रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य के घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल में रियायत देने के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -
- मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (M-URJA) - राज्य के घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत देने के लिए मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान राज्य में 01 दिसम्बर 2025 से लागू है, जिसके तहत घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को 100 यूनिट से बढ़ाकर अब 200 यूनिट प्रति माह तक बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा। यह लाभ 400 यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।
राज्य में 200 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को अगले एक वर्ष तक 200 यूनिट तक, बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट का लाभ मिलेगा, इससे 6 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, ताकि इस अवधि में वे अपने घरों में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित करा सके।
इस तरह मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान से प्रदेश के 42 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना का लाभ प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को मिलेगा।
गौरतलब है कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य शासन की ओर से सब्सिडी दी जा रही है, जिसके तहत 1 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 15,000 रुपये तथा 2 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर 30,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। यह व्यवस्था राज्य में सौर ऊर्जा अपनाने को प्रोत्साहित करेगी और आने वाले समय में उपभोक्ताओं को हाफ बिजली से फ्री बिजली की ओर ले जाएगी।
- छत्तीसगढ़ भण्डार क्रय नियम, 2002 में स्थानीय लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों से क्रय को प्रोत्साहन देने तथा जेम पोर्टल में क्रय की स्पष्टता के लिए संशोधन किए जाने का निर्णय लिया गया। इन संशोधन से क्रय प्रक्रिया का सरलीकरण होगा, पारदर्शिता में वृद्धि होगी, प्रतिस्पर्धा को बढा़वा मिलेगा तथा समय और संसाधनों की बचत होगी।
- मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
- मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना (नियोजन एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 2017 (क्र. 21 सन् 2018) में संशोधन हेतु छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के रिफॉर्म्स और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
खैरागढ़। कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ चल रही एजेंसी कार्यवाहियों के विरोध में सोमवार को जिला मुख्यालय खैरागढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर टैंपो चौक में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री और ईडी का पुतला दहन किया। इस दौरान पुतला दहन रोकने पहुंची पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक और हल्की झूमाझटकी हुई, जिससे माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण रहा। बाद में पुलिस और पदाधिकारियों की समझाइश पर स्थिति सामान्य हो गई।
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र पर विपक्ष की आवाज़ दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की नीतियों पर चल रही है। डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने कहा कि “लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस हर मोर्चे पर लड़ाई जारी रखेगी। एजेंसियों का दुरुपयोग कर सरकार विपक्ष को डराने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।”
जिला कांग्रेस अध्यक्ष कोमल साहू ने भी चेतावनी दी कि यदि केंद्र ने “दमनकारी कार्रवाई” बंद नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। प्रदर्शन में विधायक हर्षिता स्वामी बघेल की मौजूदगी रही, जबकि स्थानीय विधायक यशोदा वर्मा का कार्यक्रम से गैरहाजिर रहना चर्चा का विषय बन गया। कई पार्षदों की अनुपस्थिति पर जिलाध्यक्ष साहू ने टिप्पणी की कि “मैदान में वही दिखता है, जो सचमुच काम करता है।” टैंपो चौक क्षेत्र में करीब एक घंटे तक राजनीतिक तनाव के बाद स्थिति नियंत्रण में रही और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हुआ।
रायपुर। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य सहित तीन प्राध्यापकों को जेम पोर्टल के माध्यम से सामग्री खरीदी में अनियमितता के फलस्वरूप तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन रायपुर से आदेश जारी किए गए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजिम की प्राचार्य डॉ. सविता मिश्रा, सहायक प्राध्यापक डॉ. मोहन लाल वर्मा, सहायक प्राध्यापक देवेन्द्र देवांगन, सहायक प्राध्यापक मनीषा भोई के द्वारा जेम पोर्टल के माध्यम से की गई क्रय की गई सामग्री में आर्थिक अनियमितता में प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाई गई है। जेम पोर्टल के माध्यम से क्रय की गई सामग्री में इनके द्वारा छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया है।
राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजिम की प्राचार्य तथा सहायक प्राध्यापकों को सिविल सेवा नियम के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए इनका मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय रायपुर नियत किया गया है।
रायपुर। राजधानी नया रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिसॉर्ट में आयोजित पाञ्चजन्य कॉनक्लेव ‘दंतेश्वरी डायलॉग’ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल, बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों में विकास, नक्सल उन्मूलन, औद्योगिक निवेश, महिला सशक्तिकरण तथा नई टेक्नोलॉजी आधारित विकास मॉडल सहित अनेक विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विभिन्न सवालों के सरल और स्पष्ट उत्तर देकर सरकार की योजनाओं और आगामी रोडमैप की जानकारी दी।
