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श्रद्धालुओं से भरी बस ट्रेलर में जा घुसी, दुर्घटना में 3 महिलाओं सहित 4 की मौत
रायपुर/उत्तर प्रदेश। छत्तीसगढ़ के पंखाजूर से रामलला के दर्शन कर काशी विश्वनाथ दर्शन करने जा रहे श्रद्धालुओं की बस भीषण हादसे का शिकार हो गयी। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार बस पीछे से ट्रेलर में जा घुस गई। इस भीषण हादसे में 4 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 9 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे में मरने वाले तीन महिलाएं और एक पुरूष शामिल है, सभी श्रद्धालु छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे।
जानकारी के मुताबिक ये हादसा यूपी के जौनपुर में आज तड़के घटित हुई। दुर्घटना में घायल दिलीप दास ने बताया कि पंखाजुर से 50 लोगों का एक ग्रुप 7 सितंबर को बालाजी ट्रेवल्स की बस बूक कर छत्तीसगढ़ से निकले थे। सभी लोगों ने पहले अमर कंटक, मैहर देवी, चित्रकूट, वृंदावन, अयोध्या और फिर काशी विश्वनाथ दर्शन करने के लिए रवाना हुए थे। रविवार सुबह वृंदावन से अयोध्या धाम पहुंचे थे। यहां सभी श्रद्धालुओं ने रामलला का दर्शन किया। रविवार रात 11 बजे खाना खाने के बाद सभी लोग बस में सवार होकर काशी विश्वनाथ के लिए रवाना हुए थे।
बताया जा रहा है कि बस के आगे ट्रेलर चल रहा था। ओवरटेक के दौरान ड्राइवर ने बस पर से कंट्रोल खो दिया और बस ट्रेलर से जा भिड़ी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। हादसा इतना भयानक था कि आगे का केबिन पूरी तरह से पिचक गया। इस हादसे में बस का चालक दीपक समेत श्रद्धालुअ आशा भवन, गुलाब, सहित एक अन्य महिला की मौत हो गयी। जबकि 9 लोगों को गंभीर चोट आने पर हालत गंभीर है। यूपी पुलिस ने इस दुर्घटना पर अपराध दर्ज कर घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
एक ही जमीन पर दर्ज परिवारों को अलग-अलग मिलेगा पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ, छत्तीगसढ़ में 25 लाख 47 हजार किसान परिवार हो रहे हैं लाभान्वित
रायपुर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि एक ही भूमि खाता (सिंगल लैण्डहोल्डिंग) में कई किसान परिवारों के नाम दर्ज हैं, तब भी प्रत्येक पात्र परिवार को अलग-अलग प्रतिवर्ष 6000 रूपए तक का लाभ प्राप्त करने का अधिकार होगा। बशर्तें वे योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र हो। प्रत्येक परिवार को न्यूनतम 6,000 रूपए वार्षिक की वित्तीय सहायता सीधे उनके खाते में उपलब्ध कराई जाएगी।
योजना की पात्रता शर्तों के तहत ‘किसान परिवार’ का अर्थ पति-पत्नी और अवयस्क बच्चों से है। यदि एक ही भूमि खाते से कई परिवार जुड़े हुए हैं, तो योजना का लाभ खाता संख्या से नहीं बल्कि परिवार की इकाई के आधार पर दिया जाएगा। इस प्रकार एक भूमि खाता साझा करने वाले अलग-अलग परिवारों को भी स्वतंत्र रूप से यह सहायता राशि प्राप्त होगी।
भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य देशभर के छोटे और सीमांत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है, प्रत्येक किस्त 2,000 रूपए की होती है। छत्तीसगढ़ राज्य में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत फरवरी 2025 में 20वीं किश्त के रूप में राज्य के 25.47 लाख किसानों को 553 करोड़ 34 लाख रूपए की सम्मान निधि प्रदान की गई थी। इस योजना से देश के करोड़ों किसान परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। सम्मान निधि पात्र किसानों को ही प्राप्त हो इसके लिए पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ ही किसान सम्मान निधि की राशि सीधे पात्र किसानों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पात्र किसान परिवार इस योजना से वंचित न रहे, इसके लिए राज्यों और जिलों को नियमित रूप से पात्रता की जाँच कर लाभार्थियों को जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ सभी किसानों को नहीं मिलता। सरकार ने कुछ श्रेणियों को इस योजना से बाहर रखा है। इनमें सभी संस्थागत भूमि धारक, संवैधानिक पदों के पूर्व और वर्तमान धारक, सांसद, विधायक, मंत्री, महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष शामिल हैं। केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों व विभागों के अधिकारी-कर्मचारी (चतुर्थ श्रेणी को छोड़कर) तथा 10,000 रुपये या उससे अधिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी भी योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र नहीं है। इसके अलावा आयकरदाता परिवार भी इस योजना के दायरे से बाहर है। योजना का उद्देश्य है कि केवल वास्तविक छोटे और मध्यम किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा सके।
प्रत्येक मामले के पीछे एक मानवीय कहानी होती है संघर्ष की, आशा की, और न्यायपालिका में विश्वास की- मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा बस्तर संभाग के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन प्रेरणा हॉल, कलेक्टरेट भवन, जगदलपुर में किया गया। इस सेमिनार में बस्तर संभाग के चार जिलों जगदलपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव के 43 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी ने वर्चुअल माध्यम से सत्र का उद्घाटन किया। सेमिनार में अमितेंद्र किशोर प्रसाद, न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, पोर्टफोलियो न्यायाधीश, जिला कांकेर की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य न्यायाधीश ने बस्तर संभाग के न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में न्यायपालिका से अपेक्षाएँ बहुत अधिक हैं। लोग हमसे अत्यधिक आशा रखते हैं। यह सेमिनार केवल सीखने का मंच ही नहीं, बल्कि न्याय, निष्पक्षता और विधि के शासन के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि भी है।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायिक शिक्षा एक बार की प्रक्रिया नहीं है; बल्कि यह सतत प्रक्रिया है। आज के दौर में जहाँ कानून तेजी से विकसित हो रहे हैं और समाज नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, वहाँ न्याय के संरक्षक होने के नाते हमें निरंतर अपने ज्ञान को समृद्ध करना और अपनी न्यायिक क्षमता को धार देना अनिवार्य है। सतत प्रशिक्षण सुनिश्चित करता है कि हम अपने संवैधानिक दायित्वों को दक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभा सकें।
मुख्य न्यायाधीश ने आगे यह भी कहा कि बस्तर क्षेत्र अपने विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के साथ न्यायपालिका के लिए चुनौतियाँ और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है। हमारा दायित्व है कि न्याय समाज के हर कोने तक पहुँचे, विशेष रूप से वंचित और कमजोर वर्गों तक। यहाँ के न्यायिक अधिकारियों की भूमिका जनता के विश्वास को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है कि न्याय न केवल किया जाए, बल्कि होता हुआ भी दिखाई दे।
