मंत्री जी, आप मासूम चेहरा बनाकर भाजपा नेताओं को बरगला सकते है, जनता को नहीं।
06-Jul-2025
रायपुर/ बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा ने छत्तीसगढ़ राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार पर मेडिकल घोटाले का आरोप लगाया था। उनके नेताओं ने जोर-शोर से हर चुनावी मंच पर यह बात कही थी। जिससे प्रभावित होकर जनता ने भाजपा का साथ दिया और उसे सत्ता पर ले आई। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री बने श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने अधीनस्थ विभाग CGMSC यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की एमडी पद्मिनी भोई के माध्यम से आरोपी घोटालेबाज कंपनी मोक्षित कॉरपोरेशन को लगभग 50 करोड़ का भुगतान करा दिया। यह बात जनता के लिए बेहद अचंभित करने वाली थी। सीधे तौर पर जनता से धोखाधड़ी थी। क्योंकि चुनावी बातें हवा हो गई और घोटालेबाजों से उनकी गलबहियां हो गई थी।
क्यों न मंत्री और एमडी को घोटाले में सह अभियुक्त माना जाए?
मेडिकल घोटाले की दुहाई देकर, दोषी मंत्री,ठेकेदार और अधिकारियों को जेल में डालने का वादा लेकर सत्ता में आई भाजपा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और एमडी को घोटाले में सह अभियुक्त अब जनता मान रही है।उनके द्वारा घोटाले के आरोपी मोक्षित कारपोरेशन को किया गया भुगतान बेईमानी का प्रत्यक्ष सबूत प्रस्तुत कर रहा है। टीवी पर मंत्री जी बड़ी मासूमियत के साथ ईमानदारी की बात करते हैं। परंतु जितनी बेईमानी उनके रहते स्वास्थ्य विभाग में हुई है और हो रही है उतनी कभी नहीं हुई। आए दिन अखबारों की सुर्खिया यह बात चीख चीख कर कहती है।
जांच EOW को सौंपने में क्यों लगे डेढ़ साल?
आरोपों से घिरे स्वास्थ्य मंत्री कहते है मेडिकल घोटाले की जांच हम ही करा रहे है इसलिए हम पर लग रहे आरोप मिथ्या है। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद जनता की जानकारी के लिए मैं बता दूं कि बीते छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव होने के बाद भाजपा सरकार के पहले विधानसभा सत्र से लेकर छठवें सत्र तक भाजपा के ही विधायक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री विधायक राजेश मूणत, राजेश अग्रवाल, सुशांत शुक्ला ने कांग्रेस सरकार के दौरान हुए मेडिकल घोटाले में जांच नहीं कराये जाने को लेकर अपनी सरकार के ही स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जयसवाल को घेरा था। रीएजेंट सहित मेडिकल घोटाले से कई अहम सबूत हर विधानसभा सत्र में भाजपा विधायकों ने रखे थे। इस दौरान मीडिया ने भी प्राथमिकता के साथ मेडिकल घोटाले की खबरों को प्रकाशित किया था। राष्ट्रीय टीवी चैनलों में घंटे घंटे भर की खबर दिखाते हुए घोटालों की परते खोली थी। पर पता नहीं क्यों स्वास्थ्य मंत्री जांच में आना कानी करते रहे। अंततः डेढ़ साल बाद मेडिकल घोटाले की EOW से जांच की घोषणा की गई। आज देखिए इसी मेडिकल घोटाले में 5 कर्मचारी और एक व्यापारी जेल में है।
मुख्यमंत्री को करते रहे गुमराह!
पाठकों को जानकारी देते हुए बता दूं की सरकार बनने के बाद बतौर पत्रकार मैने मुख्यमंत्री जी से भेंट के दौरान ढाई हजार करोड़ के रीएजेंट सहित संपूर्ण मेडिकल घोटाले की संक्षिप्त जानकारी उन्हें दी थी। जिस पर उन्होंने कहा था कि हमारे भी संज्ञान में ये सब है मंत्रिमंडल गठन के बाद निश्चित रूप से हम कार्रवाई करेंगे। मेरी जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने सीजी एमएससी की गड़बड़ियों के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। परंतु संगठन के एक बड़े नेता का हस्तक्षेप ऐसा हुआ कि जांच टलता गया। परंतु जब संगठन के नेता जी को लगा कि वो टूलकिट बन रहे है तो उन्होंने भी हाथ खींच लिया। तब जाकर मेडिकल घोटाले की जांच प्रारंभ होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।