महिला सशक्तिकरण सबसे बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि दो वर्षों में महतारी वंदन योजना महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बनी है।70 लाख महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए की सम्मान राशि दी जा रही है, जिससे परिवारों में पोषण, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में सकारात्मक बदलाव आया है।
टेक-ड्रिवन छत्तीसगढ़ – नई औद्योगिक नीति में विशेष प्रावधान
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसमे रोजगार को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही नई औद्योगिक नीति में निवेश को आकर्षित करने के लिए आकर्षक अनुदान,सिंगल विंडो सिस्टम,250 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार को भी शामिल किया गया है। इसी का परिणाम है कि अभी तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। नई औद्योगिक नीति में आईटी, एआई, ग्रीन टेक व सेमीकंडक्टर जैसी नई पीढ़ी की इंडस्ट्री को प्रोत्साहन दिया गया है।नवा रायपुर को आईटी हब, सेमीकंडक्टर प्लांट, और एआई डेटा सेंटर पार्क के रूप में विकसित करने का काम जारी है।
बस्तर का विकास – स्थानीय पहचान और आधुनिक अवसरों का संतुलित मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर का विकास स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के संतुलन के आधार पर होगा। कृषि, सिंचाई, जैविक खेती, वनोपज प्रसंस्करण, पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
वनोपज संग्राहकों के लिए बेहतर सुविधा
प्रधानमंत्री वनधन योजना और वनोपज आधारित प्रसंस्करण के विस्तार से संग्राहकों की आय में वृद्धि हो रही है।
नक्सलवाद के विरुद्ध ‘सामाजिक मनोवैज्ञानिक मोड़’
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली जाकर नक्सल पीड़ितों द्वारा अपनी बात रखना ऐतिहासिक कदम है। इससे बस्तर के लोगों में बड़ा आत्मविश्वास आया और देश के सामने माओवादी हिंसा का वास्तविक चेहरा उजागर हुआ।
मतांतरण पर सख्त कार्रवाई और सांस्कृतिक सुरक्षा पर जोर
उन्होंने कहा कि प्रलोभन या दबाव से होने वाले मतांतरण रोकने के लिए लगातार कड़ी कार्रवाई हो रही है। इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाने की भी तैयारी की जा रही है।
जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य व डिजिटल कनेक्टिविटी में तेजी से सुधार
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर और सरगुजा में मोबाइल टावरों की स्थापना, स्कूलों का पुनः संचालन और युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षा गुणवत्ता में तेजी से वृद्धि हुई है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और सुविधाओं का विस्तार
नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, KCC कार्ड, बिजली, पानी, सड़क और अन्य सुविधाएँ तेजी से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
दो वर्षों में गारंटियों का सफल क्रियान्वयन
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित अधिकांश गारंटियाँ पूरी की जा चुकी हैं। इनमें 18 लाख आवास स्वीकृत,किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य,महतारी वंदन योजना,तेंदूपत्ता संग्राहकों की बढ़ी हुई राशि,भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता आदि शामिल है। इसके अलावा प्रदेश में माओवाद पर निर्णायक प्रहार किया गया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की जनता के हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता एवं रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एक बार फिर अपनी दृढ़, संवेदनशील और जननायक शैली का परिचय दिया है। प्रदेश में भूमि खरीदी-बिक्री के लिए कलेक्टर गाइडलाइन दरों में 100 से 800 प्रतिशत तक की वृद्धि पर आपत्ति जताते हुए, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को विस्तृत पत्र लिखकर इस निर्णय को तत्काल स्थगित कर पुनर्विचार करने की मांग की है।
अपने पत्र में अग्रवाल ने लिखा है कि, प्रदेश में बिना किसी जन-परामर्श, बिना किसी वास्तविक मूल्यांकन और बिना सामाजिक-आर्थिक प्रभावों की समीक्षा के कलेक्टर गाइड लाइन दरों में अनियोजित वृद्धि कर दी गई है। इससे पूरे प्रदेश में अनेक वर्गों में असंतोष उफान पर है। किसान, छोटे व्यवसायी, कुटीर-उद्यमी, मध्यम वर्ग, छोटे रियल एस्टेट क्षेत्र और निवेशक - सभी इस निर्णय के खिलाफ है व्यापक विरोध को देखते हुए यह निर्णय किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। सांसद अग्रवाल ने स्पष्ट कहा है कि यह वृद्धि ‘‘इज ऑफ लिविंग’’ और ‘‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’’ दोनों के विपरीत है और प्रदेश की आर्थिक रीढ़ पर सीधी चोट है।
उन्होंने लाभांडी और निमोरा जैसे गाँवों के चौंकाने वाले उदाहरण प्रस्तुत कर बताया कि किस प्रकार बिना किसी वास्तविक मूल्यांकन के गाइडलाइन दरों में 725% और 888% तक की वृद्धि कर दी गई है, जो किसी भी आर्थिक न्याय का पालन नहीं करती।
साथ ही, नवा रायपुर के ग्रामीण क्षेत्रों को बिना आवश्यक सुविधाएँ विकसित किए नगरीय क्षेत्र घोषित करने पर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं।
सांसद अग्रवाल का कहना है कि, गाइड लाइन दर में वृद्धि पर दावा किया जा रहा है कि किसानों को भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवजा मिलेगा। परन्तु वस्तुस्थिति बिल्कुल अलग है। भूमि का केवल 1% हिस्सा ही अधिग्रहण में आता है, किंतु 99% जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल दिया गया है। गाइडलाइन मूल्य 100% बढ़ाने के बाद भी पंजीयन शुल्क 4% बनाए रखना जनता के साथ अन्याय है, जिसे घटाकर पुनः 0.8% किया जाना चाहिए।
अपने पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि, 20/11/2025 को लागू नई गाइडलाइन वृद्धि को तत्काल स्थगित किया जाए। पूर्ववत गाइडलाइन पुनः लागू की जाए साथ ही स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन कर वास्तविक बाजार मूल्यांकन कराया जाए। श्री अग्रवाल ने नवा रायपुर में सम्मिलित ग्रामीण क्षेत्रों को नगरीय क्षेत्र से करने तथा पंजीयन शुल्क 4% से घटाकर 0.8% किया जाए।
