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मुख्य सचिव विकासशील की बैठक में बड़ा फैसला: रायपुर में बनेगा जेम्स पार्क, बिलासपुर को मिलेगा नया आधुनिक ट्रांसपोर्ट नगर
रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम की सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य की महत्वाकांक्षी औद्योगिक, वाणिज्यिक और बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को गति देने के लिए विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
प्रमुख परियोजनाओं को मिली हरी झंडी
रायपुर के कृषि उपज मंडी परिसर (मंडी रोड) में अत्याधुनिक रत्न एवं आभूषण पार्क (रायपुर जेम्स एवं ज्वेलरी पार्क) बनाने की योजना है। बिलासपुर शहर में बढ़ते भारी वाहनों के दबाव और ट्रैफिक की समस्या को दूर करने के लिए एक विशाल सर्व-सुविधायुक्त ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण किया जाएगा। यहां बड़े गोडाउन, लॉजिस्टिक्स हब, व्यापक पार्किंग स्पेस, वाहन रिपेयरिंग सेंटर और चालकों के लिए रेस्ट एरिया जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
नवा रायपुर में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजनों के लिए एक वर्ल्ड-क्लास कन्वेंशन सेंटर विकसित किया जाएगा। यह अत्याधुनिक बिजनेस हब कॉर्पाेरेट इवेंट्स, ग्लोबल बिजनेस मीट और प्रदर्शनियों के लिए उपयुक्त होगा, जिससे छत्तीसगढ़ में बिजनेस टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इन सभी बड़ी परियोजनाओं को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई है।
बैठक में उपस्थित अधिकारी
इस उच्च स्तरीय बैठक में विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, नीति आयोग के सदस्य सचिव आशीष भट्ट, वित्त विभाग की विशेष सचिव शीतल शाश्वत वर्मा सहित छत्तीसगड राज्य औद्योगिक विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
विकास, विश्वास और सुशासन का सेतु बना कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया निरीक्षण, कहा -
रायपुर। जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है।
प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।
कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक
भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।
बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक
उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।
बदलते बस्तर की नई पहचान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर, बिलासपुर टैक्सी संघ ने बढ़ाया किराया
बिलासपुर। बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ रही कीमतों का असर अब परिवहन क्षेत्र पर भी साफ दिखाई देने लगा है। न्यायधानी बिलासपुर में कार टैक्सी संघ ने टैक्सी किराए में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। वाहन चालक मालिक सामाजिक संघ (कार टैक्सी संघ) छत्तीसगढ़ की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए किराया दरों में संशोधन आवश्यक हो गया है।
संघ की ओर से व्यापार विहार स्थित तारामंडल सभागार में जिले के ट्रेवल्स संचालकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में ट्रेवल्स संचालकों ने हिस्सा लिया और टैक्सी व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं, बढ़ती लागत और वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की।
लोकतांत्रिक मतदान से लिया गया फैसला
बैठक में मौजूद सदस्यों ने लोकतांत्रिक मतदान प्रक्रिया के माध्यम से किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर चर्चा की। इसके बाद बहुमत की सहमति से टैक्सी किराए में वृद्धि का निर्णय लिया गया। संघ का कहना है कि परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की राय लेने के बाद ही यह फैसला किया गया है।
बेस किराए में ₹200 और प्रति किलोमीटर ₹2 की बढ़ोतरी
बैठक में पारित प्रस्ताव के अनुसार टैक्सी के बेस किराए में ₹200 की वृद्धि की जाएगी। इसके अलावा प्रति किलोमीटर किराए में भी ₹2 की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया है। संघ का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि, वाहन रखरखाव, ऑटो पार्ट्स, बीमा, चार्जिंग और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार बढ़ोतरी के कारण पुराने किराए पर व्यवसाय संचालित करना मुश्किल हो रहा था।
ऑनलाइन कंपनियों पर लगाए शोषण के आरोप
बैठक के दौरान टैक्सी संचालकों ने ऑनलाइन कैब सेवा देने वाली कंपनियों पर भी निशाना साधा। संघ ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टैक्सी मालिकों और चालकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। सदस्यों ने ऐसी कंपनियों की नीतियों का विरोध करते हुए स्थानीय परिवहन व्यवसाय को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
परिवहन व्यवसाय को बचाने के लिए जरूरी कदम: संघ
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में परिवहन व्यवसाय को सुचारु रूप से संचालित रखने के लिए किराया बढ़ाना मजबूरी बन गया था। यदि समय रहते किराए में संशोधन नहीं किया जाता, तो कई छोटे संचालकों के लिए व्यवसाय चलाना कठिन हो जाता।
बैठक में मौजूद ट्रेवल्स संचालकों और अन्य सदस्यों ने संगठन के निर्णय का समर्थन करते हुए इसे वर्तमान परिस्थितियों में आवश्यक कदम बताया। संघ ने दावा किया कि यह फैसला पूरी तरह पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बहुमत की सहमति से लिया गया है।
सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे बीजापुर के सुदूर गांव कोण्डापल्ली : चौपाल में सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं
रायपुर। प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।
जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
लाडकी बहीण योजना: 80 लाख महिलाओं को मिली बड़ी राहत, CM फडणवीस ने कहा- खाते में जमा राशि वापस नहीं ली जाएगी
मुंबई। महाराष्ट्र में महायुति सरकार ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना से 80 लाख महिलाओं का नाम काट दिया है. महिलाओं के अपात्र पाए जाने के बाद उनके खाते में जमा की गई राशि वापस ली जाएगी या नहीं इस पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. इन सबके बीच CM देवेंद्र फडणवीस का बयान भी सामने आ गया है। CM देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट करते हुए कहा कि अपात्र घोषित की गई महिलाओं से किसी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि डेटाबेस के माध्यम से लाभार्थियों की जांच की गई.
CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि डेटाबेस से पता चला है कि महिलाओं के नाम पर आवेदन कर लाभ लेने वाले 14 हजार पुरुष भी है. वैसे अयोग्य 14 हजार पुरुषों से पूरी राशि वसूल की जाएगी.
महायुति सरकार पर विपक्ष द्वारा लगातार मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना से नाम काटे गए महिलाओं के खाते में जमा की गई राशि को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे. ऐसे में CM देवेंद्र फडणवीस का 80 लाख महिलाओं के खाते की राशि नहीं वसूलने का ऐलान, विपक्ष द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवाल का जवाब है. वहीं CM देवेंद्र फडणवीस ने यह भी ऐलान किया कि महिलाओं के नाम पर लाभ लेने वाले 14 हजार पुरुषों से पाई पाई वसूल की जाएगी.
उन्होंने ने आगे कहा कि, इन सबके अलावा 5 लाख सरकारी कर्मचारी, 10 लाख आयकरदाता महिलाएं और 5 लाख चारपहिया वाहन रखने वाली महिलाएं भी अयोग्य पाई गयी है. CM देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि यह जनता का पैसा है और इसका उपयोग नियमानुसार होना चाहिए. सरकार जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना के लिए ई-केवाईसी की विंडो दोबारा खोलने पर भी विचार कर रही है.
वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने स्पष्ट किया कि ई-केवाईसी केवल लाडकी बहन योजना के लिए नहीं, बल्कि सभी डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) योजनाओं के लिए अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी के लिए आठ से दस महीने का समय दिया गया था.
राजधानी के अलग-अलग थानों में तैनात हुए 60 प्रशिक्षु SI, 15 सितंबर तक लेंगे व्यावहारिक प्रशिक्षण
रायपुर। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को 60 नए उप निरीक्षक (SI) मिले हैं। बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद इन सभी अधिकारियों को अब व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए राजधानी के विभिन्न थानों में पदस्थ किया गया है। इस संबंध में रायपुर पुलिस कमिश्नर ने आदेश और नामों की लिस्ट जारी की है।
15 सितंबर तक चलेगा फील्ड ट्रेनिंग कार्यक्रम
रायपुर पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रशिक्षु उप निरीक्षकों को 1 जून 2026 से 15 सितंबर 2026 तक निर्धारित कार्यक्रम के तहत पुलिसिंग की विभिन्न प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें बीट व्यवस्था, संतरी ड्यूटी, रात्रि गश्त, सिटी पेट्रोलिंग, मुल्जिम पेशी, मालखाना प्रबंधन, कोर्ट कार्य, प्रचार शाखा, थाना रिकॉर्ड संधारण सहित अन्य पुलिस कार्यों से अवगत कराया जाएगा। इसके अलावा उन्हें कनिष्ठ उप निरीक्षक एवं थाना प्रभारी अधिकारियों के साथ भी कार्य करने का अवसर मिलेगा।
इन थानों में की गई सबसे ज्यादा पदस्थापना
पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर और नेताजी सुभाषचंद्र बोस राज्य पुलिस अकादमी चंदखुरी से प्राप्त निर्देशों के आधार पर इन अधिकारियों को विभिन्न थानों में तैनात किया गया है। सबसे अधिक तीन-तीन SI की पदस्थापना खम्हारडीह, खमतराई, कबीर नगर, गोलबाजार, मौदहापारा, कोतवाली, सिविल लाइन, टिकरापारा, पंडरी, पुरानी बस्ती, राजेंद्र नगर, डीडी नगर, उरला, तेलीबांधा, आमानाका, आजाद चौक और गंज थानों में की गई है।
वहीं गुढ़ियारी, मुजगहन, सरस्वती नगर और देवेंद्र नगर थानों में दो-दो प्रशिक्षु SI को प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। नए अधिकारियों को अनुभवी थाना प्रभारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे वे पुलिस कार्यप्रणाली, अपराध अनुसंधान, कानून-व्यवस्था प्रबंधन और जनता से जुड़े मामलों को नजदीक से समझ सकेंगे।
अनुभवी अधिकारियों के मार्गदर्शन में सीखेंगे पुलिसिंग की बारीकियां
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षु अधिकारियों को थाना संचालन की बारीकियां, शिकायतों का निराकरण, अपराध नियंत्रण, विवेचना प्रक्रिया, न्यायालयीन कार्यवाही और फील्ड पुलिसिंग का अनुभव कराया जाएगा। इसके अलावा उन्हें कनिष्ठ उप निरीक्षक और थाना प्रभारी अधिकारियों के साथ भी कार्य करना होगा, ताकि वे वास्तविक परिस्थितियों में निर्णय लेने और पुलिसिंग के व्यवहारिक पहलुओं को समझ सकें।
देखें आदेश


पुलिस बल को मिलेगी मजबूती
