प्रदेश
बस्तर क्षेत्र में बढ़ रहा मलेरिया का प्रकोप और CGMSC के वेयर हाऊसों में नहीं है मलेरिया किट।
cgmsc यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड के निर्माण का मकसद था कि प्रदेश भर के अस्पतालों में स्वस्थ्य सुविधाए बेहतर तरीके से उपलब्ध कराया जा सके. परतु आज यह संस्था भ्रस्टाचार का अड्डा बनकर रह गई है. ऐसा कोई दिन नहीं होता जब इस संस्था की गड़बड़िया समाचार पत्रों और टीवी चैनलों की सुर्ख़ियों में स्थान नहीं आता. यह संस्था निश्चित रूप से स्वस्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के लिए लाभ का जरिया है परन्तु यह विष्णुदेव सरकार के लिए बड़ी परेशानी का कारण है. जो भविष्य में सरकार को बड़ी तकलीफ देने जा रहा है.
रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे चल रहा है इस बात का एक और प्रमाण आदिवासी बाहुल्य दंतेवाड़ा और सुकमा से आई खबर से हो रही है। जानकारी के मुताबिक दंतेवाड़ा के आश्रम और पोटा केबिन में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में से 350 विद्यार्थी मलेरिया पॉजीटिव पाए गए हैं। इसी प्रकार सुकमा जिले में भी 468 लोगों में मलेरिया के लक्षण देखे गए हैं। यहां पर सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्मित संस्था सीजीएमएससी के वेयरहाउस में मलेरिया और डेंगू जांच के किट उपलब्ध नहीं है। यह केवल हम नहीं कह रहे इस संस्था की आधिकारिक वेबसाइट में आधिकारिक रूप से यह जानकारी उपलब्ध कराई गई है। ऐसी स्थिति में स्थानीय डॉक्टर मरीजों की जांच इमरजेंसी फंड से किट खरीद कर जांच करा रहे हैं।
CGMSC यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों एवं ईलाज हेतु उपकरणों की व्यवस्था खरीदी कर प्रदान करता है। अपनी इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए इनका प्रदेश भर में 16 वेयरहाउस है। अस्पतालों को जिन भी दवाइयां की आवश्यकता होती है वह इन वेयरहाउसों से मंगा लेते हैं।
परंतु इन दिनों सीजीएमएससी की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही है। जिस अच्छी सोच के साथ इसका गठन हुआ था उस सोच पर अब पानी फिर चुका है। यह संस्था पूरी तरह से भ्रष्टाचार के गिरफ्त में आ गई है। बेईमान अधिकारी डंके की चोट पर सरकारी खजाने में यहां डाका डाल रहे हैं। और जो भी व्यक्ति स्वास्थ्य मंत्री बनकर आता है इस CGMSC कुछ नया कांड कर जाता है। जैसे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आज कर रहे हैं।
चलिए विलंब ना करते हुए छत्तीसगढ़ की आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहा हूं।
आप समझने की कोशिश करिएगा कि कमीशनखोरों की करतूत के चलते आपको स्वास्थ्यगत किन-किन दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। CGMSC की आधिकारिक वेबसाइट cgmsc.gov.in के अनुसार आज की तारीख में इनके वेयरहाउस में रैपिड डायग्नोस्टिक किट मलेरिया, डेंगू टेस्ट किट की उपलब्धता शून्य है। वेबसाइट में जाकर इस कोड के जरिए यह हर कोई देख सकता है????
D454M repit diagnostic kit [maleriya]
CN 16. Dengo test kit


अब आपको बता दें कि ऐसी स्थिति पैदा क्यों हुई और कब तक रहेगी। मेरी जानकारी के अनुसार श्याम बिहारी जयसवाल जी के मंत्री बनने के बाद यह आवश्यक दवाइयां सप्लाई करने वाली कंपनियों में से बहुतों को उनके बकाए का भुगतान नहीं किया गया। दवाई खरीदी या दवा कंपनियों के लिए उपलब्ध राशि घोटाले के आरोपी मोक्षित कॉरपोरेशन आदि की बकाया राशि के भुगतान में कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और सीजीएमएससी की एमडी पद्मिनी भोई ने मोक्षित पर इतनी मेहरबानी क्यों जताई यह जांच का विषय है।
आज की स्थिति में भी ज्यादातर दवा कंपनियों का साल भर से भुगतान बाकी है। इस वजह से कई कंपनियां दवाईया सप्लाई करने में कतरा रही है। पहले वे अपना पुराना बकाया भुगतान मांग रही है। अगर दवा कंपनी दवा सप्लाई करने का मन भी बना ले तो प्रक्रिया के अनुसार ऑर्डर के 40 से 50 दिन की भीतर ही माल आता है।
इन हालातो को आप समझ सकते है की किस तरह से स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के लोगों के जीवन को खतरे में डाला जा रहा है। ईश्वर ना करें कहीं कोई महामारी या अपनी स्थिति निर्मित हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी मानी जाएगी? वो अलग बात है कि जिला अधिकारियों के पास इमरजेंसी दवा खरीदी के लिए बजट दिया हुआ रहता है जिससे वो काम चला लेते है। परंतु यहां पर CGMSC संस्था के जिम्मेदारी की बात है। इन हालातों में यह क्यों न माना जाएगा कि सीजीएमएससी में बैठी एमडी पद्मिनी भोई सहित यहां के महाभ्रष्ट्र अधिकारी भी इस बिगड़ी व्यवस्था के गुनहगार है।
छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 का 17 जुलाई को होगा भव्य विमोचन
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार का बहुप्रतीक्षित विजन डॉक्यूमेंट “छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047” अब तैयार हो चुका है और इसका भव्य विमोचन 17 जुलाई 2025 को शाम 6 बजे नवा रायपुर के एक बड़े होटल में आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक मौके पर राज्य और केंद्र के कई बड़े चेहरे मौजूद रहेंगे, जिसमें नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के बेरी और सीईओ बीवीआर सुब्रमणियम प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर अब तक का सबसे महत्वपूर्ण रोडमैप माना जा रहा है, जिसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त एवं योजना मंत्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में महीनों की कड़ी मेहनत, गहन मंथन और व्यापक विमर्श के बाद तैयार किया गया है।
क्या है “छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047”?
