देश
आतंकी विचार और उससे सहानुभूति रखने वालों को बेनकाब करना होगा
दिल्ली/ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर कवि कुमार विश्वास ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा," धर्म पूछकर निरपराध पर्यटकों को गोली मारने वाले भी किसी मज़हब के पैरोकार हो सकते हैं? दुनिया को, देश को जागना होगा और आतंकवादी विचार और उसके अंदर-बाहर के समर्थकों, सहानुभूति रखने वालों को बेनक़ाब करना होगा। जिनके परिजनों की मृत्यु हुई है उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति। आतंकी भेड़ियों को चेतावनी कि कश्मीरी व भारतीय न झुके थे न झुकेंगे। बदला लिया जाएगा।"
हे ईश्वर, अगले जन्म में मुझे भेड़िया ही बनाना -मनोज मुंतशिर
मुंबई/जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर गीतकार व पटकथा लेखक मनोज मुंतशिर शुक्ला ने अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, "आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता, आतंकवादी हिंदू या मुसलमान नहीं, सिर्फ़ आतंकवादी होता है. हे ईश्वर, अगले जनम में मुझे भेड़िया बनाना ताकि मैं ऐसा कहने वाले बुद्धिजीवियों का मुँह नोच लूँ!"
एक्टर मनोज कुमार के निधन पर पीएम मोदी ने जताया शोक, कहा- ‘इंडियन सिनेमा के आइकन थे दिग्गज अभिनेता’
नई दिल्ली। दिग्गज एक्टर और भारत कुमार के नाम से मशहूर मनोज कुमार का निधन हो गया है। 87 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली। एक्टर लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे।
मनोज कुमार के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताया है। पीएम ने एक्स पर पोस्ट कर दिग्गज अभिनेता को श्रद्धांजलि दी। पीएम ने लिखा, “मनोज कुमार जी, वे भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें विशेष रूप से उनकी देशभक्ति के लिए याद किया जाता है, जो उनकी फिल्मों में भी झलकती थी। मनोज जी के काम ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रज्वलित किया और पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति।
वहीं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी पोस्ट कर दिग्गज अभिनेता और फिल्म निर्माता मनोज कुमार के निधन पर शोक जताया है। राजनाथ सिंह ने एक्स पर की गई अपनी पोस्ट में लिखा है, “श्री मनोज कुमार जी एक बहुमुखी अभिनेता थे, जिन्हें हमेशा देशभक्ति से भरपूर फ़िल्में बनाने के लिए याद किया जाएगा।
भारत के रक्षा मंत्री ने आगे लिखा कि ‘भारत कुमार’ के नाम से मशहूर, ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’ जैसी फ़िल्मों में उनके अविस्मरणीय अभिनय ने हमारी संस्कृति को समृद्ध किया है। उन्हें पीढ़ियों से लोगों का प्रिय बनाया है, उनकी सिनेमाई विरासत उनके कामों के ज़रिए ज़िंदा रहेगी। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं. ओम शांति।
मनोज कुमार का अंतिम संस्कार कल होगा
बता दें कि अभिनेता मनोज कुमार का पार्थिव शरीर आज अस्पताल में ही रखा जाएगा। मनोज कुमार के बेटे साथ है लेकिन कुछ करीबी परिजन विदेश में रहते हैं। आज विदेश से परिजन देर रात तक भारत लौट रहे हैं। मनोज कुमार की पत्नी की तबीयत भी खराब है और डॉक्टर उनके चेकअप के लिए घर पर मौजूद हैं। वहीं दिग्गज अभिनेता का अंतिम संस्कार 12 बजे विलेपार्ले में स्थित हिंदू शमशान भूमि पर होगा।
नम हुईं फैंस की आंखें
मनोज कुमार के निधन की खबर ने फैंस को गमगीन कर दिया है. सोशल मीडिया पर सभी अपने चहेते कलाकार को नम आंखों से विदाई दे रहे हैं। सेलेब्स ने भी दिग्गज एक्टर के निधन पर शोक जताया है. मनोज कुमार ने सहारा, चांद, हनीमून, पूरब और पश्चिम, नसीब, मेरी आवाज सुनो, नील कमल, उपकार, पत्थर के सनम, पिया मिलन की आस जैसी फिल्मों में काम किया था। वो नेशनल अवॉर्ड, पद्म श्री और दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित थे।
कैसा था मनोज कुमार का सफर?
मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 में पाकिस्तान में हुआ था। उनका असली नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी था। मनोज कुमार एबटाबाद (अब पाकिस्तान) में पैदा हुए थे। देश के बंटवारे के वक्त उनका परिवार दिल्ली आ गया था। बचपन से वो सिनेमा के दीवाने थे। फिल्में देखना उन्हें अच्छा लगता था। उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म शबनम में उनके किरदार मनोज कुमार के नाम पर अपना नाम रख लिया था।
एक्टर ने 1957 में फिल्म फैशन से एक्टिंग डेब्यू किया था. 1965 उनके करियर के लिए बड़ा गेमचेंजर था। इसी साल आई शहीद मूवी ने उनके करियर को माइलेज दी। बस इसके बाद उन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। रोल चाहे कैसा भी हो, वो उसमें पूरी तरह ढल जाते थे। मनोज कुमार की फिल्में ही हिट नहीं हुईं, बल्कि इसके गाने भी लोगों की जुबां पर चढ़े। उनकी उपकार मूवी का गाना ‘मेरे देश की धरती’ आज भी लोगों को याद है। मनोज कुमार को फिल्म ‘उपकार’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था।
राज्यसभा में पेश हुआ वक्फ बिल, रिजिजू ने पेश किया विधेयक
नई दिल्ली। वक्फ संशोधन विधेयक 2025 बुधवार को लोकसभा में पास होने के बाद अब राज्यसभा में पेश किया गया है. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) उच्च सदन में विधेयक पेश कर अपनी बात रख रहे हैं. इस दौरान किरेन रिजिजू ने कहा कि इस महत्वपूर्ण विधेयक को लेकर जब मैं सदन में आया हूं, कुछ बातें रखना चाहता हूं कि सदन की मर्यादा भी बनी रहे.
