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बारनवापारा में जुटे प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी, डीजीपीएस सर्वे के साथ दिया गया वन्यजीव प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण…
रायपुर। बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन गत दिवस किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, आईटी आधारित वन प्रबंधन तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। इस प्रशिक्षण से भावी वन सेवा के अधिकारियों ने क्षेत्रीय स्तर पर उपयोग में आने वाली तकनीक एवं प्रबंधन प्रक्रियाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित हुए।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अखिल भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि आप सभी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर अपनी कौशल को विकसित करें और छत्तीसगढ की वन संपदा की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सतत कार्य करे। उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारी को अपनी शुभकामनाएं दीं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्रीय निदेशक स्तोविषा समझदार ने डीज़ीपीएस की कार्यप्रणाली, उसकी उपयोगिता तथा वन सर्वेक्षण, सीमांकन एवं प्रबंधन में इसके महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीज़ीपीएस आधारित सर्वेक्षण से वन क्षेत्रों में सटीक डेटा संग्रह संभव होता है जो दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसी क्रम में उप-निदेशक, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व वरुण जैन ने “गज संकेत” मोबाइल एप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एप हाथी मॉनिटरिंग, मूवमेंट ट्रैकिंग, मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन तथा त्वरित सूचना साझा करने में एक प्रभावी डिजिटल टूल के रूप में कार्य करता है। प्रशिक्षु अधिकारियों को एप के फील्ड उपयोग, डेटा एंट्री एवं प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी एवं फील्ड आधारित प्रशिक्षण भावी वन सेवा के अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल टूल्स एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है तथा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को जमीनी स्तर पर बेहतर निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होंगे।
अधीक्षक बारनवापारा अभ्यारण्य कृषानू चन्द्राकार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बारनवापारा अभ्यारण्य की भौगोलिक, पारिस्थितिक एवं संरक्षण संबंधी विशेषताओं की जानकारी दी। इसके साथ ही अधिकारियों को अभ्यारण्य में संचालित वनभैंसा संरक्षण केंद्र, ब्लैकबक रिलोकेशन एवं संरक्षण केंद्र, ग्रासलैंड विकास क्षेत्रों सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जिससे उन्हें संरक्षण कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
राज्यसभा चुनाव याचिका मामला : लेखराम साहू के सभी गवाहों की गवाही पूरी, अब सरोज पांडे की ओर से प्रस्तुत होंगे गवाह
बिलासपुर। वर्ष 2018 में सरोज पांडे के राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में याचिकाकर्ता पक्ष की गवाही पूरी हो गई है। यह याचिका कांग्रेस के पराजित उम्मीदवार लेख राम साहू द्वारा दायर की गई थी। आज याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत गवाहों की गवाही पूर्ण हो गई। अब सरोज पांडे की ओर से अपने निर्वाचन को बचाए रखने के लिए गवाहों की गवाही और अन्य पक्ष द्वारा उसका प्रति परीक्षण किया जाएगा।
गौरतलब है कि 2018 मार्च में छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यसभा चुनाव छत्तीसगढ़ब्राजय की एक खाली राज्यसभा सीट के लिए हुआ था। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से सरोज पांडे और कांग्रेस की ओर से लेख राम साहू को उम्मीदवार बनाया गया था। नामांकन दाखिल करने के बाद लेख राम साहू के द्वारा सरोज पांडे के निर्वाचन फॉर्म में शपथ पत्र पर गलत जानकारी देने, जानकारी छुपाने और एक बैंक खाते के बारे में जानकारी न देने जैसे आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा लेख राम साहू और कांग्रेस पार्टी के द्वारा भाजपा के 51 विधायकों में से 11 विधायकों पर संसदीय सचिव होने और 7 अन्य विधायकों पर निगम मंडलों के अध्यक्ष उपाध्यक्ष होने के कारण लाभ का पद होने संबंधी आरोप लगाते हुए उन्हें मतदान से बाहर रखने की मांग की गई थी।
राज्यसभा के निर्वाचन अधिकारी ने उस समय उक्त दोनों आपत्तियां खारिज कर दी थी जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्यपाल छत्तीसगढ़ समेत कई जगहों पर 18 भाजपा विधायकों को वोट न डालने देने और तब तक चुनाव को स्थगित करने जैसी मांगे रखी थी। इस सबके बावजूद उक्त 18 विधायकों ने चुनाव में वोट डाला था और सरोज पांडे को विजय घोषित किया गया था।
चुनाव परिणाम के पश्चात पराजित उम्मीदवार लेख राम साहू ने शपथ पत्र में गलत जानकारी देने और निर्वाचन आयोग की सभी विधायकों के द्वारा मतदान करने देने को आधार बनाकर सरोज पांडे के राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती दी थी। उक्त याचिका लंबे समय से हाई कोर्ट में लंबित है और इस पर सुनवाई चल रही है।
आज विधानसभा के तत्कालीन महासचिव चंद्रशेखर गंगराड़े की गवाही के पश्चात लेख राम साहू की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले सभी नौ गवाहों की गवाही पूरी हो गई है। अब बचाव पक्ष की ओर से सरोज पांडे और अन्य ऐसे व्यक्ति जिन्हें सरोज पांडे प्रस्तुत करना चाहे उनकी गवाही हाई कोर्ट में होगी। आज सरोज पांडे के अधिवक्ता के द्वारा उनके शपथ पत्र प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय लिया गया।
गौरतलब है कि राज्यसभा विधानसभा लोकसभा आदि निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सामान्य रूप से 6 माह में निपटने का नियम है परंतु चुनाव याचिका सुनवाई की प्रक्रिया ऐसी है कि शायद ही कभी कोई चुनाव याचिका 6 माह में निपट पाती हो। 2018 में निर्वाचित हुई सरोज पांडे का कार्यकाल 2024 में पूरा हो गया परंतु यह चुनाव याचिका आज भी लंबित है। आज मुकदमे के दौरान लेख राम साहू की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और सुदीप वर्मा तथा सरोज पांडे की ओर से अविनाश प्रसाद साहू अधिवक्ता ने पैरवी की।
"रायपुर में गोगो-कोन पर प्रतिबंध पर सियासत: भूपेश बघेल ने पूछा- 2 महीने का ही आदेश क्यों, क्या बाद में मिलेगी छूट?"
