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DMF घोटाले में गिरफ्तार दोनों अफसरों को कोर्ट से लगा झटका, जमानत याचिका खारिज

दंतेवाड़ा। जिले में चर्चित डीएमएफ (जिला खनिज न्यास निधि) निविदा घोटाले मामले में गिरफ्तार दो अफसरों को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले निविदा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी। आदिवासी विकास विभाग में पदस्थ रहे दो पूर्व सहायक आयुक्त डॉ. आनंद जी सिंह और के.एस. मसराम को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।

दोनों अधिकारियों की जमानत याचिका को सीजीएम कोर्ट ने खारिज कर दिया और उन्हें 15 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।इस घोटाले में शामिल क्लर्क संजय कोडोपी अब भी फरार है। पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही है और उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।

मामला क्या है?

सूत्रों के अनुसार, आदिवासी विकास विभाग से जुड़े इन अधिकारियों ने डीएमएफ फंड से स्वीकृत कार्यों की निविदाओं में गड़बड़ी की थी। आरोप है कि इन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कर निविदाएं पूरी कीं और करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य अपने चहेते ठेकेदारों को आवंटित किए।जांच में यह सामने आया है कि करीब 10 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों में अनियमितता की गई है। इस घोटाले की शिकायत मिलने के बाद दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने पूरे मामले की जांच कराई थी।

जांच रिपोर्ट और एफआईआर

जांच रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हुई। इसके बाद वर्तमान सहायक आयुक्त राजीव नाग ने कलेक्टर के निर्देश पर सिटी कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 337, 340 और धारा 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया। पुलिस ने डॉ. सिंह और मसराम को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, लेकिन क्लर्क संजय कोडोपी गिरफ्तारी से बच निकला। पुलिस का कहना है कि वह जल्द ही उसकी गिरफ्तारी करेगी।

कलेक्टर का सख्त रुख

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने सरकारी धन और जनता की योजनाओं से जुड़े फंड में गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

आगे की कार्यवाही

कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद दोनों पूर्व अधिकारियों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की तहकीकात जारी है और जांच में और भी नए नाम सामने आ सकते हैं।

डीएमएफ फंड का उपयोग खनिज प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए किया जाता है। ऐसे में इस घोटाले ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय लोगों में भी नाराज़गी बढ़ा दी है। अब देखना यह होगा कि फरार क्लर्क की गिरफ्तारी कब होती है और जांच में और कितने बड़े खुलासे होते हैं।