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह प्रशिक्षण अवधि नए SI के करियर की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। इसी दौरान वे किताबों और अकादमी में सीखी गई जानकारी को जमीनी स्तर पर लागू करना सीखते हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये अधिकारी प्रदेश की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
रायपुर कमिश्नरेट में 60 नए SI की तैनाती से पुलिस बल को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे थानों में कार्यभार का बेहतर प्रबंधन होगा और आम जनता को भी पुलिस सेवाओं का अधिक प्रभावी लाभ मिल सकेगा।
तहसीलदारों के आंदोलन पर विधायक अजय चंद्राकर का बयान आया सामने, कहा-
रायपुर। सरगुजा जिले के सीतापुर में नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर तहसीलदार और नायब तहसीलदार हड़ताल पर है। इसको लेकर वरिष्ठ बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि दबाव के बजाए ये देखना चाहिए कि लक्ष्मण रेखा किसने लांघी।
विधायक ने क्या कहा ?
विधायक अजय चंद्राकर ने अपने बयान में कहा कि यूनियन किस बात की जांच की मांग कर रहा है, स्पष्ट करना चाहिए। हटा देना और कारवाई की मांग करना अलग विषय है। घटना घट क्यों रही ये अलग विषय है। दबाव के बजाए ये देखना चाहिए कि लक्ष्मण रेखा किसने लांघी। लोकतंत्र में निर्वाचित जनप्रतिनिधि की गरिमा है। उनका सम्मान करना चाहिए।
क्या है पूरा मामला ?
गौरतलब है कि सरगुजा जिले के सीतापुर में भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों द्वारा नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद पूरे प्रदेश के तहसीलदार और नायब तहसीलदार आक्रोशित हैं। राजस्व अधिकारियों ने शुरुआत में मुख्य आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने सामूहिक अवकाश, कलमबंद हड़ताल और बाद में अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया।
हसदेव अरण्य को लेकर प्रदर्शन पर तंज
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने हसदेव अरण्य को लेकर प्रदर्शन करने की बात कही है, जिसको लेकर विधायक अजय चंद्राकर ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य में भूपेश सरकार ने जो-जो कदम उठाये दस्तावेज के साथ प्रस्तुत करें। उन्होंने आगे कहा कि अपने शासनकाल में क्या-क्या कदम उठाए, उन्हें सार्वजनिक करने की मांग की जानी चाहिए।
उपचुनाव में विवाद : नामांकन खारिज होने पर हाईकोर्ट पहुंची उम्मीदवार, न्याय की लगाई गुहार
बिलासपुर। नगर पालिका परिषद दीपका जिला कोरबा के वार्ड क्रमांक 15 के उपचुनाव को लेकर विवाद सामने आया है। महिला प्रत्याशी शोभा तिग्गा ने नामांकन प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें नगर पालिका अधिकारियों पर मनमानी और नियमों के विपरीत कार्रवाई करने के आरोप लगाए गए हैं।
याचिका के अनुसार वार्ड क्रमांक 15 अनुसूचित जनजाति 15 (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित है। शोभा तिग्गा ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र खरीदा था और निर्धारित तिथि पर नामांकन जमा करने नगर पालिका कार्यालय पहुंची थीं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने अतिरिक्त दस्तावेजों और नो-ड्यूज प्रमाण पत्र की शर्त लगाकर नामांकन स्वीकार नहीं किया।
महिला प्रत्याशी का कहना है कि उन्हें चुनाव मैदान से दूर रखने के उद्देश्य से राजनीतिक दबाव बनाया गया तथा उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया गया। उन्होंने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराने और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि किसी पात्र उम्मीदवार को नामांकन तक दाखिल नहीं करने दिया जाता है तो इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना प्रभावित होती है।
रेलवे का बड़ा फैसला: रायपुर-कोरबा हसदेव एक्सप्रेस अब सप्ताह के सातों दिन
रायपुर। रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत दी है. अगर आप भी रायपुर और कोरबा के बीच रेल से सफर करते हैं तो यह खबर आपके काम की साबित हो सकती है. ट्रेनों में यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रायपुर रेल मंडल ने प्रतिदिन हसदेव एक्सप्रेस को चलाने का फैसला किया है. इसके लिए दो अलग-अलग ट्रेनों को मर्ज किया जाएगा.