रायपुर। रायपुर नगरीय क्षेत्र में रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन और पर्फेक्ट रोल पर प्रतिबंध के आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस आदेश को अजब-गजब आदेश करार देते हुए कहा कि इससे यह साफ हो गया कि सरकार अब खुद मान रही है कि रायपुर में गांजा, चरस जैसे नशीले पदार्थों का सेवन बड़े पैमाने पर हो रहा है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आदेश के मुताबिक गांजा और चरस के सेवन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की बिक्री पर रोक लगाने की बात कही गई है, लेकिन इससे मूल कारण का समाधान नहीं होगा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह वैसा ही है जैसे शराब का रोकने कम करने के लिए डिस्पोजल या कांच के गिलास और चखने की बिक्री पर ही प्रतिबंध लगा दिया जाए.
भूपेश बघेल ने आदेश की समय-सीमा पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि यह आदेश सिर्फ 29 मार्च 2026 तक, यानी दो महीने के लिए ही क्यों लागू किया गया है. अगर सरकार वास्तव में गंभीर है, तो इसे स्थायी आदेश क्यों नहीं बनाया गया. उनका कहना है कि इस आदेश में लिखा है कि “यदि बीच में वापस ना लिया गया” को भी संदेह के घेरे में रखा और पूछा कि आखिर ऐसा कौन है जो इसे बीच में वापस ले सकता है. वैसे नशा सिर्फ़ रायपुर में नहीं, पूरा छत्तीसगढ़ इसकी गिरफ़्त में है. यदि सरकार गंभीर है तो गंभीर आदेश निकालिए, मीडियाबाज़ी के लिए सरकार के पास बहुत इंवेंट हैं.
रायपुर: 150 करोड़ की सरकारी जमीन का विवाद, रेरा ने विज्ञापनों पर लगाया ₹10,000 प्रतिदिन का जुर्माना
रायपुर। राजधानी में करीब 150 करोड़ की सरकारी जमीन को गलत तरीके से नामांतरण करने का विवाद थम नहीं रहा है. अब इस मामले में छत्तीसगढ़ रेरा ने सख्त तेवर दिखाते हुए सोशल मीडिया पर विज्ञापन प्रकाशित करने पर प्रति दिवस 10 हजार रुपए के हिसाब से जुर्माना किया गया है. यह दंड 88 लाख 55 हजार की सीमा तक देय होगा. यह जुर्माना सभी सोशल मीडिया से विज्ञापन हटाने तक चलता रहेगा.
छत्तीसगढ़ रेरा को सोशल मीडिया से इस तरह की जानकारी मिली कि कंपनी की प्रॉपर्टी पर रोक होने के बावजूद उसके एजेंट प्रॉपर्टी को खरीदी-बिक्री के लिए विज्ञापन कर रहे हैं. लगातार विज्ञापन के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद रेरा अध्यक्ष संजय शुक्ला ने इस पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ रेरा ने कंपनी के एजेंटों को बुलाया.
रेरा में हुई सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि दीक्षांत राठौर (पुणे महाराष्ट्र), बलराम शशिकांत झा ( मीरा रोड ईस्ट पुणे), प्रॉपर्टी क्लाउड रियलिटी स्पेशिफायर प्रालि (मुंबई महाराष्ट्र) और अतुल्यम इंफ्राटेक प्रालि (शकुरपुरा दिल्ली ) ने सोशल मीडिया गोदरेज प्रॉपर्टी से संबंधित विज्ञापन पोस्ट किए.
बीते साल क्रय-विक्रय पर लगाई थी रोक
बता दें कि इसके पहले बीते साल सितंबर महीने में छत्तीसगढ़ भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड की स्वामित्व वाली भूमि के क्रय-विक्रय और विज्ञापनों पर रोक लगा दी थी.