यह दस्तावेज़ भारत सरकार के “विकसित भारत@2047” मिशन के अनुरूप तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत सभी राज्यों से अपेक्षा की गई थी कि वे वर्ष 2047 तक के लिए अपना विकास रोडमैप बनाएं, जब देश अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा। छत्तीसगढ़ इस दिशा में सबसे तेजी से आगे बढ़ते हुए उन पहले राज्यों में शामिल हो गया है, जिनका विजन डॉक्यूमेंट तैयार हो चुका है।
इस दस्तावेज़ में राज्य को “विकासशील से विकसित छत्तीसगढ़” में रूपांतरित करने की विस्तृत योजना दी गई है। इसमें सभी प्रमुख क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, उद्योग, रोजगार, डिजिटल परिवर्तन, पर्यावरण और सुशासन पर व्यापक कार्यनीति तैयार की गई है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी कार्यक्रम की जानकारी
वित्त एवं योजना मंत्री ओपी चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विजन के साथ अमृतकाल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। उसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने पहले ही बजट में यह घोषणा की थी कि हम एक स्पष्ट विजन और रोडमैप तैयार करेंगे, जिससे 2047 तक छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जा सके। अब वह डॉक्यूमेंट ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047’ के रूप में तैयार हो चुका है, जिसे 17 जुलाई को लॉन्च किया जाएगा।”
वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि अमृतकाल अंजोर विजन डॉक्यूमेंट @ 2047 का लक्ष्य विकासशील छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ में बदलना है। जिसके लिए दूरदर्शी दृष्टिकोण, स्पष्ट प्राथमिकताएं और सुसंगठित रणनीति तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि हमारे लक्ष्यों में अगले 5 वर्षों में GSDP को 5 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये करना, और इसे 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाना का विजन है। इसके साथ 100% साक्षरता हासिल करना, 27% शहरीकरण दर के साथ संतुलित शहरी विकास और सशक्त बुनियादी ढांचा तैयार करना, 44% वन क्षेत्र को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित कर हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के माध्यम से लॉजिस्टिक हब स्थापित करना, स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना, तथा स्मार्ट शहरों और पर्यावरण-संवेदनशील योजनाओं के साथ टिकाऊ विकास को प्राथमिकता देना शामिल है।
वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि अमृतकाल अंजोर विजन डॉक्यूमेंट के लॉन्च कार्यक्रम में राज्य के सभी मंत्री, 50 से अधिक विधायक, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, सांसदगण, उद्योग जगत, पत्रकार, शिक्षाविद्, महिला सशक्तिकरण से जुड़े संगठनों, और चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है।
ऑपरेशन सिन्दूर पर छत्तीसगढ़ को गर्व: मुख्यमंत्री ने जताया प्रधानमंत्री का आभार, बोले, ऑपरेशन सिन्दूर भारत की ताकत, संकल्प और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का प्रमाण
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कुशल रणनीति और नेतृत्व क्षमता को पूरे देश ने देखा है। यह केवल एक मिशन नहीं था, बल्कि भारत की ताकत, संकल्प और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का जीवंत प्रमाण है। श्री साय आज विधानसभा में ऑपरेशन सिन्दूर के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को ऑपरेशन सिन्दूर के सफल संचालन के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता को इस ऑपरेशन की सफलता पर गर्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भारत अब ऐसा राष्ट्र बन चुका है जो अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी परिस्थिति में, किसी भी सीमा तक जाकर, त्वरित, निर्णायक और प्रभावी कार्यवाही करने में सक्षम है। ऐसे अभियान केवल सैन्य या कूटनीतिक सफलता का प्रतीक नहीं होते, बल्कि वे संपूर्ण राष्ट्र की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व का दृष्टिकोण स्पष्ट है — हर भारतीय का जीवन बहुमूल्य है, चाहे वह देश में हो या विदेश में। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन के केंद्र में समन्वय और निर्णय क्षमता की जो धुरी रही, वह हैं - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सक्रिय भागीदारी, व्यक्तिगत निगरानी और स्पष्ट निर्देशों के कारण ही यह मिशन समयबद्ध, सुरक्षित और सफलतापूर्वक सम्पन्न हो पाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना की बात करते हैं, तो ऐसे मिशन हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि भारत केवल अपने नागरिकों की ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिए भी कर्तव्यनिष्ठ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत की साख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई ऊंचाइयों को स्पर्श कर रही है। ऑपरेशन गंगा, ऑपरेशन कावेरी, ऑपरेशन देवी शक्ति, और अब ऑपरेशन सिन्दूर — भारत ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वह वैश्विक संकटों में मूक दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय संकट-निवारक राष्ट्र है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहलगाम की वीभत्स घटना के पश्चात हमारे प्रदेश के सपूत स्वर्गीय दिनेश मिरानिया का पार्थिव शरीर भी लौटकर आया। मैंने स्वयं उनके परिवार की पीड़ा को देखा। हमारी बहन ने अपनी आँखों के सामने अपना सुहाग उजड़ते देखा — यह पीड़ा कितनी गहरी है, यह पूरा सदन समझ सकता है। आतंकियों ने उन्हें केवल इस कारण मार डाला कि वे नहीं चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर, जो भारत का अभिन्न अंग है, उसमें अन्य प्रांतों के नागरिकों की आवाजाही हो सके। उन्हें धर्म देखकर मारा गया। देश भर की माताओं-बहनों के बिलखने की तस्वीरें सामने आईं और इनके साथ पूरा देश रोया। यह एक ऐसी अमानवीय घटना थी, जिसमें सम्पूर्ण मानवता तार-तार हो गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां आतंकवादियों ने निर्दोष लोगों का रक्त बहाया, वहीं भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में इस बात का विशेष ध्यान रखा कि पाकिस्तान के आम नागरिकों को कोई क्षति न पहुँचे। हमारे नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत किसी को छेड़ता नहीं, परंतु छेड़ने वालों को छोड़ता भी नहीं। ऑपरेशन सिन्दूर के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हम प्रत्येक रक्त की बूँद का हिसाब लेते हैं। जिन आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया, वे संसद हमले, मुंबई हमले, अक्षरधाम हमला और पुलवामा जैसी भीषण घटनाओं में लिप्त थे। भारत ने आतंकवाद को शह देने वाले देशों को विश्व मंच पर बेनकाब किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने सदैव शांति को प्राथमिकता दी है, परंतु संप्रभुता पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उसका माकूल उत्तर दिया जाएगा। जो देश आतंकवादियों की भाषा बोलते हैं, वे आज वैश्विक मंचों पर अलग-थलग पड़ चुके हैं — इसका श्रेय भारतीय नेतृत्व की अडिग इच्छाशक्ति को जाता है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को बेनकाब करने हेतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस प्रकार सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में भेजा, वह भारतीय लोकतंत्र की सुंदरता और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना का आदर्श उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उन्हें यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। उनके व्यक्तित्व में संकल्प, समन्वय और संवेदनशीलता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। रक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु प्रधानमंत्री ने जो सतत परिश्रम किया, उसका प्रभाव हमें ऑपरेशन सिन्दूर में प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिला। यह ऑपरेशन 140 करोड़ देशवासियों की एकजुटता और अखंडता का प्रतीक बन चुका है और सदा स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर केवल आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई नहीं, बल्कि यह नारी सम्मान और शक्ति का भी प्रतीक है, मातृशक्ति को समर्पित एक ऐतिहासिक सैन्य-संकल्प है।
