प्रदेश
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने गिनाईं अपने विभागों की दो वर्षों की उपलब्धियां
रायपुर। महिला एवं बाल विकास व समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आज नवा रायपुर स्थित संवाद के ऑडिटोरियम में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने पिछले दो वर्षों में विभागों की उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी साझा की।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि बीते दो वर्षों में महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से कई ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं। समाज में महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में लगातार सुधार हो रहा है। महिला सशक्तिकरण के तहत महतारी वंदन योजना एक ऐतिहासिक पहल साबित हुई है, जिसके तहत अब तक 14 हजार 307 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इस योजना से 68 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना के तहत प्रथम संतान के जन्म पर दो किस्तों में 5 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। वहीं दूसरी संतान बालिका होने पर 6 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है।
स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नवंबर 2023 में कुपोषण की दर 30.88 प्रतिशत थी, जो नवंबर 2025 में घटकर 24.99 प्रतिशत रह गई है। अंडरवेट बच्चों की संख्या भी 15.50 प्रतिशत से घटकर 13.61 प्रतिशत हो गई है। वर्तमान में 19.64 लाख हितग्राहियों को पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है, जिसमें 90 प्रतिशत वितरण FRS प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी रूप से हो रहा है।
स्वास्थ्य एवं पोषण के तहत पोषण आहार व्यवस्था में बदलाव हुआ है। नवंबर 2023 में कुपोषण की दर 30.88 प्रतिशत थी, जो नवंबर 2025 में घटकर 24.99 प्रतिशत हो गई है। अंडरवेट श्रेणी में आने वालों की संख्या 15.50 प्रतिशत से घटकर 13.61 प्रतिशत हो गई है। वर्तमान में 19.64 लाख हितग्राहियों को पूरक पोषण आहार दिया जा रहा है। इनमें से 90 प्रतिशत हितग्राहियों को FRS के माध्यम से पारदर्शी वितरण किया जा रहा है।
सुरक्षा एवं सहायता के तहत महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित कवच के रूप में सखी वन स्टॉप सेंटर योजना संचालित की जा रही है, जिसके अंतर्गत 33 जिलों में 34 केंद्र संचालित हैं।
महिला हेल्पलाइन के माध्यम से बीते 2 वर्षों में 8 हजार 959 शिकायतों का समाधान किया गया है। बाल संरक्षण सेवाओं के तहत कुल 110 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित हैं, जिनमें 32 शासकीय और 78 गैर-शासकीय संस्थाएं शामिल हैं। पास्को पीड़ित बच्चों की सहायता के लिए सपोर्ट पर्सन चिन्हांकित किए गए हैं।
वीर बाल दिवस के अवसर पर बालिका गृह की एक बालिका को राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया गया। बुनियाद और भविष्य कार्यक्रम के तहत 4,750 आंगनबाड़ी केंद्रों को BaLA अवधारणा के अंतर्गत उन्नत किया गया है, जबकि 5,814 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को मुख्य आंगनबाड़ी केंद्रों में परिवर्तित किया गया। इसके साथ ही 1,271 कार्यकर्ताओं और 6,384 सहायिकाओं की नियुक्ति की गई है। जियो टैगिंग के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक लोकेशन की जानकारी मिल रही है और ई-भर्ती ई-आंगनबाड़ी के तहत ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 15,342 बेटियों का विवाह संपन्न कराया गया, जिसमें प्रति जोड़ी 50 हजार रुपये की सहायता दी गई, जिसमें से 35 हजार रुपये सीधे कन्या के खाते में जमा किए गए। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के जरिए 9 लाख से अधिक किशोर बालिकाओं के परिवारजनों को जागरूक किया गया है। बालोद जिले को बाल विवाह मुक्त घोषित किया गया है और इस वर्ष 189 बाल विवाह रोके गए हैं। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2029 तक पूरे प्रदेश को पूर्ण रूप से बाल विवाह मुक्त घोषित करना है। वहीं अब तक 27 हजार महिलाओं को सखी केंद्रों के माध्यम से सहायता प्रदान की जा चुकी है।
आगामी प्राथमिकताओं पर बात करते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया गया कि कुपोषण की दर को कम करने पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसके लिए सुपोषित छत्तीसगढ़ को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बस्तर और सरगुजा संभाग में लागू किया जाएगा, जहां कुपोषण की समस्या सबसे अधिक है।
समाज कल्याण विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न पेंशन योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनसे 18,400 लोग लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को दोबारा प्रारंभ किया गया है, जिसके तहत अब तक 10,694 तीर्थयात्री लाभान्वित हुए हैं और 14 तीर्थ यात्राएं कराई जा चुकी हैं। दिव्यांगजनों के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनसे शासकीय संस्थाओं के माध्यम से 1,323 छात्र लाभान्वित हुए हैं। UDID के तहत विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र जारी किए गए हैं और दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग भी प्रदान किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उभयलिंगी व्यक्तियों के सशक्तिकरण और उनके रोजगार के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं। वृद्धाश्रमों के माध्यम से विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं और सियान गुड़ी के जरिए वृद्धजनों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
MSP पर मक्का खरीदी नहीं : जिला प्रशासन और किसानों के बीच हुई बैठक, 10 हजार रुपए प्रति एकड़ सहायता राशि पर बनी सहमति
गरियाबंद। मैनपुर में आज किसानों और जिला प्रशासन के बीच लंबी बैठक चली. कलेक्टर भगवान सिंह यूईक, एसपी वेद व्रत सिरमौर्य और जिला कृषि अधिकारी चंदन राय के साथ बैठक में किसान संघर्ष समिति ने आज फिर एक बार समर्थन मूल्य में मक्का खरीदी की बात दोहराई. इस मांग को पूरी करने में प्रशासन लाचार नजर आया पर किसानों को राहत देने कृषक उन्नति योजना के तहत पंजीकृत प्रत्येक किसान को प्रति एकड़ 10 हजार आय सहायता देने की बात पर सहमति बन गई.
