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रायपुर में LPG सप्लाई सामान्य: प्रशासन ने कहा—पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं
रायपुर। एलपीजी गैस से जुड़े मुद्दों को लेकर आज कलेक्टरेट परिसर स्थित रेडक्रॉस हॉल में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने जिले के एलपीजी वितरकों की बैठक ली। अपर कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि जिले में एलपीजी सिलेण्डर का पर्याप्त स्टॉक है। नियमानुसार उपभोक्ताओं को सिलेण्डर का वितरण किया जा रहा है। यह ध्यान रखें कि वितरण में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें। साथ ही यदि कोई तत्व वितरण में बाधा पहुंचाता है या एजेंसी कार्यालय में नियम के विरूद्ध सिलेण्डर लेने की कोशिश या डिलिवरी मैन से दुर्व्यवहार करता है, उनके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। श्री सिंह ने कहा कि सभी वितरक व्यवस्था बनाए रखें एवं किसी प्रकार की कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी और पुलिस को सूचना दें। उन्होेंने कहा कि अस्पताल जैसे एम्स, मेकाहारा, वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम एवं अन्य समाज कल्याण विभाग से जुड़े अन्य संस्थानों में भी गैस की पूर्ति सुनिश्चित करें। बैठक में ऑयल कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि वर्तमान स्थिति के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन की लिमिट रखी गई है जिसके बाद की अगली बुकिंग की जा सकेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि अभी नए कनेक्शन और सिंगल-डबल कनेक्शन लेने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। आदेश आने पर रायपुर जिले के इंडेन डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं ऑल एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विकास मरकाम ने आम उपभोक्ताओं से अपील की, कि पैनिक न हों जिले में इस समय पर्याप्त मात्रा में स्टॉक है। एजेंसी के कार्यालय में पहुंचकर किसी प्रकार का व्यवधान न उत्पन्न करें, हमारे कार्यों में सहयोग करें। सभी उपभोक्ताओं को नियमानुसार सिलेण्डर दिया जाएगा। इस अवसर पर खाद्य नियंत्रक भूपेन्द्र मिश्रा सहित खाद्य विभाग के अधिकारी एवं जिले के एलपीजी वितरक उपस्थित थे।
अवकाश के दिनों में भी खुले रहेंगे पंजीयन कार्यालय, आदेश जारी …
रायपुर। पंजीयन विभाग ने राजस्व संग्रह को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. मार्च माह के अंत में आने वाले शासकीय अवकाश के दिनों में भी पंजीयन कार्यालय खुले रहेंगे. कार्यालय महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, रायपुर ने इस संबंध में आदेश जारी किया है.
पंजीयन विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में अधिक से अधिक पंजीयन कार्य संपन्न कराने और राजस्व संग्रह को बनाए रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है.
इन तारीखों को खुलेंगे कार्यालय
22 मार्च – चौथा रविवार
28 मार्च – अंतिम शनिवार
29 मार्च – अंतिम रविवार
31 मार्च – महावीर जयंती
इन दिनों में पंजीयन कार्यालयों को खोलकर दस्तावेजों का पंजीयन कार्य किया जाएगा. साथ ही 31 मार्च तक बैंकिंग लेनदेन सुचारू रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि राजस्व प्रक्रिया प्रभावित न हो. इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों, जिला पंजीयकों और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं.
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विधानसभा में CM साय का कांग्रेस पर तीखा हमला: ‘कुशासन, भ्रष्टाचार और घोटालों की विरासत छोड़ी’
रायपुर। मुझे भूपेश बघेल के कुशासन के 5 साल याद आते हैं. उस दौरान केवल एक ही संवाद चलता था—ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे भूपेश बघेल ने ठगा नहीं. छत्तीसगढ़ की जनता को तो छोड़िए, इन्होंने अपने लोगों के साथ भी न्याय नहीं किया. वहीं हम लोग पिछले दो सालों से संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा कर रहे हैं. यह बात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कही.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इनकी योजनाएं कागजों पर बनीं और वहीं सिमट कर रह गईं. इन्होंने “नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी” का नारा दिया था. इन चारों की स्थिति क्या हुई, यह छत्तीसगढ़ की जनता अच्छी तरह जानती है. सब जानते हैं कि कांग्रेस के नेताओं ने शराब दुकानों में दो काउंटर खोल रखे थे—एक विभाग का और दूसरा उनका अपना. पैसा कहां-कहां जाता था, यह सबको मालूम है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने डिजिटल गवर्नेंस और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाकर लीक खत्म की. इससे जनता की मेहनत की कमाई का पैसा अब जनकल्याण में खर्च हो रहा है. उनकी सरकार में आबकारी विभाग का राजस्व लगभग 5,110 करोड़ था. हमारी सरकार में इस साल का अनुमान लगभग 11,000 करोड़ का है. यह अंतर इसलिए है, क्योंकि हमने फर्जीवाड़ा को समाप्त किया.
मुख्यमंत्री साय ने नक्सलवाद को लेकर कहा कि हमने मार्च तक माओवादी आतंक के अंत का लक्ष्य रखा है, और इस दिशा में हमने सफलतापूर्वक कार्य किया है. 120 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. कई लोगों ने हथियार छोड़कर संविधान का रास्ता अपनाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में हमने माओवाद के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ी. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र को मजबूती देकर हम शांति के साथ पुनर्निर्माण और समग्र विकास के लक्ष्य को साकार कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने खनिज संसाधन विभाग का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक विकास सुनिश्चित करने और लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में प्रदेश के खनिज राजस्व की महत्वपूर्ण भूमिका है. दुर्भाग्य से कांग्रेस के पांच सालों में इस क्षेत्र की प्रगति रुक गई. ऐसा नहीं था कि हमारी धरती में संसाधनों की कमी थी, बल्कि समस्या यह थी कि इन संसाधनों का सही उपयोग नहीं किया गया. यह कोई सामान्य भ्रष्टाचार नहीं था, बल्कि ऐसा भ्रष्टाचार था जिसकी मिसाल कहीं नहीं मिलती. ट्रांजिट पास को ऑनलाइन करने के बजाय मैन्युअल रखकर बड़े पैमाने पर घोटाले किए गए.
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि डीएमएफ के काम के लिए कलेक्टरों के पास फोन जाते थे, और नियमों की धज्जियां उड़ाकर गुमवत्ताविहिन खरीदी की जाती थी, और डीएमएफ संहिता के विरुद्ध गैरजरूरी कार्यों में राशि खपा दी जाती थी. इसकी राष्ट्रीय स्तर पर जांच हो रही है, और बंदरबांट के नए-नए खुलासे हो रहे हैं. हमारी सरकार ने डीएमएफ को पारदर्शी बनाया है. दो वर्षों में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि प्राप्त हुई. 19,000 से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए.
