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वन विभाग में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर, जारी हुआ आदेश
रायपुर। राज्य सरकार ने वन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादला किया है. 60 वनपालों को दी गयी नई पदस्थापना।
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छत्तीसगढ़ की संस्कृति में सजीव और निर्जीव सभी के प्रति सम्मान और आभार की भावनाः मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। रायपुर सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में आज हरेली पर्व का गरिमामय आयोजन हुआ। त्यौहार मनाने के लिए पूरे परिसर को ग्रामीण परिवेश में सजाया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार का मुख्य ध्येय है। हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की परंपरा, प्रकृति और खेती-किसानी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमें अपने मूल से जोड़ता है। आज पूरा छत्तीसगढ़ हरेली की खुशी में डूबा है। मुख्यमंत्री निवास में भी यह पर्व पूरे उल्लास और पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक हरेली को मनाने का अपना-अपना अंदाज है। लेकिन सभी जगह इसका रंग एक ही है, आस्था और उत्साह एक ही है। जिस तरह प्रकृति हमारा ख्याल रखती है, उसी तरह हमें भी प्रकृति का ख्याल रखना चाहिए। हरेली केवल खेती-किसानी का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह अपनी धरती की हरियाली और प्रकृति पूजा का भी त्यौहार है। छत्तीसगढ़ महतारी की कृपा हम सब पर बरसाती रहे और सभी किसान भाई खुशहाल रहें। यही मंगल कामना है।



उन्होंने कहा कि श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने और 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तय कर ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। हम सभी ने 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का सपना देखा है और इसके लिए हमने अपना विजन डॉक्यूमेंट भी बनाया है। हमारी सरकार राज्य से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रयास कर रही है।
हरेली त्योहार पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और किसान जीवन का उत्सव है। इस पावन अवसर पर मैं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। यह त्योहार प्रकृति, कृषि और पशुधन से जुड़े हमारे जीवन मूल्यों की गूंज है। उन्होंने कहा कि ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती स्वयं धरती पर आकर किसानों के बीच उपस्थित होते हैं और उनके खेतों का निरीक्षण करते हैं। यही कारण है कि इस दिन किसान अपने कृषि यंत्रों, हल-बैल और खेत-खलिहानों की पूजा करते हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति कर रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीद और विभिन्न योजनाओं में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। यह हिंदुस्तान में किसी भी राज्य द्वारा किसानों के लिए किया गया सबसे बड़ा कार्य है। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मुख्यमंत्री है, जो केवल घोषणाएं नहीं करता, बल्कि धरातल पर किसानों के पसीने की कीमत चुका रहा है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा , महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायकगण, निगम मंडल आयोग के अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।
स्कूल शिक्षा विभाग में 1227 व्याख्याताओं की पदोन्नति, अब तक 7000 से अधिक पदोन्नति आदेश जारी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशों पर राज्य सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में निरंतर सुधार और शिक्षक समुदाय के हित में त्वरित निर्णय लिए जा रहे हैं। इसी क्रम में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आज दिनांक 23 जुलाई 2025 को विभिन्न विषयों के 1227 व्याख्याता (टी संवर्ग) शिक्षकों को पदोन्नति आदेश जारी किए गए हैं। इन व्याख्याताओं की पदस्थापना काउंसिलिंग के माध्यम से की जाएगी। इन विषयों में हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, भौतिक, रसायन, जीवविज्ञान, राजनीति शास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और वाणिज्य जैसे मुख्य विषय शामिल हैं। यह निर्णय सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके अंतर्गत राज्य के शिक्षकों को उनके कार्य, वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर समय पर पदोन्नति और अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि विगत एक वर्ष में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला एवं संभाग स्तर पर लगभग 7000 पदों पर पदोन्नति की कार्यवाही संपन्न की गई है। इसके साथ ही, 2621 सहायक शिक्षक (विज्ञान प्रयोगशाला) की सीधी भर्ती काउंसिलिंग के माध्यम से की गई, जिससे स्कूलों में प्रयोगात्मक शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