रेरा के अनुसार, रायपुर तहसील के ग्राम डोमा स्थित करीब 50 एकड़ भूमि (खसरा क्रमांक 213/2, 213/125, 15016, 15017/1 आदि) को सोशल मीडिया और अन्य विज्ञापनों के जरिए बेचे जाने की जानकारी मिली थी. जांच में पाया गया कि इस परियोजना का रेरा में पंजीकरण ही नहीं कराया गया है.
रेरा अधिनियम 2016 की धारा-3 के तहत, बिना पंजीकरण किसी भी रियल एस्टेट परियोजना की बिक्री, प्रचार-प्रसार या विज्ञापन करना प्रतिबंधित है. इस नियम का उल्लंघन मानते हुए प्राधिकरण ने क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी थी.
भाजपा में अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति और युवा मोर्चा में नियुक्तियां, देखें किसे कहां से मिली जिम्मेदारी
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा, अनुसूचित जाति (अजा) मोर्चा और युवा मोर्चा में जिला अध्यक्षों और महामंत्रियों की नियुक्तियां की गई है. यह नियुक्तियां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की सहमति से की गई है. यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से प्रभाव से लागू किया गया है.
जारी लिस्ट में अल्पसंख्यक मोर्चा के 9 जिला अध्यक्ष, अनुसूचित जाति मोर्चा के 5 जिला अध्यक्षों और युवा मोर्चा में 13 जिला अध्यक्षों के साथ महामंत्रियों को नियुक्त किया गया है.
देखें लिस्ट
अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाअध्यक्षों की सूची

अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाअध्यक्षों की सूची

युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष और महामंत्रियों की सूची


8 लाख के इनामी 4 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
सुकमा। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की कमर लगातार टूट रही है. नक्सल संगठन को फिर बड़ा झटका लगा है. सुकमा जिला मुख्यालय में शुक्रवार को 8 लाख रुपए के इनामी 4 नक्सलियों ने हथियार के साथ पुलिस अधिकारियों के समक्ष सरेंडर किया है, इनमें एसीएम रैंक के नक्सली शामिल हैं. सरेंडर करने वालों में 2 महिला नक्सली हैं. इस दौरान SLR, INSAS, .303, .315 रायफल व एम्युनेशन जमा किया गया है. ये सभी गोलापल्ली, कोंटा और किस्टाराम क्षेत्र में सक्रिय थे.
यह आत्मसमर्पण सुकमा पुलिस और अल्लूरी सीताराम राजू (आंध्र प्रदेश) पुलिस के संयुक्त प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम बताया जा रहा है. यह पूरी कार्रवाई राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत हुई है, जिसका उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ना है.
पुलिस और प्रशासन ने इस अवसर पर अन्य नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हथियार डालें, आत्मसमर्पण करें और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सामान्य जीवन की ओर लौटें.
रायपुर में नशे पर 'सर्जिकल स्ट्राइक': रोलिंग पेपर और गोगो कोन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध
रायपुर। नाबालिगों और युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने बड़ा फैसला लिया है। रायपुर नगरीय क्षेत्र में रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन और पर्फेक्ट रोल की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और 29 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगा।
पुलिस कमिश्नरेट नगरीय रायपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सामाजिक संगठनों और जनसामान्य से मिली जानकारी में यह तथ्य सामने आया था कि नाबालिगों और युवाओं द्वारा चरस, गांजा जैसे मादक पदार्थों के सेवन के लिए रोलिंग पेपर और स्मोकिंग कोन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

इन उत्पादों में टाइटेनियम ऑक्साइड, पोटेशियम नाइट्रेट, आर्टिफिशियल डाई, कैल्शियम कार्बोनेट और क्लोरीन ब्लीच जैसे जहरीले रसायन पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। यह सामग्री पान दुकानों, किराना दुकानों, चाय दुकानों, कैफे और रेस्टोरेंट जैसे स्थानों पर आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवाओं तक आसानी से पहुंच रही थी। इससे न केवल नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है, बल्कि नशे से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों में भी वृद्धि देखी जा रही है, जो आमजन की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
राज्य सरकार द्वारा 21 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना के तहत पुलिस आयुक्त को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह आदेश पारित किया गया है। आदेश के अनुसार रायपुर नगरीय क्षेत्र में पान की दुकान, परचून/किराना, चाय दुकान, कैफे और रेस्टोरेंट जैसे स्थानों से इन उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
पुलिस कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस आदेश में छूट या शिथिलता चाहती है, तो वह विधिवत आवेदन प्रस्तुत कर सकती है, जिस पर सुनवाई के बाद निर्णय लिया जाएगा।
यह आदेश 29 जनवरी 2026 से तत्काल प्रभावी हो गया है और यदि इसे बीच में वापस नहीं लिया गया तो 29 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 सहित अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वाणिज्यिक कर विभाग में राज्य कर सहायक आयुक्तों का तबादला, देखें लिस्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है. जारी आदेश के अनुसार राज्य कर सहायक आयुक्त के पद पर प्रमोट किए गए कुल 16 अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला किया गया है. अधिकारियों को उनकी वर्तमान पदस्थापना से हटाकर नई जिम्मेदारी दी गई है. आदेश पर उप सचिव शिव कुमार सिंह के डिजिटल हस्ताक्षर हैं.
