प्रदेश
CGPSC घोटाला मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक सहित पाँच गिरफ्तार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में चर्चित CGPSC घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्यवाई की है। शुक्रवार को सीबीआई ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक को गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ चार और आरोपियों को भी हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित और पीएससी के पूर्व सचिव के बेटे सुमित ध्रुव, निशा कोसले, दीपा आदिल और जीवन किशोर ध्रुव के नाम शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई को लंबे समय से इस घोटाले में कई गड़बड़ियों के सबूत मिल रहे थे। आरती वासनिक पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया के दौरान अनियमितताएं कीं और कुछ उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाया। वहीं सुमित ध्रुव के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया में अपनी स्थिति का अनुचित फायदा उठाया। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश में प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें रिमांड पर भेजा गया है। सीबीआई का कहना है कि मामले की आगे की जांच जारी है और जल्द ही और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि बीते महीने छत्तीसगढ़ लोक सेवा परीक्षा-2021 (CGPSC) में चयनित निर्दोष अभ्यर्थियों को बिलासपुर हाईकोर्ट ने राहत दी थी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि जिन उम्मीदवारों के नाम चार्जशीट में शामिल नहीं हैं और जिन पर सीबीआई की जांच में कोई आपत्ति नहीं आई है, उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपे जाएं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए थे कि इन नियुक्तियों को 10 मई 2024 तक पूरी कर लिया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से उन अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी जो अब तक नियुक्ति के इंतजार में थे। साथ ही, यह संदेश भी जाएगा कि चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
CGPSC घोटाला राज्य में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इस घोटाले से प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठे थे और कई अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया था। अब सीबीआई की ताजा कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि इस मामले में जल्द निष्कर्ष निकलेगा और निर्दोष अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा।
साय कैबिनेट के मंत्रियों के जिलों के प्रभार में बड़ा बदलाव, देखें आदेश
रायपुर। तीन मंत्रियों की ताजपोशी के बाद अब मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव किया गया है। तीन मंत्रियों के प्रभार में बदलाव किया गया है, जबकि तीन नये मंत्री को अब जिलों का प्रभार दिया गया है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के पास अब दुर्ग, बालोद, मोहला मानपुर-अंबागढ़ चौकी और बस्तर का प्रभार रहेगा। वहीं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के पास सिर्फ बलौदाबाजार भाटापारा का प्रभार होगा। लक्ष्मी राजवाड़े के पास बलरामपुर रामानुजगंज का प्रभार रहेगा।
जबकि नये मंत्रियों में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को राजनांदगांव का, गुरु खुशवंत साहेब को सक्ती का और राजेश अग्रवाल को गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले का प्रभार दिया गया है।


वायरल ऑडियो पर पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश से पीसीसी चीफ बैज ने की बातचीत, बोले- बदनाम करने के लिए जानबूझकर जारी किया ऑडियो…
रायपुर। पामगढ़ विधायक शेषराज हरवंश की रेत माफिया से बातचीत का कथित ऑडियो वायरल होने के बाद प्रदेश में सियासी हचलच मची हुई है. इस बीच छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पामगढ़ विधायक से बात करने के बाद मीडिया के सामने पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जमाना है, इसमें छेड़छाड़ की गई है. कांग्रेस विधायक को बदनाम करने के लिए यह ऑडियो जारी किया गया है.
वोट चोरी पर पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जिस तरह से हमारे नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची की गड़बड़ी को फिर से उजागर किया है, महाराष्ट्र और कर्नाटक में फर्जी मतदाता को लेकर जो पीसी करके और मतदाताओं के नाम काटे जाने को लेकर उन्होंने पीसी की.
बैज ने एक मोबाइल से 12 मिनट में 14 मतदाताओं के नाम काटे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इन सबको हमारे नेता राहुल गांधी ने सामने लाया. राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और बीजेपी के गठबंधन को उजागर करने का काम किया है. उन्होंने कहा कि आज बीजेपी के मंत्री नेता सत्ता के नशे में मदहोश है. कार्यकर्ताओं को कीड़ा-मकोड़ा समझते हैं. मंत्री ओपी चौधरी चिकित्सा विभाग के लोगों से मिले तक नहीं. यह उपेक्षा का हाल है.
बढ़ते बिजली बिल पर पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बिजली बिल से जनता परेशान हो चुकी है. पहले जहां बिल पांच रुपए आता था, वहां अब 15 रुपए आता है. इस तरह से दोगुना तीन गुना बिजली का बिल आ रहा है. एक तरफ महतारी वंदन का एक हजार देकर दूसरी तरफ महतारी वंदन का दो हजार रुपए यह सरकार ले रही है. आने वाले समय में जनता की नाराजगी देखने को मिलेगी.
