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धर्म बदलने वालों का एसटी का दर्जा खत्म करने की मांग, दिल्ली में आदिवासी समाज की हुंकार
नई दिल्ली। धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी से बाहर करने की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन बनती दिखाई दे रही है। इसी मुद्दे को लेकर राजधानी दिल्ली में देशभर के आदिवासी समुदायों का विशाल महा समागम हो रहा है। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में लाखों आदिवासियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में होने वाला यह आयोजन केवल सांस्कृतिक समागम नहीं, बल्कि जनजातीय पहचान, आरक्षण और धार्मिक परिवर्तन के मुद्दे पर निर्णायक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। कार्यक्रम के केंद्र में लंबे समय से चर्चा में रहा डीलिस्टिंग बिल है।

क्या है डीलिस्टिंग की मांग?
जनजातीय संगठनों की मांग है कि जो लोग धर्म परिवर्तन कर चुके हैं और पारंपरिक आदिवासी संस्कृति, रीति-रिवाज, देवी-देवताओं और सामाजिक व्यवस्था से अलग हो चुके हैं, उन्हें ST सूची से बाहर किया जाए। उनका कहना है कि संविधान में आदिवासी समाज को मिला आरक्षण और संरक्षण उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक जीवनशैली की रक्षा के लिए था, न कि धर्म बदलने के बाद भी स्थायी रूप से लाभ लेने के लिए। संगठनों का आरोप है कि बीते दशकों में मिशनरी गतिविधियों के जरिए आदिवासी इलाकों में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया गया। गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक पिछड़ेपन का फायदा उठाकर लोगों को उनकी जड़ों से दूर किया गया। अब आदिवासी समाज के भीतर यह भावना मजबूत हो रही है कि जो लोग अपनी मूल परंपराओं से अलग हो चुके हैं, उन्हें ST आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
इस महासमागम में शामिल होने के लिए गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों समेत देशभर से आदिवासी समुदायों के लोग दिल्ली पहुंचे हैं। कई जगहों पर पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ रैलियां निकालकर लोगों को दिल्ली रवाना किया गया। आयोजकों का दावा है कि यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आदिवासी शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकता है।
छत्तीसगढ़ से भी बड़ी भागीदारी
छत्तीसगढ़ से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई प्रमुख आदिवासी नेता दिल्ली पहुंचे हैं। राज्य के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं पर लंबे समय से व्यवस्थित हमला हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मिशनरी संस्थाओं को संरक्षण मिला, जिसके कारण आदिवासी समाज में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुआ। समाज की सरलता और आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाकर लोगों की परंपराएं और मान्यताएं बदली गईं।रामविचार नेताम ने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज के भीतर एक स्पष्ट रेखा खींची जाए। जो लोग आदिवासी समाज की मूल परंपराओं और आस्था से अलग हो चुके हैं, उन्हें दोबारा ST आरक्षण का लाभ मिलना उचित नहीं है।
वैचारिक और राजनीतिक बहस तेज
हालांकि इस आंदोलन ने देश में नई वैचारिक बहस भी छेड़ दी है। समर्थक इसे आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आदिवासी समाज अपनी मूल पहचान खो देगा।
छत्तीसगढ़ में क्या हो सकता है असर?
छत्तीसगढ़ में भाजपा सत्तारूढ़ दल है। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा लुंड्रा विधानसभा सीट से प्रबोध मिंज को टिकट दी थी। लुंड्रा अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट है। टिकट वितरण के दौरान भी संगठन से जुड़े एक वर्ग में उन्हे टिकट दिए जाने का विरोध किया गया था। संगठन नेताओं ने कहा था कि मिंज धर्म परिवर्तन कर चुके हैं, लिहाजा उन्हें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट से चुनाव नहीं लड़ाया जाना चाहिए। हालांकि भाजपा ने स्थानीय स्तर के समीकरण को देखते हुए प्रबोध मिंज को टिकट दी और उन्होंने जीत भी दर्ज की। आदिवासी समाज जिस डीलिस्टिंग बिल की मांग कर रहा है, अगर यह संसद में लाया गया और यह पास हो गया तो प्रबोध मिंज जैसे चेहरे प्रभावित हो सकते हैं।
दिल्ली में जनजातीय महा समागम में शामिल हुए CM विष्णुदेव साय, कहा- आदिवासी संस्कृति से खिलवाड़ न किया जाए, देश में डी-लिस्टिंग कानून पास करने की उठाई मांग
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री श्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप एवं रामविचार नेताम भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।
कांकेर-नारायणपुर सीमा पर दो नक्सली डंप बरामद, 1000 डेटोनेटर, रायफल समेत भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद
कांकेर। माओवाद के खात्मे की घोषणा तो हो गई, लेकिन जमीन के नीचे अभी भी कई विस्फोट छिपे हुए हैं. कांकेर-नारायणपुर सीमा पर रविवार को जवानों ने सर्चिंग के दौरान अहम सफलता हासिल की. कोयलीबेड़ा और छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के जंगलों में नक्सली डंप बरामद किया गया, जहां से बड़ी संख्या में 12 बोर रायफल, बीजीएल लांचर, नक्सल वर्दी समेत भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद हुआ है. इस कार्रवाई में पुलिस, डीआरजी, बीएसएफ और बीडीएस टीम की संयुक्त टीम शामिल रही.

