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PHE विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 34 अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी, 26 अभियंता पदोन्नत, मुख्य अभियंता सस्पेंड
रायपुर। राज्य शासन ने जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाने और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की कार्यप्रणाली में कसावट लाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव किए हैं। उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने राज्य कार्यालय, जल जीवन मिशन मुख्यालय और मैदानी कार्यालयों में पदस्थ 34 अधिकारियों के तबादले एवं दायित्वों में परिवर्तन के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही 26 उप अभियंताओं को सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नति दी गई है, जबकि लापरवाही के आरोपों में निलंबित 6 कार्यपालन अभियंताओं की बहाली भी की गई है।
मुख्य अभियंता राजेश गुप्ता तत्काल प्रभाव से निलंबित
जल जीवन मिशन के कार्यों में लापरवाही तथा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना सामग्री में परिवर्तन के गंभीर आरोपों को देखते हुए रायपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता राजेश गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग ने उनके विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए हैं। जांच अधिकारी को एक माह के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


ओएसडी संजीव बृजपुरिया से अतिरिक्त प्रभार हटाया गया
मैदानी कार्यों में कसावट लाने के उद्देश्य से अधीक्षण अभियंता संजीव बृजपुरिया को उप मुख्यमंत्री के ओएसडी के प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। अब वे केवल दुर्ग मंडल के अधीक्षण अभियंता के रूप में कार्य करेंगे। विभागीय सूत्रों के अनुसार, दोहरे प्रभार के चलते मैदानी निगरानी प्रभावित हो रही थी।
वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां
प्रशासनिक फेरबदल के तहत कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं—
ओंकेश चंद्रवंशी, प्रभारी प्रमुख अभियंता, को वर्तमान दायित्वों के साथ जल जीवन मिशन का अतिरिक्त मिशन संचालक नियुक्त किया गया है।
मंत्रालय में विभागीय ओएसडी के रूप में पदस्थ मुख्य अभियंता के.के. मरकाम को रायपुर परिक्षेत्र का मुख्य अभियंता बनाया गया है।
जी.एल. लखेरा, अधीक्षण अभियंता कोंडागांव मंडल एवं प्रभारी मुख्य अभियंता (जगदलपुर परिक्षेत्र), को प्रभारी मुख्य अभियंता, जगदलपुर परिक्षेत्र पदस्थ किया गया है।
मुख्य अभियंता कार्यालय रायपुर में पदस्थ अधीक्षण अभियंता राजेन्द्र कुमार शुक्ला को कोंडागांव मंडल का अधीक्षण अभियंता बनाया गया है।
जल जीवन मिशन के अतिरिक्त मिशन संचालक एस.एन. पाण्डेय को प्रमुख अभियंता कार्यालय में अधीक्षण अभियंता के रूप में पदस्थ किया गया है।
बी.एन. भोयर, अधीक्षण अभियंता (कांकेर खंड कार्यालय), को प्रमुख अभियंता कार्यालय में जल जीवन मिशन के कार्य हेतु आदेशित किया गया है।
समीर शर्मा, अधीक्षण अभियंता, का राजनांदगांव से रायपुर स्थानांतरण करते हुए मुख्य अभियंता कार्यालय में जल जीवन मिशन का दायित्व सौंपा गया है।


इसके अलावा, मैदानी स्तर पर 22 कार्यपालन अभियंताओं और 3 सहायक अभियंताओं के तबादले के आदेश भी जारी किए गए हैं।



26 उप अभियंताओं को सहायक अभियंता पदोन्नति
विभाग ने 26 उप अभियंताओं (सिविल) को सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर पदोन्नति दी है। पदोन्नत अधिकारियों में प्रमुख रूप से गुणेश कुमार पानीग्रही, सरोतन सिंह पैंकरा, रवि प्रकाश जोशी, प्रणेश कुमार रामटेके, प्रकाश सिंह ठाकुर, गुलाब सिंह चौहान, दौलत राम बंजारे, अमित कुमार मिश्रा, अशोक कुमार राज, कौशल कुमार नेताम, विशाल गेडाम, कृष्णमूर्ति, पवन कुमार अग्रवाल, अमित राय, आलोक मंडल, अंजू साहू, रीना सिंह, सुभ्रा बघेल और के. सुनीता शामिल हैं।





7 उप अभियंताओं को सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नति
इसके साथ ही सात उप अभियंताओं को परिभ्रमण से मुक्त करते हुए सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नति दी गई है। इनमें विनोद कुमार सिंह, रेवेन्द्र महोबिया, प्रमोद कुमार महतो, डेमन लाल देशमुख, रूपचंद सूर्यवंशी, सत्यनारायण सिंह कंवर और विमलेश कुमार सिंह शामिल हैं।


निलंबित 6 कार्यपालन अभियंताओं की बहाली
जल जीवन मिशन के कार्यों में लापरवाही एवं त्रुटिपूर्ण रिपोर्टिंग के चलते निलंबित किए गए 6 कार्यपालन अभियंताओं की बहाली के आदेश भी जारी किए गए हैं। इनमें जगदीश कुमार, उत्तर कुमार राठिया, चन्द्रबदन सिंह, एस.पी. मंडावी, जे.एल. महला और रूपेश कुमार धनंजय शामिल हैं।

इस व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए राज्य शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए मैदानी क्रियान्वयन को तेज और प्रभावी बनाने पर सरकार का फोकस है।
मनरेगा को कमजोर करने की साजिश का आरोप: जगदलपुर में दीपक बैज का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
जगदलपुर। मनरेगा योजना को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। बीते 8 जनवरी से प्रदेश में कांग्रेस ने मनरेगा बचाव संग्राम शुरू कर दिया है। आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने जगदलपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार योजना के नाम और ढांचे में बदलाव की आड़ में मनरेगा को धीरे-धीरे कमजोर करने की साजिश कर रही है।
पत्रवार्ता को संबोधित करते हुए दीपक बैज ने कहा कि केंद्र सरकार अपने 11 वर्षों के कार्यकाल में मनरेगा मजदूरों को औसतन केवल 38 दिन का ही रोजगार उपलब्ध करा सकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हकीकत यह है, तो अब 125 दिन रोजगार देने के दावे किस आधार पर किए जा रहे हैं। बैज ने इसे मजदूरों और किसानों के साथ सीधा छल बताते हुए कहा कि सरकार जमीनी सच्चाई से पूरी तरह कट चुकी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मनरेगा की वित्तीय संरचना पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले इस योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन अब 40 प्रतिशत वित्तीय बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया गया है। ऐसे में, पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे राज्यों के लिए मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी का भुगतान कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है। बैज ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर राज्यों को कमजोर कर रही है, ताकि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं धीरे-धीरे दम तोड़ दें।