करोड़ों रूपए की जीएसटी चोरी का खुलासा: 170 से अधिक बोगस फर्म बनाकर की जीएसटी चोरी
रायपुर। राज्य जीएसटी विभाग ने जीएसटी एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस नेटवर्क तथा जीएसटी प्राईम पोर्टल का उपयोग करके बोगस फर्म और बोगस बिल तैयार करने वाले सिंडिकेट का पता लगाया है। इसका मास्टर माइंड मो. फरहान सोरठिया है, जो जीएसटी के कर सलाहकार के रूप में कार्य करता था। इस सिंडिकेट के कारण राज्य को प्रतिमाह करोड़ों रूपये के कर राजस्व का नुकसान होता था।

राज्य जीएसटी की बी.आई.यू. टीम इस प्रकरण पर एक माह से कार्य कर रही थी। मास्टर माइंड मो. फरहान सोरठिया के ऑफिस में 12 सितंबर को जांच की गयी। जांच के दौरान यहां से 172 फर्मों के बारे में जानकारियां मिली। फरहान ने अपने 5 ऑफिस स्टॉफ को फर्मों का पंजीयन कराने, रिटर्न फाईल करने और ई-वे बिल तैयार करने के लिये रखा था। इसके अलावा मास्टर माइंड के आफिस से बोगस पंजीयन के लिये किरायानामा, सहमति पत्र, एफिडेविट तैयार करने के भी साक्ष्य मिले हैं।
26 बोगस फर्मों से ही 822 करोड़ का ई-वे बिल जनरेट किया गया, जबकि रिटर्न में 106 करोड रूपये का ही टर्नओव्हर दिखाया गया है। केवल इन फर्मों से ही राज्य को 100 करोड़ रूपये के जीएसटी का नुकसान होने का प्रारंभिक आंकलन है। यहां से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार राज्य के भीतर और पंजाब, असम, मणिपुर, ओडिसा में भी पंजीयन लिया गया है। पंजीयन के लिए बोगस दस्तावेज जैसे किरायानामा एवं सहमति पत्र भी तैयार किये जाते थे। इन फर्मों के माध्यम से बोगस सप्लाई बिल और ई-वे बिल जारी किए जा रहे थे।
मो. फरहान के बोगस फर्मों से संबंधित दस्तावेज छुपाये जाने की सूचना पर विभाग ने 17 सितंबर को फरहान के चाचा मो. अब्दुल लतीफ सोरठिया के आवास में सर्च (जांच) किया गया। वहां अधिकारियों को 1 करोड़ 64 लाख रूपये के नोट और 400 ग्राम सोने के 4 बिस्किट मिले। विभाग के अधिकारियों ने इसे जब्त कर के आयकर विभाग को सूचना दे दी है।
जीएसटी अधिकारियों द्वारा इन फर्मों से करोड़ों रूपए के जीएसटी फ्रॉड की राशि की गणना की जा रही है। इस प्रकरण में कई ब्रोकर, स्क्रैप डीलर और इनपुट टैक्स क्रेडिट के लाभ लेने वाली कम्पनियाँ भी विभाग के जांच के दायरे में है। राज्य कर विभाग द्वारा मामले की गहन जांच की जा रही है और आगे की विधिक कार्यवाही प्रगति पर है।
विधायक अजय चंद्राकर का कांग्रेस साधा निशाना : कहा-
रायपुर। भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर का आबकारी समेत अन्य घोटालों को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल में हुए तमाम घोटालों को लेकर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ महतारी के चीरहरण का काम किया. इन घोटालों में कांग्रेस नेताओं के नाम दिख रहे हैं. जांच को प्रभावित करने के लिए कांग्रेस संवैधानिक संस्था पर आरोप लगा रही है.
SIR कराने के निर्णय का स्वागत
छत्तीसगढ़ में SIR की प्रक्रिया शुरू होने को लेकर विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि देशभर में SIR की शुरुआत हो चुकी है. निर्वाचन के SIR का निर्णय को स्वागत करता हूं. SIR होने से लोगों का काम आसान होगा. वहीं CGPSC घोटाला मामले में विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस के पांच साल के घोटाले याद करने में परेशानी होती है.
कांग्रेस पहले अपना घर संभालें : विधायक चंद्राकर
पामगढ़ विधायक के वायरल ऑडियो क्लिप मामले पर विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस को हर बात में चोरी दिख रही है. जब वह स्पष्टीकरण दे रहीं थी कांग्रेस का एक आदमी साथ नहीं था. उन्होंने ना बीजेपी और ना प्रशासन पर कोई आरोप लगाया है. जबकि कांग्रेस पर उन्होंने आरोप लगाया. कांग्रेस को पहले अपना घर संभालना चाहिए. वायरल ऑडियो की जांच होनी चाहिए.
कांग्रेस एक्टिव हुई और शेषराज का ऑडियो हुआ वायरल : MLA चंद्राकर
प्रदेश में वोट चोर गद्दी छोड़ अभियान से विपक्ष के फिर से एक्टिव होने के सवाल पर विधायक चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस एक्टिव हो गई और शेषराज हरवंश का ऑडियो आ गया. कांग्रेस एक्टिव हुई इसलिए नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष को चुन रही है.
CGPSC घोटाले पर विधायक चंद्राकर का बड़ा बयान
सीजीपीएससी घोटाला मामले पर भाजपा वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने बड़ा बयान दिया है. विधायक ने कहा कि कांग्रेस के पांच साल के घोटाले याद करने में परेशानी होती है. सोनवानी के खिलाफ उन्होंने शासन स्तर पर जांच करवाई थी. जांच खत्म हुई तब भ्रष्टाचार की बुनियाद डाली गई. छग की पूरी रीढ़ को प्रभावित करने का षड्यंत्र किया गया है.