इससे पूर्व दिनांक 30 अप्रैल 2025 को लगभग 2900 प्राचार्यों के पदोन्नति आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। आने वाले दिनों में पदोन्नत टी संवर्ग के प्राचार्यों की पदस्थापना भी काउंसिलिंग के माध्यम से की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और स्थान-आवश्यकता के आधार पर समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
ई संवर्ग के प्राचार्यों का प्रकरण माननीय न्यायालय में लंबित है। माननीय न्यायालय के निर्णयानुसार समयबद्ध रूप से आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
पाट जात्रा के साथ शुरू हुआ विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा, बड़ी संख्या में जनसमुदाय हुआ शामिल
रायपुुर। हरियाली अमावस्या के मौके पर बस्तर की आराध्य देवी मां दन्तेश्वरी मन्दिर के सामने गुरुवार को पाट जात्रा पूजा विधान के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया। बस्तर दशहरा पर्व के इस प्रथम पूजा विधान में बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर किरण देव, महापौर संजय पाण्डे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और बस्तर दशहरा पर्व समिति के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों के साथ ही बड़ी संख्या में जनसमुदाय शामिल हुआ।





बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित इस ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के पहले पूजा विधान पाट जात्रा में रथ निर्माण के लिए बनाए जाने वाले औजार ठुरलू खोटला तथा अन्य औजारों का परम्परागत तरीके से पूजा-अर्चना कर रस्म पूरी की गयी। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया, जो इस वर्ष करीब 75 दिवस की अवधि तक पूरे आस्था, श्रद्धा और पूरे हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाएगा।
बस्तर दशहरा पर्व के प्रमुख पूजा विधानों को निर्धारित तिथि अनुसार सम्पन्न की जाती है। जिसके तहत आगामी शुक्रवार 05 सितम्बर को डेरी गड़ाई पूजा विधान, रविवार 21 सितम्बर को काछनगादी पूजा विधान, सोमवार 22 सितम्बर को कलश स्थापना पूजा विधान, मंगलवार 23 सितम्बर को जोगी बिठाई पूजा विधान सहित बुधवार 24 सितम्बर से सोमवार 29 सितम्बर 2025 तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, सोमवार 29 सितम्बर को सुबह 11 बजे बेल पूजा, मंगलवार 30 सितम्बर को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान, बुधवार 01 अक्टूबर को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव, गुरुवार 02 अक्टूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शुक्रवार 03 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शनिवार 04 अक्टूबर को काछन जात्रा पूजा विधान एवं मुरिया दरबार होगा। वहीं रविवार 05 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान में ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई होगी और मंगलवार 07 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व सम्पन्न होगी।
मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: CM ने गौरी-गणेश, नवग्रह की पूजा कर भगवान शिव का किया अभिषेक
रायपुर। छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के पहले पर्व “हरेली” पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में गौरी-गणेश, नवग्रह की पूजा कर भगवान शिव का अभिषेक किया।
पहली बार मुख्यमंत्री निवास में हरेली के पूजन में भिलाई की ग्रेजुएट धनिष्ठा शर्मा ने अपने बड़े भाई दिव्य शर्मा के साथ भगवान शिव के अभिषेक में मंत्रोच्चार किया, इससे मुख्यमंत्री श्री साय एवं उनके परिजनों सहित मौजूद सभी अतिथि प्रभावित हुए।