प्रदेश की जनता के हक में खड़े होने वाले सशक्त और मुखर जननेता सांसद बृजमोहन अग्रवाल हमेशा ही जनसमस्याओं को शासन तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए संघर्ष करने के लिए पहचाने जाते हैं। इस मुद्दे पर उनका हस्तक्षेप एक बार फिर यह साबित करता है कि वे राजनीति में नहीं, जनसेवा में विश्वास करते हैं। उनका यह कदम प्रदेश की लाखों परिवारों की आवाज बनकर उभरा है।
जनभावनाओं का सम्मान हो यही लोकतंत्र का आधार है,
और इसी विश्वास के साथ सांसद अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से तत्काल राहत देने की अपेक्षा की है।
रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता और जनसेवा के अटूट संकल्प के साथ रायपुर के लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में एक बार फिर प्रदेश की महत्वपूर्ण जरूरतों को मजबूती से उठाया। उनके द्वारा पूछे गए प्रश्न पर कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2023-24 में छत्तीसगढ़ को कुल 397.91 करोड़ रुपये का सीएसआर फंड प्राप्त हुआ, जिसमें सामाजिक आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई।
सबसे गौरवपूर्ण तथ्य यह रहा कि रायपुर जिले ने पूरे राज्य में सर्वाधिक 110.25 करोड़ रुपये का सीएसआर फंड आकर्षित किया। यह उपलब्धि सांसद बृजमोहन अग्रवाल की दूरदृष्टि, निरंतर प्रयासों और विभिन्न कंपनियों व मंत्रालयों के साथ उनकी सकारात्मक संवाद क्षमता का परिणाम है।
CSR से 143.58 करोड़ रुपये शिक्षा एवं दिव्यांगजन कल्याण पर, 127.64 करोड़ रुपये स्वास्थ्य, भूख-गरीबी उन्मूलन, जल संसाधन एवं स्वच्छता पर और 81.97 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास पर खर्च किए गए।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सीएसआर नीति को जनकल्याण का शक्तिशाली माध्यम बनाया गया है, और छत्तीसगढ़ इसका बड़ा लाभ उठा रहा है। उन्होंने बताया कि रायपुर सहित पूरे प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा, युवाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और ग्रामीण विकास पर सीएसआर फंड का प्रभाव तेजी से दिख रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में और अधिक कंपनियों को छत्तीसगढ़ की ज़रूरतों और संभावनाओं की ओर आकर्षित कर सीएसआर फंड में और वृद्धि कराना उनका लक्ष्य है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मंत्रालय के सहयोग हेतु आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “छत्तीसगढ़ के विकास के लिए मैं सदैव प्रतिबद्ध रहा हूँ। यह संसाधन हमारे युवाओं, महिलाओं, किसानों, दिव्यांगजनों और ग्रामीण क्षेत्रों को नई शक्ति देंगे। रायपुर को सामाजिक आधारिक संरचना का एक सशक्त मॉडल बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम है।”
इस प्रकार, संसद में उनकी सक्रियता और प्रदेश के विकास के लिए सतत प्रयासों से छत्तीसगढ़ को एक बार फिर बड़ा लाभ मिला है।
रायपुर। रायगढ़ दौरे से लौटने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को रायपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। सीएम ने जहां केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय, राजभवन और केंद्रीय सचिवालय के नए नामकरण का स्वागत किया, वहीं नक्सलियों के बढ़ते आत्मसमर्पण को राज्य की प्रभावी पुनर्वास नीति का परिणाम बताया।
केंद्र सरकार द्वारा नए परिसरों के नामकरण पर CM साय ने जताया स्वागत
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर का नाम ‘सेवा तीर्थ’, राजभवनों के नाम बदलकर ‘लोक भवन’ और केंद्रीय सचिवालय का नाम ‘कर्तव्य भवन’ किए जाने के निर्णय पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- “यह बहुत अच्छी पहल है। इन नामों में राष्ट्र के प्रति सेवा, कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना झलकती है। मैं इस निर्णय का हृदय से स्वागत करता हूँ।”
नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर सरकार की नीति प्रभावी— मुख्यमंत्री
प्रदेश में नक्सल गतिविधियों के लगातार कम होने और आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाओं पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य की पुनर्वास नीति बेहद प्रभावी साबित हो रही है। उन्होंने कहा- “नक्सली लगातार सरेंडर कर रहे हैं। सरकार उनकी भविष्य की चिंता कर रही है। आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक असर दिख रहा है और बड़ी संख्या में नक्सली हथियार छोड़कर शांति का रास्ता अपना रहे हैं।”
साहित्य उत्सव: रजत जयंती को यादगार बनाने की तैयारी
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि इसे यादगार बनाने के लिए कई विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में साहित्य उत्सव का आयोजन भी प्रस्तावित है। सीएम ने कहा- “इस बार साहित्य उत्सव भव्य पैमाने पर होगा। इसमें देशभर से 100 से अधिक साहित्यकारों की उपस्थिति रहेगी। जनवरी 2026 में इसका आगाज किया जाएगा, जो राज्य के सांस्कृतिक परिदृश्य को नई दिशा देगा।”
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुसार नवा रायपुर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला सह एफडीए भवन के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 46 करोड़ 49 लाख 45 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्य बजट 2025-26 के प्रावधान के अनुरूप इस महत्वपूर्ण परियोजना से प्रदेश में खाद्य एवं औषधि परीक्षण क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।