मुख्य न्यायाधीश ने सभी न्यायिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सहानुभूति, धैर्य और निष्पक्षता के साथ न्यायिक कार्य करें। याद रखें, प्रत्येक मामले के पीछे एक मानवीय कहानी होती है संघर्ष, आशा और न्यायपालिका में विश्वास की। हमें सदैव यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि न्याय समय पर, पारदर्शी और तर्कपूर्ण तरीके से दिया जाए।
अंत में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस प्रकार के सेमिनार समकालीन विधिक मुद्दों पर विचार-विमर्श, अनुभवों के आदान-प्रदान और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने का मूल्यवान अवसर प्रदान करते हैं। इस सेमिनार में हुई चर्चाएँ न्यायिक अधिकारियों की दक्षता को बढ़ाएँगी और उन्हें न्यायिक कार्य की जटिलताओं को और अधिक कुशलता से संभालने योग्य बनाएँगी।
इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के प्रभारी रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर एवं दंतेवाड़ा के जिलों के न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। स्वागत भाषण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर द्वारा दिया गया, परिचयात्मक उद्बोधन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जगदलपुर द्वारा किया गया।
सेमिनार में बस्तर संभाग के कुल 43 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामलों की कार्यवाही का अवलोकन तथा इनके निपटारे हेतु नवीन उपकरण और तकनीकें, मध्यस्थता में रेफरल जज की भूमिका, डिक्री का क्रियान्वयन गिरफ्तारी एवं सिविल कारागृह में निरुद्धि तथा संपत्ति की कुर्की द्वारा समयबद्ध और प्रभावी प्रवर्तन हेतु रणनीतियाँ, सलाखों के पीछे या स्वतंत्र रिमांड और जमानत के प्रावधानों का गहन विश्लेषण, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के नवीनतम निर्णयों के विशेष संदर्भ के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिए गए।
नरहरपुर में आयोजित ठाकुर जोहारनी कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री: क्षेत्रवासियों को दी विभिन्न सौगात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज कांकेर जिले के नरहरपुर में आदिवासी समाज द्वारा आयोजित ठाकुर जोहारनी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उनके साथ झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने ठाकुर जोहारनी कार्यक्रम में आदिवासी समाज के ईष्ट आराध्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई उद्योग नीति में आदिवासी विकास को प्राथमिकता देते हुए बस्तर सहित सरगुजा को विशेष तौर पर फोकस किया गया है, ताकि यहां के निवासियों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें अधिकतम लाभ दिलाया जा सके। ब्लॉक मुख्यालय नरहरपुर के उन्मुक्त खेल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने आदिवासी समाज के ईष्ट देवी-देवताओं का जयघोष करते हुए उपस्थित लोगों को ठाकुर जोहारनी और नवाखाई की बधाई दी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की यह अनूठी परंपरा आगे भी जीवित रहनी चाहिए और समाज की एकजुटता हमेशा बनी रहनी चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा आगे बढ़ें, सुशिक्षित बनें, इसके लिए पूरे प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है। उन्होंने बताया कि आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईआईटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षण संस्थाएं प्रदेश में संचालित हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध हो सके। इसी तरह प्रयास और एकलव्य जैसे श्रेष्ठ संस्थानों के माध्यम से भी लगातार सुधार के प्रयास हो रहे हैं। दिल्ली में ट्राइबल यूथ हॉस्टल संचालित है और प्रदेशभर में नालंदा परिसर स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों को माओवाद के विरुद्ध अभियान में लगातार बड़ी सफलताएँ मिल रही हैं। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक माओवाद के खात्मे का संकल्प दोहराया। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशानुरूप, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से पशुपालन, मुर्गीपालन जैसी रोजगारमूलक गतिविधियों से लोगों को जोड़ने का कार्य प्रदेश सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के पारिश्रमिक में वृद्धि, चरणपादुका वितरण, रामलला दर्शन योजना सहित ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और सुगमता लाने के लिए अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से आदिवासियों के सतत् और समग्र विकास को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारा उत्सव का कार्यक्रम है। जल, जंगल, जमीन और अपनी परंपराओं, लोकनृत्य, गीत, मांदर और मृदंग के साथ जीने वाले आदिवासियों की अपनी विशिष्ट पहचान है। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों को मजबूत करते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा और अधिकारों के प्रति सजग रहना नितांत आवश्यक है।
कार्यक्रम को सांसद भोजराज नाग, कांकेर विधायक आशाराम नेताम और केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम सहित गोंडवाना समाज के संभागीय अध्यक्ष सुमेर सिंह नाग, जिला अध्यक्ष राजेश भास्कर तथा राजाराम तोड़ेम ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने नरहरपुर क्षेत्र के लिए अनेक घोषणाएँ भी कीं। इनमें 30 करोड़ की लागत से बागोड़ एनीकट का निर्माण, नरहरपुर में 132 केवी विद्युत सब स्टेशन स्थापना हेतु 30 करोड़ रुपये, नरहरपुर में मावा मोदोल लाइब्रेरी के लिए 20 लाख रुपये, ग्राम ढोढ़रापहार में गोंडवाना सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 20 लाख रुपये, नरहरपुर में मोबाइल टॉवर की स्थापना, नरहरपुर में सर्वसुविधायुक्त विश्राम गृह निर्माण के लिए 80 लाख रुपये और नरहरपुर विकासखंड के गोंडवाना समाज के सभी 12 मुड़ा क्षेत्रों में 12 टीन शेड निर्माण हेतु 10–10 लाख रुपये के मान से कुल 1 करोड़ 20 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ग्राम धनेसरा में गोंडवाना समाज द्वारा संचालित जंगोरायतार इंग्लिश मीडियम स्कूल हेतु आवश्यक सहयोग की घोषणा भी की गई।
कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप, कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग, कांकेर विधायक आशाराम नेताम, अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा, नगरपालिका परिषद कांकेर के अध्यक्ष अरुण कौशिक, कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, जिला पंचायत के सीईओ हरेश मंडावी और समाज के प्रमुखजन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा निर्णय: शासकीय महाविद्यालयों में 700 पदों पर भर्ती, जानिये किन-किन पदों पर होगी नियुक्ति