जल्द खत्म हो सकती है NHM कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले एक महीने से जारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के खत्म होने के आसार नज़र आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में कर्मचारियों की 6 प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई है। माना जा रहा है कि विभागीय आदेश जारी होते ही हड़ताल समाप्त हो जाएगी और कर्मचारी काम पर लौट आएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि विभागीय अधिकारियों और NHM कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है। सरकार ने ग्रेड पे लागू करने और जुलाई 2023 से वेतन वृद्धि का आदेश निकालने पर सहमति दी है। इसके अलावा कर्मचारियों को हर साल 30 दिनों का वैतनिक अवकाश (पेड लीव) देने, 5 लाख रुपये तक का कैशलेश चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने और वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है।
कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों ने बैठक के बाद कहा कि सरकार की ओर से लिखित आदेश जारी होते ही हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया जाएगा। संघ का कहना है कि लंबे समय से ये मांगे लंबित थीं, जिन पर अब जाकर ठोस कदम उठाए गए हैं। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि वे जल्द से जल्द स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य करने के पक्ष में हैं, लेकिन उन्हें सरकार से आधिकारिक आदेश का इंतजार है।
इस हड़ताल के कारण प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही थीं। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग ठप हो गए थे। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ पर अतिरिक्त भार पड़ रहा था। ऐसे में हड़ताल खत्म होने की संभावना मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच बनी सहमति से स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जल्द सामान्य होगी। इसके साथ ही यह समझौता भविष्य में कर्मचारियों और सरकार के बीच बेहतर संबंधों की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
सरकार का कहना है कि आदेश जारी करने की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है और कुछ ही दिनों में कर्मचारियों को लिखित आश्वासन मिल जाएगा।
CBI ने CGPSC घोटाले में 5 और आरोपियों को कोर्ट में किया पेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के परीक्षा घोटाले में सीबीआई ने बड़ी कार्यवाही करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने CGPSC के पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और सुमित ध्रुव, जो कि डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित पीएससी के पूर्व सचिव के बेटे हैं को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में निशा कोसले, दीपा आदिल, और जीवन किशोर ध्रुव शामिल हैं। सभी पांच आरोपी CGPSC परीक्षा में अनियमितताओं और घोटाले में शामिल पाए गए हैं। सीबीआई ने इनके खिलाफ जांच तेज कर दी है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
ये कार्यवाही सीबीआई द्वारा छत्तीसगढ़ में चल रही जांच के तहत की गई है इस मामले में अब तक कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं और मामले की गहन जांच जारी है। बता दें कि छत्तीसगढ़ के इस बड़े घोटाले में गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है ।
पीएम सूर्यघर से सूरज देगा बिजली, बदलेगा जिंदगी का हर कोना
रायपुर। देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और हर घर तक स्वच्छ, सस्ती एवं निरंतर बिजली पहुँचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल नागरिकों को बिजली बिल से हमेशा के लिए राहत दिला रही है, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी क्रांतिकारी योगदान दे रही है। छत्तीसगढ़ में इस योजना का क्रियान्वयन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में अत्यंत प्रभावी और संवेदनशील ढंग से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा को अपनाने की गति तेज हुई है।
देश की “पावर कैपिटल” कहलाने वाले कोरबा जिले में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का प्रभाव विशेष महत्व रखता है। यहाँ अनेक परिवार इस योजना का लाभ उठाकर हर महीने बचत कर रहे हैं और बिजली बिल आने जाने के झमेले से मुक्त हो रहे हैं। इन्हीं में से एक प्रेरक उदाहरण हैं नकटीखार, कोरबा निवासी रंजीत कुमार है, जिन्होंने अपने परिवार के जीवन में ऊर्जा क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया है।
रंजीत कुमार जो एसईसीएल, कुसमुंडा में डंपर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं, मेहनतकश व्यक्ति हैं। हर महीने आने वाला बिजली बिल, परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें और बच्चों की पढ़ाई के खर्चों के बीच बिजली बिल अक्सर उनके बजट को बिगाड़ देते थे। यही कारण था कि जब प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत आवेदन कर इसका लाभ उठाने का निश्चय किया। दो माह पहले आवेदन करके उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल सिस्टम लगवाया। जिसकी कुल लागत लगभग 2 लाख 10 हजार रुपए रही, 78 हजार रुपए केंद्र सरकार की सब्सिडी पहले ही मिल चुकी है। शेष राशि में उन्होंने सस्ती व आसान दर पर लोन लेकर तथा कुछ नकद भुगतान देकर किया। सिर्फ कुछ हफ्तों में ही यह निवेश उनके जीवन के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुआ। पहले जहां उनके घर का बिजली बिल हर महीने एक हजारों रुपए तक पहुँच जाया करता था, वहीं अब सौर ऊर्जा से चल रहे घर का मासिक बिल मात्र 130 रुपए आ रहा है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण की भी बड़ी मित्र है। सौर ऊर्जा से न केवल कोयला और डीज़ल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होती है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी भारी कमी आती है। कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में, जहाँ कोयला आधारित बिजली उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, वहां सौर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग पर्यावरण संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान है। परिवारों को बिजली बिल से मुक्तिमिल रही है, घरों में रोशनी और उपकरणों का संचालन संभव हो रहा है, लोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।
श्री कुमार और उनके परिवार ने बताया “अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। सौर पैनल ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है। बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होती और घर के उपकरण भी बिना रुकावट चलते हैं।
आज उनका घर न केवल रोशन है बल्कि ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक आदर्श भी बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के सशक्त क्रियान्वयन से आमजन का जीवन बदल रहा है। यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अब तक बिजली का स्थाई उपाय ढूंढ रहें थे। पीएम सूर्यघर योजना ने उन्हें आत्मनिर्भरता, आर्थिक मजबूती और स्वच्छ ऊर्जा की राह दिखाई है।
सिविल जज भर्ती में बार काउंसिल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, याचिकाएं की गई खारिज
रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती 2023-24 से जुड़ी पात्रता शर्तों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की खंडपीठ ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया उसी नियमावली के अनुसार होगी, जो विज्ञापन की तारीख को प्रभावी थी.