नवीन इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला और नवीन एफडीए भवन का रायपुर में स्थापना करने के लिए शासन द्वारा नया रायपुर में 1.5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। रायपुर स्थित वर्तमान प्रयोगशाला लगभग 5 हजार वर्ग फीट (भूतल, प्रथम एवं द्वितीय तल) में संचालित है। प्रस्तावित नवीन प्रयोगशाला अत्याधुनिक उपकरणों (ड्रग एवं इनफोर्समेंट) से सुसज्जित होगा तथा 30 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में (भूतल, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तल) में निर्मित होगा। इसके निर्माण से रासायनिक परीक्षणों की जांच क्षमता 500–800 नमूने प्रतिवर्ष से 7000–8000 नमूने प्रतिवर्ष हो जाएंगी। माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण (इंजेक्शन, आई ड्रॉप आदि) 2000 नमूने प्रतिवर्ष होंगे, मेडिकल डिवाइसेस (हाथ के दस्ताने, कैथेटर आदि) जिनका वर्तमान में परीक्षण नहीं किया जा रहा है उनका भी 500 नमूने प्रतिवर्ष लिए जाएंगे। इसके साथ ही फार्मास्यूटिकल्स नमूनों की जांच 50 से बढ़कर 1000 नमूने प्रतिवर्ष हो जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रयोगशाला राज्य में खाद्य सुरक्षा के ढांचे को और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि इससे जांच प्रक्रिया अधिक आसान, पारदर्शी और प्रभावी होगी। सरकार जनता को शुद्ध, प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद और दवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में बनने वाली यह आधुनिक प्रयोगशाला राज्य के लिए एक आदर्श प्रयोगशाला के रूप में विकसित होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज रायगढ़ के बोईरदादर में आयोजित अखिल भारतीय कंवर समाज के वार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज की मांग पर 30 लाख रुपए की लागत से निर्मित सामुदायिक भवन के प्रथम तल का लोकार्पण किया। समाज के वरिष्ठजनों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कंवर समाज के पुरोधाओं को नमन करते हुए कहा कि समाज का विकास शिक्षा से ही संभव है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि विभिन क्षेत्रों में सफल बनने का माध्यम भी है। हर बेटा-बेटी को शिक्षित करना ही समाज को मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज के उत्थान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। आदिवासियों एवं क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है जिसका लाभ लोगों को मिल रहा है। उन्होंने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आव्हान भी किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित कर जनजातीय समुदाय के सम्मान को नई ऊंचाई दी है। उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष और पीएम जनमन कार्यक्रम की शुरूआत की है। यह आदिवासी कल्याण के क्षेत्र में आजादी के बाद सबसे बड़ा अभियान है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं जनजातीय परिवारों को उपलब्ध करायी जा रही है। इन योजनाओं से जनजातीय क्षेत्रों में तेज गति से विकास हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की रजत जयंती समारोह के अवसर पर रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय का लोकार्पण किया है। संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों का देश के लिए योगदान जीवंत रूप में प्रदर्शित हो रहा है। यह आने वाली पीढ़ियों को हमारे वीर नायकों के शौर्य और बलिदान से परिचित कराता रहेगा। यह हमारे आदिवासी समाज के लिए भी गौरव की बात है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने पर राज्य के विकास-पीडीएस प्रणाली, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यापक विस्तार का उल्लेख करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के बाद गांव-गांव तक पहुंच मार्ग और विकास की रोशनी पहुँची है। राज्य में नक्सलवाद विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है, लेकिन सरकार के प्रयासों से यह अंतिम सांस ले रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की नई औद्योगिक नीति के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। हम उद्योग धंधों के माध्यम से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास कर रहे है। इसके साथ ही हमारी सरकार प्रदेश के सभी समाज को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, इसका लाभ अवश्य उठाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं, जिनमें कंवर समाज के लिए बोईरदादर रायगढ़ मे एक और सांस्कृतिक भवन के साथ मुख्य मार्ग तक सीसी रोड का निर्माण, लैलूंगा के टुरटूरा में नए समाजिक भवन, लैलूंगा और घरघोड़ा में निर्मित सामाजिक भवन के विस्तार की घोषणा की।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय, लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, महापौर जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, भरत साय, सत्यानंद राठिया, अनंतराम पैंकरा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर। खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने जिले के लखौली, मंदिरहसौद और पलौद धान खरीदी केन्द्रों का दौरा किया। श्रीमती कंगाले ने किसानों से सीधे संवाद कर उनसे व्यवस्थाओं एवं उपार्जन प्रक्रिया से जुड़े फीडबैक प्राप्त किए। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा और पारदर्शिता सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसान से ही धान खरीदी की जाए और कोचियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। साथ ही गेट पास एप्प में समयबद्ध एंट्री हर हाल में सुनिश्चित की जाए। यह ध्यान रखें कि छोटे एवं सीमांत किसानों के टोकन कटने में कोई बाधा न हो। उन्होंने कहा कि तौल प्रक्रिया, बारदाना उपलब्धता, नमी मापक यंत्र, स्टैकिंग व्यवस्था सहित सभी आवश्यक प्रबंधों की बारीकी से जांच की। कलेक्टर डॉ गौरव सिंह ने कहा कि जितनी धान खरीदी की जाए उसका भौतिक सत्यापन भी किया जाए। साथ ही यह ध्यान रखें की किसानों को धान देने में किसी भी प्रकार की समस्या न होे।
निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर नम्रता जैन, जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरजन, एसडीएम नंदकुमार चौबे, खाद्य नियंत्रक भूपेन्द्र मिश्रा, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की सीईओ अपेक्षा व्यास सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने विधानसभावार प्रभारियों के साथ जिला संगठन प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति की है. एक तरफ जहां 36 विधानसभा प्रभारियों के साथ 36 जिला संगठन प्रभारियों की नियुक्ति की गई है.