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धर्मांतरण रोकने विधेयक पर मंत्रिमंडलीय उप-समिति की पहली बैठक, सभी पहलुओं पर चर्चा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर रोक लगाने वाले धर्म स्वतंत्रता विधेयक को अंतिम रूप देने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय में गुरुवार को मंत्रिमंडलीय उप-समिति की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें विधेयक के सभी संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, वन मंत्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और विधि मंत्री गजेन्द्र यादव शामिल हुए। मंत्रियों ने एक स्वर में स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी धर्मों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
मंत्रियों ने कहा कि सभी धर्मों को अपने-अपने प्रचार और प्रसार का पूरा अधिकार है, लेकिन प्रलोभन, दबाव, धमकी या किसी भी अनुचित तरीके से धर्मांतरण अब संभव नहीं होगा। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा। बैठक में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि इस तरह के कानूनों को अक्सर अदालतों में चुनौती दी जाती है, इसलिए विधेयक को पूरी तरह संवैधानिक दायरे में मजबूत और तर्कसंगत बनाया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों को समान सम्मान और प्रचार का अधिकार है। लेकिन किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर, लोभ या जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन कराना गलत है। इसी उद्देश्य से समिति ने विधेयक के हर पहलू पर गहन मंथन किया है, ताकि कोर्ट में चुनौती की स्थिति में सरकार का पक्ष मजबूत रहे।
मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि विधेयक को तैयार करने में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। अन्य राज्यों में लागू ऐसे कानूनों पर आई कानूनी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, सभी पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार किया जा रहा है। यह पहली बैठक थी और आगे भी कई बैठकें आयोजित की जाएंगी।
विधेयक कब होगा पेश?
सूत्रों के अनुसार, धर्म स्वतंत्रता विधेयक को विधानसभा के आगामी बजट सत्र फरवरी–मार्च 2026 में पेश किए जाने की तैयारी है। एक अंतिम बैठक के बाद विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कानून संवैधानिक रूप से मजबूत होगा और अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाने में सहायक सिद्ध होगा।
गौरतलब है कि यह कदम राज्य में हाल के वर्षों में धर्मांतरण को लेकर सामने आए आरोपों, खासकर आदिवासी क्षेत्रों से जुड़ी शिकायतों के संदर्भ में उठाया गया है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक सभी धर्मों की समान सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और समाज में सद्भाव और सौहार्द बनाए रखने में मदद करेगा।
संपत्ति गाइडलाइन दरों में संशोधन को मंजूरी, आज से लागू हुई नई दरें
रायपुर। छत्तीसगढ़ में संपत्ति गाइडलाइन दरों से जुड़ी बड़ी खबर है। राज्य की जिला मूल्यांकन समितियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर स्थावर संपत्ति की गाइडलाइन दरों में पुनरीक्षण को मंजूरी दे दी गई है। यह संशोधित गाइडलाइन दरें 30 जनवरी 2026 से प्रभावशील होंगी।
देखिये आदेश की कॉपी-

ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी- कर्मचारियों को मुख्य सचिव ने किया सम्मानित, कहा – बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य
रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्य सचिव ने मंत्रालय सहित राज्य शासन के सभी कार्यालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अनिवार्य रूप से निर्धारित समय में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए है।उन्होंने ऐसा नहीं करने वालों को सचेत करते हुए कार्यालय में निर्धारित समय पर बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने कहा है।
मुख्य सचिव ने कहा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नही करना स्वीकार नही होगा। मुख्य सचिव ने राज्य शासन के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस से ही फाईल संचालन करने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएग। मुख्य सचिव ने कहा है कि राज्य शासन के सभी अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में ऑनबोर्ड हो जायें। मुख्य सचिव ने कहा कि आगामी वर्ष से अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश आवेदन ई-ऑफिस प्रणाली से ही स्वीकार किए जायेंगे। उन्होंने कहा कि अचल सम्पत्ति का विवरण और एसीआर भी प्रतिवर्ष ई-ऑफिस से ही दर्ज किया जाएगा। मुख्य सचिव ने अधिकारी-कर्मचारियों से कहा है कि टीम भावना से कार्य करें और पूरे देश में छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रदेश के रूप में दर्ज करायें। मुख्य सचिव ने सामान्य प्रशासन विभाग एवं राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के अधिकारियों को विभागवार ई-ऑफिस का डेटा तैयार करने के निर्देश दिए। विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को उनके कार्यों की स्थिति की जानकारी एसएमएस द्वारा दी जायें।