7 जनवरी तक होगा किसानों का पंजीयन
कलेक्टर ने किसानों को बताया कि बीते साल एथेनॉल डिस्टलरीज के मांग पर नाफेड ने एमएसपी दर 2100 रुपए प्रति क्विंटल पर मक्का की खरीदी किया था. इस बार मांग नहीं होने के कारण यह खरीदी सम्भव नहीं है. किसानों की दूसरी मांग थी कि उनके वन भूमि के गिरदावरी रिपोर्ट ऑन लाइन शो नहीं होने से किसान धान खरीदी से वंचित हो जाएंगे. प्रशासन की ओर से चंदन राय ने किसानों से सार्थक चर्चा किया. उन्होंने बताया कि समिति मॉड्यूल पर धान खरीदी पोर्टल में पंजीयन से वंचित किसानों का पंजीयन 7 जनवरी तक जारी रहेगा. इस अवधि में नहीं हो सका तो कलेक्टर सर से प्रस्ताव भेज तिथि को आगे और बढ़ाया जाएगा, कोई भी किसान खरीदी से वंचित न हो उसके लिए पूरे प्रयास किए जाएंगे.
प्रशासन ने ली राहत की सांस
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ,जिला प्रशासन द्वारा किए गए इस सार्थक चर्चा के बाद किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आगामी 6 जनवरी को नेशनल हवाई चक्का जाम कर किए जाने वाले प्रदर्शन को स्थगित करने का ऐलान किया,जिसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस लिया है.
जिले में 8 हजार किसान, 1800 हेक्टर में कर रहे मक्का की खेती
जिले में 18000 हेक्टेयर में 8 हजार से ज्यादा किसानों ने मक्का का उत्पादन किया हुआ है. पिछले वर्ष नाफेड (नेशनल एग्रीकल्चर फेडरेशन) ने एमएसपी दर पर मक्का खरीदी किया था. अच्छी आमदनी को देखते हुए इस बार जिले में मक्का का रकबा में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी हो गया. लेकिन इस बार नाफेड से खरीदी नहीं होने से किसान अधिकतम 1500 प्रति क्विंटल पर मक्का बेचने को मजबूर हैं. किसानों की लागत तक नहीं निकल रही थी. ऐसे में किसानों ने 6 जनवरी को चक्का जाम का ऐलान किया था.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव समिति के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 समिति के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब उपस्थित थे।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव में मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित किया।
इस अवसर पर के.के. भारद्वाज, डॉ. संदीप जैन, नरेंद्र लोधी, गोविंद वर्मा, पुष्कर साहू, संतोष लोधी, अशोक चंद्राकर, देवनाथ साहु, राकेश सोनकर, हीरामन कोसले, विक्रम परमार, चंद्रशेखर साहू, गणेश राम साहू, दूजे राम धीवर उपस्थित थे।
डीएसआईआर ने धमतरी जिले की ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु एनआईटी रायपुर को STREE परियोजना की स्वीकृत
रायपुर। ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण एवं विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर को STREE (महिलाओं की आर्थिक वृद्धि को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी संसाधनों के माध्यम से कौशल विकास) परियोजना स्वीकृत की है। इस परियोजना की स्वीकृति का हस्ताक्षर समारोह 4 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह की गरिमामय उपस्थिति रही।
यह पहल एनआईटी रायपुर की कंपनी एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (NITRRFIE) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की A2K+ योजना के अंतर्गत महिलाओं के लिए प्रौद्योगिकी विकास एवं उपयोग कार्यक्रम (TDUPW) के तहत समर्थित इस परियोजना के लिए 36 माह की अवधि हेतु 90 लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महिला कौशल उपग्रह केंद्रों की स्थापना करना है, जिसके माध्यम से तीन वर्षों में 300 ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना को धमतरी जिला प्रशासन से अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, गजेंद्र सिंह ठाकुर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला पंचायत, डॉ. शैलेंद्र सिंह, सहायक निदेशक, CSSDA एवं जिला अधिकारी, तथा जय वर्मा, DPM, CGSRLM शामिल हैं, जो स्थानीय समन्वय एवं व्यापक जनपहुंच सुनिश्चित करेंगे।
एनआईटी रायपुर की ओर से इस परियोजना का मार्गदर्शन निदेशक डॉ. एन. वी. रामना राव द्वारा किया जा रहा है। परियोजना का नेतृत्व डॉ. अनुज कुमार शुक्ला, सहायक प्राध्यापक एवं प्रधान अन्वेषक कर रहे हैं। उनके साथ पवन कटारिया, सहायक कुलसचिव एवं सह-प्रधान अन्वेषक एवं प्रभारी अधिकारी, NITRRFIE के रूप में जुड़े हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग की ओर से डॉ. विपिन शुक्ला, वैज्ञानिक-जी एवं सलाहकार तथा A2K+ के प्रमुख, तथा डॉ. वंदना कालिया, वैज्ञानिक ‘एफ’ इस परियोजना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
समारोह में डॉ. अनुज कुमार शुक्ला, सहायक प्राध्यापक, एनआईटी रायपुर एवं STREE परियोजना के प्रधान अन्वेषक उपस्थित थे, जो शिक्षा जगत, सरकार एवं जिला प्रशासन के बीच सुदृढ़ सहयोग का प्रतीक है।