रायपुर। नवाचार केवल प्रयोगशालाओं और कक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, इसे समाज से जोड़ना होगा। राज्यपाल रमेन डेका ने आज संस्थान नवाचार परिषद (आईआईसी) के क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उक्त बातें कहीं। इनोवेशन सेल, ऑल इंडिया तकनीकी शिक्षा परिषद शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आज शंकराचार्य व्यावसायिक प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर में यह सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें राज्यपाल श्री डेका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
छोटा सा नवाचार मानव की बड़ी जरूरतों को पूरा करता है
श्री डेका ने कहा कि यह सम्मेलन न केवल इस संस्थान के लिए बल्कि हमारे राज्य के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की राष्ट्रीय नवाचार यात्रा में छत्तीसगढ़ की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प, कृषि, वनोपज और जनजातीय ज्ञान की भूमि है। सही रूप में किया गया नवाचार हमारी स्थानीय शक्तियों का मूल्य संवर्धन करके उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य और आर्थिक व तकनीकि रूप से उन्नत बनाता है, इसमें हमारे युवाओं की महती भूमिका है। एक छोटा सा नवाचार मानव की बड़ी जरूरतों को पूरा कर सकता है।
अपने विचारों को वास्तविक समस्याओं का समाधान करने की दिशा में आगे बढ़ाएं
श्री डेका ने कहा कि 21वीं सदी के विद्यार्थी सौभाग्यशाली हैं। इस सदी में इंटरनेट सबसे बड़ी खोज है। श्री डेका ने कहा कि सतत् विकास आज की सबसे बड़ी जरूरत है और यह विज्ञान से ही संभव है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, माइक्रो प्लास्टिक और मधुमेह की बीमारी को वर्तमान की सबसे बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि युवा विद्यार्थी इस क्षेत्र में नवाचार कर इसका समाधान ढूंढ़ सकते हैं, जिसके लिए वे अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप भारत के भविष्य के पेशेवर और भविष्य निर्माता हैं। केवल लाभ पाने के लिए नहीं बल्कि उद्देश्य के लिए नवाचार करें। अपने विचारों को वास्तविक समस्याओं का समाधान करने की दिशा में आगे बढ़ाएं। असफलता से न डरें क्योंकि हर असफलता आपको बेहतर प्राप्त करना सिखाती है। युवाओं का साहस, जिज्ञासा और प्रतिबद्धता वर्ष 2047 के भारत को परिभाषित करेगी और भारत 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करेगा।
राज्यपाल ने संस्थान के तकनीकी विभाग के लैब का किया अवलोकन
कार्यक्रम में उपस्थित एआईसीटीई नई दिल्ली के उपनिदेशक डॉ. निखिल कांत ने सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। एसएसआईपीएमटी भिलाई के चेयरमैन आई पी मिश्रा ने भी अपना संबोधन दिया। निदेशक निशांत त्रिपाठी ने स्वागत भाषण और प्राचार्य आलोक जैन ने आभार प्रदर्शन किया। राज्यपाल ने संस्थान के तकनीकी विभाग में संचालित आईडिया लैब का अवलोकन कर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर संस्थान के पदाधिकारी, फेकल्टी मेंबर, शिक्षक, विद्यार्थी उपस्थित थे।
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में राजभवन में 6 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर श्री डेका ने कहा कि राज्यों की विविधताओं को राष्ट्रीय एकता एक सूत्र में पिरोती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रारंभ हुआ ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान इसी एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का सशक्त प्रतीक है।
विविधता भारत को विश्व में अद्वितीय बनाती है
राजभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली, उत्तराखण्ड, लक्षद्वीप, और पुडुचेरी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि भाषाओं, वेशभूषा, खान-पान, कला और परंपराओं में भिन्नता होने के बावजूद हमारी आत्मा एक है। यही विविधता भारत को विश्व में अद्वितीय बनाती है। केन्द्र सरकार के “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” कार्यक्रम के तहत विविधता में एकता की भावना को बढ़ावा देने के लिए सभी राज्य एक दूसरे का स्थापना दिवस मनाते है। इसी कड़ी में आज राजभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम में इन राज्यों का स्थापना दिवस हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया।
कला और स्थापत्य को ऊंचाई दी विजय नगर साम्राज्य ने
राज्यपाल ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक ईकाई नहीं है बल्कि हजारों वर्षाे की सभ्यता संस्कृति, परंपरा और मूल्यों का जीवंत संगम है। श्री डेका ने विभिन्न राज्यों की विशेषताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक राज्य प्राचीन विरासत और आधुनिक तकनीक का संगम है। बीते युग में विजय नगर साम्राज्य ने कला और स्थापत्य को ऊंचाई दी, वैसे ही आज बैंगलुरू भारत का आईटी हब बन गया है। कर्नाटक अपने प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति के साथ-साथ भाषा और साहित्य में समृद्ध है।
भारतीय ज्ञान को समृद्ध किया संगम साहित्य ने
राज्यपाल ने कहा कि तमिलनाडु भारत की द्रविड़ सभ्यता का केंद्र है। भारत की सबसे प्राचीन भाषाओं में एक तमिल भाषा की यह भूमि, महान मंदिर स्थापत्य, भरतनाट्यम नृत्य, संगीत और समृद्ध साहित्य परंपरा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। संगम साहित्य और तिरूक्कुरल जैसे ग्रंथों ने भारतीय ज्ञान को समृद्ध किया है। तमिलनाडु देश की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभाता है। इस राज्य ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कर्नाटक के बाद तमिलनाडु देश का सबसे बड़ा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विकास क्षेत्र है।
हमारे राष्ट्र के गौरव के प्रतीक हमारी इमारतें