कांकेर-नारायणपुर सीमा के ग्राम पल्लाहूर और जपमरका के बीच जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में शुक्रवार को नक्सल विरोध अभियान चलाया गया. इस दौरान गहन जांच में जंगल में जमीन के नीचे छिपा एक नक्सल डंप बरमाद किया गया. जहां से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया गया. 1 कंट्रीमेड BGL लांचर, 25 BGL सेल, 4 इम्प्रोवाइज्ड फायर कार्टिज, 1 AK-47 का खाली कार्टिज, 5 किलो गन पाउडर, 10 बड़े सुतली बम, 3 नक्सली वर्दी, 1 सोलर चार्जर, 50 फीट वायर, मेडिकल किट और अन्य दैनिक उपयोगी सामान बरामद किया गया.

800 इलेक्ट्रिक और 200 नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर

छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में शनिवार को ग्राम मरकाबेड़ा, आदनार और एलूर के जंगलों में सर्चिंग अभियान संचालित किया गया। इस कार्रवाई में डीआरजी कांकेर के उप निरीक्षक विजय कुलदीप, डीआरजी नारायणपुर सहायक उपनिरीक्षक नरेन्द्र ठाकुर और बीडीएस टीम बीएसएफ कमाण्डर के रोहिताश के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया.
इस कार्रवाई में क्या-क्या मिला ?
12 बोर रायफल – 03 नग
BGL लांचर – 01 नग
BGL सेल – 06 नग
बारूद – 100 ग्राम
पोच – 01 नग
नक्सली वर्दी – 01 नग
इलेक्ट्रिक डेटोनेटर – 800 नग
नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर – 200 नग
नक्सल प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में कांकेर और नारायणपुर पुलिस ने लगातार संयुक्त अभियान चला रहा है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई से नक्सलियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है. क्षेत्र में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने हेतु सघन सर्चिंग अभियान लगातार जारी रहेगा.
माउंट एवरेस्ट विजेता अमिता श्रीवास के स्वास्थ्य लाभ हेतु राज्य सरकार सजग : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता श्रीवास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता श्रीवास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।
जशपुर में विकास कार्यों की समीक्षा : लोकार्पण-शिलान्यास के बाद शिलापट्ट नहीं लगा, तो होगी कड़ी कार्रवाई- वित्त मंत्री ओपी चौधरी
रायपुर। वित्त मंत्री एवं जशपुर जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने कड़े लहजे में अधिकारियों से कहा कि जशपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला है, इसलिए सभी अधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करते हुए निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना सुनिश्चित करें। प्रभारी मंत्री श्री चौधरी ने आज जशपुर जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागीय योजनाओं और जारी विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की।

शिलापट्ट स्थापना में लापरवाही पर सख्त रुख
प्रभारी मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि पिछले दस वर्षों की तुलना में वर्तमान सरकार द्वारा जशपुर जिले में रिकॉर्ड संख्या में विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिन विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन हो चुका है, उनके शिलापट्ट संबंधित गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमामय उपस्थिति में अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। शिलापट्ट लगाने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी। यदि कहीं भी यह शिकायत मिलती है कि शिलापट्ट उपेक्षित पड़ा है या स्थापित नहीं किया गया है, तो जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर खेती पर विशेष ध्यान
वित्त मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख वर्गों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना के तहत मिल रही एक हजार रूपए की मासिक सहायता का उपयोग महिलाएं बच्चों के भविष्य के लिए, समृद्धि सुकन्या योजना जैसी बचत योजनाओं में करें। इसके अलावा स्वरोजगार के लिए महतारी शक्ति ऋण योजना के अंतर्गत कम ब्याज दर पर 25 हजार रूपए तक का ऋण त्वरित उपलब्ध कराया जाए। पारंपरिक खेती से हटकर किसानों को अधिक मुनाफे वाले फलोत्पादन (विशेषकर केला और लीची की खेती) तथा आधुनिक मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही कृषि विभाग खरीफ सीजन के लिए समितियों में पर्याप्त खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करे।
जिले की प्रमुख विकास परियोजनाओं की प्रगति
