स्टील और पावर हब के रूप में तेजी से उभर रहा है, ऐसे में राज्य के दूसरे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अप्रूवल प्रक्रिया में जल्द-से-जल्द तेजी लाई जाए
हालांकि बिलासपुर, रायगढ़, अंबिकापुर और जगदलपुर को UDAN से जोड़ना सकारात्मक कदम है, लेकिन उन्होंने कहा कि 2025-35 के संशोधित UDAN वर्ज़न में छत्तीसगढ़ को और भी अधिक कवरेज मिलना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से आग्रह किया कि अगले बिडिंग राउंड में जगदलपुर, अंबिकापुर, बिलासपुर और रायगढ़ के लिए नई रूट्स, बेहतर सुविधाएँ और उच्च गुणवत्ता वाली सर्विसेज़ अनिवार्य रूप से शामिल हों।
मंत्रालय द्वारा 87 एयरपोर्ट्स को 100% ग्रीन एनर्जी में बदलने की उपलब्धि का स्वागत करते हुए, श्री अग्रवाल ने रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर को भी जल्द से जल्द इस सूची में शामिल करने के लिए स्पष्ट और बाध्यकारी टाइमलाइन तय करने का अनुरोध किया।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, रायपुर में एक डेडिकेटेड सोलर पावर प्लांट स्थापित करने का ठोस प्रस्ताव भी रखा।
उन्होंने रायपुर एयरपोर्ट में चल रहे रीकॉन्फ़िगरेशन कार्यों को तुरंत पूरा करने और इसे AAI के ATC टावर अपग्रेडेशन प्रोग्राम में प्राथमिकता के साथ शामिल करने की आवश्यकता बताई। "विकसित भारत 2047" के मास्टर प्लान के संदर्भ में उन्होंने रायपुर में अगले 5–10 वर्षों में यात्री संख्या बढ़ने का आकलन और इसके अनुरूप कैपेसिटी विस्तार प्रोजेक्ट्स की विस्तृत जानकारी भी मांगी। साथ ही राजधानी क्षेत्र में एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में PPP मॉडल में प्राइवेट सेक्टर की रुचि के बारे में भी सवाल उठाए।
बैठक के दौरान मंत्रालय के अधिकारियों ने भारत में एयरपोर्ट्स के समग्र विकास के अपने मूल्यांकन के तहत श्री अग्रवाल के सुझावों को गंभीरतापूर्वक नोट किया।
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जा और अन्य निर्माण कार्य किए जाने को गंभीरता से लेते हुए इस पर तत्काल कार्रवाई करने और भूमि को यथावत रखने के निर्देश दिए हैं।
राज्यपाल श्री डेका ने आज लोकभवन में मुख्य सचिव विकास शील से इस संबंध में चर्चा की और स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की जमीन पर कब्जा और अनाधिकृत निर्माण हटाया जाए और भूमि को यथावत विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में सुरक्षित रखा जाए।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि विश्वविद्यालय की भूमि पर किसी भी तरह के अतिक्रमण, बाहरी निर्माण या अन्य गतिविधि शिक्षा के अधिकार, संस्थागत विकास और भविष्य की पीढ़ियों के हितों के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र का यह विश्वविद्यालय अध्ययन, अनुसंधान और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए स्थापित किया गया है। इस पर अतिक्रमण या राजनीतिक-प्रशासनिक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा।
जांजगीर-चांपा। कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देश पर जिले में अवैध धान भंडारण और परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। राजस्व, खाद्य एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीमों ने बाहरी क्षेत्रों से अवैध धान के प्रवेश को रोकने के लिए चेकपोस्ट स्थापित कर निगरानी भी तेज कर दी है। इसी कड़ी में बलौदा तहसील के अंगारखार और हरदीविशाल गांवों में विशेष छापेमारी के दौरान कुल 183 बोरी अवैध धान और एक वाहन जब्त किया गया।
जानकारी के मुताबिक, अंगारखार गांव में सुमीत लहरे के कब्जे से 113 बोरी धान (मात्रा: 45.20 क्विंटल) जब्त की गई। वहीं हरदीविशाल में अवैध परिवहन करते हुए पकड़े गए व्यक्तियों के कब्जे से 70 बोरी धान (मात्रा: 28 क्विंटल) और वाहन जब्त किया गया।
कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने कहा कि जिले में अनियमित धान भंडारण और परिवहन पर रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें और ऐसे मामलों में तुरंत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इस कार्रवाई के बाद जिले में धान की अवैध खरीद-फरोख्त और परिवहन में गिरावट आने की संभावना है। प्रशासन का उद्देश्य किसानों और सरकार दोनों के हित में धान की सही खरीदी और भंडारण सुनिश्चित करना है।
जगदलपुर। रायपुर सेंट्रल जेल में आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत को लेकर बस्तर संभाग में सर्व आदिवासी समाज ने मंगलवार को बस्तर बंद का ऐलान किया है। बता दें कि जीवन ठाकुर को 12 अक्टूबर 2025 को भूमि विवाद के मामले में गिरफ्तार कर कांकेर जिला जेल में रखा गया था। इसके बाद 2 दिसंबर को उन्हें रायपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया। 4 दिसंबर की सुबह उन्हें मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