हरेली के पूजा-पाठ में विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा भी शामिल हुए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खेती किसानी के कामों में उपयोग होने वाले नांगर, रापा, कुदाल व दूसरे कृषि यंत्रों की विधिवत पूजा-अर्चना कर हरेली उत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के किसानों समेत समस्त छत्तीसगढ़ वासियों की ख़ुशहाली एवं सुख-समृद्धि की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पशुधन संरक्षण के संदेश के साथ गाय और बछड़े को पारंपरिक लोंदी और हरा चारा खिलाया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली पर्व केवल किसानों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण और पशुधन से जुड़े हमारे गहरे रिश्ते को भी दर्शाता है। इस दिन गाय एवं अन्य मवेशियों को गेहूं के आटे, नमक और अरंडी के पत्तों से तैयार लोंदी खिलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे पशुओं को कई प्रकार की बीमारियों से बचाव मिलता है और उनकी सेहत बेहतर रहती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में पशुओं को परिवार का सदस्य माना गया है। हरेली का यह पर्व हमें पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपनी परंपराओं से जुड़ें और पशुधन की देखभाल एवं सुरक्षा को प्राथमिकता दें। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस अवसर पर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी परिवेश और पूजा-पद्धति के साथ लोक संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली।
राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मलेन रायपुर में 26 जुलाई को, राज्य भर के उद्योगपति होंगे शामिल
रायपुर। राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मेलन का आयोजन 26 जुलाई को रायपुर में किया जा रहा है। लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ और उद्योग विभाग के संयुक्त तत्वाधान में यह सम्मेलन एवं वार्षिक बैठक स्थानीय जेल रोड स्थित होटल सेलिब्रेशन में दोपहर 2.30 बजे से प्रारंभ होगा। कार्यक्रम में राज्यभर के उद्यमी शामिल होंगे।
राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मेलन एवं वार्षिक बैठक में उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम के सीएसआईडीसी के चेयरमैन राजीव अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि होंगे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं विशेष अतिथि के रूप में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश चंद शामिल होंगे।
यह सम्मेलन न केवल उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उद्योग क्षेत्र में आ रही चुनौतियों, संभावनाओं और योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघानिया, महासचिव सी. पी. दुबे एवं कोषाध्यक्ष दीपक उपाध्याय प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे।
महिला टीचरों की मौत, कोरबा हादसे पर बड़ी अपडेट
कोरबा। कोरबा में एकलव्य विद्यालय के शिक्षक और छात्रों को लेकर जा रही विंगर वेन और माजदा ट्रक के बीच टक्कर हो गयी। इस भीषण हादसे में दो महिला शिक्षिका की दर्दनाक मौत हो गयी। वहीं गंभीर रूप से घायल 5 अन्य शिक्षकों को मेडिकल कालेज अस्पताल मे रिफर किया गया है। आपको बता दे यह दुर्घटना आज सुबह कटघोरा से पोड़ी-उपरोड़ा स्थित एकलव्य विद्यालय जाने के दौरान घटित हुआ। दुर्घटना के बाद पुलिस की मदद से सभी घायल शिक्षक और छात्रों को अस्पताल पहुंचाया गया।
जानकारी के मुताबिक ये हादसा कटघोरा थाना क्षेत्र के तानाखार मुूख्य मार्ग पर आज सुबह घटित हुआ। बताया जा रहा है कि पोड़ी-उपरोड़ा में संचालित एकलव्य विद्यालय में पदस्थ 10 शिक्षक-शिक्षिका और 2 छात्र विंगर वेन से सुबह के वक्त रवाना हुए थे। विंगर वेन तानाखार मुख्य मार्ग के पास से गुजर रही थी, तभी दूसरी तरफ से आ रहे तेज रफ्तार माजदा ट्रक के चालक ने विंगर को चपेट में लेकर जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में माजदा की टक्कर से विंगर के परखच्चे उड़ गये।
जिससे उसमें सवार शिक्षक और छात्रों को गंभीर चोटे आई है।घटना की जानकारी मिलते ही डायल 112 की मदद से सभी घायलों को कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाकर भर्ती कराया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल 7 शिक्षकों को मेडिकल कालेज अस्पताल कोरबा रिफर किया गया है। जहां उपचार के दौरान दो शिक्षिका की मौत् हो गयी। मरने वाली महिला शिक्षक का नाम अंजना शर्मा और मंजू शर्मा बताया जा रहा है। वहीं घायल अन्य शिक्षकों का उपचार जारी है। पुलिस ने इस दुर्घटना पर अपराध दर्ज कर माजदा वाहन को जब्त कर लिया है।
रेत भरी हाइवा की आपस में भिड़ंत, हेल्पर की मौके पर मौत, घंटों की मशक्कत के बाद निकाला गया ड्राइवर…
धमतरी। जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सिहावा रोड पर दो रेत से भरी हाइवा की आपस में भिड़ंत हो गई. भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि हाइवा के परखच्चे उड़ गए. दुर्घटना में एक हेल्पर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, वहीं घंटों की मशक्कत के बाद ड्राइवर को बाहर निकाला गया.