दीपक बैज ने यह भी कहा कि मनरेगा सिर्फ रोजगार की योजना नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इससे मजदूरों के साथ-साथ किसानों, छोटे व्यापारियों और गांव की पूरी अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता है। लेकिन केंद्र सरकार की नीतियों के कारण आज यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है।
छत्तीसगढ़ में “मनरेगा बचाव संग्राम” के तहत होगा चरणबद्ध आंदोलन
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह केंद्र सरकार की इन नीतियों के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि 8 जनवरी से शुरु हुए “मनरेगा बचाव संग्राम” के तहत 25 फरवरी तक पूरे छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। इस दौरान धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और जनजागरूकता कार्यक्रमों के जरिए केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध किया जाएगा।
बैज ने कहा कि कांग्रेस मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ेगी और मनरेगा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देगी।
धान खरीदी का महाभियान: अब तक 93.12 लाख मैट्रिक टन धान की खरीदी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 14 नवम्बर 2025 से प्रारंभ हुआ छत्तीसगढ़ का धान खरीदी महाअभियान पारदर्शिता, गति और किसान-हितैषी व्यवस्था का उदाहरण बनता जा रहा है।
प्रदेश में अब तक 16.95 लाख पंजीकृत किसानों से 93.12 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है।किसानों को उनके पसीने की पूरी कीमत समय पर मिल सके, इसके लिए शासन द्वारा समर्थन मूल्य के तहत अब तक लगभग 20 हजार 753 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा चुका है। यह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है, बल्कि किसानों के आर्थिक आत्मविश्वास को भी नई मजबूती प्रदान कर रहा है।
प्रदेशभर में संचालित 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित, डिजिटल निगरानीयुक्त और पूर्णतः पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है। शासन की यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक किसान को ही लाभ मिले और बिचौलियों अथवा फर्जी प्रविष्टियों की कोई गुंजाइश न रहे।
किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने टोकन व्यवस्था को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाया है। खाद्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अब टोकन सहकारी समितियों के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं।खरीदी के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के प्रमुख धान उत्पादक जिलों में तेज गति से उपार्जन हुआ है।
उल्लेखनीय है कि 8 जनवरी तक महासमुंद जिले में 6 लाख 33 हजार 291 क्विंटल, बेमेतरा जिले में 5 लाख 33 हजार 482 क्विंटल, बलौदाबाजार-भाठापारा जिले में 5 लाख 15 हजार 071 क्विंटल, बालोद जिले में 4 लाख 99 हजार 074 क्विंटल, रायपुर जिले में 4 लाख 66 हजार 249 क्विंटल, धमतरी जिले में 4 लाख 43 हजार 308 क्विंटल, राजनांदगांव जिले में 4 लाख 42 हजार 473 क्विंटल, बिलासपुर जिले में 4 लाख 21 हजार 142 क्विंटल, जांजगीर-चांपा जिले में 4 लाख 18 हजार 429 क्विंटल, कवर्घा जिले में 4 लाख 12 हजार 003 क्विंटल, दुर्ग जिले में 3 लाख 60 हजार 605 क्विंटल, गरियाबंद जिले में 3 लाख 60 हजार 612 क्विंटल, मुंगेली जिले में 3 लाख 58 हजार 072 क्विंटल, रायगढ़ जिले में 3 लाख 42 हजार 528 क्विंटल, कांकेर जिले में 3 लाख 25 हजार 960 क्विंटल, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 3 लाख 14 हजार 758 क्विंटल, धान की खरीदी हुई है।
इसी प्रकार बस्तर जिले में 1 लाख 79 हजार 964 क्विंटल, बीजापुर में 59 हजार 583 क्विंटल, दंतेवाड़ा में 10 हजार 238 क्विंटल, कोंडागांव 1 लाख 97 हजार 106 क्विंटल, नारायणपुर में 24 हजार 022 क्विंटल, सुकमा 47 हजार 617 क्विंटल, गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही में 87 हजार 870 क्विंटल, कोरबा में 1 लाख 56 हजार 983 क्विंटल, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में 2 लाख 77 हजार 071 क्विंटल, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1 लाख 41 हजार 353 क्विंटल, बलरामपुर जिले में 1 लाख 57 हजार 708 क्विंटल, जशपुर जिले में 1 लाख 68 हजार 264 क्विंटल, कोरिया जिले में 76 हजार 648 क्विंटल, सरगुजा जिले में 2 लाख 2 हजार 951 क्विंटल, सूरजपुर जिले में 2 लाख 29 हजार 359 क्विंटल, सक्ती जिले में 2 लाख 70 हजार 468 क्विंटल और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में 56 हजार 855 क्विंटल धान की खरीदी हुई है।
छत्तीसगढ़ की धान खरीदी प्रणाली आज केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसान सम्मान, पारदर्शिता और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ बन चुकी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का यह संकल्प स्पष्ट है कि हर पात्र किसान को समय पर, पूरा और पारदर्शी लाभ मिलेगा — और यही राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।
IOA की एजीएम में अहम फैसले, राज्यों को 10 लाख की ग्रांट का प्रस्ताव, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ ने उठाया वोटिंग राइट्स का मुद्दा
रायपुर। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने शुक्रवार को गुजरात के अहमदाबाद में अपनी एनुअल जनरल मीटिंग बुलाई. मीटिंग के दौरान लिए गए कई अहम फैसलों से देश में ओलंपिक स्पोर्ट्स के भविष्य के फ्रेमवर्क को आकार मिलने की उम्मीद है.
छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल डॉ. विक्रम सिंह सिसोदिया ने IOA एनुअल जनरल असेंबली में हिस्सा लिया और IOA की प्रेसिडेंट डॉ. पीटी उषा से पर्सनली मुलाकात की. डॉ. सिसोदिया ने बताया कि मीटिंग के दौरान IOA ने स्पोर्ट्स और एथलीट्स के हित में अहम फैसले लिए, जिसमें हर स्टेट ओलंपिक एसोसिएशन को सालाना 10 लाख रुपये की ग्रांट देने का प्रपोज़ल भी शामिल है.
छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल ने IOA के अंदर सभी स्टेट ओलंपिक एसोसिएशन्स के वोटिंग राइट्स को फिर से शुरू करने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने यह प्रपोज़ल चर्चा के लिए पेश किया, जिसे मीटिंग में मौजूद सभी स्टेट ओलंपिक एसोसिएशन्स के रिप्रेजेंटेटिव्स से पॉजिटिव रिस्पॉन्स और अप्रूवल मिला.
कक्षा 4 की परीक्षा में ‘राम’ नाम को लेकर गरियाबंद में बवाल, हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, डीईओ के खिलाफ FIR की मांग
गरियाबंद। कक्षा चौथी की अर्द्धवार्षिक परीक्षा में अंग्रेजी के प्रश्नपत्र में मोना के कुत्ते के नाम के विकल्प के तौर पर ‘राम’ का नाम इस्तेमाल महासमुंद के बाद अब गरियाबंद में बवाल मचाए हुए है. हिन्दू संगठनों ने शनिवार को शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए डीईओ का पुतला फूंका. इसके साथ डीईओ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थाने में ज्ञापन दिया है. मामले में संभाग स्तर पर जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई.
बता दें कि महासमुंद की तरह गरियाबंद जिले में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा में एक सवाल पूछा गया था कि “मोना के कुत्ते का क्या नाम है?”इस सवाल के चार विकल्पों में ‘राम’ का नाम भी शामिल किया गया था. इसे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए डीईओ का पुतला जलाया.
इसके पहले महासमुंद जिले में इसी सवाल पर हिन्दू संगठनों के विरोध-प्रदर्शन के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने संज्ञान लेते हुए डीईओ विजय कुमार लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. संचालनालय ने सवाल किया कि क्या कक्षा 4 के हिन्दी के प्रश्नपत्रों की तुलना कक्षा 4 के अन्य विषय प्रश्नपत्रों से यह ज्ञात नहीं हुआ था कि प्रश्नपत्र आपके द्वारा दिये गये प्रश्नपत्र की प्रति के अनुरूप मुद्रित नहीं है?
इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया था कि 2 बार परीक्षा तिथियों में संशोधन होने की वजह से मुद्रण द्वारा प्राप्त सीलबंद पैकेट के प्रश्न पत्र से ही परीक्षा आयोजित की गई थी. इस पर संचालनालय ने माना कि अधिकारी ने प्रश्नपत्र उनके द्वारा दिये गये प्रश्न पत्र की प्रति के अनुरूप मुद्रित नहीं है, फिर भी उन्होंने सुधार के लिए कोई कार्रवाई नहीं की. इस आधार पर उन्हें दोषी पाया.
अब जब गरियाबंद में भी मुद्दा उभर गया है, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और लोक शिक्षण संचालनालय क्या कार्रवाई करता है, इस पर सबकी नजर लगी हुई है. इसके पहले ही गरियाबंद डीईओ जगजीत सिंह धीर ने बताया कि गरियाबंद के अलावा अन्य 14 जिलों के लिए एक ही जगह से प्रश्न पत्र आया था. इस बयान से पूरा संचालनालय संदेह के दायरे में आ गया है, अब अगर कार्रवाई की जाती है तो बात दूर तलक जाएगी.
अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार–2025 से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारी-कर्मचारी सम्मानित, ज़ोन को मिली तीन प्रतिष्ठित शील्ड
बिलासपुर। भारतीय रेल द्वारा आयोजित 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार–2025 समारोह का आयोजन दिनांक 09 जनवरी 2026 को इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (यशोभूमि), द्वारका, नई दिल्ली में किया गया. केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर उत्कृष्ट सेवाओं के लिए रेल अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया.
इस प्रतिष्ठित समारोह में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के एक अधिकारी एवं एक कर्मचारी को अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार–2025 से सम्मानित किया गया. इसके साथ ही उत्कृष्ट समग्र प्रदर्शन के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को तीन प्रतिष्ठित शील्ड प्रदान की गईं, जिनमें ट्रैफिक ट्रांसपोर्टेशन शील्ड, रेल मदद शील्ड तथा उत्कृष्ट गुणवत्ता शील्ड शामिल हैं.
इस सम्मान समारोह में तरुण प्रकाश, महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे सहित संबंधित विभागों के विभागाध्यक्ष विशेष रूप से उपस्थित रहे. रेल मंत्री द्वारा यह सम्मान महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को प्रदान किया गया. यह उपलब्धि ज़ोन की उच्च परिचालन दक्षता, गुणवत्ता-उन्मुख कार्यसंस्कृति तथा यात्री-केंद्रित सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है.
समारोह में अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार–2025 के अंतर्गत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से सम्मानित रेलकर्मियों में दिलीप सिंह, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, नागपुर तथा
सांध्य प्रदीप चौबे, स्टेशन अधीक्षक, रायपुर शामिल थे, जिन्हें रेल मंत्री द्वारा व्यक्तिगत रूप से सम्मानित किया गया.
दिलीप सिंह, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, नागपुर को रेल संचालन, संरक्षा एवं डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया. उनके प्रयासों से परिचालन प्रक्रियाओं में आधुनिकता, पारदर्शिता एवं दक्षता को नई दिशा प्राप्त हुई है.
इसी क्रम में सांध्य प्रदीप चौबे, स्टेशन अधीक्षक, रायपुर को नया रायपुर में HPCL गति शक्ति कोचिंग टर्मिनल की न्यूनतम व्यवधान के साथ सफल कमीशनिंग सहित रेल संचालन में उनके सराहनीय योगदान के लिए अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार–2025 से सम्मानित किया गया. उनके कार्यों ने परियोजना निष्पादन एवं समन्वय में उत्कृष्ट मानक स्थापित किए हैं.
