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राममय हुआ शिवरीनारायण : प्राण प्रतिष्ठा के शुभ क्षण के साक्षी बने CM साय, यहां श्रीराम ने खाए थे माता शबरी के जूठे बेर
रायपुर। अयोध्या में श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के गौरवशाली क्षण में माता शबरी की भूमि शिवरीनारायण भी राममय हो गया है. त्रेता युग में माता शबरी ने इसी भूमि में श्रीराम को जूठे बेर खिलाये थे. आज शिवरीनारायण की धरती वैसी ही पुलकित है. आज श्रीराम पुनः अयोध्या धाम में पधारे हैं. इस शुभ क्षण को देखने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शिवरीनारायण पहुंचे.
यहां श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण हुआ. जैसे ही भगवान श्रीराम साक्षात रूप में नजर आए, सीएम साय, प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, महंत रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिक श्रद्धावनत होकर हाथ जोड़े खड़े हो गए. भगवान श्रीराम की मंजुल मूर्ति देखकर सभी गहरी श्रद्धा में डूब गए. शुभ शंखनाद और राम रतन धन पायो के स्वर लहरियों के साथ हजारों लोग श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के विलक्षण पल के साक्षी बने.
रघुपति राघव राजाराम के गीत के बीच हाथ जोड़े सभी लोग भक्तिभाव में डूबे रहे. भजन की मोहक प्रस्तुति हो रही है. पूरा पंडाल राम भजन में लीन है. जय जय श्री राम का लगातार उद्घोष हो रहा है. पायो जी मैंने राम रतन धन पायो की इस धुन में छत्तीसगढ़ का तंबूरा भी शामिल है.

शिवरीनारायण से भगवान राम का पुराना नाता
दरअसल, जांजगीर-चाम्पा जिले से भगवान राम का बहुत करीब से नाता है. यहां प्रभु श्रीराम ने वनवास का अधिक समय बिताया है, मान्यता है यहां प्रभु श्री राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे. यहां एक पेड़ ऐसा है, जिसके पत्तों की आकृति दोने के सामान है. माता शबरी ने इसी दोने में राम लक्ष्मण को बेर रख कर खिलाए थे. इस वट वृक्ष का वर्णन सभी युगों में मिलने के कारण इसे अक्षय वट वृक्ष के नाम से जाना जाता है.
जांजगीर-चांपा जिले की धार्मिक नगरी शिवरीनारायण को गुप्त प्रयाग कहा जाता है. यहां तीन नदी, महानदी, शिवनाथ और जोक नदी कर त्रिवेणी संगम है. शिवरीनारायण का नाम माता शबरी और नारायण के अटूट स्नेह के कारण पड़ा और भक्त का नाम नारायण के आगे रखा गया.
बड़े मंदिर यानी नर नारायण मंदिर के पुजारी प्रसन्न जीत तिवारी ने बताया कि शिवरीनारायण को छत्तीसगढ़ के जगन्नाथपुरी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इसी स्थान पर प्राचीन समय में भगवान जगन्नाथ स्वामी का मूल स्थान शिवरीनारायण रहा. आज भी साल में एक दिन माघी पूर्णिमा में भगवान जगन्नाथ शिवरीनारायण आते हैं, यहां मंदिर में रोहिणी कुण्ड है, जिसका जल कभी कम नहीं होता, भगवान नर नारायण के चरण कुंड के जल से हमेशा अभिषेक करता है.
शिवरीनारायण मठ मंदिर के पुजारी त्यागी जी महराज ने बताया कि छत्तीसगढ़ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का ननिहाल और उनकी कर्मभूमि भी है. 14 वर्षों के कठिन वनवास काल में श्रीराम ने अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में ही बिताया. माता कौशल्या की जन्मभूमि के कारण छत्तीसगढ़ में श्रीराम को भांजे के रूप में पूजा जाता है. उन्होंने शिवरीनारायण धाम के बारे में बताया कि यही वो पावनभूमि है, जहां भक्त और भगवान का मिलन हुआ था. भगवान राम ने शबरी की तपस्या से प्रसन्न होकर न केवल उन्हें दर्शन दिए बल्कि उनकी भक्ति और भाव को देखकर जूठे बेर भी खाए. आज भी शबरी और राम के मिलन का ये पवित्र स्थान आस्था का केंद्र बना हुआ है.

अयोध्या में प्रभु राम मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद शिवरीनारायण में भी प्रभु के प्राण प्रतिष्ठा के इस दिन को खास बनाया गया है. सभी मंदिर को दूधिया रोशनी और झालर के अलावा दीपों से सजाने और दिनभर भजन कीर्तन और भंडारा प्रसाद वितरण करने की तैयारी की गई है. कुल मिलाकर धार्मिक नगरी शिवरीनारायण भी राममय हो गया है.