देश के लिए गौरव का क्षण: मुख्यमंत्री ने Axiom-4 मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को दी बधाई
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने Axiom-4 अंतरिक्ष मिशन की ऐतिहासिक सफलता और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी पर भारत के अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सहित पूरी टीम को हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि, गगनयान मिशन की ओर बढ़ते भारत के आत्मनिर्भर और वैज्ञानिक कदमों का प्रतीक है। शुभांशु की यह उपलब्धि देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा है और उनके सपनों को एक नई उड़ान देने वाली है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह क्षण केवल भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के लिए ही नहीं, अपितु हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि भारत की युवा वैज्ञानिक प्रतिभा और वैश्विक स्तर पर बढ़ती वैज्ञानिक भागीदारी का प्रमाण है।
"स्कूटी दीदी" बनीं आत्मनिर्भर भारत की प्रतीक – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सराहा एनु का जज़्बा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एक छोटे से गांव उमरदा की निवासी एनु आज पूरे देश में “स्कूटी दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एनु की जीवटता, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उनके योगदान की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि एनु जैसी बेटियाँ ही आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान हैं। उनके साहस, समर्पण और संकल्प से छत्तीसगढ़ के गांवों की तस्वीर बदल रही है।
एनु की प्रेरक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो संसाधनों की कमी, सामाजिक दबाव और परंपरागत सोच भी राह नहीं रोक सकती। एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मीं एनु ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया, एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया, और समय पर ऋण को चुका कर आर्थिक अनुशासन की मिसाल पेश की।


एनु को समझ थी कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गतिशीलता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने 'प्रथम संस्था' से स्कूटी चलाना सीखा और शुरुआत में समाज के तानों और व्यंग्य के बावजूद अपना आत्मविश्वास बनाए रखा और हार नहीं मानी। जब वे गांव-गांव स्कूटी से महिलाओं से जुड़ने लगीं, तभी उन्हें “स्कूटी दीदी” के नाम से पहचाना जाने लगा।
वर्ष 2023 में एनु ने "महिला दोपहिया प्रशिक्षण केंद्र" की स्थापना की। शुरुआत में केवल 2-3 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया, लेकिन धीरे-धीरे यह पहल ग्रामीण समाज में एक क्रांति बन गई। अब तक वे 30 से अधिक महिलाओं को स्कूटी चलाना सिखा चुकी हैं, जो अब स्वयं आंगनबाड़ी, स्कूल, बैंक और स्वास्थ्य केंद्र जैसे स्थानों तक स्वतंत्र रूप से पहुँचना शुरू कर चुकी हैं।
एनु की इस पहल से न केवल महिलाओं की दैनिक गतिशीलता आसान हुई है, बल्कि पूरे सामाजिक दृष्टिकोण में भी परिवर्तन आया है। अब गांवों में माता-पिता स्वयं अपनी बेटियों और बहुओं को एनु के पास प्रशिक्षण हेतु भेज रहे हैं। उनका सपना है कि वे 1000 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएं और शीघ्र ही चारपहिया वाहन प्रशिक्षण केंद्र शुरू करें।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि एनु जैसे लोग छत्तीसगढ़ की नई पहचान हैं। राज्य सरकार ‘बिहान’ जैसी योजनाओं के माध्यम से ऐसे नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो जमीनी स्तर पर परिवर्तन ला रहे हैं।
एनु का योगदान केवल ड्राइविंग प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई, एलईडी असेंबली, मनरेगा कार्यों, और घरेलू प्रबंधन में भी महिलाओं को दक्ष बनाया है। उनके प्रयासों को देखते हुए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा और धमतरी के कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने स्वयं उमरदा गांव जाकर एनु से मुलाकात की और उनके कार्यों की सराहना की।
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने भी एनु की कहानी को फेसबुक पोस्ट के माध्यम से साझा करते हुए कहा कि जीवन में संसाधनों की कमी थी, लेकिन एनु के हौसले को कोई डिगा नहीं सका। उन्होंने एम.ए. की पढ़ाई पूरी कर 'बिहान' और 'प्रथम संस्था' से प्रशिक्षण प्राप्त कर न केवल आत्मनिर्भरता पाई, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की बेटियाँ केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवर्तन की वाहक बन रही हैं। राज्य सरकार हर ऐसी पहल का स्वागत करेगी जो महिला सशक्तिकरण को गति देगी।
श्री रामलला के दर्शन करने रायपुर से 850 श्रद्धालु हुए रवाना, CM विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेशवासियों की आस्था और श्रद्धा को मूर्त रूप देने हेतु प्रारंभ की गई ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के अंतर्गत आज रायपुर रेलवे स्टेशन से रायपुर संभाग के 850 श्रद्धालु विशेष ट्रेन से अयोध्या धाम के दर्शन के लिए रवाना हुए। इस पवित्र यात्रा के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनकी यात्रा के मंगलमयी होने की कामना की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रद्धालुओं को हमारे 'भांचा राम' — श्रीरामलला के निःशुल्क दर्शन कराने की यह पुण्य यात्रा अनवरत जारी है। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस गारंटी को साकार कर रही है, जिसमें उन्होंने देश के प्रत्येक नागरिक को प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प लिया था।