लोकसभा में चली 12 घंटे के चर्चा के बाद वक्फ संशोधन विधेयक बुधवार को पारित हो गया. इसके बाद गुरुवार को विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया है. चर्चा के दौरान किरेन रिजिजू ने कहा कि, कमिटी बनने से पहले लोगों ने कहा कि इसका कंसलटेशन जितना होना चाहिए था उतना नहीं है. हमने देश भर में जितने स्टेकहोल्डर से, वक्फ बोर्ड के ऑफिसर, धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से बातचीत करने के बाद संसद में पेश किया.
उन्होंने कहा, जेपीसी ने जो काम किया है, इससे ज्यादा व्यापक काम आजतक नहीं हुआ है. अलग अलग क्षेत्रों के लोगों ने अपनी बातों को रखा और 97 लाख से भी ज्यादा और छोटे पत्रों को मिलाकर एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने अपना ज्ञापन सौंपा है. किसी बिल को एक करोड़ से ज्यादा सुझाव मिलना ऐतिहासिक है. आज में कमेटी के हर मेंबर को धन्यवाद देना चाहता हूं. अंत में सभी बोलने वालों को भी धन्यवाद दूंगा. सदन में तो मंत्री के रूप में बोल रहा हूं. जो अच्छा काम करेगा, उसे तारीफ भी मिलेगी. जिनकी इच्छा के लिए कर रहा हूं, उनसे भी तारीफ मिलेगी.
राज्यसभा किस पार्टी के कितने सदस्य?
राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं. एनडीए के पास 125 सांसद हैं. इसमें से बीजेपी के 98, जेडी(यू) के चार, टीडीपी के दो, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तीन, शिवसेना का एक और आरएलडी का एक सांसद है. 245 सदस्यों वाले सदन में इस विधेयक को पारित कराने के लिए 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. एनडीए को भरोसा है कि उसे असम गण परिषद और तमिल मनिला कांग्रेस जैसी पार्टियों के साथ-साथ छह मनोनीत सदस्यों का समर्थन भी मिल जाएगा. ऐसे में यानी एनडीए के पास राज्यसभा में संख्याबल ज्यादा है.
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, दिल्ली का कमाल…सरकार का भरा खजाना, मार्च में 9.9 फीसदी बढ़ा GST कलेक्शन
मुंबई। GST के क्षेत्र में अच्छी खबर है. मार्च में ग्रॉस GST संग्रह 9.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो कि अब तक का दूसरा सबसे बड़ा संग्रह(GST Collection) है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू लेनदेन से GST राजस्व 8.8 प्रतिशत बढ़कर 1.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि आयातित वस्तुओं से प्राप्त राजस्व 13.56 प्रतिशत बढ़कर 46,919 करोड़ रुपये हो गया. सकल संग्रह में केंद्रीय जीएसटी का हिस्सा 38,145 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी का 49,891 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) का 95,853 करोड़ रुपये है. मार्च में उपकर संग्रह 12,253 करोड़ रुपये रहा, और कुल रिफंड 41 प्रतिशत बढ़कर 19,615 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
रिफंड समायोजित करने के बाद, मार्च 2025 में शुद्ध GST राजस्व 1.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. अप्रैल 2024 में जीएसटी संग्रह 2.10 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था. डेलॉयट इंडिया के साझेदार एम एस मणि ने बताया कि मार्च के लिए सकल जीएसटी संग्रह में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि व्यवसायों द्वारा वर्ष के अंत में बिक्री को बढ़ावा देने का परिणाम है. उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना उत्साहजनक है कि यह केवल एक बार की घटना नहीं है, क्योंकि जीएसटी संग्रह में हर महीने लगातार वृद्धि हो रही है, जो वार्षिक सकल जीएसटी संग्रह में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है.

पूरे साल कितना रहा कलेक्शन
अप्रैल से मार्च के बीच का सकल जीएसटी संग्रह 22.08 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. मणि ने बताया कि प्रमुख विनिर्माण और उपभोक्ता राज्यों में जीएसटी संग्रह की वृद्धि दर में काफी भिन्नता देखी गई है. महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों ने 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है, जबकि गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में वृद्धि एक प्रतिशत से लेकर सात प्रतिशत के बीच रही है, जो मार्च महीने के लिए असामान्य है. इन राज्यों में क्षेत्रीय वृद्धि और अनुपालन दरों का विश्लेषण करके इसके कारणों को समझना आवश्यक है.
केपीएमजी इंडिया के साझेदार और अप्रत्यक्ष कर के प्रमुख अभिषेक जैन ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में कर संग्रह में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि आर्थिक स्थिरता और कंपनियों के मजबूत कर अनुपालन का संकेत है. जैन ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष के अंत में समायोजन और समाधान की प्रक्रिया जारी रहने के कारण, हम अगले संग्रह में मासिक वृद्धि में और सुधार की उम्मीद कर सकते हैं.
जनवरी में हुआ इतना कलेक्शन
सरकार का जीएसटी संग्रह जनवरी 2024 में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 12.3 प्रतिशत बढ़ा. इस महीने केंद्रीय जीएसटी संग्रह 36,100 करोड़ रुपये और राज्य जीएसटी संग्रह 44,900 करोड़ रुपये रहा. दिसंबर 2023 में जीएसटी संग्रह 1.76 लाख करोड़ रुपये था, जो वार्षिक आधार पर 7.3 प्रतिशत अधिक था. जनवरी का यह आंकड़ा अब तक के सबसे उच्चतम जीएसटी संग्रह से थोड़ा कम है, जबकि अप्रैल 2024 में यह 2 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया था.
