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उत्तरकाशी में बादल फटा अब तक 4 की मौत, 50 से ज्यादा लापता, रेस्क्यू जारी
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में सोमवार रात को भीषण बादल फटा की घटना सामने आई है। इस हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 50 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। पहाड़ों से आए मलबे और पानी के सैलाब ने कई घरों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
घटनास्थल की स्थिति:
धराली गांव में देर रात अचानक तेज गर्जना के साथ भारी बारिश हुई और कुछ ही मिनटों में पहाड़ों से मलबे और बोल्डरों का भयानक सैलाब नीचे गांव की ओर बहने लगा। मलबे में कई मकान, दुकानें और वाहन बह गए हैं। गांव में बिजली और संचार सेवा भी पूरी तरह ठप हो गई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी:
राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
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अब तक 10 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
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सेना और ITBP की मदद भी ली जा रही है।
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लापता लोगों की तलाश के लिए ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद ली जा रही है।
घायलों की हालत:
करीब एक दर्जन लोग घायल हैं, जिनमें से कुछ को गंभीर हालत में उत्तरकाशी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया:
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने इस घटना पर शोक जताया है और राहत कार्यों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। प्रभावितों को तत्काल अस्थायी शरण और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
CM का बयान: “धराली में बादल फटने की घटना दुखद है। मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की राहत राशि दी जाएगी और लापता लोगों की खोज में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।”
15 अगस्त तक नहीं करवाई ई-केवाईसी तो नहीं मिलेगा गैस सिलेंडर
अगर आप भी घरेलू गैस सिलेंडर उपभोक्ता हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने एलपीजी गैस सिलेंडर वितरण से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए निर्देशों के अनुसार, 15 अगस्त 2025 तक सभी उपभोक्ताओं को अपने गैस कनेक्शन की ई-केवाईसी पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर 15 अगस्त के बाद गैस सिलेंडर की आपूर्ति रोक दी जाएगी।
सलूणी उपमंडल के अंतर्गत आने वाले गैस एजेंसी क्षेत्रों में अब तक 6000 से अधिक उपभोक्ताओं ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। गैस एजेंसी प्रबंधन ने कई बार उपभोक्ताओं से आग्रह किया, गैस कार्ड पर रिमार्क भी डाले, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग एजेंसी नहीं पहुंचे हैं।
सुरक्षा के लिहाज से पाइप बदलवाना भी जरूरी
नियमों के तहत उपभोक्ताओं को हर 5 वर्ष में अपने गैस कनेक्शन के पाइप की जांच और बदलाव कराना भी अनिवार्य है। गैस एजेंसियों ने अब इस नियम को लेकर भी सख्ती दिखाने का निर्णय लिया है।
मोबाइल नंबर का पंजीकरण भी जरूरी
ई-केवाईसी के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अपने मोबाइल नंबर को गैस एजेंसी में पंजीकृत कराना होगा। इससे उन्हें बुकिंग, डिलीवरी और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां समय पर मिलती रहेंगी।
क्या करें उपभोक्ता
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15 अगस्त 2025 से पहले नजदीकी गैस एजेंसी जाकर ई-केवाईसी पूरी करें।
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अपना मोबाइल नंबर पंजीकृत कराएं।
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गैस पाइप की समय-समय पर जांच कराएं और जरूरत अनुसार उसे बदलवाएं।
झारखंड के पूर्व CM शिबू सोरेन का निधन
दिल्ली। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन का 81 साल की उम्र में आज सुबह निधन हो गया। उनके बेटे और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस दुखद खबर की पुष्टि की है। सीएम हेमंत सोरेन ने एक्स पर लिखा….”आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं. आज मैं शून्य हो गया हूं.”
