22 माह के मासूम की मौत पर दो स्टाफ नर्स निलंबित
जांजगीर-चांपा। बीडीएम अस्पताल में हुई एक बड़ी लापरवाही के चलते 22 माह के मासूम आयुष देवांगन की जान चली गई। बताया जा रहा है कि आयुष को सांप ने काट लिया था, जिसके बाद परिजन उसे तत्काल बीडीएम अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम मौजूद होने के बावजूद, वहां मौजूद स्टाफ नर्सों ने मासूम को गंभीरता से नहीं लिया और बिना इलाज किए उसे मौखिक रूप से निजी अस्पताल भेज दिया।
यह घटना शुक्रवार देर शाम की बताई जा रही है। जब परिजन अपने बच्चे को लेकर बीडीएम अस्पताल पहुंचे, तो नर्सों ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि वे उसे किसी बेहतर निजी अस्पताल में ले जाएं। परिजनों ने जानकारी दी कि अस्पताल में इलाज की सुविधा होते हुए भी सिर्फ नजरअंदाजी और लापरवाही की वजह से बच्चे को समय पर उपचार नहीं मिल सका।
निजी अस्पताल में जब मासूम की स्थिति बिगड़ने लगी, तब उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद मासूम के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और संबंधित स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। चांपा शहर के जनप्रतिनिधियों ने भी इस गंभीर लापरवाही को लेकर प्रशासन को घेरा और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने मामले का संज्ञान लिया और जांच के बाद अस्पताल की दो स्टाफ नर्स — मीनू पटेल और सविता महिपाल — को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हो, इसके लिए अब अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। जिला स्तर से लेकर संभागीय स्तर तक नियमित निरीक्षण और आकस्मिक जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस घटना से प्रदेशभर के स्वास्थ्यकर्मियों को यह सख्त संदेश गया है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