वर्तमान में इतने दिन चलती है गाड़ी
रेलवे प्रशासन के अनुसार वर्तमान में गाड़ी संख्या 18249/18250 रायपुर-कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह में चार दिन संचालित होती है, जबकि गाड़ी संख्या 18251/18252 रायपुर-कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन चलती है.
अब सातों दिन मिलेगी ट्रेन की सुविधा
दोनों ट्रेनों को एकीकृत करते हुए एक अगस्त 2026 से गाड़ी संख्या 18249/18250 रायपुर-कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस के रूप में प्रतिदिन संचालित किया जाएगा. इससे सप्ताह के सभी सातों दिन यात्रियों को नियमित रेल सेवा उपलब्ध होगी.
रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेन का संचालन विभिन्न दिशाओं के कुल 15 एलएचबी कोचों के साथ किया जाएगा. एलएचबी कोच आधुनिक सुविधाओं और बेहतर सुरक्षा मानकों से लैस होते हैं, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा. रेलवे का मानना है कि इस फैसले से रायपुर, बिलासपुर, चांपा, कोरबा सहित मार्ग के अन्य जरूरी के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और रोजाना बकाया करने वाले यात्रियों को भी लाभ होगा.
दिव्यांग कर्मचारी के ट्रांसफर पर उठे सवाल, हाईकोर्ट ने मांगा शपथ पत्र के साथ जवाब
बिलासपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग ने बिलासपुर में कार्यरत दिव्यांग महिला कर्मचारी का 546 किलोमीटर दूर तबादला कर दिया। इस आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। बता दें कि याचिकाकर्ता वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग बिलासपुर में पदस्थ है। याचिका में बिलासपुर या किसी अन्य उपयुक्त निकटवर्ती स्थान पर समायोजित करने की मांग की गई है। याचिका की सुनवाई जस्टिस एन के व्यास की सिंगल बेंच में हुई।
दरअसल, राज्य शासन ने 30 मई 2026 को विभाग में पर्यवेक्षक पूर्णिमा उपाध्याय का स्थानांतरण किया है। आदेश को चुनौती देते हुए याचिका में कहा गया है कि बिलासपुर कार्यालय से एकीकृत बाल विकास परियोजना, बीजापुर में उनको स्थानांतरित कर दिया गया है। जबकि वे 42 प्रतिशत स्थायी विकलांग हैं और मेडिकल बोर्ड ने इसे प्रमाणित किया है। याचिकाकर्ता की ओर से मेडिकल बोर्ड व राज्य शासन के स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए बताया गया है कि उन्होंने सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र भी रिकॉर्ड पर रखा है।
सामान्य प्रशासन द्वारा 30 अगस्त 2010 को जारी परिपत्र के अनुसार विभाग में शारीरिक रूप से अक्षम कर्मचारियों को आमतौर पर उनके गृह जिले या पास के किसी स्टेशन पर तैनात किया जाता है, ताकि उनकी विकलांगता से उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सके। राज्य सरकार के तय मापदंड व स्पष्ट नीति के बावजूद याचिकाकर्ता का तबादला बीजापुर जिले में कर दिया गया है, जो उनके वर्तमान पोस्टिंग स्थान से लगभग 546 किलोमीटर दूर है, जिससे उन्हें गंभीर असुविधा और कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
अब ड्रोन स्प्रेयर से कर सकेंगे दवा का छिड़काव : 10 समितियों में सुविधा शुरू, PACS के जरिए ड्रोन सेवा देने वाला देश का पहला जिला बना धमतरी
रायपुर। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने और किसानों को वैज्ञानिक एवं उन्नत खेती से जोड़ने की दिशा में जिला धमतरी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) में ड्रोन स्प्रेयर सुविधा प्रारंभ की गई है। इस अभिनव पहल के साथ धमतरी देश का पहला जिला बन गया है, जहां सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
आज समिति लोहरसी में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने इस महत्वाकांक्षी पहल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में किसानों की उपस्थिति में सभी 10 समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों द्वारा ड्रोन स्प्रेयर का सफल प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान ड्रोन तकनीक के माध्यम से उर्वरक एवं कीटनाशकों के सटीक छिड़काव, समय की बचत, लागत में कमी तथा बेहतर कृषि प्रबंधन की उपयोगिता को प्रदर्शित किया गया।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने का यह एक अभिनव प्रयास है। ड्रोन तकनीक कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। इससे किसानों को कम लागत में अधिक दक्षता के साथ कृषि कार्य करने में सहायता मिलेगी। हमारा प्रयास है कि जिले का प्रत्येक किसान आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का लाभ उठाकर अपनी उत्पादकता और आय में वृद्धि कर सके। उन्होंने कहा कि धमतरी जिले को कृषि नवाचारों का मॉडल जिला बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है और यह पहल उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस पहल की एक विशेषता यह भी है कि CSC e-Governance के सहयोग से PACS समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में सशक्त किया जा रहा है, जिससे किसानों को एक ही स्थान पर ड्रोन स्प्रेयर जैसी आधुनिक कृषि सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न डिजिटल एवं शासकीय सेवाओं का लाभ भी प्राप्त हो सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी तथा सहकारी समितियां बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित होंगी।
इन समिति में ड्रोन स्प्रेयर सुविधा उपलब्ध