STREE परियोजना ग्रामीण महिलाओं के समग्र कौशल विकास पर केंद्रित रहेगी। इसके अंतर्गत कोसा (कोकून) रेशम से फाइबर निष्कर्षण एवं प्रसंस्करण, आधुनिक बुनाई तकनीकें, उत्पाद डिजाइन एवं विकास, उद्यमिता विकास कार्यक्रम तथा बाजार संपर्क सहायता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल विशेष रूप से हाशिये पर बसे एवं कृषि-आधारित समुदायों को लक्षित करती है, जिसका उद्देश्य महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म उद्यमों का सृजन और सतत आजीविका के नए अवसर प्रदान करना है।
एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने कहा कि – “केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की विशिष्ट उपस्थिति में STREE परियोजना की स्वीकृति का समारोह समावेशी नवाचार और महिला सशक्तिकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता में एनआईटी रायपुर के लिए एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है। STREE परियोजना ग्रामीण महिलाओं के लिए सतत और स्केलेबल समाधान बनाने हेतु अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को जमीनी स्तर के विकास के साथ एकीकृत करने की हमारी दृष्टि को साकार करती है।”
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस परियोजना को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि “STREE (Skill Development through Technological Resources for Empowering Economic Growth of Women) परियोजना का एनआईटी रायपुर को स्वीकृत होना छत्तीसगढ़, विशेषकर धमतरी जिले की ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। महिला कौशल उपग्रह केंद्रों की स्थापना तथा अगले तीन वर्षों में 300 ग्रामीण महिलाओं को कोसा रेशम फाइबर निष्कर्षण, आधुनिक बुनाई, उत्पाद डिजाइन, उद्यमिता और बाजार संपर्क जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर यह पहल महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म उद्यमों और सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देगी। यह परियोजना छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नेतृत्व में विकास और समावेशी प्रगति की हमारी दृष्टि के अनुरूप है।”
खरीफ 2025–26 के लिए बड़ी राहत: छत्तीसगढ़ में तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली की एमएसपी पर खरीद को मंजूरी
रायपुर। भारत सरकार के ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के दौरान छत्तीसगढ़ में दाल एवं तिलहनी फसलों की खरीद के लिए मूल्य समर्थन योजना (PSS) लागू करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
केंद्रीय मंत्री द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार छत्तीसगढ़ में निम्नानुसार फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 21 हजार 330 मीट्रिक टन तुअर, 25 हजार 530 मीट्रिक टन उड़द, 240 मीट्रिक टन मूंग, 4 हजार 210 मीट्रिक टन सोयाबीन और 4 हजार 210 मीट्रिक टन मूंगफली खरीद की मंजूरी दी गई है।
इन फसलों की खरीद मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित दाम प्राप्त होगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने पत्र में आशा व्यक्त की है कि इस निर्णय से तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक किसानों को बड़ी राहत मिलेगी तथा उन्हें औने-पौने दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार के इस निर्णय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों की सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एमएसपी पर खरीद की सभी तैयारियाँ समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर किसानों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करेगी। इस निर्णय से राज्य के किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, दलहन एवं तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।
जंबूरी 2026 विवाद पर कांग्रेस का बड़ा कदम, टेंडर से पहले काम शुरू कराने के आरोप में ACB/EOW में शिकायत
रायपुर। बालोद जिले में प्रस्तावित जंबूरी 2026 के आयोजन को लेकर उठे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है. टेंडर प्रक्रिया से पहले ही काम शुरू कराने के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने घोटाले की आशंका जताते हुए ACB/EOW कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है. कांग्रेस का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है.
सोमवार को कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल ACB/EOW कार्यालय पहुंचा, जहां पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई. प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन, प्रदेश कांग्रेस महामंत्री सुबोध हरितवाल, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे सहित अन्य कांग्रेस नेता शामिल रहे. नेताओं ने कहा कि जंबूरी 2026 जैसे बड़े आयोजन में पारदर्शिता जरूरी है और यदि टेंडर से पहले ही काम कराया गया है तो यह गंभीर अनियमितता है.
