केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किए मां दंतेश्वरी के दर्शन
रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर के मुरिया दरबार में आयोजित सभा में उपस्थित जनों के बीच पहुंचे और आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, बस्तर सांसद व बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौके पर उपस्थित थे। सांसद महेश कश्यप ने अमित शाह का साफा और सिंहाड़ी माला पहनाकर स्वागत किया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बोलते हुए कहा कि बस्तर को पहले की तरह खुशहाल बनाना ही हमारा संकल्प है और इस दिशा में सभी मिलकर प्रयास करेंगे।
दरबार के मंच पर आम लोगों और माझी समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएँ गृहमंत्री के समक्ष रखीं। सुकमा जिले के अमीरगढ़ नक्सल प्रभावित क्षेत्र के एक युवक से अमित शाह ने सीधे बातचीत कर नक्सल समस्या के निदान की अपील की। पारंपरिक नेतृत्व (माझी, चालकी, मुखिया) के साथ संवाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और युवाओं ने बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर — बिजली, सड़क, शिक्षा तथा नौकरी के अवसरों की माँग दोहराई। अर्जुन कर्मा ने युवाओं के लिए रोजगार के सुझाव दिए और NMDC के बैलाडीला व अन्य परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव रखा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर व छत्तीसगढ़ के लिए यह सौभाग्य की बात है कि केंद्रीय गृहमंत्री सीधे आकर समस्याएँ सुनने आएं। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री और मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद से नक्सलवाद समाप्ति की दिशा में ठोस काम हो रहा है और लक्ष्य रखा गया है कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने का बीड़ा उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय विकास के कई आंकड़े भी साझा किए — माडिया सराय के लिए पिछले साल 5 लाख दिए गए थे, जिया डेरा के लिए 75 लाख की स्वीकृति मिली है और महोत्सव का बजट 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख किया गया है।
अमित शाह ने बस्तर के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि 2026 तक कोई भी गांव बिना बिजली के नहीं रहेगा, और 2031 तक हर गांव में स्कूल, बैंकिंग सुविधाएँ और पीएचसी/सीएचसी जैसी संस्थाएँ खुलाने का केंद्र सरकार लक्ष्य रखती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क, टेलीफोन और अन्य बुनियादी सुविधाएँ नक्सलवाद के कारण बाधित हुई हैं, इसलिए पहले सुरक्षा-समस्या का समाधान आवश्यक है। गृहमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के हर नक्सलमुक्त किए गए गांव को ₹1 करोड़ का अनुदान दिया जाएगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बस्तर के आदिवासी परिवारों को 15,000 आवास देने का लक्ष्य बताया गया।
शाह ने समुदाय से समन्वय और समझौते का आह्वान करते हुए कहा कि हिंसा से किसी का भला नहीं है और सरकार अकेले सब कुछ नहीं कर सकती — इसलिए स्थानीय नेतृत्व, माझी और चालकी को समाज में नक्सलवाद से युवाओं को हटाने व विकास योजनाओं का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने सभी से नक्सलवाद उखाड़ फेंकने के अभियान में सहयोग की अपील की और मंच पर उपस्थित जनों ने भी बस्तर की खुशहाली व लाल आतंक के समाप्त होने की कामना व्यक्त की।
कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं ने आशा जताई कि केंद्र और राज्य के सामंजस्यपूर्ण प्रयासों से नक्सलवाद का प्रभाव कम होगा और विकास की रोशनी बस्तर के हर गांव तक पहुंचेगी।