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बीज खरीदी में अनियमितता का आरोप, सदन में उमेश पटेल ने उठाया मामला

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही के दौरान रायगढ़ जिले में अलसी बीज वितरण में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सदन में इस मामले को उठाते हुए बीज खरीद और वितरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए।

विधायक उमेश पटेल ने कहा कि किसानों को वितरित किए जाने वाले अलसी के बीज की खरीद में बीज निगम द्वारा पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीज निगम ने नियमों को दरकिनार करते हुए अपने चहेते ठेकेदार से बीज की खरीद की, जिससे पूरे मामले में भ्रष्टाचार की आशंका पैदा होती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है, बल्कि किसानों को भी गुणवत्ता वाले बीज मिलने में समस्या आती है।

उमेश पटेल ने सदन में यह भी आरोप लगाया कि बीज की ग्रेडिंग के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने कहा कि अलसी के बीज की गुणवत्ता जांचने के लिए जिस छननी या ग्रेडिंग उपकरण की जरूरत होती है, वह तक उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद बीजों की खरीद और वितरण की प्रक्रिया पूरी कर दी गई, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। विशेष रूप से उन्होंने पूछा कि क्या बीज निगम के प्रबंध निदेशक (एमडी) और बीज प्रमाणीकरण अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी या नहीं। विधायक ने कहा कि यदि इस तरह के मामलों में सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में भी ऐसी अनियमितताएं होती रहेंगी।

सदन में उठे इस मुद्दे पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने इस प्रक्रिया में लापरवाही बरती है, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री रामविचार नेताम ने सदन को आश्वस्त किया कि पूरे मामले की जांच सक्षम अधिकारी से कराई जाएगी। जांच में यदि किसी अधिकारी या संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

मंत्री ने यह भी कहा कि कृषि और बीज वितरण से जुड़ी योजनाओं का उद्देश्य किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना और उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना है। इसलिए यदि कहीं भी अनियमितता या भ्रष्टाचार की शिकायत मिलती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाएगा।