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छत्तीसगढ़ में मौसम का बड़ा अलर्ट, अब शुरू होगी कंपकंपाने वाली ठंड, तापमान में होगी तेजी से गिरावट
रायपुर। छत्तीसगढ़ में ठंड ने दस्तक दे दी है और आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग ने आगामी चार दिनों के लिए चेतावनी जारी करते हुए बताया कि राज्यभर में न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट संभव है। इसका असर सबसे पहले दक्षिणी छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग में दिखाई देगा और धीरे-धीरे इसका असर मध्य व उत्तरी हिस्सों तक पहुंचेगा।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत से ठंडी और शुष्क हवाएं छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने लगी हैं, जिसका सीधा प्रभाव राज्य के मौसम पर पड़ रहा है। तापमान में गिरावट के साथ सुबह और देर शाम ठंड बढ़ेगी, जबकि दिन के समय हल्की धूप देखने को मिलेगी। पिछले 24 घंटों में रायपुर का अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से कम है। वहीं, प्रदेश का सबसे कम न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रहा, जो ठंड के बढ़ते कदमों की ओर इशारा करता है।
मौसम विभाग का कहना है कि तापमान में गिरावट के इस दौर में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ भी बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, खांसी तथा मलेरिया का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 7 नवंबर से 11 नवंबर के बीच मौसम में हो रहे बदलाव के कारण मलेरिया और वायरल संक्रमण का प्रभाव अधिक देखा जा सकता है। इसलिए बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
क्षेत्रवार मौसम की स्थिति
उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़:
इन इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। सुबह और रात में ठंड बढ़ेगी, जबकि दिन के समय हल्की धूप निकलेगी। धुंध और हल्का कोहरा भी देखने को मिल सकता है।
दक्षिणी छत्तीसगढ़ (बस्तर संभाग):
आज से यहां रातें और ठंडी होने लगेंगी। कई इलाकों में तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री तक नीचे जा सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई. सिनोप्टिक सिस्टम भी फिलहाल शांत है, जिससे छत्तीसगढ़ में आगामी दिनों तक मौसम शुष्क बने रहने के आसार हैं. छत्तीसगढ़ में अब मौसम का मिजाज बदलने लगा है। उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी और उससे लगे मध्य-पूर्व बंगाल की खाड़ी व म्यांमार क्षेत्र के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। इससे प्रदेश के अधिकांश इलाकों में आकाश साफ और हवा शुष्क बनी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार बस्तर संभाग के एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ छींटे पड़ सकते हैं, लेकिन इसके बाद पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा।
जशपुर जम्बुरी में पर्यटकों ने लिया ग्रामीण संस्कृति, रोमांच और आतिथ्य का अनूठा अनुभव
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आयोजित जशपुर जम्बुरी ने पर्यटन को नया आयाम देते हुए स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और रोमांच को एक साथ जोड़ा है। जिला प्रशासन द्वारा 6 से 9 नवम्बर तक आयोजित इस चार दिवसीय आयोजन में देशभर से आए पर्यटकों को जशपुर की सुन्दर वादियों, लोक संस्कृति और आतिथ्य का सजीव अनुभव प्राप्त हो रहा है।
ग्राम केरे में पर्यटकों के लिए आठ होम स्टे की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जहाँ मेहमानों को सभी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। प्रशासन की इस पहल ने ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा दी है और स्थानीय परिवारों को भी आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिला है।


होम स्टे में ठहरे पर्यटक केवल अतिथि नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों के सदस्य बनकर रह रहे हैं। वे जशपुर की जीवनशैली, खान-पान और परंपराओं को नजदीक से महसूस कर रहे हैं। पर्यटकों ने कहा कि “होम स्टे में रहना होटल से कहीं बेहतर अनुभव है। यहाँ की सादगी, आत्मीयता और घरेलू भोजन ने मन मोह लिया।”


होम स्टे की यह अवधारणा स्थानीय जीवन से सीधा जुड़ाव प्रदान करती है। यहाँ पर्यटक घरेलू वातावरण में रहकर न केवल स्थानीय संस्कृति और भाषा को समझते हैं, बल्कि परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद भी लेते हैं। यह मॉडल होटल की तुलना में अधिक किफायती होने के साथ-साथ व्यक्तिगत और पारिवारिक वातावरण भी प्रदान करता है।
भारत के कई राज्यों — हिमाचल, उत्तराखंड, केरल, सिक्किम और असम — की तरह अब छत्तीसगढ़ भी होम स्टे आधारित ग्रामीण पर्यटन के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जशपुर की पहाड़ियाँ और हरियाली इस अवधारणा को और अधिक आकर्षक बनाती हैं।
जशपुर जम्बुरी में रोमांच प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण रहा। देशदेखा क्षेत्र में लगभग 120 पर्यटकों ने रॉक क्लाइंबिंग का रोमांचक अनुभव लिया, जो पूरी सुरक्षा और विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न हुआ। पर्यटक हरी-भरी वादियों के बीच एडवेंचर और सुकून दोनों का आनंद ले रहे हैं।
पहले दिन पंजीकृत पर्यटकों को जशपुर की पारंपरिक शैली में दोना-पत्तल में भोजन परोसा गया। दिनभर की गतिविधियों के बाद संध्या बेला में पर्यटक लोक कलाकारों के साथ झूमते नजर आए। चांदनी रात और संगीत की स्वर-लहरियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
जशपुर जम्बुरी की विशेषता रही स्टार-गेजिंग सेशन, जिसमें पर्यटकों ने खुले आसमान के नीचे तारों को निहारते हुए प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुभव किया। लोक कलाकारों के गीत, नृत्य और चांदनी की उजास ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।
जिला प्रशासन द्वारा निवास, भोजन, सुरक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुदृढ़ व्यवस्था ने जशपुर जम्बुरी को एक आदर्श ग्रामीण-पर्यटन उत्सव बना दिया है। इस आयोजन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, बल्कि जशपुर को “प्रकृति, संस्कृति और एडवेंचर का संगम” के रूप में राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिली है।
बिलासपुर रेल हादसे की CRS जांच में बड़ा अपडेट, रिपोर्ट आने में लग सकता है समय, पूछताछ के लिए सभी जिम्मेदारों को नोटिस
बिलासपुर। हाल ही में बिलासपुर में हुए दर्दनाक रेल हादसे को लेकर चल रही कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की जांच से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। मामले की जांच में शामिल सूत्रों के अनुसार, CRS रिपोर्ट आने में अभी कम से कम 15 दिन का समय लग सकता है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट की विस्तार से समीक्षा और क्रॉस एग्जामिनेशन की प्रक्रिया भी होगी, जिसके चलते अंतिम रिपोर्ट में और देरी संभव है।