2017 में लागू किया गया था GST
भारत में पहली जुलाई 2017 को पुरानी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के स्थान पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया. इसे स्वतंत्रता के बाद का सबसे महत्वपूर्ण कर सुधार माना जाता है. केंद्र सरकार के अनुसार, जीएसटी के लागू होने से आज से सात वर्ष पूर्व, देशवासियों पर कर का बोझ कम करने में सहायता मिली है.
GST को आसान भाषा में समझें
जीएसटी का पूरा नाम गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स है. इसके लागू होने के बाद विभिन्न प्रकार के करों को समाप्त कर दिया गया. इसमें दो श्रेणियों के कर शामिल हैं: डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स. पहले राज्यों और केंद्र सरकार के कर अलग-अलग होते थे, लेकिन जीएसटी के आगमन से इन्हें एकीकृत कर दिया गया है.
भारत निर्वाचन आयोग का राजनीतिक दलों के साथ सबसे बड़ा सहभागिता अभियान
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा देश भर में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ अनेक संरचनाबद्ध सहभागिता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। 25 दिनों की अवधि में और 31 मार्च 2025 तक, कुल 4,719 बैठकें आयोजित की गई, जिनमें सीईओ द्वारा 40, डीईओ द्वारा 800 और ईआरओ द्वारा 3,879 बैठकों का आयोजन किया गया। इनमें देश-भर से राजनीतिक दलों के 28,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
ये बैठकें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी द्वारा 4-5 मार्च, 2025 को आईआईआईडीईएम, नई दिल्ली में आयोजित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान जारी निदेशों के अनुसरण में आयोजित की गईं।
इन बैठकों का उद्देश्य संबंधित सक्षम प्राधिकारी यानी ईआरओ या डीईओ या सीईओ द्वारा किसी भी लंबित मुद्दे का लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960, निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 में निर्धारित कानूनी ढांचे और आयोग द्वारा समय-समय पर जारी मैनुअल, दिशा-निर्देशों और अनुदेशों के भीतर समाधान करना है। सभी राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों के सीईओ से आगे और मूल्यांकन किए जाने के लिए की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है और मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर कोई भी मुद्दा यदि अनसुलझा रह जाता है, तो आयोग द्वारा उस पर विचार किया जाएगा।
राजनीतिक दलों द्वारा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों, जिलों और राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों में आयोजित इन बैठकों में सक्रिय और उत्साहपूर्ण सहभागिता करके इनका स्वागत किया गया है। देश-भर से प्राप्त इन बैठकों की तस्वीरें आयोग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर देखी जा सकती हैं: https://x.com/ECISVEEP?refsrc=twsrc%5E.google%7Ctwcamp%5Eserp%7Ctwgr%5Eauthor
नितिन गडकरी ने बनाया नया नियम; हर दोपहिया वाहन के साथ दो ISI हेलमेट देना अनिवार्य
दिल्ली। भारत में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह घोषणा की है कि अब हर दोपहिया वाहन के साथ दो ISI प्रमाणित हेलमेट प्रदान करना अनिवार्य होगा. नई दिल्ली में आयोजित ऑटो समिट के दौरान इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी गई, जिसे टू-व्हीलर हेलमेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का पूरा समर्थन प्राप्त है. गडकरी का यह कठोर निर्देश उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से प्रतीक्षित कदम माना जा रहा है, जो सड़क पर होने वाली अनावश्यक मौतों को कम करने में सहायक होगा.
टू-व्हीलर हेलमेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (THMA) ने हाल ही में ISI सर्टिफाइड हेलमेट की अनिवार्यता के लिए उठाए गए सक्रिय कदमों की सराहना की है. भारत में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति अत्यंत गंभीर है, जहां हर वर्ष 4,80,000 से अधिक दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग 1,88,000 लोगों की जान चली जाती है. इनमें से 66% मृतक 18 से 45 वर्ष की आयु के होते हैं. विशेष रूप से, दोपहिया वाहनों से संबंधित हादसों में हर साल 69,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवाते हैं, और इनमें से 50% मौतें हेलमेट न पहनने के कारण होती हैं.
इस पर THMA के अध्यक्ष राजीव कपूर ने कहा कि यह केवल एक नियम नहीं, बल्कि देश की आवश्यकता है. जो परिवार सड़क दुर्घटनाओं में अपने प्रियजनों को खो चुके हैं, उनके लिए यह निर्णय आशा की एक किरण है, जिससे ऐसी घटनाओं को रोकने की संभावना बढ़ेगी. उद्योग जगत ने यह स्पष्ट किया है कि दोपहिया वाहनों की सवारी अब जोखिम भरी नहीं होनी चाहिए. यदि राइडर और पीछे बैठने वाले दोनों के पास ISI सर्टिफाइड हेलमेट होगा, तो यात्रा सुरक्षित और जिम्मेदार बनेगी.
हेलमेट निर्माताओं के संघ ने यह सुनिश्चित किया है कि वे ISI मानक वाले हेलमेट के उत्पादन को बढ़ाएंगे और देशभर में उनकी उपलब्धता को सुनिश्चित करेंगे. उन्होंने गडकरी की इस पहल को सड़क सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानते हुए कहा कि यह भारत में सुरक्षित और समझदारी से दोपहिया यात्रा के एक नए युग की शुरुआत करेगा, क्योंकि हर हेलमेट के पीछे एक अनमोल जीवन छिपा होता है.