घटना शांति कॉलोनी के समीप पूजा राइस मिल के सामने रात 2 से 3 बजे घटित हुई बताई जा रही है. दुर्घटना में हाइवा के हेल्पर 16 वर्षीय ग्राम सुखरी, डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव निवासी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. वहीं करीबन पांच घंटे की मशक्कत के बाद हाइवा में फंसे ड्राइवर को बाहर निकाला गया.
घटना के बाद तत्काल सूचना मिलने पर मौके पर कोतवाली पुलिस पहुंची. एम्बुलेंस में घायलों को तत्काल नजदीकी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है. फिलहाल, कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है.
CG PSC भर्ती घोटाला में आरोपियों को कोर्ट से नही मिली राहत, हाईकोर्ट ने कहा….अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हत्या से भी गंभीर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती सरकार में हुए बहुचर्चित CG PSC भर्ती घोटाले में हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। भर्ती घोटाले शामिल एग्जाम कंट्रोलर सहित 3 आरोपियों की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस पूरे मामले में जस्टिस बीडी गुरु ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि… प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक कर लाखों युवाओं के भविष्य से जो खेलता है, यह कृत्य हत्या से भी गंभीर अपराध है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रश्नपत्र लीक कर PSC जैसी प्रतिष्ठित संस्था को शर्मसार किया है। इस सख्त टिप्पणी के साथ कोर्ट ने एग्जाम कंट्रोलर और अन्य दो आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दी। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में साल 2020 में हुए CG PSC भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई। इस पूरे मामले पर पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने सवाल उठाते हुए सरकार से CBI जांच की मांग की थी। इसके साथ ही ननकीराम कंवर ने इस मामले में जनहित याचिका भी लगाई थी।
जिसमें बताया गया प्रश्न पत्र लिक कर अफसर और कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों का चयन कर डिप्टी कलेक्टर जैसे पद दिए गए। इस पूरे मामले में जांच के बाद सनसनीखेज खुलासा होने के बाद भर्ती परीक्षा में भ्रष्टाचार कर धांधली करने वालों की गिरफ्तारी की गयी थी। राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के बाद इस मामले में ACB-EOW ने दो अलग-अलग FIR दर्ज की। फिर बाद में मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया।
हाईकोर्ट ने भी इस पूरे मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि एक साथ इस तरह से रिश्तेदारों का चयन इत्तेफाक नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने भर्ती की जांच के आदेश भी दिए। सीजी पीएससी भर्ती परीक्षा में धांधली करने वाले एग्जाम कंट्रोलर सहित 3 आरोपियों ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगायी थी। जिस पर हार्हकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करने हुए उनकी जमानत को खारिज कर दिया है।
मुख्यमंत्री निवास में हरेली उत्सव: छत्तीसगढ़ी परंपराओं की झलक, पारंपरिक कृषि यंत्रों के साथ बिखरी सांस्कृतिक छटा
रायपुर। छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।
काठा
सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था।
खुमरी
सिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपने साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था।
कांसी की डोरी
यह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है।
झांपी
ढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है।
कलारी
बांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है।





एकलव्य विद्यालय के शिक्षक और छात्रों से भरी वेन और माजदा ट्रक में भिड़ंत, 7 को किया गया रेफर 2 शिक्षक की हालत गंभीर
कोरबा। कोरबा में एकलव्य विद्यालय के शिक्षक और छात्रों को लेकर जा रही विंगर वेन और माजदा ट्रक के बीच टक्कर हो गयी। इस भीषण हादसे में शिक्षक और छात्रों से भरी विंगर वेन के परखच्चे उड़ गये। वहीं वेन में सवार 10 शिक्षक समेत 2 छात्रों को गंभीर चोट आई है। घटना के बाद सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा में भर्ती कराया गया। जहां 2 शिक्षकों की हालत गंभीर बतायी जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद 7 शिक्षकों को मेडिकल कालेज अस्पताल रिफर किया गया है।
जानकारी के मुताबिक ये हादसा कटघोरा थाना क्षेत्र के तानाखार मुूख्य मार्ग पर आज सुबह घटित हुआ। बताया जा रहा है कि पोड़ी-उपरोड़ा में संचालित एकलव्य विद्यालय में पदस्थ 10 शिक्षक और 2 छात्र विंगर वेन से सुबह के वक्त रवाना हुए थे। वेन अभी तानाखार मुख्य मार्ग पर पहुंची ही थी, तभी दूसरी तरफ से आ रहे तेज रफ्तार माजदा ट्रक के चालक ने विंगर को चपेट में लेकर जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में माजदा की टक्कर से विंगर के परखच्चे उड़ गये। जिससे उसमें सवार शिक्षक और छात्रों को गंभीर चोटे आई है।
