प्रदेश के जेलों में क्षमता से अधिक कैदी मामले में उच्च न्यायालय ने मांगा विस्तृत जवाब, 16 अगस्त को होगी सुनवाई
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के जेलों में क्षमता से कहीं अधिक कैदियों के बंद होने का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट की निगरानी में आ गया है। सोमवार को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में इस मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें प्रदेश की जेलों की वास्तविक स्थिति, निर्माण कार्य और सुधारात्मक कदमों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
जानकारी के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न केंद्रीय और जिला जेलों की कुल क्षमता लगभग 15 हजार कैदियों की है, लेकिन इनमें 20 हजार 500 से अधिक कैदी बंद हैं। यह स्थिति न केवल भीड़भाड़ बढ़ा रही है, बल्कि कैदियों और जेल प्रशासन दोनों के लिए गंभीर सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां खड़ी कर रही है।
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि भीड़ को कम करने के लिए नए जेलों के निर्माण का कार्य तेज़ किया गया है। विशेष रूप से बेमेतरा जिले में नए जेल का निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है और इसी माह इसे तैयार कर लिया जाएगा। शासन का दावा है कि इसके शुरू होने से प्रदेश के जेलों पर दबाव कुछ हद तक कम होगा।
वहीं, बिलासपुर में प्रस्तावित नए जेल का मामला बार-बार टेंडर प्रक्रिया में अटक रहा है। शासन ने कोर्ट को बताया कि बिलासपुर के नए जेल के लिए सातवीं बार टेंडर जारी किया जाएगा। पहले के टेंडर या तो तकनीकी कारणों से निरस्त हो गए या फिर पर्याप्त योग्य ठेकेदार सामने नहीं आए।
हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि कैदियों की संख्या क्षमता से अधिक होना न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि जेल सुधार व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने शासन को निर्देश दिया है कि 16 सितंबर तक शपथपत्र के माध्यम से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, जिसमें सभी जिलों के जेलों की वर्तमान क्षमता, कैदियों की संख्या, निर्माणाधीन और प्रस्तावित नए जेलों की स्थिति, और भीड़ कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का स्पष्ट ब्यौरा हो।