मुख्य सचिव ने सभी से ई-ऑफिस में दक्षता से कार्य करने की अपेक्षा की है। उन्होंने आवश्यक निर्देश दिए कि अधिकारी-कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली का प्रशिक्षण देने कहा है। मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में जिन अधिकारियों- कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है उनमें ई-ऑफिस से फाईल वर्क करने के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव जयश्री जैन, आदिवासी विकास विभाग के संयुक्त सचिव भूपेन्द्र कुमार राजपुत और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त सचिव प्रणय मिश्रा को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया है। उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप सचिव दुरदेशी राम संतापर, सीएम सचिवालय के उप सचिव तीरथ प्रसाद लाड़िया और सामान्य प्रशासन विभाग-1 के उप सचिव किशोर कुमार भूआर्य को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। अवर सचिव श्रेणी में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव रणबहादुर ग्वाली, विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अवर सचिव अरूण कुमार मिश्रा और गृह विभाग के अवर सचिव पूरनलाल साहू को ई फाईल के लिए प्रशंसा पत्र दिया गया। अनुभाग अधिकारियों में गृह विभाग के अनुभाग अधिकारी पी.नागराजन, सामान्य प्रशासन विभाग के अनुभाग अधिकारी नंदकुमार मेश्राम और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अनुभाग अधिकारी भोलेनाथ सारथी को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसी तरह से ई-फाईल में अच्छा कार्य करने के लिए खनिज संसाधन विभाग के कनिष्ठ सहायक प्रदीप कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग-3 के कनिष्ठ सहायक दीनानाथ साहू और सामान्य प्रशासन विभाग-7 के कनिष्ठ सहायक प्रदीप कुमार राय को प्रशंसा पत्र देकर ई-ऑफिस में ई-फाईल कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया।
मंत्रालय में आयोजित ई-ऑफिस सम्मान समारोह में मुख्य सचिव ने समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मंत्रालयीन अधिकारियों- कर्मचारियों को सम्मानित किया है। इसमें प्रथम 10 में प्रथम स्थान करने वालों में अवर सचिव राजेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी, संयुक्त सचिव भूपेन्द्र कुमार राजपूत, स्टेनोग्राफर नवीन नाग, सहायक अनुभाग अधिकारी योगेन्द्र कुर्रे, अतिरिक्त सचिव चंद्रकुमार कश्यप, संयुक्त सचिव अनुपम त्रिवेद्वी, अवर सचिव मनोज कुमार जायसवाल, सहायक अनुभाग अधिकारी पवन कुमार साहू, स्टेनोटायपिस्ट भावना यादव और अतिरिक्त सचिव भूपेन्द्र कुमार वासनिकर को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है।
सीएम साय ने प्रगति पोर्टल के संबंध में ली प्रेसवार्ता, कहा – नए भारत की नई कार्य संस्कृति का प्रतीक है प्रगति पोर्टल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश सुशासन की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्लेटफॉर्म सरकार की कथनी और करनी में समानता का सशक्त प्रमाण है तथा सुशासन की दिशा में एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में प्रगति पोर्टल के संबंध में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रगति पोर्टल केवल देश की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नए भारत की नई कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह प्लेटफॉर्म मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्सिमम गवर्नेंस की कार्यशैली को सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को विश्वभर में एक आदर्श प्रणाली के रूप में देखा जाता है। इसके पीछे केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, समन्वय और सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रगति प्लेटफॉर्म केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए एक प्रभावी सेतु का कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रगति का अर्थ- प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन है, अर्थात् योजनाओं की पूर्व तैयारी कर उनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। यह प्लेटफॉर्म केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन प्रणाली में जवाबदेही तय करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कार्य संस्कृति में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि पूर्व में अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास तो हो जाता था, लेकिन उनके पूर्ण होने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती थी। कई निर्माण कार्य वर्षों तक लंबित रहते थे। योजनाओं में विलंब, प्रशासनिक अड़चनें और विभागीय समन्वय की कमी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म को लागू किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रधानमंत्री स्वयं राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र सरकार के सचिवों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करते हैं। अब तक 50 से अधिक उच्चस्तरीय प्रगति समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से लंबित परियोजनाओं, कमजोर प्रदर्शन वाली योजनाओं और नागरिकों से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 85 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 3,300 से अधिक परियोजनाओं को गति दी गई है। इसके साथ ही एक देश-एक राशन कार्ड, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम स्वनिधि और स्वच्छ भारत मिशन सहित 61 योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। बैंकिंग, बीमा, रेरा, जनधन योजना और मातृत्व वंदना सहित 36 क्षेत्रों में शिकायत निवारण व्यवस्था को भी प्रगति के माध्यम से सुदृढ़ किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में भी प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 99 राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाएँ संचालित हैं, जिनमें 6.11 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इनमें से 50 परियोजनाएँ पूर्ण होकर