उन्होंने कहा कि “श्री रामलला दर्शन योजना” के अंतर्गत सरकार ने मार्च 2024 तक 20,000 श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया था, किंतु प्रदेशवासियों की अद्वितीय आस्था, उत्साह, और सरकार की प्रतिबद्धता के चलते यह संख्या 22,000 से अधिक हो चुकी है। इस यात्रा में श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन का सौभाग्य भी प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए ₹36 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। अब तक बीते डेढ़ वर्षों में 27 विशेष ट्रेनें छत्तीसगढ़ के विभिन्न संभागों से श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या धाम के लिए रवाना हो चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री रामलला तीर्थ दर्शन योजना केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का हर नागरिक, विशेषकर बुज़ुर्ग एवं वंचित वर्ग, अपने जीवन में एक बार प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान के दर्शन कर सके।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर प्रारंभ की गई ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ आज प्रदेशवासियों के जनजीवन से गहराई से जुड़ चुकी है। इसी कड़ी में वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली विशेष ट्रेन आज रायपुर रेलवे स्टेशन से अयोध्या धाम के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर राजस्व, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंकराम वर्मा ने दोपहर 1:00 बजे हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। ट्रेन के प्रस्थान के दौरान रायपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर 7 जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। तीर्थयात्रियों और उनके परिजनों में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। यात्रियों का पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य एवं लोकवाद्य से स्वागत किया गया, वहीं IRCTC के प्रतिनिधियों द्वारा तिलक लगाकर अभिवादन किया गया।
इस अवसर पर विधायकगण पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, गुरु खुशवंत साहिब, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, सचिव संस्कृति एवं पर्यटन डॉ. रोहित यादव, पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य, कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं रेलवे व IRCTC के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि इस योजना की परिकल्पना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा प्रदेशवासियों को जीवन में एक बार अयोध्या धाम के दर्शन का सौभाग्य प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। इसके लिए 23 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और IRCTC के मध्य एमओयू संपादित किया गया था। योजना की औपचारिक शुरुआत 5 मार्च 2024 को रायपुर से हुई थी, जब मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं पहली ट्रेन को रवाना किया था। इसके पश्चात बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग-बस्तर (संयुक्त) संभागों से भी विशेष ट्रेनों का संचालन हुआ। विगत वर्ष इस योजना के माध्यम से लगभग 22,100 श्रद्धालुओं ने अयोध्या धाम के दर्शन किए। योजना के अंतर्गत प्रत्येक संभाग से साप्ताहिक विशेष ट्रेनों का संचालन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले के बच्चों से की आत्मीय मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से छत्तीसगढ़ विधानसभा में नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत राजधानी रायपुर के शैक्षणिक भ्रमण पर आए सुकमा जिले की सुदूरवर्ती पाँच ग्राम पंचायतों के बच्चों ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका हालचाल जाना और राजधानी रायपुर में उनका आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बस्तर के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी सहित सभी मूलभूत सुविधाएँ बस्तर के कोने-कोने तक पहुँचाने हेतु कृतसंकल्पित है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से सौहार्दपूर्ण बातचीत करते हुए कहा कि इस शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से आपको राजधानी रायपुर को निकट से देखने-समझने का अवसर मिला है। इसी तरह राज्य सरकार बस्तर क्षेत्र में भी तीव्र गति से विकास कर रही है। उन्होंने बताया कि सुदूर अंचलों में अब सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित हो रहे हैं, और जहां-जहां ये कैंप पहुँचते हैं, वहाँ चौतरफा विकास के द्वार खुलते हैं। अब अधिकांश स्थानों पर शासकीय राशन दुकानों की स्थापना हो चुकी है और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुँच रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि निकट भविष्य में बस्तर पूरी तरह से नक्सलमुक्त क्षेत्र होगा।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से मुस्कराते हुए पूछा — "बस्तर के शेर बच्चों ने रायपुर के जंगल सफारी में शेर देखा या नहीं?" इस मजाकिया अंदाज़ पर बच्चों सहित उपस्थित सभी लोग ठहाके लगाकर हँस पड़े।
श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। बस्तर के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उन्हें दुग्ध उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा है। सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर रही है, ताकि क्षेत्र के बच्चों का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध हो सके।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायकगण ईश्वर साहू एवं सुशांत शुक्ला भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत सुकमा जिले की पाँच सुदूर ग्राम पंचायतों—पालाचलमा, पोटकपल्ली, एलमागुंडा, ताड़मेटला एवं गोलापल्ली—के 100 स्कूली बच्चे राजधानी रायपुर के दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर आए हैं। भ्रमण के दौरान इन बच्चों को मंत्रालय, जंगल सफारी, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का अवलोकन कराया गया। विदित हो कि नियद नेल्लानार योजना के तहत बस्तर के नक्सल प्रभावित पाँच जिलों के बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
राजनांदगांव के नागरिक प्रतिनिधिमंडल ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से छत्तीसगढ़ विधानसभा के समिति कक्ष में राजनांदगांव जिले के नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ निरंतर जनहित में कार्य कर रही है। प्रशासनिक कार्यप्रणाली में नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए सभी प्रक्रियाओं को चरणबद्ध रूप से ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को सुगम, सरल और सुलभ सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 24 अप्रैल को ‘राष्ट्रीय पंचायत दिवस’ के अवसर पर प्रदेश की चयनित ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्रों की शुरुआत की गई है। इन केंद्रों के माध्यम से अब ग्राम पंचायत स्तर पर ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल ग्रामीणों को डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में प्रदेश की अन्य पंचायतों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाएगा।
राजनांदगांव से आए नागरिक प्रतिनिधिमंडल ने जिले में प्रयास विद्यालय, नालंदा परिसर, एवं अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति धन्यवाद एवं आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव जिले में बीते डेढ़ वर्षों के भीतर पेयजल विस्तार, सड़क निर्माण, और अन्य अधोसंरचनात्मक कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के विभिन्न निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनका प्रत्यक्ष लाभ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है। यह जनकल्याण और विकास की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार संतुलित, समावेशी और सतत विकास के सिद्धांतों पर कार्य करते हुए छत्तीसगढ़ को सतत विकास की ओर अग्रसर करने के लिए कटिबद्ध है।