बैठक में कलेक्टर रोहित व्यास ने जिले में चल रहे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की अद्यतन स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज, शासकीय नर्सिंग कॉलेज, शासकीय प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, क्रिटिकल केयर सेंटर और अखिल भारतीय कल्याण आश्रम द्वारा संचालित अस्पताल का निर्माण तेजी से जारी है। सन्ना विकासखंड के ग्राम पंडरापाठ में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए विशेष तीरंदाजी केंद्र का निर्माण शुरू हो चुका है। इसके अतिरिक्त कुनकुरी और जशपुर में नालंदा परिसर तथा सलियाटोली में एडवेंचर स्पोर्ट्स परियोजना पर कार्य चल रहा है।
कानून व्यवस्था और जन-जागरूकता
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रमुख चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने बताया कि जिले में सोशल मीडिया के माध्यम से एक अनूठा हेलमेट जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अब तक 2 हजार से अधिक नागरिकों के अपील वीडियो जारी किए जा चुके हैं।
व्यापक विभागीय समीक्षा
प्रभारी मंत्री ने बैठक में सुशासन तिहार, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित दो दर्जन से अधिक विभागों के कल्याणकारी कार्यों की गहन समीक्षा की।
बैठक में जशपुर विधायक रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, डीएफओ शशि कुमार सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।
मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
नक्सली डंप का खुलासा: जमीन के अंदर छिपा रखा था डंप, टीम ने हथियार निर्माण सामग्री को किया नष्ट
सुकमा। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की सीमा से लगे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में माओवाद विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने विशेष सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सली डंप का खुलासा किया। डंप से हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की गई।
दरअसल, पुलिस और बीडीडीएस टीम आत्मसमर्पित माओवादियों से मिली गोपनीय सूचना के आधार पर पोमके-बिनागुंडा क्षेत्र के जंगलों में विशेष सर्च ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान टीम ने जमीन के अंदर छिपाकर रखे गए नक्सली डंप का खुलासा किया।

इसी के साथ ही मौके से लेथ मशीन, बीजीएल पाइप, 12 बोर पाइप, इन्वर्टर, जनरेटर, बैटरी, ग्राइंडिंग मशीन, ड्रिलिंग मशीन, जिग सॉ मशीन, प्रेशर पंप, सोलर पैनल और करीब 20 फीट फुटबॉल पाइप सहित अन्य सामग्री बरामद की। अधिकारियों के अनुसार, माओवादी इन उपकरणों का उपयोग हथियार बनाने और सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए करते थे।

पुलिस ने मौके पर ही बरामद सभी सामग्री को नष्ट कर दिया। यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में विशेष अभियान पथक और बीडीडीएस जवानों द्वारा संयुक्त रूप से की गई। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में माओवाद विरोधी अभियान लगातार जारी रहेगा।
युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव का ऐलान : 29 मई से नामांकन शुरू, सदस्यता के लिए होगी डिजीटल प्रक्रिया
रायपुर। छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव का ऐलान हो गया है. प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में रविवार को भारतीय युवा कांग्रेस के मुख्य चुनाव आयुक्त जसप्रीत सिंह और प्रदेश चुनाव अधिकारी रोशन नेगी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम जारी किया. 29 मई से 13 जून तक नामांकन प्रक्रिया चलेगी. चुनाव पारदर्शी और समय पर पूरा कराने के लिए 5 जोन बनाकर ZRO नियुक्त किए जाएंगे.
ब्लॉक और जिला कमेटियों के लिए नामांकन 29 मई से 13 जून तक भरे जाएंगे. वहीं प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी के लिए 11 जून से 13 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे. नामांकन के बाद 15 जून से 18 जून तक स्क्रूटनी की प्रक्रिया चलेगी. इसके बाद सदस्यता अभियान और चुनाव प्रक्रिया एक साथ ऑनलाइन माध्यम से होगी.
सदस्यता के लिए नियम तय
युवा कांग्रेस में सदस्यता और चुनाव लड़ने के लिए 18 से 35 वर्ष की आयु सीमा तय की गई है. सदस्यता और शिकायत की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. फर्जी सदस्यता रोकने के लिए वोटर आईडी अनिवार्य की गई है. आवेदन के साथ 8 सेकेंड का वीडियो भी अपलोड करना अनिवार्य किया गया है, जिसमें आवेदक को खुद आवेदन से जुड़ी जानकारी देनी होगी. आयु प्रमाण के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट या अन्य आईडी प्रूफ जरूरी होंगे.
एक व्यक्ति, एक पद का नियम
चुनाव प्रक्रिया में एक व्यक्ति-एक पद का नियम भी लागू रहेगा. सिर्फ एक पद के लिए ही नामांकन दाखिल करने की अनुमति रहेगी. वहीं नामांकन दाखित करने पर उस उम्मीदवार को पुराने पद से मुक्त माना जाएगा.