गौरतलब है कि हादसे को लेकर रेलवे एवं सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ देशभर की निगाहें इस रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर हादसे की वास्तविक वजह, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
CRS जांच का दूसरा दिन, 5 सदस्यीय टीम सक्रिय
हादसे की गंभीरता को देखते हुए CRS ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच शुरू की है। 5 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम वर्तमान में जांच कार्य में लगी हुई है। गुरुवार से प्रारंभ हुई यह जांच शनिवार तक चलने की संभावना है। टीम रेलवे अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों, स्टेशन स्टाफ और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर रही है।सूत्रों के मुताबिक, अब तक 19 कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है, जिसमें लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, सिग्नलिंग स्टाफ, ट्रैकमैन एवं अन्य विभागीय कर्मचारी शामिल हैं।
पूछताछ का उद्देश्य हादसे से पहले की परिस्थितियों, तकनीकी खामियों, सिग्नलिंग सिस्टम, संचार व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल की स्थिति को समझना है।CRS टीम ने स्पष्ट किया है कि जांच पूर्ण होने से पहले हादसे के कारणों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी नतीजे पर पहुँचने को टीम ने “असमय और अनुचित” बताया है।जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हादसे की असली वजह का खुलासा रिपोर्ट तैयार होने और उसके क्रॉस एग्जामिनेशन के बाद ही संभव होगा।
क्यों लग रहा है रिपोर्ट में समय?
रिपोर्ट में देरी के पीछे मुख्य कारण:
तकनीकी और संरचनात्मक परीक्षण
सिग्नलिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम की जांच
संबंधित विभागों की रिपोर्ट का विश्लेषण
दुर्घटना स्थल की पुनः समीक्षा
रिपोर्ट के अंतिम रूप से पहले क्रॉस एग्जामिनेशन और वैलिडेशन
यह पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि रिपोर्ट तथ्यों, तकनीकी विश्लेषण और सत्यापित बयानों पर आधारित हो, ताकि कोई भी निर्णय न्यायसंगत और सटीक हो।बिलासपुर रेल हादसा न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देशभर में चिंता का विषय बना हुआ है। इस रिपोर्ट से न केवल दोषियों की जिम्मेदारी तय होगी, बल्कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में संभावित सुधारों का मार्ग भी प्रशस्त होगा। फिलहाल सभी की निगाहें CRS जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
CM साय ने IIIT नवा रायपुर के विस्तार के लिए फंड देने की घोषणा की
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के 10वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपना रजत जयंती वर्ष मना रहा है और आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ का भी ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों और ट्रिपल आईटी परिवार को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर स्थापित है, जिन्होंने शिक्षा, एकता और औद्योगिक विकास को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यह मिशन न केवल बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है, बल्कि युवाओं को सशक्त बनाने और नवाचार को प्रोत्साहन देने का भी कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सेमीकंडक्टर आज आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है— मोबाइल, सैटेलाइट, रक्षा प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सभी इससे जुड़े हैं। ऐसे में ‘मेक इन सिलिकॉन’ जैसी पहल भारत की चिप क्रांति को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कुशल मानव संसाधन, सुदृढ़ औद्योगिक ढांचा, निर्बाध बिजली आपूर्ति और तकनीकी विकास के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध है। नवा रायपुर में सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना का भूमिपूजन हो चुका है, जिससे युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर को आईटी और इनोवेशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य का ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट’ सतत विकास पर केंद्रित है, जिसमें सेमीकंडक्टर को प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इज ऑफ डूइंग बिज़नेस के साथ अब स्पीड आफ डूइंग बिज़नेस पर भी बल दे रही है।
मुख्यमंत्री ने देशभर से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को लाभ मिलेगा। उन्होंने आह्वान किया कि “हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को मध्य भारत का ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार का केंद्र बनाएं तथा भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में सक्रिय योगदान दें।”
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जब मैं पढ़ाई कर रहा था, तब छत्तीसगढ़ में एक भी राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं था। किंतु पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता के कारण आज प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, एचएनएलयू, एम्स, एनआईटी और ट्रिपल आईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित हुए हैं। इन संस्थानों ने राज्य को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई पहचान दी है।
श्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ में शिक्षा और तकनीकी विकास की अपार संभावनाएँ हैं। आज का युग टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इकोनॉमी का है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर डाउन होने से विश्वभर में जिस प्रकार कार्य प्रभावित हुए, उससे स्पष्ट है कि पावर टेक्नोलॉजी आज जीवन, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रणाली को किस हद तक प्रभावित करती है। इसलिए हमें इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अभी से तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा कि नवाचार, कौशल और काबिलियत ही भविष्य में आपकी वास्तविक उपयोगिता सिद्ध करेंगे। बड़ी उपलब्धियाँ वही व्यक्ति प्राप्त करता है, जो अपनी क्षमता को निरंतर तराशता है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवर्तन हमेशा दृष्टिकोण, संकल्प और निरंतर प्रयास से आता है। साउथ कोरिया के तकनीकी परिवर्तन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि “हमें भी उसी प्रकार शिक्षा, तकनीक और शोध में निवेश बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना होगा।”