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जेम पोर्टल के माध्यम से होने वाली निविदा प्रक्रिया की जानकारी पहले ही लीक होना और काम शुरू हो जाना कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने मांग की कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
डीएसआईआर कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ के धमतरी में ग्रामीण महिलाओं के लिए स्किल सैटेलाइट सेंटर होगा स्थापित
रायपुर। डीएसआईआर फाउंडेशन डे के अवसर पर विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) द्वारा नवाचार और उद्योग पारितंत्र को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न साझेदार संस्थाओं के साथ अनेक महत्वपूर्ण समझौते और एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इन्हीं में से छत्तीसगढ़ के लिए एक प्रमुख उपलब्धि धमतरी में स्किल सैटेलाइट सेंटर की स्थापना से जुड़ा समझौता है, जो डीएसआईआर की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एंड यूटिलाइजेशन प्रोग्राम फॉर वुमेन (TDUPW) के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा।
धमतरी में प्रस्तावित स्किल सैटेलाइट सेंटर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाओं को प्रौद्योगिकी-आधारित कौशल विकास, उद्यमिता प्रशिक्षण और आजीविका के स्थायी अवसरों से जोड़ना है। यहाँ महिलाओं को उपयुक्त तकनीकों का व्यवहारिक प्रशिक्षण, बाजार से जोड़ने के अवसर तथा उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। प्राथमिक क्षेत्रों में फूड प्रोसेसिंग, वन-आधारित उत्पाद, वस्त्र एवं हस्तशिल्प, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण तथा डिजिटल सेवाएँ शामिल होंगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि “प्रौद्योगिकी और कौशल विकास छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नेतृत्व में विकास के दो सशक्त आधार हैं।” उन्होंने कहा कि यह पहल “विकसित भारत 2047” के दृष्टिकोण तथा प्रदेश सरकार की उस प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जिसके तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाते हुए महिलाओं को लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की अग्रणी शक्ति बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूह, लक्षपति दीदी योजना, वन धन विकास केंद्र तथा राज्य आजीविका मिशन जैसे प्लेटफॉर्मों को इस स्किल सैटेलाइट सेंटर के साथ एकीकृत किया जाएगा। इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को तुरंत उद्यम स्थापित करने, ऋण सुविधा प्राप्त करने और विपणन सहयोग मिलने के अवसर उपलब्ध होंगे, जिससे पूरे क्षेत्र में व्यापक आर्थिक प्रभाव दिखाई देगा।
धमतरी में स्किल सैटेलाइट सेंटर की स्थापना से राज्य में कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, स्टार्टअप संवर्द्धन और जमीनी नवाचार को नया आयाम मिलेगा। डीएसआईआर के तकनीकी सहयोग और राज्य सरकार के व्यापक फील्ड नेटवर्क के साथ यह पहल धमतरी को प्रौद्योगिकी आधारित महिला उद्यमिता का अग्रणी मॉडल जिला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
FRK टेंडर पर कांग्रेस का हमला: कन्हैया अग्रवाल ने टेंडर निरस्त करने की मांग, भ्रष्टाचार और स्थानीय उद्योगों की अनदेखी का आरोप
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने मार्कफेड द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए जारी फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने प्रदेश के खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल और मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला को ज्ञापन भेजकर नई, पारदर्शी और व्यावहारिक शर्तों के साथ टेंडर जारी करने का आग्रह किया है।
कन्हैया अग्रवाल ने अपने बयान में कहा कि छोटे और मध्यम स्थानीय उद्योगों को दरकिनार करने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञापन में बताया गया है कि 26 दिसंबर को जारी नए कैलेंडर और टेंडर की शर्तों में अचानक किए गए बदलावों के कारण छत्तीसगढ़ के लगभग 80 प्रतिशत स्थानीय FRK प्लांट दौड़ से बाहर हो गए हैं। शर्तों को इस तरह तैयार किया गया है, जिससे केवल 20 प्रतिशत स्थानीय मिलर्स और बाहरी राज्यों के बड़े मिलर्स को ही लाभ मिल सके। यह कदम न केवल स्थानीय उद्यमियों के हितों के खिलाफ है, बल्कि छत्तीसगढ़ भंडार क्रय अधिनियम का भी खुला उल्लंघन है। टेंडर की शर्तों में किए गए व्यापक परिवर्तन के लिए कम से कम 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाना था, जो नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर संकट के बादल छा सकते हैं। कन्हैया अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय प्लांटों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर रखा गया, तो राज्य में FRK की आपूर्ति बाधित होगी। FRK की कमी के कारण राइस मिलर्स सरकार को PDS के लिए चावल उपलब्ध नहीं करा पाएंगे, जिससे प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। साथ ही राजस्व को लगभग 200 करोड़ रुपये की हानि की आशंका भी है।
भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाते हुए कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि पूर्व में FRK राइस की खरीदी 39 रुपये प्रति किलो की दर पर हुई थी। वर्तमान टेंडर में इसे 60 रुपये प्रति किलो से अधिक दर पर खरीदने की तैयारी है। इस मूल्य वृद्धि से शासन को लगभग 175 से 200 करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान होगा, जो कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने की सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है।
कांग्रेस महामंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार एक ओर खाद्य फोर्टिफिकेशन के क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर मार्कफेड की यह प्रक्रिया स्थापित उद्योगों को ‘बंद’ करने की ओर धकेल रही है। यदि शासन-प्रशासन द्वारा टेंडर प्रक्रिया को तुरंत निरस्त कर पारदर्शी नीति नहीं अपनाई गई, तो स्थानीय मिलर्स के हितों की रक्षा हेतु न्यायालय की शरण ली जाएगी और टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की जाएगी।
बिल अटकाकर ठेकेदार से मांगी रिश्वत, पैसा लेते कैमरे में कैद हुए SDO
दुर्ग। सरकारी अधिकारी-कर्मचारी किस कदर भ्रष्टाचार में लिप्त है और बिल पास करने के नाम पर किस तरह रिश्वत ले रहे हैं, इसका ताजा मामला दुर्ग जिले में सामने आया है। अमृत जल जीवन मिशन के तहत कार्यरत एसडीओ एमए खान ने एक ठेकेदार से 1 लाख 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। ठेकेदार ने रिश्वत तो दी, लेकिन कैमरे के सामने ठेकेदार ने एसडीओ को रिश्वत देते हुए वीडियो बना लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
