प्रदेश
वित्तीय समावेशन की ओर एक और कदम, ग्राम पंचायत रीवा में एक दिवसीय वित्तीय शिविर का सफल आयोजन
रायपुर। वित्तीय समावेशन योजनाओं के शत-प्रतिशत संतृप्ति हेतु चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत विकासखंड आरंग के ग्राम रीवा में एक दिवसीय वित्तीय समावेशन शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य देय खातों का Re-KYC (पुनः केवाईसी) कराना तथा ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं का निरंतर लाभ सुनिश्चित करना था।
इस अवसर पर निशा नाम्बियार, प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक, वित्तीय समावेशन एवं विकास विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, ने शिविर का निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्थानीय निवासियों, व्यापारियों एवं बैंक अधिकारियों के साथ संवाद करते हुए Re-KYC की महत्ता पर जोर दिया और उपस्थित नागरिकों को समय पर अपने खातों का पुनः सत्यापन पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया।
श्रीमती नाम्बियार ने शिविर आयोजन में शामिल बैंकों के प्रयासों की सराहना की और प्रतिभागियों को भारतीय रिज़र्व बैंक की एकीकृत लोकपाल योजना 2021, दावा न की गई जमाराशियों की प्रक्रिया तथा डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
शिविर में रीवा ग्राम पंचायत एवं आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आम नागरिकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान मौके पर ही विशेषज्ञों द्वारा किया गया। शिविर में बैंक ऑफ बड़ौदा, भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सीआरजीबी, पंजाब नेशनल बैंक, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक, जिला सहकारी बैंक आदि के प्रतिनिधि उपस्थित रहे और ग्रामीणों की Re-KYC प्रक्रिया में सहयोग प्रदान किया।
अग्रणी जिला प्रबंधक मो. हाफिज से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस शिविर में कुल 745 खातों की Re-KYC सफलतापूर्वक पूर्ण की गई।
मुख्यमंत्री ने तीन दिवसीय डेंटल कॉन्फ्रेंस 2025 का किया शुभारंभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश की 3 करोड़ जनता के आरोग्य के साथ हम विकसित छत्तीसगढ़ का सपना साकार करेंगे। पिछले 20 महीनों में प्रदेश की स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करते हुए दुर्गम अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने का कार्य हमारी सरकार ने किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित तीन दिवसीय डेंटल कॉन्फ्रेंस 2025 का शुभारंभ कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दंत चिकित्सा और दांतों की देखभाल से जुड़े उपयोगी उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा डेंटल एसोसिएशन की वार्षिक स्मारिका का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार बनने के पहले दिन से ही हमने प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति दी गई है, साथ ही फिजियोथैरेपी, नर्सिंग और मदर-चाइल्ड हॉस्पिटल जैसे संस्थानों की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के साथ ही हम प्रगति की भी बात कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2000 में जहां केवल एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं आज 15 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं। आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री वय वंदना योजना से मरीजों और बुजुर्गों को निःशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। वहीं, सस्ती जेनेरिक दवाइयां आम जनता को राहत प्रदान कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पान मसाला, गुटखा और तंबाकू की वजह से मुँह के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि दाँतों की देखभाल और सुंदर मुस्कान देने में दंत चिकित्सकों की अहम भूमिका है।उन्होंने चिकित्सकों से आह्वान किया कि इस दिशा में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएँ।
उन्होंने भावुक होकर अपने संसदीय कार्यकाल की स्मृतियाँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि 1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, उस समय एम्स दिल्ली पर पूरे देश के मरीजों का दबाव था। तब हमने संसद में निवेदन किया था कि छत्तीसगढ़ में भी एम्स की स्थापना हो। सौभाग्य से 1 नवम्बर 2000 को राज्य गठन के बाद पहली किस्त में छह राज्यों को एम्स की सौगात मिली और छत्तीसगढ़ को भी यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ विजन 2047’ डॉक्यूमेंट तैयार किया और 10 मिशन बनाकर प्रदेश को आगे बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
श्री साय ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश का जीएसडीपी 5 लाख करोड़ है, जिसे वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस दिशा में हम पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा से समृद्ध है, मेहनतकश किसान और परिश्रमी जनता इसकी असली ताकत हैं। “छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया” की कहावत को दोहराते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश 2047 तक अपने लक्ष्यों को अवश्य प्राप्त करेगा।