दिल्ली में इंटरव्यू के बाद होगी नियुक्ति
युवा कांग्रेस में जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री जैसे अहम पदों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व जरूरी होगी. दिल्ली में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने इंटरव्यू भी लिया जाएगा.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर सियासत: पूर्व CM भूपेश बघेल ने कहा- हाईकमान तय करता है किसे क्या बनाना है
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। इस पूरे मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने साफ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि मैं टीएस सिंहदेव के किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देता।
वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच भूपेश बघेल ने कहा कि दीपक बैज पिछले तीन-साढ़े तीन साल से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और पूरी पार्टी उनके नेतृत्व में काम कर रही है। वहीं उन्होंने आगे कहा कि किसे नेता प्रतिपक्ष बनाना है और किसे पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाना है, यह सब तय करना हाईकमान का काम है। इसलिए मैं इन सब चीजों में अपनी बुद्धि नहीं लगाता।
प्रेसवार्ता में केंद्र सरकार पर बोला तीखा हमला
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने देश के वर्तमान हालातों की तुलना अघोषित आपातकाल से करते हुए युवाओं (Gen-Z) से बड़ी उम्मीदें जताई हैं। भूपेश बघेल ने कहा कि देश में आज लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है, लेकिन नई पीढ़ी इसे दोबारा खड़ा करने की इच्छाशक्ति रखती है।
प्रेसवार्ता के दौरान भूपेश बघेल ने आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) की ताकत का जिक्र किया। उन्होंने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए कहा, “आजकल Gen-Z का जमाना है। इसका अद्भुत प्रभाव पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में देखने को मिला है कि कैसे महज 4 दिन में 2 करोड़ फॉलोअर्स मिल जाते हैं। इस पीढ़ी की लोकतंत्र के प्रति बड़ी आस्था है।”
युवा कांग्रेस, मुख्य कांग्रेस का सबसे मजबूत स्तंभ
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी खुद ‘Gen-Z’ को आमंत्रित कर रहे हैं। इस बार के संगठन चुनावों में 90 के दशक के बाद के लड़के नेतृत्व करेंगे। युवा कांग्रेस, मुख्य कांग्रेस का सबसे मजबूत स्तंभ है। पहले सदस्यता अभियान होगा और फिर चुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लोकतंत्र को बचाने के लिए युवा लड़ाई लड़ेंगे और इसका लाभ निश्चित तौर पर कांग्रेस को मिलेगा।
केंद्र सरकार की नीतियों पर बरसते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि देश में इस वक्त अघोषित रूप से आपातकाल लगा हुआ है। मीडिया को चुप करा दिया जाता है और व्यापारिक जगत को भी डराकर मौन कर दिया गया है। देश तेजी से आर्थिक आपातकाल की ओर बढ़ रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे हम अमेरिका के कुचक्र में फंस चुके हैं। जिस प्रकार हमारी स्थिति है, हम बड़ी मुश्किल से अंग्रेजों की गुलामी से उभरे थे, लेकिन आज हमें तेल (क्रूड ऑयल) के लिए दूसरी जगहों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।”
भूपेश बघेल ने आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कहा कि लगातार पेट्रोल और डीजल के दामों में मूल्य वृद्धि हो रही है। हाल ही में डीजल, पेट्रोल और गैस सिलेंडर के दामों में 5 तक की बढ़ोतरी हुई है।
इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार को घेरते हुए चेतावनी दी कि छत्तीसगढ़ में बिजली की दरों में भारी कटौती (सप्लाई में कटौती) और संकट की आहट सुनाई दे रही है। रोज बिजली की समस्याओं में वृद्धि हो रही है, जिससे जनता परेशान है। उन्होंने अंत में दोहराया कि इन तमाम हालातों को बदलने के लिए उन्हें देश के युवाओं से बहुत बड़ी उम्मीद है।
एयरपोर्ट पर रिल्स-वीडियो बनाना अब पड़ेगा भारी, यात्रा पर लगेगा बैन, फोन भी होगा जब्त
रायपुर। सोशल मीडिया के लिए रील्स, वीडियो और फोटो खिंचवाना एक शौक नहीं, बल्कि ट्रेंड बन चुका है. लेकिन अब शौक आपको महंगा पड़ सकता है. डीजीसीए और ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्यूरिटी ने नियमों में सख्ती करते हुए नई गाइडलाइन जारी की है. अब हवाई यात्री एयरपोर्ट के सुरक्षा होल्ड एरिया पर रील बनाना पूरी तरह से बैन रहेगा. साथ ही हवाई जहाज के खड़े होने वाली जगह और बस से यात्रियों को विमान ले जाने तक वाले स्थान पर रुककर रील, फोटो या वीडियो बनाना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है.
डीजीसीए की नई गाइडलाइन
सुरक्षा होल्ड एरिया, जहां सीआईएसएफ यात्रियों और उनके सामान की जांच करती है, वहां वीडियो बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है.