राममय हुआ शिवरीनारायण : प्राण प्रतिष्ठा के शुभ क्षण के साक्षी बने CM साय, यहां श्रीराम ने खाए थे माता शबरी के जूठे बेर
रायपुर। अयोध्या में श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के गौरवशाली क्षण में माता शबरी की भूमि शिवरीनारायण भी राममय हो गया है. त्रेता युग में माता शबरी ने इसी भूमि में श्रीराम को जूठे बेर खिलाये थे. आज शिवरीनारायण की धरती वैसी ही पुलकित है. आज श्रीराम पुनः अयोध्या धाम में पधारे हैं. इस शुभ क्षण को देखने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शिवरीनारायण पहुंचे.
यहां श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण हुआ. जैसे ही भगवान श्रीराम साक्षात रूप में नजर आए, सीएम साय, प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, महंत रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिक श्रद्धावनत होकर हाथ जोड़े खड़े हो गए. भगवान श्रीराम की मंजुल मूर्ति देखकर सभी गहरी श्रद्धा में डूब गए. शुभ शंखनाद और राम रतन धन पायो के स्वर लहरियों के साथ हजारों लोग श्री राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के विलक्षण पल के साक्षी बने.
रघुपति राघव राजाराम के गीत के बीच हाथ जोड़े सभी लोग भक्तिभाव में डूबे रहे. भजन की मोहक प्रस्तुति हो रही है. पूरा पंडाल राम भजन में लीन है. जय जय श्री राम का लगातार उद्घोष हो रहा है. पायो जी मैंने राम रतन धन पायो की इस धुन में छत्तीसगढ़ का तंबूरा भी शामिल है.

शिवरीनारायण से भगवान राम का पुराना नाता
दरअसल, जांजगीर-चाम्पा जिले से भगवान राम का बहुत करीब से नाता है. यहां प्रभु श्रीराम ने वनवास का अधिक समय बिताया है, मान्यता है यहां प्रभु श्री राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे. यहां एक पेड़ ऐसा है, जिसके पत्तों की आकृति दोने के सामान है. माता शबरी ने इसी दोने में राम लक्ष्मण को बेर रख कर खिलाए थे. इस वट वृक्ष का वर्णन सभी युगों में मिलने के कारण इसे अक्षय वट वृक्ष के नाम से जाना जाता है.
जांजगीर-चांपा जिले की धार्मिक नगरी शिवरीनारायण को गुप्त प्रयाग कहा जाता है. यहां तीन नदी, महानदी, शिवनाथ और जोक नदी कर त्रिवेणी संगम है. शिवरीनारायण का नाम माता शबरी और नारायण के अटूट स्नेह के कारण पड़ा और भक्त का नाम नारायण के आगे रखा गया.
बड़े मंदिर यानी नर नारायण मंदिर के पुजारी प्रसन्न जीत तिवारी ने बताया कि शिवरीनारायण को छत्तीसगढ़ के जगन्नाथपुरी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इसी स्थान पर प्राचीन समय में भगवान जगन्नाथ स्वामी का मूल स्थान शिवरीनारायण रहा. आज भी साल में एक दिन माघी पूर्णिमा में भगवान जगन्नाथ शिवरीनारायण आते हैं, यहां मंदिर में रोहिणी कुण्ड है, जिसका जल कभी कम नहीं होता, भगवान नर नारायण के चरण कुंड के जल से हमेशा अभिषेक करता है.
शिवरीनारायण मठ मंदिर के पुजारी त्यागी जी महराज ने बताया कि छत्तीसगढ़ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का ननिहाल और उनकी कर्मभूमि भी है. 14 वर्षों के कठिन वनवास काल में श्रीराम ने अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में ही बिताया. माता कौशल्या की जन्मभूमि के कारण छत्तीसगढ़ में श्रीराम को भांजे के रूप में पूजा जाता है. उन्होंने शिवरीनारायण धाम के बारे में बताया कि यही वो पावनभूमि है, जहां भक्त और भगवान का मिलन हुआ था. भगवान राम ने शबरी की तपस्या से प्रसन्न होकर न केवल उन्हें दर्शन दिए बल्कि उनकी भक्ति और भाव को देखकर जूठे बेर भी खाए. आज भी शबरी और राम के मिलन का ये पवित्र स्थान आस्था का केंद्र बना हुआ है.

अयोध्या में प्रभु राम मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद शिवरीनारायण में भी प्रभु के प्राण प्रतिष्ठा के इस दिन को खास बनाया गया है. सभी मंदिर को दूधिया रोशनी और झालर के अलावा दीपों से सजाने और दिनभर भजन कीर्तन और भंडारा प्रसाद वितरण करने की तैयारी की गई है. कुल मिलाकर धार्मिक नगरी शिवरीनारायण भी राममय हो गया है.

