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तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर, SDO और सब-इंजीनियर सहित 4 फर्म के खिलाफ FIR दर्ज

कोरबा। कोरबा की तत्कालीन सहायक आयुक्त रही माया वारियर के खिलाफ अंततः कोरबा में एफआईआर दर्ज करा ही दिया गया। दरअसल पूरा मामला छात्रावास मरम्मत के नाम पर केंद्र सरकार से मिले करोड़ों रूपये के फंड में भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। मामले की जांच के बाद अब कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर आदिवासी विकास कोरबा में पदस्थ रहे एसडीओं, डाटा एंट्री आपरेटर, PWD विभाग के सब-इंजीनियर सहित चार फर्मो के खिलाफ थाने में FIR कराया गया है। आपको बता दे तत्कालीन सहा. आयुक्त माया वारियर DMF घोटाला मामले में पहले ही जेल में बंद है। कलेक्टर के निर्देश के बाद लिए गये इस एक्शन के बाद हड़कंप मचा हुआ है।

सरकारी कामकाज में करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार और फिर इस भ्रष्टाचार की जांच कितनी धीमी रफ्तार से की जाती है, इसकी बानगी कोरबा जिला में देखी जा सकती है। जीं हां यहां पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में साल 2023 में आदिवासी विकास विभाग को केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत वर्ष 2021-22 में 5 करोड़ रूपये का आबंटन किया गया था। उस वक्त तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर ने केंद्र सरकार से मिले इस फंड में छात्रावास-आश्रमों में मरम्मत और नवीनीकरण कार्यो के लिए करीब 4 करोड़ रूपये का आबंटन किया गया।

इन 4 करोड़ रूपये के सार कार्य 4 चहेते फर्मो को ना केवल आबंटित किया गया, बल्कि इन फर्मो को बगैर काम कराये ही करोड़ों रूपये का भुगतान कर दिया गया। छात्रावास मरम्मत के नाम पर हुए करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा ने टीम गठित कर जांच के आदेश दिये थे। लेकिन उनका तबादला बिलासपुर हो जाने के कारण ये पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा के तबादला के बाद कोरबा कलेक्टर बनकर आये सौरभ कुमार ने इस प्रकरण की तरफ आंख उठाकर देखना भी सही नही समझा।

करोड़ों के कार्यो के सारे दस्तावेज कार्यायल से करा दिये गायब

तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियर के कार्यकाल में हुए इस भ्रष्टाचार की जब जांच शुरू की गयी, तो कई चैकाने वाली जानकारी सामने आयी। मतलब केंद्र सरकार से मिले फंड से कराये गये सारे सिविल कार्यो से संबंधित फाइल, कैश बुक सहित निविदा से संबंधित सारे दस्तावेज आफिस से गायब थे। चूकि माया वारियर का तब तक तबादला हो चुका था। वहीं तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा का तबादला होने के बाद ये पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद एक बार फिर इस पूरे मामले पर कलेक्टर अजीत वसंत ने जांच के आदेश दिये। जांच में टीम ने छात्रावासों का भौतिक सत्यापन किया गया, तो खुलासा हुआ कि संबंधित अधिकारियों ने ठेका कंपनियों द्वारा आधे-अधूरे काम के बाद भी फर्जी तरीके से कागजों में पूर्ण बताकर लाखों रूपये का भुगतान कर दिया गया।

जांच में 80 लाख रूपये का मिला बोगस पेमेंट,48 लाख के 4 कार्य आज भी नहीं हो सके शुरू

कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर हुए जांच में पाया गया कि छात्रावास मरम्मत और नवीनीकरण के नाम पर ठेका कंपनियों को जमकर फायदा पहुंचाया गया है। करीब 3 करोड़ 83 लाख 28 हजार रूपये के 34 निविदा कार्यो को आबंटन सिर्फ 4 ठेका कंपनियों को दिया गया। इनमें मेसर्स श्री साई ट्रेडर्स को 73.28 लाख रूपये के 9 कार्य, मेसर्स श्री साई कृपा बिल्डर्स को एक करोड़ 14 लाख रूपये के 9 कार्य, मेसर्स एस.एस.ए.कंस्ट्रक्शन को 49 लाख रूपये के 6 कार्य और मेसर्स बालाजी इंफ्रास्ट्रक्टर कटघोरा को 1 करोड़ 47 लाख रूपये के 10 कार्य आबंटित किये गये। लेकिन जांच में इन सारे 34 निविदा और भुगतान से संबंधित एक भी दस्तावेज कार्यालय में नही मिल सके। वहीं भौतिक सत्यापन में करीब 80 लाख रूपये के ऐसे कार्य मिले, जिनका कार्य कराये बगैर ही कागज में कार्य पूर्ण बताकर ठेका कंपनियों को बोगस पेमेंट कर दिया गया।

पूर्व सहा.आयुक्त, SDO और सब-इंजीनियर सहित 8 के खिलाफ अपराध दर्ज

कोरबा में आदिवासी विकास विभाग में हुए इस भ्रष्टाचार के मामले में करीब 2 साल से चल रहे जांच में अब विभाग ने एफआईआर कराया है। विभाग से जारी पत्र में बताया गया है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत की अध्यक्षता में इस भ्रष्टाचार की जांच की गयी। जांच में पाया गया कि अनुच्छेद 275 (1) के तहत मिली राशि से कराये गये कार्यो से संबंधित निविदा अभिलेख, कार्य ओदश, प्राक्कलन, तकनीकि स्वीकृति, माप पुस्तिका, देयक व्हाउचर से संबंधित मूल नस्ती एवं अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नही मिलें। वहीं जांच में 48 लाख के 4 कार्य आज तक अप्रारंभ मिले, जबकि 80 लाख रूपये के फर्जी भुगतान बगैर कार्य कराये फर्मो को किये गये। इन सारे खुलासे के बाद आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर तत्कालीन सहा.आयुक्त माया वारियर, विभाग के तत्कालीन एसडीओं अजीत कुमार तिग्गा, तत्कालीन उप अभियंता राकेश वर्मा, डाटा एंट्री आपरेटर कुश कुमार देवांगन सहित सभी चारों फर्मो के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज कराया गया है।