23 दिसंबर 2024 को जारी विज्ञापन में स्पष्ट उल्लेख था कि अभ्यर्थी के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री के साथ-साथ एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत राज्य बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन अनिवार्य है.
याचिकाकर्ताओं ने दिया यह तर्क
प्रियंका ठाकुर, सुधांशु सैनिक सहित कई उम्मीदवारों ने याचिकाएं दायर की थीं. उनका कहना था कि राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा निर्धारित यह शर्त संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती है. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि, लोक अभियोजन अधिकारी अदालत में वकीलों की तरह ही कार्य करते हैं, लेकिन सरकारी नौकरी के कारण वे बार काउंसिल में नामांकन नहीं करा पाते. इसी तरह अन्य सरकारी सेवा में कार्यरत विधि स्नातक भी रजिस्ट्रेशन से वंचित रहते हैं. सुप्रीम कोर्ट के दीपक अग्रवाल बनाम केशव कौशिक मामले और अन्य निर्णयों में अभियोजन अधिकारियों को वकीलों के समकक्ष माना गया है. 21 फरवरी 2025 के संशोधित विज्ञापन में सरकारी कर्मचारियों को आयु सीमा में छूट दी गई है, लेकिन रजिस्ट्रेशन की शर्त पर कोई रियायत नहीं दी गई, जिससे विरोधाभास पैदा होता है.
हाई कोर्ट ने यह सुनाया फैसला
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आल इंडिया जजेस एसोसिएशन बनाम यूनियन आफ इंडिया मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन की तारीख पर लागू नियमों के अनुसार चलेगी. इसलिए 23 दिसंबर 2024 को लागू पंजीकरण शर्त ही मान्य होगी न कि 21 फरवरी 2025 का संशोधन. कोर्ट ने यह भी कहा कि फ्रेश ला ग्रेजुएट्स को सीधे जज बनाना उचित नहीं है. कम से कम तीन साल की प्रैक्टिस आवश्यक है, ताकि उम्मीदवार कोर्ट की कार्यप्रणाली को समझ सकें और न्यायिक सेवा की गुणवत्ता प्रभावित न हो.
राज्य सरकार ने रखा अपना पक्ष
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए हैं कि नियमों में किसी प्रकार का संवैधानिक उल्लंघन हुआ है. यह शर्त न्यायिक सेवा की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए लागू की गई है.
