प्रदेश / छत्तीसगढ़

बिना सुविधा फीस वसूली का मामला: हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी निजी मेडिकल कॉलेजों को जारी किया नोटिस

बिलासपुर।  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सोमवार को एक अहम जनहित याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा छात्रों से मनमानी फीस वसूली का मामला उठाया गया। यह याचिका मेडिकल छात्रा प्रतीक्षा जांगड़े द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई निजी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट सुविधा का उपयोग न करने वाले छात्रों से भी इन सेवाओं की पूरी फीस वसूल रहे हैं।

छात्रा का कहना है कि यह फीस वसूली पूरी तरह अवैध है क्योंकि कॉलेज वास्तविक सुविधा उपलब्ध नहीं कराते। कई छात्र अपने घरों से कॉलेज आते-जाते हैं और हॉस्टल में नहीं रहते, फिर भी उन्हें हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट चार्जेस चुकाने पड़ते हैं। याचिका में कहा गया है कि यह प्रथा फीस रेग्युलेटरी कमेटी द्वारा तय नियमों का उल्लंघन है और छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ाती है।

हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने प्रदेश के सभी निजी मेडिकल कॉलेजों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों से ऐसी फीस वसूली का औचित्य स्पष्ट करना आवश्यक है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि फीस संरचना पारदर्शी नहीं है और कॉलेज अपनी मनमर्जी से अतिरिक्त शुल्क वसूलते हैं। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि फीस वसूली की इस व्यवस्था पर रोक लगाई जाए और छात्रों को राहत दी जाए।सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार फीस रेग्युलेशन के नियमों के पालन पर नजर रख रही है और कोर्ट के निर्देश के बाद आवश्यक कदम उठाएगी।

मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें कॉलेजों द्वारा दिए गए जवाबों पर विचार किया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोर्ट इस पर सख्त रुख अपनाता है तो प्रदेश भर में निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना में पारदर्शिता लाने का रास्ता साफ हो सकता है।