राज्य में विगत दो वर्षों में वन संरक्षण अधिनियम के तहत स्वीकृत खनन प्रकरणों में खनन कार्य हेतु एक लाख 3 हजार 855 पेड़ों की कटाई की गई है, जबकि इसके एवज में खनन एवं औद्योगिक क्षेत्रों में 30 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं. हमने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पेड़ लगाये हैं. मुझे सदन को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारतीय वन अनुसंधान संस्थान देहरादून द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किमी की वृद्धि दर्ज की गई है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार जब हम प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे थे, हमने राज्य की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के बारे में कांग्रेस की सरकार को बार-बार आगाह किया था, भविष्य में बढ़ते औद्योगीकरण, किसानों की जरूरतों के अनुरूप और आम जनता को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए यह बहुत जरूरी था. आगामी दस वर्षों के ऊर्जा खपत को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार इस बात का भरसक प्रयास कर रही है कि प्रदेश ऊर्जा उत्पादन में देश का नेतृत्वकर्ता राज्य बने.
उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाने का आग्रह करते हुए कहा कि बिजली उत्पादक बनकर रियायती बिजली से जीरो बिजली बिल की ओर बढ़ें. उन्होंने कहा कि कोरोना काल की वजह से एवं अन्य आर्थिक कठिनाइयों की वजह से अनेक उपभोक्ताओं की बिजली बिल की राशि बकाया थी. ऐसे 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं के लिए मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से मूल राशि तथा अधिभार में छूट देते बिल भुगतान की सुविधा दी जा रही है.
विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए बुनियादी सुविधाओं के काम हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संवेदनशीलता की वजह से संभव हो रहे हैं, जब भी भारत में पीवीटीजी की बेहतरी का इतिहास लिखा जाएगा, मोदी का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा. हम पीएम जनमन योजना एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत इनकी बस्तियों में बिजली पहुंचाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा कि अपने पांच साल के कार्यकाल में इन्होंने मंत्रालय की सूरत पांच बार भी नहीं देखी होगी, कोविड के बाद तो शायद एक बार भी ये लोग वहां नहीं गये.
प्रशासनिक सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं कभी दौरे पर होता हूँ और जरूरी फाइल हो तो मुझे रायपुर आने का इंतजार करने की जरूरत नहीं. जहां हूँ, वहीं ई- आफिस के माध्यम से फाइलों का निपटारा कर लेता हूँ. हमारे अधिकारी अवकाश में हो या दौरे पर हों, कहीं से भी ई-ऑफिस के माध्यम से फाइलों का निपटारा कर लेते हैं. ट्रेनिंग और टेक्नोलाजी से हम प्रशासनिक तंत्र को ट्रांसफार्म कर रहें हैं जिसके बल पर हम विकसित भारत विकसित छत्तीसगढ़ के अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सफलतापूर्वक बढ़ रहे हैं.
नए जमाने के साथ सरकार के कदमताल का जिक्र करते हुए कहा कि हमने मुख्यमंत्री एआई मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए की राशि रखी है. इसके माध्यम से राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों, आईटीआई एवं पॉलेक्टिनिक में एआई डेटा लैब्स तथा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जिससे हमारे बच्चे एवं युवा पीढ़ी एआई से जुड़कर इसका लाभ उठा पाएंगे. साथ ही इससे शासकीय कामकाज में भी एआई का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा तथा नागरिकों को आसानी से शासकीय सेवाएं उपलब्ध हो सकेगी.
फिर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आपस में हमारे मतभेद हो सकते हैं लेकिन जब घर में मेहमान आते हैं तो उनके सामने हम कभी इसे प्रकट नहीं करते, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने एआई समिट में ऐसी अभद्रता की जिसका इतिहास में कोई सानी नहीं है.
राज्य के युवाओं के साथ हुए अन्याय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं किसी भी राज्य की प्रशासनिक प्रणाली का आधार होती है, इन्होंने सिस्टम में ऐसे भ्रष्टाचारी बिठाये कि वे हमारी सिविल सेवा के ढांचे को खोखला करने लगे. हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की और अब युवाओं के अवसर छीनने वाले अपराधी सलाखों के पीछे हैं.
मीडिया का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कई जगह तो पत्रकारों पर झूठे मुकदमें दर्ज किए गए. यहां तक की उन्हें जेल भेजा गया. कई पत्रकारों को नौकरी से भी निकलवाया गया. यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने कांग्रेस के काले कारनामों को उजागर किया. जब हमारी सरकार आई तो आम जनता को इस कुशासन से मुक्ति मिली ही, पत्रकारों को भी सुखद अनुभव हुआ और उन्होंने महसूस किया कि दूसरी इमरजेंसी जैसा दौर समाप्त हुआ.