जिले में जिन समितियों को ड्रोन स्प्रेयर सुविधा से जोड़ा गया है उनमें बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंदेल, गड़ाडीह, जुगदेही तथा करेली शामिल हैं। इन समितियों के माध्यम से क्षेत्र के किसानों को आवश्यकता अनुसार ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर जनपद सदस्य संत कुमारी किरण साहू, उप संचालक कृषि, नोडल अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, समिति के प्राधिकृत अधिकारी, समिति प्रबंधक, सीएससी डीएम विनय गिरि सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
समय और श्रम की होगी बचत, फसल को भी नहीं होगा नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन तकनीक के उपयोग से कम समय में अधिक क्षेत्र में छिड़काव संभव होगा, रसायनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा तथा किसानों का श्रम और लागत दोनों कम होंगे। साथ ही खेतों में सीधे प्रवेश की आवश्यकता कम होने से फसलों को नुकसान की संभावना भी घटेगी। यह पहल कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर भी सृजित करेगी।
भूपेश बघेल से मिले निलंबित CEO रूपेश पांडेय, कहा – मेरे खिलाफ हुई एकपक्षीय कार्रवाई, मुख्य सचिव के समक्ष करेंगे अपील
दुर्ग। जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) रूपेश पांडेय के निलंबन के बाद जिले की राजनीति गरमाने लगी है। भाजपा नेता एवं पूर्व सरपंच पुराण देशमुख के साथ विवाद का वीडियो वायरल होने के बाद संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर ने सोमवार को सीईओ रूपेश पांडेय को निलंबित कर दिया। निलंबन के कुछ ही घंटों बाद रूपेश पांडेय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर मुख्य सचिव से मुलाकात करेंगे। न्याय नहीं मिलने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
जानकारी के अनुसार, दुर्ग जिलाध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के जन्मदिन कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पूर्व विधायक अरुण वोरा के निवास पहुंचे। इसी दौरान निलंबित सीईओ रूपेश पांडेय भी वहां पहुंचे और उन्होंने अपने निलंबन को लेकर पूरी जानकारी बघेल को दी और कहा कि उनके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई की गई है। उन्होंने दावा किया कि मामले के सभी तथ्यों को सामने लाए बिना प्रशासन ने निलंबन की कार्रवाई कर दी.
न्याय नहीं मिलने पर जा सकते हैं हाईकोर्ट
मीडिया से चर्चा में रूपेश पांडेय ने कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने इसे एकपक्षीय कार्रवाई बताते हुए कहा कि वे अब मुख्य सचिव के समक्ष अपील करेंगे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। न्याय के लिए हाईकोर्ट भी जा सकते हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि हाल ही में भाजपा नेता एवं पूर्व सरपंच पुराण देशमुख और सीईओ रूपेश पांडेय के बीच विवाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ लिया और प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए सीईओ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की। अब निलंबित अधिकारी की पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात के बाद इस मामले के राजनीतिक रंग लेने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
सीतापुर विवाद गरमाया: मंत्री आवास में हुई बैठक विफल, आंदोलन और तेज करने के संकेत
रायपुर। सरगुजा जिले के सीतापुर में नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर आंदोलनरत तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की हड़ताल फिलहाल समाप्त होती नजर नहीं आ रही है। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा और राजस्व विभाग की सचिव शमी आबदी के साथ हुई चर्चा के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। इसके बाद कनिष्ठ प्रशासनिक संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रहेगा।
आज राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के सरकारी निवास पर कनिष्ठ प्रशासनिक संघ और राजस्व विभाग के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। बैठक में राजस्व सचिव शमी आबदी भी मौजूद रहीं। सरकार की ओर से आंदोलन समाप्त कराने और समाधान निकालने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
गिरफ्तारी तक जारी रहेगा आंदोलन
बैठक के बाद कनिष्ठ प्रशासनिक संघ के प्रांताध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “मंत्री और राजस्व सचिव से बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। जब तक गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”
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सीतापुर घटना के बाद शुरू हुआ आंदोलन
गौरतलब है कि सरगुजा जिले के सीतापुर में भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों द्वारा नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद पूरे प्रदेश के तहसीलदार और नायब तहसीलदार आक्रोशित हैं।
राजस्व अधिकारियों ने शुरुआत में मुख्य आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने सामूहिक अवकाश, कलमबंद हड़ताल और बाद में अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया।
राजस्व मंत्री ने जताई थी समाधान की उम्मीद
बैठक से पहले राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने मीडिया से चर्चा में कहा था कि सचिव स्तर पर लगातार बातचीत चल रही है और जल्द ही समाधान निकल जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया था कि तहसील अधिकारी काम पर लौट आएंगे और स्थिति सामान्य हो जाएगी।