उत्कृष्ट सामूहिक प्रदर्शन के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को प्रदान की गई तीनों शील्ड ट्रैफिक ट्रांसपोर्टेशन शील्ड, रेल मदद शील्ड तथा
उत्कृष्ट गुणवत्ता (वर्कशॉप) शील्ड – मोतीबाग वर्कशॉप, नागपुर,
यह सम्मान दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कर्मचारियों की टीम भावना, परिचालन दक्षता, यात्री सेवा, संरक्षा, तकनीकी गुणवत्ता एवं निरंतर सुधार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.
यह सम्मान समारोह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा, पेशेवर उत्कृष्टता एवं टीम भावना को रेखांकित करता है तथा भारतीय रेल के सुरक्षित, कुशल एवं यात्री-हितैषी भविष्य के निर्माण की दिशा में उनके महत्वपूर्ण योगदान को सम्मानपूर्वक अभिव्यक्त करता है.
गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी नवा रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 में सुशासन एवं नवाचारों के लिए 5 विभागों एवं 5 जिलों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से अब छत्तीसगढ़ के सभी विभागों के 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जाएगी। इस पोर्टल के माध्यम से निर्माण की मंजूरी से लेकर बजट, मजदूरी, भुगतान, एमआईएस, स्ट्रक्चर लेवल सहित सभी पहलुओं की मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुड गवर्नेंस का उद्देश्य यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को बुनियादी सेवाओं के लिए भटकना न पड़े। पंचायतों में शुरू किए गए अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को आधार, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसी सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं। हमारी सरकार ने तकनीकी नवाचारों के माध्यम से नागरिकों तक सुशासन की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अनेक पहल की हैं। इसी क्रम में आज ई-प्रगति पोर्टल का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य की वृहद परियोजनाओं एवं योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। इस पोर्टल से योजनाओं की प्रगति का डेटा रियल-टाइम में उपलब्ध होगा। सभी विभागों, जिला प्रशासन तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे राज्य में ई-गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को योजनाओं का लाभ समय पर और सहज रूप से प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने सभी कलेक्टरों, सचिवों एवं संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति को नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद, अटल जी की अंत्योदय की अवधारणा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व से हमने सुशासन को गहराई से समझा है।



मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमने देश का पहला सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया है, जो सभी योजनाओं के समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन का केंद्र है। पिछले दो वर्षों में हमने 400 से अधिक नीतिगत सुधार किए, पुराने अनुपयोगी नियम-कानून समाप्त किए और कई में संशोधन किए। इन सुधारों से प्रदेशवासियों का जीवन सरल हुआ और प्रशासन अधिक कुशल बना। आज मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के माध्यम से 5 जिलों और 5 विभागों के नवाचारी प्रयासों को सम्मानित किया गया है। इससे अच्छा कार्य करने वाले अधिकारी प्रोत्साहित होंगे। आगामी वर्ष से 8 अलग-अलग क्षेत्रों में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिनमें ई-गवर्नेंस, सेवा वितरण, ग्रामीण और शहरी विकास जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में नवाचार और सुशासन की एक सशक्त संस्कृति विकसित हो रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए “पहल” और “प्रेरणा” योजनाएँ प्रारंभ की जा रही हैं। “पहल” से नए विचारों को सहयोग मिलेगा और “प्रेरणा” से सफल योजनाओं का विस्तार होगा। शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी प्रारंभ की जाएगी, जिससे शिकायत निवारण और जनभागीदारी मजबूत होगी। सेवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है और लोक सेवा गारंटी अधिनियम को LSG-2.0 के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बदलते दौर में तकनीक जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। इसलिए हमने डिजिटल संसाधनों की शक्ति को पहचानते हुए तकनीक को सुशासन का प्रमुख हथियार बनाया है। सभी नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ई-ऑफिस ने सरकारी कामकाज में गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की हैं। अब फाइलें हफ्तों-महीनों नहीं, बल्कि एक क्लिक पर आगे बढ़ती हैं। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो रही है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है। ई-ऑफिस मंत्रालय से प्रारंभ हुआ था और अब विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू हो चुका है। आगामी कुछ महीनों में इसे सभी संभागों और जिलों में भी लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मुख्य सचिव श्री विकास शील द्वारा ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाना एक सराहनीय पहल है, जिससे कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। बायोमेट्रिक उपस्थिति को भी चरणबद्ध तरीके से सभी कार्यालयों में लागू किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है, जिसके पीछे सुशासन सबसे बड़ा कारक है। डिजिटल भुगतान में भारत का विश्व में अग्रणी स्थान भी गुड गवर्नेंस का ही परिणाम है।
उन्होंने कहा कि खनिज परिवहन की परमिट व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया है, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगी है और विकास कार्यों के लिए संसाधनों की सुरक्षा हुई है। इसी तरह शासकीय खरीदी को जेम पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। उन्होंने अधिकारियों को खरीदी प्रक्रियाओं में समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रजिस्ट्री विभाग में की गई 10 क्रांतिकारी पहल से अब नागरिक घर बैठे ही रजिस्ट्री कर पा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले वर्ष 7.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से निवेशकों को तेजी से स्वीकृति और क्लियरेंस दिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव जाकर 41 लाख आवेदनों का निराकरण किया गया। यह जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण है।उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों के पत्रों और आवेदनों का समय पर निराकरण होना चाहिए। अच्छे प्रशासन के लिए संवाद, समन्वय और फीडबैक आवश्यक हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। सरकार के निर्णयों और उपलब्धियों का सही संचार भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अंजोर विजन के अंतर्गत 2030 तक के लक्ष्यों की समीक्षा कर प्रदेश को समृद्ध और विकसित राज्य बनाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव विकास शील ने पुरस्कार प्रक्रिया में भाग लेने वाली सभी टीमों को बधाई दी।
जिला श्रेणी के विजेता नवाचार
दंतेवाड़ा जिले की “ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण” पहल एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आई। इस नवाचार के माध्यम से मैनुअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर ब्लॉकचेन आधारित छेड़छाड़-रोधी प्रणाली लागू की गई, जिससे भूमि अभिलेख प्राप्त करने का समय हफ्तों से घटाकर कुछ ही मिनटों में संभव हो सका। इस पहल से दस्तावेज़ी धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त हुई और सेवा प्रदाय में अभूतपूर्व तेजी आई, जिसने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन के लिए एक नया मानक स्थापित किया।