संचालित हो चुकी हैं, जबकि शेष परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। उन्होंने बताया कि प्रगति पोर्टल पर छत्तीसगढ़ से संबंधित कुल 200 मुद्दे दर्ज किए गए, जिनमें से 183 का सफल समाधान किया जा चुका है। इस प्रकार राज्य की समाधान दर 91 प्रतिशत से अधिक रही है। पावर, सड़क परिवहन, रेलवे, कोयला और इस्पात जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लंबित परियोजनाओं की समस्याओं को प्रभावी ढंग से हल किया गया है। सेक्टर के हिसाब से बात करें तो पावर सेक्टर में 24 प्रोजेक्ट का समाधान किया गया। सड़क परिवहन और राजमार्ग के 23 प्रोजेक्ट, रेलवे के 14 प्रोजेक्ट, कोयला सेक्टर के 07 प्रोजेक्ट, स्टील सेक्टर के 09 प्रोजेक्टों का समाधान किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भिलाई स्टील प्लांट के आधुनिकीकरण तथा लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट जैसी वर्षों से लंबित परियोजनाओं को प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से गति मिली है। इससे राज्य के औद्योगिक विकास को बल मिला है और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। इसी तरह रायपुर-कोडेबोड मार्ग के फोरलेन कार्य में भूमि उपयोगिता और सामग्री आपूर्ति संबंधी समस्याएं आ रही थी, जिसे प्रगति प्लेटफॉर्म के जरिए हल किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार विकास कार्यों को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमारी सरकार ने भी छत्तीसगढ़ में सुशासन की दिशा में ऐसे ही कई नवाचार किए हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी इस नवाचार की तारीफ की है। इसे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक प्रभावी तंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जब विकसित भारत को लेकर अपने विजन की बात करते है, तो यह सिर्फ शब्द नहीं होते, बल्कि विकसित भारत का पूरा रोडमैप होता है। यह बात प्रगति प्लेटफॉर्म जैसे नवाचार से साबित होता है।
कुकरा में अतिक्रमण को लेकर बवाल, कार्रवाई बिना लौटे अधिकारी, ग्रामीणों ने 2 फरवरी को कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी
आरंग। आज एक तरफ नवा रायपुर में जहां अतिक्रमण हटाने का ग्रामीण भारी विरोध कर रहे थे और स्थिति तनावपूर्ण थी, वहीं दूसरी तरफ अतिक्रमण नहीं हटाए जाने से ग्राम कुकरा के ग्रामीण प्रशासन की कार्रवाई से खासे नाराज दिखे। आरंग विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुकरा में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। ग्राम पंचायत द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के एक साल बाद भी अतिक्रमण न हटाए जाने से ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है। गुरुवार को नायब तहसीलदार नीलम ठाकुर के नेतृत्व में पहुंची टीम द्वारा बिना कार्रवाई किए वापस लौट जाने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

क्या है पूरा मामला
ग्राम कुकरा में शासकीय जमीनों पर लगभग 38 अतिक्रमणकारियों ने अवैध निर्माण कर रखा है। इन अतिक्रमणों को हटाने के लिए ग्राम पंचायत कुकरा में एक वर्ष पूर्व ही विधिवत प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। बावजूद इसके, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की सुस्ती के कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

खाली हाथ लौटी टीम, ग्रामीणों ने लगाए आरोप
आज मंदिर हसौद तहसील से नायब तहसीलदार नीलम ठाकुर दल-बल के साथ अतिक्रमण हटाने कुकरा पहुंची थीं। लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद प्रशासन ने ‘अनावेदक की अनुपस्थिति’ का हवाला देते हुए हाथ पीछे खींच लिए। टीम बिना किसी कार्रवाई और ग्रामीणों को बिना कोई ठोस आश्वासन दिए वापस लौट गई।

प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये पर ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली संदिग्ध है और कार्रवाई जानबूझकर टाली जा रही है।मौके पर अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के बजाय वहां से जाना बेहतर समझा।
02 फरवरी को कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी
कार्रवाई नहीं होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों ने घोषणा की है कि यदि जल्द ही अवैध निर्माणों पर बुलडोजर नहीं चला, तो 02 फरवरी को बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।
ग्राम पंचायत कुकरा के सरपंच नंदलाल डहरिया ने बताया कि एक साल से प्रस्ताव धूल फांक रहा है। जब टीम आई तो बिना कार्रवाई के लौट गई। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता है।लगभग एक साल से प्रशासन अतिक्रमण हो हटाने में नाकाम है।अगर प्रशासन जल्द ही अतिक्रमण को नहीं हटाती है ग्रामीण रायपुर कलेक्टर का घेराव करेगी।
वही इस पूरे मामले पर मंदिरहसौद तहसीलदार विनोद साहू ने बताया कि ग्राम पंचायत की शिकायत में 13 अतिक्रमणकारियों के नाम है लेकिन जांच में लगभग 38 अतिक्रमणकारियों के नाम सामने आए है। ग्रामीण 13 अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे है जबकि बाकी का विरोध कर रहे है। इसीलिए ऐसी स्थिति निर्मित हुई है। आज जब नायब तहसीलदार नीलम ठाकुर मौके पर पहुंची तो अनावेदक अनुपस्थित थे ऐसे में कार्रवाई संभव नहीं था,प्रशासन जल्द ही सभी अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करेगी।
कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर लगे रोक—सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र से की हस्तक्षेप की मांग
नई दिल्ली। देश के लाखों छात्रों को निजी कोचिंग संस्थानों (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) की मनमानी से बचाने के लिए रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से निर्णायक हस्तक्षेप की मांग की है।