अब 2000 रुपए का चालान
भारत सरकार ने 1998 के मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन किया है, जिसके तहत टू-व्हीलर चलाने वालों के लिए हेलमेट पहनने के नियम सख्त कर दिए गए हैं. यदि कोई बाइक सवार हेलमेट नहीं पहनता या उसे सही तरीके से नहीं पहनता है, तो उसे 2,000 रुपए तक का जुर्माना भरना होगा. उदाहरण के लिए, यदि हेलमेट पहना गया है लेकिन वह खुला है, तो इस पर 1,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. इसी तरह, यदि हेलमेट पहना गया है लेकिन सिर से बांधने वाली पट्टी को सही तरीके से नहीं बांधा गया है, तो भी 1,000 रुपए का जुर्माना लगेगा. इस प्रकार, हेलमेट को पूरी तरह से सही तरीके से पहनना अनिवार्य है, अन्यथा 2,000 रुपए का चालान भुगतना पड़ेगा.
केंद्रीय कर्मचारियों को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, महंगाई भत्ते में 2% बढ़ोतरी की, जानें कितनी बढ़ जाएगी सैलरी
नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों को मोदी सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। मोदी सरकार ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) में 2% की बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है। आज (शुक्रवार) को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इस पर मुहर लगी। इस बढ़ोतरी के साथ ही अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स का महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनर्स का महंगाई राहत (DR) 53 फीसदी से बढ़कर 55 फीसदी हो जाएगी।
केंद्रीय कर्मचारियों को आखिरी बार बढ़ोतरी जुलाई 2024 में हुई थी, जब महंगाई भत्ता 50 फीसदी से बढ़ाकर 53 फीसदी कर दिया गया था। अब 2 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 2 फीसदी का और महंगाई भत्ता जोड़ा जाएगा। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2025 से प्रभावी मानी जाएगी. महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी से करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा।
78 महीने में पहली बार ऐसा
पिछले कुछ साल में महंगाई भत्ते में 3 से 4 फीसदी के हिसाब से ही महंगाई भत्ता बढ़ा था, लेकिन 78 महीने यानी 6.6 साल में पहली बार ऐसा हो रहा है कि डीए में सिर्फ 2 फीसदी का इजाफा किया गया है। इससे पहले साल 2018 में 2 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता बढ़ा था। उसके बाद से लगातार 3 या 4 फीसदी का ही इजाफा देखने को मिला है।
- अगर किसी की बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है तो 53% डीए के हिसाब से उसे ₹26,500 का महंगाई भत्ता मिलता होगा, लेकिन 55 फीसदी के डीए के हिसाब से उसे ₹27,500 का डीए मिलेगा। यानी कर्मचारियों की सैलरी में 1 हजार रुपये का इजाफा होगा।
- वहीं 70 हजार रुपये की बेसिक सैलरी पर अभी महंगाई भत्ता ₹37,100 मिलता होगा, लेकिन 55 फीसदी डीए के हिसाब से ₹38,500 महंगाई भत्ता मिलेगा. यानी ऐसे कर्मचारियों की सैलरी में ₹1,400 की बढ़ोतरी होगी।
- इसी तरह, ₹1,00,000 बेसिक सैलरी वालों को 53 प्रतिशत डीए के हिसाब से ₹53,000 महंगाई भत्ता मिलता होगा, लेकिन अब 55 फीसदी के हिसाब से 55 हजार रुपये का डीए मिलेगा. यानी कर्मचारियों की सैलरी में 2 हजार रुपये मंथली की बढ़ोतरी होगी।
सीबीआई ने छत्तीसगढ़ समेत दिल्ली, कोलकाता, भोपाल में 60 जगहों पर है मारा छापा, कई अहम दस्तावेज जब्त, जांच जारी…
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने महादेव बुक ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाले की जांच में आज केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि भोपाल, कोलकाता और दिल्ली में 60 स्थानों पर छापेमारी की है. इनमें संदेह के दायरे में आए राजनेताओं, वरिष्ठ नौकरशाहों, पुलिस अधिकारियों और प्रमुख पदाधिकारियों से जुड़े परिसर शामिल हैं.
सीबीआई की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि छापेमारी महादेव बुक के अवैध संचालन से संबंधित है, जो रवि उप्पल और सौरभ चंद्रकर द्वारा प्रचारित एक ऑनलाइन सट्टेबाजी मंच है, जो दोनों वर्तमान में दुबई में स्थित हैं. जांच से पता चला है कि प्रमोटरों ने कथित तौर पर अपने अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के सुचारू और निर्बाध कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए लोक सेवकों को “सुरक्षा धन” के रूप में पर्याप्त मात्रा में भुगतान किया है.
प्रारंभ में आर्थिक अपराध विंग (EOW) रायपुर द्वारा पंजीकृत, इस मामले को बाद में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वरिष्ठ सार्वजनिक अधिकारियों और अन्य आरोपी व्यक्तियों की भूमिका की व्यापक जांच के लिए CBI को स्थानांतरित कर दिया गया. डिजिटल और डॉक्यूमेंट्री सबूतों को बढ़ाने वाले खोजों के दौरान पाया गया और जब्त किया गया है. इसके साथ ही खोज जारी है.
छत्तीसगढ़ में दो दर्जन ठिकानों पर छापेमारी
CBI की टीम ने आज तड़के रायपुर, भिलाई समेत दो दर्जन से अधिक स्थानों पर छापेमारी की. जिन प्रमुख लोगों के ठिकानों पर कार्रवाई हुई, उनमें पूर्व सीएम भूपेश बघेल और उनके राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा, सीएम सचिवालय में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया, विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व IAS अनिल टुटेजा, IPS अधिकारी आनंद छाबड़ा, अभिषेक पल्लव, आरिफ शेख, प्रशांत अग्रवाल, एडिशनल एसपी अभिषेक महेश्वरी, एडिशनल एसपी संजय ध्रुव, KPS ग्रुप के निशांत त्रिपाठी, पूर्व OSD मनीष बंछोर व आशीष वर्मा, निरीक्षक गिरीश तिवारी समेत अन्य के ठिकानों पर छापे की खबर है.