जीवन ठाकुर चारामा के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष एवं सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष थे। उनकी मौत के बाद सरकार ने सेंट्रल जेल रायपुर और जिला जेल कांकेर के अधीक्षकों का तबादला भी कर दिया, लेकिन सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग इससे संतुष्ट नहीं है। आदिवासी समाज ने तत्कालीन दोनों जेल अधीक्षकों को निलंबित करने और चारामा के तहसीलदार, थाना प्रभारी एवं भू-माफिया पर कार्रवाई करने की मांग की है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन की नई गाइडलाइन दरों पर सरकार ने सोमवार को एक बार फिर कई संशोधन किए हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसी बीच संशोधित गाइडलाइन को लेकर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बदले गए नियमों की जानकारी साझा की। इस दौरान उनके साथ प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी, प्रदेश क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी भी मौजूद रहे।
मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्रदेश में गाइडलाइन दरों एवं उपबंधों के पुनरीक्षण पर केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। प्रदेश में गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण के संबंध में प्राप्त सुझावों, ज्ञापनों और प्रस्तावों पर परीक्षण किया गया। इतने ज़्यादा बदलाव होते हैं तो कुछ ऊपर-नीचे हो जाता है। इसे सुधारने के लिए सरकार है और सुधार कर रही है। व्यापक परीक्षण करने के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के नगरीय विकास, रियल एस्टेट सेक्टर और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि 15000 फीट अनिवार्यता को समाप्त किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों की इंक्रीमेंटल आधार पर गणना की वर्तमान प्रणाली को समाप्त किया गया। अब फिर से पूर्व प्रचलित उपबंध लागू होंगे, जिसके तहत नगर निगम क्षेत्र में 50 डेसिमल, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दर से मूल्यांकन किया जाएगा। इस बदलाव से मूल्यांकन प्रक्रिया सरल होने के साथ ही पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि बहुमंजिला भवनों में फ्लैट, दुकान और कार्यालय के अंतरण पर सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर बाजार मूल्य की गणना का प्रावधान भी हटा दिया गया है। अब मूल्यांकन बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किया जाएगा। यह प्रावधान मध्यप्रदेश शासन के समय से लागू था, जिसे बदलने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। नए प्रावधान से वर्टिकल डेवलपमेंट को गति मिलेगी और शहरी भूमि का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।
उन्होंने ने आगे बताया कि केंद्रीय बोर्ड ने बहुमंजिला भवनों एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए मूल्यांकन में छूट के नए प्रावधान भी लागू किए हैं। अब बेसमेंट और प्रथम तल पर 10 प्रतिशत तथा द्वितीय तल एवं उससे ऊपर के तल पर 20 प्रतिशत की कमी के साथ मूल्यांकन किया जाएगा। इस निर्णय से मध्यम वर्ग को किफायती दरों पर फ्लैट और व्यावसायिक स्थान मिलने में मदद मिलेगी।
मंत्री चौधरी ने कहा कि कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में 20 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित संपत्तियों के लिए 25 प्रतिशत कमी के साथ भूखंड की दरों का मूल्यांकन किया जाएगा। 20 मीटर की दूरी का आकलन मुख्य मार्ग की ओर से निर्मित हिस्से से किया जाएगा, जिससे वास्तविक स्थिति के आधार पर अधिक न्यायसंगत मूल्यांकन संभव होगा।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने जिला मूल्यांकन समितियों को यह भी निर्देशित किया है कि हाल ही में दरों में वृद्धि के बाद प्राप्त आपत्तियों, ज्ञापनों और सुझावों का परीक्षण कर 31 दिसंबर तक गाइडलाइन दरों में पुनरीक्षण के प्रस्ताव भेजें। इन प्रस्तावों का विश्लेषण कर बोर्ड आगामी गाइडलाइन दरों पर अंतिम निर्णय लेगा। इन सभी निर्णयों को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है, जिससे राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर में स्थिरता, पारदर्शिता और किफायती आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।
दो साल की गिनाईं उपलब्धियां