जशपुर जिले की “निर्माण जशपुर” पहल ने यह दर्शाया कि एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग किस प्रकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बना सकती है। 16 विभागों की 7,300 से अधिक परियोजनाओं और 444 ग्राम पंचायतों को कवर करने वाली इस प्रणाली ने रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैग्ड सत्यापन और GIS आधारित योजना को संभव बनाया, जिससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और विलंब में उल्लेखनीय कमी आई।
मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में लागू संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार ने गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से विकसित इस पोषण-घन आहार के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों में 77.5 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि साक्ष्य-आधारित पोषण हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
गरियाबंद जिले की “हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप” ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने में तकनीक की भूमिका को सशक्त रूप से सामने रखा। AI आधारित ट्रैकिंग और रियल-टाइम अलर्ट व्यवस्था के माध्यम से मानव हताहतों की संख्या लगभग शून्य तक लाई गई, साथ ही फसल क्षति और मुआवजा बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई। राज्य के बाहर भी अपनाई जा चुकी यह पहल संघर्ष-संवेदनशील शासन का एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है।
नारायणपुर जिले का “इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल” आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में डेटा एकीकरण की उपयोगिता को दर्शाता है। रियल-टाइम, जियो-स्पेशियल और पूर्वानुमान आधारित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 से अधिक नियोजित अभियानों का संचालन संभव हुआ, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितिजन्य जागरूकता को मजबूती मिली।
विभागीय श्रेणी के विजेता नवाचार
इसी तरह विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग का “विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)” डेटा-आधारित शिक्षा शासन का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। यह AI सक्षम प्लेटफॉर्म 56,000 से अधिक विद्यालयों, 2.83 लाख शिक्षकों और 57.5 लाख विद्यार्थियों की निगरानी करता है, जिससे ड्रॉपआउट की प्रारंभिक पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना संभव हो सका है।
वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की “वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम” ने व्यवसाय सुगमता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। 16 विभागों की 136 सेवाओं को एकीकृत करते हुए इस प्रणाली ने अनुमोदन, प्रोत्साहन, शिकायत निवारण और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाया, जिससे विलंब कम हुआ और पारदर्शिता के साथ निवेशकों का विश्वास बढ़ा।
वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग की समग्र ई-गवर्नेंस सुधार पहल ने राजस्व संग्रह और अनुपालन व्यवस्था को सुदृढ़ किया। एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण, ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली और रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से विभाग ने ₹5,425 करोड़ का राजस्व अर्जित किया और पारदर्शिता तथा नियामक निगरानी के नए मानक स्थापित किए।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की “FDS 2.0 – ई-कुबेर डिजिटल भुगतान प्रणाली” ने मैनुअल चेक आधारित प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूर्णतः कैशलेस, RBI एकीकृत भुगतान व्यवस्था लागू की। इसके माध्यम से ₹1,776 करोड़ से अधिक के 18 लाख लेन-देन पूर्ण हुए, जिससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित वन क्षेत्रों में भी समय पर मजदूरी भुगतान, आजीविका सुरक्षा और पारदर्शी फंड प्रवाह सुनिश्चित हुआ।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा अंतर्गत लागू QR कोड आधारित सूचना स्वप्रकटीकरण व्यवस्था ने नागरिक-केंद्रित शासन को नई मजबूती दी। QR कोड के माध्यम से ग्रामीणों को वास्तविक समय की योजना जानकारी उपलब्ध कराकर इस पहल ने मध्यस्थों पर निर्भरता कम की और 11,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीजीपी अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, एससीएस गृह मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संचालक रजत बंसल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इन सभी नवाचारों के माध्यम से यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिणामों, प्रभाव और नागरिक विश्वास पर केंद्रित एक नई प्रशासनिक संस्कृति विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के अंतर्गत सम्मानित ये जिले और विभाग सुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और जनकल्याण के नए मानक स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धियाँ न केवल राज्य के प्रशासनिक तंत्र की क्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और भविष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि को भी सुदृढ़ करती हैं।
कांकेर में युक्तियुक्तकरण के तहत ज्वाइनिंग न देने पर 38 अतिशेष शिक्षक निलंबित, शिक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई
कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में युक्तियुक्तकरण के तहत अतिशेष शिक्षकों ने पूरा सत्र बीत जाने के बावजूद नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं किया। इस मामले में शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है। कांकेर डीईओ ने 38 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है, जिनमें 29 महिला शिक्षक शामिल हैं.
दरअसल, स्कूलों में शिक्षकों के समांतर समन्वय को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया की थी, जिसमें कई शिक्षक अतिशेष की श्रेणी में आए। विभाग ने सभी अतिशेष शिक्षकों को जुलाई 2025 तक नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जनवरी तक जिले के 39 शिक्षकों ने ज्वाइनिंग नहीं दी।
लगातार निर्देशों के बाद भी अतिशेष शिक्षकों ने नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की। आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने सख्ती बरतते हुए 38 शिक्षकों के निलंबन का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षकों में हड़कंप मच गया है।
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‘वीबी जी राम जी’ मुद्दे पर कांग्रेस के विरोध पर भाजपा का पलटवार, उज्ज्वल दीपक बोले—भ्रष्टाचार खत्म होने से कांग्रेस को हो रही तकलीफ
रायपुर। ‘वीबी जी राम जी’ के मुद्दे पर कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन पर भाजपा प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने सवाल किया है. उन्होंने पूछा कि इस मामले में कांग्रेस को तकलीफ क्यों? भ्रष्टाचार से मुक्त किया जा रहा है. इससे कांग्रेस को तकलीफ क्यों? इसमें जब मजदूरों को रोजगार मिलेगा, डीबीटी के माध्यम से पैसा आएगा, तब कांग्रेस का जाल टूट जाएगा. समय बताएगा के ये बिल कितना मजबूत है.