जीएसटी सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में जीएसटी के स्लैब को 5 और 18 प्रतिशत में एकरूप किया गया है। इससे व्यापार और कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा तथा व्यावसायिक गतिविधियाँ सरल होंगी। यह प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि को दर्शाता है, जो भारत को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अंत में कहा कि “मानव की मुस्कान सबसे कीमती है और उसे सुरक्षित रखने व सहेजने में दंत चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दंत चिकित्सक मुँह और दाँत से जुड़ी बीमारियों पर विस्तृत चर्चा करेंगे और उनके उपचार की दिशा में नए संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और नक्सल प्रभावित व दूरस्थ अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर में 20 विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है और यह हमारे प्रयासों का प्रमाण है कि सुकमा जिले के चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र को एनक्यूएएस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति के साथ अब कुल 15 मेडिकल कॉलेज होंगे। इसके अलावा बिलासपुर में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, 12 नए नर्सिंग कॉलेज और पाँच फिजियोथैरेपी कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। श्री जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट और दुर्गम क्षेत्रों के लिए बाइक एम्बुलेंस सेवा शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पूरे देश में सबसे अधिक कैशलेस इलाज सुविधा देने वाला राज्य बन चुका है।
कॉन्फ्रेंस में इंडियन डेंटल एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के प्रेसिडेंट डॉ. अरविंद कुमार, पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. राजीव सिंह, कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन डॉ. वैभव तिवारी सहित बड़ी संख्या में देशभर से आए दंत चिकित्सक उपस्थित रहे।
समस्याओं की पहचान कर समाधान विकसित करें जिससे लोग लाभान्वित हो : राज्यपाल रमेन डेका
दुर्ग। छत्तीसगढ़ प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका आज रूंगटा इंटरनेशलन स्कील्स युनिवर्सिटी भिलाई में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के विद्यारंभ समारोह में शामिल हुए। इस दौरान राज्यपाल ने युनिवर्सिटी के ड्रोन क्लब का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में सांसद विजय बघेल, विधायक वैशाली नगर रिकेश सेन एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डे भी सम्मिलित हुए। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि रूंगटा अंतर्राष्ट्रीय कौशल विश्वविद्यालय में प्रतिभाशाली लोगों को संबोधित करने में अपार प्रसन्नता हो रही है, जो हमारे छत्तीसगढ़ राज्य और हमारे राष्ट्र के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब आप यहाँ से स्नातक होंगे, तो आपके पास केवल एक डिग्री ही नहीं होगी, बल्कि आपके पास वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य को परिभाषित करने वाली कंपनियों के प्रमाणपत्र भी होंगे। आपका रिज्यूमे एक ऐसी भाषा बोलेगा जिसे दुनिया भर के नियोक्ता समझते और सम्मान करते हैं। राज्यपाल ने कहा आप सभी रोज़गार की तलाश से आगे सोचे, रोज़गार सृजन के बारे में सोचें। समाज में समस्याओं की पहचान करने और ऐसे समाधान विकसित करने के बारे में सोचें जिनसे लाखों लोगों को लाभ हो सके। यहाँ की सहायता प्रणाली - मार्गदर्शन से लेकर वित्तपोषण तक - आपके सपनों को हकीकत में बदलने के लिए डिज़ाइन की गई है। राज्यपाल ने कहा कि यहाँ की ड्रोन प्रयोगशाला इस बात का एक आदर्श उदाहरण है कि कैसे तकनीक का उपयोग सामाजिक लाभ के लिए किया जा सकता है। ड्रोन केवल उड़ने वाले उपकरण नहीं हैं; वे ऐसे उपकरण हैं जो कृषि, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा वितरण और पर्यावरण निगरानी में क्रांति ला सकते हैं। जब आप इस प्रयोगशाला में प्रयोग और नवाचार करते हैं, तो याद रखें कि प्रत्येक परियोजना में जीवन को प्रभावित करने और समुदायों को बदलने की क्षमता है।
राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों से कहा किं आज नियोक्ता ऐसे पेशेवरों की तलाश में हैं जो गंभीरता से सोच सकें, टीमों में काम कर सकें, प्रभावी ढंग से संवाद कर सकें और बदलाव के साथ तालमेल बिठा सकें। ये क्लब पाठ्येतर गतिविधियाँ नहीं हैं; ये आपके पेशेवर विकास का अभिन्न अंग हैं। 2,000 युवा दिमागों के एक ही छत के नीचे इकट्ठा होने से, आप बदलाव की एक शक्तिशाली ताकत का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन इस अवसर के साथ आपके अपने, आपके परिवार, आपके संस्थान, समाज और राष्ट्र के प्रति ज़िम्मेदारी भी आती है। आप जिस दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं, वह पिछली पीढ़ियों के अनुभव से बहुत अलग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और अनगिनत अन्य तकनीकें हर उद्योग को नया रूप दे रही हैं। आज जो नौकरियाँ मौजूद हैं, वे कल अप्रचलित हो सकती हैं, जबकि नई भूमिकाएँ उभरेंगी जिनकी हम आज कल्पना भी नहीं कर सकते। राज्यपाल श्री डेका ने विद्यार्थियों को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ राज्य के राज्यपाल के रूप में, मुझे कई सफल पेशेवरों, उद्यमियों और अन्य लोगों से मिलने का सौभाग्य मिला है। उन्हें सिर्फ़ उनका तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि समस्याओं को सुलझाने की उनकी क्षमता, जोखिम उठाने की उनकी इच्छाशक्ति, दूसरों का नेतृत्व करने की उनकी क्षमता और बदलाव लाने की उनकी प्रतिबद्धता भी अलग बनाती है।