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उच्च शिक्षा में विभिन्न रिक्त पदों पर भर्ती हेतु बड़ा निर्णय लिया गया है जिससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और शासकीय महाविद्यालयों में रिक्त पदों की कमी को दूर किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार तथा उच्च शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर वित्त विभाग ने 700 पदों पर भर्ती की अनुमति प्रदान की है। यह आदेश प्रदेश के युवाओं के लिए आशा और अवसर की नई किरण लेकर आया है।
625 सहायक प्राध्यापक पदों पर भर्ती हेतु स्वीकृति
भर्ती हेतु स्वीकृत पदों में सहायक प्राध्यापक के 625 पद शामिल किए गए हैं। इन पदों पर भर्ती होने से महाविद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता और शोध कार्यों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।
क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर भर्ती से खेल गतिविधियों को बढ़ावा
इसी क्रम में क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर भर्ती की स्वीकृति दी गई है। इन पदों की नियुक्ति से महाविद्यालयों में खेलकूद और शारीरिक शिक्षा की गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।
ग्रंथपाल के 50 पदों पर भर्ती से पुस्तकालय होंगे सशक्त
इसके अतिरिक्त ग्रंथपाल के 50 पदों पर भी भर्ती की स्वीकृति दी गई है। ग्रंथपालों की नियुक्ति से पुस्तकालयों का बेहतर संचालन होगा और विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री अधिक व्यवस्थित रूप से उपलब्ध हो सकेगी।
यह निर्णय प्रदेश के युवाओं को रोज़गार के नए अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और अधिकारियों की संख्या बढ़ने से विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन प्राप्त होगा। प्रदेश सरकार का यह कदम महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण निर्मित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे शिक्षण-अध्यापन का स्तर उन्नत होगा और संकायों की मजबूती सुनिश्चित होगी। इस पहल से विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और सीखने के अवसर प्राप्त होंगे। बेहतर संसाधनों और शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यार्थियों की अकादमिक क्षमता और भी निखरेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह निर्णय प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण वातावरण निर्मित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। महाविद्यालयों में रिक्त 700 पदों पर भर्ती होने से न केवल महाविद्यालयों में शैक्षणिक स्तर सुदृढ़ होगा, बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सीखने के अवसर भी प्राप्त होंगे। यह पहल आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सशक्त बनाने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करेगी।
वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है। शासकीय महाविद्यालयों में 700 पदों पर भर्ती की स्वीकृति इसी दिशा में एक बड़ा निर्णय है। इस पहल से एक ओर जहाँ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी। वित्त विभाग द्वारा दी गई यह अनुमति भविष्य की पीढ़ी को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार विभिन्न विभागों में भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा विगत 21 माह में महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका, स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों, आदिम जाति विकास विभाग में छात्रावास अधीक्षक सहित अन्य विभिन्न विभागों के अनेक पदों पर भर्ती की जा चुकी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री श्री साय की घोषणा के अनुरूप शिक्षकों के 5000 पदों सहित अन्य पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, तकनीक और प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं को बड़े पैमाने पर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इन सतत प्रयासों से छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति का बेहतर उपयोग होगा और प्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचेगा।
हिंदी दिवस पर संगोष्ठी, पुस्तक विमोचन और सम्मान समारोह का हुआ आयोजन
रायपुर। छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान और जिला प्रशासन रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में घड़ी चौक स्थित टाउन हॉल में हिंदी दिवस के अवसर पर संगोष्ठी, पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।








मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशा तथा कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट संस्कृति का संचालन किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य रायपुर जिले की संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा देना, इस क्षेत्र में कार्यरत प्रतिभाओं को सम्मानित करना और उन्हें एक सशक्त मंच प्रदान करना है। इसके तहत नियमित कार्यक्रम कलेक्ट्रेट परिसर स्थित टाउन हॉल में आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में नगर पालिक निगम आयुक्त विश्वदीप शामिल हुए। हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल कमल ने विचार व्यक्त किए। इस दौरान हिंदी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा भी उपस्थित रहे। विषय प्रस्तावना डॉ. सुशील त्रिवेदी पूर्व आईएएस एवं संपादक, छत्तीसगढ़-मित्र ने प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में संपादक, सद्भावना दर्पण गिरीश पंकज औ प्रमुख, घरौंदा परियोजना एवं बायोडायवर्सिटी एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च सेंटर राहुल कुमार सिंह उपस्थित रहे।
इस अवसर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप ने कहा कि मुझे पुस्तकों के अध्ययन का विशेष शौक है। यात्रा के दौरान भी मैं किताबें पढ़ने का समय निकालता हूँ, जिससे ज्ञानवर्धन होता है। आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
कार्यक्रम में श्रोताओं को संबोधित करते हुए शशांक शर्मा ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और शिक्षा व्यवस्था में इसके महत्व को समझाना आवश्यक है। पहले स्कूलों में बच्चों को इमला लिखाया जाता था, जो अब बंद हो गया है। हमें इसे पुनः आरंभ करना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के जीवन का अहम हिस्सा बन गया है, लेकिन आधुनिकता अपनाते हुए हमें अपनी मौलिकता और भाषा से जुड़ाव बनाए रखना चाहिए।
हिंदी दिवस के अवसर पर तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया – न्यूर्लिंग्विस्टिक्स – डॉ. गोपाल कमल, लार्ज लैंग्वेज मॉडल – डॉ. सुधीर शर्मा, यथार्थ जीवन – स्वयंप्रकाश सातकर.