इस अवसर पर पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, कोमल राजपूत, त्रिस्तरीय पंचायत पदाधिकारीगण और राजनांदगांव जिले के गणमान्य नागरिकगण उपस्थित थे।
शिक्षा में सहभागिता को बढ़ावा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर शुरू होगा पालक-शिक्षक संवाद अभियान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य के सभी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र के दौरान वर्ष में तीन बार पालक-शिक्षक बैठकों का आयोजन किया जाएगा। पहली बैठक अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जाएगी, जबकि द्वितीय एवं तृतीय बैठकें तिमाही और अर्धवार्षिक परीक्षाओं के 10 दिवस के भीतर संपन्न होंगी। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने सभी कलेक्टरों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि प्रत्येक जिले में इन बैठकों के आयोजन हेतु कार्ययोजना तैयार की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि सभी विद्यालयों में यह प्रक्रिया प्रभावी रूप से लागू हो।
पालक-शिक्षक बैठकें न केवल शैक्षणिक संवाद का मंच होंगी, बल्कि वे बच्चों की संपूर्ण प्रगति पर सामूहिक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर भी देंगी। इन बैठकों के माध्यम से पालकों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि घर में बच्चों की पढ़ाई के लिए कैसा वातावरण होना चाहिए, उनकी दिनचर्या कैसी हो, परीक्षा के तनाव से कैसे निपटना है, और संवाद की आदत कैसे विकसित करनी है। साथ ही, ‘बस्ता रहित शनिवार’ जैसी पहल पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा जिससे बच्चे मानसिक रूप से हल्का महसूस करें और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लें।
बैठकों के दौरान पालकों को बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के उपायों पर भी जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से उन्हें यह समझाया जाएगा कि बच्चों को खुलकर बोलने के लिए अवसर प्रदान करना, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण में भागीदारी सुनिश्चित करना, और जाति, आय एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाने हेतु आयोजित शिविरों में बच्चों को शामिल करना कितनी महत्वपूर्ण पहल है। इसके अतिरिक्त ‘न्योता भोजन’ जैसी सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए भी पालकों को प्रेरित किया जाएगा।
इस पहल में डिजिटल शिक्षा को भी विशेष स्थान दिया गया है। बैठक के दौरान पालकों को दीक्षा ऐप, ई-जादुई पिटारा, डिजिटल लाइब्रेरी जैसे संसाधनों के बारे में बताया जाएगा, ताकि वे घर पर भी अपने बच्चों को तकनीक आधारित शिक्षण सामग्री से जोड़ सकें। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई में रोचकता बढ़ेगी, बल्कि पालक स्वयं भी शिक्षा के सक्रिय सहभागी बन सकेंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगस्त के प्रथम सप्ताह में आयोजित होने वाली पहली पालक-शिक्षक बैठक को प्रत्येक स्कूल में भव्य, सुव्यवस्थित और संवाद-प्रधान रूप से संपन्न किया जाएगा। तदनुसार, तिमाही एवं अर्धवार्षिक परीक्षाओं के बाद होने वाली द्वितीय और तृतीय बैठकें भी सुनियोजित ढंग से कराई जाएंगी। इन बैठकों में बच्चों की अकादमिक प्रगति, पाठ्येतर गतिविधियों, स्वास्थ्य, और सामाजिक व्यवहार के संबंध में पालकों को अवगत कराते हुए, उनके व्यक्तित्व विकास पर चर्चा की जाएगी—ताकि स्कूल और परिवार मिलकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में कार्य कर सकें।
GST का फर्जी अफसर बनकर करोड़ों की ‘डीलिंग’ करने वाले अनिल गुप्ता की बढ़ी रिमांड
रायपुर। छत्तीसगढ़ में खुद को GST विभाग का अफसर बताकर वर्षों से लाइजनिंग का जाल बुनने वाले अनिल गुप्ता की मुसीबतें और बढ़ती जा रही हैं। CBI ने पूछताछ के लिए उसकी रिमांड तीन दिन और बढ़वा ली है। रविवार को 14 जुलाई को रिमांड अवधि खत्म होने पर आरोपी को विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां CBI ने आगे की जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगा। कोर्ट ने 17 जुलाई तक CBI रिमांड को मंजूरी दे दी है।
अब आने वाले तीन दिनों तक CBI की सात सदस्यीय टीम अनिल गुप्ता से अलग-अलग पहलुओं पर सघन पूछताछ करेगी। एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान कई बड़े उद्योगपतियों, कारोबारी समूहों और प्रशासनिक अधिकारियों के नाम उजागर हो सकते हैं, जिन्होंने उसके नेटवर्क का उपयोग कर करोड़ों की टैक्स चोरी को ‘मैनेज’ कराया।
‘मिश्रा’ बनकर करता था सेटिंग, अफसरों तक पहुँच – रेड रोको और गाड़ी छुड़ाओ का खेल
सूत्रों के अनुसार, अनिल गुप्ता वर्षों से GST विभाग में एक रसूखदार लाइजनर की भूमिका निभा रहा था। वह खुद को कभी ‘मिश्रा’ बताता था, और GST अधिकारियों व कारोबारियों के बीच पुल का काम करता था। उसका नेटवर्क इतना मजबूत था कि छापेमारी के बाद संबंधित अफसरों से मुलाकात करवाता, रेड को जल्द खत्म करवाता, जब्त वाहनों को छुड़वाता और यहां तक कि बड़े उद्योगपतियों के ठिकानों पर पूरे साल छापे न पड़ें, इसके लिए भी मोटी रकम वसूल करता था।
CBI की जांच में सामने आया है कि अनिल गुप्ता यह रकम केवल खुद नहीं रखता था, बल्कि उसे विभाग के वरिष्ठ अफसरों से लेकर निचले कर्मचारियों तक पहुंचाने का भी काम करता था। उसके मोबाइल फोन से कई बड़े अधिकारियों और कारोबारियों की कॉल रिकॉर्डिंग और चैट्स बरामद हुए हैं, जिन्हें CBI ने जब्त कर जांच के दायरे में ले लिया है।
CBI के सवालों के घेरे में 47 से अधिक बिंदु, कॉल रिकॉर्डिंग से लेन-देन तक की पड़ताल
सूत्रों के अनुसार, अनिल गुप्ता से CBI कुल 47 से अधिक बिंदुओं पर पूछताछ कर रही है। इसमें यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वह कितने समय से GST अधिकारियों और व्यापारियों के संपर्क में था, किन-किन मामलों में उसने लाइजनिंग की और किन अफसरों या कारोबारियों से करोड़ों का लेन-देन हुआ।
CBI कॉल रिकॉर्डिंग में दर्ज आवाज़ों का मिलान भी करवा रही है, ताकि यह पुष्टि हो सके कि बातचीत में शामिल लोग वही हैं जिनके नाम सामने आ रहे हैं। साथ ही, कुछ गोपनीय संपर्क सूत्रों पर भी एजेंसी की नजर है। खबर है कि कई उद्योगपतियों और विभागीय अधिकारियों को पूछताछ के लिए जल्द ही समन भेजा जा सकता है।
गिरफ्तारी के बाद अफसरों और कारोबारियों में बेचैनी
अनिल गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद से ही राजधानी रायपुर सहित प्रदेश भर के व्यापारिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। जिन नामों की कॉल डिटेल और चैट्स CBI के हाथ लगे हैं, उनमें से कई अब जांच के घेरे में आ सकते हैं। माना जा रहा है कि यह मामला छत्तीसगढ़ के हालिया वर्षों के सबसे बड़े टैक्स-लाइजनिंग घोटालों में से एक बन सकता है।
तेंदूपत्ता बोनस घोटाला : EOW ने 14 आरोपियों के खिलाफ पेश किया 4500 पेज का चालान
रायपुर। तेंदूपत्ता बोनस घोटाला मामले में ईओडब्ल्यू ने 14 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय दंतेवाड़ा में लगभग 4500 पेज का चालान पेश किया है. बता दें कि इस मामले में EOW ने तत्कालीन वनमंडलाधिकारी अशोक कुमार पटेल समेत 11 आरोपियों (4 वनकर्मी व 7 प्रबंधक) को गिरफ्तार किया है. मामले में ईओडब्ल्यू की जांच जारी है.