विमान पार्किंग एरिया या बस से विमान तक जाते समय रुककर रील, फोटो या वीडियो बनाना भी मना है.
यात्री टेक-ऑफ, लैंडिंग या उड़ान के दौरान अपनी सीट या खिड़की से सामान्य फोटो और वीडियो ले सकते हैं.
केबिन क्रू कैमरा बंद करने के लिए कहे, तो उसका तुरंत पालन करना अनिवार्य होगा.
क्रू मेंबर के मना करने के बावजूद वीडियो बनाते रहने पर यात्री को ‘अनरूली पैसेंजर’ (Unruly Passenger) की श्रेणी में रखा जा सकता है.
नियम तोड़ने पर ये होगी कार्रवाई
एयरपोर्ट के प्रतिबंधित क्षेत्रों में यदि कोई यात्री सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करता है, या फिर क्रू के मना करने के बाद भी फ्लाइट में वीडियो शूटिंग और हंगामा जारी रखता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों पर डीजीसीए की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत 3 महीने से लेकर 2 साल या उससे अधिक समय तक हवाई यात्रा पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
ऐसे मामलों में सीआईएसएफ द्वारा मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जा सकते हैं, साथ ही विमान अधिनियम के तहत कानूनी केस भी दर्ज हो सकता है.
भाजपा का प्रशिक्षण शिविर : वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संगठन और व्यक्तित्व विकास का दिया मंत्र
रायपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान 2026 के तहत भारतीय जनता पार्टी जिला रायपुर का दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग आज प्रारंभ हुआ, जिसका समापन रविवार शाम को 6 बजे होगा। इस प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र में प्रदेश संघठन महामंत्री पवन साय, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब एवं पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी शामिल हुए।
पवन साय ने भारतीय जनता पार्टी की कार्य करने की पद्धति, संगठन का विस्तार विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि हमारी दो सीट से केंद्र में बहुमत की तीसरी बार सरकार बनाने में संगठन की रीति–नीति, कार्यकर्ताओं का परिश्रम प्रमुख रहा। प्रशिक्षण वर्ग में प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कार्यकर्ताओं को वर्तमान समय के परिपेक्ष में किस तरह कार्यकर्ताओं का अपना स्वयं का व्यक्तित्व विकास हो और भाजपा सरकार की योजनाओं को जन सामान्य तक प्रचारित करने का मूल मंत्र दिया। उन्होंने आपस में समन्वय और संवाद बनाए रखने का आव्हान किया।
प्रशिक्षण वर्ग के प्रथम दिवस में प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन, वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, कैबिनेट मंत्री ओपी चौधरी, सोशल मीडिया प्रदेश संयोजक मितुल कोठारी ने समसामरिक विषयों पर कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर ने प्रशिक्षण वर्ग से संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी पेश की।

आज के प्रशिक्षण वर्ग में प्रदेश मंत्री अमित साहू, जयंती पटेल, प्रशिक्षण प्रभारी एवं प्रदेश कार्यालय प्रभारी अशोक बजाज, मीडिया प्रभारी हेमंत पाणिग्रही, रायपुर संभाग सह प्रभारी डॉ. राजीव सिंह, जिला प्रभारी राजेंद्र शर्मा, रायपुर विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे, संजय श्रीवास्तव, दीपक महस्के, नंदकुमार साहू, मिर्जा एजाज बेग, मोना सेन, प्रफुल्ल विश्वकर्मा, सच्चिदानंद उपासने एवं रायपुर में निवासरत प्रदेश, जिला, मंडल, मोर्चा एवं प्रकोष्ठ के पदाधिकारी उपस्थित थे।
डीएमएफ घोटाला : आरोपी सतपाल छाबड़ा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, स्थायी जमानत याचिका खारिज, जानें पूरा मामला…
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने डीएमएफ घोटाले के आरोपी व कमीशन एजेंट की भूमिका निभाने वाले व्यवसायी सतपाल सिंह छाबड़ा की स्थायी जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने अपने फैसले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध जानबूझकर व्यक्तिगत फायदे के लिए किया जाता है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कोर्ट ने कहा, डीएमएफ घोटाले की राज्य की एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है, इसलिए याचिकाकर्ता की कस्टडी जरूरी है।
बता दें कि रायपुर निवासी सतपाल सिह छाबड़ा को एसीबी और ईओडब्ल्यू ने डीएमएफ घोटाला एवं मनीलॉड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। सतपाल सिंह ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। ईडी एवं ईओडब्ल्यू के अनुसार उसने खरीदी और आपूर्ति से जुड़ी गड़बड़ियों में एक मुख्य बिचौलिया और कमीशन एजेंट के तौर पर काम किया है। याचिकाकर्ता सतपाल सिह छाबड़ा ने डीएमएफ से जुड़ी कृषि संबंधी योजनाओं के तहत खरीद और आपूर्ति से संबंधित कथित अनियमितताओं में एक प्रमुख मध्यस्थ और कमीशन एजेंट के रूप में कार्य किया है।
जांच के दौरान छाबड़ा ने स्वीकार किया है कि 2019 से वह कृषि विभाग में आपूर्ति कार्यों को सुविधाजनक बनाने में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। उससे मंदीप चावला उर्फ मैडी ने संपर्क किया था, जिसने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा के प्रभाव से विभागीय काम हासिल करने का प्रस्ताव दिया था।
जानिए क्या है DMF घोटाला