प्रदेश में एलपीजी आपूर्ति सुचारु: कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था लागू
रायपुर। खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले के दिशानिर्देश पर छत्तीसगढ़ में निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ कमर्शियल गैस कनेक्शन वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के लिए संतुलित और प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था केंद्रीय पेट्रोलियम एवं नैसर्गिक गैस मंत्रालय के अधीन लागू करने का निर्णय लिया गया है।
खाद्य सचिव रीना कंगाले ने कहा कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रहे और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार एवं ऑयल कंपनियों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कमर्शियल उपभोक्ताओं को विगत माहों की खपत के आधार पर अधिकतम 20 प्रतिशत की सीमा के अंदर एलपीजी प्रदाय करने पर सहमति बनी है।
कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों एवं चिकित्सालयों के साथ-साथ सैन्य एवं अर्द्धसैन्य कैंप, जेल, हॉस्टल, समाज कल्याण संस्थान, रेलवे एवं एयरपोर्ट कैंटीन को पूर्ण प्राथमिकता देते हुए 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं शासकीय कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं उनके गेस्ट हाउस और कैंटीन के लिए 50 प्रतिशत, पशु आहार उत्पादक संयंत्र एवं बीज उत्पादक इकाई तथा रेस्टोरेंट एवं होटल के लिए 20 प्रतिशत आपूर्ति निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि कमर्शियल एलपीजी के वितरण की दैनिक समीक्षा ऑयल कंपनियों द्वारा की जाएगी तथा इसकी जानकारी प्रतिदिन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी रहे।
खाद्य सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने कहा कि आम नागरिकों को निर्बाध एलपीजी आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े, साथ ही सभी वर्गों तक संतुलित रूप से गैस की उपलब्धता बनी रहे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विभागों के लिए 10 हजार 617 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विभागों से संबंधित 10 हजार 617 करोड़ 73 लाख 49 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के लिए 612 करोड़ 29 लाख 20 हजार रूपए, सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय 30 करोड़ 92 लाख रूपए, जल संसाधन विभाग के लिए 3 हजार 105 करोड़ 11 लाख 80 हजार रूपए, खनिज साधन विभाग से संबंधित व्यय 1145 करोड़ 89 लाख 99 हजार रूपए, विमानन विभाग से संबंधित व्यय 314 करोड़ 99 लाख 90 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग 416 करोड़ 99 लाख 99 हजार रूपए, सुशासन एवं अभिसरण विभाग से संबंधित व्यय 77 करोड़ रूपए, जनसम्पर्क विभाग से संबंधित व्यय 469 करोड़ 99 लाख रूपए, ऊर्जा विभाग से संबंधित व्यय 4236 करोड़ 01 लाख 61 हजार रूपए, जिला परियोजनाओं से संबंधित व्यय 208 करोड़ 50 लाख रूपए शामिल हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि पिछले दो वर्षों से राज्य सरकार संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी है और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने में बजट प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले दो बजटों की थीम ‘ज्ञान’ और ‘गति’ थी, जबकि इस बार बजट की थीम ‘संकल्प’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और डिजिटल गवर्नेंस की नीति अपनाकर व्यवस्थागत लिकेज समाप्त किए हैं, जिसके कारण आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याण में खर्च हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में आबकारी विभाग का राजस्व 5 हजार 110 करोड़ रुपए था, जो वर्तमान सरकार में बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए अनुमानित है। यह अंतर फर्जीवाड़े पर रोक लगने के कारण आया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे अभियान को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने माओवादी आतंकवाद के अंत का लक्ष्य तय कर उसी दिशा में प्रभावी कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास जताया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए उत्सव का क्षण बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन, जवानों की वीरता और प्रदेशवासियों के विश्वास से राज्य माओवादी हिंसा के अंधकार से बाहर निकल रहा है। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र को मजबूत कर शांति, पुनर्निर्माण और समग्र विकास के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में खनिज राजस्व की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 12 हजार 305 करोड़ रुपए रहा वहीं वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ रुपए हो गया है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 11 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 17 हजार करोड़ रुपए राजस्व प्राप्ति का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग किसानों, माताओं-बहनों और आम नागरिकों के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ को पुनः पारदर्शी बनाते हुए दो वर्षों में 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई और 19 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए। डीएमएफ कार्यों का सोशल ऑडिट भी कराया जा रहा है तथा शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है। खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को भी गति दी गई है और अब तक 62 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ, क्रिटिकल और स्ट्रैटजिक खनिजों के अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से एमओयू किए गए हैं, जिससे क्लीन एनर्जी और नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य के कुल वन क्षेत्र के मात्र 0.96 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज रियायतें स्वीकृत हैं और केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन कार्य की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि खनन कार्यों के एवज में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।
भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि खनिज विभाग में पारदर्शिता के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल तथा डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किया गया है। आम जनता को रियायती दरों पर रेत उपलब्ध कराने और माफिया पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम 2025 लागू किए गए हैं तथा रेत की ई-नीलामी शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रदेश एक प्रमुख ऊर्जा प्रदाता के रूप में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पावर प्लांट्स की कुल विद्युत क्षमता 30 हजार मेगावाट है, जिसमें ताप विद्युत संयंत्रों की क्षमता 24 हजार मेगावाट है। राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता और प्लांट लोड फैक्टर देश के अग्रणी राज्यों में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। एनर्जी समिट के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 32 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं से एमओयू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों का काम प्रगति पर है तथा 8300 मेगावाट क्षमता की पम्प स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं के लिए 6 स्थलों का चिन्हांकन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर बिजली की सतत आपूर्ति सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक निःशुल्क बिजली देने हेतु 354 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत 42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक की खपत पर राहत देने के लिए 800 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े राज्य अनुदान के लिए 400 करोड़ रुपए और डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना के तहत 8 लाख 83 हजार कृषि पंप उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने के लिए 5 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अनुदान के कारण सोलर प्लांट्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और उपभोक्ता अब केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि बिजली उत्पादक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास का उजाला पहुंच रहा है और नियद नेल्ला नार योजना के तहत 158 गांवों को शतप्रतिशत विद्युतीकृत किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार ने दो वर्षों में 11 हजार 107 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत की हैं और 25 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है। बंद पड़ी सिंचाई योजनाओं को अटल सिंचाई योजना के माध्यम से फिर से शुरू किया गया है। 115 परियोजनाओं के पूर्ण होने से 76 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा। इस बार बजट में 4 हजार 400 करोड़ रुपए से अधिक राशि नई सिंचाई योजनाओं और उनके अनुरक्षण के लिए रखी गई है। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में शामिल योजनाओं से 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है। बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने मटनार और देऊरगांव में बैराज तथा 68 किलोमीटर नहर निर्माण का प्रावधान बताया, जिससे 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होगी। उन्होंने कहा कि ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के मंत्र के अनुरूप दाबयुक्त सिंचाई प्रणाली को अपनाया जा रहा है और जल सूचना विज्ञान केंद्र स्थापित कर जल प्रबंधन को वैज्ञानिक आधार दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रालय से लेकर मैदानी अमले तक कार्य संस्कृति में बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बायोमेट्रिक अटेंडेंस, ई-ऑफिस, ई-एचआरएमएस और स्पैरो जैसी व्यवस्थाओं ने शासन को अधिक जवाबदेह, त्वरित और पारदर्शी बनाया है। उन्होंने बताया कि 50 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में और 65 हजार से अधिक कर्मचारी ई-एचआरएमएस प्रणाली में ऑनबोर्ड हो चुके हैं। आई-गॉट कर्मयोगी के माध्यम से 6 लाख कर्मचारियों के प्रशिक्षण की कार्ययोजना पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी के जरिए प्रशासनिक तंत्र को ट्रांसफॉर्म किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सुशासन की दिशा में राज्य सरकार ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाने, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल से योजनाओं की सटीक निगरानी करने, ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराने तथा नई पीढ़ी के उत्कृष्ट लोकप्रशासक तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप जैसी पहलें की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के लिए 22 करोड़ रुपए, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के लिए 5 करोड़ रुपए तथा मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के लिए 8 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का युग आईटी और एआई का है और छत्तीसगढ़ इस डिजिटल क्रांति में अग्रणी बने, इसके लिए 417 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री एआई मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए की राशि रखी गई है, जिसके माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों, आईटीआई और पॉलीटेक्निक में एआई डेटा लैब्स और एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे युवा पीढ़ी को नई तकनीक से जुड़ने का अवसर मिलेगा और शासकीय सेवाएं भी अधिक सरल और प्रभावी होंगी। डिजिटल कनेक्टिविटी का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि दो वर्षों में 936 मोबाइल टावर स्वीकृत हुए हैं और 751 टावर ऑन एयर हो चुके हैं। भारत नेट परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों में हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए 3900 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने के लिए 36 आईएनसी-सीजी इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ की उड़ान को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार विमानन अधोसंरचना का विस्तार कर रही है। बिलासपुर एयरपोर्ट के 3सी-आईएफआर अपग्रेडेशन से अब वहां नाइट लैंडिंग और चौबीस घंटे विमान सेवाओं का संचालन संभव होगा। इंटरनेशनल कार्गाे टर्मिनल के लिए एमओयू किया गया है, जिससे कारोबारियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सीजी वायु योजना के माध्यम से बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर से हवाई सेवाओं का विस्तार होगा, जिसके लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। रायगढ़ और कोरबा की हवाई पट्टियों के उन्नयन पर भी सरकार का विशेष फोकस है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ सांस्कृतिक प्रगति की भी पक्षधर है। पत्रकारों के लिए एक्सपोजर विजिट के माध्यम से उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में अध्ययन भ्रमण का अवसर दिया गया, जिसमें दूरस्थ क्षेत्रों और महिला पत्रकारों को भी शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन राज्य की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देता है और इस बार भी इसके लिए बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रवासी छत्तीसगढ़िया सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया है, जिससे प्रदेश के बाहर अपनी पहचान बनाने वाले छत्तीसगढ़िया लोगों के अनुभवों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।
एसईसीएल टेंडर विवाद: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, शर्तों की व्याख्या का अधिकार विभाग को बताया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एसईसीएल के टेंडर को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि टेंडर की शर्तों की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार उस विभाग या कंपनी के पास है जिसने टेंडर जारी किया है.
एसईसीएल ने कोरबा क्षेत्र की बगदेवा भूमिगत खदान के लिए नवनिर्मित स्वदेशी कंटीन्युअस माइनर मशीन के लिए ट्रायल टेंडर जारी किया था. रायपुर की कंपनी मोश वरया ने इसके लिए बोली लगाई और सैंडविक मॉडल एमसी-350 मशीन का प्रस्ताव दिया. कंपनी का दावा था कि यह मशीन पुणे में बनी है और इसमें 57.23% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, इसलिए इसे नवनिर्मित माना जाए. एसईसीएल की टेक्निकल कमेटी ने कंपनी की बोली यह कहते हुए खारिज कर दी कि सैंडविक का यही मॉडल पहले से ही हल्दीपला खदान में काम कर रहा है. जबकि टेंडर की स्पष्ट शर्त थी कि मशीन नवनिर्मित होनी चाहिए और भारत की किसी भी खदान में पहले उपयोग नहीं की गई होनी चाहिए. सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि टेंडर जारी करने वाली अथॉरिटी प्रोजेक्ट की जरूरतों को समझने के लिए सबसे बेहतर स्थिति में होती है. कोर्ट तब तक ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता जब तक कि निर्णय पूरी तरह से मनमाना या दुर्भावनापूर्ण न हो.
चैटजीपीटी के इस्तेमाल पर विवाद
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एसईसीएल नवनिर्मित शब्द की व्याख्या के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल चैटजीपीटी की मदद ली, जो कि नियम विरुद्ध है. लेकिन हाई कोर्ट और इंडिपेंडेंट एक्सटर्नल मॉनिटर्स ने पाया कि विभाग ने प्री-बिड स्पष्टीकरण के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लिया था और एआई का उपयोग केवल सामान्य समझ के लिए किया गया था, जिससे निर्णय की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता.
कैब की बढ़ती कीमतों (Surge Pricing) से बड़ी राहत! ओला-उबर के एकाधिकार को खत्म करेगा 'भारत टैक्सी' ऐप; छत्तीसगढ़ में जल्द होगी शुरुआत - सांसद बृजमोहन अग्रवाल
नई दिल्ली। दैनिक यात्रियों और गिग-वर्कर्स को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार 'भारत टैक्सी' ऐप को तेजी से बढ़ावा दे रही है। यह एक सहकारी-आधारित (Cooperative-based) राइड-हेलिंग विकल्प है, जिसे ओला, उबर और रैपिडो जैसे निजी एग्रीगेटर्स के दबदबे को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है।
लोकसभा सत्र के दौरान रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल को उत्तर देते हुए, केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस प्लेटफॉर्म के विजन को रेखांकित किया। शाह ने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार भारत में सहकारी आंदोलन को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि इसे कॉर्पोरेट क्षेत्र के समान विकास के अवसर मिल सकें और पूरी दुनिया के सामने एक सफल सहकारी उदाहरण पेश किया जा सके।
"यात्री अचानक बढ़ती कीमतों से तंग आ चुके हैं, और हमारे ड्राइवर भारी कॉर्पोरेट कमीशन के कारण परेशान हैं। भारत टैक्सी का सहकारी मॉडल इस रोजमर्रा के संकट का एक सटीक और पारदर्शी समाधान है। मैं माननीय अमित शाह से औपचारिक अनुरोध करके छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत में तेजी लाऊंगा।"
- साांसद बृजमोहन अग्रवाल
ओला, उबर और रैपिडो का एकाधिकार होगा खत्म
वर्षों से, निजी एग्रीगेटर्स को दोनों पक्षों (ड्राइवर और यात्री) से भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियाँ नियमित रूप से भारी कमीशन वसूलती हैं—जो अक्सर ड्राइवर की मेहनत की कमाई का 25% से 30% हिस्सा खा जाती हैं। वहीं दूसरी ओर, यात्रियों को मनमाने 'सरज प्राइसिंग' (Surge Pricing) का खामियाजा भुगतना पड़ता है।
बढ़ते दैनिक खर्चों के बीच, हवाई अड्डों पर निजी कैब द्वारा वसूला जाने वाला अत्यधिक किराया एक बड़ा सिरदर्द बन गया है, जहाँ उड़ान उतरते ही कीमतें आसमान छूने लगती हैं। भारत टैक्सी को इन कमियों को सीधे दूर करने के लिए बेहतर ढंग से डिजाइन किया गया है। ड्राइवरों को सशक्त बनाकर और यात्रियों को दैनिक मूल्य शोषण से बचाकर, भारत टैक्सी ऐप शहरी आवागमन (Urban Mobility) में क्रांति लाने और भारत के डिजिटल सहकारी परिदृश्य को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है।
धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक वापस, अन्य संशोधन बिल सर्वसम्मति से पारित; अनुदान मांगों पर विपक्ष रहा अनुपस्थित
रायपुर। विधानसभा बजट सत्र के दौरान मंगलवार को गृह मंत्री विजय शर्मा ने राज्यपाल द्वारा लौटाए गए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 पर विचार का प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विचार के उपरांत आसंदी ने सरकार को विधेयक वापस लेने की अनुमति दी.
विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2006 को वापस लेने के अलावा राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. जिसे विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया. इसके साथ मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन का प्रस्ताव और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर्नस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत किया. विधानसभा में दोनों प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ.
एक के बाद एक प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों के स्वीकार होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों से सम्बंधित अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हुआ. विपक्ष ने चर्चा में भाग नहीं लिया.
जेलों में ओवरक्राउडिंग पर हाईकोर्ट सख्त, नई जेलों में मॉडल मैनुअल 2016 लागू करने के निर्देश
बिलासपुर। प्रदेश की जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या और वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर हाईकोर्ट ने अब सख्त आदेश दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जेलों में जरूरी सुधार और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य शासन को नई जेलों के निर्माण में मॉडल जेल मैनुअल 2016 के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। अब 5 मई को सुनवाई होगी।
प्रदेश की जेलों में ओवरक्राउड और मरीजों के स्वास्थ्य समेत अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर बिलासपुर निवासी शिवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसके अलावा हाईकोर्ट भी संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई कर रहा है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से डीजी, जेल का शपथपत्र प्रस्तुत कर बताया गया कि बिलासपुर के बैमा नगई में नई जेल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता की रिपोर्ट के अनुसार इस जेल का निर्माण मॉडल जेल मैनुअल 2016 के मानक मापदंडों से भी उच्च स्तर पर किया जा रहा है। निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए 4 सदस्यीय कमेटी भी गठित की गई है।
बेमेतरा में ओपन जेल बनकर तैयार
इसके साथ ही बताया गया कि बेमेतरा में 200 कैदियों की क्षमता वाली एक नई ओपन जेल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यह निर्माण पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया है।
हाईकोर्ट ने मांगी सभी जेलों की जानकारी
हाईकोर्ट ने 5 मई तक वर्तमान जेलों की पूरी जानकारी देने को कहा है। डीजी, जेल को नया शपथपत्र देकर बताना होगा कि वर्तमान में चल रही जेलों की क्षमता कितनी है और क्या वहां कैदियों को मॉडल मैनुअल के हिसाब से जगह मिल रही है या नहीं। जेल निर्माण में 11 बिंदुओं के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और समय-समय पर निरीक्षण करने को कहा गया है।
छत्तीसगढ़ की 11 नदियों के संरक्षण के लिए हाई-पावर कमेटी गठित, हाईकोर्ट ने विशेषज्ञों को शामिल करने पर उठाए सवाल
बिलासपुर। अरपा समेत 11 प्रमुख नदियों के संरक्षण- संवर्धन के लिए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। सोमवार को शपथ पत्र देकर बताया गया कि अब मुख्य सचिव विकास शील खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सभी जिलों के कलेक्टरों से कहा गया है कि अगले 15 दिनों के भीतर नदियों के उद्गम स्थलों का सीमांकन कर वहां डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाए। सभी कलेक्टरों को उद्गम स्थलों के भू-अभिलेख और जियो-टैग्ड तस्वीरें शासन को भेजनी होगी। इधर, राज्य सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि समिति में सचिवों की जगह विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
अरपा के उद्गम और प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र के संरक्षण और संवर्धन को लेकर अधिवक्ता अरविंद कुमार शुक्ला समेत अन्य ने वर्ष 2019 और 2020 में जनहित याचिकाएं लगाई थी। बाद में इस मामले में प्रदेश की अन्य नदियों को शामिल किया गया। 20 जनवरी को दिए गए हाई कोर्ट के आदेश के पालन में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-पावर कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें वित्त, जल संसाधन और वन विभाग समेत 7 विभागों के सचिवों को शामिल किया गया है। सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने समिति में विशेषज्ञ शामिल नहीं होने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने विभाग के सचिवों की जगह विशेषज्ञों को शामिल करने पर पुनर्विचार किया जाए।
इन 11 नदियों की बदलेगी सूरत
राज्य सरकार ने बताया कि अरपा, महानदी, शिवनाथ, हसदेव, तांदुला, पैरी, मांड, केलो, सोन, तिपान और लीलगर नदी के उद्गम को संवारा- सहेजा जाएगा। नदियों पुनरुद्धार के लिए विभाग स्तर पर विशेषज्ञों का एक समर्पित सेल बनाया जाएगा। नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण के लिए साइंटिफिक सर्वे कराकर डीपीआर तैयार किया जाएगा।
ट्रीटमेंट के बाद ही गिरेगा नाले- नालियों का पानी
इसके अलावा कहा गया कि शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के नदियों में नहीं गिरेगा। उद्गम स्थलों को न केवल संरक्षित किया जाएगा, बल्कि उन्हें आस्था और पर्यटन के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए विभाग अपने बजट के अलावा डीएमएफ, मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग कर सकेंगे।
8 सदस्यीय समिति में सीएस समेत 7 सचिव, एक विशेषज्ञ
समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे, इसके अलावा वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, वन एवं जलवायु परिवर्तन, नगरीय प्रशासन एवं विकास और खनिज संसाधन विभाग के सचिव सदस्य होंगे। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, दुर्ग के पूर्व कुलपति प्रो. एमके. वर्मा को विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।
विधानसभा घेराव से पहले कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, मनरेगा–महंगाई समेत कई मुद्दों पर भाजपा सरकार पर तीखा हमला
रायपुर। मनरेगा का नाम बदलने, सिलेंडर की बढ़ी कीमतों, किसानों पर अत्याचार, बेरोजगारी, प्रदेश में बढ़ते अपराध, जंगलों की कटाई समेत कई मुद्दों को लेकर कांग्रेस आज विधानसभा का घेराव कर रही है। घेराव से पहले भारत माता चौक पर सभा का आयोजन किया गया, जिसमें कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सहित कई विधायक, पूर्व मंत्री सहित हजारों की संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि “56 इंच की बात करने वाली सरकार आज किसानों को डीएपी खाद तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है।” उन्होंने गैस सिलेंडर की कीमतों और उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि “आज देश में आम आदमी को गैस सिलेंडर तक नहीं मिल रहा है और कीमतें ढाई हजार रुपये तक पहुंच गई हैं।” नरेंद्र भी गायब और सरेंडर भी गायब, ये नारा लोकसभा में लग रहा है। विश्व गुरु अब गुरु घंटाल बन चुके हैं, शर्म से पानी में डूब मरना चाहिए।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए रोजगार, महंगाई और गरीबों के अधिकारों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने देश के करोड़ों लोगों को रोजगार और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिया, जबकि वर्तमान सरकार इन अधिकारों को कमजोर करने में लगी है।
