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सिंहस्थ-2016 के तत्कालीन कलेक्टर-एसपी ने साझा किए अनुभव, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यशाला का किया शुभारंभ

उज्जैन। “सिंहस्थ-2028” की तैयारियों को लेकर शनिवार को आयोजित ‘सिंहस्थ-2016 के अनुभव और सिंहस्थ-2028 के संकल्प’ विषयक कार्यशाला का मुख्यमंत्री ने शुभारंभ किया। कार्यशाला में सिंहस्थ-2016 के दौरान तत्कालीन कलेक्टर कविंद्र कियावत और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) मनोहर वर्मा समेत उस समय जिम्मेदारी संभाल चुके वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। साथ ही आगामी सिंहस्थ को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-हितैषी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

सिंहस्थ-2016 के दौरान तत्कालीन एसपी मनोहर वर्मा ने कहा कि सिंहस्थ-2028 का आयोजन पहले की तुलना में कहीं बड़े स्तर पर होगा और श्रद्धालुओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसे देखते हुए सड़कों का विस्तार, बेहतर यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिप्रा नदी के दोनों तटों पर करीब 29 किलोमीटर लंबे नए घाट तैयार किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालु आसानी से स्नान कर सकेंगे और भीड़ का दबाव भी कम होगा। उन्होंने कहा कि यदि सभी निर्माण कार्य समय पर पूरे हो जाते हैं तो श्रद्धालुओं को एक बेहतर धार्मिक अनुभव मिलेगा।

वहीं, सिंहस्थ-2016 के दौरान तत्कालीन कलेक्टर कविंद्र कियावत ने कहा कि वर्ष 2016 में करीब 7 करोड़ श्रद्धालुओं ने शिप्रा में स्नान किया था। वर्तमान परिस्थितियों और बढ़ती धार्मिक आस्था को देखते हुए सिंहस्थ-2028 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसी को ध्यान में रखते हुए आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शहर की बाहरी सड़कों का विस्तार हुआ है, लेकिन आंतरिक मार्गों पर भीड़ नियंत्रण अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालु कम समय में महाकाल मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकें और बिना किसी असुविधा के अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। उनका विश्वास है कि वर्तमान कार्ययोजना समय पर पूरी होने पर सिंहस्थ-2028 भव्य, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक होगा।