राज्यपाल डेका ने कहा, इस रोमांचक यात्रा की शुरुआत करते हुए, मैं चाहता हूँ कि आप जिज्ञासु रहें, हर चीज़ पर सवाल उठाएँ, हर अवसर का लाभ उठाएँ और सीखना कभी बंद न करें, सहयोगी बनें, सर्वाेत्तम नवाचार तब होते हैं जब विविध विचार एक साथ काम करते हैं। साहसी बनें, असफल होने से न डरें, कोशिश करने से न डरें और प्रतिबद्ध रहें। उत्कृष्टता कोई संयोग नहीं है, यह निरंतर प्रयास का परिणाम है। अपने कौशल का उपयोग वास्तविक समस्याओं को हल करने और ज़रूरतमंदों की मदद करने के लिए करें। मैं एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता हूँ जहाँ आरआईएसयू के स्नातक प्रमुख निगमों का नेतृत्व कर रहे हों, नवीन कंपनियाँ शुरू कर रहे हों, अभूतपूर्व शोध कर रहे हों और विभिन्न क्षमताओं में समाज की सेवा कर रहे हों। मैं आपको छत्तीसगढ़ का गौरव और भारत की ताकत बनते हुए देख रहा हूँ। अब से तीन या चार साल बाद जब आप इन द्वारों से बाहर निकलेंगे, तो आप अपने साथ न केवल शैक्षणिक डिग्रियां लेकर जाएंगे, बल्कि उद्योग प्रमाणपत्र, व्यावहारिक अनुभव, उद्यमशीलता की मानसिकता और सबसे महत्वपूर्ण बात, किसी भी चुनौती को स्वीकार करने का आत्मविश्वास भी लेकर जाएंगे।
राज्यपाल ने छात्रों से कहा, आप न केवल इस संस्थान का भविष्य हैं, बल्कि आप हमारे राज्य, हमारे देश और हमारी पूरी दुनिया का भविष्य हैं। यहाँ आप जो कौशल अर्जित करते हैं, जो नेटवर्क बनाते हैं, जो नवाचार करते हैं और जिन मूल्यों को अपनाते हैं, उनका प्रभाव इन परिसरों की दीवारों से कहीं आगे तक जाएगा। इस परिवर्तनकारी यात्रा पर निकलते समय, अपने परिवारों का आशीर्वाद अपने साथ लेकर चलें। आपके संस्थान की अपेक्षाएँ, आपके राज्य की आकांक्षाएँ और आपके राष्ट्र की आशाएँ। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को आगे की शैक्षणिक यात्रा के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आप कुशल पेशेवर, नवोन्मेषी उद्यमी और ज़िम्मेदार नागरिक बनकर उभरें, जिन पर हम सभी को गर्व होगा। राज्यपाल डेका ने अपने कर कमलों से युनिवर्सिटी के प्रतिभावान छात्रों को स्मृति चिन्ह भेंट किया। राज्यपाल और अन्य अतिथियों ने एक पेड़ मां के नाम योजना के अंतर्गत युनिवर्सिटी परिसर में वृक्षारोपण भी किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपने संक्षिप्त उद्बोधन में सांसद बघेल ने कहा कि भिलाई शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम गढ़ने जा रहा है। रूंगटा युनिवर्सिटी में देश ही नहीं विदेश से भी बच्चे यहां पढ़ने आए हैं। जिस भाव से बच्चे यहां आए है, उनकी सभी भाव की पूर्ति करने में युनिवर्सिटी की शिक्षा पद्धति सहायक हो। सांसद ने शिक्षा के साथ अनुशासन पर जोर देते हुए सभी नव प्रवेशी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। विधायक रिकेश सेन ने कहा कि युनिवर्सिटी में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के विद्यारंभ हेतु प्रदेश के राज्यपाल स्वयं यहां पधारे है। यह सौभाग्य की बात है कि रूंगटा युनिवर्सिटी वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र में है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने अपने संबोधन में ’’ काक चेष्टा, बको ध्यानं, श्वान निद्रा, अल्पाहारी, गृहत्यागी’’ विद्यार्थियों को विद्यार्थी के उक्त पांच लक्षणों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए उनको उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।
सीआरपीएफ के घायल जवान से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने की मुलाकात, बढ़ाया हौसला…
रायपुर। गृहमंत्री विजय शर्मा ने IED ब्लास्ट में घायल CRPF जवान आलम मुकेश का हाल चाल जाना। उन्होंने वीडियो पोस्ट कर लिखा, दंतेवाड़ा ज़िले में IED ब्लास्ट में घायल CRPF 195वीं बटालियन के जांबाज़ जवान आलम मुकेश से रायपुर के अस्पताल में मिलकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनका हौंसला बढ़ाया। इस अवसर पर उनके परिजनों से भी भेंट की, मैने यही कहा मुकेश जी और उनके जैसे अनेक सैनिकों के भुजाओं की ताकत देश देख रहा है, गर्व है सैनिक के परिवार पर!
डॉक्टरों ने उपमुख्यमंत्री को बताया कि जवान की स्थिति स्थिर है और उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। विजय शर्मा ने जवान से बातचीत कर उनकी हिम्मत और जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हर स्थिति में अपने सुरक्षाबलों के साथ खड़ी है। जवानों का साहस और समर्पण ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली का आधार है। मुलाकात के दौरान उपमुख्यमंत्री ने जवान को विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार उनके परिवार की हर संभव मदद करेगी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को भी जवान के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं आने देने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रोफेसरों की सीधी भर्ती पर रोक, पदोन्नति से ही होंगे चयन
रायपुर। मेडिकल कॉलेजों में अब प्रोफेसरों के पद केवल प्रमोशन के जरिए ही भरे जाएंगे। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को इस मामले में अहम फैसला सुनाया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 10 दिसंबर 2021 को जारी अधिसूचना को खारिज कर दिया। इस अधिसूचना में प्रोफेसरों के खाली पदों को एक बार की विशेष छूट देकर सीधी भर्ती से भरने का प्रावधान किया गया था।
जानिये क्या था मामला
विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर कार्यरत डॉ. शशिकला कोसम, डॉ. नरेंद्र प्रसाद नरसिंग, डॉ. ओंकार कश्यप समेत कई अन्य शिक्षकों ने वर्ष 2021 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2013 के नियम 6 के अनुसार प्रोफेसर का पद 100 प्रतिशत पदोन्नति से ही भरा जाना चाहिए। जब तक नियमों में कोई औपचारिक संशोधन न किया जाए, तब तक अधिसूचना के माध्यम से सीधी भर्ती की अनुमति देना असंवैधानिक है।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राज्य सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के पदोन्नति के अधिकार का हनन करता है और मनमाना है। उन्होंने कोर्ट से इस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खुलने से प्रोफेसरों की भारी कमी हो गई थी। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की मान्यता बनाए रखने के लिए आवश्यक फैकल्टी उपलब्ध कराना जरूरी था। इस स्थिति में नियमों के तहत राज्यपाल को छूट देने का अधिकार है और अधिसूचना उसी शक्ति का प्रयोग करते हुए जारी की गई थी।