हालांकि ताजा घटनाक्रम के बाद स्पष्ट हो गया है कि आंदोलनरत अधिकारी अभी सरकार के आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं और गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं।
राजस्व कार्यों पर पड़ रहा असर
तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर प्रदेशभर के राजस्व कार्यों पर पड़ने लगा है। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र सहित कई प्रशासनिक और राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
अब सभी की नजरें सरकार और आंदोलनरत अधिकारियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश में राजस्व व्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ED का बड़ा एक्शन: 1000 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां अटैच
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने आरोपी अनवर ढेबर और पूर्व IAS अनिल टुटेजा से जुड़ी 1 हजार करोड़ से अधिक बाजार मूल्य की संपत्तियां अटैच की है।
ED का दावा है कि 2019 से 2023 के बीच आरोपियों ने शराब घोटाला कर 2883 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई की है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी कई संपत्तियां अटैच की गई है। रायपुर के ढेबर सिटी समेत कई जमीने ED ने कुर्क किए हैं। गोवा के अंजुना स्थित लग्जरी होटल “वेस्टिन गोवा” को भी अटैच किया गया है।
ईडी ने विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत तीन अनंतिम कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किए हैं, जिसमें 200 करोड़ रुपये के विलेख मूल्य और 1000 रुपये से अधिक के संयुक्त बाजार मूल्य के साथ संपत्तियों को अस्थायी रूप से संलग्न किया गया है। ईओडब्ल्यू/एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी की जांच से पता चला है कि अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा (सेवानिवृत्त आईएएस) के नेतृत्व वाले एक शराब सिंडिकेट ने वरिष्ठ राज्य अधिकारियों, शराब बनाने वाली भट्टियों के मालिकों और निजी संस्थाओं के साथ मिलीभगत करके 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ उत्पाद शुल्क तंत्र में व्यवस्थित रूप से हेरफेर किया और 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध की आय अर्जित की।
शराब की खरीद दरों में कृत्रिम वृद्धि, अवैध रूप से बिना हिसाब वाली शराब का निर्माण और पसंदीदा संस्थाओं को दिए गए एफएल-10ए लाइसेंसों के माध्यम से कमीशन की वसूली के जरिए 2,883 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की गई। पहले पीएओ ने विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर के संबंध में अचल संपत्तियों को कुर्क किया। विकास अग्रवाल सिंडिकेट के जमीनी स्तर के वित्तीय प्रबंधक के रूप में काम करते थे। डिस्टिलरी और एफएल -10 ए लाइसेंसधारियों से कमीशन इकट्ठा करते थे और सीधे अनवर ढेबर को फंड भेजते थे।
विकास अग्रवाल के परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों को उनके अपराध की आय के बराबर मूल्य के रूप में संलग्न किया गया है। इसके अलावा अनवर ढेबर की बेनामी संपत्तियां – जिनमें ढेबर सिटी होम्स में कई भूखंड शामिल हैं। रायपुर (उनके लाभकारी नियंत्रण वाली एक फर्म मेसर्स ए. ढेबर बिल्डकॉन के माध्यम से आयोजित) और रायपुर में पांच भूमि पार्सल (शेल संस्थाओं मेसर्स शाइनिंग स्टार बिल्डकॉन, मेसर्स मूनलाइट रियल एस्टेट, मेसर्स स्वर्ण इंफ्राबिल्ड और मेसर्स जय गुरुदेव इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से आयोजित) शराब घोटाले के माध्यम से लूटे गए अपराध की प्रत्यक्ष आय के रूप में भी संलग्न हैं।
इस पीएओ के तहत कुल कुर्की लगभग 30 करोड़ रुपए, दूसरा पीएओ होटल वेस्टिन गोवा (गांव अंजुना, उत्तरी गोवा) को कुर्क किया गया है, जो मेसर्स पैसिफिक होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर एक प्रीमियम होटल संपत्ति है, जिसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं। जांच से पता चला कि होटल का अधिग्रहण पूरी तरह से अपराध की आय से किया गया था। 110 करोड़ का भुगतान शराब घोटाले से प्राप्त बेहिसाब नकदी में किया गया था। चैतन्य बघेल के कहने पर भौतिक रूप से ले जाया गया था।
तीसरा पीएओ तीन एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों – मेसर्स ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड जब्त करता है। लिमिटेड, मैसर्स दिशिता वेंचर्स प्रा. लिमिटेड, और मेसर्स नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड जिन्हें अपने मुनाफे का 50-60% सिंडिकेट को भेजने के लिए मजबूर किया गया था, जो कुल मिलाकर लगभग 51 करोड़ रुपए ईडी ने विशेष अदालत (पीएमएलए) रायपुर के समक्ष अपनी छठी अनुपूरक अभियोजन शिकायत भी दायर की है, जिसमें चार नए आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। विजय भाटिया सिंडिकेट से करीबी संबंध रखने वाला व्यवसायी, जिसके पास मेसर्स ओम साई बेवरेजेज में 52.5% बेनामी हिस्सेदारी थी, जिसे जबरदस्ती उसे स्थानांतरित कर दिया गया था। टी. भुनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा जिन्होंने सिंडिकेट की ओर से करोड़ों रुपये नकद में स्थानांतरित किए थे। निखिल चंद्राकर के साथ ही पीएमएलए अभियोजन में आरोपियों की कुल संख्या 85 हो गई है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल बिजली बिल कम करने की योजना नहीं, बल्कि सामान्य परिवारों को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक व्यापक अभियान : मुख्यमंत्री साय
