प्रदेश
ऊर्जा संरक्षण एवं सतत भवन संहिता पर कार्यशाला का आयोजन, क्रेडा सीईओ राजेश सिंह राणा ने किया संबोधित
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) की ओर से राजधानी रायपुर के ट्यूलिप एरीना में “ऊर्जा संरक्षण एवं सतत भवन संहिता (ECSBC)” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में भवन निर्माण क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता बढ़ाना और भविष्य की परियोजनाओं को पर्यावरण के अनुकूल एवं टिकाऊ दिशा में अग्रसर करना रहा।
क्रेडा सीईओ का संबोधन
कार्यक्रम में क्रेडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) राजेश सिंह राणा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में निर्मित होने वाले सभी व्यावसायिक भवनों को ECSBC के अनुरूप बनाना अनिवार्य होगा। इसके लिए नियम और शर्तें लागू करने की दिशा में राज्य सरकार तेजी से कदम उठा रही है।
श्री राणा ने भवन निर्माणकर्ता इकाइयों, शासकीय हाउसिंग बोर्ड और निजी हाउसिंग सोसायटी को ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ECBC), ईको निवास संहिता (ENS) और ऊर्जा दक्ष सामग्रियों के उपयोग को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे ऊर्जा खपत में कमी आएगी और राज्य में सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।
उद्योगों पर विशेष फोकस
सीईओ ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए ऊर्जा अंकेक्षण की व्यवस्था विकसित करने की बात कही। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इन उद्योगों में ऊर्जा दक्ष तकनीक और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की कार्ययोजना पर गंभीरता से काम कर रही है।
क्रेडा की पहल
श्री राणा ने जानकारी दी कि भवन क्षेत्र में क्रेडा कई पहल कर रहा है। राज्य सरकार द्वारा ऊर्जा संरक्षण एवं सतत भवन संहिता को लेकर नियम अधिसूचना की प्रक्रिया जारी है। आने वाले समय में बनने वाले सभी शासकीय भवन ECSBC अनुरूप होंगे।
कार्यशाला में सहभागिता
इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP), लोक निर्माण विभाग (CGPWD) और नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के अभियंता और वास्तुविद (Architects) बड़ी संख्या में शामिल हुए।इसके अलावा, क्रेडा के अधिकारी और परियोजना दल भी मौजूद रहा, जिनमें कार्यपालन अभियंता जे.एन. बैगा, परियोजना समन्वयक कुशल तिवारी, डॉ. प्रियंका पचौरी मिश्रा तथा ECSBC सेल के सदस्य शामिल थे।
जल संचय जनभागीदारी 1.0 में छत्तीसगढ़ का परचम – राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान, रायपुर नगर निगम को प्रथम पुरस्कार, मुख्यमंत्री ने दी बधाई
रायपुर। जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर इतिहास रचा है। जल संचय जनभागीदारी 1.0 (JSJB) के परिणामों में प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि जल प्रबंधन और जनभागीदारी के संगम का जीवंत उदाहरण है। प्रदेश में अब तक 4,05,563 कार्य पूर्ण कर जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन में बदल दिया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफलता पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल-संपदा की नींव है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में यह उस सामूहिक चेतना का प्रमाण है, जिसने छत्तीसगढ़ को देश के लिए एक प्रेरणा बना दिया है।
प्रदेश के शहरी निकायों में भी छत्तीसगढ़ ने अपनी श्रेष्ठता स्थापित की है। रायपुर नगर निगम ने पूरे देश में शीर्ष स्थान प्राप्त करते हुए राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है। यहाँ 33,082 कार्यों के माध्यम से न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा दिया गया, बल्कि इसे जन-सहभागिता आधारित शहरी विकास का मॉडल बना दिया गया। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को रायपुर के नागरिकों और निगम प्रशासन के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।
जिला स्तर पर भी छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। कैटेगरी-1 में बालोद को प्रथम स्थान, राजनांदगांव को द्वितीय स्थान और रायपुर को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ है। इन तीन जिलों को पुरस्कार स्वरूप ₹2-2 करोड़ की राशि प्राप्त होगी। वहीं केटेगरी 2 में महासमुंद, बलौदा बाजार और गरियाबंद को ₹1-1 करोड़ से सम्मानित किया जाएगा। कैटेगरी 3 में बिलासपुर, रायगढ़, बलरामपुर, धमतरी, सुरजपुर और दुर्ग को उनकी उत्कृष्ट भागीदारी के लिए ₹25-25 लाख के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। यह दर्शाता है कि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण को प्राथमिकता के साथ अपनाया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सम्मान केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि हर किसान, हर महिला, हर नौजवान और हर जनप्रतिनिधि का है, जिन्होंने पानी की हर बूंद को बचाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही जनकल्याण संभव है और छत्तीसगढ़ ने इसे सिद्ध कर दिखाया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि राज्य की ‘जन-संवाद एवं जनभागीदारी आधारित सुशासन नीति’ का प्रत्यक्ष परिणाम है। मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और दीर्घकालिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।
रायपुर नगर निगम को मिले राष्ट्रीय सम्मान पर मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निगम प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में सामुदायिक सहयोग से जल संचय की यह मिसाल पूरे देश के लिए अनुकरणीय है और अन्य नगर निगम भी इससे सीख सकते हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि जल संरक्षण के इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानें, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि बूंद-बूंद का संरक्षण ही भविष्य की जल-सुरक्षा की गारंटी है।
छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि जब सरकार और जनता मिलकर कार्य करें तो असंभव भी संभव हो जाता है। JSJB 1.0 की सफलता ने न केवल प्रदेश को सम्मान दिलाया है, बल्कि इसे जल प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल भी बना दिया है।
विकास शील छत्तीसगढ़ के नये मुख्य सचिव बने, राज्य सरकार ने जारी किया आदेश
रायपुर। विकास शील छत्तीसगढ़ के नये मुख्य सचिव होंगे। राज्य सरकार ने इसे लेकर आदेश जारी कर दिया है। 1994 बैच के अफसर विकास शील, 1989 बैच के अफसर अमिताभ जैन के रिटायरमेंट ( 30 सितंबर) के बाद मुख्य सचिव के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे।

एशियन डेवलपमेंट बैंक से रिलीव होकर लौटे
गौरतलब है कि विकास शील केंद्र सरकार के तहत एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), मनीला में कार्यकारी निदेशक (Executive Director) के पद पर पदस्थ थे। उन्हें जनवरी 2024 में केंद्र सरकार ने तीन वर्ष की अवधि के लिए इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पद पर भेजा था। लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनके अनुभव और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए उन्हें राज्य का मुख्य सचिव बनाए जाने का प्रस्ताव रखा।
मुख्यमंत्री के अनुरोध पर छत्तीसगढ़ सरकार ने इस संबंध में डीओपीटी (DoPT) को पत्र लिखा। उसके बाद केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 12 सितंबर को एशियन डेवलपमेंट बैंक को पत्र भेजकर विकास शील को रिलीव करने की प्रक्रिया शुरू की। मात्र एक दिन बाद, 13 सितंबर को ही उन्हें मनीला से औपचारिक रूप से रिलीव कर दिया गया।
मुख्यमंत्री की पहली पसंद
जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विकास शील को लंबे समय से अपनी टीम में शामिल करना चाहते थे। उनका मानना है कि विकास शील के पास राज्य के विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों को गति देने की क्षमता है। वे मुख्यमंत्री की “विकसित छत्तीसगढ़” की दृष्टि को मूर्त रूप देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कैरियर और अनुभव
विकास शील 1994 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। अपने सेवाकाल में उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वित्त, उद्योग, ऊर्जा और शहरी विकास जैसे विभागों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी नियुक्ति ने भी उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण और अनुभव प्रदान किया है, जो छत्तीसगढ़ के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
राज्य प्रशासन में नई ऊर्जा की उम्मीद
विकास शील की नियुक्ति को राज्य प्रशासन में नई ऊर्जा और दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। उनकी कार्यशैली और निर्णय क्षमता को देखते हुए अफसरशाही में भी उत्साह का माहौल है। माना जा रहा है कि वे आने वाले समय में राज्य सरकार की योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन में तेजी लाएंगे।
मुख्यमंत्री साय से राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने की मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में 2024 बैच के 13 एवं 2021 बैच के एक अधिकारी शामिल थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रशासन की धुरी हैं। जनता की समस्याओं को हल करने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ-साथ आपको प्रबुद्ध नागरिक के रूप में समाज की भी चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बेहतर समाज के निर्माण में आप सभी अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी अधिकारियों को पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने के लिए शुभकामनाएँ दीं।
छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री श्री साय को अवगत कराया कि इन अधिकारियों का 7 अप्रैल 2025 से प्रारंभ हुआ इंडक्शन कोर्स अब समाप्त हो रहा है। इसके बाद ये सभी अधिकारी राज्य के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवा देंगे, जहाँ वे शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को समझेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण के अनुभव भी जाने। उन्होंने कहा कि यह आपका सौभाग्य है कि आपको राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला है। यह अवसर सभी को नहीं मिलता। पूरे मनोयोग से इस अवसर का लाभ उठाते हुए निष्ठा और समर्पण के साथ अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन का काम जनहित की नीतियाँ बनाना है, लेकिन उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर ही रहती है। छत्तीसगढ़ एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज और वन संपदा है, मिट्टी उर्वरा है और पावर सेक्टर बहुत मजबूत है। राज्य के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी रुकावट था, जो अब अपनी अंतिम साँसें गिन रहा है। हमारे जवान पूरी मुस्तैदी से नक्सलियों का मुकाबला कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल समस्या का उन्मूलन कर दिया जाएगा। हमारे बहादुर जवान डटकर मुकाबला कर रहे हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति के बाद छत्तीसगढ़ और तेजी से विकसित होगा। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के रूप में आपकी जिम्मेदारी भी और अधिक बढ़ जाएगी। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज को आगे लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता लाना हमारी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जहाँ सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में ई-ऑफिस प्रणाली भी लागू की गई है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही है। अब तक हमें साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बनाने में आप सभी की भूमिका होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राजस्व मामले सीधे जनता से जुड़े होते हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों की एक छोटी-सी पहल से भी लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राजस्व मामलों के समयबद्ध निराकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। राजस्व प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर सरल बनाया जा रहा है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संयुक्त संचालक प्रणव सिंह तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।