इसके साथ ही मंत्री ओपी चौधरी ने सरकार के दो साल की उपलब्धियों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि 9 हजार से ज़्यादा कंडिकाएं थीं, जिनमें से 50 प्रतिशत खत्म की गई हैं। बदलाव के लिए 31 दिसंबर तक जिलों से और रिपोर्ट मांगी गई थी।
राजनांदगांव। सरकार ने जमीन गाइडलाइन दर में बड़ा बदलाव किया है। इस मामले में सीएम विष्णुदेव साय ने कहा, लोकतंत्र में जनता सब कुछ होती है। जनता के हाथ में सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्ही की सुविधा के लिए सरकार नियम कानून बनाती है और हर नियम-कानून को बनाने के लिए सरकार बहुत मेहनत करती है, लेकिन कभी-कभी जनता के हित की बात की थोड़ी कसर रह जाती है। सीएम साय ने कहा, असली सरकार तो वही है, जो जनता के हित के लिए अपने निर्णयों को भी बदल दे। निश्चित रूप से गाइडलाइन दर को लेकर समीक्षा चल रही है। कुछ बिंदुओं पर बदलाव किए जा रहे हैं। हमारी सरकार जनता के हित में हर संभव कार्य करेगी।
केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड में लिए गए निर्णय
बैठक में निर्णय लिया गया कि नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों की इंक्रीमेंटल आधार पर गणना की वर्तमान प्रणाली को समाप्त कर दिया जाए। अब पुनः पूर्व प्रचलित उपबंध लागू होंगे, जिसके तहत नगर निगम क्षेत्र में 50 डेसिमल, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दर से मूल्यांकन किया जाएगा। इस बदलाव से मूल्यांकन प्रक्रिया सरल होने के साथ ही पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
बहुमंजिला भवनों में फ्लैट, दुकान एवं कार्यालय के अंतरण पर सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर बाजार मूल्य की गणना का प्रावधान भी हटा दिया गया है। अब मूल्यांकन बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किया जाएगा। यह प्रावधान मध्यप्रदेश शासन के समय से लागू था, जिसे बदलने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। नए प्रावधान से वर्टिकल डेवलपमेंट को गति मिलेगी और शहरी भूमि का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।
केंद्रीय बोर्ड ने बहुमंजिला भवनों एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए मूल्यांकन में छूट के नए प्रावधान भी लागू किए हैं। अब बेसमेंट और प्रथम तल पर 10 प्रतिशत तथा द्वितीय तल एवं उससे ऊपर के तल पर 20 प्रतिशत की कमी के साथ मूल्यांकन किया जाएगा। इस निर्णय से मध्यम वर्ग को किफायती दरों पर फ्लैट और व्यावसायिक स्थान मिलने में मदद मिलेगी।
कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में 20 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित संपत्तियों के लिए 25 प्रतिशत कमी के साथ भूखंड की दरों का मूल्यांकन किया जाएगा। 20 मीटर की दूरी का आकलन मुख्य मार्ग की ओर से निर्मित हिस्से से किया जाएगा, जिससे वास्तविक स्थिति के आधार पर अधिक न्यायसंगत मूल्यांकन संभव होगा।
केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने जिला मूल्यांकन समितियों को यह भी निर्देशित किया है कि हाल ही में दरों में वृद्धि के बाद प्राप्त आपत्तियों, ज्ञापनों और सुझावों का परीक्षण कर 31 दिसंबर तक गाइडलाइन दरों में पुनरीक्षण के प्रस्ताव भेजें। इन प्रस्तावों का विश्लेषण कर बोर्ड आगामी गाइडलाइन दरों पर अंतिम निर्णय लेगा।
इन सभी निर्णयों को तत्काल प्रभाव से लागू घोषित किया गया है, जिससे राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर में स्थिरता, पारदर्शिता और किफायती आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।
रायपुर। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल की जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. उन्हें 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है. बता दें कि अमित बघेल 6 दिसंबर को जब सरेंडर के लिए देवेंद्रनगर थाने पहुंच रहे थे तब थाने से करीब 20 मीटर पहले ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था. फिर कोर्ट में पेश किया था, जहां से तीन दिन की पुलिस रिमांड मिली थी।
आज रिमांड खत्म होने पर अमित बघेल को फिर कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। बता दें कि छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ने को लेकर 27 अक्टूबर को जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल ने अग्रसेन महाराज, सिंधी समाज के ईष्ट देवता झूलेलाल पर टिप्पणी की थी. इसका विरोध करते हुए समाज के लोगों ने अमित बघेल के खिलाफ रायपुर समेत कई जिलों और दूसरे राज्यों में एफआरआई दर्ज कराई थी.