दरअसल एसडीओ एमए खान ने ठेकेदार के हर बिल को पास करने के बदले 11 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। ठेकेदार ने जब 11% कमीशन नहीं दिया तो उसका बिल अटका दिया गया। इससे परेशान होकर ठेकेदार ने एसडीओ को रिश्वत दी और इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया।
वीडियो में एसडीओ स्पष्ट रूप से रकम लेते दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल एसीबी में इसकी शिकायत नहीं पहुंची है, लेकिन एसीबी इस पर स्वतः संज्ञान लेने के लिए जिले के अधिकारियों से सम्पर्क कर रही है। एसीबी ने वायरल वीडियो के संबंध में जानकारी मंगाई है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास समेत 31 अधिकारियों की 38.21 करोड़ की संपत्ति कुर्क
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तात्कालीन आबकारी आयुक्त आईएएस निरंजन दास और 30 अन्य आबकारी अधिकारियों की कुल 38.21 करोड़ की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई यह कार्रवाई शराब घोटाले की चल रही जांच का हिस्सा है। ईडी की जांच में पाया गया है कि इस घोटाले में 31 आबकारी अधिकारियों ने 85.56 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की।
बता दें कि शराब घोटाले से राज्य को करीब 2,800 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान का अनुमान है। ईडी ने कुल 21.54 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति कुर्क किया है, जिसमें 78 आवासीय प्लॉट/मकान, व्यावसायिक दुकानें और विस्तृत कृषि भूमि शामिल हैं। वहीं 16.56 करोड़ रुपये की चल संपत्ति कुर्क किया है। इसमें 197 बैंक खातों/निवेश शामिल हैं, जिनमें उच्च मूल्य की सावधि जमा (FD), बैंक खातों में बड़ी नकदी, जीवन बीमा पॉलिसियां, इक्विटी शेयर और म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो शामिल हैं।
संगठित सिंडिकेट का खुलासा
जांच में सामने आया है कि इस घोटाले का संचालन एक संगठित सिंडिकेट द्वारा किया जा रहा था, जिसने राज्य के आबकारी विभाग पर लगभग पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया था। तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों निरंजन दास (तत्कालीन आबकारी आयुक्त) और अरुणपति त्रिपाठी (तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी, CSMCL) पर आरोप है कि उन्होंने राज्य के हितों को दरकिनार कर अवैध कमाई के लिए समानांतर आबकारी नीति लागू की।
अवैध शराब निर्माण और बिक्री
सिंडिकेट के तहत सरकारी दुकानों के माध्यम से अवैध देसी शराब का निर्माण और बिक्री की जा रही थी। शराब को सरकारी गोदामों को दरकिनार कर निजी ठिकानों से दुकानों तक पहुंचाया जाता था। यह पूरा खेल आबकारी अधिकारियों की सक्रिय मिलीभगत और साजिश के साथ चलाया गया।
कमीशन और रिश्वत का खेल
जांच में यह भी साबित हुआ कि आबकारी अधिकारियों को उनके क्षेत्र में पार्ट-बी शराब की बिक्री की अनुमति देने के लिए प्रति केस 140 रुपये का निश्चित कमीशन दिया जाता था। सूत्रों के अनुसार, अकेले एक प्रमुख आरोपी ने इस घोटाले से 18 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की। वहीं घोटाले को सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रति माह करीब 50 लाख रुपये की रिश्वत दी जाती थी। कुल मिलाकर 31 आबकारी अधिकारियों ने 85.56 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की।
राज्य के खजाने को पहुंचाया भारी नुकसान
विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इस संगठित घोटाले ने राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया। यह मामला उन अधिकारियों की गहरी मिलीभगत को उजागर करता है, जिन पर राज्य के राजस्व और कानून की रक्षा की जिम्मेदारी थी। ईडी की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक पहल माना जा रहा है।
ब्रश करते समय फटी गर्दन की नस, फ़िर अंबेडकर के डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय ने चिकित्सा जगत में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक 40 वर्षीय व्यक्ति की जान बचाकर ‘स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर’ (SCAR) का सफल ऑपरेशन किया है। यह छत्तीसगढ़ का पहला और दुनिया के दुर्लभतम मामलों में से एक है।
रायपुर के रहने वाले एक 40 वर्षीय दुकानदार सुबह घर पर ब्रश कर रहे थे, तभी अचानक उनके गले में असहनीय दर्द हुआ और देखते ही देखते गर्दन में भारी सूजन आ गई। कुछ ही मिनटों में मरीज बेहोश हो गया। परिजन उन्हें तत्काल अंबेडकर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में जब मरीज की सीटी एंजियोग्राफी की गई, तो डॉक्टर भी दंग रह गए। जांच में पता चला कि मरीज की दायीं कैरोटिड आर्टरी (मस्तिष्क तक खून ले जाने वाली मुख्य धमनी) स्वतः ही फट चुकी थी और वहां खून का गुब्बारा (Pseudoaneurysm) बन गया था।
विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि आमतौर पर यह धमनी किसी चोट, संक्रमण या ट्यूमर के कारण फटती है, लेकिन बिना किसी बीमारी के इसका अपने आप फट जाना (Spontaneous Rupture) अत्यंत दुर्लभ है। मेडिकल जर्नल के आंकड़ों के अनुसार, पूरे विश्व में अब तक ऐसे केवल 10 मामले ही दर्ज हुए हैं। इस अभूतपूर्व सफलता पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर ने पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने इसे संस्थान के लिए एक मील का पत्थर बताया।
जोखिम भरी थी सर्जरी, लकवे का था खतरा
डॉ. साहू के नेतृत्व में टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को हाथ में लिया। इस सर्जरी में सफलता की दर मात्र 50 से 60% होती है। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क में खून का थक्का पहुंचने से मरीज को लकवा मार सकता था या उसकी मौत हो सकती थी।
ऑपरेशन में शामिल विशेषज्ञ दल:
सर्जन: डॉ. कृष्णकांत साहू (विभागाध्यक्ष)
एनेस्थेटिस्ट: डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू
जूनियर डॉक्टर्स: डॉ. आयुषी, डॉ. अंशिका, डॉ. ख्याति, डॉ. आकांक्षा, डॉ. संजय, डॉ. ओम प्रकाश
नर्सिंग एवं तकनीकी स्टाफ: राजेन्द्र, नरेन्द्र, चोवा, भूपेन्द्र, हरीश व अन्य।
बड़े बकायादारों से बिजली बिल वसूली में पावर कंपनी के छूटे पसीने, IAS एसोसिएशन पर 64 लाख और विधानसभा पर 22 लाख रुपये बकाया
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली बिल की बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे पावर कंपनी प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है. एक ओर घरेलू और छोटे उपभोक्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर बड़े बकायादारों से वसूली करना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. सरकारी विभागों पर ही करीब 3 हजार करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है. हैरानी की बात यह है कि बकायादारों की सूची में विधानसभा और आईएएस एसोसिएशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम भी शामिल हैं. विधानसभा पर 22 लाख 75 हजार रुपये और आईएएस एसोसिएशन पर 64 लाख 35 हजार रुपये का बिजली बिल बकाया बताया गया है.