कार्यक्रम में आकाशवाणी की समाचार वाचिकाओं सहित साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत कई विद्वानों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सुधीर शर्मा (महासचिव) ने किया। संयोजक के रूप में डॉ. सुरेश शुक्ल (कोषाध्यक्ष), श्रीमती शकुंतला तयर और डॉ. सीमा निगम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर एसडीएम रायपुर नंदकुमार चौबे, निगम उपायुक्त डॉ. अंजली शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, गणमान्य नागरिक और आमजन उपस्थित रहे।
युक्तियुक्तकरण के बाद ज्वाइनिंग नही देने वाले कोरबा के 4 शिक्षक निलंबित
रायपुर। कोरबा जिला में युक्तियुक्तकरण के बाद ज्वाइनिंग नहीं देने वाले 4 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं युक्तियुक्तकरण के बाद आबंटित स्कूलोें में ज्वाइनिंग नहीं करने वाले कई शिक्षकों को कारण बताओं नोटिस जारी कर उनका 2 महीने का वेतन भी रोका गया है। युक्तियुक्तकरण के बाद ज्वाइनिंग नहीं करने वाले इन शिक्षकों पर जिला एवं संभागीय स्तरीय समितियों में सुनवाई के बाद आवेदनों को अमान्य करने के बाद भी ज्वाइनिंग नहीं करने पर कार्यवाही की जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी ने ऐसे सभी शिक्षकों को जल्द से जल्द आबंटित विद्यालयों में उपस्थिति दे कर बच्चों को पढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा ने बताया कि शासन द्वारा जारी युक्तियुक्तकरण निर्देश के तहत कोरबा जिले के प्राथमिक शाला के 292 सहायक शिक्षक एवं 15 प्रधान पाठक तथा माध्यमिक शाला के 153 शिक्षक एवं प्रधान पाठक अतिशेष के रूप में चिन्हांकित हुए थे। युक्तियुक्तकरण निर्देश के अनुसार इन अतिशेष शिक्षकों को शिक्षक विहीन एवं एकल शिक्षकीय विद्यालयो में पदस्थ किया जाना था। चूंकि कोरबा जिले के प्राथमिक शाला में एकल शिक्षकीय विद्यालयों की संख्या अतिशेष शिक्षको की संख्या से ज्यादा होने के कारण जिला सारीय युक्तियुक्तकरण समिति के द्वारा दूरस्थ अंचल में स्थिति एवं लबे समय से शिक्षको की कमी वाले एकल शिक्षकीय एवं शिक्षक विहीन विद्यालयों में अतिशेष शिक्षको की पदस्थापना का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आधार पर अतिशेष शिक्षको की ओपन काउंसलिंग आयोजित करके पदस्थापना आदेश जारी किया गया।
उन्होंने बताया कि पदस्थापना आदेश से असंतुष्ट शिक्षको के द्वारा जिला स्तरीय युक्तियुक्तकरण समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे समाधानकारक नहीं पाए जाने के कारण अमान्य किया गया। इसके पश्चात् संबंधित असंतुष्ट शिक्षको के द्वारा माननीय छ.ग. उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिकाएं प्रस्तुत किया गया, जिसमें अधिकांश याचिकाकर्ता शिक्षको को जिला स्तरीय युक्तियुक्तकरण समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने एवं जिला स्तरीय युक्तियुक्तकरण समिति को प्रस्तुत अभ्यावेदन का एक सप्ताह के भीतर सुनवाई कर निराकरण करने का निर्देश दिया गया। माननीय न्यायालय के आदेशानुसार जिला स्तर पर सुनवाई उपरांत 5 अभ्यावेदन मान्य पाए गये एवं शेष अभ्यावेदनों को समाधानकारक नहीं पाए जाने के जिला स्तरीय युक्तियुक्तकरण समिति के द्वारा पुन अमान्य किया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा ने बताया कि राज्य शासन के द्वारा युक्तियुक्तकरण से संबंधित असंतुष्ट शिक्षकों के अभ्यावेदन का निराकरण करने हेतु संभाग एवं राज्य स्तरीय युक्तियुक्तकरण समिति का गठन किया गया। जिला स्तरीय युक्तियुक्तकरण समिति के द्वारा अभ्यावेदन के अमान्य करने उपरात संबंधित असंतुष्ट शिक्षको के द्वारा संभाग स्तरीय समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया। संभाग स्तरीय समिति के द्वारा भी शिक्षकों के अभ्यावेदनों पर सुनवाई उपरात 2 अभ्यावेदन मान्य पाए गये एवं शेष अभ्यावेदनों को समाधानकारक नहीं पाए जाने के कारण अमान्य किया गया।
इसी दौरान जिला स्तर पर युक्तियुक्तकरण के तहत पदांकन आदेश के तहत कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले शिक्षको को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया, जिसके तहत संबंधित शिक्षको के प्रस्तुत जवाब के समाधानकारक नहीं जाए जाने के कारण 4 सहायक शिक्षकों को निलंबित किया गया तथा कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले समस्त शिक्षको का विगत दो माह से वेतन रोका गया है।
उन्होंने बताया कि युक्तियुक्तकरण के उपरांत जिले के अधिकाश दूरस्थ अचल में स्थित प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में शिक्षको के द्वारा कार्यभार ग्रहण कर लिया गया है. फलस्वरूप नियमित रूप से अध्ययन व्यवस्था सुनिश्चित कर लिया गया है तथा वर्तमान में जिन स्कूलों में शिक्षको की कमी है. उन स्कूलो में जिला खनिज न्यास मद से मानदेय शिक्षा का व्यवस्था किया गया है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने की विभागीय कार्यों की समीक्षा, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, कुपोषण उन्मूलन और आंगनबाड़ियों के व्यवस्थित संचालन पर दिए कड़े निर्देश
रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बलरामपुर जिले के संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में विभागीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की गहन समीक्षा कर अधिकारियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर बल देते हुए कहा कि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शिता के साथ मिले। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता से लाभान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाल विवाह रोकथाम की दिशा में गंभीर पहल करने पर जोर देते हुए कहा कि किशोरी बालिकाओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी देकर जागरूक बनाया जाए, ताकि राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल हो सके।
बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन को लेकर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि केंद्र नियमित समय पर खुलें, बच्चों की उपस्थिति और पोषण आहार की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने केंद्रों की साफ-सफाई, अध्यापन व्यवस्था और पोषण वाटिका व रेडी-टू-ईट वितरण की भी समीक्षा की। कुपोषण उन्मूलन पर विशेष जोर देते हुए मंत्री ने एनआरसी सेंटरों के सुचारू संचालन और कुपोषित बच्चों को नियमित आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवनों की गुणवत्ता सुनिश्चित कर कार्य शीघ्र पूर्ण करने, रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित करने और आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर बल देते हुए श्रीमती राजवाड़े ने सक्षम योजना की समीक्षा कर महिलाओं को स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही घरेलू हिंसा की रोकथाम के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता बढ़ाने की बात कही।