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक ED की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। इस केस में यह तथ्य निकल कर सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गई हैं। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। ED के तथ्यों के मुताबिक टेंडर करने वाले संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी और बिचौलिए मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर नाम के लोगों के साथ मिलकर पैसे कमाए गए।
डिस्ट्रिक मिनरल फंड (DMF) घोटाला मामले में कलेक्टर को 40%, सीईओ 5%, एसडीओ 3% और सब इंजीनियर को 2% कमीशन मिला। DMF के वर्क प्रोजेक्ट में करप्शन के लिए फंड खर्च के नियमों को बदला गया था। फंड खर्च के नए प्रावधानों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरणों की कैटेगरी को जोड़ा गया था, ताकि संशोधित नियमों के सहारे DMF के तहत जरूरी डेवलपमेंट वर्क को दरकिनार कर अधिकतम कमीशन वाले प्रोजेक्ट को अप्रूव किया जा सके। यह खुलासा कोरबा में 575 करोड़ रुपए से ज्यादा के हुए DMF स्कैम की जांच में हुआ है। इसकी पुष्टि रायपुर कोर्ट में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा पेश किए गए 6 हजार पेज के चालान से हुई है।
ED की जांच से पता चला कि ठेकेदारों ने अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को भारी मात्रा में कमीशन का भुगतान किया है, जो कि कांट्रैक्ट का 25% से 40% तक था। रिश्वत के लिए दी गई रकम की एंट्री विक्रेताओं ने आवासीय (अकोमोडेशन) के रूप में की थी। एंट्री करने वाले और उनके संरक्षकों की तलाशी में कई आपत्तिजनक विवरण, कई फर्जी स्वामित्व इकाई और भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ। तलाशी अभियान के दौरान 76.50 लाख कैश बरामद किया गया। वहीं 8 बैंक खाते सीज किए। इनमें 35 लाख रुपए हैं। इसके अलावा फर्जी डमी फर्मों से संबंधित विभिन्न स्टाम्प, अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं।
धर्मांतरण के खिलाफ दिल्ली कूच: बस्तर से 1200 आदिवासी डी-लिस्टिंग की मांग लेकर रवाना, राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा ज्ञापन
जगदलपुर। देशभर में धर्मांतरित परिवारों की डी-लिस्टिंग की मांग अब तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सातों जिलों से करीब 1200 आदिवासी ग्रामीण दिल्ली रवाना हुए हैं, जहां 24 मई को राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा। सर्व आदिवासी समाज के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम का दावा है कि देशभर से करीब 5 लाख आदिवासी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं।
नक्सलवाद के बाद धर्मांतरण बड़ी समस्या- अरविंद नेताम
नेताम का कहना है कि धर्मांतरण के बाद भी कई परिवार ST और SC आरक्षण समेत सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, जबकि उन्हें मिशनरियों से भी सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने बस्तर में धर्मांतरण को नक्सलवाद के बाद सबसे बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इससे आदिवासी संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाज खतरे में पड़ गए हैं।

प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि गांव-गांव में प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और अवैध रूप से चर्च संचालित किए जा रहे हैं। इसी को रोकने के लिए धर्मांतरित परिवारों को आरक्षण लाभ से बाहर करने यानी डी-लिस्टिंग की मांग उठाई जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से अरविंद नेताम दिल्ली कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है।
बेहतर विभागीय समन्वय से कार्यों में लाएं तेजी : सचिव मुकेश कुमार बंसल
रायपुर। लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज मुंगेली जिले का दौरा कर निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण और समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी के साथ फील्ड में उतरकर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। श्री बंसल ने निर्माणाधीन लोरमी बायपास सड़क का निरीक्षण कर विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों को इसे समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
विभागीय सचिव ने मुंगेली सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और तेजी दोनों सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इनमें कोई कोताही नहीं बरती जाए। उन्होंने नगरीय निकायों तथा अन्य विभागों से समन्वय के साथ सड़क निर्माण के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने खराब सड़कों में पैच-वर्क कराने भी कहा।
श्री बंसल ने सुगम यातायात को शासन की प्राथमिकता बताते हुए गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए प्रस्ताव तैयार कर तत्काल शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड का नियमित दौरा कर चल रहे कार्यों का बारीकी से निरीक्षण कर गुणवत्ता और समय-सीमा में कार्य पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुंगेली के कलेक्टर कुन्दन कुमार, डीएफओ अभिनव कुमार, जिला पंचायत के सीईओ प्रभाकर पाण्डेय, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, बिलासपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता आर.के. रात्रे, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ज्ञानेश्वर कश्यप, अधीक्षण अभियंता के.पी. संत, कार्यपालन अभियंता शरद सतपथी, आर.के. खामरा और नीतिश तिवारी भी बैठक में मौजूद थे।