कोर्ट का निर्णय
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि 2013 के भर्ती नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि प्रोफेसरों के पद 100 प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाएंगे। नियमों में कोई संशोधन किए बिना अधिसूचना के जरिए सीधी भर्ती की अनुमति देना उचित नहीं है। अदालत ने इस अधिसूचना को रद्द करते हुए कहा कि राज्य सरकार नियमों में आवश्यक संशोधन कर सकती है, लेकिन जब तक ऐसा न हो, चयन केवल प्रमोशन के आधार पर ही होगा।
इस फैसले से राज्य के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसरों को बड़ा राहत मिली है। अब उन्हें उम्मीद है कि रिक्त पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। हालांकि, इससे सरकार के सामने चुनौती यह होगी कि प्रोफेसरों की कमी को किस तरह पूरा किया जाए ताकि मेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर कोई संकट न आए।
गर्ल्स स्कूल को किया गया ब्वाइज स्कूल में मर्ज, आक्रोशित छात्राओं ने 2 घंटे तक कर दिया सड़क जाम
रायपुर। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया जब से हुई है, तब से शिक्षा विभाग में शिकायतों की लंबी फेहरिस्त बन गयी है। कई जगहों पर अफसरों की मनमर्जी पर कार्रवाई हुई है, तो कई जगहों पर छात्र-छात्राओं का आक्रोश भी भड़क रहा है। ऐसा ही मामला राजिम में सामने आया है। युक्तियुक्तकरण के तहत राजिम के फिंगेश्वर कन्या शाला को बॉयज स्कूल में मर्ज कर दिया गया।
अब इस आदेश के खिलाफ छात्राओं ने शनिवार को सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं ने राजिम–महासमुंद मार्ग को दो घंटे तक जाम रखा और मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।फिंगेश्वर कन्या शाला को बॉयज शाला में मर्ज किए जाने के आदेश ने क्षेत्र की छात्राओं और अभिभावकों में नाराजगी पैदा कर दी है।
शनिवार को छात्राओं ने विरोध स्वरूप सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया और राजिम–महासमुंद मुख्य मार्ग को करीब दो घंटे तक जाम कर दिया। इस दौरान छात्राओं ने जमकर नारेबाजी की और जिला प्रशासन से आदेश वापस लेने की मांग की।
पूर्व में भी सौंपा था ज्ञापन
प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि वे पहले ही कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को ज्ञापन सौंप चुकी हैं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि कई बार निवेदन करने के बावजूद प्रशासन ने अब तक मर्ज आदेश रद्द करने पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
छात्रा संध्या बंजारे ने कहा, “हमारे स्कूल को बॉयज स्कूल में मर्ज कर दिया गया है। इससे हमारी पढ़ाई पर असर पड़ेगा। हम चाहते हैं कि हमारा स्कूल जैसा पहले था, वैसा ही रहे।”
पालकों और शिक्षकों का भी समर्थन
इस आंदोलन में केवल छात्राएं ही नहीं, बल्कि उनके पालक और कन्या शाला के शिक्षक भी शामिल हुए। पालकों का कहना है कि कन्या शाला बंद होने से बेटियों की शिक्षा प्रभावित होगी। कई छात्राओं को दूर-दराज के स्कूल में पढ़ने के लिए जाना पड़ेगा, जिससे उनकी पढ़ाई छूटने का खतरा है।
अधिकारियों ने दिया आश्वासन
प्रदर्शन की सूचना मिलने पर एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और छात्राओं को समझाने की कोशिश की। अधिकारियों ने छात्राओं को आश्वासन दिया कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कलेक्टर को ज्ञापन सौंप दिया जाएगा और एक सप्ताह में निर्णय लेने की कोशिश की जाएगी।
आंदोलन फिलहाल खत्म, चेतावनी बरकरार
अधिकारियों के आश्वासन के बाद छात्राओं ने फिलहाल अपना आंदोलन खत्म कर दिया और एसडीएम को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। हालांकि छात्राओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों में आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे आगे और बड़ा आंदोलन करेंगी।स्थानीय लोगों का कहना है कि कन्या शाला को बॉयज स्कूल में मर्ज करने से लड़कियों की पढ़ाई में बाधा आ सकती है।
NHM की हड़ताल को लेकर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा बयान
रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारी लगातार 25वें दिन भी हड़ताल पर डटे रहे। कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से आंदोलन शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांगों में सेवा का नियमितीकरण, वेतनवृद्धि, भत्तों में बढ़ोतरी और कार्य परिस्थितियों में सुधार शामिल हैं। लंबे समय से चली आ रही इन मांगों के समाधान की दिशा में राज्य सरकार ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन कर्मचारी हड़ताल खत्म करने को तैयार नहीं हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने की कर्मचारियों से अपील
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने रविवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। “मैं सभी NHM कर्मचारियों से अपील करता हूं कि वे हड़ताल समाप्त कर सोमवार से काम पर लौटें। ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं, शेष बिंदुओं पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। सरकार के साथ मिलकर हम पत्राचार करेंगे और समाधान निकालेंगे,” मंत्री ने कहा।
सरकार ने उठाए कदम
