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छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन हेमंत वर्मा ने दिया इस्तीफा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन हेमंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन अभी तक ऊर्जा विभाग से प्रभार सौंपने का आदेश जारी नहीं हुआ है। जल्द ही नए चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस पद के लिए मुख्य सचिव अमिताभ जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। हेमंत वर्मा ने जुलाई 2021 में छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल जुलाई 2026 तक होना था, लेकिन एक साल पहले ही उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्हें त्रिपुरा बिजली विनियामक आयोग में चयनित किया गया है और वे 19 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ से रिलीव हो जाएंगे। इसके बाद चेयरमैन का पद खाली हो जाएगा।

बताया जा रहा है कि नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। इसके लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय चयन समिति नियुक्ति प्रक्रिया का संचालन करेगी। चेयरमैन का कार्यकाल पांच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है। यह पद एक संवैधानिक पद है, जो सरकार बदलने के बावजूद बना रहता है और बिना उचित प्रक्रिया के चेयरमैन को हटाया नहीं जा सकता। नाम की चर्चा में शामिल मुख्य सचिव अमिताभ जैन का 30 सितंबर 2025 को एक्सटेंशन अवधि समाप्त हो रही है। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें बिजली विनियामक आयोग का चेयरमैन बनाए जाने की संभावनाएँ जताई जा रही हैं। हालांकि अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। चयन समिति इस नियुक्ति के लिए योग्य और अनुभवी अधिकारियों पर विचार कर रही है।

हेमंत वर्मा का त्रिपुरा में चयन छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके कार्यकाल में बिजली क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। अब उनकी जगह नए चेयरमैन को नियुक्त कर आयोग की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। ऊर्जा विभाग ने अभी तक नए चेयरमैन के प्रभार से जुड़ा आदेश जारी नहीं किया है। वहीं, आयोग के कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए कार्यवाहक व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। आयोग में चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर बिजली क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी भी उत्सुक हैं। आगे आने वाले दिनों में नियुक्ति प्रक्रिया तेज होगी और नए चेयरमैन के चयन से बिजली नियमन, दर निर्धारण, उपभोक्ता हित और नीति निर्माण से जुड़े कार्यों को नई दिशा मिलने की संभावना है। प्रशासन की नजर चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर है।