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को मंत्री ओपी चौधरी ने बताया गौरव का क्षण, कहा- रामजी की संस्कृति का दुनिया करने लगे अनुसरण तो…
रायगढ़। अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर रायगढ़ के गांधीगंज स्थित राम मंदिर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में वित्त मंत्री व नगर विधायक ओपी चौधरी की सहभागिता रही, जिन्होंने मंदिर दर्शन करने के साथ आरती में शामिल हुए.
मंत्री ओपी चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह सनातनियों के लिए गौरव का क्षण है. रामजी की एक संस्कृति है, और इस संस्कृति में ऐसी ताकत है, जो दुनिया को सच्चा और अच्छा रास्ता दिखा सकती है. पूरी दुनिया इस संस्कृति का अनुसरण करने लगेगी तो न ग्रीन हाउस इफेक्ट होगा, न विश्व युद्ध होगा और न ओजोन परत डिफेट होगा. धरती के सस्टेनेबल विकास की बात की जाती है, जो हमारे संस्कृति के जड़ों में है, इसलिए हम पर्वत पूजन, वृक्ष पूजन करते हैं.
ओपी चौधरी ने कहा कि सभी समाज को सामंजस्य के साथ चलने का संदेश भगवान श्रीराम का जीवन देती है. वे भगवान पुरुषोत्तम राम है, उनसे हमें सीख मिलती है. दिवाली तो वनवास से रामजी लौटे तब का त्योहार है, और पांच सौ सालों बाद ये उनका आगमन हो रहा है, तो दिवाली से भी अधिक भव्य होगा ही. छत्तीसगढ़ में अद्भुत वातावरण है, भगवान राम के प्रति लोगों की आस्था है, जिसे सदियों से कहीं न कहीं कुचला गया और अब वे प्रकट हो कर सामने आ रहे हैं.
वित्त मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ रामजी का ननिहाल है, और माता कौशल्या की भूमि है. भगवान राम हमारे भांचा हैं. दूसरे प्रदेशों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ में ही भांचा के पांव पड़ते हैं. पिछले सरकार द्वारा राम वन गमन पथ निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को लेकर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि दुखद बात है कि राम वन गमन पथ को लेकर भ्रष्ट्राचार हुए हैं. अब भ्रष्ट्राचार से मुक्त कर अच्छे गवर्नेंस के साथ कार्य करेंगे.
रामोत्सव पर धर्मस्व मंत्री बृजमोहन ने श्रद्धालुओं को खिलाई मिठाई
रायपुर- अयोध्या में श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा समारोह के उपलक्ष्य में रायपुर के सदर बाजार एवं आकाशवाणी काली मंदिर में पूजन एवं उत्सव का आयोजन हुआ। इस आयोजन में प्रदेश के धर्मस्व,संस्कृति एवं शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को रामोत्सव की बधाई देते हुए मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया।

राममय हुए शहर, जगह-जगह निकल रही शोभायात्रा, राम नाम की शर्ट और साड़ी में दिख रहे भक्त …
रायपुर। एक नारा एक ही नाम जय श्रीराम-जय श्रीराम के साथ पूरे देशभर में बस रामलला की ही चर्चा हो रही है. हर शहर राममय दिखाई पड़ा. भगवा झंडा लहराते हुए शहर में शोभा यात्रा निकाली जा रही हैं. इसमें शामिल लोग डीजे की धुन पर थिरकते नजर आ रहे है.
पूरे देश में प्राण प्रतिष्ठा की धूम मची हुई है. पूरे भारतवासी इस अवसर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. लोगों का उत्साह केवल सोशल मीडिया पर ही नहीं बल्कि मार्केट में भी देखने को मिल रहा है. मार्केट का हाल देखकर, ऐसा लग रहा है, जैसे सभी बस राममय होना चाहते हैं.
राम भक्तों में राम नाम की शर्ट और साड़ियों की ऐसी होड़ लगी है कि बड़ी ही तजी से मार्केट से ये कपड़े बिकते जा रहे हैं. इससे आप इस राम भक्तों के उत्साह का अंदाजा लगा सकते हैं. जो लोग अयोध्या नहीं जा सकते हैं, वे अपने घर बाजार में ही श्री राम का स्वागत करना चाहते हैं. इसलिए लोग राम नाम में खुद को खो देना चाहते हैं और खुद को श्री राम के जितना करीब हो सके, उतना करीब रखने के लिए, लोग उनके नाम और तस्वीर को अपने कपड़ों पर प्रिंट करके पहनना चाह रहे हैं.
लोग श्रीराम की तस्वीर, अयोध्या का मंदिर और राम नाम लिखे हुए कपड़े पहने हैं. राम नाम की साड़ियों का क्रेज इतना है कि दुकानों से ये साड़ियां हाथों-हाथों बिकी हैं. पुरुषों में भी यही जोश देखने को मिल रहा है. वे भी अपनी शर्ट पर राम का नाम लिखा देखने चाहते हैं. इस वजह से राम नाम की शर्ट्स बाजार में खूब बिकी हैं.