विधायक के कथित ऑडियो ने मचायी सनसनी, 11 लाख की डिमांड की चल रही बात, विधायक बोली- AI से बनाया है फर्जी आडियो
जांजगीर। पामगढ़ के कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश का रेत कारोबार से जुड़े छह कथित ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद जिले में सियासी भूचाल आ गया है। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर हर माह 11 लाख रुपये की अवैध वसूली की चर्चा हो रही है। विधायक ने इन ऑडियो को फर्जी बताते हुए इसे एआई से एडिट कर बदनाम करने की साजिश कहा है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि छह में से एक ऑडियो असली है, जो एक साल पुराना है और गाड़ी छुड़वाने से जुड़ा है। विधायक ने इस मामले में FIR दर्ज कराने और कांग्रेस पार्टी में शिकायत करने का ऐलान किया है।
पामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश का रेत कारोबार से जुड़ा कथित ऑडियो वायरल हो गया है। कुल छह ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें कथित रूप से अवैध रेत उत्खनन, ट्रक छुड़वाने और हर माह लाखों रुपये की वसूली की चर्चा सुनाई दे रही है।वायरल ऑडियो के मुताबिक, हर माह 3 लाख रुपये कलेक्टर, 2 लाख SDM, 5 लाख खुद विधायक और 1 लाख राघवेन्द्र नाम के व्यक्ति के लिए मांगे जा रहे हैं। यानी कुल 11 लाख रुपये की कथित डिमांड की बात कही गई है। इसके अलावा एक अन्य ऑडियो में अवैध रेत खनन करते पकड़ी गई गाड़ी छुड़वाने के लिए लेन-देन पर चर्चा सुनाई देती है।
विधायक का बयान – षड्यंत्र कर बदनाम करने की कोशिश
विधायक शेषराज हरवंश ने पूरे मामले को साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक षड्यंत्र है और उन्हें बदनाम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यह ऑडियो एडिट किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 6 में से 5 ऑडियो पूरी तरह फर्जी हैं।
हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि 6 में से एक ऑडियो क्लिप असली है। यह क्लिप करीब एक साल पुरानी है और इसमें अवैध रेत परिवहन करते पकड़ी गई एक गाड़ी को छुड़वाने की चर्चा हुई थी। विधायक का कहना है कि इस मामले में उन्होंने केवल स्थानीय लोगों की मदद की थी, इसमें कोई वित्तीय लेन-देन नहीं हुआ।
FIR और पार्टी में शिकायत का ऐलान
शेषराज हरवंश ने कहा कि वे इस पूरे मामले में FIR दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी इस साजिश की जानकारी देंगे। उन्होंने भाजपा और विपक्षी नेताओं पर मिलकर यह षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है।
सियासी माहौल गर्माया
जैसे ही ऑडियो वायरल हुए, जिले की सियासत गरमा गई। विपक्षी नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार का खुला सबूत बताते हुए हरवंश के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को विधायक पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं कांग्रेस समर्थक विधायक के पक्ष में खड़े हैं और इसे फर्जी करार दे रहे हैं।
शराब घोटाले में एक और बड़ी कार्रवाई, EOW ने रिटायर्ड IAS निरंजन दास को हिरासत में लिया
रायपुर। छत्तीसगढ़ में चल रहे बहुचर्चित शराब घोटाले में कार्रवाई का सिलसिला जारी है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने गुरुवार को आबकारी विभाग में कांग्रेस सरकार के तत्कालीन आयुक्त निरंजन दास को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी अपराध क्रमांक 04/2024 के तहत की गई है। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 12 (संशोधित अधिनियम 2018) सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत दर्ज है।
जांच एजेंसी का कहना है कि निरंजन दास विभाग के प्रमुख रहते हुए शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर पूरे सिस्टम को प्रभावित कर रहे थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल में शासकीय शराब दुकानों में बड़े पैमाने पर अनअकाउंटेड शराब की बिक्री हुई। साथ ही अधिकारियों के ट्रांसफर में मनमानी, टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर और दोषपूर्ण शराब नीति लागू करने जैसी गतिविधियों में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।
करोड़ों के असम्यक लाभ का आरोप
EOW और ACB की संयुक्त टीम ने चार्जशीट में उल्लेख किया है कि निरंजन दास ने सिंडिकेट से मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ अर्जित किया। जांच में यह भी सामने आया है कि यह लाभ नकद और अन्य माध्यमों से उन्हें पहुंचाया गया।
शराब घोटाले का बड़ा नेटवर्क
गौरतलब है कि इस घोटाले में पहले ही कई बड़े अधिकारियों और नेताओं के नाम सामने आ चुके हैं। इस मामले में अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, पुष्पक और चैतन्य बघेल के नाम चार्जशीट में दर्ज हैं। आरोप है कि इस सिंडिकेट ने राज्य में शराब की बिक्री से लेकर ट्रांसपोर्टेशन और टेंडर आवंटन तक एक समानांतर तंत्र खड़ा कर रखा था, जिससे हज़ारों करोड़ का घोटाला हुआ।
जांच जारी, और गिरफ्तारियां संभव
EOW के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह जांच अभी जारी है और आगे और भी गिरफ्तारियां संभव हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कई अन्य अधिकारियों और निजी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
पूर्व IAS आलोक शुक्ला कोर्ट सरेंडर करने पहुंचे, ऑर्डर नहीं होने पर जज ने वापस लौटाया
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाला मामले में मुख्य आरोपी और रिटायर्ड IAS अधिकारी डॉ. आलोक शुक्ला आज ED स्पेशल कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल उन्हें सरेंडर करने से रोक दिया। कोर्ट ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी अपलोड नहीं हुआ है, इसलिए सरेंडर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
आज सुबह डॉ. शुक्ला के भिलाई स्थित घर में ED ने दी दबिश