वित्त मंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीकी दक्षता, शोध और रचनात्मक सोच को अपने जीवन का आधार बनाएं, क्योंकि आने वाला समय उन्हीं का होगा जो ज्ञान और नवाचार को अपनी शक्ति बनाएंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि सेमीकंडक्टर और औद्योगिक क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘मेक इन सिलिकॉन’ संगोष्ठी एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप शैक्षणिक संस्थान सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने युवाओं से कहा कि “आपका नवाचार और आपका संकल्प भारत की तकनीकी पहचान को नई ऊँचाई देगा।”
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) नवा रायपुर के निदेशक प्रो. ओम प्रकाश व्यास ने अतिथियों को संस्थान की 10 वर्षों की उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संस्थान में विकसित भारत की अवधारणा के अनुरूप शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। छात्रों के कौशल विकास और क्षमता निर्माण के लिए उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण एवं उद्योग आधारित परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के निदेशक प्रो. मुकुल सुतावणे, आईआईटी इंदौर के प्रो. संतोष विश्वकर्मा, मनोज कुमार मजूमदार सहित शिक्षाविद् एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहीं।
उल्लखेनीय है कि ‘मेक इन सिलिकॉन’ - स्वदेशी सेमीकंडक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी - ट्रिपल आईटी नया रायपुर के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी (ECE) विभाग के माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और वीएलएसआई डिजाइन समूह द्वारा आयोजित की जा रही है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को सशक्त बनाना और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण को प्रोत्साहित करना है। यह आयोजन शिक्षा जगत, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच नवाचार, ज्ञान-विनिमय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त मंच है, जिससे भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सके।
संगोष्ठी में वीएलएसआई डिजाइन और माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उन्नत तकनीक, जैसे नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स, एमईएमएस, क्वांटम डिवाइस, तथा उद्योग-शिक्षा सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। इन क्षेत्रों में प्रगति न केवल तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करेगी बल्कि भारत के अनुसंधान और औद्योगिक विकास के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य भी करेगी।
राष्ट्रीय मिशन के तहत यह पहल सेमीकंडक्टर उपकरण, पैकेजिंग और फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता एवं नवाचार को गति देने का प्रयास है। संगोष्ठी में नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स की सहभागिता से कौशल विकास, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया है। यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत मिशन की भावना के अनुरूप भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर नवाचार और निर्माण का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर जिले में हर्षोल्लास से मनाया गया उत्सव
रायपुर। भारत की आत्मा और एकता के प्रतीक राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर आज जिले में उत्सवपूर्ण वातावरण में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलास्तरीय मुख्य कार्यक्रम कलेक्ट्रेट के रेडक्रॉस सभाकक्ष में गरिमामय रूप से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खुशवंत साहेब, विधायक अनुज शर्मा, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह तथा अपर कलेक्टर नम्रता जैन सहित जिले के अधिकारी, कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



सभी ने एक स्वर में भावपूर्ण तरीके से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। पूरा सभाकक्ष देशभक्ति की भावना से गूंज उठा। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों को नमन करते हुए सभी ने उनके अदम्य साहस और योगदान को याद किया। जिले के शासकीय स्कूलों एवं कार्यालयों में राष्ट्रीय गान वंदे मातरम् का गायन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनों ने दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन का सीधा प्रसारण भी देखा और सुना।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का यह अवसर हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति की भावना को और प्रखर करने वाला तथा देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रतीक बन गया।
मुख्यमंत्री ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित स्मरणोत्सव में वर्चुअली हुए शामिल
रायपुर। ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज देशभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक दिन को छत्तीसगढ़ में भी बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। इस अवसर पर सभी ने “वंदे मातरम्” के उद्घोष के साथ आज़ादी की राष्ट्रीय चेतना का पुण्य स्मरण किया और अमर बलिदानियों को नमन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित स्मरणोत्सव में वर्चुअली शामिल हुए और प्रधानमंत्री का उद्बोधन भी सुना।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वंदे मातरम् मां भारती की साधना और आराधना की प्रेरक अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान का एक प्रवाह, एक लय और एक तारतम्य हृदय को स्पंदित कर देता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ का मूल भाव मां भारती है — यह भारत की शाश्वत संकल्पना, स्वतंत्र अस्तित्व-बोध और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की आज़ादी का उद्घोष था, जिसने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने और स्वाधीन भारत के स्वप्न को साकार करने की प्रेरणा दी। स्वतंत्रता आंदोलन में यह गीत क्रांतिकारियों की आवाज़ बना और यह केवल प्रतिरोध का स्वर नहीं, बल्कि आत्मबल जगाने वाला मंत्र बन गया। श्री मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ में भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और समृद्धि की कहानी समाहित है। विदेशी आक्रमणों और अंग्रेज़ों की शोषणकारी नीतियों के बीच ‘वंदे मातरम्’ ने समृद्ध भारत के स्वप्न का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत के नए स्वरूप का उदय देख रही है, जो अपनी परंपरा, आध्यात्मिकता और आधुनिकता के समन्वय से आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था, और यह गीत सदैव हमारे हृदयों में अमर रहेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह गीत मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम, कृतज्ञता और