ASP अभिषेक महेश्वरी का घर सील
राजनांदगांव के VIP कॉलोनी सन सिटी में स्थित बघेल सरकार में प्रभावशाली अधिकारी रहे अतिरिक्त पुलिस अधिकारी अभिषेक महेश्वरी के घर पर CBI की टीम पहुंची, जहां उनके घर को सील कर दिया गया है. सीबीआई की टीम जब महेश्वरी के घर पहुंची तो वहां वे मौजूद नहीं थे.

चैतन्य बघेल से की पूछताछ
भिलाई स्थित आवास में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल से टीम पूछताछ कर रही है. वहीं बघेल केंद्रीय सुरक्षा बल की कड़ी निगरानी के बीच परिवार के साथ अपने निवास पर मौजूद हैं. वहीं बघेल सरकार में सीएम सचिवालय में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया के भिलाई स्थित घर पर सीबीआई की टीम छान-बीन कर रही है. कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज घर से बरामद किए जाने की चर्चा है.
जानिए पूरा मामला
छत्तीसगढ़ सरकार ने अगस्त 2024 में महादेव बेटिंग एप घोटाले की जांच आधिकारिक तौर पर सीबीआई को सौंप दी थी. ईडी ने पिछले साल जनवरी में इस पूरे मामले की जांच शुरू की थी, जिसके बाद इसका जिम्मा एसीबी और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को भी सौंप दिया गया था. इस साल लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले 4 मार्च को एसीबी द्वारा दायर चार्जशीट में भूपेश बघेल को आरोपी बनाया गया था. भूपेश बघेल के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात और जालसाजी से संबंधित विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. कई अन्य भी आरोपी बनाए गए थे.
NSUI ने दिल्ली में किया प्रदर्शन, पेपर लीक, बेरोजगारी समेत कई मुद्दों को लेकर उठाई आवाज, राष्ट्रीय सचिव ने कहा – छात्रों के साथ अन्याय कर रही सरकार
नई दिल्ली/रायपुर। देश में बढ़ती बेरोजगारी समेत कई मुद्दों को लेकर नई दिल्ली में NSUI ने संसद घेराव आंदोलन किया, जिसमें छत्तीसगढ़ समेत देशभर के हजारों NSUI कार्यकर्ता शामिल हुए. इस आंदोलन में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए और आएसएस के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी. NSUI नेताओं ने भी NEP 2020, पेपर लीक की समस्या, बढ़ती बेरोजगारी, शिक्षा का भगवाकरण और UGC के नए नियमों के खिलाफ आवाज उठाया. प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी एवं दिल्ली प्रभारी हनी बग्गा पर दिल्ली पुलिस ने गैर जमानती धाराएं लगाकर FIR दर्ज किया और दोनों नेताओं को पुलिस ने कल रात ही गिरफ्तार कर लिया, जिनकी आज जमानत पर रिहाई की गई.
राष्ट्रीय सचिव दिल्ली प्रभारी हनी बग्गा ने रिहाई के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि कल हमने छात्रों के हित पर देशव्यापी संसद घेराव आंदोलन दिल्ली की जंतर मंतर में किया था. हमारे नेता राहुल गांधी एवं हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी के नेतृत्व में इस आंदोलन को किया गया. जिस प्रकार केंद्र की मोदी सरकार छात्रों के साथ अन्याय कर रही है उन्हें शिक्षा से वंचित करने का कार्य कर रही है, इसे लेकर राहुल गांधी ने भी कहा कि अब विश्वविद्यालय में लोकतंत्र खत्म हो गया है. RSS की विचारधारा वाली केंद्र की सरकार लोगों को ना शिक्षा दे पा रही है, ना रोजगार. इन्हीं सभी बातों को हमारे नेताओं ने कार्यक्रम में दोहराया.


आने वाले समय में करेंगे उग्र आंदोलन : बग्गा
बग्गा ने कहा, आंदोलन में हजारों छात्रों की संख्या देखकर केंद्र की सरकार और दिल्ली पुलिस डर गई, जिस कारण पुलिस ने राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी और मेरे ऊपर गैर जमानती धारा लगाकर हमारी आवाज को कुचलने का काम किया है. केंद्र की सरकार एवं दिल्ली पुलिस कितने भी मुकदमे दर्ज करना है कर लीजिए पर यह आंदोलन और यह आवाज नहीं रुकेगी. आने वाले समय में हम और उग्र तरीके के साथ आंदोलन करेंगे.
वोटर आईडी से आधार कार्ड होगा लिंक, तकनीकी विशेषज्ञों की जल्द होगी बैठक
नई दिल्ली। देश के निर्वाचन आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ आज नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में केंद्रीय गृह सचिव, सचिव विधायी विभाग, सचिव मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और सीईओ, UIDAI और निर्वाचन आयोग के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ बैठक की।
देश के संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, मतदान का अधिकार केवल भारत के नागरिक को दिया जा सकता है; आधार कार्ड व्यक्ति की पहचान स्थापित करता है।
इसलिए यह निर्णय लिया गया कि मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने का काम संविधान के अनुच्छेद 326, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4), 23(5) और 23(6) के प्रावधानों के अनुसार तथा WP (Civil) संख्या 177/2023 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप ही किया जाएगा।
तदनुसार UIDAI और निर्वाचन आयोग के तकनीकी विशेषज्ञों के बीच तकनीकी परामर्श जल्द ही शुरू होने वाला है।
दिल्ली में पंजाब कांग्रेस की बैठक: नवजोत सिंह सिद्धू समेत कई नेता रहे नदारद, ED की कार्रवाई पर भूपेश बघेल ने कहा- मैं जिस राज्य में जाता हूं वहां…
नई दिल्ली। पंजाब के नए प्रभारी भूपेश बघेल ने गुरुवार (13 मार्च) को दिल्ली में पंजाब कांग्रेस की बैठक ली. इस मीटिंग से नवजोत सिंह सिद्धू समेत कई कांग्रेसी नेता नदारद रहे. बैठक में कांग्रेसी नेताओं के शामिल नहीं होने पर छत्तीसगढ़ के पूर्व CM बघेल ने कहा ” इस मीटिंग की सबको जानकारी थी. सिद्धू नहीं आए लेकिन अन्य कई लोग भी नहीं आ पाए इसमें कुछ अलग और नया नहीं है.”