एसीआई में देश का छठा और सरकारी संस्थान का पहला बैकमैन टोटल फिजियोलॉजिकल पेसिंग केस : छत्तीसगढ़ को मिली ऐतिहासिक सफलता
रायपुर। प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की उत्कृष्टता का प्रतीक, प्रदेश का सबसे पुराना और सबसे बड़ा पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय तथा इससे संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के डॉक्टरों की टीम ने जटिल उपचारों में लगातार ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं जिन पर हर किसी को गर्व हो सकता है। ताज़ा उदाहरण एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट (एसीआई) के कार्डियोलॉजी विभाग में हुआ, जहाँ 68 वर्षीय महिला मरीज पर देश का छठा और किसी भी सरकारी संस्थान का पहला बैकमैन टोटल फिजियोलॉजिकल पेसिंग सफलतापूर्वक किया गया।
डॉक्टरों के अनुसार यह जटिल प्रक्रिया अब तक एम्स दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ जैसे शीर्ष संस्थानों में भी नहीं की गई थी। बैकमैन टोटल फिजियोलॉजिकल पेसिंग का अर्थ है – हृदय की धड़कन को पूरी तरह प्राकृतिक कंडक्शन सिस्टम (conduction system) के जरिए नियंत्रित करना, ताकि मरीज को लंबे समय तक स्थिर और सुरक्षित हृदय गति मिल सके।
यहां ध्यान देने योग्य है कि अब तक एसीआई और अन्य सरकारी कार्डियक संस्थानों में लेफ्ट बंडल या हिज़ बंडल में लीड लगाने के कई केस हो चुके हैं, लेकिन राइट एट्रियम यानी बैकमैन बंडल में लीड लगाने का यह पहला मामला है। इससे हृदय के दोनों चैम्बर्स की धड़कनें प्राकृतिक विद्युत मार्ग (conduction system) से संचालित होती रहती हैं।
एसीआई के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि रायपुर निवासी यह मरीज सिक साइनस सिंड्रोम नामक गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थी। इस रोग में हृदय को धड़कन देने वाली कोशिकाएँ (पेसमेकर कोशिकाएँ) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और धड़कन अनियमित हो जाती है। सामान्यतः ऐसे मामलों में वेंट्रिकुलर या लेफ्ट बंडल पेसिंग की जाती है, लेकिन इस मरीज का हृदय कमजोर था और एट्रियल रिद्म भी अनियमित थी। केवल वेंट्रिकुलर पेसिंग करने से हार्ट फेल्योर और तेज धड़कन का खतरा था।
इसी कारण एसीआई की टीम ने बैकमैन टोटल फिजियोलॉजिकल पेसिंग का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में हृदय की प्राकृतिक विद्युत संरचना के एट्रियम भाग में पेसमेकर की लीड लगाई गईं। यह तकनीक हृदय को उसके स्वाभाविक ढंग से धड़कने में मदद करती है और हार्ट फेल्योर का जोखिम बेहद कम कर देती है।
इस तरह संपन्न हुई प्रक्रिया
सबसे पहले लेफ्ट बंडल की स्थिति का इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी मैपिंग किया गया। फिर ठीक उसी तरह राइट एट्रियम के बैकमैन बंडल की मैपिंग कर लीड इंप्लांट की गई। इस तरह पूरा पेसिंग सिस्टम प्राकृतिक ढंग से काम करने लगा।
उपचार करने वाली टीम में कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव, डॉ. एस. के. शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. अनुराग कुजूर और डॉ. वेद प्रकाश शामिल थे। यह उपचार मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत किया गया, जिसमें योजना का लाभ दिलाने में मेडिको सोशल वर्कर खोगेंद्र साहू का विशेष योगदान रहा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट द्वारा किया गया यह सफल उपचार छत्तीसगढ़ की चिकित्सा सेवाओं के उच्च स्तर और निरंतर प्रगति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल अब केवल सामान्य उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वस्तरीय जटिल प्रक्रियाओं को भी सफलतापूर्वक अंजाम दे रहा है। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों की टीम को साधुवाद देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल मरीजों के जीवन को नई आशा देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी संस्थान चिकित्सा विज्ञान में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट, रायपुर द्वारा किया गया यह जटिल उपचार प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती और चिकित्सकों की उत्कृष्ट क्षमता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि अब छत्तीसगढ़ के मरीजों को अत्याधुनिक कार्डियक प्रक्रियाओं के लिए महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर नागरिक को मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से निःशुल्क और उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हों। स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सक दल को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय चिकित्सा मानचित्र पर और अधिक प्रतिष्ठित करेगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022-23 में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी के सर्वाधिक मामलों के उपचार में एसीआई देशभर में पाँचवें स्थान पर रहा है।
ऑर्गनाइज टैक्स चोरी के मामले में हमारी सरकार सख्त : मंत्री ओपी चौधरी
रायपुर। GST 2.O में कोयले पर कंपनसेशन सेस खत्म हो गया है. इस पर वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि कोयला खनन रॉयल्टी से अब छत्तीसगढ़ को सीधा फायदा होगा. कोरोना काल में लिया कर्ज सेस से चुकाया जा रहा था, अब जीएसटी में सेस के मर्ज होने से राहत मिलेगी. कोयला खपत पर 50% हिस्सा छत्तीसगढ़ को और 50% केंद्र को मिलेगा.
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जीएसटी चोरी पर गुटखा कारोबारी पर कार्रवाई को लेकर कहा कि ऑर्गनाइज टैक्स चोरी के मामले में हमारी सरकार सख्त है. छोटे-मोटे मामले में हमारा रवैया सहयोगात्मक है. अगर कोई अधिकारी-कर्मचारी भी गड़बड़ी करता है, तो उस पर भी कार्रवाई होगी.