राष्ट्रधर्म की भावना का शाश्वत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन कर मातृभूमि की वंदना की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के वर्षभर चलने वाले स्मरणोत्सव का आज माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रव्यापी शुभारंभ इस कालातीत रचना के 150 वर्ष पूरे होने का गौरवपूर्ण अध्याय है। इस अवसर पर वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा स्मारक सिक्के का जारी होना एक ऐतिहासिक स्मृति है। बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम् गीत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा रहा है, जिसने सदैव राष्ट्रीय गौरव, एकता और आत्मसम्मान की ज्योति प्रज्वलित की है। यह मातृभूमि की शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक है, साथ ही भारत की एकता और आत्मगौरव की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि 7 नवम्बर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इस कालजयी रचना की सृष्टि की थी, जिसे बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में शामिल किया गया। मातृभूमि की स्तुति में रचा गया यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति की सबसे प्रबल प्रेरणा बना। अनेक क्रांतिकारियों ने “वंदे मातरम्” कहते हुए हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वंदे मातरम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बन गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 1905 में बंगाल विभाजन के समय ‘वंदे मातरम्’ ने स्वदेशी आंदोलन को नई ऊर्जा दी। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक यह गीत सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रभक्ति का मंत्र बन गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सुनते ही हृदय में ऊर्जा, गर्व और देशभक्ति का संचार होता है। यह गीत हमें स्मरण कराता है कि हमारी भूमि, जल, अन्न और संस्कृति ही हमारी जीवनदायिनी शक्ति हैं। उन्होंने कहा, “यूरोप में भूमि को ‘फादरलैंड’ कहा जाता है, लेकिन भारत में हम अपनी भूमि को ‘मातृभूमि’ कहते हैं।” यह भाव रामायण के श्लोक “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” में प्रकट होता है। ‘वंदे मातरम्’ भी इसी भाव से जन्मा हमारा ध्येय-वाक्य है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस पहल से भावी पीढ़ी को हमारे अतीत के संघर्षों और ‘वंदे मातरम्’ जैसी अमर रचनाओं की आज़ादी की लड़ाई में भूमिका के बारे में जानने का सुंदर अवसर मिलेगा। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लें और इसे भारत माता तथा छत्तीसगढ़ महतारी को समर्पित करें।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को समर्पित स्मारक सिक्का तथा डाक टिकट का विमोचन किया। साथ ही, इस अवसर पर ‘वंदे भारत पोर्टल’ (vandematram150.in) का शुभारंभ भी किया। इस पोर्टल के माध्यम से देशवासी अपनी आवाज़ में ‘वंदे मातरम्’ रिकॉर्ड कर इस ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ सकते हैं। यह पहल लोगों को भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर छायाचित्र प्रदर्शनी का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदर्शनी का विस्तार से अवलोकन करते हुए ‘वंदे मातरम्’ के सृजन से लेकर इसके राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक बनने तक की ऐतिहासिक यात्रा का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह भारत के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के दौर की अनेक अनकही कहानियों को उजागर करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी नई पीढ़ी को देश की आज़ादी के मूल भाव और ‘वंदे मातरम्’ की प्रेरक भूमिका से परिचित कराती है।
इस अवसर पर सांसद चिंतामणि महाराज, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुकेश बंसल, पी. दयानंद, डॉ. बसवराजू एस. सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिले के कलेक्टोरेट के 100 मीटर क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर लगी रोक, आदेश जारी
खैरागढ़। खैरागढ़–छुईखदान–गंडई जिले में प्रशासन ने सार्वजनिक व्यवस्था और सरकारी कामकाज को प्रभावित होने से रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी इन्द्रजीत चंद्रवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के 100 मीटर के दायरे को पूरी तरह “शांति क्षेत्र” घोषित कर दिया है. अब इस क्षेत्र में धरना, प्रदर्शन, जुलूस, नारेबाजी और लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकेगा.
आदेश में कहा गया है कि कलेक्ट्रेट के आसपास कई प्रमुख विभागों के कार्यालय हैं, जहां महिलाओं, बुजुर्गों और आम नागरिकों का लगातार आना-जाना रहता है. ऐसे में प्रदर्शन या भीड़ जुटने से लोगों को परेशानी होती है. साथ ही सरकारी कामकाज भी प्रभावित होते हैं. इसी वजह से इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के विरोध कार्यक्रम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है.
नए आदेश के अनुसार, पांच से अधिक लोगों का समूह भी बिना अनुमति कलेक्ट्रेट क्षेत्र के 100 मीटर दायरे में इकट्ठा नहीं हो सकेगा. किसी भी प्रकार के हथियार, जैसे लाठी, डंडा, परसा, तीर–धनुष, तलवार, चाकू या अन्य आक्रामक वस्तुएं लेकर सार्वजनिक स्थान पर जाना पूरी तरह निषिद्ध रहेगा. ध्वनि-विस्तारक यंत्रों का उपयोग भी पूरी तरह बंद कर दिया गया है. यदि किसी व्यक्ति या संगठन को किसी कार्यक्रम की जरूरत होती है तो उसे कार्यक्रम से 48 घंटे पहले प्रशासन से अनुमति लेनी होगी, अन्यथा उसे अवैध माना जाएगा.

कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा और उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यह आदेश 06 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गया है और 31 दिसंबर 2025 तक लागू रहेगा. आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है.प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि शांति और व्यवस्था बनाए रखने के हित में आदेश का पालन करें, ताकि सरकारी कार्य सुचारू रूप से चल सकें और किसी भी तरह की अव्यवस्था की स्थिति न बने.
जग्गी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ CBI की अपील की स्वीकार
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के लंबे समय से चर्चा में रहे रामअवतार जग्गी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने सीबीआई की अपील स्वीकार कर इसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट वापस भेजने का आदेश दिया, ताकि वहां मामले की मेरिट पर पूरी तरह से सुनवाई की जा सके। वहीं, राज्य सरकार और पीड़ित पक्ष के सतीश जग्गी (रामअवतार जग्गी के पुत्र) की याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने सुनाया।
क्या है जग्गी हत्याकांड मामला?