इस दौरान उन्होंने बीतें दिनों उनके घर में की गई ED की छापेमारी पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. पूर्व सीएम बघेल ने कहा मैं जब-जब जिस राज्य में जाता हूं, उसके बाद छापे पड़ते हैं. मैं छापे से नहीं डरता हूं. उन्होंने आगे कहा, सबसे ज्यादा छापे छत्तीसगढ़ में पड़े हैं. अब मैं पंजाब जाना शुरू किया तो फिर छापे पड़े.
पंजाब कांग्रेस को लेकर दिल्ली में चल रही बैठक खत्म हो गई है. पजांब कांग्रेस के नए प्रभारी भूपेश बघेल ने संगठन को मजबूत करने मीटिंग ली. बैठक को लेकर कहा कि संगठन को मजबूत करने का यह साल है, पार्टी ने इस बारे में निर्देश दिया है. उन्होंने दावा किया है पंजाब में कांग्रेस मजबूत है. उन्होंने कहा, कि राज्य में माइक्रो लेवल पर कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने की जरूरत है. जल्द ही दूसरी मीटिंग होगी और आगे का एजेंडा तय होगा.
आम आदमी पार्टी में मची है भगदड़
प्रभारी भूपेश बघेल से जब पूछा गया कि कुछ दिनों पहले कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पंजाब में AAP विधायक कांग्रेस के संपर्क में है, उस पर क्या कुछ रणनीति बनी? इस सवाल पर उन्होंने कहा, ”आम आदमी पार्टी में भगदड़ मची है. पंजाब में आम आदमी पार्टी की नाव डूबने वाली है लेकिन कब तक डूबेगी पता नहीं.”
भारतीय निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को लिखा पत्र, चुनाव प्रक्रिया को और सुदृढ़ बनाने पार्टी अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं को किया आमंत्रित
रायपुर। भारतीय निर्वाचन आयोग ने सभी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों से 30 अप्रैल 2025 तक उन किसी भी अनसुलझे मुद्दों पर सुझाव मांगे हैं, जो संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) या मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के स्तर पर लंबित हैं। राजनीतिक दलों को आज जारी एक व्यक्तिगत पत्र में, आयोग ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि पार्टी अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ परस्पर सहमति से सुविधाजनक समय पर बातचीत की जाएगी, जिससे स्थापित विधिक प्रावधानों के अनुरूप चुनावी प्रक्रियाओं को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
इससे पहले, गत सप्ताह आयोजित निर्वाचन आयोग के एक सम्मेलन में, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिया था कि वे राजनीतिक दलों के साथ नियमित संवाद करें, उन बैठकों में प्राप्त सुझावों का समाधान पूर्व निर्धारित विधिक ढांचे के तहत करें और 31 मार्च 2025 तक आयोग को कार्यवाही रिपोर्ट प्रस्तुत करें। आयोग ने राजनीतिक दलों से इस विकेंद्रीकृत संवाद प्रक्रिया का सक्रिय रूप से उपयोग करने का भी आग्रह किया। राजनीतिक दल, 28 प्रमुख हितधारकों में से एक हैं, जिन्हें संविधान और वैधानिक ढांचे के तहत आयोग द्वारा चुनावी प्रक्रियाओं के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए चिह्नित किया गया है।
आयोग ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951; निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960; निर्वाचन संचालन नियम, 1961; माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश; तथा भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए दिशा-निर्देश, नियमावली और हैंडबुक (जो निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं) एक विकेंद्रीकृत, मजबूत और पारदर्शी विधिक ढांचे की स्थापना करते हैं, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का सफल आयोजन सुनिश्चित हो सके।
1 अरब भारतीयों के पास खर्च करने के लिए पैसे नहीं, अमीर होते जा रहे और अमीर, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
रिपोर्ट बताती है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता वर्ग का विस्तार उतना नहीं हो रहा, जितना उसकी खरीदने की क्षमता बढ़ रही है. इसका मतलब है कि संपन्न लोगों की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा, बल्कि जो पहले से अमीर हैं, वे और अमीर हो रहे हैं.
भारत की आबादी करीब 140 करोड़ है, लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश के एक अरब लोग ऐसे हैं जिनके पास खर्च करने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं. यह स्थिति न केवल आर्थिक असमानता को उजागर करती है, बल्कि भारत के उपभोक्ता बाजार और विकास की दिशा पर भी गहरे सवाल उठाती है.
ब्लूम वेंचर्स की रिपोर्ट ने चौंकाया
वेंचर कैपिटल फर्म ब्लूम वेंचर्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वह उपभोक्ता वर्ग जो व्यवसाय मालिकों या स्टार्टअप्स के लिए संभावित बाजार हो सकता है, उसका आकार मेक्सिको की आबादी के बराबर यानी 13 से 14 करोड़ है. इसके अलावा, 30 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें "उभरता हुआ" या "आकांक्षी" वर्ग कहा जा सकता है. लेकिन ये लोग अभी खर्च करने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने हाल ही में खर्च शुरू किया है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है.रिपोर्ट बताती है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता वर्ग का विस्तार उतना नहीं हो रहा, जितना उसकी खरीदने की क्षमता बढ़ रही है. इसका मतलब है कि संपन्न लोगों की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा, बल्कि जो पहले से अमीर हैं, वे और अमीर हो रहे हैं.