भाजपा प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने पत्रकार वार्ता में कहा कि कांग्रेस भगवान राम को लेकर उलूल-जुलूल आरोप लगा रही है. अंग्रेजी में नाम हो या किसी और नाम से हो, कांग्रेस भगवान राम को नहीं मानती है. भगवान के कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक बिल पर बयानबाजी कर रही है. नए बिल की नीति को लेकर नहीं, पूरा विरोध नाम को लेकर है. कांग्रेस को इस नाम से क्या तकलीफ है.
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि क्या 100 कार्य दिवस को बढ़ाकर 125 किया गया है. क्या कांग्रेस को उससे तकलीफ है? ये जो 60 दिन की छुट्टी है, वो हर राज्य सरकार इस बिल को तय कर सकता है. इसकी राज्यों को आजादी है. जो काम पहले 15 दिन के अंदर होता था, वो अब 60 दिन में हो जाएगा. 3 राज्यों में कांग्रेस की सरकार है. 20 राज्यों से ज्यादा बीजेपी की सरकार है. तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में विरोध क्यों?
10 जनवरी से इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदर्शन पर बीजेपी प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा कि कांग्रेस के पास मुद्दों की कमी है. कई सारे कांग्रेस के गुट बने है. कांग्रेस में आपस में ही नीति बन रही है. क्या इसमें प्रदर्शन विरोध करे या नहीं? वहीं क्या मनरेगा को लेकर राज्य सरकार द्वारा जांच करवाने के सवाल पर कहा कि सोशल ऑडिट में बात सामने आई है. छत्तीसगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया है. ये कॉमन बात है, जो पूरे देश में देखी गई है. सच्चाई को स्वीकारना ज्यादा जरूरी है.
वहीं चौथी कक्षा की अर्द्धवार्षिक परीक्षा में अंग्रेजी के प्रश्नपत्र में भगवान राम नाम आने पर मचा भारी बवाल हुआ है. उज्वल दीपक ने कहा कि बेहद निंदनीय घटना हुई है. डीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. हिंदू धर्म के खिलाफ किसी ने ये किया है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि किसी और धर्म के भगवान का नाम होता, तो सोशल मीडिया में ये प्रकरण छप चुका होता. छत्तीसगढ़ में भांजे-भाजा का यहां विशेष सम्मान होता है. जो भी दोषी होगा, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी.
रेलवे लाइन निर्माण की प्रक्रिया में तेजी : मुआवजा मिलने के बाद भी नहीं हटाया अवैध कब्जा, प्रशासन ने चलाया बुलडोजर
धमतरी। नया रायपुर से धमतरी नई रेलवे लाइन निर्माण कार्य को गति देने के लिए तहसील प्रशासन ने शुक्रवार को धमतरी जिले के ग्राम सेहराडबरी के पास बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की। तहसीलदार कुसुम प्रधान के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। जानकारी के अनुसार रेलवे विभाग द्वारा मुआवजा भुगतान किए जाने के बावजूद अधिग्रहित भूमि पर करीब 20 लोगों ने अवैध कब्जा नहीं हटाया था, जिससे रेलवे पटरी निर्माण कार्य बाधित हो रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की।
कार्रवाई के दौरान नंदलाल साहू, प्रभानंद साहू, पतिराम साहू, संजय साहू सहित कुल 13 लोगों की आंशिक रूप से प्रभावित भूमि पर बुलडोजर चलाया गया। इन मामलों में भूमि का केवल वह हिस्सा रेलवे लाइन के दायरे में आ रहा था, जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया गया। वहीं सात लोगों की जमीन पूरी तरह रेलवे परियोजना की जद में आ रही है। इन काबिजों ने प्रशासन से दो दिन का समय मांगा है, ताकि वे अपना घरेलू सामान और अन्य सामग्री हटा सकें। प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें अस्थायी रूप से दो दिन की मोहलत प्रदान की है।
बुलडोजर कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। प्रशासन का कहना है कि निर्धारित समय सीमा के बाद शेष कब्जों को भी हटाकर रेलवे लाइन निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू कराया जाएगा।
नेशनल जंबूरी की व्यवस्थाओं से प्रभावित हुए स्काउट-गाइड के मुख्य राष्ट्रीय कमिश्नर, बोले—छत्तीसगढ़ ने एक महीने में रचा मिसाल
रायपुर। भारत स्काउट एंड गाइड के मुख्य राष्ट्रीय कमिश्नर डॉ. केके खंडेलवाल ने बालोद के ग्राम दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर- रेंजर जम्बूरी में की गई व्यवस्थाओं की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने एक महीने के भीतर इतनी बेहतरीन व्यवस्था करके एक मिसाल कायम की है।
उन्होंने कहा कि मुझे अत्यंत गर्व के साथ यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत का प्रथम रोवर एंड रेंजर जम्बूरी का आयोजन बालोद के ग्राम दुधली में किया जा रहा है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह युवा शक्ति का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में देशभर से रोवर एंड रेंजर्स, ट्रेनर्स, स्काउट्स, वालंटियर्स भाग ले रहे हैं। मैंने स्वयं यहां की व्यवस्थाओं, एडवेंचर्स, भोजन व्यवस्था, टॉयलेट और प्रतिभागियों के रुकने के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया है। हर स्तर पर अनुशासन, सुरक्षा और उत्कृष्ट व्यवस्था स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। मैं छत्तीसगढ़ राज्य भारत स्काउट गाइड का हार्दिक अभिनंदन करता हूं।
सच्चे स्काउट में दिखता है समर्पण, अनुशासन और सेवा भावना
डॉ. खण्डेलवाल ने कहा कि जम्बूरी के उद्घाटन का सुंदर आयोजन था। यह ऐतिहासिक जंबूरी है। इसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमन डेका ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में जिस प्रकार से व्यवस्थाओं की तारीफ की। स्काउट एंड गाइड की सेवा भावना और समर्पण की प्रसंशा की। डॉ. खण्डेलवाल ने कहा कि भारत स्काउट एंड गाइड का अनुकरणीय सेवा का इतिहास रहा है। जिस कार्य के लिए सामन्यतः दो साल का समय लगता है। छत्तीसगढ़ ने इस कार्य को एक महीने के समय में किया है। यह समर्पण, अनुशासन और सेवा भावना केवल सच्चे स्काउट में ही देखने को मिलता है।
नया रायपुर सेक्टर-28 की मिनी मार्केट में भीषण आग, कई दुकानें जलकर खाक
रायपुर। नया रायपुर के सेक्टर-28 स्थित मिनी मार्केट में अचानक आग भड़क उठी. आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई. देखते ही देखते आग ने कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया. आग की चपेट में किराना स्टोर, कपड़ों की दुकान सहित कई अन्य दुकानें आकर जलकर खाक हो गईं.
सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने में जुट गया है. दमकल विभाग की दो गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं और आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है.
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना दिए जाने के करीब एक घंटे बाद दमकल की टीम मौके पर पहुंची, जिससे नुकसान और बढ़ गया. इस देरी को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और प्रशासन द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
बलौदाबाजार-भाटापारा कलेक्टर दीपक सोनी को केन्द्र में मिली नियुक्ति
रायपुर। बलौदाबाजार-भाटापारा कलेक्टर दीपक सोनी को केन्द्र में पोस्टिंग मिली है. केंद्र सरकार ने उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में डायरेक्टर बनाया है. नियुक्ति की अवधि पांच वर्ष अथवा आगामी आदेश तक है.
बलौदाबाजार-भाटापारा से पहले दंतेवाड़ा कलेक्टर रह चुके वर्ष-2011 बैच के आईएएस अफसर दीपक सोनी की प्रतिनियुक्ति राज्य सरकार की सहमति पर दी गई थी. दिल्ली में उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में निदेशक के तौर पर नियुक्त किया गया है. राज्य सरकार द्वारा वर्तमान पद से मुक्त किए जाने के तीन सप्ताह के भीतर उन्हें नए पद पर ज्वाइन करना होगा.

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट: मुख्यमंत्री साय की बड़ी घोषणा, मंडी शुल्क को सालभर के लिए किया शून्य…
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के निजी रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात दी है। मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई है। इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान सीएम साय ने की घोषणा से चावल निर्यातकों और किसान दोनों के लिए बड़ी सौगात है। साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दंतेवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।

छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन में 12 देशों के बायर्स तथा 6 देशों के एम्बेसी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ को सोच-समझकर “धान का कटोरा” कहा था और आज प्रदेश इस नाम की सार्थकता सिद्ध कर रहा है। चावल छत्तीसगढ़ के खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसे चावलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है। छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल भी सरकार ने दी थी, छूट दिसंबर 2025 में मंडी शुल्क में छूट की अवधि खत्म हो रही थी।

छत्तीसगढ़ से 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का किया जा रहा है निर्यात
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से वर्तमान में लगभग 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। सरकार निर्यातकों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और इस वर्ष भी खरीदी में वृद्धि की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
मुख्यमंत्री ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया अवलोकन
इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, क्षेत्र विशेष में उत्पादित प्रजातियों, चावल उत्पादन में हो रहे नवाचारों तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शासकीय स्टालों का भी निरीक्षण कर चावल के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारों से चावल की पैदावार में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपिडा के चेयरमेन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल, राम गर्ग, देश भर से आये मिलर्स, चावल व्यवसायी एवं स्टेक होल्डर्स उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में हुए शामिल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विगत दिवस राजधानी रायपुर में रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर द्वारा आयोजित कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। व्यापार जगत की बेहतरी और ग्राहकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जीएसटी दरों में कटौती की गई, जिसका सीधा लाभ जनता को मिल रहा है। जीएसटी रिफॉर्म्स से कई वस्तुओं की कीमत में कमी आई है। जीएसटी की प्रक्रिया को काफी सुगम बनाया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई उद्योग नीति को देश-विदेश में सराहा जा रहा है। लगभग आठ लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हमें प्राप्त हो चुके हैं। हर सेक्टर में हमें ये निवेश प्रस्ताव मिले हैं जिनपर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश में रोजगार सृजन पर हमारा विशेष फोकस है। नई उद्योग नीति में एक हजार से अधिक रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमियों को विशेष इंसेंटिव प्रदान करने के प्रावधान किए गए हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में रोटरी क्लब और उद्यमियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। रोटरी क्लब उद्यम के साथ ही परोपकार का भी कार्य करता है। क्लब द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्य बहुत प्रशंसनीय हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि यह एक्सपो मध्य भारत का सबसे बड़ा एक्सपो है, जिसमें 300 से अधिक स्टॉल हैं। इस विशाल आयोजन का लाभ निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ को मिलेगा।
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि रोटरी क्लब द्वारा आयोजित इस एक्सपो का यह 16वां वर्ष है। रोटरी क्लब सेवा से जुड़ी एक संस्था है। रोटरी क्लब द्वारा पोलियो निर्मूलन के कार्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में मोबाइल आई क्लीनिक की एम्बुलेंस का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न सेक्टर्स में विशिष्ट योगदान दे रही 25 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया और इन महिला उद्यमियों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, राम गर्ग सहित रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर के सदस्यगण व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।
प्रवासी भारतीय दिवस पर रायपुर में पुस्तकों का विमोचन, प्रवासी छत्तीसगढ़ियों का सम्मान
रायपुर। भारतीय प्रवासी दिवस पर शंकर नगर स्थित विधानसभा अध्यक्ष निवास में विमोचन व सम्मान समारोह आयोजित किया गया. इसमें प्रवासी भारतीयों पर लिखी दो पुस्तकों का विमोचन और 10 प्रवासियों का सम्मान किया गया. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में प्रवासी छत्तीसगढ़ी के इतिहास और वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई.
प्रवासी छत्तीसगढ़िया बंधुत्व मंच द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दौरान रोजी-रोटी की तलाश में असम पहुंचे छत्तीसगढ़ के लोगों की चर्चा हुई, कि किस तरह से उन्होंने अपनी परंपरा-संस्कृति को सहेजे हैं.
