RTE में बदलाव को लेकर पैरेंट्स एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, कहा-
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले गरीब बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है. छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार गरीब बच्चों से शिक्षा का हक छीन रही है. उन्होंने आरटीई कानून में किए गए बदलावों को ‘असंवैधानिक’ करार दिया है.
सीटों में भारी कटौती: 53 हजार से सीधे 19 हजार पर सिमटा आंकड़ा
क्रिष्टोफर पॉल के अनुसार, 16 दिसंबर 2025 को आरटीई कानून में किए गए बदलावों का सीधा असर गरीब बच्चों की सीटों पर पड़ा है. पिछले साल (2025-26) जहां 53,023 बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला मिला था, वहीं नए नियमों के चलते शैक्षणिक सत्र 2026-27 में केवल 19,495 सीटों पर ही प्रवेश मिल पाएगा.
पैरेंट्स एसोसिएशन ने उठाए गंभीर सवाल
पॉल का कहना है कि सरकार अब गरीब बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा देने से पीछे हट रही है. उन्होंने स्कूल शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि:
- आरटीई कानून में किए गए बदलावों को तत्काल निरस्त किया जाए.
- पुराने प्रावधानों के अनुरूप ही बच्चों को प्रवेश दिया जाए. सरकार इस दिशा में एक स्थायी आदेश जारी करे.
“भाजपा सरकार की मंशा पर संदेह”
पॉल ने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनवरी में दो बार पत्र लिखने के बावजूद शासन ने कोई ध्यान नहीं दिया और आरटीई पोर्टल पर कम सीटों के साथ प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी. उन्होंने इसे मूल कानून की भावना के खिलाफ बताया है.
उन्होंने कहा कि आरटीई कानून के तहत निजी स्कूलों की 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं. सीटों में इस बड़ी कटौती से हजारों परिवार प्रभावित होंगे.