भाजपा सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए पहले ही एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। बताया गया कि समिति ने कर्मचारियों की 10 में से 5 प्रमुख मांगों पर सहमति दे दी है और इन्हें लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसमें वेतन संरचना में सुधार, मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश और कार्यस्थल सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
कर्मचारियों का रुख
NHM कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं होते, वे हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। एक कर्मचारी नेता ने कहा, “हमने कई बार सरकार से बातचीत की है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला है। इस बार हम तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक हमें लिखित आदेश नहीं मिल जाते।”
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
लगातार हड़ताल के कारण राज्य के ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। टीकाकरण कार्यक्रम, मातृ-शिशु स्वास्थ्य योजनाएं और नियमित जांच-पड़ताल में देरी हो रही है। मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सरकार का संदेश
सरकार का कहना है कि लंबा आंदोलन जनहित में नहीं है और इससे सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “हम कर्मचारियों की जायज मांगों को स्वीकार कर रहे हैं, इसलिए अब उन्हें जनता की सेवा में लौटना चाहिए। आंदोलन से केवल स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा रही है।”
वित्त विभाग में अधिकारियों के हुए तबादले, देखिये पूरी लिस्ट
रायपुर। राज्य सरकार ने वित्त सेवा के कई अफसरों का तबादला किया है। तीन संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारियों का भी तबादला हुआ है, वहीं उप संचालक और वरिष्ठ लेखा अधिकारी स्तर के अधिकारी भी इधर से उधर किये गये हैं।


राजधानी में धरना-प्रदर्शन अब नहीं होगा आसान, चार विभागों से लेनी होगी अनुमति
रायपुर। राजधानी रायपुर में अब सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने के नियम सख्त कर दिए गए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने नया आदेश जारी कर नगर निगम को कार्यक्रमों की अनुमति देने का अधिकार सौंप दिया है। अब शहर में किसी भी प्रकार का पंडाल लगाना, अस्थायी निर्माण करना, रैली या जुलूस निकालना हो, तो आयोजनकर्ता को पहले निगम से अनुमति लेनी होगी।
7 दिन पहले देना होगा आवेदन
आदेश के अनुसार, आयोजन से कम से कम सात दिन पहले नगर निगम के जोन कार्यालय में आवेदन देना होगा। आवेदन में आयोजन स्थल, समय, अपेक्षित भीड़, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य विवरण का उल्लेख करना अनिवार्य होगा।
चार विभागों से लेना होगा NOC
नगर निगम की अनुमति के साथ-साथ चार विभागों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) भी लेना जरूरी होगा:
राजस्व विभाग: आयोजन स्थल और भूमि उपयोग की अनुमति के लिए।
पुलिस विभाग: कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए।
होमगार्ड/अग्निशमन विभाग: अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन इंतजामों के लिए।
विद्युत विभाग: बिजली कनेक्शन और सुरक्षा की जांच के लिए।
निगम का कहना है कि इन NOC के बिना अनुमति पत्र जारी नहीं किया जाएगा।
उद्देश्य – सुरक्षा और अनुशासन
नगरीय प्रशासन विभाग का कहना है कि शहर में बढ़ते आयोजनों के कारण ट्रैफिक, सुरक्षा और स्वच्छता की समस्या सामने आ रही थी। कई बार बिना अनुमति पंडाल बनाए जाते हैं, जिससे हादसे की आशंका रहती है। नया नियम व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।
जुलूस और रैली पर भी लागू होंगे नियम
अब राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक आयोजनों के लिए भी यह नियम लागू होंगे। कोई भी रैली, जुलूस या सार्वजनिक सभा आयोजित करने से पहले निगम से अनुमति लेनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जुर्माना और आयोजन रद्द करना भी शामिल है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भू-अर्जन और सड़क निर्माण में तेजी लाने के दिए निर्देश, धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने नवा रायपुर के विश्राम भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में सड़क निर्माण और अन्य परियोजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई. उन्होंने भू-अर्जन, प्राक्कलन, निविदा, कार्य अनुबंध और कार्यादेश से संबंधित कार्यवाहियों को अगली बैठक से पहले पूरा करने के निर्देश दिए.
उप मुख्यमंत्री ने सड़क, सेतु और भवन निर्माण परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया. उन्होंने जिला कलेक्टरों के साथ मिलकर भू-अर्जन प्रक्रिया में तेजी लाने और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने को कहा. वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को फील्ड में सक्रियता और गंभीरता दिखाने के लिए निर्देशित किया.
श्री साव ने बारिश के तुरंत बाद प्रदेशभर में सड़कों की मरम्मत युद्धस्तर पर शुरू करने और दिसंबर तक इसे पूरा करने का आदेश दिया. उन्होंने डीपीआर तैयार करते समय परियोजनाओं का सटीक मूल्यांकन करने की सलाह दी ताकि बजट और समय-सीमा में बदलाव की जरूरत न पड़े. राष्ट्रीय राजमार्गों और एडीबी परियोजनाओं के अपूर्ण कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई.
बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, सेतु बंध और सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंता मौजूद थे. उप मुख्यमंत्री ने सभी को अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने और प्रस्तावित कार्यों के लिए त्वरित मंजूरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.