प्रीमियमाइजेशन का बढ़ता चलन
यह असमानता देश के उपभोक्ता बाजार को नए रूप में ढाल रही है. अब ब्रांड सस्ते और बड़े पैमाने पर उपलब्ध उत्पादों के बजाय महंगे और प्रीमियम उत्पादों पर ध्यान दे रहे हैं, जो अमीर वर्ग की जरूरतों को पूरा करते हैं. इसका उदाहरण है महंगे घरों और प्रीमियम स्मार्टफोनों की बिक्री में उछाल, जबकि सस्ते मॉडल बाजार में संघर्ष कर रहे हैं.रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल आवास बाजार में सस्ते घरों की हिस्सेदारी अब केवल 18% रह गई है, जो पांच साल पहले 40% थी. दूसरी ओर, ब्रांडेड सामानों और 'अनुभव अर्थव्यवस्था' (एक्सपीरियंस इकोनॉमी) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. कोल्डप्ले और एड शीरान जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के कॉन्सर्ट के महंगे टिकट ऊंचे दामों पर बिक रहे हैं.
महामारी से पहले शुरू हुआ बदलाव
रिपोर्ट के सह-लेखक सजित पाई के अनुसार, जिन कंपनियों ने इस बदलते ट्रेंड को अपनाया, वे फल-फूल रही हैं. वहीं, जो कंपनियां बड़े पैमाने की जरूरतों पर केंद्रित रहीं या जिनके उत्पाद प्रीमियम ग्राहकों तक नहीं पहुंचे, वे बाजार में पिछड़ गईं.यह बदलाव कोविड महामारी के बाद की 'K' आकार की रिकवरी को भी दर्शाता है, जहां अमीरों की संपत्ति बढ़ी, लेकिन गरीबों की खरीदने की क्षमता और कम हुई. हालांकि, यह कोई नई बात नहीं है. यह एक दीर्घकालिक ढांचागत बदलाव है, जो महामारी से पहले ही शुरू हो चुका था.
बढ़ती आर्थिक असमानता
भारत में असमानता तेजी से बढ़ रही है. राष्ट्रीय आय में शीर्ष 10% लोगों की हिस्सेदारी 1990 में 34% थी, जो अब बढ़कर 57.7% हो गई है. वहीं, निचले 50% लोगों की हिस्सेदारी 22% से घटकर 15% रह गई है. हाल की उपभोग मंदी सिर्फ खरीद क्षमता की कमी से नहीं, बल्कि वित्तीय बचत में भारी गिरावट और कर्ज में बढ़ोतरी से भी जुड़ी है.भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आसान और असुरक्षित कर्ज पर सख्ती बरती है, जो महामारी के बाद तेजी से बढ़ा था. सजित पाई के अनुसार, उभरते वर्ग का ज्यादातर खर्च इन्हीं कर्जों पर निर्भर था, और इसे रोकने का असर उपभोग पर पड़ना तय है.
अल्पकालिक राहत, दीर्घकालिक चुनौतियां
अल्प अवधि में दो चीजें खर्च को बढ़ावा दे सकती हैं: रिकॉर्ड फसल उत्पादन से ग्रामीण मांग में तेजी और हालिया बजट में 12 अरब डॉलर की टैक्स छूट. लेकिन यह बदलाव बहुत बड़ा नहीं होगा. पाई का अनुमान है कि इससे जीडीपी में उपभोग आधारित हिस्से में आधा प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन लंबे समय तक चुनौतियां बनी रहेंगी.
मध्य वर्ग की बिगड़ती हालत
भारत का मध्य वर्ग हमेशा से उपभोक्ता मांग का मुख्य आधार रहा है. लेकिन मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में मध्य वर्ग की आय स्थिर रही है. 50% टैक्स देने वाले लोगों की तनख्वाह में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, जिससे महंगाई को जोड़ने पर उनकी वास्तविक आय आधी रह गई है.वित्तीय बोझ ने मध्य वर्ग की बचत को खत्म कर दिया है. RBI के मुताबिक, भारतीय परिवारों की कुल वित्तीय बचत 50 साल के न्यूनतम स्तर पर है. इससे मध्य वर्ग के खर्च से जुड़े उत्पादों और सेवाओं को आने वाले सालों में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
तकनीक और रोजगार का संकट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) धीरे-धीरे क्लर्क, सेक्रेटरी जैसे रोजमर्रा के कामों को अपने हाथ में ले रहा है. इससे शहरी सफेदपोश नौकरियां कम हो रही हैं. मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में सुपरवाइजरों की संख्या भी घट रही है.सरकार के हालिया इकोनॉमिक सर्वे में भी यह चिंता जाहिर की गई है. सर्वे के अनुसार, तकनीकी बदलाव से श्रमिक विस्थापन भारत जैसे सेवा-प्रधान देश के लिए खतरा है, जहां आईटी कार्यबल का बड़ा हिस्सा सस्ते सेवा क्षेत्र में काम करता है. इससे उपभोग में कमी और आर्थिक विकास पर गहरा असर पड़ सकता है.
दिल्ली की जीत पर PM मोदी की पहली प्रतिक्रिया, बोले- ये विकास और सुशासन की जीत
दिल्ली। दिल्ली की दिल में BJP की धमाकेदार वापसी हुई है. विधानसभा चुनाव में दिल्ली की जनता ने भाजपा को प्रंचड जीत दी है. अब तक सामने आए परिणामों के अनुसार बीजेपी 47 सीटों पर आगे चल रही है. भाजपा को मिली इस ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, विकास और सुशासन की जीत हुई. उन्होंने यह भी कहा कि हम दिल्ली के विकास में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे. यह गारंटी है.