पावर कंपनी के सूत्रों के अनुसार, सरकारी और घरेलू उपभोक्ताओं को मिलाकर प्रदेश में कुल बकाया राशि लगभग 7 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. बकाया वसूली के लिए कंपनी द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है. पहले बिजली अमला मौके पर पहुंचकर कनेक्शन काटता था, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद अब कंट्रोल रूम से ही तीन बार मैसेज भेजकर कनेक्शन काटे जा रहे हैं. इसी बीच यह सवाल भी उठने लगे हैं कि करोड़ों रुपये बकाया रखने वाले बड़े उपभोक्ताओं पर कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि छोटे और घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति तुरंत काट दी जा रही है.
कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक विधानसभा ने अंतिम बार 20 नवंबर 2015 को 29 हजार 380 रुपये का भुगतान किया था, इसके बाद से करीब 10 सालों से बिजली बिल जमा नहीं किया गया है. वहीं आईएएस एसोसिएशन ने आखिरी बार 31 जनवरी 2011 को महज 2 हजार 585 रुपये का भुगतान किया था.
बृजमोहन अग्रवाल के नाम से कनेक्शन पर भी लाखों बकाया
बकायादारों की सूची में बृजमोहन अग्रवाल के नाम से दर्ज बिजली कनेक्शन पर 13 लाख 32 हजार रुपये बकाया हैं. बताया गया है कि इस कनेक्शन पर 5 अगस्त 2025 को 1 लाख 53 हजार रुपये का अंतिम भुगतान किया गया था. इसके अलावा प्रयास बालक विद्यालय, सड्दू पर 38 लाख 64 हजार रुपये का बिल बकाया है.
ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी चिंताजनक है. कई ग्राम पंचायतों पर लाखों रुपये का बिजली बिल बकाया है. सूची के अनुसार ग्राम पंचायत टेमरी पर 14 लाख 63 हजार 860 रुपये और ग्राम पंचायत नकटा पर 16 लाख 25 हजार 350 रुपये का बिल बकाया है. दोनों पंचायतों द्वारा पिछले तीन वर्षों से बिजली बिल का भुगतान नहीं किया गया है.
729 गैर-घरेलू उपभोक्ताओं पर 15.90 करोड़ का बकाया
सरकारी और घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ गैर-घरेलू उपभोक्ताओं पर भी भारी बकाया है. प्रदेशभर में 729 गैर-घरेलू उपभोक्ताओं से 15 करोड़ 90 लाख रुपये की वसूली की जानी है. नोटिस जारी होने के बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा है. इनमें सबसे अधिक 249 बकायादार बिलासपुर, 156 अंबिकापुर, 89 रायपुर सिटी, 74 रायपुर ग्रामीण, 70 रायगढ़, 38 दुर्ग, 32 जगदलपुर और 21 राजनांदगांव क्षेत्र के हैं.
निरंतर वसूली अभियान जारी: पावर कंपनी
पावर कंपनी के कार्यपालक निदेशक (राजस्व) एस. के. ठाकुर ने बताया कि प्रदेशभर में बकाया वसूली का अभियान लगातार जारी है. बकायादारों को मैसेज और नोटिस भेजे जा रहे हैं. इसके बावजूद भुगतान नहीं करने पर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने बताया कि सरकारी विभागों से बकाया वसूली को लेकर शासन स्तर पर चर्चा चल रही है.
विकास कार्यों में लापरवाही पर सख्त हुए विधायक राजेश मूणत, खारून प्रदूषण पर अधिकारियों को 5 दिन का अल्टीमेटम
रायपुर। रायपुर पश्चिम के विधायक और पूर्व मंत्री राजेश मूणत विकास कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा को लेकर पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में हैं. लगातार तीसरे दिन सुबह 8:00 बजे से अपने विधानसभा क्षेत्र के सघन निरीक्षण पर निकले विधायक मूणत ने आज सरोना और चंदनडीह क्षेत्र में विकास कार्यों का जायजा लिया. इस दौरान उनके साथ नगर निगम की महापौर मती मीनल चौबे, आयुक्त विश्वदीप, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.