बैठक में महतारी वंदन योजना, चाइल्डलाइन, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, सखी वन स्टॉप सेंटर सहित विभागीय कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई। समाज कल्याण विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री ने पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने और विभाग में रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश भी दिए।
बैठक में समाज कल्याण विभाग की संचालक रोक्तिमा यादव, बलरामपुर कलेक्टर राजेन्द्र कटारा, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर रमनलाल, महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी विस्मिता पाटले, प्रभारी उप संचालक समाज कल्याण विभाग स्टेला खलखो सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जशपुर में कृषि क्रांति लाने मुख्यमंत्री ने किसान कॉल सेंटर का किया शुभारम्भ
रायपुर। जिले के किसानों के हित में चलाई जाने वाले कृषि क्रांति अभियान अंतर्गत आज किसान कॉल सेंटर एग्रीबिड और बाजार व्यवस्था को सरल बनाने के उद्देश्य से क्यू आर कोड आधारित जी कॉम इंडिया का शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा अपने बगिया स्थित निज निवास कार्यालय से किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, विधायक जशपुर रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जिले में कृषि के साथ उद्यानिकी फसलों के लिए भी उपयुक्त वातावरण उपलब्ध है। वर्तमान में जिले में आम, लीची, नाशपाती के साथ चाय, टाऊ, कटहल जैसी फसलों का भी बहुतायत में उत्पादन हो रहा है। ऐसे में किसानों के पास बाजारों के विकल्प के ना होने से उन्हें औने पौने दामों में अपनी फसलों को बिचौलियों को बेचना पड़ता था, अब क्यू आर कोड के माध्यम से सीधे उपार्जकों तक पहुंच एवं बेचने की व्यवस्था होने से जिले के किसान देश के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति को अपनी फसल को बेच सकेंगे, जिससे किसानों को अनावश्यक बिचौलियों, कोचियों जैसे लोगों से छुटकारा मिलेगा और उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य प्राप्त होगा। कॉल सेंटर से किसानों को विशेषज्ञों द्वारा किसी भी समस्या पर सहायता प्राप्त होगी। इन दोनों पहलों से कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा और किसानों को उचित मूल्य मिलने से किसानों की आय में वृद्धि होगी।
उन्होंने बताया कि एनडीडीबी के साथ मिलकर दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के 06 जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत उत्तम किस्म के दुधारू पशुओं के वितरण के साथ ग्रामीणों को पशुपालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय ने कहा कि किसानों के लिए प्रारम्भ किया गया कॉल सेंटर जिले में कृषि के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा, किसानों को इसके दूरगामी परिणाम प्राप्त होंगे। विधायक जशपुर रायमुनी भगत ने कहा कि जिले में नाशपाती, लीची के साथ कटहल की फसल भी बहुतायत में होती है। जिसके प्रसंस्करण और विकास के लिए जशपुर में विगत दिनों कटहल मेला भी आयोजित किया गया था। ऐसे में इन नवीन पहलों से किसान उत्पादन के साथ उचित मूल्य पर उत्पादों का निर्यात भी कर सकेंगे।
किसानों को शैक्षणिक भ्रमण हेतु मुख्यमंत्री ने दिखाई हरी झंडी
किसानों को नवाचारी कृषि और कृषि के विकास हेतु प्रोत्साहित करने के लिए कृषि क्रांति एवं आत्मा योजनांन्तर्गत 35 कृषकों के दल को रायपुर एवं दुर्ग के शैक्षणिक भ्रमण हेतु मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा हरी झंडी दिखा कर रवाना किया गया। इसमें कुनकुरी के 15 एवं कांसाबेल के 20 किसान शामिल हैं। यह किसान वहां जाकर वैज्ञानिक पद्धति से खेती और खाद्य प्रसंस्करण के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे, जिसे वे जिले में आकर अपना सकेंगे। बीएनआर सीड रायपुर एवं इंडस मेगा फूड पार्क रायपुर द्वारा इस भ्रमण में कृषकों को जानकारी प्रदान की जाएगी।
किसान कॉल सेंटर में 08069378107 नम्बर पर किसानों को मिलेगी सहायता
इस किसान कॉल सेंटर के माध्यम से जिले के किसान खेती से जुड़े प्रश्नों एवं समास्याओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त कर पाएंगे। इसके लिए आज मुख्यमंत्री श्री साय के समक्ष जिला प्रशासन एवं एग्रिबिड के मध्य एमओयू पर भी हस्ताक्षर किया गया। इस कॉल सेंटर से किसानों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान करने के साथ योजना का लाभ लेने हेतु लोगों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा। इसके माध्यम से किसान अपनी समस्याओं को भी बिना किसी देरी के अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे किसानों को उनकी छोटी छोटी समस्याओं का सीधा निराकरण प्राप्त हो सकेगा। इसके लिए 12 विशेषज्ञों का दल कार्य करेगा, जिसमें विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एवं अन्य कृषि विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो कॉल, मैसेज, व्हाट्सप्प द्वारा किसानों से जुड़ेंगे। किसानों को केवल कॉल सेंटर के नम्बर 08069378107 पर सम्पर्क करना होगा।
जिले के किसानों की उत्पादों कोे पूरे देश से मिलेंगे खरीददार