मोदी का नाम पनौती रखना चाहिए : बघेल
बघेल ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत मजदूरों को 15 दिनों के भीतर मजदूरी मिलने का अधिकार था, लेकिन अब केंद्र सरकार यह तय कर रही है कि किसे क्या मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले केंद्र सरकार द्वारा पूरी राशि दी जाती थी, लेकिन अब यह घटाकर लगभग 60 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे गरीबों पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि “गरीबों के मूलभूत अधिकारों को खत्म किया जा रहा है और उनके मुंह से निवाला छीनने का काम किया जा रहा है। मनरेगा जैसी योजना को कमजोर कर दिया गया है।” भूपेश बघेल ने आगे कहा कि मोदी का नाम पनौती रख देना चाहिए। पहली बार पहलगाम गए तो आम लोगों की हत्या हो गई। इजरायल गए तो विश्व युद्ध शुरू हो गया।

2028 और 2029 में कांग्रेस की सरकार बनने का दावा
भूपेश बघेल ने कहा कि आने वाले चुनावों में कांग्रेस की सरकार बनेगी। “2028 और 2029 में कांग्रेस की सरकार बनेगी और हम गरीबों को उनका हक और मजदूरी दिलाएंगे।” पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंच से कवासी लखमा को बस्तर टाइगर बोलते हुए कहा, लखमा आदिवासियों के मुद्दों को उठा रहे हैं। बीजापुर मामले को लेकर बघेल ने कहा कि बस्तर में आदिवासियों बेटियों का बलात्कार हो रहा है। अवैध गर्भपात करवाया जा रहा है। बीजेपी कार्यकर्ता और RSS के लोग जबसे वहां जाने लगे हैं तब से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। प्रदेश में अफीम की खेती हो रही है। भाजपा नेता विनय ताम्रकार को बीजेपी बचाना चाहती है।
चरणदास महंत ने कहा – विरोध की आवाज को दबा रही सरकार
सभा को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए मनरेगा, महंगाई और मजदूरों के अधिकारों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा गरीबों, किसानों और मजदूरों के हित में काम करती रही है और आगे भी करती रहेगी। “राजस्थान के लोगों ने कभी झुकना नहीं सीखा, वे सम्मान के लिए मर-मिटने को तैयार रहते हैं। हम भी गरीबों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे।” उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनेगी और मनरेगा कानून को फिर से मजबूत किया जाएगा।
गरीबों के हक की हो रही अनदेखी
महंत ने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबा रही है। हमें न सड़कों पर बोलने दिया जा रहा है और न ही विधानसभा में हमारी आवाज सुनी जाती है। पुलिस और सुरक्षा के नाम पर हमें रोका जाता है। महंत ने बड़े उद्योगपतियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “देश की खदानें गौतम अडानी और मुकेश अंबानी को दी जा रही है, जबकि गरीबों के हक की अनदेखी हो रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर ऐतिहासिक नामों और नीतियों में बदलाव का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ नाम बदलने की बात नहीं है, बल्कि नीयत और नीतियां भी बदली जा रही है। पहले जो योजनाएं गरीबों को काम और अधिकार देती थीं, उन्हें कमजोर किया जा रहा है।
भारत की नीतियों में बदलाव से आम जनता प्रभावित
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी टिप्पणी करते हुए महंत ने कहा कि भारत की नीतियों में बदलाव से आम जनता पर असर पड़ रहा है। “पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग पर बोझ बढ़ता जा रहा है। महंत ने कहा कि कांग्रेस हमेशा गरीबों के साथ खड़ी रही है और आगे भी उनके हक के लिए संघर्ष करती रहेगी। हम गरीबों के बच्चों की शिक्षा, मजदूरों की सुरक्षा और किसानों के अधिकारों के लिए जीवनभर काम करेंगे।
सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ये घेराव मनरेगा, बढ़ी हुई बिजली बिल, बेरोजगारी, अफीम की खेती, कानून व्यवस्था सहित कई मुद्दों को लेकर है। 2028 में हमको अफीम वाली सरकार को उखाड़ फेकना है। 2847 पंचायतों में हमने आवाज उठाई है। मनरेगा देश की ऋण है। इस सरकार ने मनरेगा को समाप्त कर दिया है।
भाजपा सरकार ने किसानों को दिया धोखा : दीपक बैज
बैज ने कहा, छत्तीसगढ़ के स्थानीय मुद्दों को लेकर हमें आगे जाना है। इस सरकार में बिजली बिल का रेट बढ़ गया है। हाफ बिजली बिल योजना को समाप्त कर दिया गया। छत्तीसगढ़ की जनता में हाहाकार मचा है। इस सरकार में युवाओं के लिए कोई नौकरी नहीं है। इस बार 10 लाख क्विंटल मीट्रिक धान कम खरीदा गया। इस सरकार ने किसानों को धोखा देने का काम किया है। कई किसान धान बेचने से वंचित रह गए। उन्होने कहा, भाजपा के नेता पूरे प्रदेश में झूठ बोल रहे हैं। गैस सिलेंडर के लिए जनता सुबह से लाइन लगाए खड़ी है और हमारे PM ईरान से जहाज आने का वेट कर रहे हैं। अफीम की खेती इस सरकार में पहली बार हो रही है। बीजेपी अपने नेता को बचाने में लगी है।
अंबेडकर अस्पताल ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड : डॉक्टरों ने 11 साल के बच्चे के दिल से चिपका दुर्लभ कैंसर निकाला, 40 से 60 वर्ष के लोगों में होता है यह ट्यूमर
रायपुर। पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध प्रदेश के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय ने एक और बड़ी चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने 11 वर्ष के एक बच्चे के हृदय से चिपके अत्यंत दुर्लभ स्टेज-3 इनवेसिव थायमिक कैंसर (टाइप-बी थायमोमा) का सफल ऑपरेशन कर विश्व स्तर पर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
इसमें खास बात यह है कि अब तक मेडिकल जर्नल में इस प्रकार के कैंसर का सबसे कम उम्र का मरीज 12 वर्ष का दर्ज है, जबकि राज्य में 11 साल के बच्चे में यह बीमारी पाई गई और उसका सफल ऑपरेशन भी किया गया। अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू एवं उनकी टीम द्वारा यह जटिल सर्जरी की गई।
ऑपरेशन के छह माह बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और इस वर्ष उसने पुनः स्कूल जाना शुरू कर कक्षा छठवीं की परीक्षा भी दी है। डॉक्टरों के अनुसार यह ट्यूमर सामान्यतः 40 से 60 वर्ष के लोगों में पाया जाता है और बच्चों में इसका मिलना अत्यंत दुर्लभ है। यह ट्यूमर हृदय, पेरिकार्डियम, फ्रेनिक नर्व महाधमनी (एओर्टा), मुख्य पल्मोनरी आर्टरी, लेफ्ट एट्रियम और फेफड़े से चिपका हुआ था। ऐसे मामलों में ट्यूमर को पूरी तरह निकाल पाना (आर-0 रिसेक्शन) लगभग असंभव माना जाता है, लेकिन अस्पताल में उपलब्ध हार्ट-लंग मशीन की मदद से यह संभव हो पाया।