राज्यपाल ने कहा कि दिल्ली हमारी राजधानी ही नहीं बल्कि देश का दिल भी है। यह वह भूमि है जहां इतिहास ने करवट ली है। यहां की गलियों में भारत का इतिहास सांस लेता है, चाहे वह प्राचीन इन्द्रप्रस्थ की कहानी हो या आधुनिक भारत का स्वतंत्रता संग्राम हो। लाल किला, कुतुब मीनार, संसद भवन, इंडिया गेट- ये केवल इमारतें नहीं बल्कि हमारे राष्ट्र के गौरव के प्रतीक हैं। यहां सांस्कृतिक विविधता हर गली और मोहल्ले में देखने मिलती है।
प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर राज्य में उत्तराखंड और छत्तीसगढ़
श्री डेका ने कहा कि उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना एक साथ हुई थी। दोनों राज्यों में कई समानताएं है जैसे इन राज्यों में आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है और कृषि उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। उत्तराखंड की हिमालय की चोटियां, नदियां और घने जंगल इसकी पहचान है वहीं छत्तीसगढ़ भी जंगल, नदियां, पहाड़ और प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर राज्य है। सतत् विकास और पारिस्थितिक संतुलन के लिए दोनों राज्यों में समान चुनौतियां हैं।
खूबसूरत समुद्र तटों और उस समय की सभ्यता की झलक पुडुचेरी में एवं जैव विविधता से समृद्ध लक्षद्वीप
राज्यपाल ने कहा कि पुडुचेरी अपने फ्रांसीसी स्थापत्य, आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक समन्वय के लिए प्रसिद्ध है। प्राचीन काल में पुडुचेरी फ्रांस के साथ व्यापार का मुख्य केंद्र था। आज कई पर्यटक यहां के खूबसूरत समुद्र तटों और उस समय की सभ्यता की झलक पाने के लिए आते हैं। हिन्द महासागर में स्थित अनमोल द्वीप समूह लक्षद्वीप अपने नीले पानी, स्वच्छ समुद्र तट और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। आज जब पूरा विश्व पर्यावरण संकट की चुनौती से जुझ रहा है, तब लक्षद्वीप की जीवनशैली हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन की प्रेरणा देती है।
विविधता ही भारत की असली शक्ति
राज्यपाल ने कहा कि इन सभी प्रदेशों की विविधता ही भारत की असली शक्ति है। एक भारत श्रेष्ठ कार्यक्रम इसी भावना को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम है। आज जब देश आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब हमें इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के योगदान को और अधिक मजबूती देनी होगी। उन्होंने लोगों का आव्हान किया कि एक कार्य ऐसा जरूर करें, जिसमें मानवीय सेवा निहित हो। पर्यावरण और स्वच्छता का संदेश भी उन्होंने दिया।
विभिन्न राज्यों की संस्कृति एवं लोक परंपरा आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति दी विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने
समारोह में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने अपने राज्यों की विशेषताओं, परंपरा, संस्कृति पर प्रकाश डाला। राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना ने भी तमिलनाडु राज्य की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न राज्यों की संस्कृति एवं लोक परंपरा आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति दी। कर्नाटक के यक्षगान (यक्षगणना), तमिलनाडु के लोक नृत्य, दिल्ली के पंजाब फोक नृत्य सहित उत्तराखंड के लोक नृत्य गौपति, लक्षद्वीप के छड़ी नृत्य एवं पुडुचेरी के गरडी नृत्यों ने अतिथियों का मन मोह लिया।
राज्यपाल ने राजकीय गमछा और स्मृति चिन्ह भेंट किया राज्यों के प्रतिनिधियों को
विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को राज्यपाल ने राजकीय गमछा और स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होंने भी राज्यपाल को अपने राज्य की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, महापौर मीनल चौबे, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना सहित अन्य अधिकारी एवं इन सभी राज्यों के युवा, महिलाएं एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
रायपुर। नए वर्ष की शुरुआत के साथ छत्तीसगढ़ एक बार फिर साहित्यिक ऊर्जा से सराबोर होने को तैयार है। आगामी महीने रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी तक होगा, जिसमें देश भर से 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होंगे। राज्य स्थापना के रजत वर्ष पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इस आयोजन की परिकल्पना की गई थी। उनकी यह परिकल्पना अब साकार रूप लेने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में रायपुर साहित्य उत्सव के लोगो का अनावरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शंशाक शर्मा, जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, वरिष्ठ साहित्यकार सुशील त्रिवेदी, डॉ. चितरंजन कर, गिरीश पंकज, डॉ. संजीव बक्शी, प्रदीप श्रीवास्तव और शकुंतला तरार उपस्थित थे।
लोगो अनावरण के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर पूरा प्रदेश रजत महोत्सव मना रहा है, और रायपुर साहित्य उत्सव उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव न केवल छत्तीसगढ़ को, बल्कि पूरे देश के मूर्धन्य साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहाँ उनके अनुभव, विचार और रचनात्मक धारा से अवगत होने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ को साहित्यिक जगत में एक नई पहचान प्रदान करेगा तथा जनसमुदाय को साहित्य, लेखन और पठन-पाठन की ओर प्रेरित करेगा। साथ ही यह उत्सव राज्य की विकास योजनाओं के लिए भी सकारात्मक सामाजिक चेतना और विमर्श का मंच बनेगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संकल्पना पर आधारित इस आयोजन की व्यापक कार्ययोजना मात्र दो माह में तैयार की गई है। यह तीन दिवसीय महोत्सव 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को जनजातीय संग्रहालय के समीप आयोजित होगा।