इस बीच सर गंगा राम अस्पताल की ओर से बताया गया कि शिबू सोरेन को आज सुबह 8ः56 बजे मृत घोषित कर दिया गया। लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। वे किडनी की बीमारी से पीड़ित थे और डेढ़ महीने पहले उन्हें स्ट्रोक भी हुआ था। पिछले एक महीने से उन्हे लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखकर इलाज किया जा रहा था।
81 वर्ष के शिबू सोरेन लंबे समय से अस्पताल में नियमित रूप से इलाज करा रहे थे। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 24 जून को अपने पिता के अस्पताल में भर्ती होने पर कहा था….उन्हें हाल ही में यहां भर्ती कराया गया था। इसलिए हम उनसे मिलने आए थे। उनकी स्वास्थ्य समस्याओं की जांच की जा रही है। आपको बता दे शिबू सोरेन पिछले 38 वर्षों से झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता थे और उन्हें पार्टी के संस्थापक संरक्षक के रूप में जाना जाता है।
यूपीए कार्यकाल में कोयला मंत्री रहे
शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक थे। वह यूपीए के पहले कार्यकाल के दौरान कोयला मंत्री रह चुके थे। हालांकि चिरूडीह हत्याकांड में नाम आने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
देशभर में आज से गैस सिलेंडर हुआ सस्ता, जाने कितना कम हो गया सिलेंडर का दाम
नई दिल्ली। अगस्त महीने की पहली ही तारीख को ईंधन कपनी की तरफ से आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। आज एक अगस्त से देशभर में एलपीजी सिलेंडरों के दाम में कमी की गई है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 33.50 रुपये की कमी की गई है। हालांकि दरों में यह कमी कमर्शियल सिलेंडरों के लिए लागू होंगे। घरेलू उपयोग वाले सिलेंडरों के दामों में कोई कमी नही की गयी है।
आपको बता दे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती करते हुए 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 33.50 रुपये की कमी की गई है। जो कि आज 1 अगस्त 2025 से प्रभावी होगी। नई कीमतें लागू होने के बाद दिल्ली में 1 अगस्त से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1631.50 रुपये हो जाएगी, जिसकी मौजूदा कीमत 1665.00 रुपये थी। हालांकि गैस सिलेंडर के दाम में कटौती की राहत आम उपभोक्ताओं को नहीं मिली है।
14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडरों के दामों की समीक्षा की जाती है। इस बार बदलाव केवल कमर्शियल सिलेंडर पर सीमित रहा है। इससे पहले 1 जुलाई 2025 को भी कॉमर्शियल एलपीजी की कीमतों में 58.5 रुपये की कटौती की गई थी। यह लगातार 5वां महीना है, जब गैस की कीमतों में कटौती की गई है। इससे जुलाई से पहले जून में 24 रुपये, मई में 14.50 रुपये और अप्रैल में कमर्शियल रसोई गैस की कीमतों में 41 रुपये की कटौती की गई थी।
ट्रंप के ‘डेड इकॉनमी’ बयान का राहुल गांधी ने समर्थन करते हुए BJP और PM पर साधा निशाना, कहा-
दिल्ली। लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने भारत को मृत अर्थव्यवस्था बताया था। राहुल गांधी ने देश के प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि ये बीजेपी ने अडाणी की मदद के लिए देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि ये बयान सच्चाई को दर्शाता है, जिसे केवल भारत सरकार ही मानने से इनकार करती है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पोस्ट के बाद देश की राजनीति गरमा गयी है। ट्रम्प ने भारत की अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था को डेड इकोनॉमी बताया। डोनाल्ड ट्रम्प के इस बयान के बाद राहुल गांधी ने एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री पर निशाना साधते हुए इसका जिम्मेदार बताया। मीडिया में प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा….हां वह सही हैं, प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को छोड़कर हर कोई यह जानता है। हर कोई जानता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक मृत अर्थव्यवस्था है। मुझे खुशी है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने फैक्ट सामने रखा। पूरी दुनिया जानती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था एक मृत अर्थव्यवस्था है। बीजेपी ने अडानी की मदद के लिए अर्थव्यवस्था को खत्म कर दिया है।
‘उन्होंने भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया’
राहुल गांधी ने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट कर पीएम मोदी पर भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, “भारतीय अर्थव्यवस्था मर चुकी है. पीएम मोदी ने इसे अडानी-मोदी साझेदारी, नोटबंदी और त्रुटिपूर्ण जीएसटी, असफल ‘असेम्बल इन इंडिया’, एमएसएमई का सफाया और किसानों को बर्बाद कर खत्म कर दिया है. उन्होंने भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है क्योंकि उनके पास नौकरियां नहीं हैं.”