असल में स्कूली छात्र कॉम्पिटिशन की तैयारी के लिए अलग अलग कोचिंग संस्थानों में पढाई करते हैं जहाँ उन्हें आईआईटी, एनआईटी, एम्स जैसे संस्थानों में गारंटी शुदा एडमिशन का प्रलोभन दिया जाता है और एक मुश्त पूरी फीस जमा करवा ली जाती है। गरीब, ग्रामीण एवं मध्यम वर्गीय परिवार भी सोना, ज़मीन बेचकर एवं क़र्ज़ लेकर होने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए यह फीस अदा करते हैं।
लेकिन अगर उन्हें अनुकूल पढाई का वातावरण ना मिलने पर अगर वह संस्थान कोचिंग छोड़ना चाहे तो यह सेंटर मनमानी करते हैं, जिससे माँ बाप एवं बच्चे दोनों मानसिक रूप से प्रताड़ित होते हैं। हालांकि शिक्षा मंत्रालय (केंद्र सरकार) ने वर्ष 2024 में विभिन्न कोचिंग सेंटर के संदर्भ में गाइडलाइंस ज़ारी की है लेकिन इनका ज़मीनी स्तर पर पालन नहीं हो रहा है। उल्लेखनीय है कि यह मुद्दा सिर्फ स्कूली बच्चों तक नहीं बल्कि प्रोफेशनल कॉम्पिटिटिव एग्जाम जैसे यूपीएससी के लिए जाने वाले युवाओं के लिए भी प्रासंगिक है, दिल्ली जैसे महानगरों में युवा जाते हैं और भारी भरकम फीस जमा करते हैं लेकिन उन्हें भी इस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। इसीलिए लोकसभा में इस विषय पर सांसद अग्रवाल ने अपनी बात रखी है। सांसद अग्रवाल का य़ह भी कहना है कि मेरा कार्यालय इस संबंध में सभी छात्रों के हित के लिए चौबीस घंटे खुला भी है।
सांसद अग्रवाल द्वारा सरकार से किए गए प्रमुख आग्रह:
1) सभी राज्य सरकारें विद्यार्थियों द्वारा बीच में संस्थान छोड़ने पर 10 दिनों के भीतर फीस रिफंड का अनुपालन करने की अनिवार्यता का नियम बनाएं।
2) छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में इन कोचिंग संस्थानों के विवाद के निपटारे हेतु फ़ास्ट ट्रैक निवारण सेल स्थापित किये जाने के हेतु, छात्र/जन हित में सभी राज्य सरकारों को दिशा निर्देश देने का कष्ट करेंगे।
3) गाइडलाइन्स (2024) का कड़ाई से पालन होना सुनिश्चित करवाया जाए
रायपुर एवं दुर्ग-भिलाई मध्य भारत के कोटा के रूप में स्थापित हो रहे हैं एवं प्रदेश के बिलासपुर एवं रायगढ़ भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भी छात्रों के बीच अपनी जगह बना रहे हैं परन्तु स्कूली विद्यार्थी इन कोचिंग संस्थानों के फीस - ट्रैप - मोनोपोली का शिकार बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा की
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऊर्जा विभाग के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। बैठक में उन्होंने राज्य में विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आमजन की मूलभूत आवश्यकता है और इसकी निर्बाध आपूर्ति सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी विद्युत उत्पादक राज्यों में शामिल है और भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए ऊर्जा अवसंरचना का समयबद्ध विस्तार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने ऑफ-ग्रिड विद्युतीकृत गांवों को शीघ्र ग्रिड से जोड़ने तथा विद्युत अधोसंरचनाओं के सुदृढ़ीकरण कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
श्री साय ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को विद्युत आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसके प्रति उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने सोलर पैनल स्थापना एवं रखरखाव की प्रक्रिया को सरल बनाने, इंस्टालेशन की दैनिक संख्या बढ़ाने और सभी शासकीय भवनों में सोलर पैनल लगाने के निर्देश दिए। साथ ही पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना एवं स्मार्ट मीटर से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा।
मुख्यमंत्री ने लंबित बिजली बिलों की समीक्षा करते हुए उपभोक्ताओं को भुगतान के लिए अवसर और सुविधा देने विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने बस्तर के दूरस्थ अंचलों में ग्रिड आधारित विद्युतीकरण को गति देने, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा पीक डिमांड के अनुरूप ट्रांसमिशन क्षमता विस्तार पर भी जोर दिया।
बैठक में बताया गया कि पिछले दो वर्षों में ट्रांसफार्मर क्षमता 24,227 एमवीए से बढ़कर 27,820 एमवीए हो गई है तथा 400/220 केवी, 220/132 केवी और 132/33 केवी उपकेंद्रों के उन्नयन सहित कई परियोजनाएं प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने सौर सुजला योजना, कुसुम योजना, नियद नेल्ला नार एवं ग्राम विद्युतीकरण से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की।
ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने पीपीटी के माध्यम से विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण, पीएम सूर्यघर, पीएम जनमन, कृषि पंपों के ऊर्जीकरण, मजराटोला विद्युतीकरण एवं नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने आगामी वर्षों में नए उपकेंद्रों की स्थापना, वितरण ट्रांसफार्मरों की संख्या बढ़ाने और अंडरग्राउंड केबल सहित विभिन्न विकास कार्यों की कार्ययोजना प्रस्तुत की।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, सीएसपीडीसीएल, सीएसपीजीसीएल, सीएसपीटीसीएल के वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद थे।
शहीद दिवस : देशभर में 2 मिनट का मौन रख शहीदों को दी जाएगी श्रद्धांजलि, सायरन बजाकर दिया जाएगा संकेत
रायपुर। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों की याद में कल यानी 30 जनवरी को ‘शहीद दिवस’ मनाया जाएगा. इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन और गृह विभाग ने आदेश जारी कर प्रदेशवासियों से दो मिनट का मौन धारण करने की अपील की है.