ड्यूल एप्रोच तकनीक से हुआ ऑपरेशन
ट्यूमर का आकार बहुत बड़ा और कई अंगों से चिपका हुआ होने के कारण इसे निकालने के लिए ड्यूल एप्रोच तकनीक का उपयोग किया गया। इसके तहत मरीज के स्टर्नम (छाती की हड्डी) और पसली- दोनों स्थानों पर चीरा लगाया गया, जिसे मेडिकल भाषा में स्टर्नोटॉमी और थोरेक्टोमी कहा जाता है।
मुख्य ट्यूमर के अलावा फेफड़े की प्लूरल कैविटी में फैले तीन अन्य सैटेलाइट ट्यूमर को भी सावधानीपूर्वक निकाला गया, ताकि भविष्य में कैंसर दोबारा फैलने की संभावना न रहे। निकाले गए ट्यूमर का आकार लगभग 12×8 सेंटीमीटर और वजन करीब 400 ग्राम था।
छह महीने से थी तकलीफ
चांपा निवासी कक्षा छठवीं में पढ़ने वाले इस बच्चे को करीब छह महीने से छाती में दर्द, भारीपन और सांस फूलने की शिकायत थी। जांच में पता चला कि उसके सीने में बड़ा ट्यूमर है, जो हृदय और मुख्य धमनियों से चिपका हुआ है। प्रदेश के कई अस्पतालों में ऑपरेशन से मना किए जाने के बाद मरीज को अम्बेडकर अस्पताल भेजा गया।
डॉ. कृष्णकांत साहू ने सीटी स्कैन देखने के बाद परिजनों को बताया कि ऑपरेशन अत्यंत जोखिम भरा है और सर्जरी के दौरान मरीज की जान को खतरा हो सकता है या ऑपरेशन बीच में रोकना पड़ सकता है। इसके बावजूद परिजनों ने सहमति दी और टीम ने सर्जरी का निर्णय लिया।
चार घंटे चली सर्जरी
ऑपरेशन के दौरान किसी भी आपात स्थिति के लिए हार्ट-लंग मशीन तैयार रखी गई थी। लगभग चार घंटे चली सर्जरी के दौरान हार्ट की झिल्ली, फ्रेनिक नर्व तथा फेफड़े के कुछ हिस्से को भी निकालना पड़ा। साथ ही हार्ट के लेफ्ट एट्रियम को भी रिपेयर किया गया क्योंकि ट्यूमर लेफ्ट एट्रियम से चिपका हुआ था। इस दौरान मरीज को चार यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ी।
सर्जरी के बाद ट्यूमर के नमूने को बायोप्सी के लिए पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. राबिया परवीन सिद्दकी के पास भेजा गया, जहां जांच में इसे इनवेसिव थायमिक कार्सिनोमा (टाइप-बी थायमोमा, स्टेज-3) पाया गया। इसके बाद कैंसर विभाग द्वारा मरीज को 25 साइकिल रेडिएशन थेरेपी दी गई।
अब पूरी तरह स्वस्थ
सर्जरी और उपचार के लगभग छह माह बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और दो महीने पहले से दोबारा स्कूल जाने लगा है। इस वर्ष उसने कक्षा छठवीं की परीक्षा भी दी है। इस दुर्लभ केस को राष्ट्रीय कैंसर सर्जरी सम्मेलन में भी प्रस्तुत किया गया, जहां इसे बेस्ट पेपर अवार्ड के रूप में सराहना मिली। विभाग अब इसे अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित करने की भी तैयारी है।
प्रदेश का प्रमुख सेंटर
अंबेडकर अस्पताल का हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में छाती, फेफड़े एवं मीडियास्टाइनल कैंसर की सर्जरी का प्रमुख केंद्र है। प्रदेश में इस प्रकार की लगभग 95 प्रतिशत से अधिक सर्जरी इसी विभाग में की जाती हैं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस सफलता के लिए मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल की पूरी टीम को बधाई दी है।
पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने कहा कि यह सर्जरी एक बड़ी उपलब्धि है। चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अंबेडकर अस्पताल में जटिल से जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही है और प्रदेश के मरीजों को अब ऐसी सर्जरी के लिए बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।
अंबेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की टीम ने अत्यंत कठिन और दुर्लभ ऑपरेशन को सफल कर अस्पताल की क्षमता को एक बार फिर साबित किया है।
मोवा रेलवे अंडरब्रिज बंद, मरम्मत के बीच ट्रैफिक व्यवस्था हुआ बेहाल, जाम से आम जनता परेशान
रायपुर। राजधानी रायपुर में 13 मार्च से मोवा स्थित रेलवे अंडरब्रिज को बंद कर दिया गया है। अंडरब्रिज की हालत लंबे समय से खराब है और यहां सालभर पानी भरा रहता था, जिससे कई हादसे भी हो चुके हैं। लगातार शिकायतों के बाद रेलवे द्वारा अंडरब्रिज की सड़क का मरम्मत कार्य शुरू किया गया है।
हालांकि, मरम्मत कार्य को लेकर मौके पर कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है, जबकि इस अंडरब्रिज से रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं। सूचना के अभाव में कई राहगीर अंडरब्रिज तक पहुंच जाते हैं और फिर उन्हें वापस लौटना पड़ता है।

अंडरब्रिज बंद होने से मोवा ओवरब्रिज पर ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ गया है। दिनभर यहां जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ओवरब्रिज पर वाहनों की लंबी कतारें लगने से लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं।

इस स्थिति को और गंभीर वैकल्पिक मार्ग की कमी बना रही है। इलाके में आवागमन के लिए कोई अन्य रास्ता नहीं है, जिससे स्थानीय रहवासियों, छात्र-छात्राओं और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में सोमवार को सूचना बोर्ड नहीं होने के कारण कई राहगीर अंडरब्रिज के पास पहुंच गए और उन्हें वापस लौटना पड़ा। अंडरब्रिज पर आवागमन बंद होने से स्थानीय रहवासियों व छात्र-छात्राओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह से दोपहर तक लंबा जाम लगा रहता है। ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए यहां पुलिस का एकमात्र जवान ड्यूटी पर है, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का त्याग और बलिदान देश की अमूल्य धरोहर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को 23 मार्च को बेमेतरा जिले में आयोजित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने आमंत्रण के लिए संस्था के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का योगदान देश के इतिहास में अमूल्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है। यह केवल कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देशभक्ति, समर्पण और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देने का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं और स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद रजक, संस्था के अध्यक्ष डॉ. शिरीष शर्मा, डॉ. शिवेन्द्र त्रिपाठी, ललित मिश्रा, विनायक दीवान सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मनरेगा ‘जी राम जी’ पर सदन में हंगामा, स्थगन प्रस्ताव खारिज होने पर विपक्ष का वॉकआउट
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को मनरेगा को ‘जी राम जी’ किए जाने के विरोध में कांग्रेस ने शून्यकाल में स्थगन प्रस्ताव लाई. आसंदी के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने से नाराज विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए सदन से निकले.