किसानों के लिए बड़ी राहत, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत अब ₹5 लाख तक मिलेगा कर्ज
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देशभर के किसानों को बड़ी राहत देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना की सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी है। इस योजना के तहत अब किसान केवल 4% की सालाना ब्याज दर पर ₹5 लाख तक का कर्ज ले सकेंगे। यह फैसला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025 के बजट में किया है। इससे देश के करोड़ों किसानों को खेती-किसानी, पशुपालन और कृषि से जुड़े अन्य कार्यों के लिए आसानी से सस्ता ऋण मिलेगा।
क्या है किसान क्रेडिट कार्ड योजना?
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना की शुरुआत वर्ष 1998 में किसानों को समय पर और आसान ऋण उपलब्ध कराने के लिए की गई थी। यह कार्ड डेबिट कार्ड की तरह काम करता है, जिससे किसान सीधे एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं या दुकानों से बीज, खाद, कीटनाशक और कृषि उपकरण खरीद सकते हैं। यह कार्ड आधार या बायोमेट्रिक पहचान से भी जोड़ा जा सकता है, जिससे लेन-देन अधिक सुरक्षित और आसान होता है।
कैसा मिलेगा फायदा?
सरकार किसानों को 2% ब्याज सब्सिडी देती है और समय पर कर्ज चुकाने पर 3% अतिरिक्त छूट भी मिलती है। इस तरह किसानों को प्रभावी रूप से केवल 4% सालाना ब्याज ही देना होगा। साथ ही ₹2 लाख तक का लोन बिना किसी जमानत के मिलेगा, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को विशेष रूप से लाभ होगा।
कितनी होगी लोन की सीमा?
लोन की सीमा फसल की लागत, जमीन का आकार, बीमा खर्च और मशीनरी की जरूरतों के आधार पर तय की जाएगी। शुरुआती लोन सीमा हर साल 10% बढ़ाई जाती है और यह बढ़ोतरी अगले 5 वर्षों तक लागू रहती है।
कट्टर हिन्दू होने का मतलब क्या? संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दूर की गलतफहमी
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सच्चा हिंदू होने का मतलब किसी का विरोध करना नहीं है, न ही इसका मतलब यह है कि हमें यह कहकर जवाब देना होगा कि हम हिंदू नहीं हैं। हम हिंदू हैं, लेकिन हिंदू होने का सार सभी को गले लगाना है।
यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स को नहीं होगी फांसी
केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में जीवनदान मिल गया है। यमनी नागरिक की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई निमिषा प्रिया की फांसी रद्द कर दी गई है। हालांंकि, अभी भारतीय अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
सना/ यमन की राजधानी सना में मौत की सजा का सामना कर रही केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी को हूती विद्रोहियों ने रद्द कर दिया है। केरल के एक प्रमुख सुन्नी मुस्लिम धर्मगुरु कंथापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार के कार्यालय ने यह दावा किया है। निमिषा प्रिया को यमनी नागरिक और अपने पूर्व बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या का दोषी ठहराया गया था। उसे मौत की सजा दी गई थी। उसे 16 जुलाई को फांसी दी जानी तय हुई थी, लेकिन भारतीय अधिकारियों के प्रयास के बाद उसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था।
ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम के कार्यालय ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि यमन के एक प्रसिद्ध सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हाफिज द्वारा नियुक्त यमनी विद्वानों की टीम ने अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों के साथ समझौते पर मध्यस्थता की, जिसके बाद निमिषा प्रिया की फांसी को रद्द करने का फैसला किया गया। अभी तक इस मामले को देख रहे भारतीय अधिकारियों ने फांसी रद्द किए जाने की पुष्टि नहीं की है।
धार्मिक विद्वानों के हस्तक्षेप से मिली माफी
ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम के दावे की पुष्टि यमन में तलाल महदी के न्याय के लिए कार्य परिषद के प्रवक्ता और यमनी कार्यकर्ता सरहान शमसन अल विस्वाबी ने एक फेसबुक पोस्ट में की है। विस्वाबी ने सोमवार को अपने फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि धार्मिक विद्वानों के सशक्त हस्तक्षेप के कारण निमिषा प्रिया की मौत की सजा माफ कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अब निमिषा प्रिया को या जेल से रिहाई मिलेगी या आजीवन कारावास।
मौत की सजा रद्द होने के बाद अब निमिषा प्रिया के लिए दो संभावनाएं बनती हैं- या तो उन्हें आजीवन कारावास या फिर ब्लड मनी के बदले जेल से रिहाई। द हिंदू ने आधिकारिक सूत्रों ने अभी तक इस दावे की पुष्टि करने से इनकार किया है और कहा है कि मामला जटिल है क्योंकि पीड़ित परिवार निमिषा प्रिया को माफ करने पर आम सहमति नहीं बना पाया है।
नन की गिरफ्तारी पर सियासी तूफान: संसद में विपक्ष का प्रदर्शन, राहुल गांधी ने साधा निशाना
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ सियासत गरमा गई है। मामला अब संसद तक पहुंच गया है, जहां विपक्षी दलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष के सांसदों ने संसद के बाहर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जताया, तो वहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर तीखा हमला बोला।
राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा—
“छत्तीसगढ़ में दो कैथोलिक ननों को उनकी आस्था के कारण निशाना बनाकर जेल भेज दिया गया – यह न्याय नहीं, बल्कि भाजपा-आरएसएस का गुंडा राज है। यह एक खतरनाक पैटर्न को दर्शाता है: इस शासन में अल्पसंख्यकों का व्यवस्थित उत्पीड़न।”
उन्होंने आगे कहा—
“यूडीएफ सांसदों ने आज संसद में विरोध प्रदर्शन किया। हम चुप नहीं बैठेंगे। धार्मिक स्वतंत्रता एक संवैधानिक अधिकार है। हम उनकी तत्काल रिहाई और इस अन्याय के लिए जवाबदेही की मांग करते हैं।”
दीपक बैज का भी तीखा बयान
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक बैज ने भी इस कार्रवाई को गलत करार दिया। उन्होंने कहा—
“सरकार धर्मांतरण के नाम पर केवल राजनीति कर रही है। यह पूरी तरह से एकतरफा और अनुचित कार्रवाई है।”
“सरकार को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और इस पूरे घटनाक्रम को सार्वजनिक करना चाहिए। इसे राजनीतिक एजेंडा बनाकर नहीं देखना चाहिए।”
क्या है मामला?
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में हाल ही में दो कैथोलिक ननों को धर्मांतरण से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा है कि शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बता रहा है।
राजनीतिक मोड़ लेता मामला
यह घटना अब राजनीतिक रंग ले चुकी है। एक ओर जहां भाजपा सरकार इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के दमन का प्रतीक बता रहा है। संसद में जारी प्रदर्शन और नेताओं के तीखे बयान से यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
दिल्ली एयरपोर्ट पर एअर इंडिया की फ्लाइट में आग, सभी यात्री सुरक्षित
नई दिल्ली। दिल्ली एयरपोर्ट पर एक हादसा हो गया है। बताया जाता है कि लैंड करते ही एयर इंडिया के प्लेन में आग लग गई। एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, हांगकांग से दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरते ही एयर इंडिया के विमान की सहायक पॉवर यूनिट में आग लग गई। राहत की बात यह कि इस हादसे में सभी यात्री और चालक दल के सभी लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
एयर पोर्ट अथॉरिटी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर उतरने के तुरंत बाद ही सोमवार को एयर इंडिया के एक विमान में आग लग गई। वहीं एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि घटना के बाद यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित उतर गए। हालांकि, आग लगने से विमान को कुछ नुकसान हुआ है।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, हांगकांग से दिल्ली आई फ्लाइट नंबर AI 315 के एक यूनिट में लैंडिंग के तुरंत बाद आग लग गई। विमान की सहायक विद्युत इकाई (APU) में आग लगने की यह घटना उस समय हुई जब यात्री उतरने लगे थे। हालांकि APU लैंडिंग के बाद ऑटोमेटिक रूप से बंद हो गया था।