बता दें कि आज सुबह ED की टीम भिलाई स्थित डॉ. शुक्ला के घर में दबिश दी थी। सूत्रों के अनुसार, छानबीन पूरी होने के बाद ED उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर सकती है। इसी गिरफ्तारी से बचने के लिए डॉ. शुक्ला ED स्पेशल कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे थे। डॉ. शुक्ला के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आने के बाद ही सरेंडर किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने की जमानत याचिका खारिज
बहुचर्चित नान घोटाला केस में डॉ. शुक्ला और अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी थी, जिसे दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दोनों अधिकारियों को पहले दो हफ्ते ईडी की कस्टडी में रहना होगा। उसके बाद दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा। इसके बाद ही उन्हें जमानत मिल सकेगी। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों ने 2015 में दर्ज नान घोटाला मामले और ईडी की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका के खारिज होने के दूसरे ही दिन यानीआज ईडी की टीम ने डॉ. आलोक शुक्ला के भिलाई के तालपुरी स्थित घर में दबिश दी।
भूपेश सरकार में मिला पॉवरफुल पोस्टिंग
गौरतलब है कि नान घोटाला का जब खुलासा हुआ था, तो आलोक शुक्ला खाद्य विभाग के सचिव थे। उन्हें भी इस मामले आरोपी बनाया गया था और दिसंबर 2018 को उनके खिलाफ कोर्ट में EOW ने चार्जशीट पेश की थी। इसके बाद 2019 को आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली गई थी। जमानत मिलने के बाद दोनों अफसरों को कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार में पॉवरफुल पोस्टिंग मिली। इस पोस्टिंग के दौरान EOW की नान घोटाले की जांच को प्रभावित करने का आरोप दोनों अफसरों पर लगा था। इसी मामले में पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा के खिलाफ भी ईडी ने एफआईआर की थी। हालांकि सतीश चंद्र वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है।
नान घोटाला मामले में 10 जिलों में चल रही ED की कार्यवाही
बता दें, नान घोटाला मामले में प्रदेश के 10 अलग अलग जिलों में ED की कार्रवाई जारी है। दुर्ग जिले में ईडी की टीमें 2 गाड़ियों में सवार होकर पहुंची हैं। वहीं भिलाई के हुडको में सुधाकर रावटे के घर ईडी की 6 सदस्यीय टीम पहुंची है। ED के अधिकारी सुधाकर रावटे से पूछताछ कर रहे हैं और दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। कस्टम मिलिंग मामले में पूर्व IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर की गिरफ्तार हो चुकी है। इनपर आरोप है कि इन्होंने मिलकर 140 करोड़ से अधिक का घोटाला किया है।
अवैध गतिविधियों पर दोहरी कार्रवाई: निगम ने केबल काटे, खनिज विभाग ने जब्त किए हाइवा वाहन
बिलासपुर। शहर में अवैध केबल और खनिज परिवहन के खिलाफ जिला प्रशासन और नगर निगम ने मिलकर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार और गुरुवार को हुई दो अलग-अलग कार्रवाइयों में अवैध केबलों को काटकर जब्त किया गया, जबकि खनिज विभाग की टीम ने दो हाइवा वाहन ज़ब्त किए। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि ऐसी गतिविधियों में संलिप्त लोगों पर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
नगर निगम की सख्ती: अवैध केबलों पर कार्रवाई
नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार के निर्देश पर लगातार दूसरे दिन अवैध केबलों को काटने की कार्रवाई की गई। बुधवार को लिंक रोड और गुरुवार को तारबहार रोड पर निगम की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान जियो, एयरटेल, आइडिया, बीएसएनएल और स्थानीय डिश ऑपरेटरों के अवैध रूप से लगे केबल काटकर जब्त किए गए। निगम अधिकारियों का कहना है कि कंपनियों को कई बार चेतावनी दी गई थी कि वे अपने अवैध तार हटा लें, लेकिन बार-बार की चेतावनी के बावजूद उन्होंने कार्रवाई नहीं की। मजबूरी में निगम को खुद यह कदम उठाना पड़ा। निगम ने स्पष्ट कहा है कि शहर की सुरक्षा और सौंदर्य को देखते हुए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। निगम की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि कंपनियां स्वयं अपने अवैध केबल नहीं हटातीं तो उन्हें काटकर जब्त कर लिया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अवैध खनिज परिवहन पर प्रहार
इधर, खनिज विभाग ने भी अवैध गतिविधियों के खिलाफ मोर्चा खोला। कलेक्टर संजय अग्रवाल और खनिज विभाग के उप संचालक के मार्गदर्शन में माइनिंग टीम ने टेकऱ क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो हाइवा वाहन जब्त किए। इन वाहनों में बिना वैध अभिवहन पास के मुरूम का परिवहन किया जा रहा था। खनिज विभाग की टीम ने जिले के 10 स्थानों पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण की गहन जांच की गई। जब्त किए गए वाहनों को सीपत थाना पुलिस की अभिरक्षा में रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह केवल शुरुआत है और आगे भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
लगातार जारी रहेगा अभियान
नगर निगम और खनिज विभाग दोनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई एक बार की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि लगातार अभियान का हिस्सा है। आने वाले दिनों में भी शहर और जिले के अलग-अलग इलाकों में इसी तरह की कार्रवाइयां होंगी। शहर में अवैध केबल न केवल सौंदर्य को प्रभावित करते हैं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक साबित हो सकते हैं। कई जगहों पर लटकते तार दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। इसी तरह, अवैध खनिज परिवहन से न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर खतरा पैदा होता है।
अधिकारियों का सख्त संदेश