GST सुधार से हर परिवार को लाभ, उद्योग-व्यापार को मिलेगी नई गति, मुख्यमंत्री बोले- कांग्रेस काल की कर-प्रणाली से मिली मुक्ति
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में जीएसटी में हुए सुधार देश के डेढ़ सौ करोड़ नागरिकों के जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आए हैं। आयकर में ऐतिहासिक छूट के बाद अब जीएसटी स्लैब का सरलीकरण और रेट में अभूतपूर्व सुधार न केवल आम आदमी के जीवन को खुशहाल बनाएंगे बल्कि व्यापार एवं उद्योग जगत को भी नई गति प्रदान करेंगे। इससे लोगों की बचत में ऐतिहासिक वृद्धि होगी और जीएसटी कानूनों के सरलीकरण से व्यापारी अपने कार्य और अधिक सुगमता से कर सकेंगे। मां शक्ति की आराधना के पावन पर्व ‘नवरात्रि’ से लागू होने वाले ये नए प्रावधान देश को आर्थिक रूप से और भी शक्तिशाली बनाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह बात कही।
कांग्रेस काल की कर-प्रणाली से मिली मुक्ति
मुख्यमंत्री श्री साय ने याद दिलाया कि कांग्रेस शासनकाल में 17 प्रकार के टैक्स और 13 प्रकार के सेस लागू थे। 101वें संविधान संशोधन द्वारा 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने से पहले तक यही व्यवस्था प्रचलित थी। प्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में आयकर दर एक समय अधिकतम 97.5 प्रतिशत तक पहुँच गई थी।
पिछले वर्ष 12 लाख वार्षिक आय को टैक्स-फ्री करने के बाद अब जीएसटी में चार स्लैब की जगह केवल दो स्लैब रखे गए हैं। सभी उपयोगी वस्तुओं को करमुक्त किया गया है और अनेक उत्पादों पर कर में 10 प्रतिशत तक की कटौती की गई है।
90 प्रतिशत सामान सस्ते – हर परिवार को 50 हजार की बचत
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन सुधारों से रोजमर्रा की वस्तुएं—तेल, शैम्पू, टूथपेस्ट, मक्खन, पनीर, सिलाई मशीन, ट्रैक्टर व उसके कलपुर्जे, अन्य कृषि उपकरण, व्यक्तिगत स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, शैक्षणिक वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक एवं ऑटोमोबाइल उत्पाद—सस्ते हो गए हैं। वस्त्र उद्योग विशेष रूप से निर्यात के क्षेत्र में इससे लाभान्वित होगा। एक औसत परिवार, जो प्रतिवर्ष 3 से 3.5 लाख रुपये खर्च करता है, को कम से कम 50 हजार रुपये की बचत होगी।
किसानों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सुधार कृषि क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, रोटावेटर पर जीएसटी घटाकर मात्र 5 प्रतिशत कर दिया गया है। जैव-कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों पर कर कम किया गया है। केवल ट्रैक्टर की खरीदी पर ही किसानों को 25 हजार से 63 हजार रुपये तक की बचत होगी। उदाहरण स्वरूप, 9 लाख रुपये के ट्रैक्टर पर 65 हजार रुपये की बचत होगी, वहीं 35 HP का लगभग 5.8 लाख का ट्रैक्टर अब 41 हजार रुपये सस्ता मिलेगा। देशभर में प्रतिवर्ष बिकने वाले लगभग 9 लाख ट्रैक्टरों से किसानों को 6 हजार करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी। छत्तीसगढ़ में 30–35 हजार ट्रैक्टर प्रतिवर्ष बिकने का अनुमान है, जिससे राज्य के किसानों को लगभग 200 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। केवल ट्रैक्टर के टायर पर ही 7 हजार रुपये की बचत होगी। हार्वेस्टर, बागवानी मशीन, खाद निर्माण मशीन, जैव कीटनाशक, सिंचाई मशीन, ड्रिप इरीगेशन सिस्टम, स्प्रिंकलर आदि पर भी केवल 5 प्रतिशत कर लगने से उत्पादन लागत घटेगी और किसानों का मुनाफा बढ़ेगा।
स्वास्थ्य और जीवन बीमा पूरी तरह टैक्स-फ्री
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस सुधार का एक सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा उत्पादों पर कर पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। यह कदम सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए ऐतिहासिक है। इससे हर नागरिक के लिए बीमा सुनिश्चित करना संभव होगा और गरीब से गरीब व्यक्ति को भी गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
छत्तीसगढ़ को विशेष लाभ
तेंदूपत्ता और लघु वनोपज प्रोसेसिंग मशीनों पर जीएसटी दर कम करने से बस्तर और सरगुजा अंचल के संग्राहकों को बड़ा लाभ होगा। इससे प्रदेश में तेंदूपत्ता जैसे लघु वन्य उत्पादों की मांग बढ़ेगी और राज्य की आमदनी भी बढ़ेगी।
इसी प्रकार, कोयले पर सेस हटाने का निर्णय भी छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आर्थिक सुधार और बेहतरीन प्रबंधन के लिए राज्य को केवल प्रोत्साहन राशि के रूप में 6,200 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।
संघीय सहयोग का उत्कृष्ट मॉडल
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज जीएसटी वास्तव में ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ बन गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में गठित जीएसटी काउंसिल लोकतांत्रिक संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है। छत्तीसगढ़ से पदेन सदस्य के रूप में वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने भी इस सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि, नया जीएसटी सुधार वास्तव में क्रांतिकारी आर्थिक युग का सूत्रपात है। इस सुधार से गरीब और मध्यवर्ग सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में यह सुधार एक नए सुनहरे युग की शुरुआत है। किसानों को अधिक सक्षम बनाकर और रोजगार के अवसर बढ़ाकर यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के सपनों को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगी।
सांसद खेल महोत्सव: निजी विश्वविद्यालयों को सौंपी गई खेल आयोजन की जिम्मेदारी
रायपुर। रायपुर लोकसभा क्षेत्र में 21 सितम्बर से 25 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले सांसद खेल महोत्सव के सफल एवं सुचारू संचालन हेतु आज नया रायपुर स्थित निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक की अध्यक्षता निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार गोयल ने की। इस अवसर पर अतुल शुक्ला सहित रायपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं रजिस्ट्रार उपस्थित रहे।
बैठक में सांसद खेल महोत्सव को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई तथा प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय को खेल आवंटित किए गए, जिनके आयोजन की जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय को सौंपी गई। इस पहल से महोत्सव में विश्वविद्यालय स्तर पर भी व्यापक सहभागिता सुनिश्चित होगी।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, सांसद खेल महोत्सव खेलों के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा मंच प्रदान करेगा। निजी विश्वविद्यालयों की सहभागिता से इस आयोजन को और मजबूती मिलेगी तथा महोत्सव का दायरा और विस्तृत होगा। हमारा प्रयास है कि रायपुर लोकसभा क्षेत्र का यह महोत्सव देश में खेल प्रतिभाओं को उभारने का एक आदर्श बने।

मेडिकल कॉलेज हॉस्टल व आवासीय भवन निर्माण में बड़ा गोलमाल, लेटलतीफी से सरकार को लगा करोड़ों का चूना, शासन ने मानी लापरवाही, कार्रवाई की शर्त पर अब राशि हुई जारी