विमान को आगे की जांच के लिए एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया है। इस घटना के बारे में नियामक को सूचित भी कर दिया गया है। टीमें अपना काम कर रही हैं। गौर करने वाली बात यह कि घटना ऐसे वक्त में सामने आई है जब एयरलाइन कंपनी ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि उसने अपने बोइंग 787 और 737 विमानों के बेड़े की फ्यूल कंट्रोल स्विच के लॉकिंग सिस्टम की एहतियाती छानबीन पूरी कर ली है। इन यंत्रों में किसी प्रकार की खामी नहीं पाई गई है।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति को भेजे पत्र में ये बताई वजह
नई दिल्ली। देश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र जारी है और कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य संसद में चर्चा के लिए लंबित हैं।
धनखड़ ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा है। राष्ट्रपति को संबोधित एक औपचारिक पत्र में उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी कारणों और चिकित्सकीय सलाह का हवाला देते हुए अपने निर्णय की जानकारी दी है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 67(a) के अंतर्गत अपने पद से त्यागपत्र की घोषणा की है।
जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं और एक वरिष्ठ वकील के रूप में लंबा अनुभव रखते हैं।
धनखड़ का इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव बना हुआ है। मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार को कई मोर्चों पर घेरा हुआ है, ऐसे में उपराष्ट्रपति की भूमिका और भी अहम मानी जाती है।
पीएम मोदी ने संसद भवन में की हाई लेवल मीटिंग : नड्डा, राजनाथ व शाह समेत ये वरिष्ठ बीजेपी सांसद रहे मौजूद, संसद सत्र के दौरान रणनीति पर हुई चर्चा
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का पहला दिन काफी हंगामेदार रहा। सरकार और विपक्ष एक दूसरे पर तमाम मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आए। वहीं, संसद भवन में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई मंत्री शामिल हुए।
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संसद परिसर में कई उपलब्धियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि बम और बंदूक पर संविधान की जीत हो रही है. तेजी से नक्सलवाद कम हो रहा है. रेड जोन धीरे-धीरे ग्रीन जोन में बदल रहा है. ये सत्र देश के लिए बहुत गर्व वाला है. ये विजयोत्सव जैसा है. देश के सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सौ फीसदी टारगेट को प्राप्त किया है. पूरी दुनिया ने हमारे सुरक्षाबलों का सामर्थ्य देखा.
देश हित में मन जरूर मिलें
प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद विभिन्न देशों में देश का पक्ष रखने गए बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों की सराहना की. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद के आका पाकिस्तान को बेनकाब किया है. मैं सभी सांसदों और पार्टियों की देशहित में किए गए इस काम की सराहना करता हूं. सभी पार्टियों का एजेंडा अलग-अलग है, दल हित में मत भले ना मिलें लेकिन देश हित में मन जरूर मिलें.
22 मिनट में आतंकियों का खात्मा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत हमारे सुरक्षाबलों ने केवल 22 मिनट में आतंकवादियों का खात्मा करने के साथ ही उनके ठिकानों को जमींदोज कर दिया. पीएम ने भरोसा जताया कि मानसून सत्र में सभी सांसद एकता और विजय की भावना के साथ देश की सैन्य शक्ति, जन-प्रेरणा और मेड इन इंडिया रक्षा क्षमताओं को मजबूती देने वाले भाव को मुखरता से पेश करेंगे.
हमारा संविधान जीत रहा है
प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की निर्णायक कार्रवाई का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लंबे समय से देश में नक्सलवाद रहा. मगर आज नक्सलवाद सिकुड़ रहा है. कल तक जो रेड कॉरिडोर थे वो आज ग्रोथ जोन में बदल रहे हैं. सुरक्षा बल नक्सलवाद के खात्मे के लक्ष्य के साथ उत्साह के साथ आगे बढ़ रहे हैं. गर्व से कह सकता हूं कि देश के कई जिले अब नक्सलवाद से बाहर आ चुके हैं. हमारा संविधान जीत रहा है.
ड्रैगन कैप्सूल से बाहर निकले शुभांशु शुक्ला, चेहरे पर दिखी गर्व की मुस्कान..