सुबह 11 बजे थमेगी रफ्तार
भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार, देशभर में कल सुबह 11 बजे एक साथ दो मिनट का मौन रखा जाएगा. इस दौरान सभी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और शिक्षण संस्थानों में कामकाज रोककर शहीदों को नमन किया जाएगा.
सायरन बजाकर दिया जाएगा संकेत
मौन धारण करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप देने के लिए सायरन बजाने की व्यवस्था की गई है:
पहला सायरन: सुबह 10:59 से 11:00 बजे तक सायरन बजाया जाएगा, जो इस बात का संकेत होगा कि मौन शुरू होने वाला है.
मौन का समय: ठीक 11:00 बजे से 11:02 बजे तक पूरा देश शांत रहकर शहीदों को याद करेगा.
दूसरा सायरन: मौन खत्म होने पर सुबह 11:02 से 11:03 बजे तक दोबारा सायरन बजेगा, जिसके बाद सामान्य कामकाज शुरू किया जा सकेगा.
सरकार की विशेष अपील
राज्य सरकार ने अपील की है कि जैसे ही सायरन सुनाई दे, लोग जहां भी हों, सड़क पर, ऑफिस में या घर पर, वहीं खड़े होकर दो मिनट का मौन धारण करें. इस पहल का उद्देश्य युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से परिचित कराना और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करना है.
देखें आदेश की कॉपी:

देश में प्रतिदिन सबसे अधिक पीएम आवास बनाने वाला राज्य छतीसगढ़ - उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा
रायपुर। उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि ग्रामीण अंचलों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए राज्य में पुनः ग्रामीण सचिवालय प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सबसे तेज गति से आवास निर्माण करने वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है। यहां प्रतिदिन सर्वाधिक पीएम आवासों का निर्माण किया जा रहा है।
नवा रायपुर स्थित संवाद भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की बीते दो वर्षों की उपलब्धियों, नवाचारों और भावी कार्ययोजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख पीएम आवास स्वीकृत किए गए थे, जिनका निर्माण तेजी से पूरा किया जा रहा है। इनमें वर्षों से लंबित, प्रतीक्षा सूची में शामिल, आवास प्लस और मुख्यमंत्री आवास योजना के हितग्राही शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि आवासहीन परिवारों के साथ-साथ 3 हजार से अधिक आत्मसमर्पित और नक्सल पीड़ित परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराए गए हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन और नियद नेल्ला नार योजनाओं के तहत 33 हजार से अधिक लोगों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 2 हजार से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं।
विजय शर्मा ने बताया कि आवास निर्माण में स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने अहम भूमिका निभाई है। गांव-गांव में निर्माण सामग्री की आपूर्ति के लिए 8 हजार से अधिक डीलर दीदी तैयार की गई हैं, वहीं 5 हजार से अधिक राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन के तहत दो चरणों में 6,195 अटल डिजिटल सुविधा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से अब तक 919 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हो चुका है। इससे ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं रही।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि समर्थ पंचायत पोर्टल के जरिए पंचायत करों का ऑनलाइन संग्रहण शुरू किया गया है। धमतरी जिले की सांकरा ग्राम पंचायत देश की पहली पंचायत बनी, जहां यूपीआई के माध्यम से टैक्स वसूली की गई। इस पहल की केंद्रीय पंचायत मंत्रालय ने भी सराहना की है।
उन्होंने कहा कि ग्राम संपदा मोबाइल ऐप के जरिए पंचायत परिसंपत्तियों का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नवीन आरक्षण प्रावधान लागू कर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर कराने में छत्तीसगढ़ अग्रणी रहा है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए राज्य में 368 महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 137 पूर्ण हो चुके हैं। पंचायत सचिवों को नवीन वेतनमान का एरियर भुगतान करते हुए लगभग 49.30 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पीएम जनमन और पीएमजीएसवाय के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से लंबित सड़कों का निर्माण पूरा किया गया है। चौथे चरण में 2500 किलोमीटर से अधिक नई सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनकी निगरानी इसरो और जियो इमेजिंग के माध्यम से की जाएगी।
स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ और उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए ‘छत्तीसकला’ ब्रांड शुरू किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत 1.86 लाख शौचालयों का निर्माण और सार्वजनिक स्थलों पर सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं।
मनरेगा में पारदर्शिता के लिए सभी ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर विकास कार्यों की जानकारी ली जा सकती है। जल संरक्षण अभियान ‘मोर गांव मोर पानी’ के तहत 2.32 लाख से अधिक कार्य पूरे किए गए हैं।
पत्रकार वार्ता में प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सचिव भीम सिंह, आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।