बता दें कि रायपुर में 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच राज्य पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में मामले में असंतोष जताने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई की जांच में आरोप लगाए गए कि अमित ऐश्वर्य जोगी (पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र) और अन्य कई लोग हत्या और साजिश में शामिल थे। हालांकि, 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
हाईकोर्ट में अपील और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ तीन पक्षों राज्य सरकार, सीबीआई और पीड़ित पक्ष के सतीश जग्गी ने बिलासपुर हाईकोर्ट में अपील दर्ज की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को गैर-स्वीकार्य या विलंबित बताते हुए खारिज कर दिया। इसके बाद तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जहां जांच केंद्रीय एजेंसी या सीबीआई ने की हो, अपील का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं बल्कि केंद्र सरकार के पास होता है। इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार की अपील गैर-स्वीकार्य मानी गई।
शिकायतकर्ता सतीश जग्गी की अपील भी खारिज की गई, क्योंकि बरी का आदेश 2007 में आया था और सीआरपीसी की धारा 372, जो पीड़ित को अपील का अधिकार देती है, 2009 में लागू हुई।
सीबीआई की अपील में देरी को सुप्रीम कोर्ट ने माफ कर दिया। अदालत ने कहा कि इतने गंभीर मामले को केवल तकनीकी कारणों से खारिज नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सीबीआई की अपील पर विस्तृत सुनवाई करके अंतिम निर्णय दे।
सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को मिलेगा मौका
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अमित जोगी, राज्य सरकार और पीड़ित सतीश जग्गी तीनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि जब किसी आपराधिक मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी (सीबीआई) को सौंपी जाती है, तो आगे की अपील का अधिकार राज्य सरकार के बजाय केंद्र सरकार के पास होता है। इस फैसले से छत्तीसगढ़ में लंबे समय से विवादास्पद रहे रामअवतार जग्गी हत्याकांड की कानूनी लड़ाई में नई दिशा मिली है और अब हाईकोर्ट में मामले की मूल बातें और सबूतों की पूरी तरह से समीक्षा होगी।
IPS रतनलाल डांगी चंदखुरी ट्रेनिंग अकादमी के निदेशक पद से हटाए गए, PHQ अटैच, आदेश जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सीनियर आईपीएस रतनलाल डांगी को चंदखुरी ट्रेनिंग अकादमी के निदेशक पद से हटा दिए गए हैं। उन्हें पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया है। वहीं आईपीएस अजय यादव को चंदखुरी ट्रेनिंग अकादमी की जिम्मेदारी दी गई है। इसका आदेश आज गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने जारी किया है।
बता दें कि हाल ही में एक सब इंस्पेक्टर की पत्नी ने 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी पर बीते सात सालों से उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कई आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य के साथ उच्च पदस्थ अधिकारियों से शिकायत की थी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभाग जांच कर रही है। वहीं आईपीएस डांगी ने इस पूरे विवाद को एक बड़ी साजिश करार देते हुए कहा था कि उनकी साफ सुथरी छवि को उच्च पदों पर संभावित नियुक्तियों के समय निशाना बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ता महिला की बहन और जीजा ने भी मीडिया से चर्चा करते हुए आरोप को झूठा बताते हुए खुद को भुक्तभोगी बताया था।
गृह विभाग ने जारी किया आदेश

छत्तीसगढ़ में जीएसटी भुगतान हुआ और आसान: क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और UPI से टैक्स जमा करने की सुविधा लागू
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के निर्देश पर राज्य जीएसटी विभाग और कोष लेखा (ट्रेज़री) विभाग द्वारा व्यवसायियों के हित में जीएसटी रिटर्न के भुगतान हेतु क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई (UPI) सुविधा पूरे राज्य में लागू कर दी गई है। इस सुविधा की मांग जीएसटी लागू होने के प्रारंभिक काल से ही व्यापारी वर्ग, चेंबर ऑफ कॉमर्स एवं विभिन्न व्यापारिक संगठनों द्वारा निरंतर की जा रही थी।
उल्लेखनीय है कि व्यापारिक वर्ग का कहना था कि यदि आधुनिक डिजिटल माध्यम जैसे यूपीआई और कार्ड भुगतान को जीएसटी पोर्टल से जोड़ा जाए, तो राज्य में कर भुगतान और अधिक सुगम व पारदर्शी हो सकेगा। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए, करदाताओं की सुविधा और डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से दोनों विभागों को संयुक्त रूप से कार्य कर इसे शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए थे, जिसके परिणामस्वरूप यह सुविधा अब प्रभावी हो गई है।
अब तक करदाताओं के लिए केवल नेट बैंकिंग और ओटीसी (Over the Counter) भुगतान के विकल्प ही उपलब्ध थे। इससे कई बार छोटे व्यापारियों और नए करदाताओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बैंकों के जीएसटी पोर्टल से जुड़े न होने के कारण भुगतान करना संभव नहीं होता था, जबकि तकनीकी कारणों से भुगतान असफल होना, बैंक सर्वर का डाउन रहना या अंतिम तिथि पर पेमेंट फेल होना जैसी समस्याएँ भी आम थीं। ऐसे में अनेक करदाताओं को भुगतान के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे समय और ऊर्जा दोनों की हानि होती थी।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि “राज्य सरकार करदाताओं को अधिकतम सुविधा देने के लिए निरंतर काम कर रही है। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई के माध्यम से जीएसटी भुगतान की यह नई सुविधा करदाताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक सरल, तेज़ और पारदर्शी बनेगी, साथ ही छोटे व्यापारियों को विशेष रूप से लाभ मिलेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल राज्य सरकार की इज ऑफ डूइंग बिज़नेस और डिजिटल गवर्नेंस को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