रायपुर। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर परिसर में आवास गृह (2BHK एवं 3BHK) और छात्र-छात्रावास भवन निर्माण में हुई भारी देरी और लागत में हुई अप्रत्याशित वृद्धि को लेकर राज्य शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन ने इस परियोजना में हुई लापरवाही को स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, यह निर्माण कार्य वन विभाग से प्राप्त शासकीय भूमि पर होना था, लेकिन लंबे समय से परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पाई। निर्माण कार्य में हुई देरी से न केवल परियोजना अधूरी रही, बल्कि इसकी लागत भी काफी बढ़ गई। अब शासन ने पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति देते हुए ₹6139.31 लाख की राशि जारी करने की मंजूरी दी है।
स्वीकृति में यह स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग के व्यय मद संख्या 67 और निर्माण कार्य (#97) के अंतर्गत यह राशि स्वीकृत की गई है। इस निर्णय को वित्त विभाग से भी सहमति मिल चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि यह परियोजना छात्रों और चिकित्सा महाविद्यालय के स्टाफ के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन लंबे समय से इसकी गति बेहद धीमी रही। इससे न केवल छात्रों को आवासीय सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, बल्कि शासन को अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की परियोजनाओं में समयबद्धता और जवाबदेही तय न की जाए, तो लागत बढ़ने और सार्वजनिक धन की बर्बादी के मामले लगातार सामने आते रहेंगे।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर किस स्तर की कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस व्यवस्था लागू की जाती है।
राज्य शासन ने पं. जे.एन. स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर परिसर में आवासीय गृह (2BHK एवं 3BHK) तथा छात्र-छात्रावास भवन निर्माण के लिए पुनरीक्षित राशि स्वीकृत की है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी का आभार प्रकट किया है।
इस आशय के संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए 61.39 करोड़ रुपए की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। विभागीय जानकारी के अनुसार यह स्वीकृति चिकित्सा शिक्षा विभाग से संबंधित व्यय मद से दी गई है और वित्त विभाग ने भी अपनी सहमति प्रदान कर दी है।

एग्रीस्टेक और एकीकृत किसान पोर्टल में होगा किसानों का पंजीकरण, पंजीकृत किसानों से होगी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी
रायपुर। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल की अध्यक्षता में धान खरीदी एवं कस्टम मिलिंग की नीति निर्धारण से संबंधित निर्णय लेने हेतु गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में संपन्न हुई। बैठक में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी तथा राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा उपस्थित थे।

बैठक में आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पंजीकृत किसानों से भारत सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किए जाने के लिए समुचित एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। खरीफ वर्ष 2025-26 में किसानों का पंजीकरण एग्रीस्टेक पोर्टल के साथ-साथ एकीकृत किसान पोर्टल में किया जाएगा। किसान पंजीकरण का कार्य निर्धारित समय-सीमा में संपन्न करने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि किसानों को उनके द्वारा समर्थन मूल्य पर बेचे गए धान का भुगतान समय पर प्राप्त हो, इसके लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएँ। धान उपार्जन के लिए आवश्यक नये एवं पुराने जूट बारदाने की व्यवस्था समयानुसार सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई। धान की रिसाइक्लिंग रोकने हेतु प्रभावी प्रबंध करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध धान की रोकथाम के लिए विशेष जाँच दल गठित करने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार, उपार्जित धान की मिलिंग हेतु आवश्यक तैयारियाँ करने पर भी बल दिया गया।
इस अवसर पर बैठक में सचिव खाद्य विभाग रीना बाबा साहेब कंगाले, सचिव वित्त विभाग मुकेश बंसल, सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग रजत कुमार, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ किरण कौशल, संयुक्त सचिव कृषि विभाग राहुल देव तथा प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के. एन. कांडे उपस्थित थे।
राजनांदगांव में वायरोलॉजी लैब खोलने का प्रस्ताव पारित, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा – NMC के मापदंड को पूरा करने आवश्यक निर्देशों का हो पालन
रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के डीन एवं मेडिकल सुप्रीटेंडेंट की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वशासी समिति एवं प्रबंधकारिणी की बैठकों में स्वीकृत कार्यों की समीक्षा की गई। इसके अलावा मानव संसाधन के तहत नर्सिंग स्टाफ और पैरा मेडिकल पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। साथ ही राजनांदगांव में वायरोलॉजी लैब की स्थापना का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सभी मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल के चिकित्सक सेवा भावना के साथ काम करें और जन अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करें। बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए डीन और मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को स्वशासी समिति के माध्यम से 10 लाख रुपए तक के अति आवश्यक उपकरणों और दवाइयों की खरीदी के अधिकार को बढ़ाते हुए 20 लाख रुपए तक किए जाने पर चर्चा हुई। बैठक में NMC मापदंडों का गैप एनालिसिस भी प्रस्तुत किया गया।
बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि उपकरणों एवं दवाओं के अत्यधिक लंबित क्रय को कॉलेज स्तर पर पूरा करने के लिए CGMSC द्वारा मेडिकल कॉलेजों को त्वरित रूप से एनओसी मिले। साथ ही अग्रिम राशि को शीघ्र प्रदाय किए जाने के लिए निर्देशित किया गया। साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत नवीन परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें नए मेडिकल कॉलेज, फिजियोथेरेपी कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं।
बैठक में अवसंरचना विकास के तहत छात्रावास भवन, कॉलेज भवन, आंतरिक सड़क, पेयजल व्यवस्था और विद्युतीकरण की दिशा में कार्य करने का निर्णय लिया गया। सुविधाओं के अंतर्गत उपकरण उपलब्धता, CGMSC को समय पर मांग पत्र प्रेषण, वित्तीय राशि के निर्गमन तथा खरीद प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। दवाइयों एवं उपभोग्य सामग्रियों की आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, डीकेएस एवं अन्य सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की सेवाओं और आउटसोर्सिंग सेवा प्रदाताओं की मॉनिटरिंग पर भी चर्चा की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा एवं सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और मेडिकल सुप्रीटेंडेंट उपस्थित थे।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा ने की बस्तर ओलंपिक की तैयारियों की समीक्षा