रायपुर। सुशासन तिहार के अंतर्गत आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कोंडागांव जिले के ग्राम बड़ेकनेरा पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के हितग्राही आनंद कुमार पवार से उनके निवास पर आत्मीय मुलाकात कर योजना से आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री श्री साय ने परिवार से संवाद कर जाना कि किस प्रकार एक जनकल्याणकारी योजना ने उनके जीवन में आर्थिक राहत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जगाई है।मुख्यमंत्री श्री साय से चर्चा के दौरान आनंद कुमार पवार ने बताया कि पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग 1200 से 1500 रुपये तक आता था, जो सीमित आय वाले परिवार के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ था। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत घर में सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया और अब परिवार को बिजली खर्च की चिंता से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।
श्री पवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री को बताया कि पहले उनका परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब वे स्वयं बिजली उत्पादन भी कर रहे हैं। इससे न केवल आर्थिक बचत बढ़ी है, बल्कि परिवार में आत्मनिर्भरता का भाव भी मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि हर महीने होने वाली बचत अब परिवार की अन्य जरूरतों और बच्चों के भविष्य पर खर्च की जा रही है।
मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान श्री पवार ने यह भी बताया कि योजना के लिए आवेदन करने के लगभग एक माह के भीतर उन्हें सब्सिडी प्राप्त हो गई। साथ ही बैंक से सरल प्रक्रिया के तहत ऋण भी उपलब्ध कराया गया, जिससे सोलर संयंत्र लगाने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आई। शेष राशि का भुगतान आसान मासिक किश्तों में किया जा रहा है, जिससे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी नहीं पड़ा।
आनंद कुमार पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को केवल बिजली बिल से राहत ही नहीं दी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी दिया है। उन्होंने कहा कि अब उनका परिवार स्वच्छ ऊर्जा से जुड़कर भविष्य की ओर अधिक भरोसे के साथ देख रहा है।
उल्लेखनीय है कि आनंद कुमार पवार, पिता चमन लाल पवार का घर बस्तर संभाग का पहला ऐसा प्रधानमंत्री आवास है, जहां प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर सिस्टम स्थापित किया गया है। यह आवास ग्रामीण विकास, स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी समन्वय का प्रेरक मॉडल बनकर सामने आया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल बिजली बिल कम करने की योजना नहीं, बल्कि सामान्य परिवारों को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से परिवारों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिल रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और आमजन के जीवन में वास्तविक परिवर्तन दिखाई दे। बड़ेकनेरा के आनंद कुमार पवार की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब योजनाएं संवेदनशीलता और प्रभावशीलता के साथ जमीनी स्तर तक पहुंचती हैं, तो वे केवल सुविधा नहीं देतीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने वाली नई संभावनाएं भी लेकर आती हैं।
बकरीद पोस्टर विवाद में नया मोड़: अमित जोगी की शिकायत पर FIR दर्ज, साइबर सेल ने शुरू की जांच
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित बकरीद शुभकामना पोस्टर विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अमित जोगी की शिकायत पर गौरेला थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने साइबर सेल की मदद से मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से फेसबुक सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा था। पोस्टर में अमित जोगी की तस्वीर के साथ बकरीद की शुभकामनाएं दी गई थीं। हालांकि पोस्टर में बकरे के साथ गाय की तस्वीर भी दिखाई गई थी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था।
हिंदूवादी संगठनों ने जताया था विरोध
वायरल पोस्टर सामने आने के बाद स्थानीय हिंदूवादी संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। संगठनों का आरोप था कि इस तरह के पोस्टर से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और क्षेत्र का सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। इसे लेकर विभिन्न संगठनों ने विरोध दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
अमित जोगी ने बताया था फर्जी पोस्टर

विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने सामने आकर पोस्टर को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया था। उन्होंने कहा था कि उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसा कोई पोस्टर जारी नहीं किया गया है। उनके अनुसार, कुछ शरारती तत्वों ने उनकी मूल ईद शुभकामना पोस्ट के साथ छेड़छाड़ कर उसे वायरल किया है।
अमित जोगी ने आरोप लगाया था कि राजनीतिक द्वेष के चलते उनकी छवि खराब करने और जिले का सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की थी।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुई FIR
