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बीजापुर-कांकेर के 140 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने समझी लोकतांत्रिक प्रक्रिया

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के तहत आज 140 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने विधानसभा सत्र का भ्रमण किया। बीजापुर और कांकेर जिलों से आए इन लोगों ने पहली बार विधानसभा की कार्यवाही को करीब से देखा, जो उनके लिए एक नया और अनोखा अनुभव रहा।

पहली बार देखा लोकतंत्र का केंद्र

आत्मसमर्पित नक्सलियों के इस दल में कुल 140 लोग शामिल थे, जिनमें 54 महिलाएं और 86 पुरुष थे। इनमें से 36 लोग बीजापुर और 16 लोग कांकेर जिले से आए थे। इन सभी ने विधानसभा की कार्यवाही को देखा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया।यह भ्रमण उनके पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।

राजधानी के प्रमुख स्थलों का भी कराया गया भ्रमण

विधानसभा के अलावा इन लोगों को राजधानी के अन्य प्रमुख स्थानों का भी भ्रमण कराया गया। इनमें आदिवासी संग्रहालय, मॉल और रेलवे स्टेशन शामिल रहे। इस दौरान उन्होंने आधुनिक जीवनशैली और शहरी सुविधाओं को करीब से देखा, जो उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था।

गृहमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात

विधानसभा भ्रमण के बाद सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों ने डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा से उनके कक्ष में मुलाकात की। इस दौरान गृहमंत्री ने उनसे बातचीत कर उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझने की कोशिश की।मुलाकात के दौरान कई नक्सलियों ने अपनी इच्छाएं भी साझा कीं। कुछ ने 5वीं और 8वीं कक्षा तक पढ़ाई करने की इच्छा जताई, जबकि कुछ ने पहली बार हवाई जहाज में सफर करने की बात कही।

शिक्षा और प्रोत्साहन का भरोसा

गृहमंत्री विजय शर्मा ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार उनके पुनर्वास और शिक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “5वीं की परीक्षा होगी और जो फर्स्ट आएगा, उसे हवाई जहाज में भी घुमाया जाएगा।”

उनकी इस बात से वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली और एक सकारात्मक माहौल बना।

पुनर्वास की दिशा में अहम कदम

यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने और भटके हुए लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ऐसे कार्यक्रम न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें नई जिंदगी शुरू करने की प्रेरणा भी देते हैं।

समाज में लौटने की उम्मीद

इस कार्यक्रम से यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों को शिक्षा, रोजगार और बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में लौटना चाहते हैं, उनके लिए नए अवसर उपलब्ध हैं।