जांच में सामने आया है कि तत्कालीन वनमंडलाधिकारी अशोक कुमार पटेल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वर्ष 2021-22 के तेंदूपत्ता प्रोत्साहन पारिश्रमिक में संग्राहकों को दी जाने वाली राशि 7 करोड़ का बंदरबांट किया था. अशोक पटेल ने वन विभाग के अधिकारियों और प्राथमिक लघुवनोपज समितियों के प्रबंधकों व पोषक अधिकारियों के साथ मिलकर इस भ्रष्टाचार को अंजाम दिया था. अब तक ईओडब्ल्यू ने तेंदूपत्ता बोनस गबन मामले में 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. मामले की जांच जारी है.
प्रकरण में अब तक की विवेचना में 17 समितियों में से 8 दूरस्थ समितियों के संबंध में जांच की गई, जिस पर 3,92,05,362 रुपए का गबन कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाना पाया गया. उपरोक्त वर्णित आरोप में आज कुल 14 आरोपी लोकसेवक वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) अशोक कुमार पटेल, 04 वनकर्मी / पोषक अधिकारी (चैतूराम बघेल, देवनाथ भारद्वाज, मनीष कुमार बारसे, पोड़ियामी इड़िमा (हिडमा) एवं 09 समिति प्रबंधक (पायम सत्यनारायण उर्फ शत्रु, मोह. शरीफ, सीएच रमना (चिटटूरी), सुनील नुप्पो, रवि कुमार (रवि कुमार गुप्ता), आयतू कोरसा, मनोज कवासी, राजशेखर पुराणिक उर्फ राजू, बी.संजय रेड्डी) के विरूद्ध विशेष न्यायालय दंतेवाड़ा में लगभग 4500 पेज का चालान पेश किया.
उल्लेखनीय है कि बस्तर क्षेत्र के घोर नक्सल एवं अति संवेदनशील आदिवासी बहुल क्षेत्र में तेंदूपत्ता वहां के निवासियों की आजीविका का अत्यंत महत्वपूर्ण साधन है. इसके माध्यम से वे अपने परिवार का जीवन-यापन करते हैं. प्रकरण की विवेचना अंतर्गत मड़ईगुड़ा, गोलापल्ली, किस्टाराम, जगरगुण्डा, चिंतलनार, चिंतागुफा, भेज्जी, कोंटा तथा पोलमपल्ली के दूरस्थ अंदरूनी एवं पहुंचविहीन मार्गों में जाकर ग्रामीणों से पूछताछ करने पर ग्रामीणों ने बोनस स्कीम के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की और प्रकरण में महत्वपूर्ण साक्ष्य दिए. इस मामले में अन्य 09 समितियों के संबंध में जांच जारी है.
छत्तीसगढ़ में पारदर्शी, वैज्ञानिक और जनहितैषी खनिज नीति के तहत रेत खनन व्यवस्था को मिल रहा नया स्वरूप
रायपुर। राज्य में रेत खनन नीति को अधिक पारदर्शी, संगठित, पर्यावरण-संवेदनशील और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से व्यापक कदम उठाए गए हैं। पूर्ववर्ती सरकार के शासन काल के दौरान राज्य में संचालित रेत खदानों की संख्या 300 से घटकर लगभग 100-150 रह गई थी, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुए और अवैध खनन को बढ़ावा मिला। वर्तमान सरकार द्वारा खनिज नीति में सुधार कर रेत खनन की व्यवस्था को संगठित, नियंत्रित और जनहितकारी बनाया गया है।
पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया में तीव्रता
राज्य में पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया को गति देने के लिए भारत सरकार से अनुमोदन प्राप्त कर तीन राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण समितियों का गठन किया गया है। पूर्व में केवल एक समिति कार्यरत थी। इस निर्णय से लंबित प्रकरणों के शीघ्र निपटारे की प्रक्रिया सुगम हुई है।
वैध खदानों की संख्या में वृद्धि
वर्तमान में 119 रेत खदानें पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ विधिवत संचालित हैं, जबकि 94 अन्य खदानों की मंजूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। साथ ही, आगामी 1 से 1.5 वर्षों में 300 से अधिक नई खदानों को स्वीकृति दिए जाने की योजना है, जिससे रेत की आपूर्ति सुलभ बनी रहेगी और निर्माण कार्यों को गति मिलेगी।
IIT रुड़की की रिपोर्ट: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खनन
प्रमुख नदियों पर खनन के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर IIT रुड़की से कराए गए अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है कि विधिवत और नियंत्रित रेत खनन से नदियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। यह रिपोर्ट राज्य की वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित खनिज नीति को समर्थन प्रदान करती है।
अवैध खनन पर सख्त कार्यवाही
वर्ष 2024-25 से जून 2025 तक 6,331 अवैध खनन प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से ₹18.02 करोड़ की वसूली, 184 मशीनों की जब्ती, 56 एफआईआर तथा 57 न्यायालयीन परिवाद दायर किए गए। जिला एवं राज्य स्तरीय टास्क फोर्सों द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है, जिसमें खनिज, राजस्व, पुलिस, परिवहन और पर्यावरण विभाग के अधिकारी सम्मिलित हैं।
विवादों पर त्वरित कार्यवाही
राजनांदगांव और बलरामपुर सहित राज्य के विभिन्न जिलों में रेत से संबंधित विवादों एवं घटनाओं पर त्वरित कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही की गई है। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रॉयल्टी में राहत
15 मार्च 2024 को लिए गए निर्णय के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को रेत पर रॉयल्टी से छूट प्रदान की गई है। इस निर्णय से गरीबों और जरूरतमंदों को प्रत्यक्ष राहत मिली है।
भविष्य की नीति: पारदर्शिता और संतुलन
छत्तीसगढ़ शासन की नीति स्पष्ट है — खनिज संसाधनों के दोहन को जनहित, पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के सिद्धांतों पर आधारित करना। संगठित, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से तैयार की गई यह नई रेत खनन नीति राज्य के समग्र विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए सशक्त आधार बनेगी।
छत्तीसगढ़ से 30 बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी, रायपुर पुलिस ने किया डिपोर्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियो को रायपुर पुलिस आज उनके देश में डिपोर्ट करने वाली है. प्रदेशभर से करीब 30 बांग्लादेशियों को रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़, मोहला-मानपुर और चिरमिरी जैसे जिलों से पकड़ा गया था. इन सभी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हिरासत में लेकर उनके देश भेजने की व्यवस्था की गई है.