डिप्टी CM अरुण साव ने की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा: अधिकारियों को समय-सीमा में योजनाएं पूरी करने के दिए निर्देश
रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव ने आज लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों तथा मैदानी अधिकारियों की बैठक लेकर जल जीवन मिशन के कार्यों, नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं एवं प्रदेश में ग्रीष्म काल में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की। राज्य के सभी जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में शामिल हुए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव तथा जल जीवन मिशन के संचालक मोहम्मद कैसर अब्दुलहक और प्रमुख अभियंता के.के. मरकाम भी बैठक में मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जल जीवन मिशन के कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने आगामी दो वर्षों के रोडमैप पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को मिशन के शेष कार्यों को गंभीरता, सक्रियता और तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर काम की गति और पूर्णता से ही केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा कार्यों के लिए राशि जारी की जाएगी। जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को और ज्यादा फोकस एवं बारीकी से करना है।
उन्होंने कहा की वर्तमान समय में पेयजल आपूर्ति अधिकांशतः शासकीय व्यवस्था पर ही आश्रित है। जल आपूर्ति की अपर्याप्त व्यवस्था या इसमें किसी तरह की बाधा आने पर लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके लिए विभाग को दूरदृष्टि एवं पूर्वानुमान के साथ काम करने की जरूरत है।

उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में हर गांव की पेयजल व्यवस्था की समय-समय पर जांच करने और किसी तरह की दिक्कत होने पर तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने जहां-जहां जल जीवन मिशन के काम पूरे हो गए हैं, वहां हर घर जल का सत्यापन कराकर योजनाओं के संचालन-संधारण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपने को कहा।
उन्होंने विभाग के सभी मुख्य अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को कलेक्टरों से चर्चा कर प्रत्येक योजना की प्रगति पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यपालन अभियंताओं के कार्यों में सक्रिय सहयोग कर योजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करने को कहा।
उप मुख्यमंत्री ने ग्रीष्म काल में प्रदेश की पेयजल व्यवस्था की समीक्षा करते हुए खराब हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत करने और जलस्तर के नीचे चले जाने के कारण सूख चुके हैंडपंपों में राइजर पाइप बढ़ाकर जलापूर्ति दुरूस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर तत्परता से नया ट्यूबवेल भी खोदने को कहा। साव ने आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए जलजनित रोगों से बचाव के लिए भी पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए गंदे पानी की आपूर्ति रोकने, नालियों से गुजरने वाले पाइपलाइनों को बदलने तथा जल की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण करने को कहा।

उप मुख्यमंत्री साव ने विभागीय अधिकारियों से लोगों को बारिश के पानी को संचित करने, वृक्षारोपण, जलस्रोतों के संरक्षण-संवर्धन और रेन-वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित करने को कहा। भविष्य में जल की पर्याप्त उपलब्धता के लिए ये बहुत जरूरी है। उन्होंने बैठक में नक्सल प्रभावित रहे जिलों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की।
उन्होंने जल जीवन मिशन के कार्यों को गति देते हुए पहुंचविहीन एवं दूरस्थ वनांचलों में भी स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के विभिन्न प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। जल जीवन मिशन के अतिरिक्त मिशन संचालक ओंकेश चंद्रवंशी और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता एस.एल. पाण्डेय भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।
वर्ष 2026-27 में 13,183 और 2027-28 में 7352 योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जल जीवन मिशन के तहत प्रगतिरत 13 हजार 183 योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं 2027-28 में 7352 योजनाओं को पूर्ण किया जाएगा। इस दौरान क्रमशः 22 और 48 समूह जल प्रदाय योजनाओं के काम भी पूर्ण किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अभी 7060 गांव हर घर जल रिपोर्टेड हैं, जिनमें से 6018 गांवों का सत्यापन भी किया जा चुका है। राज्य में 8555 एकल ग्राम नल जल योजनाओं को पूर्ण कर संचालन-संधारण के लिए ग्राम पंचायतों को हैंडओवर किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंपों के साथ ही अभी 30 हजार 624 सिंगल-फेज पॉवर पंपों, 15 हजार 616 सौर-ऊर्जा संचालित पंपों और 9385 नल जल योजनाओं के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। ग्रीष्म काल में पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने 19 हजार 807 खराब हैंडपंपों को तत्काल सुधारा गया है। गांवों और वनांचलों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति के लिए हैंडपंपों में 31 हजार 664 मीटर राइजर पाइप बदलने के साथ ही 20 हजार 788 मीटर राइजर पाइप बढ़ाए गए हैं।
धरती के स्वर्ग कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