यह सुविधा अब जीएसटी पोर्टल (www.gst.gov.in) पर उपलब्ध है। करदाता पोर्टल में लॉगिन कर क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या यूपीआई ऐप से सीधे टैक्स का भुगतान कर सकते हैं। यह व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है और जीएसटी भुगतान को और अधिक सहज तथा उपयोगकर्ता अनुकूल बनाएगी।
इस नई पहल को राज्य में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और पारदर्शी कर प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और कर संग्रह दोनों में दक्षता बढ़ेगी तथा छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी डिजिटल टैक्स प्रशासन वाले राज्यों में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।
*“छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक और व्यापारी के लिए शासन की प्रक्रियाओं को सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाना है। करदाताओं के हित में जीएसटी भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और यूपीआई जैसी डिजिटल सुविधाओं का राज्यभर में विस्तार इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल माध्यम से भुगतान की यह व्यवस्था व्यापारियों को न केवल सुविधा और गति प्रदान करेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास को भी सुदृढ़ करेगी। हम चाहते हैं कि करदाताओं को किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी कठिनाई का सामना न करना पड़े, और वे बिना किसी बाधा के अपने कर दायित्वों का पालन कर सकें। यह पहल छत्तीसगढ़ को डिजिटल भारत और ईज ऑफ डूइंग बिजिनेस के मानकों पर अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।”
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय*
व्यापम द्वारा आगामी परीक्षाओं के मद्देनज़र केंद्राध्यक्ष, परिवहन अधिकारी (आब्जर्वर) की हुई महत्वपूर्ण बैठक
रायपुर। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल, व्यापम रायपुर द्वारा आयोजित ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पुरुष एवं ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक महिला (HGMF25) भर्ती परीक्षा 2025 को लेकर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर केंद्राध्यक्ष, परिवहन अधिकारी (आब्जर्वर) की रेडक्रॉस सभाकक्ष, कलेक्ट्रट में नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर उपेंद्र किण्डो ने आज गुरुवार को बैठक ली। बैठक में सभी केंद्रों में व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा सभी केंद्रों में दीवाल घड़ी लगाने संबंधित निर्देश दिए ताकि अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जिले में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक पुरुष एवं ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक महिला (HGMF25) भर्ती परीक्षा 09 नवंबर 2025, रविवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 01.15 बजे तक 09 परीक्षा केंद्रों में आयोजित की जाएगी। जिसमें 2488 अभ्यर्थी शामिल होंगे।
अभ्यार्थियों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश :- हल्के रंग के आधी बांह वाले कपड़े पहनकर परीक्षा देने जाए एवं काले, गहरे नीले, गहरे हरे, जामुनी, मैरून, बैंगनी रंग व गहरे चॉकलेटी रंग के कपड़े पहनना वर्जित होगा। परीक्षार्थी, परीक्षा प्रारंभ होने के कम से कम 2 घंटा पूर्व परीक्षा केन्द्र में पहुंचे ताकि उनका फ्रिस्किंग (Frisking) एवं सत्यापन किया जा सके। परीक्षा प्रारंभ होने के 30 मिनट पूर्व परीक्षा केन्द्र का मुख्य द्वार बंद कर दिया जायेगा। चूंकि यह परीक्षा प्रातः 11.00 बजे से प्रारंभ हो रहा है अतः मुख्य द्वार प्रातः 10.30 बजे बंद कर दिया जाएगा। हल्के रंग के आधी बांह वाले कपड़े पहनकर परीक्षा देने आये। धार्मिक एवं सांस्कृतिक पोशाक वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्र पर सामान्य समय से पहले रिपोर्ट करना होगा, उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा जांच से गुजरने उपरांत ही ऐसे पोशाक की अनुमति होगी। परीक्षा में चप्पल पहनें। कान में किसी भी प्रकार का आभूषण वर्जित है। परीक्षा कक्ष में किसी प्रकार का संचार उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक घडी, पर्स, पाऊच, स्कार्फ, बेल्ट, टोपी आदि ले जाना पूर्णतः वर्जित है। परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर कठोर कार्यवाही की जायेगी तथा अभ्यर्थिता समाप्त की जायेगी।
इस बैठक में सहायक नोडल अधिकारी एवं जिला रोजगार अधिकारी केदार पटेल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत कलेक्टर को बीएलओ ने सौंपा गणना प्रपत्र
रायपुर। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत आज कॉलेक्टर डॉ. गौरव सिंह एवं उनकी पत्नी डॉ सुनीता सिंह को बीएलओ द्वारा उनके शासकीय आवास पर जाकर गणना पत्र दिया गया। इस अवसर पर अपर कलेक्टर मनीष मिश्रा, अतिरिक्त तहसीलदार राकेश देवांगन सहित बूथ लेवल ऑफिसर उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि एसआईआर की शुरुआत हो गई है। जिसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) 04 नवम्बर से 04 दिसम्बर 2025 तक प्रत्येक घर जाकर गणना प्रपत्र (Enumeration Form) सौंप रहें हैं और जानकारी संकलित कर रहे हैं।