विधानसभा शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जी राम जी की तुलना में पहले के मनरेगा को बेहतर बताते हुए स्थगन को ग्राह्य कर चर्चा कराने की मांग की. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सदन विपक्ष की राजनीति का अड्डा नहीं, ये सदन कांग्रेस का राजनीति का मंच नहीं, ये जनता का मंच है. सदन का समय कीमती है. कल ही इन्होंने बता दिया था कि इस मुद्दे पर सदन में नहीं रहेंगे.
इसके साथ ही पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई. पक्ष-विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि जनता के मुद्दे पर राजनीति करनी हो तो हम करेंगे. आखिरकार सत्ता पक्ष और विपक्ष के हंगामे के बीच आसंदी ने सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी.
5 मिनट के बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने स्थगन सूचना पर बोलते हुए कहा कि मामला सिर्फ नीति बदलने का नहीं है, नियत का भी है. गरीबों से जुड़ा हुआ मामला है. इस पर स्थगन प्रस्ताव ग्राह्य कर चर्चा होनी चाहिए. कवासी लखमा और विपक्ष के अन्य कई सदस्यों ने कहा कि गरीबों से जुड़ा मामला है, इस पर चर्चा होनी चाहिए. लेकिन आसंदी के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने पर विपक्षी सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए सदन से बहिर्गमन किया.
स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा परिसर में तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का किया शुभारंभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिविर में स्वयं स्वास्थ्य जांच कराकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियों में कमी आने के कारण विभिन्न प्रकार की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक हो गई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराने से व्यक्ति समय रहते जागरूक रहकर आवश्यक सावधानी अपनाते हुए गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त समाज और समृद्ध राज्य की नींव होते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह द्वारा की गई इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे स्वास्थ्य शिविर न केवल लोगों को जागरूक करते हैं, बल्कि उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, संचालक स्वास्थ्य संजीव कुमार झा, सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रितेश अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में अवैध प्लाटिंग पर हंगामा, जवाब से असंतुष्ट विपक्ष का वॉकआउट
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को अवैध प्लाटिंग का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा, जिस पर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सवालों का सामना करना पड़ा। विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अवैध प्लाटिंग का कारोबार बेखौफ जारी है, लेकिन इसे रोकने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सदन में यह मुद्दा विशेष रूप से धमतरी और कांकेर जिलों को लेकर उठा। विधायक अंबिका मरकाम ने मंत्री से सवाल करते हुए वर्ष 2024 से 31 जनवरी 2026 तक अवैध प्लाटिंग से संबंधित शिकायतों की संख्या और उन पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी। साथ ही उन्होंने खसरों की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा।
जवाब में मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि धमतरी में 3 और कांकेर में 5 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कांकेर जिले में कुल 175 खसरों में से 8 की जांच की गई है और बाकी मामलों में प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में तीन पटवारियों का इंक्रीमेंट रोका गया है और कई अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि अवैध प्लाटिंग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि मंत्री का यह जवाब विपक्ष को संतुष्ट नहीं कर पाया।वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने मंत्री के उस बयान पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कार्रवाई में देरी के लिए SIR को जिम्मेदार बताया था। चंद्राकर ने कहा कि अवैध प्लाटिंग का खेल वर्षों से चल रहा है, जबकि SIR हाल के महीनों की प्रक्रिया है, ऐसे में इसे कारण बताना उचित नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने मंत्री पर गोलमोल जवाब देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है। बघेल ने मांग की कि इस प्रकरण की जांच EOW से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विधानसभा की समिति से जांच कराई जानी चाहिए।
मंत्री टंकराम वर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि राजस्व विभाग स्वयं जांच करने में सक्षम है और पूरे प्रदेश की जानकारी सदन के सामने रखी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भू-राजस्व संहिता के तहत भूमि स्वामी को अपनी जमीन की सुरक्षा का अधिकार है।
इस पर फिर से अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए पूछा कि अगर जमीन की सुरक्षा भू-स्वामी ही करेगा, तो राजस्व विभाग की जिम्मेदारी क्या रह जाती है। बहस के दौरान माहौल काफी गरमा गया।
अंततः मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। अवैध प्लाटिंग का यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बनता दिख रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में और सियासी घमासान देखने को मिल सकता है।
आदिवासियों की जमीन की खरीदी-बिक्री पर सत्ता पक्ष ने घेरा
आदिवासियों की जमीन खरीदी-बिक्री के मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष के ही विधायकों ने राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को घेरा. भाजपा विधायक गोमती साय ने मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि जशपुर में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों ने खरीदी है. भावना बोहरा ने कहा कि कवर्धा जिले में भी बड़ी संख्या में गैर आदिवासियों ने जमीन खरीदी हैं.
उन्होंने पूर्व में कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए कहा कि पूर्व हुई खरीदी-बिक्री की जाँच होनी चाहिए. राजस्व मंत्री ने कहा कि जहाँ से शिकायतें आएंगी जाँच कराई जाएगी. जशपुर में अभी कोई मामला सामने नहीं आया है. जशपुर में 2 प्रकरण में कब्जा का मामला था, उसमें मूल स्वामी को जमीन वापस कराया गया है.