गुलमर्ग (जम्मू-कश्मीर)/ रायपुर। रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति के देशव्यापी अध्ययन दौरे के तहत आज जम्मू-कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनौपचारिक बैठक संपन्न हुई। बैठक में समिति के सदस्य व रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के पर्यावरण को सहेजने और इसे प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में कड़े कदम उठाने पर जोर दिया।



इस उच्च स्तरीय बैठक में जम्मू-कश्मीर सरकार के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग (DCPC) तथा केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) के वरिष्ठ प्रतिनिधियों व विशेषज्ञों के साथ व्यापक चर्चा हुई। चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में 'प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन केंद्रों' (Plastic Waste Management Centres) की स्थापना करना और यहाँ प्लास्टिक के उपयोग को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा करना रहा।
बैठक के दौरान अपने विचार साझा करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, "कश्मीर केवल भारत का ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का गौरव है। इसकी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता को देखने हर साल यहाँ देश-विदेश से लाखों सैलानी आते हैं। पर्यटकों की इस भारी तादाद के कारण यहाँ प्लास्टिक कचरे का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह अनियंत्रित प्लास्टिक कचरा यहाँ के नाजुक पर्यावरण, खूबसूरत वादियों, ग्लेशियरों और जल स्रोतों को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकता है।"
श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि केंद्र सरकार और संसदीय समिति का यह स्पष्ट मत है कि विकास और पर्यटन के साथ-साथ प्रकृति का संतुलन भी बना रहना चाहिए। इसके लिए जम्मू-कश्मीर में अत्याधुनिक प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि कचरों का सही तरीके से पुनर्चक्रण (Recycling) हो सके। साथ ही, उन्होंने स्थानीय प्रशासन और जनता से सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह बंद करने और इसके विकल्पों को बढ़ावा देने की अपील की।
इस महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान समिति के अन्य कमेटी कार्यकारी अध्यक्ष मलविंदर सिंह कांग, पुरी सांसद डॉ. संबित पात्रा, त्रिपुरा पूर्व सांसद कृति देवी देबबर्मन, राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, पाटन (गुजरात) सांसद भरतसिंहजी डाभी, पूर्णिया सांसद राजेश रंजन, फूलपुर (उ.प्र.) सांसद प्रवीण पटेल और खीरी (उ.प्र.) सांसद उत्कर्ष वर्मा, अखिलेश प्रसाद सिंह, अरुण सिंह, सहित विभाग के तमाम आला अधिकारी उपस्थित रहे।
विशेष बच्चों की शिक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, छत्तीसगढ़ को विशेष शिक्षकों की भर्ती दो माह में पूरी करने के निर्देश
नई दिल्ली/रायपुर। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को अहम निर्देश जारी करते हुए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है। “राजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य” मामले में सुनवाई के दौरान न्यायालय ने समावेशी शिक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड कौस्तुभ शुक्ला और अधिवक्ता पलाश तिवारी ने पक्ष रखा। वहीं, कौस्तुभ शुक्ला ने छत्तीसगढ़ आरसीआई टीचर एसोसिएशन की ओर से लंबित मामले में हस्तक्षेप आवेदन भी दायर किया, जिसमें राज्य शासन पक्षकार है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि प्रदेश में विशेष शिक्षकों के 848 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 100 पदों पर भर्ती के लिए 3 अक्टूबर 2025 को विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती प्रक्रिया के तहत भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) की निर्धारित योग्यता रखने वाले 62 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि 38 पद शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े कारणों के चलते रिक्त हैं।
याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय को बताया कि वर्तमान में प्राथमिक स्तर पर 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन संविदा आधार पर कार्यरत हैं, जबकि माध्यमिक स्तर पर 85 विशेष शिक्षक निश्चित मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन सभी 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन और 85 विशेष शिक्षकों को उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक दस्तावेजों के साथ स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत होने का अवसर दिया जाए। यदि वे आरसीआई द्वारा निर्धारित योग्यता और अन्य आवश्यक पात्रताओं को पूरा करते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर विधिसम्मत विचार किया जाए।
न्यायालय ने राज्य सरकार को यह भी निर्देशित किया कि पात्र पाए जाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया यथासंभव दो माह के भीतर पूरी की जाए और जुलाई 2026 में अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ में 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं, जबकि उनकी शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य में लगभग 3981 विशेष शिक्षकों की आवश्यकता है। न्यायालय ने समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की जरूरत पर विशेष बल दिया।