वहीं विपक्ष के जीएसटी रिफॉर्म के बावजूद कई सामानों के दाम पहले की तरह ही होने के आरोपों पर वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म से बहुत फायदा है. लगातार बड़े कदम उठाये जा रहे हैं. विपक्ष जीएसटी काउंसिल के भीतर दर कम करने का विरोध करती थी, राज्यों के रेवेन्यू पर हाय तौबा मचाते हैं, और बाहर में दाम कम नहीं हुआ, ऐसा कहकर कांग्रेस लोगों को बरगलाती है.
प्रोजेक्ट युवा 2.0 के अंतर्गत काउंसलिंग शिविर में युवाओं को BPO, AI और स्टार्टअप क्षेत्रों में दी गई रोजगार की जानकारी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप जिला प्रशासन रायपुर द्वारा प्रोजेक्ट युवा 2.0 के तहत आज शहीद स्मारक भवन में एक दिवसीय काउंसलिंग शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं को BPO, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्टार्टअप जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों से अवगत कराना था।


कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर में उन्हें 300 से अधिक उद्योगों और विभिन्न कौशल क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार अवसरों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने युवाओं को नई तकनीकों, स्टार्टअप शुरू करने की संभावनाओं और BPO सेक्टर में उपलब्ध करियर विकल्पों के बारे में बताया।
इस अवसर पर अधिकारियों ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से वे अपने करियर में आगे बढ़ सकते हैं। प्रोजेक्ट युवा 2.0 इसी दिशा में एक पहल है, जिसके माध्यम से युवाओं को उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रोजगार से जोड़ा जाएगा।
शिविर में उपस्थित युवाओं ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें भविष्य की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।
BJP की सरकार में दिव्यांगों के कल्याण के नाम पर हुआ 1 हजार करोड़ का घोटाला, हाईकोर्ट ने CBI जांच के दिये आदेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीजेपी की पूर्ववर्ती सरकार में दिव्यांगों के कल्याण के नाम पर एक करीब एक हजार करोड़ रूपये का घोटाला कर दिया। दिव्यांगों के नाम पर हुए इस घोटाले पर अब हाईकोर्ट ने सीबीआई से जांच के आदेश दिये है। हाईकोर्ट के जस्टिस प्रार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डिवीजन बेंच ने दलील दी कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर सिस्टमेटिक करप्शन का मामला है। जिसमें फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकालकर सरकारी फंड की लूट की गई।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे पर करप्शन का आरोप लगाती रही है। मौजूदा वक्त में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार में हुए घोटालों को लेकर बीजेपी लगातार हमलावर बनी हुई है। ऐसे में साल 2004 में बीजेपी की सरकार में दिव्यांगो के नाम पर हुए करोड़ों रूपये के करप्शन के मामले में हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। दरअसल पूरा मामला साल 2004 का है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए स्टेट रिसोर्स सेंटर नाम से स्वशासी संस्था की स्थापना की। इसका उद्देश्य तकनीकी और प्रशिक्षण सहायता के माध्यम से दिव्यांगों का पुनर्वास करना था। साल 2012 में इसी के अंतर्गत फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर की स्थापना की गई।
जिसका मुख्य कार्य दिव्यांगों को कृत्रिम अंग और अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना था। सरकार द्वारा संचालित इन दोनों संस्थानों से जुड़े कार्यो के संबंध में जब सूचना के अधिकार के दस्तावेज प्राप्त कियें गये, तो उसमे चैकाने वाली जानकारियां सामने आयी। दस्तावेजों के अवलोकन से बात सामने आई कि ये संस्थाएं केवल कागजों में ही मौजूद थीं और इनके माध्यम से सरकार से करोड़ों रुपए का अनुदान लेकर कथित गड़बड़ी की जा रही थी। शिकायतों के अनुसार, कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इन संस्थाओं में पदाधिकारी के रूप में शामिल थे।
फर्जीवाड़े का खुलासा के बाद हाईकोट में लगायी जनहित याचिका
दस्तावेजों से हुए इस खुलासे के बाद रायपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने 2018 में अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई। जिसमें आरोप लगाया गया कि दोनों संस्थान केवल नाममात्र ही सक्रिय थे। कर्मचारियों की नियुक्ति किए बिना ही उनके वेतन के नाम पर करोड़ों रुपए निकाले गए। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसके नाम पर भी पीआरआरसी में काम करने का फर्जी रिकॉर्ड बनाकर वेतन निकाला गया। जबकि उसने कभी वहां कार्य नहीं किया। कुल मिलाकर इस घोटाले की राशि एक हजार करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।