अमित जोगी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एफआईआर की प्रति साझा करते हुए लिखा- डिजिटल दुनिया में छिपकर बैठे कायरों सुन लो। “Chhattisgarhi Chaupal” के पर्दे के पीछे बैठकर तुमने मेरी ईद-उल-अज़हा की शुभकामना पोस्ट के साथ कूटरचना की। उसमें गाय और बकरे के चित्र जोड़कर सांप्रदायिक घृणा फैलाने का प्रयास किया। तुम्हें लगा कि यह वर्चुअल दुनिया है, इसलिए कुछ नहीं होगा। तुम गलत थे। इस मामले में FIR दर्ज हो चुकी है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 196, 336(3), 356 (2) तथा IT Act की धारा 66D के तहत कार्रवाई प्रारंभ हो चुकी है।
अब साइबर जांच होगी। डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण होगा। जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जाएगी और उन्हें कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाएगा। एक नागरिक के रूप में और एक वकील के रूप में, मैं इस मामले को उसके तार्किक एवं कानूनी निष्कर्ष तक ले जाऊँगा।
जो लोग फर्जीवाड़े, कूटरचना और सामाजिक वैमनस्य फैलाने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समझते हैं, उन्हें यह स्पष्ट संदेश है- कानून की पहुँच डिजिटल दुनिया तक भी उतनी ही प्रभावी है जितनी वास्तविक दुनिया में।
साइबर सेल तलाश रही पोस्टर का स्रोत
पुलिस अब साइबर सेल की सहायता से पोस्टर के मूल स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई है। साथ ही पोस्टर को तैयार करने, प्रसारित करने और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच के आधार पर दोषियों की पहचान कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
सुशासन तिहार में सीएम साय ने दिया खुशियों का तोहफा, परिवार को मिला पक्का घर और सोलर सुविधा
रायपुर। कभी बारिश की बूंदों के साथ टपकती छत, आंधी-तूफान की चिंता और कच्चे घर की असुरक्षा में गुजरती रातें… लेकिन अब वही परिवार पक्के घर की सुरक्षित छत के नीचे सुकून और सम्मान के साथ नई जिंदगी की शुरुआत कर रहा है। सुशासन तिहार के अंतर्गत आज कोंडागांव जिले के ग्राम बड़ेकनेरा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राही चमन लाल पवार के नवनिर्मित आवास में सपरिवार गृह प्रवेश कराकर एक परिवार के वर्षों पुराने सपने को साकार किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने परिवार से आत्मीय संवाद करते हुए उनके जीवन में आए बदलाव की जानकारी ली और कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति के जीवन में वास्तविक परिवर्तन सुनिश्चित करना है।
इस अवसर पर एक विशेष उपलब्धि भी सामने आई। चमन लाल का आवास बस्तर संभाग का पहला ऐसा प्रधानमंत्री आवास बन गया है, जहां प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत सोलर सिस्टम भी स्थापित किया गया है। यह पहल ग्रामीण विकास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है। एक ही परिवार को आवास सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा सुविधा का लाभ मिलना शासन की समन्वित विकास सोच को भी प्रतिबिंबित करता है।
चमन लाल पवार ने बताया कि वर्षों तक उनका परिवार कच्चे मकान में रहने को विवश था। बरसात के दिनों में छत टपकती थी और तेज हवा या खराब मौसम में पूरी रात चिंता में बीतती थी। बच्चों और परिवार की सुरक्षा को लेकर लगातार डर बना रहता था। उन्होंने कहा कि अब पक्का मकान मिलने के बाद जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा का एहसास हुआ है।
श्री पवार ने कहा कि अब बारिश और आंधी-तूफान की चिंता नहीं रहती। छत नहीं टपकेगी और पूरा परिवार चैन की नींद सो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह मकान केवल एक घर नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा, आत्मविश्वास और नए जीवन की शुरुआत है।
एक परिवार, कई जनकल्याणकारी योजनाओं का संबल
चमन लाल का परिवार शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हो रहा है। उनकी पत्नी घंसतीन बाई तथा बहू संगीता पवार को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। खेती-किसानी के लिए भी परिवार को विभिन्न शासकीय योजनाओं का सहयोग मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
पीएम आवास और पीएम सूर्य घर का अभिनव संगम
परिवार ने अपने नए घर में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सोलर सिस्टम भी स्थापित कराया है, जिससे घरेलू बिजली आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है और बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है। यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा बचत और आत्मनिर्भरता की नई संभावनाओं को मजबूत करने वाला उदाहरण बन गया है।
बस्तर संभाग का पहला ऐसा प्रधानमंत्री आवास, जहां पीएम सूर्य घर योजना का लाभ भी जुड़ा है, शासन की बहु-आयामी और समन्वित विकास नीति का प्रतीक बनकर सामने आया है। यह पहल केवल आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित जीवन, आर्थिक राहत और पर्यावरण संरक्षण जैसे व्यापक लक्ष्यों को भी आगे बढ़ा रही है।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के प्रति जताया आभार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात के दौरान चमन लाल पवार और उनके परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना और पीएम सूर्य घर योजना ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया है।
ग्राम बड़ेकनेरा का यह परिवार इस बात का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है कि जब शासन की योजनाएं प्रभावी ढंग से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब वे केवल सुविधाएं नहीं देतीं, बल्कि जीवन में सुरक्षा, सम्मान, आत्मविश्वास और नई उम्मीदों का संचार करती हैं।