मंत्रिमंडल विस्तार पर हाईकोर्ट में सुनवाई, कांग्रेस ने 14वें मंत्री की नियुक्ति को दी है चुनौती
रायपुर। राज्य में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस ने 14वें मंत्री के रूप में राजेश अग्रवाल की नियुक्ति को संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस मीडिया सेल प्रमुख सुशील कुमार शुक्ला ने इस मामले में याचिका दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने संवैधानिक सीमा का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त मंत्री की नियुक्ति की है। संविधान के अनुच्छेदों के अनुसार मंत्रियों की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक नहीं हो सकती। इस आधार पर कांग्रेस ने न्यायालय से मांग की है कि राजेश अग्रवाल की नियुक्ति को निरस्त किया जाए।
सरकारी पक्ष की दलीलें
सरकारी वकील ने कोर्ट में दलील दी कि इस तरह का मामला पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय और हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में लंबित है। इसलिए सिंगल बेंच में इसे अलग से सुना जाना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब तक उच्च न्यायालय की बड़ी पीठ या सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर अंतिम फैसला नहीं सुनाते, तब तक इस नियुक्ति पर रोक की मांग का कोई आधार नहीं बनता।
कोर्ट का फैसला
आज जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच में यह मामला सुना गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कांग्रेस द्वारा दायर याचिका को डिवीजन बेंच में लंबित जनहित याचिका के साथ जोड़ दिया। अब जब भी जनहित याचिका पर सुनवाई होगी, सुशील शुक्ला की ओर से दायर की गई याचिका पर भी एक साथ विचार किया जाएगा।
राजनीतिक सरगर्मी तेज
इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में नई हलचल मच गई है। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र और संविधान की अवहेलना करार दिया है, वहीं सत्ता पक्ष इसे पूरी तरह से वैधानिक और संवैधानिक बता रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार संविधान की सीमाओं को ताक पर रखकर अपनी मर्जी से फैसले ले रही है, जबकि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उधर, भाजपा और राजेश अग्रवाल के समर्थक कांग्रेस की याचिका को राजनीतिक साज़िश बता रहे हैं।
आगे क्या?
अब यह मामला डिवीजन बेंच के समक्ष जाएगा। वहां लंबित जनहित याचिका और सुशील शुक्ला की ओर से दायर नई याचिका, दोनों की एक साथ सुनवाई होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या 14वें मंत्री की नियुक्ति पर रोक लगेगी या उसे बरकरार रखा जाएगा।