प्रभु श्रीराम के नाम पर लोरमी में बनेगा विश्व रिकार्ड, 5 हजार किलो बेर से बनाई अद्भुद रंगोली…
लोरमी। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव आज लोरमी दौरे पर हैं. इस दौरान श्री राम के नवीन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा भी करेंगे. इस अवसर को चिर स्थाई बनाने के लिए कलाकारों ने 5 हजार स्क्वायर फीट जमीन पर 5 हजार किलो बेर से श्रीराम की अनोखी रंगोली बनाई है.
छत्तीसगढ़ श्रीराम जी का ननिहाल माना जाता है. आज अयोध्या में श्री राम जी के प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा हो रहा है, जिसको लेकर छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है. जगह-जगह लोग इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम कर रहे हैं, कई स्थानों पर कलश यात्रा सहित शोभायात्रा निकाली जा रही है, वही श्रीराम के कई मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आयोजित है.
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा आमंत्रित कलाकारों की टीम ने लोरमी हाईस्कूल मैदान में 5 हजार किलो से बेर की श्रीराम की रंगोली बनाई है, जो एक अलग ही आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. साव के दौरे के दौरान श्रीराम के नवीन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के अलावा कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया है. इस दौरान राम मंडलियों को जिला प्रशासन की पहल से अरुण साव के हाथों वाद्य यंत्र भी प्रदान किया जाएगा.B
हर हर शंभू भजन गायिका अभिलिप्सा पांडा ने छत्तीसगढ़ में दी प्रस्तुति
रायपुर। हर हर शंभू भजन गायिका अभिलिप्सा पांडा ने प्रस्तुति दी. साथ ही श्री राम लला के मोहक रूप को निहारते उनके बाल अठखेलियों को समर्पित भजन सुनकर लोग गुनगुनाने लगे।
ठुमक चलत राम चंद्र
बाजत पैजनियां
किलकि-किलकि उठत धाय
किलकि-किलकि उठत धाय,
गिरत भूमि लटपटाय
धाय मात गोद लेत,
दशरथ की रनियां
ठुमक चलत रामचंद्र,
बाजत पैंजनियां
ठुमक चलत रामचंद्र…
शिवरीनारायण से भगवान राम का पुराना नाता, यहीं श्रीराम ने माता शबरी के जूठे बेर खाए – छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चाम्पा जिले से भगवान राम का बहुत करीब से नाता है। यहां प्रभु श्रीराम ने वनवास का अधिक समय बिताया है, मान्यता है यहां प्रभु श्री राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे। यहां एक पेड़ ऐसा है जिसके पत्तों की आकृति दोने के सामान है, माता शबरी ने इसी दोने में राम लक्ष्मण को बेर रख कर खिलाए थे, इस वट वृक्ष का वर्णन सभी युगों में मिलने के कारण इसे अक्षय वट वृक्ष के नाम से जाना जाता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहुंचे शिवरीनारायण, माता शबरी के किए दर्शन
शिवरीनारायण। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के दौरे पर हैं. वे यहां शिवरीनारायण में स्थित शबरी माता मंदिर में माता शबरी के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. इसके बाद अयोध्या में आयोजित भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखने सभा स्थल के लिए रवाना हो गए हैं. इस दौरान उनके साथ भाजपा प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और महंत राम सुंदर दास भी मौजूद है.
बता दें कि, आज अयोध्या में भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है. इसको लेकर राम भक्तों में भारी उत्साह है. हर गली-मुहल्ले में दिवाली जैसा माहौल है और राम नाम की धुन है. वहीं राम लला के प्राण प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण देशभर में कई जगह किया जा रहा है.
दंडकारण्य क्षेत्र हुआ राममय, मंत्री केदार कश्यप हुए भावुक, कहा- प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी बनना जीवन के लिए सौभाग्य का क्षण…
रायपुर। अयोध्या में श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर दंडकारण्य क्षेत्र भी राममय हो गया है. इस अवसर पर जगदलपुर में आयोजित संकीर्तन कार्यक्रम में दौरान वन मंत्री केदार कश्यप शामिल हुए. उन्होंने कहा कि ये हम सब के लिए सौभाग्य का क्षण है. हम ऐसे समय के साक्षी बन रहे हैं, जब भगवान राम के मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा हो रहा है.
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर में श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर खुशी का माहौल है. इसके लिए हमारे पूर्वजों ने लंबे समय तक संघर्ष किया. गोलियां चली, लाठियां खाईं, शहादत दी और उसके बाद आज भगवान राम का मंदिर बन गया है. ये समय हर्ष का विषय है. भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में भी हर्षोल्लास है.