खारून के प्रदूषण पर MLA मूणत ने अधिकारियों को दी चेतावनी
चंदनडीह में 80 करोड़ रुपये की लागत से बने एसटीपी (STP) प्लांट के निरीक्षण के दौरान विधयाक मूणत तब काफी नाराज हो गए, जब उन्हें पता चला कि ‘चिंगरी नाला’ का गंदा और बदबूदार पानी सीधे पवित्र खारून नदी में मिल रहा है. अधिकारियों की अदूरदर्शिता पर फटकार लगाते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों की लागत से एसटीपी प्लांट बनाने का क्या औचित्य, जब नाले का दूषित पानी नदी में मिल रहा है? आपकी हठधर्मिता का खामियाजा जनता क्यों भुगते?

विधायक मूणत ने अधिकारियों को 5 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि चिंगरी नाले के पानी के शुद्धीकरण के लिए तत्काल प्लान तैयार करें. उन्होंने दो टूक कहा कि राशि की कमी नहीं होने दी जाएगी, वे स्वयं मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से बजट स्वीकृत कराएंगे, लेकिन जनता को शुद्ध जल मिलना ही चाहिए. लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के लिए शासन को अनुशंसा करने की चेतावनी भी उन्होंने दी.
सरोना से महादेव घाट तक बनेगा नया ‘बायपास रोड’

अमृत मिशन 2.0 के अंतर्गत भारत सरकार से स्वीकृत 9 करोड़ रुपये की राशि से बनने वाले भव्य उद्यान के लिए मूणत ने सरोना स्थित शीतला मंदिर के पीछे रिक्त भूमि का निरीक्षण किया. उन्होंने मौके पर ही राजस्व अधिकारियों और पटवारी को सीमांकन कर लेआउट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए.
इसके साथ ही, सरोना बस्ती में ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए विधायक ने चंदनडीह से सरोना होते हुए महादेव घाट तक एक नए ‘बायपास रोड’ के निर्माण हेतु बजट में प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए. ट्रेंचिंग ग्राउंड की सफाई का अवलोकन करते हुए उन्होंने आयुक्त को निर्देश दिया कि उपमुख्यमंत्री अरुण साव की घोषणा के अनुरूप निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण होना चाहिए.

विधायक राजेश मूणत ने कहा कि ”मेरा संकल्प ‘स्वच्छ और स्वस्थ पश्चिम’ है. नगर निगम की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराए और प्रदूषण मुक्त वातावरण दे. अधिकारियों की लापरवाही के कारण यदि पवित्र खारून नदी प्रदूषित होती है या जनता के स्वास्थ्य पर कोई संकट आता है, तो वह चुप नहीं बैठेंगे. विकास कार्यों में अदूरदर्शिता और सरकारी धन का दुरुपयोग कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सिस्टम को सुधरना होगा, अन्यथा जवाबदेही तय होगी.
निरीक्षण के दौरान महापौर मीनल चौबे, आयुक्त विश्वदीप, जोन अधिकारी, मुख्यालय की योजना शाखा के अधिकारी, भू-राजस्व निरीक्षक, पटवारी और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अभियंता एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
8 जनवरी को मुख्यमंत्री निवास में जनदर्शन, सीएम विष्णुदेव साय करेंगे जनता से सीधा संवाद
रायपुर। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय, रायपुर में 8 जनवरी (गुरुवार) को जनदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश की जनता से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और समाधान की दिशा में पहल करेंगे।
जनदर्शन के अवसर पर मुख्यमंत्री आम नागरिकों से सीधे मुलाकात कर उनकी शिकायतों और मांगों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जनदर्शन में प्राप्त प्रत्येक आवेदन पर संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनदर्शन शासन और जनता के बीच सेतु का कार्य करता है, जिसका उद्देश्य आम लोगों को समयबद्ध और प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना है।
छत्तीसगढ़ में ठंड का कहर जारी, अगले 2-3 दिनों में तापमान में और कमी आने की संभावना
रायपुर। राजधानी रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में इन दिनों कड़ाके की ठंड का असर देखने को मिल रहा है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में घना कोहरा छाया हुआ है, जिसके चलते दृश्यता प्रभावित हो रही है। अंबिकापुर को छोड़ दें तो राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में प्रदेश के विभिन्न शहरों में न्यूनतम तापमान में एक से तीन डिग्री सेल्सियस तक और कमी आने की संभावना जताई है।
रविवार सुबह रायपुर में घना कोहरा छाया रहा, जिससे कई इलाकों में सुबह 11 बजे तक दृश्यता बेहद कम रही। इस बीच राज्य का सबसे ठंडा इलाका अंबिकापुर नहीं, बल्कि पेंड्रा रहा। पेंड्रा और अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 9.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.2 डिग्री अधिक है। रायपुर में अधिकतम तापमान 27.2 डिग्री और न्यूनतम 16.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बिलासपुर, दुर्ग और जगदलपुर में भी न्यूनतम तापमान में एक से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी देखी गई।
पेंड्रा क्षेत्र में भीषण ठंड के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। अमरकंटक में कई स्थानों पर ओस की बूंदें जम गई हैं और खेतों व छतों पर सफेद चादर सी नजर आ रही है। शीतलहर के चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है, जबकि लोग अलाव जलाकर और ऊनी कपड़ों का सहारा लेकर ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की दूसरी सबसे ऊंची पहाड़ी राजमेरगढ़ से सूर्योदय का दृश्य बेहद मनमोहक नजर आ रहा है, जिसका पर्यटक और सैलानी जमकर आनंद ले रहे हैं।
घने कोहरे के कारण सुबह के समय वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। ठंड का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और किसानों पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को गर्म पेय पदार्थ लेने और विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में ठंड से राहत मिलने की संभावना नहीं है, बल्कि ठंड और तेज हो सकती है।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की बड़ी कार्रवाई, बिल्डर और निगम अधिकारियों पर गिरेगी गाज
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में भू-माफियाओं और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले बिल्डरों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. राजनांदगांव के सत्यम परिवेश कॉलोनी (विस्तार आई.एन.सी.) में विकास अनुज्ञा के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है. टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग की जांच में हुए खुलासे के बाद अब इस कॉलोनी की भवन अनुज्ञा निरस्त करने और निर्माण कार्यों को सील करने की तैयारी पूरी कर ली गई है.
जांच में खुली पोल: नियमों को ताक पर रखकर दी अनुमति
शिकायतकर्ता गुरविंदर सिंह चड्डा की शिकायत पर जब संचालनालय स्तर की जांच समिति (अध्यक्षता- उप संचालक रोजी सिन्हा) ने मौके का मुआयना किया, तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए. विभाग ने पाया कि:
नियम विरुद्ध अनुमति: T&CP ने जमीन को ‘आवासीय’ उपयोग के लिए मंजूरी दी थी, लेकिन नगर निगम राजनांदगांव ने मिलीभगत कर वहां ‘वाणिज्यिक सह आवासीय’ (Commercial-cum-Residential) भवन अनुज्ञा जारी कर दी.
LIG प्लॉट में हेराफेरी: कॉलोनाइजर ने निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए आरक्षित भूखंडों के प्रावधानों में भी गंभीर लापरवाही बरती.
अफसरों और बिल्डर पर होगी सख्त कार्रवाई
जांच समिति के प्रतिवेदन के आधार पर आयुक्त, नगर तथा ग्राम निवेश ने कड़ा रुख अपनाया है:
बिल्डर को नोटिस: मेसर्स विस्तार आई.एन.सी. के भागीदार विवेक मिरानी को नोटिस जारी कर 12 जनवरी 2025 को सुनवाई के लिए तलब किया गया है.
सील होंगे भवन: उल्लंघन कर बनाए गए वाणिज्यिक और निर्माणाधीन भवनों को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 की धारा 34(4) के तहत सील करने की अनुशंसा की गई है.
अफसरों पर गिरेगी गाज: गलत अनुमति जारी करने वाले नगर निगम के भवन अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1956 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए नगरीय प्रशासन विभाग को पत्र लिखा गया है.
बड़ा सवाल: निगम की भूमिका संदिग्ध
इस पूरे मामले में राजनांदगांव नगर पालिक निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. जब मुख्य विभाग (T&CP) ने केवल आवासीय अनुमति दी थी, तो निगम के अधिकारियों ने उसे वाणिज्यिक में कैसे बदल दिया? विभाग अब बिल्डर का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया पर भी विचार कर रहा है.
कांगेर घाटी में मिली अनोखी “ग्रीन गुफा”, जल्द खुलेंगे पर्यटन के नए द्वार
रायपुर। छत्तीसगढ़ की कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इसी कड़ी में अब कांगेर घाटी में एक और अनोखी प्राकृतिक स्थलाकृति सामने आई है, जिसे “ग्रीन केव” (ग्रीन गुफा) नाम दिया गया है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य सरकार द्वारा पर्यटन और वन्य धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वन मंत्री श्री कश्यप ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन गुफा के पर्यटन मानचित्र में शामिल होने से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को गति प्राप्त होगी और शीघ्र ही पर्यटक इस अद्भुत गुफा की प्राकृतिक खूबसूरती का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकेंगे। वन विभाग द्वारा आवश्यक तैयारियां पूर्ण किए जाने के बाद शीघ्र ही इस गुफा को पर्यटकों के लिए खोले जाने की योजना है।
उल्लेखनीय है कि यह ग्रीन गुफा कोटुमसर परिसर के कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में स्थित है। गुफा की दीवारों और छत से लटकती चूने की आकृतियों (स्टैलेक्टाइट्स) पर हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतें पाई जाती हैं, जिसके कारण इसे “ग्रीन केव” नाम दिया गया है। चूना पत्थर और शैल से निर्मित यह गुफा कांगेर घाटी की दुर्लभ और विशिष्ट गुफाओं में से एक मानी जा रही है।
ग्रीन गुफा तक पहुंचने का मार्ग बड़े-बड़े पत्थरों से होकर गुजरता है। गुफा में प्रवेश करते ही सूक्ष्मजीवी जमाव से ढकी हरी दीवारें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। आगे बढ़ने पर एक विशाल कक्ष दिखाई देता है, जहां से भीतर की ओर चमकदार और विशाल स्टैलेक्टाइट्स तथा फ्लो-स्टोन (बहते पानी से बनी पत्थर की परतें) देखने को मिलती हैं, जो गुफा की प्राकृतिक भव्यता को और भी बढ़ा देती हैं।
घने जंगलों के मध्य स्थित यह गुफा अपनी अनोखी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बनने जा रही है। वन विभाग द्वारा गुफा की सुरक्षा एवं नियमित निगरानी की जा रही है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहुंच मार्ग, पैदल पथ तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य प्रगति पर है। वन विभाग द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवासन तथा प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण पांडे का मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।