नई दिल्ली। 15 जुलाई 2025 को दोपहर 3:00 बजे IST पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की 18 दिन की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) यात्रा का सफल समापन हुआ। वह स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से उतरे। यह मिशन न केवल भारत के लिए गौरव का विषय रहा, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी मानी जा रही है।
प्रवेश की तैयारी
ड्रैगन कैप्सूल की वापसी से पहले डीऑर्बिट बर्न की प्रक्रिया पूरी की गई। यह चरण अत्यंत अहम होता है, क्योंकि इससे यान को कक्षा से बाहर लाकर पृथ्वी के वायुमंडल में सुरक्षित प्रवेश कराने की दिशा तय होती है। यान का कोण और गति सही ढंग से सेट की गई ताकि वापसी की दिशा नियंत्रित रहे।
वायुमंडल में प्रवेश
स्पेसएक्स ड्रैगन ने लगभग 27,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया। इस दौरान बाहरी तापमान 1,600 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। गर्मी और घर्षण से उत्पन्न प्लाज्मा के कारण कुछ मिनटों के लिए कंट्रोल रूम और कैप्सूल के बीच संपर्क टूट गया। यह चरण तकनीकी दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
लैंडिंग और रिकवरी
वायुमंडल से सफलतापूर्वक निकलने के बाद ड्रैगन कैप्सूल के पैराशूट सक्रिय हुए। पहले छोटे और फिर बड़े पैराशूट खुले, जिससे कैप्सूल की गति धीमी हुई और वह सुरक्षित रूप से समुद्र में उतरा। लैंडिंग के तुरंत बाद समुद्र में तैनात रिकवरी टीमें नावों और हेलीकॉप्टरों के जरिए मौके पर पहुंचीं और शुभांशु शुक्ला को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
डॉक्टरों की टीम ने उन्हें प्रारंभिक मेडिकल जांच के लिए विशेष सुविधा में स्थानांतरित किया। शुभांशु की यह यात्रा भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में मील का पत्थर साबित हो सकती है। भारत सहित दुनियाभर से उन्हें बधाइयों का सिलसिला जारी है।
दिल्ली-एनसीआर में लगातार दूसरे दिन भूकंप के झटके
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में शुक्रवार शाम एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह लगातार दूसरा दिन है जब लोगों को धरती हिलती हुई महसूस हुई। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, शुक्रवार शाम 7 बजकर 49 मिनट 43 सेकंड पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 मापी गई।
भूकंप का केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में था, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई। हालांकि इस बार भूकंप की तीव्रता अपेक्षाकृत कम थी, इसलिए अधिकतर लोगों को झटके महसूस नहीं हुए। फिलहाल किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
लगातार दो दिन की हलचल से लोगों में चिंता
इससे पहले गुरुवार, 10 जुलाई को सुबह 9 बजकर 4 मिनट पर भी दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मापी गई थी। वह झटका शुक्रवार के मुकाबले अधिक तेज था और कई इलाकों में लोग डर के मारे अपने घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए थे।
गुरुवार के भूकंप का केंद्र भी हरियाणा के झज्जर में ही था, जो कि दिल्ली से लगभग 51 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। भूकंप की गहराई उस समय भी 10 किलोमीटर ही दर्ज की गई थी।
दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटकों से दहशत, डर से लोग अपने घर से बाहर निकले
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में गुरुवार सुबह भूकंप के तेज झटकों से लोग दहशत में आ गए। भारतीय समयानुसार सुबह 09 बजकर 04 मिनट 50 सेकंड पर महसूस किए गए इन झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मापी गई।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में रहा। इसका अक्षांश 28.63°N और देशांतर 76.68°E दर्ज किया गया, जबकि भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर मापी गई है।
भूकंप के झटके दिल्ली के अलावा नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद सहित हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में भी महसूस किए गए। झटकों के बाद कई लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि अभी तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।
दिल्ली-NCR संवेदनशील जोन में
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से जोन-4 में आता है, जिसे भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। यहां अक्सर हल्के से मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के झटके पृथ्वी के भीतर जमी हुई ऊर्जा को धीरे-धीरे मुक्त करते हैं, जिससे भविष्य में बड़े और विनाशकारी भूकंपों की संभावना कुछ हद तक कम हो सकती है।
देश के अन्य हिस्सों में भी भूकंपीय हलचल
दिल्ली-एनसीआर से पहले इस सप्ताह देश के अन्य हिस्सों में भी भूकंप दर्ज किए गए। मंगलवार को असम के कार्बी आंगलोंग जिले में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया था। यह भूकंप सुबह 9:22 बजे महसूस किया गया, जिसकी गहराई 25 किलोमीटर थी और केंद्र 26.51°N तथा 93.15°E पर स्थित था।
वहीं, सोमवार को अंडमान सागर में 4.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसकी गहराई 10 किलोमीटर रही। रविवार को भी इसी क्षेत्र में समान तीव्रता और गहराई का भूकंप आया था, जिससे वहां के नागरिकों में चिंता देखी गई।
भूवैज्ञानिकों की चेतावनी
भूवैज्ञानिकों का कहना है कि इन घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। लगातार हो रही भूकंपीय गतिविधियां भविष्य में बड़े झटकों की चेतावनी हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहें और आपदा प्रबंधन से जुड़े दिशानिर्देशों का पालन करें।
मंत्री जी, आप मासूम चेहरा बनाकर भाजपा नेताओं को बरगला सकते है, जनता को नहीं।
रायपुर/ बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा ने छत्तीसगढ़ राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार पर मेडिकल घोटाले का आरोप लगाया था। उनके नेताओं ने जोर-शोर से हर चुनावी मंच पर यह बात कही थी। जिससे प्रभावित होकर जनता ने भाजपा का साथ दिया और उसे सत्ता पर ले आई। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री बने श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने अधीनस्थ विभाग CGMSC यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की एमडी पद्मिनी भोई के माध्यम से आरोपी घोटालेबाज कंपनी मोक्षित कॉरपोरेशन को लगभग 50 करोड़ का भुगतान करा दिया। यह बात जनता के लिए बेहद अचंभित करने वाली थी। सीधे तौर पर जनता से धोखाधड़ी थी। क्योंकि चुनावी बातें हवा हो गई और घोटालेबाजों से उनकी गलबहियां हो गई थी।
क्यों न मंत्री और एमडी को घोटाले में सह अभियुक्त माना जाए?