उन्होंने कहा कि पूरे बस्तर को दंडकारण्य भूमि के रूप में मानते हैं. यहां पर भगवान राम के पदचरण पड़े थे. इस कारण से बस्तर के पूरे जंगल में कांटा नहीं मिलता, क्योंकि भगवान राम के पद चरण पड़े थे. हम ये भी मानते हैं कि प्रभु राम की कल्पना में जो चित्र सामने आता है, वो राजा के रूप में नहीं, वनवासी की वेशभूषा में दिखाई देते हैं.
मंत्री कश्यप ने कहा कि श्रीराम जब अयोध्या में थे, तब राजा राम के रूप में जाना जाता था. जब प्रभु प्रभु ने दंडकारण्य की पावन भूमि पर कदम रखा तो उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में पहचान मिली. आज राम मंदिर निर्माण की खुशी में बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लोग शामिल हो रहे हैं, ये बहुत हर्ष का विषय है.
तीन साल में छत्तीसगढ़ होगा नक्सल मुक्त, गृहमंत्री ने रोड मैप बनाने व नक्सलियों के फंडिंग के रास्तों को बंद करने के दिये निर्देश
रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कल रायपुर में छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद की स्थिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा , केंद्रीय गृह सचिव, राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, आसूचना ब्यूरो (IB) के निदेशक और CRPF के महानिदेशक सहित कई अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि तीन आंतरिक सुरक्षा स्थितियों- जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और वामपंथी उग्रवाद-में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है और इनमें हिंसा में लगभग 75% की कमी आई है। इनके प्रभाव वाले भौगोलिक क्षेत्र में भी लगभग 80 प्रतिशत तक की कमी आई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) अब उत्तरपूर्व के लगभग 80% क्षेत्रों से हटा लिया गया है। वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में हुई प्रगति की सराहना करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित भौगोलिक क्षेत्रों और हिंसा दोनों में उल्लेखनीय कमी आई है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों और सभी केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों के कारण वामपंथी उग्रवाद की समस्या अनिवार्य रूप से अब छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तक ही सीमित है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को अगले तीन वर्षों के भीतर माओवादी खतरे से मुक्त करने की जरूरत है। गृह मंत्री ने खासकर वामपंथी उग्रवाद को बनाए रखने में सहायक पूरे तंत्र को टारगेट करने को लेकर सभी संबंधित हितधारकों द्वारा एक विस्तृत रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य पुलिस को शेष सुरक्षा कमियों को दूर करने, व्यापक जांच सुनिश्चित करने, अभियोजन की बारीकी से निगरानी करने, फंडिंग के रास्तों को बंद करने और खुफिया नेतृत्व वाले ऑपरेशन जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने मल्टी-एजेंसी सेंटर के माध्यम से साझा किए गए सभी इनपुट की समीक्षा करने और सत्यापित इनपुट को संचालित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
केंद्रीय गृह मंत्री ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की सम्पूर्ण कवरेज की आवश्यकता पर बल दिया और इसके लिए सुरक्षा बलों के कैंपों का उपयोग करने को कहा ताकि नजदीक के गांवों में इन योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके। उन्होंने उल्लेख किया कि गृह मंत्रालय को छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद से अत्यधिक प्रभावित जिलों में धन के आवंटन और इसके उपयोग दोनों मामलों में लचीला होना चाहिए। गृह मंत्री ने वास्तविक अधिकारों के बारे में सभी स्थानीय शिकायतों के सक्रिय और संवेदनशील प्रबंधन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। इसके बाद, केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर केंद्रीय गृह सचिव द्वारा वामपंथी उग्रवाद से अत्यधिक प्रभावित जिलों के कलेक्टरों और एसएसपी के साथ एक विस्तृत बातचीत की गई।
’एक दीया प्रभु श्री राम के नाम’: 3 लाख दीपों से जगमगाया दलपत सागर
रायपुर। श्री रामलला के स्वागत के एक दिन पूर्व ’एक दीया प्रभु श्री राम के नाम’ दीपोत्सव के कार्यक्रम में जगदलपुर शहर के सभी वर्गों में गजब का उत्साह देखने को मिला। जगदलपुर का दलपत सागर रविवार की शाम लगभग तीन लाख दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। रानी घाट में पूजा अर्चना के बाद एक साथ तीन लाख दीपों की रोशनी में दलपत सागर की सुंदरता भी कई गुना बढ़ गई। इस दौरान आईलैंड में कलाकारों द्वारा निर्मित रंगोली विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
कार्यक्रम में दलपत सागर के किनारों में जलते दीपक और जगमग रोशनी से थल और नभ को रोशनी से भर दिया। दलपत सागर के आसपास दीप उत्सव पर जमकर आतिशबाजी भी की गई, जिससे पूरा माहौल उल्लासमय हो गया। सभी लोगों ने सात बजे भव्य आतिशबाजी के साथ दीपों को जलाया। कार्यक्रम में फ्लोटिंग मंच में रामायण मंडली द्वारा रामचरित मानस का गायन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन नगर निगम प्रशासन व जिला प्रशासन की पहल पर नगर वासियों, जनप्रतिनिधियों व विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से किया गया। दीपोत्सव के कार्यक्रम में पद्मश्री धर्मपाल सैनी, महापौर सफीरा साहू, नगर निगम अध्यक्ष कविता साहू, नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष संजय पाण्डे, पूर्व विधायक लच्छूराम कश्यप, वन विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवास मद्दी, जिला प्रशासन के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों द्वारा पूजा अर्चना कर दीपोत्सव के कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस दौरान बंगाली समाज के सदस्यों द्वारा शंखनाद किया गया।

मैं अगर छत्तीसगढ़ विधानसभा का विधायक होता तो राम मंदिर पर लाता अभिनंदन प्रस्ताव : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
रायपुर- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के मद्देनजर उनके ननिहाल छत्तीसगढ़ के लोगों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि जब राम का वन गमन हुआ था, तब यहीं उन्होंने शबरी के जूठे बेर खाये थे. यहां भक्ति की अभूतपूर्व घटना घटी थी. मैं अगर छत्तीसगढ़ विधानसभा का विधायक होता तो राममंदिर पर एक अभिनंदन प्रस्ताव ज़रूर लेकर आता.
छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान विधायकों के प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरणदास महंत समेत मंत्रिमंडल और विधायकों की मौजूदगी में अमित शाह ने कहा कि मुझे प्रबोधन के लिए जब स्पीकर और मुख्यमंत्री का फ़ोन आया था तब मैंने कहा था कि विषय सरल देना लेकिन प्रबोधन के लिए मुझे ही कठिन विषय दे दिया गया. राजनीति में प्रभावी काम कैसे करें? ये बताना ये सबसे कठिन है.
उन्होंने कहा कि मैं पांच बार विधायक रहा, एक बार राज्यसभा सदस्य और एक बार लोकसभा सदस्य के रूप में अब तक काम करने का अनुभव है. प्रबोधन का आयोजन करके बहुत अच्छा काम किया गया. जीवन के अंतिम सांस तक सीखना ही सफलता का मूलमंत्र है. जीवन के आख़िरी हिस्से तक सफल होने के लिए ये ज़रूरी है कि कुछ ना कुछ सीखते रहे. हमारी लोकतंत्र की जड़ें पाताल से भी गहरी कर पूरी दुनिया को संदेश दिया है.
अमित शाह ने कहा कि समस्याओं का समाधान करना है तो एक पत्र लिखकर प्रशासन को भेजेंगे तो वह ज्यादा कारग़र होता है.
जनता की समस्याओं को समझना बहुत ज़रूरी है. हमारा मूल काम समस्याओं का समाधान देना है. प्रसिद्धि हासिल करना नहीं. एक प्रभावी विधायक को देश भर की योजनाओं का वॉच डॉग बनकर रहना चाहिए. कठोर से कठोर बात भी शालीनता के साथ लिखकर भी कर सकते हैं, और बोल भी सकते हैं. इसे ही कटुता के साथ कहोगे तो प्रभाव ठीक नहीं जाएगा.
उन्होंने कहा कि पार्लियामेंट में दिया गया मेरा हर भाषण मेरिट पर था. राजनीतिक भी था. एक सदस्य की सहभागिता सिस्टम को सुधारने के लिए भी होना चाहिए. जनता और सरकार के बीच की कड़ी विधायक होता है. विधानसभा में पूरे वक़्त बैठने वाले बहुत कम सदस्य ही मैंने देखे हैं. ऐसे में सदस्य ढेर सारी जानकारियों को गंवा देते हैं. सदन में होने वाली चर्चा पूरे राज्य के लिए होती है. ऐसी चर्चा बहुत कुछ सिखाती है.
गृह मंत्री ने कहा कि मेरा सभी विधायकों से आग्रह है कि टर्म पूरा होने के पहले सदन में जितने नियम हैं, उन सभी नियमों का पालन कर लें. जितने प्राइवेट मेंबर बिल पिछले 75 सालों में नहीं आया, उतना बिल संसद में मोदी सरकार के आने के बाद लाया गया. जब तक लेजिस्लेचर का अध्ययन नहीं करोगे, अच्छे विधायक नहीं बन सकते. सदन एक सार्वजनिक मंच नहीं होता.
अमित शाह ने कहा कि जब मैं विधायक बना था तो एक सप्ताह मैं बुजुर्ग के लिए रखता था, एक सप्ताह पत्रकार और साहित्यकार से बात करता था, एक सप्ताह युवाओं लिए, एक सप्ताह महिलाओं से बात करने के लिए रखता था. जनता हमारे लिए क्या सोचती है ये कार्यकर्ता नहीं बता सकते. ये जनता ही बता सकती है. अपने क्षेत्र के साहित्यकार, पत्रकार, अच्छे सामाजिक जानकार, महिला संगठनों के लिए काम करने वाले लोग इन सबका एक समूह बनाने की ज़रूरत है.
अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के लोक कलाकार देंगे भक्तिमय प्रस्तुति
रायपुर। अयोध्या में श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर चंदखुरी स्थित कौशल्या धाम में 22 जनवरी की संध्या को रामोत्सव का भव्य आयोजन होगा। संस्कृति और पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य और सांसद सुनील सोनी के अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के लोक कलाकार मानस गायन और भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगे।
छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे भव्य रामोत्सव का आयोजन माता कौशल्या धाम परिसर में शाम 5ः30 बजे से प्रारंभ होगा। इस मौके पर विशेष डाक टिकिट विमोचन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक कलाकार राकेश तिवारी एवं साथी द्वारा राम वन गमन नृत्य नाटिका की प्रस्तुति कार्यक्रम में देंगे। इसके अलावा गोपा सान्याल एवं साथी द्वारा राम भजन, अल्का चंद्राकर एवं साथी द्वारा भजन, जसगीत एवं लोकगीत के साथ ही अनेक मानस मंडली द्वारा मानस गायन प्रस्तुत किए जाएंगे।
उपमुख्यमंत्री अरूण साव एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने की विभागीय बजट की समीक्षा
रायपुर। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने उपमुख्यमंत्री अरूण साव की उपस्थिति में लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी व नगरीय प्रशासन विभाग के बजट सत्र को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा एवं समीक्षा बैठक की।
श्री चौधरी एवं श्री साव ने बैठक में महत्वपूर्ण योजनाओं के बजट को लेकर विभागीय अधिकारियों से विस्तारपूर्वक चर्चा की। बैठक में नगरीय निकायों के अधोसंरचना, स्मार्ट सिटी रायपुर- बिलासपुर, राजकीय राजमार्गों के निर्माण व रखरखाव एवं अमृत मिशन जैसी विभिन्न योजनाओं के बजट तथा अनुदान को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान जल की गुणवत्ता की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, जल जीवन मिशन डैश बोर्ड एवं राज्य पोर्टल निर्माण जैसे महत्वपूर्ण सुझाव भी प्राप्त हुए।
श्री चौधरी एवं श्री साव ने विभागों के बजट की समीक्षा एवं महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए।
विधानसभा प्रबोधन सत्र : पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने बजट तो विधायक अजय चंद्राकर ने प्रश्नकाल को लेकर दिए टिप्स
रायपुर। विधानसभा में प्रबोधन सत्र के दूसरे दिन रविवार को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय और विधायक अजय चंद्राकर ने विधायकों को टिप्स दिए. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने जहां विधायकों को बजट के संबंध में जानकारी दी, वहीं विधायक अजय चंद्राकर ने प्रश्नकाल के संबंध में जानकारी दी.
पूर्व मंत्री और विधायक अजय चंद्राकर ने प्रबोधन सत्र को लेकर मीडिया से चर्चा में कहा कि 50 नए विधायक चुनकर आए हैं. अच्छे और गंभीर लोग चुनकर आए हैं. विधायकों ने बड़ी संख्या में काफी अच्छे प्रश्न किए. विधानसभा का स्तर, बहस का स्तर अच्छा होगा. जन समस्याओं का निराकरण भी अच्छा होगा. प्रबोधन सत्र ऐसा है कि रोज अच्छा सुनने और सीखने को मिलता है. मैं भी प्रतिदिन विद्यार्थी भाव से विधानसभा में प्रवेश करता हूं.
वहीं विधानसभा प्रबोधन के दूसरे दिन का दूसरा सत्र में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने बजट को लेकर विधायकों को टिप्स दिए. उन्होंने कहा कि बजट का अर्थ पहले धन प्राप्ति होता था, लेकिन अब आर्थिक स्थिति को देखकर बजट का निर्धारण करते हैं. केंद्र और प्रदेश सरकार का एक ही मापदंड पर बजट बनाता है. आय और व्यय को ध्यान में रखकर बजट बनाया जाता है.
विधानसभा प्रबोधन सत्र : पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने बजट तो विधायक अजय चंद्राकर ने प्रश्नकाल को लेकर दिए टिप्स
रायपुर। विधानसभा में प्रबोधन सत्र के दूसरे दिन रविवार को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय और विधायक अजय चंद्राकर ने विधायकों को टिप्स दिए. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने जहां विधायकों को बजट के संबंध में जानकारी दी, वहीं विधायक अजय चंद्राकर ने प्रश्नकाल के संबंध में जानकारी दी.