रायपुर। उप मुख्यमंत्री साव के नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आज आयोजित बैठक में पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी बस्तर ओलंपिक का वृहद आयोजन करने इसकी रुपरेखा और व्यवस्थागत तैयारियों पर गहन चर्चा की गई।
आगामी अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले बस्तर ओलंपिक में तीन स्तरों विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें बस्तर संभाग के सातों जिलों और 32 विकासखंडों के 40 हजार से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे। खेल और युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संयुक्त सचिव सुखनाथ अहिरवार और संचालक तनूजा सलाम भी बैठक में शामिल हुईं।
बस्तर के युवाओं को खेल से जोड़ना चाहती है सरकार : अरुण साव
उप मुख्यमंत्री, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बैठक में कहा कि बस्तर ओलंपिक केवल खेलों का आयोजन नहीं है, बल्कि विकास और खेल का संगम है। यह संगठित रूप से बस्तर के युवाओं के सशक्तीकरण और उनमें नेतृत्व के विकास की पहल है। राज्य सरकार इन रचनात्मक पहलों से बस्तर में भयमुक्त वातावरण बनाकर युवाओं को खेल और उत्सव से जोड़ना चाहती है। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के सफल आयोजन के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर पुख्ता कार्ययोजना तैयार करते हुए आयोजन के ध्येय वाक्य ‘करसाय ता बस्तर बरसाय ता बस्तर’ (खेलेगा बस्तर जीतेगा बस्तर) को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। साव ने यूथ आइकॉन घोषित किए गए पिछले वर्ष के विजेता खिलाड़ियों, बस्तर संभाग के सभी खेल अधिकारियों, पीटीआई, पंचायत सचिवों, ‘बिहान’ की महिलाओं और खेल संघों को सक्रियता से जोड़कर बस्तर ओलंपिक को जन-जन तक पहुंचाने को कहा।
गांवों के बच्चों की भागीदारी सुनिश्चत करें : विजय शर्मा
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों से कहा कि बस्तर ओलंपिक को यादगार बनाने सभी विभाग अपनी-अपनी भूमिका और कार्यों के अनुरूप जिम्मेदारियों का वहन करें। बस्तर के ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों की भागीदारी उनका आत्मविश्वास बढ़ाएगी और सकारात्मक वातावरण तैयार करेगी। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए इसमें बस्तर के सभी गांवों के सभी बच्चों की भागीदारी सुनिश्चत करने को कहा। शर्मा ने आयोजन की तैयारियों को मूर्त रूप देने जल्दी ही इससे जुड़े विभागों, अधिकारियों और संस्थाओं की बस्तर में भी बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए जिससे की तैयारियों को और गति दी जा सके।
नक्सल हिंसा के दिव्यांग और आत्मसमर्पित नक्सली भी दिखाएंगे दमखम
विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर करीब डेढ़ महीने तक चलने वाले बस्तर ओलंपिक में 11 खेलों को शामिल किया गया है। जूनियर वर्ग में बालक और बालिकाओं तथा सीनियर वर्ग में महिला और पुरूषों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी। नक्सल हिंसा के दिव्यांगों तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी संभाग स्तर पर पुरूषों और महिलाओं के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बस्तर ओलंपिक के दौरान एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में पूरे बस्तर के खिलाड़ी अपना खेल कौशल दिखाएंगे।
मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने की नक्सल प्रभावित जिलों में विकास कार्यों की समीक्षा
रायपुर। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक में बस्तर, सुकमा, दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा, उत्तर बस्तर कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और गरियाबंद जिलों में हितग्राही मूलक कार्यक्रमों और योजनाओं की समीक्षा की गई।
प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने नक्सल प्रभावित जिलों में मनरेगा, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, जनधन खाता, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आधार कार्ड सहित अन्य हितग्राही मूलक कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की।


बैठक में बताया गया कि एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों में लगभग 99 प्रतिशत से अधिक लोगों का आधार पंजीकरण पूरा कर लिया गया है। इसी प्रकार लगभग 28 लाख 18 हजार 616 किसानों का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत पंजीकरण कर उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 26 लाख 21 हजार 491 हितग्राहियों के बैंक खाते खोले गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 35 लाख 66 हजार 409 हितग्राहियों को गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ग्रामीण इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मोबाइल टावर स्थापित किए जा रहे हैं। क्षेत्र में लोगों को अधिक से अधिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु विभिन्न बैंकों और डाकघरों की शाखाएं खोली जा रही हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सभी पात्र हितग्राहियों को नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए राशन कार्ड बनाए गए हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने निर्देशित किया कि क्षेत्र के सभी पात्र मनरेगा हितग्राहियों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु उनका जॉब कार्ड अवश्य प्रदान किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत सभी आवासों का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए तथा सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने निर्देश दिया कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत शेष हितग्राहियों का शीघ्र सर्वे कर उन्हें लाभान्वित किया जाए। आत्मसमर्पित नक्सलियों को कौशल विकास योजना के तहत क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाए। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की भवन-विहीन शालाओं के भवन शीघ्र निर्मित किए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय एक ही परिसर में हों।
वीडियो कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, वित्त विभाग के सचिव मुकेश बंसल, शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, उच्च शिक्षा, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव डॉ. रवि मित्तल, आयुक्त बस्तर संभाग तथा पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सहित बस्तर, सुकमा, दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा, उत्तर बस्तर कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और गरियाबंद जिलों के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक शामिल थे।