दिल्ली में भाजपा ने आम आदमी पार्टी ने चारो खाने चित कर दिया है. 27 सालो बाद दिल्ली की सत्ता में बीजेपी की वापसी हो रही है. दिल्ली में मिले ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की जनता का आभार व्यक्त किया है.
पीएम मोदी ने कहा,, दिल्ली के अपने सभी भाई-बहनों को भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए मेरा वंदन और अभिनंदन! आपने जो भरपूर आशीर्वाद और स्नेह दिया है, उसके लिए आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत आभार. दिल्ली के चौतरफा विकास और यहां के लोगों का जीवन उत्तम बनाने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे, यह हमारी गारंटी है. इसके साथ ही हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि विकसित भारत के निर्माण में दिल्ली की अहम भूमिका हो.
प्रधानमंत्री ने दिल्ली बीजेपी कार्यकर्ताओं की जीत की बधाई दी. उन्होंने कहा, अपने सभी कार्यकर्ताओं पर बहुत गर्व है, जिन्होंने इस प्रचंड जनादेश के लिए दिन-रात एक कर दिया. अब हम और भी अधिक मजबूती से अपने दिल्लीवासियों की सेवा में समर्पित रहेंगे.

‘जनता का फैसला स्वीकार, BJP को बधाई…’ दिल्ली के चुनाव नतीजों पर अरविंद केजरीवाल ने दी पहली प्रतिक्रिया
दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी (BJP) से मिली शिकस्त पर अरविंद केजरीवाल की पहली प्रतिक्रिया दी है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमें जनता का फैसला स्वीकार है। बीजेपी को इस जीत पर बधाई। जिस आशा के साथ जनता को उन्हें बहुमत दिया है उसकी उम्मीदों पर वो खरा उतरेंगे। हम जनता के सुख-दुख में काम आते रहेंगे।
अरविंद केजरीवाल ने वीडियो मैसेज जारी करते हुए कहा, “हमने पिछले 10 सालों में जनता ने मौका दिया। हमने बहुत सारे काम किए। शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में, पानी के क्षेत्र में, बिजली के क्षेत्र में और भी अलग-अलग तरीके से लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कोशिश की।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर को हमने सुधारने की कोशिश की. अब जो जनता ने हमें निर्णय दिया है, हम न केवल एक कंस्ट्रक्टिव अपोजिशन का रोल निभाएंगे बल्कि हम समाज सेवा, जनता के सुख-दुख में काम आना, व्यक्तिगत तौर पर जिसको भी जरूरत होगी हम लोगों के सुख-दुख में हमेशा काम आएंगे। क्योंकि हम राजनीति में कोई सत्ता के लिए नहीं आ।
उन्होंने कहा कि हमें पिछले दस साल में जनता ने जो मौका दिया है, हमने बहुत काम किया है. शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी के क्षेत्र में बहुत काम किया है। हमने अलग-अलग तरीके से लोगों को राहत पहुंचाने की कोशिश की है। दिल्ली के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार करने की कोशिश की है। केजरीवाल ने कहा कि हम लोगों के सुख-दुख में हमेशा काम आएंगे क्योंकि हम राजनीति में सत्ता के लिए नहीं आए हैं। हम राजनीति को एक जरिया मानते हैं, जिसके जरिए हम जनता की सेवा कर सकें। हम केवल एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएंगे बल्कि समाज सेवा भी करते रहेंगे। हमें जनता के सुख-दुख में इसी तरह काम आना है।
अरविंद केजरीवाल की हुई हार, दिल्ली चुनाव में बीजेपी के प्रवेश वर्मा ने दी करारी शिकस्त
दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम से संबंधित इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली चुनाव में आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की हार हुई है। नई दिल्ली विधानसभा सीट से बीजेपी के प्रवेश वर्मा ने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को 3,182 वोटों से करारी शिकस्त दी है। केजरीवाल को हराने वाले भाजपा उम्मीदवार प्रवेश वर्मा अमित शाह से मिलने पहुंचे।
बता दें कि दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा की वापसी हो रही है। 4 घंटे की मतगणना के बाद चुनाव आयोग के आंकड़ों में 70 सीटों में से भाजपा 48 और आम आदमी पार्टी (AAP) 22 सीटों पर आगे चल रही है। आतिशी, सत्येंद्र जैन, सोमनाथ भारती, सौरभ भारद्वाज, अमानतुल्लाह खान और अवध ओझा पीछे चल रहे हैं।
भाजपा के वोट शेयर में 9% से ज्यादा का इजाफा
भाजपा ने पिछले चुनाव (2020) के मुकाबले वोट शेयर में 9% से ज्यादा का इजाफा हुआ। वहीं, AAP को 10% से ज्यादा का नुकसान हुआ है। कांग्रेस को भले ही एक सीट मिलती नहीं दिख रही, लेकिन वोट शेयर 2% बढ़ाने में कामयाब रही। भाजपा की 40 सीट बढ़ीं, आप की 40 सीट घंटी भाजपा की पिछले चुनाव (2020) के मुकाबले 40 सीटें बढ़ीं। वहीं, AAP को 40 सीटों का नुकसान हुआ है। कांग्रेस इस बार भी खाली हाथ रहीं। एक भी सीट नहीं जीत सकी।
AP दफ्तर में अंदर से लगा ताला
दिल्ली चुनाव में AAP को निराशा हार हाथ लगी है। AAP ने अपने पार्टी कार्यालय में प्रवेश पर रोक लगा दी है और अंदर से ताला लगा दिया है। सिर्फ कुछ पार्टी पदाधिकारियों को ही अंदर जाने की अनुमति है। जबकि मीडियाकर्मियों को प्रवेश करने से रोक दिया है।
दिल्ली की 9 हॉट सीटें