रायपुर पुलिस इन सभी घुसपैठियों को लेकर अब भारत-बांग्लादेश सीमा की ओर रवाना हो गई है, जहां उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हवाले किया जाएगा. सभी आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी करने के बाद BSF इन लोगों को बांग्लादेश भेजेगी.
शून्य काल में विपक्ष ने उठाया अवैध रेत खनन का मुद्दा
रायपुर। विधानसभा में आज विपक्ष ने शून्य काल में रेत के अवैध उत्खनन का मुद्दा लाया. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा, लगातार प्रदेश में अवैध रेत खनन पुलिस ओर माइनिंग वालों की देखरेख में चल रहा है. खदानों में गोली चल रही है. जिंदा आदमियों पर ट्रक चढ़ा दिए जा रहे हैं, इसे स्वीकृत कर चर्चा कराई जाए. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की ग्राह्यता को अस्वीकार किया. इसके बाद विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया.
इससे पहले उमेश पटेल ने कहा, माइनिंग के अधिकारियों को जब पूछा जाता है तो वो कहते हैं कि हमें ऊपर से आदेश है कि इन्हें नहीं पकड़ना है. पत्रचार के बाद भी कार्यवाही नहीं की जा रही है. रेत माफियों ने रायगढ़ जिले के मांड नदी का कोई किनारा नहीं छोड़ा है. यहां धड़ल्ले से अवैध उत्खनन चल रहा है इसलिए इस पर चर्चा करना बहुत जरूरी है.
देवेंद्र यादव ने कहा, आज के समय में पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं. पूरी मिलीभगत के साथ अवैध रेत खनन का काम किया जा रहा है. इस पर चर्चा कराना बेहद जरूरी है. दिलीप लहरिया ने कहा, महानदी में कई जगहों पर रेत की सप्लाई बारिश में भी नहीं हो पा रही है. रेत माफिया चाकूबाजी करते हैं, समस्या गंभीर है, इसलिए हम चाहते हैं कि इस पर चर्चा हो. रामकुमार ने कहा, ऐसे विषय में चर्चा कराना बेहद आवश्यक है.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, यह निर्माण से संबंधित है. रेत खनन में माफिया सरकार को अपने जेब में रखकर दादागिरी के साथ नदियों को खाली कर रहे हैं. आपके जिले में गोलियां चला रही है, यह विषय बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है इसलिए इसमें चर्चा कराना जरूरी है. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा, स्थगन की सूचना आज प्राप्त हुई. उन्होंने इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की ग्राह्यता को अस्वीकार किया. इसके बाद विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया.
मुख्यमंत्री से केन्द्रीय भूमि संसाधन सचिव ने की मुलाकात, भू-अभिलेख सुधार, डिजिटल सर्वे और राजस्व न्यायालयों में मामलों के त्वरित निराकरण को लेकर हुई विस्तृत चर्चा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर स्थित कार्यालय में भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर भू-अभिलेख प्रणाली को सुदृढ़ करने, भूमि सर्वेक्षण में तकनीकी नवाचारों के उपयोग, तथा राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राजस्व मंत्री टंकाराम वर्मा भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार भू-राजस्व दस्तावेजों को अद्यतन करने और आवश्यक सुधार के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड जितने व्यवस्थित होंगे, राजस्व न्यायालयों में मामलों का निपटारा उतना ही शीघ्र और प्रभावी रूप से हो सकेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि अभिलेखों में सुधार संबंधी केंद्र सरकार की सभी पहल के साथ राज्य सरकार कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेगी, ताकि यह प्रणाली और अधिक प्रभावशाली व जनहितकारी बन सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तकनीक आधारित नवाचारी पहलों के माध्यम से भू-राजस्व रिकॉर्ड में पारदर्शिता, गति और सटीकता लाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है, जिससे किसानों और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तत्परता से सुनिश्चित करें।
केंद्रीय भूमि संसाधन सचिव मनोज जोशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और राज्य सरकार के सक्रिय सहयोग से इसमें और अधिक सुधार लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व में पारंपरिक पद्धति से किए जाने वाले भूमि सर्वेक्षण में समय अधिक लगता था, किंतु अब आधुनिक तकनीकों के उपयोग से यह प्रक्रिया तेज़, अधिक सटीक और भरोसेमंद हो गई है।
श्री जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार भू-अभिलेख संधारण प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है, जिसके अंतर्गत राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान नक्शों के अद्यतन में कई बार तकनीकी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिन्हें डिजिटल सर्वेक्षण के माध्यम से प्रभावी रूप से दूर किया जा सकेगा। इससे प्रत्येक नागरिक को अद्यतन और प्रमाणिक नक्शा प्राप्त होगा, जिससे गड़बड़ियों में कमी आएगी और शहरी क्षेत्रों के विस्तार को बेहतर ढंग से नियोजित किया जा सकेगा।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, भारत सरकार के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी, राजस्व सचिव अविनाश चंपावत, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
विधानसभा में उठा बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला
रायपुर। विधानसभा में आज ध्यानाकर्षण सूचना में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, धरमजीत सिंह और भावना बाेहरा ने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला उठाया. अजय चंद्राकर ने कहा, करीब 5 हजार घुसपैठिए छत्तीसगढ़ में मौजूद हैं. आधार, राशन, पासपोर्ट बनाकर सरकारी योजना का लाभ ले रहे हैं. सरकारी सिस्टम में इनके मदद करने वाले मौजूद हैं. उन्होंने डिटेंशन सेंटर बनाने की मांग की.