इस उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे। इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र, और 3 संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक-साहित्यिक विरासत का प्रतीक उत्सव का लोगो
अगले महीने आयोजित होने जा रहे रायपुर साहित्य उत्सव के लोगो में छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को एक प्रभावशाली प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। यह लोगो न सिर्फ राज्य की पहचान को दर्शाता है, बल्कि बस्तर की जैव-विविधता, जनजातीय परंपराओं, और छत्तीसगढ़ की आत्मा माने जाने वाले सल्फी पेड़ की सांस्कृतिक महत्ता को भी सशक्त रूप में उजागर करता है।
लोगो में सल्फी के पेड़ को छत्तीसगढ़ राज्य के नक्शे का रूप देकर यह संदेश दिया गया है कि राज्य की सभ्यता, संस्कृति और साहित्य सदियों से इसी भूमि की जड़ों से पोषित होते आए हैं। सल्फी का यह पेड़ आदिकाल से चली आ रही पौराणिक परंपराओं, भाईचारे और एकजुटता का प्रतीक माना जाता है। जनजातीय समाज के जीवन में गहराई से रचे-बसे इस पेड़ को साहित्य उत्सव के लोगो में शामिल करने से यह संदेश भी मिलता है कि छत्तीसगढ़ का जनजातीय साहित्य, लोकविश्वास और पारंपरिक ज्ञान-धारा आज भी समकालीन साहित्यिक प्रवाह के केंद्र में है।
लोगो में अंकित ‘आदि से अनादि तक’ वाक्य साहित्य की उस अटूट यात्रा को दर्शाता है, जिसमें आदिकालीन रचनाओं से लेकर निरंतर विकसित हो रहे आधुनिक साहित्य तक सभी रूप समाहित हैं। यह संदेश स्पष्ट रूप से प्रकट होता है कि साहित्य कालातीत है, वह समय, समाज, भाषा और पीढ़ियों को जोड़कर चलने वाली निरंतर धारा है। इसी प्रकार लोगो में शामिल ‘सुरसरि सम सबके हित होई’ वाक्य साहित्य को गंगा की तरह मुक्त, समावेशी और सर्वहितकारी शक्ति के रूप में स्थापित करता है। साहित्य सभी जाति, वर्ग, परंपरा और जीवन-रीतियों को अपनी व्यापकता में समाहित कर समाज को दिशा देता है और सबके हित का मार्ग प्रशस्त करता है।
रायपुर साहित्य उत्सव का यह लोगो पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सांस्कृतिक गर्व का विषय है, क्योंकि इसमें राज्य की हजारों वर्षों पुरानी साहित्यिक जड़ें, जनजातीय परंपराएँ, सामाजिक समरसता और आधुनिक रचनात्मक दृष्टि-सभी का सुंदर, सार्थक और कलात्मक संगम दिखाई देता है। यह लोगो जनमानस तक यह सशक्त संदेश पहुँचाता है कि छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा ‘आदि से अनादि’ तक अविचल, जीवंत और समृद्ध रही है और आगे भी इसी धारा में निरंतर विकास की नई कहानियाँ लिखती रहेगी। रायपुर साहित्य उत्सव के लोगो से छत्तीसगढ़ में आदि-अनादि काल से मजबूत साहित्य की जड़ों और उनसे जुड़ाव का सशक्त संदेश जनमानस तक पहुंचेगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय पोलो टूर्नामेंट में शामिल छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने सौजन्य मुलाकात की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने टीम के सदस्यों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन पर बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों को भविष्य में भी इसी उत्साह और मेहनत के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी युवाओं में खेल की अपार प्रतिभा है और राज्य सरकार के सहयोग से घुड़सवारी एवं पोलो खेल को नई दिशा मिली है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ ने पहली बार इतिहास रचते हुए 22 से 29 नवम्बर 2025 तक इंफाल में आयोजित 15वें मणिपुर अंतरराष्ट्रीय पोलो टूर्नामेंट में हिस्सा लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। यह अवसर इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि देश के इतिहास में पहली बार किसी राज्य को अंतरराष्ट्रीय पोलो टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए आमंत्रित किया गया।
छत्तीसगढ़ टीम ने अमेरिका, कोलंबिया, इंडियन पोलो एसोसिएशन और अन्य अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ प्रतिस्पर्धा कर यह गौरव अर्जित किया। यह उपलब्धि आदिवासी युवाओं की खेल जगत में बढ़ती भागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
गौरतलब है कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे कई संस्थानों का संयुक्त योगदान रहा जिसमे छत्तीसगढ़ शासन,भारतीय सेना (एनसीसी),दंतेवाड़ा जिला प्रशासन,कांकेर जिला प्रशासन,ब्रीगो एंड हेक्टर इक्वेस्ट्रियन मैनेजमेंट कंपनी, रायपुर मुख्य रूप से शामिल रहे। इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की टीम के सदस्यों में लेफ्टिनेंट कर्नल अमन सिंह, एनसीसी, लांस नदिम अली (सेवानिवृत्त), वेदिका शरण, चित्रभानु सिंह, सैमुअल विश्वकर्मा, गोलू राम कश्यप, सुभाष लेकामि,देवकी कड़ती शामिल रहे। इससे पूर्व भी वेदिका शरण ने सितंबर 2025 में बेंगलुरु में आयोजित घुड़सवारी की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर अपने आयु वर्ग में भारत में दूसरा तथा विश्व स्तर पर 15 वा स्थान प्राप्त कर प्रदेश व देश का नाम रोशन किया है।
उल्लेखनीय है कि "खेल से शक्ति" पहल के अंतर्गत दंतेवाड़ा और कांकेर जिले के प्रतिभाशाली छात्रों को घुड़सवारी और पोलो का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह प्रशिक्षण ब्रीगो एंड हेक्टर इक्वेस्ट्रियन मैनेजमेंट कंपनी द्वारा भारतीय सेना के अनुभवी पोलो खिलाड़ियों के सहयोग से संचालित किया गया।
यह पहल आदिवासी युवाओं को खेल, शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त बनाने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आवश्यक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर आयुक्त छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अवनीश शरण और घुड़सवारी प्रशिक्षक गीता दहिया उपस्थित रहे।
सूरजपुर। प्रदेश में सरकारी समर्थन मूल्य पर अवैध धान खपाने का सिलसिला जारी है. इस कड़ी में वाहन चेकिंग के दौरान दो पिकअप से बिना टोकन वाला धान जब्त किया गया.