घटना की जानकारी मिलते ही डायल 112 की मदद से सभी घायलों को कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाकर भर्ती कराया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल 7 शिक्षकों को मेडिकल कालेज अस्पताल कोरबा रिफर किया गया है। घायलों में 2 शिक्षक की हालत गंभीर बतायी जा रही है। जिन्हे बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कालेज अस्पताल में तुरंत रेफर कर भर्ती कराया गया है। पुलिस ने इस दुर्घटना पर अपराध दर्ज कर माजदा वाहन को जब्त कर लिया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की दी शुभकामनाएँ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के परंपरागत लोकपर्व हरेली के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमारी कृषि संस्कृति, लोक परंपरा और प्रकृति प्रेम का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली पर्व खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्योहार है, जिसमें किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा कर धरती माता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। यह पर्व न केवल अच्छी फसल की कामना का अवसर है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य की भावना को भी प्रकट करता है।
श्री साय ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इस वर्ष हरेली पर्व को हम और भी सार्थक बनाएं — धरती माता की पूजा के साथ वृक्षारोपण करें, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित हो सके। यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक बने।
मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि हरेली पर्व प्रदेशवासियों के जीवन में खुशियाँ, समृद्धि और हरियाली लेकर आए। उन्होंने सभी नागरिकों से इस लोकपर्व को आपसी सौहार्द, प्रकृति प्रेम और परंपरा के सम्मान के साथ मनाने का आह्वान किया।
छत्तीसगढ़ के इस परंपरागत त्योहार के बारे में जानिये, आस्था और परंपरा के साथ हरेली का ये है खेती-किसानी से अनूठा संबंध
रायपुर। प्रदेश सरकार किसानों के आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। गांव, गरीब और किसान सरकार की पहली प्राथमिकता में हैं। देश की जीडीपी में कृषि का बड़ा योगदान है, छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मूल आधार भी कृषि ही है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की इन डेढ़ साल के अवधि में किसानों के हित में लिए गए नीतिगत फैसलों से खेती किसानी को नया संबल मिला है। बीते खरीफ विपणन वर्ष में किसानों से समर्थन मूल्य पर 144.92 लाख मीेट्रिक टन धान की खरीदी कर रिकॉर्ड कायम किया है। छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। इस त्यौहार से ही राज्य में खेती-किसानी की शुरूआत होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत् रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदीकर न सिर्फ किसानों को मान बढ़ाया, बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। साथ ही किसानों के खाते में रमन सरकार के पिछले दो वर्ष का बकाया धान के बोनस 3716.38 करोड़ रूपए अंतरित कर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी है। मुख्यमंत्री का मानना है कि भारत गांवों में बसता है। जब किसान खुशहाल होंगे तो प्रदेश का व्यापार, उद्योग बढे़गा।
परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं की साथ पूजा करते हैं। गांवों के ठाकुरदेव की पूजा की जाती है।
हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में यादवों को भेंट करने की परंपरा रही हैं।
सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।
हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गूंथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।
पिहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद होता है। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।
हरेली तिहार पर मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक उल्लास के साथ होगा विशेष आयोजन
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा और कृषि परंपरा से जुड़ा प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार इस वर्ष 24 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास में पारंपरिक और उल्लासपूर्ण रूप से मनाया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष आयोजन में लोकजीवन की विविध रंगतें, सांस्कृतिक विरासत और किसानों के प्रति सम्मान का भाव सजीव रूप में प्रकट होगा। हरेली त्यौहार के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री निवास परिसर को छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के रंगों से सजाया गया है। पारंपरिक तोरण, हरियाली से सजे द्वार और ग्रामीण शिल्प कला से समृद्ध इस वातावरण में हरेली की वास्तविक आत्मा को अनुभव किया जा सकेगा।