मेडिकल घोटाले की दुहाई देकर, दोषी मंत्री,ठेकेदार और अधिकारियों को जेल में डालने का वादा लेकर सत्ता में आई भाजपा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और एमडी को घोटाले में सह अभियुक्त अब जनता मान रही है।उनके द्वारा घोटाले के आरोपी मोक्षित कारपोरेशन को किया गया भुगतान बेईमानी का प्रत्यक्ष सबूत प्रस्तुत कर रहा है। टीवी पर मंत्री जी बड़ी मासूमियत के साथ ईमानदारी की बात करते हैं। परंतु जितनी बेईमानी उनके रहते स्वास्थ्य विभाग में हुई है और हो रही है उतनी कभी नहीं हुई। आए दिन अखबारों की सुर्खिया यह बात चीख चीख कर कहती है।
जांच EOW को सौंपने में क्यों लगे डेढ़ साल?
आरोपों से घिरे स्वास्थ्य मंत्री कहते है मेडिकल घोटाले की जांच हम ही करा रहे है इसलिए हम पर लग रहे आरोप मिथ्या है। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद जनता की जानकारी के लिए मैं बता दूं कि बीते छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव होने के बाद भाजपा सरकार के पहले विधानसभा सत्र से लेकर छठवें सत्र तक भाजपा के ही विधायक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री विधायक राजेश मूणत, राजेश अग्रवाल, सुशांत शुक्ला ने कांग्रेस सरकार के दौरान हुए मेडिकल घोटाले में जांच नहीं कराये जाने को लेकर अपनी सरकार के ही स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जयसवाल को घेरा था। रीएजेंट सहित मेडिकल घोटाले से कई अहम सबूत हर विधानसभा सत्र में भाजपा विधायकों ने रखे थे। इस दौरान मीडिया ने भी प्राथमिकता के साथ मेडिकल घोटाले की खबरों को प्रकाशित किया था। राष्ट्रीय टीवी चैनलों में घंटे घंटे भर की खबर दिखाते हुए घोटालों की परते खोली थी। पर पता नहीं क्यों स्वास्थ्य मंत्री जांच में आना कानी करते रहे। अंततः डेढ़ साल बाद मेडिकल घोटाले की EOW से जांच की घोषणा की गई। आज देखिए इसी मेडिकल घोटाले में 5 कर्मचारी और एक व्यापारी जेल में है।
मुख्यमंत्री को करते रहे गुमराह!
पाठकों को जानकारी देते हुए बता दूं की सरकार बनने के बाद बतौर पत्रकार मैने मुख्यमंत्री जी से भेंट के दौरान ढाई हजार करोड़ के रीएजेंट सहित संपूर्ण मेडिकल घोटाले की संक्षिप्त जानकारी उन्हें दी थी। जिस पर उन्होंने कहा था कि हमारे भी संज्ञान में ये सब है मंत्रिमंडल गठन के बाद निश्चित रूप से हम कार्रवाई करेंगे। मेरी जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने सीजी एमएससी की गड़बड़ियों के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। परंतु संगठन के एक बड़े नेता का हस्तक्षेप ऐसा हुआ कि जांच टलता गया। परंतु जब संगठन के नेता जी को लगा कि वो टूलकिट बन रहे है तो उन्होंने भी हाथ खींच लिया। तब जाकर मेडिकल घोटाले की जांच प्रारंभ होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।