धरमजीत सिंह ने रोहिंग्या मुसलमान को भी चिन्हांकित करने की मांग रखी. भावना बोहरा ने शिकायत के आधार पर जांच करने का मामला उठाया. उन्होंने कहा, दस्तावेजी आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र की जांच हो. विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि कई जिलों में एफआईआर कर कार्रवाई की गई है. टोल फ्री नंबर जारी कर जनभगिता शामिल कर रहे.
रायपुर में बनाया जाएगा 100 सीटर बोर्डिंग सेंटर
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, शिकायतों के आधार पर जांच की जा रही है. डिटेंशन सेंटर की जरूरत नहीं है. बोर्डिंग सेंटर बनाया जाएगा. रायपुर में 100 सीटर बोर्डिंग सेंटर बनाया जाएगा. जो लोग चिन्हित होंगे उनको जेल नहीं बल्कि बोर्डिंग सेंटर में रखा जाएगा. ऐसे लोगों को चिन्हित करने के बाद बीएसएफ को सौंपा जाएगा. बीएसएफ उनको डिपोर्ट करने की कार्रवाई करेगा.
पाकिस्तानी नागरिकों पर भी होगी कार्रवाई : विजय शर्मा
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, शिकायतों की जांच के लिए टास्क फोर्स बनाया गया है. इस दौरान कांग्रेस की ओर से उमेश पटेल ने कार्रवाई का समर्थन किया. साथ ही पाकिस्तान के घुसपैठियों पर कार्रवाई की मांग की. गृह मंत्री शर्मा ने पाकिस्तानी नागरिक के रहने पर भी कार्रवाई की बात कही. उन्होंने कहा, पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को नागरिकता हासिल करने की छूट रहेगी.
अजय चंद्राकर ने कहा, टीएस सिंहदेव ने पत्र लिखा था कि महामाया पहाड़ी पर कब्जा हो गया है. पश्चिम बंगाल तो बांग्लादेश बन ही गया है. समुचित कार्रवाई हो रही तो ये आ कैसे गए. 4 राज्य पार कर रोहिंग्य, बांग्लादेशी आ कैसे गए. इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, पहली बार एसटीएफ का गठन किया गया है. एम आधार ऐप से संदिग्ध का वेरिफिकेशन किया जा रहा है. 19 प्रकरण दर्ज किया गया है.
जो लोग घुसपैठियों का साथ दे रहे उन पर होगी कार्रवाई : गृह मंत्री
धर्मजीत सिंह के सवाल पर मंत्री विजय शर्मा ने कहा, अब तक सारे घुसपैठिए बांग्लादेशी निकले हैं, रोहिंग्या नहीं है. रायपुर में कांग्रेसी पार्षद से बांग्लादेशी के डॉक्यूमेंट बनाए गए. जो भी ऐसा कर रहे हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है. हर जिले में स्कैनिंग होगी. जो वोट बैंक बनाना चाहते हैं उसे खत्म किया जाएगा. बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का विरोध हो रहा है. ये किस तरह की सोच है.
बांग्लाभाषी लोग आदिवासी जमीन पर कर रहे कब्जा : सुशांत शुक्ला
भाजपा विधायक भावना बोहरा ने कहा, होटल, चौक चौराहों, जोमेटो में संदिग्ध लोग दिख रहे हैं. उमेश पटेल ने कहा, सिर्फ बांग्लादेशी नहीं, पाकिस्तानी भी रह रहे हैं, उनको भी प्रदेश से बाहर किया जाना चाहिए. सुशांत शुक्ला ने कहा, बेलतरा के तीन क्षेत्रों में धर्म विशेष के लोग अनैतिक काम में लिप्त हैं. बांग्लाभाषी लोग आदिवासी जमीन पर कब्जा कर रहे. इनके दस्तावेज आज भी वेरिफिकेशन के लिए पेंडिंग है. गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, तीनों जगह पर कठोरता से जांच होगी. जय छत्तीसगढ़ अभियान में सभी विधायक शामिल हों.
रायपुर के बीएसयूपी मकानों में रह रहे बाहरी लोग : राजेश मूणत
विधायक राजेश मूणत ने कहा, संजय नगर, टिकरापारा में जितने बीएसयूपी के मकान बने हैं उनमें बड़ी संख्या में बाहरी लोग आकर बसे हैं. यहां अभियान चलाया जाए. इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, पुलिस के साथ जरूर अभियान चलाया जाएगा.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों ने की मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विधानसभा स्थित कार्यालय में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों ने सौजन्य भेंट कर मंत्रिपरिषद की बैठक में वर्ष 2005 से 2009 बैच तक के अर्हकारी सेवा अवधि पूर्ण कर चुके अधिकारियों को वरिष्ठ प्रवर श्रेणी वेतनमान प्रदान किए जाने के निर्णय हेतु आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि 11 जुलाई 2025 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य पुलिस सेवा संवर्ग के समुचित प्रबंधन हेतु 30 सांख्येतर पदों का सृजन करते हुए वरिष्ठ प्रवर श्रेणी वेतनमान प्रदान करने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय उन अधिकारियों के लिए लिया गया है जिन्होंने सेवा में निर्धारित अर्हता अवधि पूर्ण कर ली है।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले, कीर्तन राठौर, अनंत साहू, डॉ. संगीता माहेलकर एवं प्रज्ञा मेश्राम उपस्थित थीं।