नगर निगम और जिला प्रशासन ने मिलकर यह संदेश दिया है कि अवैध कार्यों को अब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खनिज विभाग ने कहा है कि जिले में माइनिंग और ट्रांसपोर्ट से जुड़े हर वाहन की गहन जांच होगी। वहीं निगम ने साफ कहा है कि शहर की सुंदरता और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली कंपनियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे ऐसे मामलों की जानकारी अधिकारियों तक पहुँचाएँ। अगर कहीं अवैध खनन, परिवहन या अवैध केबल कनेक्शन दिखे तो तुरंत सूचना दें। इससे शहर को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने में मदद मिलेगी।
एक्शन मोड में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, आदेश की अनदेखी पर अधिकारियों को लगाई फटकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आज मंत्रालय, महानदी भवन में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में विभागीय कार्यों की समीक्षा के साथ आगामी वर्षों की ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर विशेष बल दिया गया।इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव रेणु जी पिल्ले, स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी, एवं प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा संजीव झा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
बैठक में मंत्री श्री यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य के सभी जिलों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे। मॉडल स्कूल स्थापित करने योग्य स्कूलों की जानकारी 10 दिन में संचालनालय को प्रस्तुत की जाए। शिक्षा मंत्री ने कहा डीएवी, इग्नाइट और पीएम श्री विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने भवन विहीन और भवन की आवश्यकता वाले स्कूलों की संख्यात्मक जानकारी ली और अधिकारियों से कहा कि जहां भवन बनाना आवश्यक हो वहां प्राथमिकता से इस कार्य को करें। उन्होंने कहा कि डिस्मेन्टल योग्य भवनों की स्थिति का शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने लघु मरम्मत और शौचालय मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
मंत्री श्री यादव ने कहा कि नए शिक्षा सत्र शुरू होते ही निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश और सायकल का वितरण स्कूल खुलते ही विद्यार्थियों तक पहुँच जाना चाहिए। इसके लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएँ समय रहते पूरी कर ली जाएँ। मंत्री श्री यादव ने प्रशासनिक कार्यों में उदासीनता के कारण मनेंद्रगढ़- चिरमिरी – भरतपुर के जिला शिक्षा अधिकारी आर पी मिरे को शो कॉस नोटिस देने के निर्देश वरिष्ठ अधिकारियों को दिए।
मंत्री श्री यादव ने मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि 5वीं, 8वीं, 10वीं, 12वीं के बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए प्रारंभ से ही विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों के प्रतिभा में कोई कमी नही है। उन्होंने विभाग के अंतर्गत न्यायालयीन प्रकरणों की अद्यतन जानकारी लेकर प्राथमिकता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने केन्द्रीय छात्रवृत्ति योजना, विद्यार्थियों के बैंक खाते खोलने तथा उनके जाति प्रमाण पत्र आदि के संबंध में विशेष चर्चा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
पेंशन और वेतन निर्धारण के मामलों पर मंत्री श्री यादव ने कहा कि किसी भी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका और पास बुक नवंबर माह तक अपडेट कर ली जाए। मृतक कर्मचारियों के आश्रितों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर हितलाभ भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में छात्रवृत्ति योजनाओं, मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता कार्यक्रम, रजत जयंती कार्यक्रम एवं सेजेस भर्ती की स्थिति की समीक्षा की गई। श्री यादव ने कहा कि इन सभी योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग हो और पात्र विद्यार्थियों तक सभी लाभ समय पर पहुँचें। लंबे समय से एक ही जगह में डी ई ओ / बी ई ओ कार्यालय में पदस्थ क्लेरिकल स्टाफ की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि उनकी पदस्थापना और शाखा बदली जाए। उक्त कर्मचारियों के कार्य का पुनः विभाजन करें।
पी.एम. ई-विद्या चैनल और दीक्षा पोर्टल के प्रचार-प्रसार को गति देने पर बल देते हुए श्री यादव ने कहा कि डिजिटल शिक्षा को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक संसाधनों का लाभ मिल सके। नवीन डाइट सूरजपुर एवं गरियाबंद में पदस्थापना की कार्यवाही और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और अधिक सुदृढ़ हो।
बैठक में लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागीय संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में श्री यादव ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन गंभीरता एवं उत्तरदायित्व के साथ करें तथा योजनाओं की प्रभावी क्रियान्विति सुनिश्चित करें, ताकि राज्य का हर बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके।
नशामुक्त भारत अभियान के अंतर्गत रैली और जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन
रायपुर। सेवा पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत 17 से 22 सितंबर तक नशामुक्त भारत अभियान का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के मार्गदर्शन में अभियान के प्रथम दिवस पर शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय, मठपुरैना में नशामुक्ति रैली और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में लगभग 223 छात्र-छात्राएं और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। इस दौरान विशेषज्ञों ने नशे के दुष्परिणाम और नशा छोड़ने के उपायों के बारे में जानकारी दी। विभागीय कलाकारों ने नशामुक्ति पर गीत प्रस्तुत कर संदेश दिया कि नशा व्यक्ति और उसके परिवार दोनों के जीवन को प्रभावित करता है।