जी कॉम इंडिया के क्यू आर कोड से देश के किसी भी कोने के क्रेता से जिले के किसान से सीधे संपर्क कर व्यापार कर पाएंगे। जिला प्रशासन द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान से जिले के किसानों को स्थानीय मंडी पर निर्भर ना रहते हुए पूरे देश की सभी मंडियों से संपर्क हो सकेगा। देश के किसी भी कोने में बैठे खरीददार ऐप के माध्यम से किसान के पास उपलब्ध उत्पाद की जानकारी प्राप्त करने के साथ साथ उनसे संपर्क कर व्यवसाय कर सकेंगे। इस ऐप के माध्यम से यदि किसी व्यक्तिगत किसान के पास उत्पाद की मात्रा उपलब्ध ना हो तो वह समुदाय के अपने साथी किसानों के पास उपलब्ध मात्रा को जोड़कर क्रेता को उपलब्ध करा सकते हैं, इससे सभी का सामूहिक विकास सुनिश्चित होगा। इस अभियान से किसानों को धान के साथ साथ उनकी तिलहन, दलहन, नगदी फसलों को घर बैठे उचित मूल्य प्राप्त होगा। किसान को केवल अपने पास उपलब्ध फसलों की मात्रा और उसकी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से 26 अग्निवीरों ने की मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज बलरामपुर जिले के चयनित 26 अग्निवीरों ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सभी युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, गांव और जिले के लिए गौरव की बात है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अग्निवीर योजना युवाओं को सेना में शामिल होकर देशसेवा का सुनहरा अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और देशप्रेम की भावना से ही सफलता की नई ऊँचाइयाँ प्राप्त की जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सेना में शामिल होकर ये युवा सीमाओं की रक्षा करेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगे।
इस अवसर पर बलरामपुर जिले के चयनित अग्निवीरों में पिंकू पैकरा, जिन्दल, विकाश पैकरा, प्रकाश सिंह, खेल साय, आर्यन, देव नंन्दन पन्ना, नरेन्द्र यादव, रंजीत केरकेट्टा, रमेश पैकरा, प्रियांशु, सनोज, निकिता नरसिंह, शशि किरण, सोहन लाल, महेन्द्र पैकरा, मिथलेश पैकरा, छोंटू, बज्जू पैकरा, पंकज, विवेक पैकरा, विधायक पैकरा, किशुन पैकरा, सोभनाथ पैकरा, अमित कुजूर और एंजेल लकड़ा शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने अतिथि शिक्षक सुदर्शन यादव और उनकी टीम के निःशुल्क सेना भर्ती प्रशिक्षण के उल्लेखनीय प्रयासों की भी सराहना की। उनके प्रशिक्षण से लाभान्वित 30 युवाओं में से 26 युवा अग्निवीर भर्ती में चयनित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कैम्प कार्यालय बगिया में ’जशपुर पर्यटन एवं कृषि क्रांति’ का किया शुभारंभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में पर्यटन एवं कृषि क्रांति का शुभारंभ किया। जशपुर पर्यटन एवं कृषि क्रांति इको टूरिज्म और होमस्टे से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम जशपुर के स्व सहायता समूह और किसानों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।



इस अवसर पर झारखंड सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और पत्थलगांव विधायक गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनि भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, एस एस पी शशि मोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, सुनील गुप्ता, मुकेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधिगण और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय जशपुर में आयोजित कार्यकम को सम्बोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विकास के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर सबका साथ सबका विकास को चरितार्थ किया जा रहा हैं। मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले में पर्यटन के क्षेत्र में कार्य करने वाले स्व सहायता समूह और युवाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए दायित्वों और जिम्मेदारियों की वजह से अब ज्यादातर समय मुझे जशपुर से बाहर रहना पड़ता है, लेकिन जशपुर निरंतर आता रहूंगा और विकास के क्षेत्र में बेहतर कार्य करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जशपुर जम्बूरी के जरिए जशपुर को पर्यटन के नक्शे पर नयी पहचान दिलाने की पहल की गई है। वर्ष 2024 में हुए जशपुर जम्बूरी में हमारे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेने और उस अवसर का गवाह बनने पहुँचे। जशपुर जम्बूरी में न सिर्फ ईको-टूरिज्म और एडवेंचर स्पोर्ट के लिए लोगों ने नया महौल दिया, बल्कि जनजातीय परम्पराओं से भी रूबरू कराया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सांस्कृतिक प्रदर्शन, स्थानीय व्यंजनों का मेला और जनजातीय नृत्यों ने पर्यटकों को आकर्षित किया, जिससे स्थानीय कारीगरों और गाइड्स को रोजगार मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार फिर जशपुर जम्बूरी के नए सीजन का आयोजन होने जा रहा है। जिसमें आगामी 6 से 9 नवम्बर तक देश, दुनिया के लोग यहाँ पहुँचकर रोमांच, कला और सामुदायिक अनुभवों से परिचित हो पाएँगे। जशपुर की मिट्टी की खुशबू को जीवंत करने के लिए कर्मा, सरहुल जैसे जनजातीय नृत्य के साथ गोदना कला, काष्ट शिल्प और लौह शिल्प जैसे हस्तशिल्प की प्रदर्शनी और लोकनाट्य पर आधारित सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएगी। इससे न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और प्रसार होगा, बल्कि स्थानीय कला और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान भी मिलेगी। जशपुर जम्बूरी एक ऐसा उत्सव है जो प्रकृति, संस्कृति और विकास को एक सूत्र में पिरोता है। यह आयोजन जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय विरासत और आधुनिक विकास को एक साथ पेश करता है। जशपुर जंबूरी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत मयाली नेचर कैंप में बोटिंग, कैक्टस गार्डन और टेंट सुविधाएँ जोड़ी गई हैं। यहाँ के पर्यटक स्थल अब बेहतर सुविधाओं से सजे हैं, मयाली में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ को गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है जो जशपुर को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम टूरिज्म सेक्टर को एक उद्योग के रूप में देख रहे हैं, जिससे स्थानीय उद्यमशीलता बढ़ेगी। राज्य में होम-स्टे नीति लागू की है ताकि पर्यटक जनजातीय संस्कृति को जानना-समझना चाहते हैं। उनके भीतर आदिवासी संस्कृति, परम्पराओं, उनके खान-पान, रहन-सहन को लेकर एक जिज्ञासा और उत्सुकता रहती है। ऐसे में होम-स्टे छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में विकास की नयी अवधारणा है, जिसमें स्थानीय समुदायों को रोजगार के बेहतर अवसर मिल रहा है। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जशपुर जम्बूरी जैसे उत्सव से स्थानीय होम-स्टे, गाइड्स और शिल्पकारों को सीधा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि जशपुर जम्बूरी को एक वार्षिक महोत्सव के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी जशपुर आकर्षण का बड़ा केन्द्र बन पाए। जीआईएस (GIS) मैपिंग और डिजिटल मार्केटिंग से जशपुर की पहुँच बढ़ेगी। यहाँ युवाओं और पर्यटन से जुड़े सभी लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे वैश्विक मानकों पर खरे उतर सकें।
