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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, इस्तेमाल नहीं होने वाले वाहनों पर नहीं लगेगा रोड टैक्स

नई दिल्ली।  सुप्रीम कोर्ट ने मोटर व्हीकल टैक्स को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी वाहन का सार्वजनिक सड़कों पर इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो उस पर रोड टैक्स नहीं लगाया जा सकता। यह फैसला उन वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्हें अपनी पुरानी या खराब गाड़ियों पर भी सालों से टैक्स देना पड़ रहा था।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ ने यह फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि मोटर वाहन कर सिर्फ सार्वजनिक सड़कों के उपयोग के लिए लगाया जाता है। अगर कोई वाहन सड़क पर नहीं चल रहा है, तो वह टैक्स के दायरे में नहीं आएगा। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि टैक्स लगाने का उद्देश्य राज्य को सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए राजस्व जुटाना है।

कैसे शुरू हुआ यह मामला?

यह मामला तब शुरू हुआ जब कुछ वाहन मालिकों ने अपनी पुरानी गाड़ियों का इस्तेमाल बंद कर दिया था, लेकिन फिर भी उनसे रोड टैक्स की मांग की जा रही थी। ये मालिक अपनी गाड़ियों को या तो अपने निजी परिसर में रखते थे या वे पूरी तरह से खराब हो चुकी थीं। उन्होंने तर्क दिया कि जब वे वाहन का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे हैं, तो टैक्स क्यों दें। कई हाई कोर्ट्स ने भी पहले इसी तरह के फैसले दिए थे, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अब अंतिम फैसला आया है।

किन लोगों को मिलेगी राहत?

इस फैसले से उन लाखों लोगों को सीधा फायदा होगा, जिनकी गाड़ियां कबाड़ बन चुकी हैं या लंबे समय से गैराज में खड़ी हैं। अब उन्हें हर साल बिना किसी वजह के रोड टैक्स नहीं भरना पड़ेगा। हालांकि, इस टैक्स से छूट पाने के लिए वाहन मालिक को संबंधित परिवहन विभाग (RTO) को यह साबित करना होगा कि उनका वाहन सार्वजनिक उपयोग में नहीं है। इसके लिए उन्हें एक आवेदन देना होगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मोटर वाहन अधिनियम की सही व्याख्या करता है और इसे नागरिकों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।