निर्वाचन आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गणना प्रपत्र भरने की अवधि 04 नवम्बर से 04 दिसम्बर 2025 तक, ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन-09 दिसम्बर 2025, दावा-आपत्ति अवधि-09 दिसम्बर 2025 से 08 जनवरी 2026, सत्यापन एवं सुनवाई 09 दिसम्बर 2025 से 31 जनवरी 2026 तथा अंतिम प्रकाशन 07 फरवरी 2026 को है। मृत, पलायन कर गए, डुप्लीकेट नामों को हटाने तथा पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान जिन व्यक्तियों की अर्हता संदिग्ध पाई जाएगी, उन्हें निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा नोटिस जारी किया जाएगा। उनका पक्ष सुनने के बाद अंतिम निर्णय (ERO) द्वारा लिया जाएगा।
जो पात्र नागरिक निर्धारित समयावधि में गणना प्रपत्र नहीं भर पाए हैं, वे दावा-आपत्ति अवधि में फार्म-6 एवं अतिरिक्त घोषणा-पत्र भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। ERO आगामी 01 अप्रैल 2026, 01 जुलाई 2026 एवं 01 अक्टूबर 2026 को अर्हता प्राप्त करने वाले मतदाताओं के आवेदन एडवांस में भी स्वीकार करेगा। इच्छुक व्यक्ति अपने आवेदन BLO के माध्यम से जमा कर सकते हैं। प्राप्त सभी दावा-आपत्तियों की सूची ERO कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जाएगी तथा साप्ताहिक रूप से यह सूची राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाएगी मतदाताओं के सहयोग हेतु प्रत्येक मतदान केन्द्र पर एनएसएस, एनसीसी, आजीविका दीदी, किसान मित्र, सचिव, मितानिन एवं हेल्थवर्कर को वालेंटियर के रूप में नियुक्त किया जाएगा। जिला मुख्यालय में कन्ट्रोल रूम/हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है, जिसका संपर्क नंबर 1950 है। नागरिक किसी भी प्रकार की सहायता हेतु इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, ERO के निर्णय के विरुद्ध जिला निर्वाचन अधिकारी को अपील की जा सकती है, तथा जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ रायपुर को द्वितीय अपील प्रस्तुत की जा सकती है। मतदाता अपने नाम एवं विवरण की जांच https://voters.eci.gov.in या https://election.cg.gov.in/searchelector/ पर कर सकते हैं। किसी भी सहायता के लिए जिला स्तरीय हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में SIR अभियान की मॉनिटरिंग करने कांग्रेस ने बनाई निगरानी समिति, मोहन मरकाम बनाए गए संयोजक, जानिए किसे मिली कहां की जिम्मेदारी…
रायपुर। AICC के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने छत्तीसगढ़ में निगरानी समिति बनाई है, जो SIR अभियान की मॉनिटरिंग करेगी। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम को समिति के संयोजक बनाए गए हैं। वहीं धनेंद्र साहू और रविंद्र चौबे सह संयोजक बनाए गए हैं।
हर संसदीय क्षेत्र से एक नेता को जिम्मेदारी दी गई है। उमेश पटेल रायगढ़, देवेंद्र यादव बिलासपुर क्षेत्र के प्रभारी, मोहम्मद अकबर राजनांदगांव और राजेंद्र साहू दुर्ग के प्रभारी बनाए गए हैं। वहीं जयसिंह अग्रवाल कोरबा, शफी अहमद सरगुजा क्षेत्र देखेंगे। शैलेश नितिन त्रिवेदी को रायपुर और तारिणी चंद्राकर को महासमुंद की जिम्मेदारी दी गई है। रेखचंद जैन बस्तर और वीरेश ठाकुर कांकेर के प्रभारी बनाए गए हैं। यह समिति SIR अभियान की निगरानी और समन्वय करेगी।

बिलासपुर में फिर एक ही ट्रैक पर आयी तीन ट्रेनें, मची अफरा-तफरी
बिलासपुर। बिलासपुर रेल मंडल में एक बार फिर बड़ा हादसा टल गया। कोटमीसोनार और जयरामनगर स्टेशन के बीच एक ही ट्रैक पर तीन ट्रेनें आने से यात्रियों के बीच दहशत फैल गई। दो मालगाड़ियों के बीच एक पैसेंजर ट्रेन फंस गई। अचानक ट्रेनें आमने–सामने दिखाई देने पर यात्रियों में घबराहट मच गई और कई यात्री ट्रेन से उतरकर भागने लगे। यह घटना हाल ही में हुए बड़े रेल हादसे के ठीक दो दिन बाद सामने आई, जिसके कारण दहशत और बढ़ गई।
4 नवंबर को हुआ था भीषण रेल हादसा
4 नवंबर को बिलासपुर रेल मंडल में मेमू ट्रेन एक मालगाड़ी से टकरा गई थी, जिसमें 11 लोगों की मौत और 20 से अधिक यात्री घायल हुए थे। वह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि दोबारा एक घटना होने से यात्रियों में डर का माहौल बन गया।
क्या हुआ आज?
सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को अचानक एक ही ट्रैक पर दो मालगाड़ियां और उनके बीच एक पैसेंजर ट्रेन आ गई। स्थिति संदिग्ध दिखाई देने पर यात्रियों ने खिड़की से बाहर देखा तो पाया कि तीनों ट्रेनें एक ही लाइन पर हैं। इस दृश्य ने 4 नवंबर के हादसे की यादें ताज़ा कर दीं, और लोग घबराकर ट्रेन से नीचे उतरने लगे।रेलवे कर्मियों ने तुरंत स्थिति संभाली और कुछ देर बाद सिस्टम को रीसेट कर ट्रेनों को सुरक्षित रूप से अलग-अलग ट्रैक पर भेजा गया। घटना में किसी भी यात्री को चोट नहीं आई।
रेलवे ने दिया आधिकारिक स्पष्टीकरण
घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इसे लेकर कई तरह की अफवाहें फैलनी शुरू हो गईं। इस पर रेलवे प्रशासन ने बयान जारी करते हुए कहा कि:
“यह ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली का सामान्य परिचालन है। इस प्रणाली में प्रत्येक किलोमीटर की दूरी पर सिग्नल लगाए जाते हैं, और हर सिग्नल के बाद दूसरी ट्रेन चलाई जा सकती है। मालगाड़ी और यात्री गाड़ियों के लिए अलग-अलग ट्रैक नहीं होते। दोनों एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी और सिग्नलिंग व्यवस्था के तहत संचालित की जाती हैं।”
रेलवे ने आगे स्पष्ट किया कि ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली वर्ष 2023 से इस रेलखंड में लागू है, और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित पूर्णत: सुरक्षित तकनीक है।रेलवे ने अफवाहों से बचने की अपील करते हुए कहा:
“ऐसे भ्रामक समाचारों पर ध्यान न दें और अफवाहें न फैलाएं। यह किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या लापरवाही का मामला नहीं है।”
यात्री क्यों घबराए?