कार्यकम में सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और पत्थलगांव विधायक गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनि भगत और जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय ने भी संबोधित किया और जशपुर के विकास, पर्यटन के क्षेत्र और कृषि क्रांति की विस्तार से जानकारी दी।
दूसरी जम्बूरी 6 से 9 नवम्बर तक
जशपुर जम्बूरी जशपुर की वादियों और झरनों के बीच हर साल एक ऐसा उत्सव मनाया जाता है, जो केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि इस जिले की आत्मा का अनुभव है। जशपुर जम्बूरी ने 2024 में अपनी शानदार शुरुआत की और अब 2025 में एक और भव्य रूप में लौट रहा है।
2024 में आयोजित पहली जशपुर जम्बूरी ने रोमांच, संस्कृति और समुदाय का ऐसा संगम पेश किया, जिसने देशभर से प्रतिभागियों को आकर्षित किया। झारखंड, ओडिशा, रायपुर और छत्तीसगढ़ के कई जिलों से आए लोगों ने इस उत्सव में हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने रानी दाह, टी-गार्डन और जशपुर संग्रहालय जैसे स्थलों की सैर कर इतिहास और संस्कृति को करीब से महसूस किया। फ़ूड लैब ने स्थानीय व्यंजनों को आधुनिक रूप में प्रस्तुत कर सबका दिल जीता। सरहुल और कर्मा नृत्य की प्रस्तुतियों ने जनजातीय परंपराओं की गहराई दिखाई। चार दिन रोमांचक गतिविधियों, सांस्कृतिक रंग और सामुदायिक मेलजोल के नाम रहे। इस आयोजन ने जशपुर को ईको-टूरिज़्म और एडवेंचर स्पोर्ट्स का नया गंतव्य बना दिया।
दूसरी जशपुर जम्बूरी 2025 नये अनुभवों की ओर अब यह उत्सव और बड़े स्वरूप में वापस आ रहा है। 6 नवम्बर से 9 नवम्बर 2025 तक आयोजित होने वाला जशपुर जम्बूरी 2025 रोमांच, कला और सामुदायिक अनुभवों को और भी समृद्ध करेगा। रोमांचक-रॉक क्लाइम्बिंग, रैपलिंग, ज़िपलाइन, ट्रेकिंग, मयाली डैम पर वॉटर स्पोर्ट्स, पैरामोटर और हॉट एयर बलून से माधेश्वर पहाड़ों के दृश्य देखे जा सकेंगे। जनजातीय नृत्य (कर्मा, सरहुल), लोक संगीत, हस्तशिल्प कार्यशालाएँ (मिट्टी, बाँस, गोंदना कला, लकड़ी व लोहे की कारीगरी), लोकनाट्य और स्थानीय व्यंजन का भी अनुभव मिलेगा। उन्होंने बताया कि पारंपरिक खेल, टीम-बिल्डिंग गतिविधियाँ और तारों भरे आसमान के नीचे अलाव की गर्माहट से लोगों के मन में आनंद की अनुभूति होगी। जशपुर जम्बूरी 2025 का उद्देश्य है प्रतिभागियों को प्रकृति, परंपरा और समुदाय की उस धारा से जोड़ना, जहाँ हर पल एक नई कहानी कहता है। कार्यकम में आभार व्यक्त डिप्टी कलेक्टर समीर बड़ा ने किया।
रायपुर में फिर बहेगी भक्ति की धारा: बागेश्वर धाम सरकार की 'हनुमंत कथा' की तैयारियां हुईं तेज
रायपुर। राजधानी रायपुर एक बार फिर भक्ति और आध्यात्म के महासागर में गोते लगाने को तैयार है। वरिष्ठ समाजसेवी श्री बसंत अग्रवाल के नेतृत्व में 'स्व. श्री पुरषोत्तम अग्रवाल स्मृति फाउंडेशन' के तत्वावधान में, गुढ़ियारी की पुण्य धरा पर बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर, पूज्य पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के श्रीमुख से दिव्य 'श्री हनुमंत कथा' का भव्य आयोजन होने जा रहा है। यह आध्यात्मिक महोत्सव आगामी 4 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2025 तक चलेगा, जिसमें दिव्य दरबार का भी आयोजन किया जाएगा।
इस विराट आयोजन के सफल क्रियान्वयन और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप देने के लिए आज, 14 सितंबर को, कार्यक्रम कार्यालय का विधिवत पूजन-अर्चन के साथ शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया, जिसे मुख्य आयोजक श्री बसंत अग्रवाल ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि यह कार्यालय आयोजन की तैयारियों का केंद्र बिंदु होगा, जहां से सभी व्यवस्थाओं का संचालन और समन्वय किया जाएगा।
कार्यालय शुभारंभ के इस पावन अवसर पर सर्व समाज का प्रतिनिधित्व देखने को मिला, जिसमें लोकेश कावड़िया, सिख समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि, किशोर महानंद, राजकुमार राठी सहित विभिन्न समाजों के प्रमुख, वरिष्ठजन और भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित होकर इस पुण्य कार्य के साक्षी बने।
उद्घाटन के पश्चात एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में कथा की विभिन्न व्यवस्थाओं जैसे पंडाल, भोजन (भंडारा), जल, सुरक्षा, यातायात, और लाखों भक्तगणों के बैठने की व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा हुई। आयोजन से जुड़े सभी सेवादारों को उनकी योग्यतानुसार जिम्मेदारियां सौंपी गईं, ताकि प्रत्येक व्यवस्था त्रुटिहीन और सुगम हो।


पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बसंत अग्रवाल ने कहा, "यह हम सभी छत्तीसगढ़वासियों का परम सौभाग्य है कि पूज्य गुरुदेव पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी एक बार फिर अपनी अमृतमयी वाणी से रायपुर की धरा को पवित्र करने आ रहे हैं। उनका आगमन प्रदेश के लिए किसी आध्यात्मिक महोत्सव से कम नहीं है। हमारा और हमारी पूरी टीम का यह संकल्प है कि कथा श्रवण के लिए आने वाले प्रत्येक भक्त को एक सहज, सुरक्षित और दिव्य अनुभव प्राप्त हो।"
उन्होंने आगे कहा, "इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी समाजों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। कार्यालय के उद्घाटन के साथ ही अब तैयारियां और तेज कर दी गई हैं।"
शहर के भक्तों में कथा को लेकर जबरदस्त उत्साह और प्रतीक्षा का माहौल है। कार्यालय के शुभारंभ के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि रायपुर एक और अविस्मरणीय आध्यात्मिक आयोजन की मेजबानी के लिए पूरी तरह से तैयार है।
इस दौरान विनोद अग्रवाल, श्रवण शर्मा, हेमंत साहू, महेश शर्मा, आजाद गुर्जर, जगदेव अग्रवाल, सतनारायण स्वामी, डॉ. विकास अग्रवाल, मोहन बजाज सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
DGP अरुण देव गौतम ने गरियाबंद में जवानों से की मुलाकात
गरियाबंद। ई-30, एसटीएफ, सीएएफ और कोबरा 207 बटालियन ने लगातार तीन दिनों तक चले ऑपरेशन के दौरान 10 बड़े नक्सली लीडर को ढे़र करने में सफलता हासिल की थी. इस उपलब्धि पर गरियाबंद पुलिस के अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम सहित तमाम आला अधिकारियों ने पुलिस लाइन में उनके साथ (बड़ा खाना) भोजन किया.