RTI लगाने पर याचिकाकर्ता दी गयी धमकियां
याचिकाकर्ता कुंदन सिंह ठाकुर ने कोर्ट में बताया कि उन्हें कभी नियुक्त ही नहीं दी गई। फिर भी उनके नाम से वेतन आहरित किया गया। जब उन्होंने आरटीआई से जानकारी मांगी, तो उन्हें धमकियां दी गईं। उन्होने आरोप लगाया है कि ये दोनों संस्थान महज कागजों में चल रहे थे। यहां कर्मचारियों की फर्जी नियुक्तियां दिखाई गईं और करोड़ों रुपए वेतन और उपकरण खरीद के नाम पर आहरित कर लिए गए।
वित्त विभाग की ऑडिट में 31 अनियमितताएं सामने आईं। एसआरसी का 14 साल तक ऑडिट नहीं हुआ था। फर्जी नामों से वेतन उठाया गया, कैश भुगतान के सबूत मिले। कृत्रिम अंग और मशीनें कभी खरीदी ही नहीं गईं। 2019 में प्रबंधन समिति ने एसआरसी को भंग कर खाते बंद कर दिए। उधर राज्य सरकार ने इसे केवल प्रशासनिक खामी बताकर मामले को खत्म करने की कोशिश की। सीबीआई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण जांच रोक दी गई थी। लेकिन हाईकोर्ट के नए निर्देश मिलने पर जांच फिर से शुरू करने को तैयार है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी की है। उन्होने कहा कि इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितताओं को केवल प्रशासनिक त्रुटि बताना न्यायसंगत नहीं है। राज्य सरकार अपने उच्च अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है। जांच आधी-अधूरी और असंगत है। यह मामला केवल दिव्यांगों के अधिकारों से जुड़ा नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपए की सार्वजनिक धनराशि के दुरुपयोग का है। निष्पक्ष जांच के बिना दोषियों तक पहुंचना संभव नहीं।
इन रिटायर्ड IAS अफसरों पर लटकी जांच की तलवार
याचिका में पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह, रिटायर्ड आईएएस विवेक ढांड, एमके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, सतीश पांडेय, पीपी श्रोती समेत कई नाम शामिल हैं। हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री रेणुका सिंह के खिलाफ कोई आदेश नहीं दिया। क्योंकि याचिका में उनके खिलाफ स्पष्ट मांग नहीं थी। वहीं बाकी अधिकारियों पर जांच की तलवार लटकी हुई है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की गंभीरता और उच्चाधिकारियों की कथित संलिप्तता को देखते हुए सीबीआई को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जारी रखनी होगी।
ऑयल फैक्ट्री में आग लगने से मची अफरा-तफरी
रायपुर। सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र के फेस वन में स्थित टायर जलाकर ऑयल बनाने वाली फैक्ट्री में भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई है। करीब आधा दर्जन दमकल की गाड़ी आग बुझाने में लगी है, लेकिन आग बार-बार भड़कती जा रही है। इसके चलते आसमान में दो-तीन किलोमीटर तक धुंआ ही धुंआ नजर आ रहा है।
खास बात यह है कि इसी फैक्ट्री के पीछे सड़क के दूसरी ओर कुछ ही दूरी पर आईओसी का वाटलिंग रिफिलिंग प्लांट भी है, जहां घरेलू और कामर्शियल सिलेंडरों में गैस रिफिल होती है। कैप्सूल टैंकरों से गैस यहां आती है। बावजूद इसके आखिर कैसे टायर जलाकर ऑयल बनाने वाली फैक्ट्री को यहां अनुमति मिली है, यह समझ से परे है।
फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिकों के मुताबिक फैक्ट्री में सुबह आग लगी है। फैक्ट्री में आग बुझाने फायर सिस्टम नहीं है। पानी से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन नहीं बुझी। वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र में टायर जलाकर ऑयल बनाने वाली करीब आधा दर्जन फैक्ट्रियों के कारण लोगों का सांस लेना भी मुश्किल है, क्योंकि टायर जलाकर ऑयल बनाने के दौरान आसपास के दर्जनभर गांवों तक इसकी दुर्गंध से लोग परेशान हैं।
भाजपा ने भूपेश बघेल के खिलाफ कार्टून पोस्टर जारी कर कांग्रेस पर साधा निशाना
रायपुर। भाजपा ने एक बार फिर से कांग्रेस के खिलाफ कार्टून पोस्ट किया है. अबकी बार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ उनके बेटे चैतन्य बघेल के जरिए निशाना साधा है. दोनों पर तंज कसते हुए लिखा है, वोट चोर और नोट चोर. भाजपा नेता केदार गुप्ता ने इस पर कहा कि देखिए कांग्रेस का चरित्र उजागर हो गया है. चोरी नहीं डकैती की है वोट की. पेटियां लेकर भाग जाते थे. अब बीजेपी की सरकार है, ये लोग नहीं बचेंगे.
एनजीओ घोटाले को लेकर भाजपा नेता केदार गुप्ता ने कहा कि निश्चित रूप से निशक्त जनों की राशि पर बंदरबाँट किया गया है. आईएएस अधिकारी पर बड़ी जिम्मेदारी होती है. हाईकोर्ट ने यदि कहा है तो शर्मनाक बात है. अधिकारियों को तो सरेंडर कर जांच में साथ देना चाहिए.