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशामुक्ति केंद्र, टाटीबंध में मनोचिकित्सक और दवाइयों की सुविधा उपलब्ध है। यहां आने वाले व्यक्तियों को सकारात्मक सोच अपनाकर नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।
कार्यक्रम में सभी उपस्थित लोगों ने नशामुक्त रहने का संकल्प लिया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य और महिला उत्पीड़न से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई। समाज को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने के लिए ऐसे अभियान निरंतर जारी रहेंगे।
रोटी मेकर मशीन घोटाला: 50 हजार की मशीन 8 लाख में खरीदी, मंत्री नेताम ने विभागीय सचिव से मांगा जवाब
रायपुर। छत्तीसगढ़ के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग पर एक बार फिर खरीद-फरोख्त में बड़े घोटाले का आरोप लगा है। इस बार मामला रोटी मेकर मशीन की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि जिस मशीन की वास्तविक बाजार कीमत 50 से 60 हजार रुपये है, उसी मशीन को विभाग ने लगभग 7 लाख 95 हजार रुपये में खरीदा। मामले के उजागर होने के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में हलचल मच गई है। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विभागीय प्रमुख सचिव से 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
विभाग पर पहले भी लगते रहे हैं आरोप
सूत्रों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब विभाग पर महंगी दरों पर सामान खरीदे जाने का आरोप लगा हो। इससे पहले भी विभागीय खरीद में
अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें आती रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उठे सवालों ने इस मुद्दे को और तूल दे दिया है। लोगों का कहना है कि विभाग की खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और भ्रष्टाचार हो रहा है।
बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दाम पर खरीद
जांच में यह तथ्य सामने आया कि विभाग द्वारा खरीदी गई रोटी मेकर मशीन की बाजार में वास्तविक कीमत 50–60 हजार रुपये है। लेकिन विभाग ने इसे करीब 8 लाख रुपये में खरीदा। यह कीमत बाजार मूल्य से लगभग 15 गुना अधिक है।
विभाग की इस खरीद प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं
आखिर इतनी महंगी दर पर मशीनें क्यों खरीदी गईं?
क्या विभागीय अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं के बीच मिलीभगत थी?
क्या यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा?
‘प्रयास संस्था’ के तहत खरीदी गई मशीन
जानकारी के मुताबिक, रायपुर जिले में संचालित ‘प्रयास संस्था’ के लिए इन रोटी मेकर मशीनों की खरीद की गई थी। लेकिन इस खरीद में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं। कलेक्टर स्तर पर भी इस मामले में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विभागीय जांच के बाद इस खरीद की असली तस्वीर कब सामने आती है।
मंत्री ने मांगी रिपोर्ट
मंत्री रामविचार नेताम ने कहा है कि बाजार मूल्य की तुलना में कई गुना अधिक राशि पर सामान खरीदे जाने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसलिए विभागीय प्रमुख सचिव को सात दिनों के भीतर पूरी जानकारी और तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
शराब घोटाले में बड़ा खुलासा: ‘बिग बॉस’ ग्रुप से चलता था पूरा रैकेट, अधिकारियों के खिलाफ षड्यंत्र भी रचता था सिंडिकेट
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं। 15 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर की विशेष अदालत में 7000 से अधिक पन्नों की पांचवीं पूरक चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में पहली बार यह स्पष्ट हुआ है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल उर्फ बिट्टू ने इस घोटाले के दौरान 1000 करोड़ रुपए से अधिक की रकम को सीधे-सीधे नियंत्रित किया।
ED के अनुसार, चैतन्य बघेल इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड के तौर पर सामने आए हैं। चार्जशीट में कहा गया है कि उन्होंने करीब 200 करोड़ रुपए की व्यक्तिगत कमाई की, जबकि लगभग 850 करोड़ रुपए तत्कालीन कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए गए।
मोबाइल चैट्स से हुआ खुलासा
जांच एजेंसी ने अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल फोन जब्त कर उनकी डिटेल जांच की। इसमें चौंकाने वाले चैट्स सामने आए। अनवर के मोबाइल में चैतन्य का नंबर ‘बिट्टू’ नाम से सेव था। इन चैट्स में पैसे की डील, नकली होलोग्राम बनाने और उसकी सप्लाई की पूरी प्लानिंग दर्ज मिली। ED ने इन चैट्स के स्क्रीनशॉट चार्जशीट के साथ कोर्ट में पेश किए हैं।
‘बिग बॉस’ ग्रुप से चलता था पूरा सिंडिकेट
सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि इस घोटाले को संचालित करने के लिए ‘बिग बॉस’ नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया था। इस ग्रुप में चैतन्य बघेल के साथ अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया और पुष्पक जैसे अहम लोग शामिल थे। करोड़ों रुपए के लेन-देन की जानकारी, किसे कितना पैसा देना है, और ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर उसे सफेद करने की योजना इसी ग्रुप में साझा की जाती थी।
EOW की भी नजर
ED की कार्रवाई के बाद अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) भी सक्रिय हो गई है। सूत्रों के अनुसार, EOW चैतन्य बघेल को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
यह खुलासा छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचाने वाला है। विपक्ष पहले से ही इस मामले को लेकर सरकार और कांग्रेस पार्टी पर हमलावर है। अब चैतन्य बघेल का नाम सामने आने से यह मामला और भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है। आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।