चूंकि हाल ही में बड़ी दुर्घटना हुई थी, ऐसे में यात्रियों के मन में भय होना स्वाभाविक था। यात्रियों ने कहा कि—
“हमने हादसे के बाद रेलवे से अधिक सावधानी की अपेक्षा की थी”
“एक ही ट्रैक पर तीन ट्रेनें दिखना सुरक्षित नहीं लगता”
कुछ यात्रियों ने रेलवे की पारदर्शिता और सुरक्षा प्रबंधन पर सवाल भी उठाए।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने की विभागीय कार्यों/योजनाओं की समीक्षा
रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के सभी कार्यों की समीक्षा की है। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने विभाग के सचिव, आयुक्त, संचालक स्तर के सभी अधिकारियों को और बेहतर कार्य करने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, आयुष, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सीजीएमएससी एवं खाद्य एवं औषधि विभाग से जुड़े मुद्दों, योजनाओं, दवाइयों, उपकरणों और निर्माण कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में श्री जायसवाल ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य जनहित से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है और इसमें कोई चूक नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के लिए कहा।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा तथा संचालक आयुष शिखा राजपूत तिवारी, आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं तथा एमडी एनएचएम डॉ. प्रियंका शुक्ला, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि विभाग दीपक अग्रवाल, सीजीएमएससी के अधिकारी समेत अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
“वंदे मातरम्” के 150 वर्ष: राष्ट्रगौरव और जनभागीदारी का वर्षभर चलने वाला उत्सव 7 नवम्बर से होगा प्रारंभ
रायपुर। “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ पूरे देश के लिए गर्व और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय अवसर है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मार्गदर्शन में इस ऐतिहासिक पर्व को वर्षभर चलने वाले महाअभियान के रूप में मनाया जा रहा है। देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी यह आयोजन जनभागीदारी के साथ चार चरणों में ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक भव्य रूप में संपन्न किया जाएगा।
पहला चरण 7 नवम्बर से होगा प्रारंभ
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रम का शुभारंभ 7 नवम्बर 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया जाएगा। यह राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रातः 10 से 11 बजे तक दूरदर्शन पर प्रसारित होगा। प्रधानमंत्री के उद्बोधन के पश्चात पूरे देश में एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया जाएगा। गीत के बोल और धुन पोर्टल vandemataram150.in पर उपलब्ध हैं।
चार चरणों में होगा वर्षभर आयोजन
कार्यक्रम चार चरणों में आयोजित होगा- प्रथम चरण 7 से 14 नवम्बर 2025, द्वितीय चरण 19 से 26 जनवरी 2026, तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 (हर घर तिरंगा अभियान के साथ), और चतुर्थ चरण 1 से 7 नवम्बर 2026 तक चलेगा। इस दौरान राज्य के सभी जिलों, जनपदों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों एवं सामाजिक संगठनों में राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे।
जिलों में मंत्रीगण और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता
राज्य के सभी जिलों में मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे।प्रत्येक जिले में स्थानीय कलाकारों, छात्रों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिक समूहों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले सके।
विद्यालयों में विशेष गतिविधियाँ और रचनात्मक आयोजन
प्रदेश के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में “वंदे मातरम्” विषय पर विशेष सभाएँ, निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ होंगी। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और स्कूल बैंड के माध्यम से वंदे मातरम् और देशभक्ति गीतों की धुन पर प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी। राज्य पुलिस बैंड भी सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम और देशभक्ति गीतों पर आधारित कार्यक्रमों से वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंगेगा।
‘वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ’ एक अभिनव पहल
राज्यभर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत “वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ” स्थापित किए जाएंगे। इनमें नागरिक अपनी आवाज़ में वंदे मातरम् गाकर उसे पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर गीत की मूल धुन और बोल की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यह पहल लोगों को अपने तरीके से राष्ट्रप्रेम व्यक्त करने का अवसर देगी और आंदोलन को अधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक बनाएगी।
“वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ केवल एक स्मरणीय अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता, आत्मगौरव और मातृभूमि के प्रति समर्पण का जीवंत संदेश है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए उनमें देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय चेतना की भावना को और गहराई देगा। वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है, जिसकी गूंज हर नागरिक के हृदय में नई ऊर्जा और गर्व का संचार करेगी।
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
ई संवर्ग के 1378 शिक्षकों का प्राचार्य बनने का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने सरकार के मापदंडों और नियमों को सही ठहराया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने व्याख्याता के पद पर पदोन्नति के लिए राज्य शासन द्वारा तय कैडर व मापदंडों को सही ठहराते हुए शिक्षक की याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद ई संवर्ग के 1378 व्याख्याताओं को प्राचार्य के पद पर पदाेन्नति का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि याचिका पर सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने 5 अगस्त 2025 को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
बता दें कि 30 अप्रैल को प्राचार्य पदोन्नित की सूची जारी की गई थी। इसके तहत छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के ई संवर्ग एवं टी संवर्ग के 2,925 प्राचार्य के पदों पर स्कूल शिक्षा एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के व्याख्याता नियमित, व्याख्याता एलबी तथा प्रधान पाठक माध्यमिक विद्यालय को पदोन्नति देकर प्राचार्य बनाया था।
प्राचार्य पदोन्नति को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं लगी है। एक मामला 2019 से जुड़ा हुआ है, जबकि दूसरा प्रकरण 2025 और बीएड-डीएलएड से जुड़ा है। 28 मार्च 2025 को जब हाईकोर्ट की पिछली सुनवाई हुई थी तो राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वस्त किया गया था कि अगली सुनवाई तक प्राचार्य पदोन्नित का आदेश जारी नहीं किया जाएगा। कोर्ट का आश्वस्त करने के बाद भी 30 अप्रैल को पदोन्नति सूची जारी कर दी गई। अगले दिन एक मई को हाईकोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। जस्टिस रविंद्र कुमार ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। इससे पहले इन्टरविनर अधिवक्ता अनूप मजूमदार ने पक्ष रखा था। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसले में राज्य सरकार के बनाए गए नियमों और मापदंडों को पूरी तरह वैध माना है।
नारायण प्रकाश तिवारी ने याचिका दायर कर प्राचार्य पद पर 65% की बजाय 100% पद ई संवर्ग को देने की मांग की थी। राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्राचार्य पदोन्नति के लिए बनाए गए नियमों को लेकर डिवीजन बेंच में पहले ही विस्तार से सुनवाई हो चुकी है। 9 जून से 17 जून तक चली सुनवाई में सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए सरकार के नियमों को वैध करार दिया गया। कोर्ट ने 30 अप्रैल को जारी प्राचार्य की सूची पर लगी रोक को हटाते हुए इसे बहाल कर दिया है। डिवीजन बेंच ने प्राचार्य के पद पर पदोन्नति के लिए 65% ‘ई संवर्ग, 25% लोकल बॉडी संवर्ग और 10% सीधी भर्ती का कोटा मान्य बताया है।
याचिकाकर्ता नारायण प्रकाश तिवारी की याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने 5 अगस्त 2025 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति को लेकर हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने अहम फैसले में राज्य सरकार के बनाए गए नियमों और मापदंडों को पूरी तरह वैध माना है। डिवीजन बेंच ने इस संबंध में लगाई गई आधा दर्जन याचिकाओं को पहले ही खारिज कर दिया था।