वहीं 71 नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर भाजपा नेता ने कहा कि नक्सलवाद का उपयोग कांग्रेस राजनीति के लिए करती है. इसका पर्दाफाश हो गया है. सरकार के योजनाओं के चलते नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं. हमारी सरकार नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जायेंगे IAS सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे, ज्वाइंट टेक्सटाइल कमिश्नर बनाए गए
रायपुर। राजनांदगांव कलेक्टर डॉक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाएंगे। 2011 बैच के आईएएस अफसर भूरे को ज्वाइंट टेक्सटाइल कमिश्नर बनाया गया है। इसका आदेश केंद्र सरकार ने जारी किया है। जल्द ही उन्हें रिलीव कर दिया जाएगा।
मुंबई स्थित टेक्सटाइल कमिश्नर ऑफिस में उनकी नियुक्ति सेंट्रल मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल डिपार्टमेंट के अंतर्गत होगी। इस संबंध में एडिशनल टेक्सटाइल कमिश्नर अजय पंडित ने सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर सर्वेश भूरे की पोस्टिंग की सूचना दी और उनके कार्यमुक्त होने का आग्रह किया है।
डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे को इस केंद्रीय पद पर तीन साल का कार्यकाल मिलेगा। इसके बाद आवश्यकता और प्रदर्शन के आधार पर दो साल की अवधि और बढ़ाई जा सकती है। इससे पहले वे राजनांदगांव कलेक्टर के रूप में कार्यरत थे। उनके नेतृत्व में जिले में जलग्रहण मिशन सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन हुआ।

डबल इंजन सरकार का संकल्प – 2026 तक नक्सलवाद को करेंगे खत्म: मुख्यमंत्री साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार की नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 और नियद नेल्ला नार योजना ने दंतेवाड़ा सहित पूरे बस्तर अंचल में नया विश्वास जगाया है। माओवादी हिंसा के झूठे नारों से भटके लोग अब विकास और शांति की राह चुन रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर संभाग में चलाए जा रहे पूना मारगेम अभियान तथा दंतेवाड़ा जिले में चलाए जा रहे लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर हाल ही में 71 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 30 नक्सलियों पर 50 हजार से 8 लाख रुपये तक का कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण हमारी नीतियों की प्रभावशीलता और जन-विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को बेहतर जीवन की शुरुआत के लिए 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए गए हैं। साथ ही उन्हें नक्सल उन्मूलन नीति के तहत सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और भरोसेमंद वातावरण के कारण अब तक 1770 से अधिक माओवादी मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। डबल इंजन की सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और आत्मसमर्पित साथियों को सम्मानजनक पुनर्वास एवं बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अब बस्तर बदल रहा है और नक्सलवाद का अंधियारा छंट रहा है। यह परिवर्तन बस्तर के उज्ज्वल भविष्य और शांति की ओर बढ़ते कदमों का सशक्त संकेत है।
जल जीवन मिशन समीक्षा बैठक: रायपुर जिले के 1.81 लाख घरों तक पहुँचा नल कनेक्शन
रायपुर। कलेक्टर एवं जिला जल एवं स्वच्छता मिशन के अध्यक्ष की अध्यक्षता में रेडक्रॉस सभाकक्ष, कलेक्टोरेट परिसर रायपुर में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में चल रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
कार्यपालन अभियंता एवं सदस्य सचिव अनिल कुमार ने बताया कि रायपुर जिले के कुल 1,89,755 ग्रामीण घरों में से 1,81,185 घरों में नल कनेक्शन दिया जा चुका है। जिले के 477 ग्रामों में से 240 ग्रामों को ‘हर घर जल’ प्रमाण पत्र मिल चुका है और शेष ग्रामों में काम तेजी से जारी है।
समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि विकासखण्ड आरंग के ग्राम फरफौद, चपरीद और सकरी (जावा) में काम करने वाली 3 एजेंसियों तथा तृतीय पक्ष जांच एजेंसी मे. ग्रीन डिजाईन प्रा. लि. द्वारा कार्य नहीं किया जा रहा है। कलेक्टर डॉ सिंह ने कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि इन एजेंसियों के अनुबंध रद्द किए जाएं, अमानत राशि शासन के पक्ष में जब्त की जाए और इन्हें 1 वर्ष के लिए जल जीवन मिशन के कार्यों से ब्लैकलिस्ट किया जाए। बैठक के कलेक्टर ने कहा कि जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए ताकि जिले के हर ग्रामीण घर तक स्वच्छ पेयजल पहुँच सके।
जीएसटी सुधारों से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था और बढ़ेगा विश्वास – वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जीएसटी दरों में कटौती का लाभ सीधे जनता तक पहुँचे, इसके लिए राज्य सरकार ने विशेष अभियान शुरू किया है। वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने आज राजधानी के विभिन्न बाजारों का दौरा कर दुकानदारों और उपभोक्ताओं से संवाद किया तथा सुधारों का असर ज़मीनी स्तर पर सुनिश्चित करने की बात कही। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा भी उपस्थित थे।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जीएसटी सुधारों का असर सीधे जनता तक पहुँचना ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि राज्य जीएसटी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिये गये हैं कि वे प्रत्येक बाजार का नियमित भ्रमण करें और यह सुनिश्चित करें कि कटौती का लाभ केवल कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि उपभोक्ताओं की जेब तक पहुँचे।
उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ शासन का दृढ़ संकल्प है कि जीएसटी दरों के सरलीकरण और कटौती से आम जनता को सीधा लाभ मिले। सरकार की प्रतिबद्धता है कि लोगों को आवश्यक वस्तुएँ और भी किफायती दामों पर उपलब्ध हों तथा सुधारों का असर हर घर-परिवार में स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सके।
वित्त मंत्री ने कहा कि 22 सितंबर 2025 से नवरात्रि के पावन अवसर पर ‘जीएसटी बचत उत्सव’ की शुरुआत की गई है। इस उत्सव के अंतर्गत आमजन के उपयोग की वस्तुओं पर उल्लेखनीय कमी की गई है। इसमें हेयर ऑयल, साबुन, शैम्पू, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान, साइकिल, छोटी कारें, एयर कंडीशनर, टीवी, ट्रैक्टर जैसी कई घरेलू वस्तुएँ शामिल हैं। इन सभी पर आम जनता को सीधी राहत दी जा रही है।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि वे बाजारों में भ्रमण के दौरान व्यापारी बंधुओं को दरों में कमी की पूरी जानकारी दें और उपभोक्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करें। उन्हें यह समझाना आवश्यक है कि जीएसटी दरों में कटौती से वस्तुओं के दाम घटे हैं और यह राहत उपभोक्ताओं तक पहुँचना ही इस सुधार का उद्देश्य है।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि “जीएसटी बचत उत्सव केवल एक औपचारिक पहल नहीं है, बल्कि यह जनसामान्य के जीवन स्तर को सुधारने का एक ठोस प्रयास है। यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देगी, उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाएगी और व्यापार को भी प्रोत्साहित करेगी।”
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए जीएसटी दरों में कटौती और सरलीकरण की घोषणा की थी। इसके पश्चात् जीएसटी कौंसिल की 56वीं बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार 22 सितंबर 2025 से ये प्रावधान पूरे देश में लागू हो चुके हैं।
ट्रिपल-आईटी नवा रायपुर में डिजिटल उत्पादकता संवर्धन एवं एआई एकीकरण विषय पर प्रशिक्षण का शुभारंभ
रायपुर। नवा रायपुर स्थित ट्रिपल-आईटी में आज डिजिटल उत्पादकता संवर्धन एवं एआई एकीकरण विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसे राज्य सरकार की ओर से मंत्रालय में पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को आई.टी एवं ए.आई के नवीनतम तकनीकों और अनुप्रयोगों में प्रशिक्षित करने, प्रशासनिक कामकाज की गति बढ़ाने के लिए आयोजित किया गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, विशिष्ट अतिथि सुशासन एवं अभिसरण विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत एवं अध्यक्षता ट्रिपल-आईटी के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. ओपी व्यास ने की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागी अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदार प्रशासन को मजबूत करने के लिए डिजिटल प्रोडक्टिविटी को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की गई। पहले दिन प्रतिभागियों को MS Word, Google Docs, Excel और Google Sheets के उन्नत फीचर्स के साथ AI के उपयोग और डेटा मॉडलिंग की ट्रेनिंग दी गई।
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि कौशल उन्नयन सतत प्रक्रिया है, इससे व्यक्तित्व और कार्यसंस्कृति दोनों ही निखरते हैं, उन्होंने एआई-आधारित प्रशिक्षण को कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि में मील का पत्थर बताया और प्रतिभागियों से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया।
सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने नागरिक केंद्रित शासन में तकनीक की अहम भूमिका पर अपने विचार रखते हुए सरकारी कार्यकुशलता बढ़ाने में एआई टूल्स की भूमिका पर जोर दिया। श्री भगत ने ई-ऑफिस प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि तकनीक का प्रभावी उपयोग शासन को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बना सकता है।
ट्रिपल-आईटी के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. ओपी व्यास ने कार्यशाला में अपना सम्बोधन देते हुए कहा कि एआई के स्मार्ट उपयोग के लिए हमें जागरूक और सतर्क रहना होगा। एआई के व्यवहारिक अनुप्रयोग से शुरुआत कर उसके बारे में निरंतर सीखने की आदत हमें एआई से और अधिक फ्रैंडली बनाएगी। हमें डेटा को सुरक्षित रखते हुए एआई का उपयोग करना होगा, जिसके लिए हमें एआई को संवेदनशील जानकारी देने से बचना होगा ताकि पब्लिक डोमेन में जाकर इनका दुरुपयोग न हो सके।
वहीं, प्रो. के. जी. श्रीनिवास ने भरोसा दिलाया कि यह प्रशिक्षण उच्च गुणवत्ता वाला और परिणामोन्मुखी होगा। इस प्रशिक्षण के प्रथम चरण में सामान्य प्रशासन, गृह एवं अन्य विभागों के 100 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए, जो कि 24 सितंबर से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर 2025 तक चलेगा।
जिला निवेश प्रोत्साहन समिति की बैठक में लंबित प्रकरणों के निराकरण के कलेक्टर ने दिए निर्देश
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य निवेश प्रोत्साहन अधिनियम 2002 के अंतर्गत जिला निवेश प्रोत्साहन समिति की बैठक कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में समिति के सदस्य अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र रायपुर हमेश देवांगन ने समिति की संरचना, कार्य और जिम्मेदारियों की जानकारी दी। कलेक्टर डॉ. सिंह ने लंबित जॉइंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट (JIR) और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों का एक सप्ताह के भीतर निराकरण करने के निर्देश अनुविभागीय अधिकारियों को दिए।
उन्होंने रायपुर–विशाखापत्तनम एक्सप्रेस वे के लिए भूमि चिन्हांकन कार्य अभनपुर एसडीएम को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही प्लास्टिक पार्क में सब-स्टेशन की आवश्यकता पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल (CECB) के इंजीनियर द्वारा प्रस्तुत जानकारी पर कलेक्टर ने शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए।
जब मुख्यमंत्री खुद बने ग्राहक : घरेलू सामान की शॉपिंग कर उठाया जीएसटी दरों में कटौती का लाभ
रायपुर। राजधानी रायपुर के सरोना स्थित शुभम “के मार्ट” में रोजमर्रा की ज़रूरत का सामान खरीद रहे लोग उस समय सुखद आश्चर्य से भर उठे, जब उन्होंने देखा कि जीएसटी बचत का लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं उसे देखने स्वयं प्रदेश के मुखिया आए है।




दरअसल, आज जीएसटी बचत उत्सव को लेकर जनभावनाओं से रूबरू होने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय “शुभम के मार्ट” पहुंचे। उन्होंने खुद ग्राहक बनकर 1,645 रुपये के घरेलू सामान की शॉपिंग की एवं यूपीआई से भुगतान भी किया।इस दौरान उन्होंने खरीदारी कर रहे लोगों से बातचीत की और जीएसटी दरों में कटौती से घरेलू सामानों के मूल्य में आए फर्क के बारे में जानकारी ली।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मार्ट पहुंचकर ज़रूरत के सामान खरीदे और जीएसटी दरों में कमी का लाभ लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मीयता से लोगों का हालचाल जाना। उन्होंने खरीदारी कर रही गृहिणियों से घरेलू बजट पर आए असर की जानकारी ली, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से उनकी दिनचर्या के बारे में पूछताछ की। इस बीच उन्होंने रोजमर्रा का सामना खरीदते हुए अन्य ग्राहकों से आत्मीयतापूर्वक वार्तालाप किया। मुख्यमंत्री का यह आत्मीय व्यवहार देखकर मौजूद लोग गदगद हो उठे और कहा कि प्रदेश का मुखिया आज हमारे बीच एक आम आदमी की तरह शामिल है। इस दौरान उन्होंने खरीददारों से चर्चा करते हुए जीएसटी सुधारों पर लोगों के विचार सुने। लोगों ने बताया कि दवाइयों और राशन की कीमत घटने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री मुस्कुराते हुए बोले—"यही तो असली मकसद है कि सुधार की गूंज आम जनता तक पहुंचे।" इसके बाद उन्होंने खुद भी सामान खरीदा और नई कीमतें देखकर कहा—"यह सुधार केवल कागज पर नहीं, बल्कि हर परिवार की ज़िंदगी में दिखाई देने वाला परिवर्तन है।"
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी को स्वदेशी की मुहिम का साथ देने का आग्रह भी किया, जिस पर लोगों ने कहा आप आगे बढ़े ,हम आपके साथ है।
जीएसटी कटौती नहीं, यह "बचत क्रांति" है
मुख्यमंत्री से चर्चा करते हुए खरीदारी कर रहे रिटायर्ड एयरफोर्स अधिकारी टी. पी. सिंह ने कहा कि आने वाले समय में जब इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए जीएसटी सुधार को ऐतिहासिक बजट क्रांति के रूप में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा—"पहले हम जितने पैसों में 30 दिन का राशन लेते थे, अब उन्हीं पैसों से 40 दिन से अधिक का राशन ले पा रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री ही इतना बड़ा साहसिक निर्णय ले सकते थे, कोई और ऐसा नहीं कर पाता।"
स्टेशनरी में 12 प्रतिशत था टैक्स, अब हो गया जीरो
राजधानी रायपुर के अवंती विहार निवासी लद्दाराम नैनवानी ने बताया कि जीएसटी सुधार का सकारात्मक प्रभाव शिक्षा से भी जुड़ा है। शुभम "के मार्ट" में मुख्यमंत्री को नोटबुक दिखाते हुए उन्होंने कहा—"पहले इस पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता था, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसे शून्य कर दिया है। इस ऐतिहासिक कदम से कॉपियाँ और आवश्यक स्टेशनरी सस्ती हो गई हैं। ऐसा निर्णय हमारे प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं।"
उन्होंने आगे बताया—"पहले मैं बच्चों के लिए सालाना लगभग 2,000 रुपये की स्टेशनरी लेता था और अब इसमें लगभग 240 रुपये की बचत हो रही है।"
चार जरूरी समान खरीदने आए, जीएसटी छूट से खरीदा 4 गुना अधिक सामान
मार्ट में खरीदारी करने पहुंचे श्री मुरलीधर ने मुख्यमंत्री से बातचीत में बताया—"मैं आज केवल 4 ज़रूरी सामान खरीदने आया था, लेकिन जीएसटी दरों में कमी देखकर 4 गुना अधिक सामान खरीद लिया। जीएसटी में व्यापक सुधार से रोजमर्रा की सामग्रियाँ सस्ती हुई हैं और हमें सीधा लाभ मिल रहा है।"
देवांगन दंपति ने बताया मंथली बजट में 10 प्रतिशत की कमी
शुभम "के मार्ट" में खरीदारी करने पहुंचे चंगोराभाटा निवासी दंपति जितेंद्र और पद्मा देवांगन ने कहा—"हमारे मासिक बजट में 10 प्रतिशत की कमी आई है।" गृहिणी श्रीमती पद्मा ने नए प्राइस टैग देखकर कहा—"पहले यही डिटर्जेंट और मसाले मैं ज्यादा कीमत में खरीदती थी। अब दरों में कटौती के बाद कम दाम देखकर सचमुच खुशी हो रही है। त्योहारी खरीदारी में काफी बचत हो रही है।"
बजट से ज्यादा खरीदारी का मिला मौका
सविता मौर्य और अनीता साकार नवरात्रि में आयोजित होने वाले कन्या भोज के लिए श्रृंगार सामग्री खरीदने आईं थीं। उन्होंने कहा—"श्रृंगार सामग्री के दाम पहले से कम हो गए हैं। जीएसटी दरों में कटौती ने हमें निर्धारित बजट से अधिक खरीदारी करने का अवसर दिया है। पहली बार लगता है कि त्योहारी सेल केवल विज्ञापन नहीं, बल्कि असल में राहत है।"
उल्लखेनीय है कि जीएसटी दरों में हुए ऐतिहासिक सुधारों के बाद बाजारों में रौनक बढ़ी है और लोग लगातार खरीदारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में त्योहारी सीजन में लोगों को जीएसटी दरों में कटौती का बड़ा उपहार मिला है और इससे रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएँ सस्ती हुई हैं।