पूर्व मंत्री और विधायक अजय चंद्राकर ने प्रबोधन सत्र को लेकर मीडिया से चर्चा में कहा कि 50 नए विधायक चुनकर आए हैं. अच्छे और गंभीर लोग चुनकर आए हैं. विधायकों ने बड़ी संख्या में काफी अच्छे प्रश्न किए. विधानसभा का स्तर, बहस का स्तर अच्छा होगा. जन समस्याओं का निराकरण भी अच्छा होगा. प्रबोधन सत्र ऐसा है कि रोज अच्छा सुनने और सीखने को मिलता है. मैं भी प्रतिदिन विद्यार्थी भाव से विधानसभा में प्रवेश करता हूं.
वहीं विधानसभा प्रबोधन के दूसरे दिन का दूसरा सत्र में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय ने बजट को लेकर विधायकों को टिप्स दिए. उन्होंने कहा कि बजट का अर्थ पहले धन प्राप्ति होता था, लेकिन अब आर्थिक स्थिति को देखकर बजट का निर्धारण करते हैं. केंद्र और प्रदेश सरकार का एक ही मापदंड पर बजट बनाता है. आय और व्यय को ध्यान में रखकर बजट बनाया जाता है.
पक्ष-विपक्ष में सामंजस्य रहना चाहिए, तभी लोकतंत्र फलेगा-फूलेगा : उपराष्ट्रपति
रायपुर। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों के लिए आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष के विधायकों में लगातार संपर्क और सामंजस्य होना चाहिए, तभी लोकतंत्र फलेगा-फूलेगा और सकारात्मक परिणाम देगा। आप सदन में प्रतिद्वंदी नहीं हैं, वहां सौहार्द्रपूर्ण वातावरण होना चाहिए। आप लोग सामंजस्य बनाकर जनहित में बेहतर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सीखने की प्रक्रिया निरंतर चलते रहती है। सदन में नये विधायकों को पुराने विधायकों से भी काफी कुछ सीखने मिलेगा। उपराष्ट्रपति ने संविधान सभा के गठन और भारत के संविधान के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि विधायिका के सदस्यों को संविधान को जानना जरूरी है। जनआकांक्षाओं के अनुरूप कानूनों में बदलाव विधायिका का प्रमुख कार्य है। प्रचलित कानूनों में बदलाव भारत में ही नहीं दुनिया के सभी देशों में होता है। उन्होंने कहा कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में मौलिक अधिकार बहुत अहम हैं। इसके बिना प्रजातंत्र नहीं चल सकता है।
उपराष्ट्रपति ने विधायकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कोई भी अधिकार बिना जिम्मेदारी के नहीं आता। आप सदन में अपने बोले हुए हर शब्द के लिए जवाबदेह हैं। आप सब लोग इतिहास का हिस्सा रहेंगे। आपके योगदान का आगे मूल्यांकन होगा। नये विधान के निर्माण में आपकी चिंता, चिंतन और मंथन दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष की सबसे बड़ी ताकत सदन को चलने देने में है। अनावश्यक व्यवधान को जनता पसंद नहीं करती है। उन्होंने कहा कि सदन नियमों से चलता है। सभी सदस्यों को इन नियमों को मानना होता है। जनता चाहती है कि सदन में उनके मुद्दों पर चर्चा-परिचर्चा हो और जनप्रतिनिधियों द्वारा जनकल्याणकारी निर्णय लिए जाएं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विपक्ष द्वारा सरकार की आलोचना रचनात्मक और समाधानपूर्ण होना चाहिए। विपक्ष को जनता के मुद्दों को टेलीस्कोप की तरह देखना चाहिए और सरकार के काम पर माइक्रोस्कोप की तरह नजर रखना चाहिए। राज्य के धन का सदुपयोग हो, यह बजट चर्चा के दौरान आप लोगों को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय अनुकंपा छत्तीसगढ़ पर बहुत है। यह विकास की सारी संभावनाएं समेटे हुए हैं। उन्होंने सभी विधायकों से अपील की कि छत्तीसगढ़ को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाएं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के दौरान हमारे नवनिर्वाचित विधायकों को संसदीय परंपरा और कार्यप्रणाली के बारे में जानने-समझने को मिलेगा। हमारी यह छठवीं विधानसभा काफी ऊर्जावान और युवा है। हमारे 90 में से 50 विधायक पहली बार निर्वाचित होकर आए हैं, उनके लिए यह काफी उपयोगी होगा। पुराने विधायकों के लिए भी यह रिविजन का अवसर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों ने जिन उम्मीदों से हमें चुनकर भेजा है, उसे पूरा कर पाने में हम सभी सफल होंगे, ऐसी उम्मीद है।
प्रबोधन कार्यक्रम के पहले दिन के अंतिम सत्र को उपमुख्यमंत्री अरूण साव और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी संबोधित किया। संसदीय कार्य मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, उत्तरप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना, राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी और छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश शर्मा भी आज के अंतिम सत्र में मौजूद थे।