गर्व है छत्तीसगढ़िया देश में नहीं विदेश में बना रहे बड़ा नाम – रमन सिंह
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हमें गर्व है कि आज छत्तीसगढ़ की धरती से निकलकर छत्तीसगढ़िया देश ही नहीं देश के बाहर भी बड़ा नाम बना रहे हैं. मैंने अपनी विदेश यात्राओं के दौरान इसे बखूबी देखा भी है. लेकिन जो काम अशोक तिवारी और उनकी संस्था कर रही है, वह बड़ा काम है. सैकड़ों साल पहले अलग-अलग देशों में जाकर बस छत्तीसगढ़ियों का डेटा तैयार करना, उन्हें जोड़ना और इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करना. मैं इसके लिए उन्हें बहुत बधाई देता हूँ. मैं यह भी कहता हूँ, इसमें जो भी मदद की आवश्यकता है, वो मैं करूंगा.
मेरे पूर्वज भी काम की तलाश में गए बाहर- चरण दास महंत
कार्यक्रम में मौजूद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने बताया कि मेरे पूर्वज भी छत्तीसगढ़ के बाहर काम की तलाश में गए थे. मेरे परदादा तो असम गए और वहीं बस गए थे. बाद में दादा भी गए और वहीं के होके रह गए. हालांकि, वे असम में कहाँ रहे और बाद कि स्थिति क्या रही इसकी जानकारी नहीं है. ऐसे ही लाखों लोग छत्तीसगढ़ से निकलकर आज देश के कई राज्यों और दूसरे देशों में भी हैं.
अमेरिका में मिले जांजगीर क्षेत्र के लोग
अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों की यात्रा में जब गया तो मुझे छत्तीसगढ़ के अपने लोग मिले. अमेरिका में मेरे अपने जांजगीर क्षेत्र के लोग मिले. वास्तव में अशोक तिवारी इस दिशा में जो कार्य कर रहे हैं वह बहुत ही सराहनीय है. सरकार को इस पर काम करने की जरूरत है. मैं भी अपनी ओर से पूरी मदद करूंगा. हमें इस पर अभी व्यापक शोध की जरूरत है.
8 सालों से प्रवासी छत्तीसगढ़ियों के बीच जा रहे अशोक तिवारी
मंच के अध्यक्ष अशोक तिवारी पिछले 8 साल से असम में प्रवासी छत्तीसगढ़ी लोगों के बीच जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ से प्रवासन का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है. ब्रिटिश शासन के दौरान बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़िया लोग चाय बागानों में काम करने ले जाए गए. असम में रहने वाली सातवीं-आठवीं पीढ़ी आज भी छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संजोए हुए है. वहां वे अपने विविध त्योहारों का आयोजन भी करते हैं.

उन्होंने कहा कि अब छत्तीसगढ़ से बाहर जाने वाले लोग केवल मजदूर नहीं हैं. पढ़े-लिखे और दक्ष युवा अमेरिका, यूरोप और एशिया में तकनीक, शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. 2017 के बाद से छत्तीसगढ़ में प्रवासी समाज को संगठित रूप से समझने और जोड़ने की शुरुआत हुई, जो अब एक सतत प्रक्रिया बन चुकी है. यह आयोजन प्रवासी नागरिकों से जोड़ने का माध्यम बना है.
प्रवासी मित्र सम्मान से किया गया सम्मानित
छत्तीसगढ़िया आज देश के विभिन्न राज्यों में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप, चीन, ब्रिटेन, अर्जेन्टीना जैसे अनेक देशों में बस गए हैं. प्रवासी छत्तीसगढ़ियां वहां अपनी भूमिका चिकित्सा, शिक्षा, राजनीति, उद्योग-व्यापार में बखूबी निभा रहे हैं. यही नहीं वे वहां के संस्कृति को शिरोधार्य करने के साथ-साथ अपनी छत्तीसगढ़ियां संस्कृति को भी सहेजे हुए हैं.
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सहेज कर रखने वाले अमेरिका के हर नारायण शुक्ला, असम के रोहित साहू, रूपा सिंह, मिलन सतनामी व कृष्णा साहू, झारखंड के पुरंदर सिंह व भरत वर्मा, अर्जेंटीना के राउल ऋषि वर्मा, महाराष्ट्र के विवेक सारखा का सम्मान किया गया.
रायपुर रेल मंडल में ब्लॉक के चलते 11–12 जनवरी को कई मेमू व पैसेंजर ट्रेनें प्रभावित
रायपुर। रेल यात्रियों की एक बार फिर से मुश्किलें बढ़ गई हैं. अगर आप भी आने वाले दिनों में ट्रेन से सफर करने वाले हैं तो यह खबर आपके काम की साबित हो सकती है. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के रायपुर रेल मंडल अंतर्गत हथबंद-तिल्दा नेवरा सेक्शन में रोड अंडरब्रिज निर्माण होना है, जिसके लिए गर्डर डी-लॉन्चिंग का काम किया जाना है. विकास कार्य के चलते रेलवे ने 11 और 12 जनवरी को ट्रैफिक कम पावर ब्लॉक लेने का फैसला किया है, जिसके कारण रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और इतवारी के बीच चलने वाली कई मेमू और पैसेंजर ट्रेनें प्रभावित रहेंगी.
ये गाड़ियां रहेंगी रद्द
11 जनवरी
गाड़ी संख्या 68728 रायपुर-बिलासपुर मेमू पैसेंजर.
गाड़ी संख्या 68719 बिलासपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर .
गाड़ी संख्या 68733 गेवरा रोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर.
गाड़ी संख्या 68734 बिलासपुर-गेवरा रोड मेमू पैसेंजर.
गाड़ी संख्या 58203 कोरबा-रायपुर पैसेंजर.
गाड़ी संख्या 58205 रायपुर-इतवारी पैसेंजर.
12 जनवरी
गाड़ी संख्या 58206 इतवारी-रायपुर पैसेंजर.
गाड़ी संख्या 58202 रायपुर-बिलासपुर मेमू पैसेंजर .
बीच में समाप्त होने वाली गाड़ियां
झारसुगुड़ा-गोंदिया मेमू (68862): 11 जनवरी को झारसुगुड़ा से चलने वाली यह ट्रेन बिलासपुर में ही समाप्त हो जाएगी. यह बिलासपुर और गोंदिया के बीच रद्द रहेगी. गोंदिया-झारसुगुड़ा मेमू (68861): 11 जनवरी को यह गाड़ी गोंदिया के स्थान पर बिलासपुर से ही झारसुगुड़ा के लिए रवाना होगी.