प्रदेश / छत्तीसगढ़

रेरा से अविनाश, वॉलफोर्ट, सिंघानिया सहित 6 सौ बिल्डर्स को जारी किया नोटिस

रायपुर। रेरा ने आवासीय-व्यावसायिक परियोजनाएं पूर्ण करने के बाद भी स्थानीय रहवासियों को प्रबंधन का हस्तांतरण नहीं करने पर प्रदेश के करीब 600 बिल्डरों को नोटिस जारी किया है. इन बिल्डरों में रायपुर के अविनाश ग्रुप, सिंघानिया बिल्डकॉन, वालफोर्ट सहित अन्य बड़े बिल्डर शामिल हैं.

रेरा ने अलग-अलग स्तरों पर हुई शिकायत के बाद न सिर्फ निजी बिल्डरों को, बल्कि हाउसिंग बोर्ड और नगर निगम को भी नोटिस जारी किया है. इन्होंने भी अपनी कई परियोजनाओं के पूरा होने के बावजूद आधिपत्य नहीं सौंपा है.

रेरा के नियमों में स्पष्ट है कि आवासीय-व्यावसायिक परियोजना के पूरा होने पर नगर निगम से पूर्णता प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद बिल्डरों को सामान्य क्षेत्र, सुविधाओं और प्रबंधन का हस्तांतरण आबंटितियों की समिति अथवा संघ को करना जरूरी है. मगर बिल्डर ऐसा नहीं कर रहे हैं, यही नहीं कई बड़े बिल्डर स्वयं रखरखाव शुल्क ले रहे हैं.

रेरा ने रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा सहित अन्य जिलों के 595 बिल्डरों को नोटिस जारी किया है. उनकी 989 आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं को नोटिस दिया गया है. ये वे परियोजनाएं हैं, जिनका पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी कॉलोनी के प्रबंधन का हस्तांतरण आबंटितियों की समिति अथवा संघ को नहीं किया गया है.

रेरा ने यह भी बताया कि अनेक मामलों में परियोजना पूर्ण होने के बाद भी प्रवर्तकों ने आबंटितियों की समिति या संघ का गठन सुनिश्चित नहीं किया और न ही सामान्य क्षेत्रों, सुविधाओं तथा संबंधित अभिलेखों का विधिवत हस्तांतरण किया. यह कार्रवाई भू-संपदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 11(4)(ई) और धारा 17 के तहत की गई है.

जिन प्रमुख बिल्डरों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें रायपुर के श्री बिल्डकॉन, श्रीकृष्णा वाटिका महादेव घाट, सुमीत इंफ्रा रायपुर, श्री विश्व भारती रायपुर, पारस बिल्डकॉन, संसार बिल्डकॉन, संकल्प बिल्डकॉन, साईंनाथ बिल्डकॉन, रवि आहूजा, राजेश अग्रवाल, नीलम होम्स, दीपक रहेजा के अलावा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और अन्य शहरों के कई बिल्डर शामिल हैं.

सीजी रेरा ने स्पष्ट किया है कि अधिनियम के तहत केवल प्रवर्तकों ही नहीं, बल्कि आबंटितियों की भी जिम्मेदारियां निर्धारित हैं. धारा 19(9) के अनुसार प्रत्येक आबंटी का दायित्व है कि वह आबंटितियों की समिति, संघ अथवा सहकारी समिति के गठन में सक्रिय सहयोग करे.

प्राधिकरण ने संबंधित कॉलोनाइजरों और बिल्डरों को 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने अथवा संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर उनके विरुद्ध अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.