गरियाबंद पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में डीजीपी अरुण देव गौतम के अलावा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नक्सल विरोधी अभियान विवेकानंद सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के साथ बीएसएफ, सीआरपीएफ, कोबरा 207 एसटीएफ के अधिकारीगण पहुंचे थे.
कार्यक्रम दौरान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने नक्सल विरोधी ऑपरेशन में मिली बड़ी सफलता के लिए ई-30, एसटीएफ, सीएएफ एवं कोबरा 207 बटालियन के सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों के साथ गरियाबंद के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के साथ नक्सल ऑपरेशन में सहभागिता देने वाले सभी जवानों को बधाई एवं शुभकामनाएं दिए.
टाटीबंध के इस इलाके में अवैध प्लाटिंग पर चला बुलडोजर
रायपुर। रायपुर नगर पालिका निगम के आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर जोन 8 के नगर निवेश विभाग ने शहीद भगत सिंह वार्ड (क्रमांक 21) के टाटीबंध क्षेत्र में 1746 वर्गफुट के अवैध निर्माण को ध्वस्त किया. जोन 8 की कमिश्नर राजेश्वरी पटेल के मार्गदर्शन में उप अभियंता लोचन प्रसाद चौहान की मौजूदगी में यह कार्रवाई की गई. जानकारी के मुताबिक नगर निगम ने अभियान चलाकर स्वीकृति के विपरीत बने इस निर्माण को तत्काल तोड़ा और संबंधित निर्माणकर्ता को भविष्य में नियमों का पालन करते हुए निर्माण करने की कड़ी हिदायत दी.
आबकारी एसआई ने अपने जन्मदिन पर बच्चों के संग साझा की खुशियां
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिले में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना और न्योता भोज के अंतर्गत संचालित अभिनव पहल "प्रोजेक्ट आओ बांटे खुशियां" के तहत रायपुर जिले के अधिकारी एवं कर्मचारी अब अपने जन्मदिवस को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए नन्हें बच्चों संग खुशियां बांट रहे हैं।
इसी कड़ी में विजय नगर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आबकारी विभाग की उपनिरीक्षक अनुला झाड़े ने अपने जन्मदिन के अवसर पर आंगनबाड़ी तथा स्कूली बच्चों के साथ विशेष समय बिताया। बच्चों के साथ केक काटा तथा उन्हें फल, मिठाई, पौष्टिक आहार वितरित की।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिले के 14 कर्मचारियों को जन्मदिन की पूर्व संध्या पर एसएमएस और ई-कार्ड के माध्यम से शुभकामनाएं भेजी गई और उन्हें पास के आंगनबाड़ी या विद्यालय में बच्चों संग जन्मदिन मनाने हेतु प्रेरित किया गया.
प्रदेश के कई जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट हुआ जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में मानसून की गतिविधियों पर ब्रेक लगा हुआ है। प्रदेश के कई जिलों में दिन भर बादल छाए रहने के बाद भी बारिश नहीं हो रही है। बारिश नहीं होने के चलते राजधानी रायपुर समेत कई इलाकों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रायपुर समेत आस-पास के जिलों में लोगों को भीषण उमस और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच मौसम विभाग ने जनता को खुशख़बरी दी है। मौसम विभाग ने आज यानी रविवार को प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश होने की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के कई जिलों में आने वाले दो दिनों तक भारी बारिश होगी। मौसम विभाग ने खासकर बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में तेज बारिश होने की संभावना जताई है। वहीं रायपुर, बिलासपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी, सूरजपुर, सरगुजा, कोरबा, बलरामपुर, रायगढ़, जशपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले में भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया है। राजधानी रायपुर में सुबह से बादल छाए हुए हैं और दिन भर बादल छाए रहेंगे।
मौसम विभाग ने प्रदेश के 10 से ज्यादा जिलों में बारिश के अलर्ट के साथ ही बिजली गिरने की भी संभावना जताई है।
मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में जशपुर जिला प्रशासन एवं विज्ञान भारती के मध्य समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में आज जशपुर जिला प्रशासन एवं विज्ञान भारती के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य जिले के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना तथा उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जोड़ना है।
इस पहल के अंतर्गत विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न अभिनव कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके माध्यम से बच्चों में विज्ञान के प्रति उत्सुकता और जिज्ञासा को नए आयाम मिलेंगे तथा शिक्षा का स्वरूप अधिक व्यावहारिक और प्रयोगशील बनेगा।
उल्लेखनीय है कि विज्ञान भारती पूर्व से ही जिले में कई गतिविधियों में सहयोग कर रही है। इनमें “स्पेस ऑन व्हील” कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान का अनुभव कराना, विज्ञान क्लबों की स्थापना द्वारा विद्यार्थियों की जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थी विज्ञान मंथन जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी की ओर प्रेरित करना शामिल है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह समझौता जिले के विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोलेगा। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लैस नई पीढ़ी ही आत्मनिर्भर भारत और विज्ञाननिष्ठ समाज की नींव रखेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा और विज्ञान को समाज में परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन मानती है और इस दिशा में सभी प्रयासों को प्रोत्साहन देती रहेगी। जशपुर जिला प्रशासन एवं विज्ञान भारती का यह संयुक्त प्रयास न केवल विद्यालयीन शिक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि विद्यार्थियों को विज्ञान एवं नवाचार की दुनिया में नई उड़ान भी देगा। इस साझेदारी से जशपुर जिले में शिक्षा का स्तर और ऊँचा होगा तथा आने वाली पीढ़ी विज्ञान और प्रौद्योगिकी की रोशनी से अपने भविष्य को और अधिक सशक्त बना सकेगी।