मामला बसदेई चौकी क्षेत्र का है. बसदेई चौक के पास नियमित चेकिंग के दौरान पुलिस को दो संदिग्ध पिकअप (CG 15 CY 2026 और CG 29 AF 3433) दिखाई दिए. रोककर जांच की गई तो दोनों वाहनों में बिना टोकन अवैध धान भरा मिला. मामले में दोनों गाड़ियों को मौके पर जब्त कर कार्रवाई के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी भैयाथान को सौंपा गया है.
जशपुर। लैलूंगा थाना क्षेत्र के मुड़ागांव में मंगलवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा टल गया, जब सरस्वती शिशु मंदिर, पत्थलगांव की स्कूली बस ब्रेक फेल होने के कारण अनियंत्रित होकर सड़क किनारे झाड़ियों में जा घुसी। बस में उस समय दर्जनों स्कूली बच्चे सवार थे, जिन्हें मामूली चोटों के अलावा कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ। घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया और ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंच गए।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्कूली बस मुड़ागांव के पास सड़क पर पहुंची ही थी कि अचानक चालक ने महसूस किया कि ब्रेक काम नहीं कर रहे हैं। बस की रफ्तार भी सामान्य से अधिक बताई जा रही है। नियंत्रण खोने पर बस सीधे सड़क किनारे स्थित झाड़ियों की ओर बढ़ गई। झाड़ियों की घनी बाधा और सड़क के किनारे की मिट्टी के ऊबड़-खाबड़ हिस्से ने बस को नाले में गिरने से बचा लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। यदि बस कुछ मीटर और आगे बढ़ जाती, तो पूरा वाहन नाले में गिर सकता था, जिससे भारी जनहानि की आशंका थी। ग्रामीणों ने कहा कि बस की स्थिति काफी क्षतिग्रस्त थी और बच्चों में भारी दहशत व्याप्त हो गई थी।
बच्चों को गंभीर चोट नहीं
बस में बैठे अधिकांश विद्यार्थियों को केवल हल्की खरोंचें या सामान्य चोटें आई हैं। कई बच्चे घबराहट और सदमे की स्थिति में थे, लेकिन उन्हें तुरंत ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन की टीम द्वारा बाहर निकाला गया। बच्चों को प्राथमिक उपचार के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
ग्रामीणों का हंगामा
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और स्कूली बसों की खराब मेंटेनेंस को लेकर जमकर नाराजगी व्यक्त की। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों की सुरक्षा के नाम पर स्कूली प्रबंधन लापरवाही करता आ रहा है। कई ने कहा कि बसों की समय-समय पर फिटनेस जांच नहीं कराई जाती, जो बच्चों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन और परिवहन विभाग के अधिकारियों को त्वरित जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। कई लोगों ने कहा कि यदि बस नाले में गिर जाती, तो स्थिति भयावह हो सकती थी।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक दंपती के बीच विवाद में अहम फैसला सुनाया है. जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सबूतों के अभाव में क्रूरता साबित नहीं होती और यदि कोई घटना हुई भी थी, तो पति ने उसे बाद में माफ कर दिया था. हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 23(1) (b) के अनुसार यदि क्रूरता माफ कर दी जाए तो तलाक का आधार नहीं बनता.
जांजगीर निवासी व्यक्ति की शादी 11 दिसंबर 2020 को सरगांव निवासी महिला के साथ हुई थी. अक्टूबर 2022 को बेटी के जन्म के बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ने लगा. पति का आरोप था कि तीन अज्ञात नंबरों से उसे गालियां दी गईं और पत्नी के कथित अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई.
आरोप है कि 29 मार्च 2023 को पत्नी घर छोड़कर चली गईं. इसके बाद 4 अप्रैल 2023 को पति ने हिंदू मैरिज एक्ट के प्रावधानों के तहत तलाक की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया. जांजगीर के फैमिली कोर्ट ने 20 अगस्त 2024 को याचिका खारिज करते हुए कहा था कि क्रूरता साबित नहीं हुई. इस फैसले के खिलाफ पति ने हाई कोर्ट में अपील की थी.